JharkhandGK
झारखण्ड की कितने प्रतिशत आबादी कृषि कार्य में लगी हुई है?
- 76.63
- 70.76
- 65.51
- 60
Explanation:
- झारखण्ड की 60% आबादी कृषि कार्य में लगी हुई है।
- बजट 2019-20 के अनुसार, राज्य की कुल जनसंख्या का 75% कृषि क्षेत्र से जुड़ा है।
- झारखण्ड एक कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ अधिकांश जनसंख्या की आजीविका कृषि पर निर्भर है।
- महत्वपूर्ण: राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 47.69% (38 लाख हेक्टेयर) कृषि योग्य भूमि है।
झारखण्ड में कृषि कार्य में कितने प्रतिशत भूमि का उपयोग होता है?
- 23 %
- 32 %
- 42 %
- 20 %
Explanation:
- झारखण्ड में 23% भूमि पर कृषि कार्य किया जाता है।
- राज्य में कुल कृषि योग्य भूमि 38 लाख हेक्टेयर है, जो कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 47.69% है।
- आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2022-23 के अनुसार राज्य में शुद्ध बोया गया क्षेत्र 17% है।
- महत्वपूर्ण: राज्य में 12.77% भूमि पर ही सिंचाई सुविधा उपलब्ध है, शेष असिंचित है।
वर्तमान में झारखण्ड में कृषि श्रमिकों का प्रतिशत कितना है?
- 39.52%
- 45%
- 40%
- 30.10%
Explanation:
- वर्तमान में झारखण्ड में कृषि श्रमिकों का प्रतिशत 45% है।
- राज्य की 75% जनसंख्या कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में कार्यरत है।
- 2016-17 में सकल राज्य मूल्य वृद्धि (GSVA) में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रक का योगदान 14.97% था।
जूट की भांति झारखण्ड राज्य में उत्पादित रेशे को क्या कहा जाता है?
- पटसन
- सनई
- मेस्टा
- इनमें कोई नहीं
Explanation:
- झारखण्ड राज्य में जूट की ही भांति रेशेदार फसल के रूप में मेस्टा का उत्पादन किया जाता है।
- मेस्टा एक रेशेदार फसल है, जिसका उपयोग रस्सी, बोरी आदि बनाने में किया जाता है।
- यह झारखण्ड की प्रमुख गैर-पारंपरिक फसलों में से एक है।
झारखण्ड राज्य में कृषि कार्य करने वाला जनसंख्या का प्रतिशत क्या है?
- 95 %
- 65 %
- 60 %
- 80 %
Explanation:
- झारखण्ड राज्य में कृषि कार्य करने वाली जनसंख्या का प्रतिशत 60% है।
- बजट 2019-20 के अनुसार, राज्य की कुल जनसंख्या का 75% कृषि क्षेत्र से जुड़ा है।
- राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है।
निम्नलिखित में से कौन-सी झारखण्ड राज्य की महत्वपूर्ण निर्यात फसल है?
- स्ट्राबेरी
- पपीता
- लीची
- चीकू
Explanation:
- पपीता झारखण्ड राज्य की एक महत्वपूर्ण निर्यात फसल है।
- झारखण्ड में फलों का उत्पादन बढ़ रहा है तथा पपीता राज्य से अन्य राज्यों को निर्यात किया जाता है।
- महत्वपूर्ण: झारखण्ड में नकदी फसलों का उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
झारखण्ड धातु कार्य करने वाले श्रमिकों के लिए प्रसिद्ध है जो शानदार डिजाइनों के सुंदर चौड़े कागज बनाते हैं, जिन्हें ………. कहा जाता है।
- चूर
- पान कटा
- वाला
- तारा कटा
Explanation:
- झारखण्ड के धातु कार्य करने वाले श्रमिक शानदार डिजाइनों के सुंदर चौड़े कागज बनाते हैं, जिन्हें ‘चूर’ कहा जाता है।
- यह झारखण्ड की पारंपरिक हस्तकला का एक अनूठा रूप है।
- डोकरा (धातु शिल्प) कला भी झारखण्ड की प्रसिद्ध हस्तकला है।
झारखण्ड की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार क्या है?
- कृषि
- उद्योग
- खनन
- परिवहन
Explanation:
- झारखण्ड की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार खनन है।
- राज्य खनिज संपदा से समृद्ध है, जहाँ कोयला, लौह अयस्क, अभ्रक, बॉक्साइट, तांबा आदि खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
- हालाँकि, राज्य की 75% जनसंख्या कृषि पर निर्भर है, लेकिन राज्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार खनन एवं उद्योग हैं।
10वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत योजना आयोग द्वारा झारखण्ड राज्य को कितनी राशि आवंटित की गई थी?
- ₹14,632 करोड़
- ₹24,850 करोड़
- ₹20,480 करोड़
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- 10वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत योजना आयोग द्वारा झारखण्ड राज्य को ₹14,632 करोड़ की राशि आवंटित की गई थी।
- झारखण्ड राज्य का गठन 15 नवम्बर 2000 को हुआ था, तथा इसकी पहली योजना 10वीं पंचवर्षीय योजना थी।
- इस राशि का उपयोग राज्य के विकास कार्यों एवं कृषि, उद्योग, शिक्षा आदि क्षेत्रों में किया गया।
योजना आयोग रिपोर्ट (1989) में वर्गीकृत कृषि मौसम क्षेत्रों में झारखण्ड किस क्षेत्र के अंतर्गत आता है?
- मध्य पठार एवं पहाड़ी क्षेत्र
- पश्चिमी पठार एवं पहाड़ी क्षेत्र
- पूर्वी पठार एवं पहाड़ी क्षेत्र
- मध्यवर्ती गांगीय क्षेत्र
Explanation:
- योजना आयोग रिपोर्ट (1989) में वर्गीकृत कृषि मौसम क्षेत्रों में झारखण्ड पूर्वी पठार एवं पहाड़ी क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
- इस क्षेत्र की विशेषता पहाड़ी भू-आकृति, वनों की अधिकता एवं कम सिंचाई सुविधाएँ हैं।
- झारखण्ड के कृषि प्रदेश:
- उत्तरी कोयल घाटी
- दामोदर घाटी
- निचली स्वर्णरेखा घाटी
- हजारीबाग पठार
- राजमहल पहाड़ी व सीमावर्ती क्षेत्र
- राँची पठार
- चाईबासा के मैदान
- उत्तरी-पूर्वी सीमांत
झारखण्ड राज्य का सिंचित क्षेत्र है (सर्वोत्तम उत्तर का चयन करें)
- 3.007 लाख हेक्टेयर
- 4.007 लाख हेक्टेयर
- 5.007 लाख हेक्टेयर
- 2.007 लाख हेक्टेयर
Explanation:
- झारखण्ड राज्य का सिंचित क्षेत्र 3.007 लाख हेक्टेयर है।
- राज्य की कुल सिंचित भूमि 3 लाख हेक्टेयर (12.73%) है।
- राज्य में सिंचाई के साधन:
- कुआँ – 30%
- तालाब – 19%
- नहर – 18%
- नलकूप – 8%
- अन्य – 25.74%
- राज्य में सिंचाई की सर्वाधिक आवश्यकता वाले जिले – साहेबगंज, गोड्डा, दुमका, गुमला।
झारखण्ड की कृषि अर्थव्यवस्था की विशेषता निम्न द्वारा बताई गई है
- प्रकृति पर निर्भरता, न्यून निवेश
- मुख्य फसल के रूप में धान एकल फसल
- अपर्याप्त सिंचाई सुविधाएँ तथा लघु और सीमांत जोत क्षेत्र
- उपर्युक्त सभी
Explanation:
- झारखण्ड की कृषि अर्थव्यवस्था की विशेषता उपर्युक्त सभी हैं:
- प्रकृति पर निर्भरता, न्यून निवेश – अधिकांश कृषि वर्षा पर निर्भर है।
- मुख्य फसल के रूप में धान एकल फसल – धान 80% क्षेत्र में उगाई जाती है।
- अपर्याप्त सिंचाई सुविधाएँ – केवल 12.77% भूमि सिंचित है।
- लघु और सीमांत जोत क्षेत्र – औसत जोत 1.17 हेक्टेयर प्रति व्यक्ति है।
- राज्य में कुल भूमि के 23% भाग पर ही कृषि कार्य किया जाता है।
झारखण्ड राज्य का कृषि योग्य क्षेत्र है (सर्वोत्तम उत्तर का चयन करें) Excise Constable 2019
- 48 लाख हेक्टेयर
- 38 लाख हेक्टेयर
- 79 लाख हेक्टेयर
- 59 लाख हेक्टेयर
Explanation:
- झारखण्ड राज्य का कृषि योग्य क्षेत्र 38 लाख हेक्टेयर है।
- यह राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 47.69% है।
- इसमें 23721.14 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र शामिल है।
- महत्वपूर्ण: राज्य में 14.79% परती भूमि पाई जाती है।
झारखण्ड कृषि का प्रदर्शन है–
- राष्ट्रीय औसत से बहुत उच्चतर
- राष्ट्रीय औसत से बहुत निम्न
- राष्ट्रीय औसत के एकदम बराबर
- राष्ट्रीय औसत से मामूली ऊपर
Explanation:
- झारखण्ड का कृषि प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बहुत निम्न है।
- इसके कारण:
- सिंचाई सुविधाओं का अभाव (केवल 12.77% भूमि सिंचित)
- मिट्टी की कम उर्वरता
- प्रकृति पर अत्यधिक निर्भरता
- लघु एवं सीमांत जोतें
- झारखण्ड की मिट्टी में रेत एवं बालू का अनुपात अधिक है, जिससे उर्वरता कम है।
झारखण्ड में नकदी फसल के लिए प्रयुक्त जोते हुए क्षेत्र का हिस्सा है (सर्वोत्तम उत्तर का चयन करें)
- 15%
- 20%
- 10%
- 5%
Explanation:
- झारखण्ड में नकदी फसल के लिए प्रयुक्त जोते हुए क्षेत्र का हिस्सा 5% है।
- राज्य की प्रमुख फसल धान है, जो 80% क्षेत्र में उगाई जाती है।
- नकदी फसलों में गन्ना, तिलहन, मूंगफली आदि शामिल हैं।
- गन्ना (नकदी फसल) – हजारीबाग, पलामू, दुमका, गोड्डा में उगाई जाती है।
कृषि विभाग के अनुसार झारखंड कितने कृषि जलवायु उप क्षेत्र में विभाजित है? SI 2017, IRB 2017, TGT 2017
- 5
- 3
- 4
- 6
Explanation:
- कृषि विभाग के अनुसार झारखंड 3 कृषि जलवायु उप क्षेत्र में विभाजित है:
- मध्य और उत्तर पूर्वी पठार
- पश्चिमी पठार
- दक्षिण पूर्वी पठार
- यह वर्गीकरण जलवायु, मिट्टी एवं सिंचाई सुविधाओं के आधार पर किया गया है।
झारखंड राज्य को कितने कृषि मौसम क्षेत्रों में बांटा गया है? SI 2017
- 5
- 3
- 4
- 6
Explanation:
- झारखंड राज्य को 3 कृषि मौसम क्षेत्रों में बांटा गया है:
- खरीफ – मानसून के आगमन पर (जून-जुलाई)
- रबी – ठंडे मौसम में (अक्टूबर-नवंबर)
- जायद – गर्मियों में (झारखण्ड में नहीं पाया जाता)
- खरीफ को दो भागों में बांटा गया है:
- भदई (20% कृषिगत भूमि) – बुआई मई-जून, कटाई अगस्त-सितंबर
- अगहनी (70% कृषिगत भूमि) – बुआई जून, कटाई दिसम्बर
भारतीय कृषि में जलवायु परिवर्तन नॉलेज नेटवर्क (CCKNIA) महाराष्ट्र, झारखंड और उड़ीसा तीन राज्यों में वर्ष ……. में शुरू किया गया था JPSC PT 2016
- 2012
- 2013
- 2014
- 2016
Explanation:
- भारतीय कृषि में जलवायु परिवर्तन नॉलेज नेटवर्क (CCKNIA) महाराष्ट्र, झारखंड और उड़ीसा तीन राज्यों में वर्ष 2013 में शुरू किया गया था।
- इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से कृषि को बचाना एवं किसानों को जागरूक करना है।
वर्तमान में झारखंड में कृषि श्रमिकों का प्रतिशत कितना है?
- 20
- 45
- 24
- 39.52
Explanation:
- वर्तमान में झारखंड में कृषि श्रमिकों का प्रतिशत 45% है।
- राज्य की 75% जनसंख्या कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में कार्यरत है।
- महत्वपूर्ण: राज्य की कुल कृषि योग्य भूमि 38 लाख हेक्टेयर है।
चावल झारखंड राज्य की प्रमुख खाद्य फसल है, जिसके अंतर्गत फसल क्षेत्र का कितना प्रतिशत भाग आता है?
- 60
- 45
- 80
- 39.52
Explanation:
- चावल (धान) झारखंड राज्य की प्रमुख खाद्य फसल है, जिसके अंतर्गत 80% फसल क्षेत्र आता है।
- धान राज्य की सर्वप्रमुख फसल है – कुल बोये गये क्षेत्र के 60% हिस्से पर धान की खेती होती है।
- उत्पादन क्षेत्र: सिंहभूम, राँची, गुमला, दुमका
- महत्वपूर्ण: झारखण्ड में खरीफ की प्रमुख फसल धान है।
कृषि विभाग झारखंड द्वारा उल्लेखित झारखंड की खेती की भूमि का कितना क्षेत्र असिंचित है?
- 60%
- 45%
- 80%
- 92%
Explanation:
- कृषि विभाग झारखंड द्वारा उल्लेखित, राज्य की खेती की भूमि का 92% क्षेत्र असिंचित है।
- राज्य में शुद्ध बोये गये कृषि क्षेत्र के मात्र 12.77% पर ही सिंचाई सुविधा उपलब्ध है।
- सिंचाई का सर्वप्रमुख स्रोत – कुआँ (30%)
झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23, झारखंड में खेती योगी बंजर भूमि का प्रतिशत है
- 6%
- 5%
- 8%
- 9%
Explanation:
- झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 के अनुसार, झारखंड में खेती योग्य बंजर भूमि का प्रतिशत 5% है।
- राज्य में वर्तमान परती भूमि का प्रतिशत 11.12% है।
- राज्य में कुल कृषि योग्य भूमि 47.67% है।
झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23, झारखंड में बंजर भूमि का प्रतिशत है
- 6%
- 5%
- 7%
- 9%
Explanation:
- झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 के अनुसार, झारखंड में बंजर भूमि का प्रतिशत 7% है।
- राज्य में वन भूमि का क्षेत्रफल काफी अधिक है, जिसके कारण बंजर भूमि का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम है।
- महत्वपूर्ण: राज्य में शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल 32.0% है।
झारखंड राज्य को कितने कृषि पारिस्थितिकी क्षेत्र में विभाजित किया गया है? JSSC SI 2017
- 6
- 5
- 7
- 9
Explanation:
- झारखंड राज्य को 7 कृषि पारिस्थितिकी क्षेत्रों में विभाजित किया गया है।
- यह वर्गीकरण भू-आकृति, मिट्टी, जलवायु एवं फसल पैटर्न के आधार पर किया गया है।
- महत्वपूर्ण: झारखंड को 3 कृषि जलवायु उप क्षेत्र एवं 3 कृषि मौसम क्षेत्रों में भी विभाजित किया गया है।
झारखंड में नकदी फसल के लिए प्रयुक्त जोते हुए क्षेत्र का हिस्सा है
- 60%
- 5%
- 17%
- 29%
Explanation:
- झारखंड में नकदी फसल के लिए प्रयुक्त जोते हुए क्षेत्र का हिस्सा 5% है।
- राज्य की प्रमुख फसल धान है, जो 80% क्षेत्र में उगाई जाती है।
- नकदी फसलों में गन्ना, तिलहन, सरसों आदि शामिल हैं।
- सरसों का सर्वाधिक उत्पादन पलामू जिले में होता है।
इनमें से कौन सी मुख्य फसल झारखंड में उगाई जाती है?
- गेंहू
- धान
- मक्का
- सोयाबीन
Explanation:
- झारखंड में धान मुख्य फसल के रूप में उगाई जाती है।
- धान राज्य की सर्वप्रमुख फसल है – कुल बोये गये क्षेत्र के 60% हिस्से पर।
- उत्पादन क्षेत्र: सिंहभूम, राँची, गुमला, दुमका
- महत्वपूर्ण: धान खरीफ की प्रमुख फसल है।
कौन सी फसल झारखंड के मुख्य खाद्यान्न फसल है जो फसल क्षेत्र का 80% भाग में उगाई जाती है?
- गेंहू
- चावल
- मक्का
- सोयाबीन
Explanation:
- चावल (धान) झारखंड के मुख्य खाद्यान्न फसल है, जो 80% फसल क्षेत्र में उगाई जाती है।
- यह राज्य की सर्वप्रमुख फसल है – कुल बोये गये क्षेत्र के 60% हिस्से पर धान की खेती होती है।
- महत्वपूर्ण: झारखण्ड में खरीफ की प्रमुख फसल धान है।
पलामू जिला में किस तिलहन का अधिकतम मात्रा में उत्पादन होता है?
- गेंहू
- चावल
- सरसों
- सोयाबीन
Explanation:
- पलामू जिले में सरसों का अधिकतम मात्रा में उत्पादन होता है।
- पलामू जिला दलहन-तिलहन उत्पादन में अग्रणी है।
- पलामू की अन्य प्रमुख फसलें:
- गेहूँ – उत्पादन की दृष्टि से प्रथम स्थान
- मक्का – उत्पादन की दृष्टि से प्रथम स्थान
- गन्ना – हजारीबाग के साथ प्रमुख उत्पादक
निम्नलिखित में से कौन-सी झारखण्ड की विशेषता नहीं है?
- झारखण्ड में कुल कृषि योग्य भूमि 47.67% है
- झारखण्ड में वर्तमान परती भूमि 11.12% है
- झारखण्ड में शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल 42.0% है
- झारखण्ड में औसत प्रति व्यक्ति जोत 1.17 हेक्टेयर है
Explanation:
- “झारखण्ड में शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल 42.0% है” कथन गलत है।
- सही तथ्य:
- कुल कृषि योग्य भूमि – 47.67% (सही)
- वर्तमान परती भूमि – 11.12% (सही)
- शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल – 32.0% (42% नहीं)
- औसत प्रति व्यक्ति जोत – 1.17 हेक्टेयर (सही)
- ये आंकड़े राज्य आर्थिक समीक्षा, 2017-18 पर आधारित हैं।
इनमें से कौनसी झारखंड में एक गरमा फसल नहीं है
- मूंगफली
- मक्का
- सरसों
- सब्जी
Explanation:
- सरसों झारखंड में गरमा फसल नहीं है, बल्कि यह रबी फसल है।
- गरमा फसल (गर्म फसल) – मक्का, मूंगफली, सब्जी आदि गर्म मौसम में उगाई जाने वाली फसलें हैं।
- सरसों ठंडे मौसम में उगाई जाती है, इसलिए यह रबी फसल है।
- झारखण्ड की फसलें:
- खरीफ – धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, मूंग, मूंगफली, गन्ना
- रबी – गेहूँ, जौ, चना, तिलहन (सरसों)
- जायद – झारखण्ड में नहीं पाया जाता है
- गरमा फसल – मक्का, मूंगफली, सब्जी
निम्नलिखित में से कौन सा प्रमुख बीज झारखंड में उगाया जाता है
- मूंगफली
- सूरजमुखी
- सरसों
- सोयाबीन
Explanation:
- झारखंड में सरसों एक प्रमुख तिलहन के रूप में उगाया जाता है।
- पलामू जिले में सरसों का सर्वाधिक उत्पादन होता है।
- झारखण्ड में दलहन-तिलहन का उत्पादन पलामू में सर्वाधिक है।
- मूंगफली – गरमा फसल है।
झारखंड में मुख्यतः कितने प्रकार की फसलें पैदा होती है
- 1
- 2
- 3
- 4
Explanation:
- झारखंड में मुख्यतः 3 प्रकार की फसलें पैदा होती हैं:
- खरीफ – मानसून के आगमन पर (जून-जुलाई)
- रबी – ठंडे मौसम में (अक्टूबर-नवंबर)
- जायद – गर्मियों में (झारखण्ड में नहीं पाया जाता)
- झारखंड राज्य को 3 कृषि मौसम क्षेत्रों में बांटा गया है।
- महत्वपूर्ण: झारखंड में गरमा फसल (गर्म फसल) भी उगाई जाती है – मक्का, मूंगफली, सब्जी।
इनमें से कौन सी रबी फसल झारखंड में उगाई जाती है
- चना
- मक्का
- बाजार
- मूंगफली
Explanation:
- चना एक रबी फसल है, जो झारखंड में उगाई जाती है।
- रबी फसलें – गेहूँ, जौ, चना, तिलहन आदि।
- मक्का, बाजरा, मूंगफली – खरीफ या गरमा फसलें हैं।
- रबी फसल की बुआई – अक्टूबर-नवंबर में, कटाई – मार्च में।
पलामू में कौनसी तेल बीज अधिकतम मात्रा में उत्पादित होता है
- कॉस्टर बीज
- तिल
- अलसी का बीज
- सरसों
Explanation:
- पलामू जिले में तिल का अधिकतम मात्रा में उत्पादन होता है।
- पलामू दलहन-तिलहन उत्पादन में अग्रणी जिला है।
- सरसों का भी पलामू में सर्वाधिक उत्पादन होता है।
- महत्वपूर्ण: पलामू जिला गेहूँ एवं मक्का उत्पादन में भी प्रथम स्थान रखता है।
झारखंड में किस फल का उत्पादन सबसे अधिक है
- अमरुद
- आम
- केला
- करोंदा
Explanation:
- झारखंड में आम का उत्पादन सबसे अधिक है।
- झारखंड की जलवायु एवं मिट्टी आम की खेती के लिए अनुकूल है।
- महत्वपूर्ण: झारखंड की महत्वपूर्ण निर्यात फसल – लीची एवं पपीता भी हैं।
झारखंड कृषि का प्रदर्शन है
- राष्ट्रीय औसत से बहुत उत्तर
- राष्ट्रीय औसत से बहुत निम्न
- राष्ट्रीय औसत से एकदम बराबर
- राष्ट्रीय औसत से मामूली ऊपर
Explanation:
- झारखंड का कृषि प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बहुत निम्न है।
- इसके कारण:
- सिंचाई सुविधाओं का अभाव (केवल 12.77% भूमि सिंचित)
- मिट्टी की कम उर्वरता
- प्रकृति पर अत्यधिक निर्भरता
- लघु एवं सीमांत जोतें (औसत जोत 1.17 हेक्टेयर)
- झारखण्ड की मिट्टी में रेत एवं बालू का अनुपात अधिक है।
भारत में लाख के उत्पादन में झारखंड का स्थान कौन सा है
- दूसरा
- पहला
- तीसरा
- चौथा
Explanation:
- भारत में लाख (Lac) के उत्पादन में झारखंड का प्रथम स्थान है।
- झारखंड लाख उत्पादन में अग्रणी राज्य है।
- भारतीय लाह अनुसंधान संस्थान (ILRI) की स्थापना 20 सितंबर, 1924 को राँची में हुई थी, जिसे अब IINRG (Indian Institute of Natural Resins and Gums) कहा जाता है।
- लाख के सामरिक महत्व को समझते हुए तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने 1920 में लिंडसे-हार्लो समिति का गठन किया था।
निम्नलिखित में से कौन सी झारखंड राज्य की महत्वपूर्ण निर्यात फसल है
- स्ट्रॉबेरी
- पपीता
- लीची
- चीकू
Explanation:
- लीची झारखंड राज्य की एक महत्वपूर्ण निर्यात फसल है।
- झारखंड में लीची का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है।
- पपीता भी राज्य की महत्वपूर्ण निर्यात फसलों में से एक है।
- महत्वपूर्ण: झारखंड की प्रमुख निर्यात फसलें – लीची, पपीता आदि हैं।
आदिवासी क्षेत्र में खेती मुख्य रूप से …….. है
- शुष्क भूमि की खेती
- नहर सिंचाई
- वर्षा जल सिंचाई
- इनमें से कोई भी नहीं
Explanation:
- आदिवासी क्षेत्र में खेती मुख्य रूप से शुष्क भूमि की खेती (Dry Land Farming) है।
- झारखंड में सिंचाई सुविधाओं का अभाव है, इसलिए कृषि वर्षा पर निर्भर है।
- राज्य में 12.77% भूमि पर ही सिंचाई उपलब्ध है, शेष 87.23% भूमि असिंचित है।
- महत्वपूर्ण: झारखंड में शुष्क क्षेत्र में खेती सूखी भूमि की खेती है।
झारखंड में कई जगह है जहां पर सीढ़ीधार क्षेत्र हैं ताकि
- बारिश का पानी पूरी तरह से उपयोग किया जाता है
- एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक पहुंच आसान हो सकती है
- क्षेत्र को एकीकरण से बचाया जा सकता है
- यह एक धार्मिक परंपरा है
Explanation:
- झारखंड में सीढ़ीदार क्षेत्र (Terrace Farming) इसलिए बनाए जाते हैं ताकि बारिश का पानी पूरी तरह से उपयोग किया जा सके।
- यह पहाड़ी क्षेत्रों में मिट्टी के क्षरण को रोकने एवं जल संरक्षण के लिए किया जाता है।
- यह झारखण्ड के पारंपरिक कृषि पद्धतियों में से एक है।
कृषि में झारखंड का सर्वाधिक विकसित क्षेत्र कौन सा है
- हजारीबाग का कृषि प्रदेश
- निचली स्वर्णारेखा प्रदेश
- रांची पठार का कृषि प्रदेश
- उत्तर पूर्वी सीमांत कृषि प्रदेश
Explanation:
- कृषि में झारखंड का सर्वाधिक विकसित क्षेत्र उत्तरी-पूर्वी सीमांत कृषि प्रदेश है।
- इस क्षेत्र में उत्तरी गोड्डा तथा साहेबगंज का उत्तरी-पूर्वी भाग शामिल है।
- यहाँ जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil) पाई जाती है, जो उपजाऊ है।
- झारखंड के 8 कृषि प्रदेश:
- उत्तरी कोयल घाटी
- दामोदर घाटी
- निचली स्वर्णरेखा घाटी
- हजारीबाग पठार
- राजमहल पहाड़ी व सीमावर्ती क्षेत्र
- राँची पठार
- चाईबासा के मैदान
- उत्तरी-पूर्वी सीमांत (सर्वाधिक विकसित)
इनमें से कौन सा झारखंड में फसल का मौसम नहीं है
- गरमा
- रवि
- खरीफ
- जायद
Explanation:
- जायद झारखंड में फसल का मौसम नहीं है।
- झारखंड में तीन फसल मौसम हैं:
- खरीफ – मानसून के आगमन पर (जून-जुलाई)
- रबी (रवि) – ठंडे मौसम में (अक्टूबर-नवंबर)
- गरमा – गर्म फसल (मक्का, मूंगफली, सब्जी)
- जायद फसल (ग्रीष्मकालीन फसल) झारखण्ड में नहीं पाई जाती है।
झारखंड में शुष्क क्षेत्र में खेती मुख्य रूप से है
- सूखी भूमि की खेती
- बाढ़ के पानी से सिंचाई
- नहर सिंचाई
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- झारखंड में शुष्क क्षेत्र में खेती मुख्य रूप से सूखी भूमि की खेती (Dry Land Farming) है।
- राज्य में केवल 12.77% भूमि पर सिंचाई उपलब्ध है, शेष 87.23% भूमि असिंचित है।
- यह वर्षा पर निर्भर कृषि है, जिसमें धान, मक्का, मूंग आदि फसलें उगाई जाती हैं।
झारखंड भारत में निम्नलिखित में से किस किस्म के रेशम का सबसे बड़ा उत्पादक है
- मुगा सिल्क
- एरी सिल्क
- पगारा सिल्क
- तसर सिल्क
Explanation:
- झारखंड भारत में तसर सिल्क (Tasar Silk) का सबसे बड़ा उत्पादक है।
- तसर रेशम जंगली रेशम की किस्म है, जो मुख्यतः साल एवं अर्जुन वृक्षों पर पाई जाती है।
- झारखंड में केंद्रीय तसर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान स्थित है।
- महत्वपूर्ण: तसर रेशम झारखंड की प्रमुख उद्योग है।
झारखंड में खरीफ मार्केटिंग सीजन (KMS) किस अवधि में चलता है?
- वर्ष की 1 सितंबर से अगले वर्ष के 30 अगस्त तक
- 1 जनवरी से अगले वर्ष के 31 दिसंबर तक
- 1 अप्रैल से अगले वर्ष के 31 मार्च तक
- 1 अक्टूबर से अगले वर्ष के 30 सितंबर तक
Explanation:
- झारखंड में खरीफ मार्केटिंग सीजन (KMS) 1 अक्टूबर से अगले वर्ष के 30 सितंबर तक चलता है।
- यह खरीफ फसल (जून-जुलाई में बुआई, सितम्बर-अक्टूबर में कटाई) के विपणन से संबंधित है।
- यह समय फसल कटाई के बाद विपणन की अवधि को दर्शाता है।
झारखंड का एकमात्र जिला जिसने 30-9-2009 तक वर्षा की सामान्य औसत सीमा (951 मिलीमीटर) से थोड़ा अधिक प्राप्त किया है, वह है
- साहिबगंज
- देवघर
- रामगढ़
- रांची
Explanation:
- झारखंड का एकमात्र जिला जिसने 30-9-2009 तक वर्षा की सामान्य औसत सीमा (951 मिलीमीटर) से थोड़ा अधिक प्राप्त किया है, वह साहिबगंज है।
- साहेबगंज गंगा नदी के किनारे स्थित है, जहाँ जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है।
- इस जिले में खरीफ फसलों का अच्छा उत्पादन होता है।
झारखंड के लिए IPCC SRES उत्सर्जन परिदृश्य दर्शाता है JPSC PRE 2021
- सर्दियों में गर्माहट अपेक्षाकृत अधिक होगी
- गर्मियों में गर्माहट अपेक्षाकृत अधिक होगी
- सर्दियों एवं गर्मियों में गर्माहट अपेक्षाकृत अधिक होगी
- सर्दियों एवं वर्षा काल के बाद गर्माहट अपेक्षाकृत अधिक होगी
Explanation:
- IPCC SRES उत्सर्जन परिदृश्य के अनुसार, झारखंड में सर्दियों एवं वर्षा काल के बाद गर्माहट अपेक्षाकृत अधिक होगी।
- IPCC (Intergovernmental Panel on Climate Change) जलवायु परिवर्तन पर अध्ययन करने वाली संस्था है।
- SRES (Special Report on Emissions Scenarios) उत्सर्जन परिदृश्यों की रिपोर्ट है।
- यह परिदृश्य झारखंड के कृषि एवं जलवायु पर प्रभाव डालता है।
झारखण्ड का सबसे ठंडा स्थान कौन-सा है? SI (PT)-2017
- नेतरहाट
- पारसनाथ
- मसानजोर
- राँची
Explanation:
- झारखण्ड का सबसे ठंडा स्थान नेतरहाट (लातेहार) है।
- यह नेतरहाट पठार पर स्थित है, जहाँ सर्दियों में न्यूनतम तापमान दर्ज किया जाता है।
- नेतरहाट समुद्र तल से 3700 फीट की ऊँचाई पर स्थित है।
- नेतरहाट विद्यालय की स्थापना 15 नवंबर, 1954 में चार्ल्स नेपियर के द्वारा की गई थी।
- महत्वपूर्ण: नेतरहाट को झारखण्ड का शिमला भी कहा जाता है।
झारखण्ड में वर्षा किस मानसून से होती है?
- उत्तरी-पूर्वी मानसून
- दक्षिण-पश्चिमी मानसून
- नॉर्वेस्टर
- उपरोक्त में से कोई नहीं
Explanation:
- झारखण्ड में वर्षा दक्षिण-पश्चिमी मानसून (South-West Monsoon) से होती है।
- यह जून से सितम्बर तक सक्रिय रहता है।
- झारखण्ड में अधिकांश वर्षा इसी मानसून से होती है।
- महत्वपूर्ण: उत्तरी-पूर्वी मानसून (North-East Monsoon) से तमिलनाडु में वर्षा होती है।
झारखण्ड के किस हिस्से में सर्दियों में न्यूनतम तापमान दर्ज किया जाता है? SI (PT)-2017
- नेतरहाट पठार
- दक्षिण-पश्चिमी मानसून
- उत्तरी गंगा मैदान
- संथाल परगना क्षेत्र
Explanation:
- झारखण्ड के नेतरहाट पठार में सर्दियों में न्यूनतम तापमान दर्ज किया जाता है।
- नेतरहाट लातेहार जिले में स्थित है, जो समुद्र तल से 3700 फीट की ऊँचाई पर है।
- इसकी ऊँचाई के कारण यहाँ तापमान अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम रहता है।
- महत्वपूर्ण: नेतरहाट झारखण्ड का सबसे ठंडा स्थान है।
JAPCC द्वारा जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय योजना कब जारी की गई? 7th-10th JPSC (PT) – 2021
- 30 जून, 2006
- 30 जून, 2007
- 30 जून, 2009
- 30 जून, 2008
Explanation:
- JAPCC (Jharkhand Action Plan on Climate Change) द्वारा जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय योजना 30 जून, 2008 को जारी की गई थी।
- यह योजना जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने एवं अनुकूलन उपायों को लागू करने हेतु बनाई गई थी।
- झारखंड में जलवायु परिवर्तन के कारण मानवजनित गतिविधियाँ, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन एवं ऊर्जा क्षेत्र प्रमुख हैं।
JAPCC का पूरा नाम क्या है?
- Jharkhand Action Project On Climate Change
- Jharkhand Action Plan On Climate Change
- Jharkhand Active Plan On Climate Change
- Jharkhand Active Project On Climate Change
Explanation:
- JAPCC का पूरा नाम Jharkhand Action Plan On Climate Change (झारखंड जलवायु परिवर्तन कार्य योजना) है।
- इसे 30 जून, 2008 को जारी किया गया था।
- इस योजना का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटना एवं अनुकूलन उपायों को बढ़ावा देना है।
- झारखंड में जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारण – मानवजनित गतिविधियाँ, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, ऊर्जा क्षेत्र।
झारखण्ड में देखे गये जलवायु परिवर्तन का कारण है 7th – 10th JPSC (PT) – 2021
- मानवजनित गतिविधियाँ
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन
- ऊर्जा क्षेत्र
- यह सभी
Explanation:
- झारखण्ड में देखे गये जलवायु परिवर्तन के कारण यह सभी हैं:
- मानवजनित गतिविधियाँ – वनोन्मूलन, खनन, शहरीकरण
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन – CO₂, CH₄, N₂O का उत्सर्जन
- ऊर्जा क्षेत्र – कोयला आधारित ऊर्जा उत्पादन
- झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है, जहाँ कोयला आधारित उद्योगों का प्रभाव है।
- इन सभी कारकों ने तापमान एवं वर्षा के पैटर्न को प्रभावित किया है।
झारखण्ड का सबसे अधिक वर्षा प्राप्त करने वाला क्षेत्र कौन-सा है?
- नेतरहाट
- पारसनाथ
- मसानजोर
- राँची
Explanation:
- झारखण्ड का सबसे अधिक वर्षा प्राप्त करने वाला क्षेत्र नेतरहाट है।
- नेतरहाट लातेहार जिले में स्थित है, जो समुद्र तल से 3700 फीट की ऊँचाई पर है।
- उच्च ऊँचाई के कारण यहाँ घनी वर्षा होती है।
- महत्वपूर्ण: नेतरहाट को “झारखण्ड का शिमला” भी कहा जाता है।
झारखण्ड की वार्षिक औसत वर्षा क्या है? SI (PT)-2017
- 1400mm
- 1800mm
- 2400mm
- 140mm
Explanation:
- झारखण्ड की वार्षिक औसत वर्षा 1400 मिमी (1400mm) है।
- यह वर्षा मुख्यतः दक्षिण-पश्चिमी मानसून (South-West Monsoon) से होती है।
- राज्य में वार्षिक वर्षा 100 से 200 सेंटीमीटर के मध्य होती है।
- सबसे अधिक वर्षा – नेतरहाट क्षेत्र में होती है।
झारखण्ड की वार्षिक औसत वर्षा क्या है? SI (PT)-2017
- 1400 सेमी
- 1800 सेमी
- 2400 सेमी
- 140 सेमी
Explanation:
- झारखण्ड की वार्षिक औसत वर्षा 140 सेमी (140 cm) है।
- यह 1400 मिमी के बराबर है (1 सेमी = 10 मिमी)।
- राज्य में वर्षा का वितरण:
- पूर्वी एवं दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र – अधिक वर्षा
- उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र – कम वर्षा
- सबसे कम वर्षा – पलामू एवं गढ़वा क्षेत्र में होती है।
झारखण्ड की वार्षिक औसत तापमान क्या है? SI (PT)-2017
- 14°C
- 32°C
- 34 °C
- 25 °C
Explanation:
- झारखण्ड की वार्षिक औसत तापमान 25°C है।
- राज्य में गर्मी के मौसम में तापमान 40°C तक पहुँच जाता है।
- सर्दी के मौसम में नेतरहाट में न्यूनतम तापमान दर्ज किया जाता है।
- महत्वपूर्ण: राज्य की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसून प्रकार की है।
झारखण्ड राज्य मुख्यतः किस जलवायु क्षेत्र के तहत आता है? 6th JPSC (PT) – 2016, SI (PT)-2017
- उष्णकटिबंधीय मानसून
- उष्णकटिबंधीय नमी
- दोनों
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- झारखण्ड राज्य मुख्यतः उष्णकटिबंधीय मानसून (Tropical Monsoon) जलवायु क्षेत्र के तहत आता है।
- यहाँ गर्मियों में तापमान अधिक एवं सर्दियों में तापमान कम होता है।
- राज्य में तीन मुख्य ऋतुएँ होती हैं:
- ग्रीष्म ऋतु (मार्च-जून)
- वर्षा ऋतु (जुलाई-सितंबर)
- शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी)
- वर्षा दक्षिण-पश्चिमी मानसून से होती है।
मानसून लौटते समय, के महीने में झारखण्ड में वर्षा करता है? SI (Mains) – 2017
- सितम्बर-नवम्बर
- दिसम्बर-जनवरी
- अगस्त-सितम्बर
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- मानसून लौटते (वापसी) समय, सितम्बर-नवम्बर के महीनों में झारखण्ड में वर्षा होती है।
- यह दक्षिण-पश्चिमी मानसून की वापसी के दौरान होने वाली वर्षा है।
- इस समय उत्तरी-पूर्वी मानसून भी कुछ प्रभाव डालता है।
- यह वर्षा रबी फसलों (गेहूँ, चना, सरसों) के लिए सहायक होती है।
झारखण्ड में वर्षा किस मानसून से होती है? 4th JPSC (PT) – 2011
- उत्तर-पूर्वी मानसून
- नॉर्वेस्टर
- दक्षिण-पश्चिमी मानसून
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- झारखण्ड में वर्षा दक्षिण-पश्चिमी मानसून (South-West Monsoon) से होती है।
- यह जून से सितम्बर तक सक्रिय रहता है तथा अधिकांश वर्षा इसी से होती है।
- उत्तर-पूर्वी मानसून (North-East Monsoon) से तमिलनाडु में वर्षा होती है।
- नॉर्वेस्टर – पश्चिम बंगाल एवं असम में होने वाली वर्षा है।
झारखण्ड में वार्षिक वर्षा अंतराल है : 6th JPSC (PT) – 2016
- 60 से 100 सेंटीमीटर के मध्य
- 100 से 200 सेंटीमीटर के मध्य
- 200 से 300 सेंटीमीटर के मध्य
- 300 सेंटीमीटर से अधिक
Explanation:
- झारखण्ड में वार्षिक वर्षा अंतराल 100 से 200 सेंटीमीटर के मध्य है।
- राज्य की औसत वार्षिक वर्षा 140 सेमी (1400 मिमी) है।
- वर्षा का वितरण:
- नेतरहाट (सर्वाधिक वर्षा) – 1600 मिमी से अधिक
- राँची – 1400 मिमी
- पलामू (सबसे कम वर्षा) – 1000 मिमी से कम
- महत्वपूर्ण: राज्य में अधिकांश वर्षा दक्षिण-पश्चिमी मानसून से होती है।
