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1857 में झारखण्ड में किस स्थान पर विद्रोह भड़का था?

  • कोडरमा
  • हजारीबाग
  • धनबाद
  • सिंहभूम

Explanation:

  • हजारीबाग में 1857 के विद्रोह का प्रसार 30 जुलाई, 1857 को हुआ था।
  • इसके पीछे का कारण:
    • 25 जुलाई, 1857 को दानापुर रेजिमेंट के सैनिकों ने विद्रोह कर दिया।
    • इसकी सूचना पाकर हजारीबाग स्थित रामगढ़ बटालियन के सैनिक उत्साहित हो गए।
    • 30 जुलाई, 1857 को इन्होंने भी विद्रोह कर दिया।
    • रामगढ़ बटालियन का मुख्यालय राँची में अवस्थित था।
  • अन्य स्थानों में विद्रोह की तिथियाँ:
    • रोहिणी (देवघर) – 12 जून, 1857 (सर्वप्रथम)
    • राँची – 2 अगस्त, 1857
    • सिंहभूम – 3 सितंबर, 1857
    • पलामू – 26 सितंबर, 1857

झारखण्ड के निम्नलिखित नेताओं में से किन्होंने 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी?

  • गंगा नारायण सिंह
  • शेख भिखारी
  • मैजु मानकी
  • भूखन सिंह

Explanation:

  • शेख भिखारी 1857 के विद्रोह के प्रमुख नेताओं में से एक थे।
  • वे राँची क्षेत्र में विद्रोह से जुड़े थे।
    • राँची के कमिश्नर डाल्टन ने ओरमांझी के 12 गाँवों के जमींदार उमराव सिंह एवं उसके दीवान शेख भिखारी को गिरफ्तार कर लिया।
    • 8 जनवरी, 1858 को टैगोर हिल के पास इन्हें फाँसी दे दी गई।
    • इस फाँसी स्थल को ‘टुंगरी फाँसी’ के नाम से जाना जाता है।
  • 1857 के विद्रोह के अन्य प्रमुख नेता झारखंड में:
    • विश्वनाथ शाहदेव – राँची/डोरंडा (विद्रोह के प्रेरक)
    • पाण्डेय गणपत राय – राँची/डोरंडा (सेनापति)
    • अर्जुन सिंह – सिंहभूम (पोरहाट नरेश)
    • नीलांबर-पीतांबर – पलामू (भोगता जनजाति)
    • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव – नागवंशी ठाकुर
    • टिकैत उमरांव सिंह – राँची क्षेत्र
    • जगन्नाथ शाही – राँची क्षेत्र
    • रामरूप सिंह – राँची क्षेत्र
    • दुखु – राँची क्षेत्र

इनमें से कौन-सा विद्रोह 1875 में झारखण्ड में फूटा था?

  • संथाल विद्रोह
  • बिरसा विद्रोह
  • तिलका मांझी विद्रोह
  • इनमें कोई नहीं

Explanation:

  • 1875 में झारखंड में कोई विशेष विद्रोह नहीं हुआ था।
  • विभिन्न विद्रोहों की तिथियाँ:
    • संथाल विद्रोह – 1855-56
    • 1857 का विद्रोह – 1857-59
    • बिरसा मुण्डा विद्रोह – 1899-1900
    • तिलका मांझी विद्रोह – 1784-85 (संथाल विद्रोह का प्रारंभिक रूप)
  • 1875 के आसपास मानभूम, पलामू आदि क्षेत्रों में कुछ स्थानीय अशांति हुई थी, लेकिन कोई प्रमुख विद्रोह दर्ज नहीं है।

झारखण्ड में 1857 के विद्रोह की शुरूआत कब हुयी?

  • 10 मई, 1857 को
  • 12 मई, 1857 को
  • 10 जून, 1857 को
  • 12 जून, 1857 को

Explanation:

  • झारखण्ड में 1857 के विद्रोह की शुरूआत – 12 जून, 1857 को हुई थी।
  • यह विद्रोह रोहिणी गाँव (देवघर) से प्रारंभ हुआ, जो अजय नदी के किनारे अवस्थित है।
  • इसकी पृष्ठभूमि:
    • मेजर मैक्डोनाल्ड के नेतृत्व में पदस्थापित 32वीं रेजिमेंट के सैनिकों ने विद्रोह किया।
    • लेफ्टिनेंट नॉर्मन लेस्ली की हत्या के बाद यह विद्रोह प्रारंभ हुआ।
    • मेजर मैकडोनाल्ड तथा सर्जन डॉ. ग्रांट घायल हो गए।
    • इमाम खाँ नामक व्यक्ति पहचाने गए हमलावरों पर मुकदमा चलाकर उन्हें फाँसी दी गई।

झारखण्ड में 1857 के विद्रोह की शुरूआत कहा से हुयी ?

  • ओरमांझी, राँची
  • पद्मा, हजारीबाग
  • चैनपुर, पलामू
  • रोहिणी, देवघर

Explanation:

  • झारखण्ड में 1857 के विद्रोह की शुरूआत – रोहिणी गाँव (देवघर) से हुई थी।
  • रोहिणी गाँव की विशेषताएँ:
    • यह अजय नदी के किनारे अवस्थित है।
    • यहाँ 32वीं रेजिमेंट तैनात थी।
    • रेजिमेंट का मुख्यालय बाद में भागलपुर स्थानांतरित कर दिया गया।
  • विद्रोह का क्रम:
    • रोहिणी (12 जून, 1857) → हजारीबाग (30 जुलाई, 1857) → राँची (2 अगस्त, 1857) → मानभूम (5 अगस्त, 1857) → सिंहभूम (3 सितंबर, 1857) → पलामू (26 सितंबर, 1857)

1857 के विद्रोह के दौरान रोहिणी गाँव में किस रजीमेंट की सेना तैनात थी?

  • 12वीं रेजीमेंट
  • 22वीं रेजीमेंट
  • 32वीं रेजीमेंट
  • 42वीं रेजीमेंट

Explanation:

  • मेजर मैक्डोनाल्ड के नेतृत्व में 32वीं रेजिमेंट के सैनिक रोहिणी गाँव में पदस्थापित थे।
  • इन्हीं सैनिकों ने लेफ्टिनेंट नॉर्मन लेस्ली की हत्या करके विद्रोह आरंभ किया।
  • इस घटना के बाद:
    • मेजर मैकडोनाल्ड तथा सर्जन डॉ. ग्रांट घायल हो गए।
    • इमाम खाँ नामक व्यक्ति ने हमलावरों की पहचान कराई।
    • मुकदमे के बाद हमलावरों को फाँसी दी गई।
    • रेजीमेंट का मुख्यालय रोहिणी से भागलपुर स्थानांतरित कर दिया गया।

1857 के विद्रोह के दौरान रोहिणी गाँव में तैनात 32वीं रेजीमेंट सेना की कमान किसके हाथों में थी?

  • विल्किंसन
  • मैक्डोनाल्ड
  • क्लीवलैंड
  • कैमथ

Explanation:

  • 32वीं रेजिमेंट की कमान मेजर मैक्डोनाल्ड के हाथों में थी।
  • जब विद्रोह हुआ तो:
    • मेजर मैक्डोनाल्ड और सर्जन डॉ. ग्रांट घायल हो गए।
    • लेफ्टिनेंट नॉर्मन लेस्ली की हत्या कर दी गई।
    • इस घटना के बाद रेजीमेंट का मुख्यालय भागलपुर स्थानांतरित कर दिया गया।

रोहिणी गाँव किस नदी के तट पर स्थित है?

  • दामोदर
  • अजय
  • बराकर
  • स्वर्णरेखा

Explanation:

  • रोहिणी गाँव (देवघर) अजय नदी के किनारे अवस्थित है।
  • अजय नदी के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य:
    • उदगम – मुंगेर (बिहार)
    • मुहाना – भागीरथी (कटबा, पश्चिम बंगाल)
    • कुल लंबाई – 288 किमी
    • अपवाह क्षेत्र – देवघर, दुमका, जामताड़ा
    • सहायक नदियाँ – पथरो, जयन्ती

1857 के विद्रोह के दौरान रामगढ़ बटालियन का मुख्यालय कहाँ स्थित था?

  • हजारीबाग
  • धनबाद
  • पटना
  • राँची

Explanation:

  • रामगढ़ बटालियन का मुख्यालय राँची में अवस्थित था।
  • विद्रोह का क्रम:
    • 25 जुलाई, 1857 – दानापुर रेजिमेंट के सैनिकों ने विद्रोह कर दिया।
    • इसकी सूचना पाकर हजारीबाग स्थित रामगढ़ बटालियन के सैनिक उत्साहित हो गए।
    • 30 जुलाई, 1857 – रामगढ़ बटालियन ने हजारीबाग में विद्रोह कर दिया।
    • मेजर सिम्पसन (उपायुक्त) सहित विभिन्न अंग्रेज अधिकारी कलकत्ता भाग गए।
    • रामगढ़ के राजा शम्भू नारायण सिंह ने विद्रोह की सूचना गवर्नर जनरल लार्ड कैनिंग को भेजी।

रोहिणी गाँव कहाँ स्थित था?

  • हजारीबाग
  • देवघर
  • पटना
  • राँची

Explanation:

  • रोहिणी गाँव देवघर जिले में स्थित है।
  • यह गाँव अजय नदी के किनारे अवस्थित है।
  • यहीं से 12 जून, 1857 को झारखंड में 1857 के विद्रोह की शुरुआत हुई थी।

32वीं रेजीमेंट का मुख्यालय रोहिणी से कहाँ स्थानांतरित कर दिया गया?

  • भागलपुर
  • देवघर
  • पटना
  • राँची

Explanation:

  • 32वीं रेजिमेंट का मुख्यालय रोहिणी से भागलपुर स्थानांतरित कर दिया गया।
  • कारण:
    • 12 जून, 1857 को 32वीं रेजिमेंट के सैनिकों ने विद्रोह कर दिया।
    • लेफ्टिनेंट नॉर्मन लेस्ली की हत्या कर दी गई।
    • मेजर मैकडोनाल्ड तथा डॉ. ग्रांट घायल हो गए।
    • अंग्रेज अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करने हेतु मुख्यालय स्थानांतरित किया।

झारखण्ड में 1857 के विद्रोह की शुरूआत हजारीबाग क्षेत्र में कब हुयी?

  • 2 अगस्त, 1857 को
  • 30 जुलाई, 1857 को
  • 10 जून, 1857 को
  • 3 सितंबर, 1857 को

Explanation:

  • हजारीबाग में 1857 के विद्रोह की शुरूआत 30 जुलाई, 1857 को हुई।
  • विद्रोह का विवरण:
    • 25 जुलाई, 1857 – दानापुर रेजिमेंट के सैनिकों ने विद्रोह कर दिया।
    • इसकी सूचना पाकर हजारीबाग स्थित रामगढ़ बटालियन के सैनिक उत्साहित हो गए।
    • 30 जुलाई, 1857 – रामगढ़ बटालियन ने हजारीबाग में विद्रोह कर दिया।
    • मेजर सिम्पसन (उपायुक्त) सहित अंग्रेज अधिकारी कलकत्ता भाग गए।
    • रामगढ़ के राजा शम्भू नारायण सिंह ने विद्रोह की सूचना गवर्नर जनरल को दी।
    • विद्रोहियों ने जेल से कैदियों को छुड़ा लिया।
    • संबलपुर के सुरेन्द्र शाही के नेतृत्व में कैदी राँची की ओर चले गए।

झारखण्ड में 1857 के विद्रोह की शुरूआत राँची क्षेत्र में कब हुयी?

  • 2 अगस्त, 1857 को
  • 30 जुलाई, 1857 को
  • 10 जून, 1857 को
  • 3 सितंबर, 1857 को

Explanation:

  • राँची में 1857 के विद्रोह की शुरूआत 2 अगस्त, 1857 को हुई।
  • विद्रोह का विवरण:
    • 2 अगस्त, 1857 – हजारीबाग के विद्रोही सैनिक राँची आ गए।
    • जमादार माधव सिंह, सूबेदार नादिर अली व जयमंगल पाण्डेय के नेतृत्व में यहाँ के सैनिकों ने विद्रोह कर दिया।
    • विद्रोहियों ने:
      • अधिकारियों की कोठियाँ जला दीं।
      • गोस्सनर चर्च को तोप के गोले से उड़ा दिया।
      • जेल से कैदियों को छुड़ा लिया।
    • राँची के कमिश्नर डाल्टन की सलाह पर अगस्त में पूरे छोटानागपुर में मार्शल कानून लागू कर दिया गया।
    • विद्रोहियों ने ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के नेतृत्व में डोरंडा स्थित अंग्रेज अधिकारियों के बंगले व कचहरी जला दिए तथा खजाना लूट लिया।

झारखण्ड में 1857 के विद्रोह की शुरूआत सिंहभूम क्षेत्र में कब हुयी?

  • 2 अगस्त, 1857 को
  • 30 जुलाई, 1857 को
  • 10 जून, 1857 को
  • 3 सितंबर, 1857 को

Explanation:

  • सिंहभूम में 1857 के विद्रोह की शुरूआत 3 सितंबर, 1857 को हुई।
  • विद्रोह का विवरण:
    • सिंहभूम में विद्रोह भगवान सिंह एवं रामनाथ सिंह ने प्रारंभ किया।
    • 3 सितंबर, 1857 – चाईबासा के सैनिकों ने विद्रोह करके सरकारी खजाने को लूट लिया तथा कैदियों को जेल से छुड़ा लिया।
    • संपूर्ण सिंहभूम क्षेत्र में क्रांतिकारियों का नेतृत्व – राजा अर्जुन सिंह (पोरहाट नरेश) ने किया।
    • सिंहभूम के असिस्टेंट कमिश्नर मेजर शिशमोर विद्रोह से पूर्व ही अंग्रेज समर्थक सरायकेला नरेश चक्रधर सिंह को चाईबासा का दायित्व सौंपकर कलकत्ता भाग गया।

झारखण्ड में 1857 के विद्रोह की शुरूआत पलामू क्षेत्र में कब हुयी?

  • 2 अगस्त, 1857 को
  • 30 जुलाई, 1857 को
  • 10 जून, 1857 को
  • 26 सितंबर, 1857 को

Explanation:

  • पलामू में 1857 के विद्रोह की शुरूआत 26 सितंबर, 1857 को हुई।
  • विद्रोह का विवरण:
    • नीलांबर-पीतांबर (भोगता जनजाति के दोनों भाई) ने पलामू क्षेत्र में 1857 के विद्रोह को नेतृत्व प्रदान किया।
    • इन्होंने चेरो, खरवार तथा भोगता को एकत्र कर सैन्य दल का गठन किया तथा स्वयं को स्वतंत्र शासक घोषित कर दिया।
    • चकला के भवानी बख्श राय के नेतृत्व में 26 सितंबर, 1857 को चेरो जनजाति के लोग इस विद्रोह में शामिल हो गए।

संपूर्ण सिंहभूम क्षेत्र में क्रांतिकारियों का नेतृत्व किसने किया?

  • चक्रधर सिंह
  • भगवान सिंह
  • रामनाथ सिंह
  • अर्जुन सिंह

Explanation:

  • संपूर्ण सिंहभूम क्षेत्र में क्रांतिकारियों का नेतृत्व राजा अर्जुन सिंह (पोरहाट नरेश) ने किया।
  • अर्जुन सिंह से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य:
    • अर्जुन सिंह ने पौरी देवी को साक्षी मानकर विश्वासघात नहीं करने की कसम खाई।
    • 13 सितंबर, 1857 – अर्जुन सिंह ने स्वयं को ‘सिंहभूम का राजा’ घोषित कर दिया।
    • अंग्रेजों ने अर्जुन सिंह की गिरफ्तारी पर 1,000 रुपये का इनाम घोषित किया।
    • 17 अक्टूबर, 1857 – अर्जुन सिंह ने राँची के कमिश्नर डाल्टन के समक्ष आत्मसमर्पण किया, परंतु विद्रोहियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
    • 16 फरवरी, 1859 – अर्जुन सिंह ने अंततः डाल्टन के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
  • विद्रोह के अन्य प्रमुख पात्र:
    • भगवान सिंह – चाईबासा में विद्रोह का आरंभ
    • रामनाथ सिंह – चाईबासा में विद्रोह का आरंभ
    • चक्रधर सिंह – सरायकेला नरेश (अंग्रेज समर्थक)
    • हरि सिंह – खरसावां नरेश (अंग्रेज समर्थक)

1857 के विद्रोह का नेतृत्व पलामू में किसने किया था?

  • विश्वनाथ पाण्डेय
  • नीलांबर-पीतांबर
  • रामनाथ सिंह
  • अर्जुन सिंह

Explanation:

  • नीलांबर-पीतांबर (भोगता जनजाति के दोनों भाई) ने पलामू क्षेत्र में 1857 के विद्रोह को नेतृत्व प्रदान किया।
  • विद्रोह का विवरण:
    • इन्होंने चेरो, खरवार तथा भोगता को एकत्र कर सैन्य दल का गठन किया।
    • स्वयं को स्वतंत्र शासक घोषित कर दिया।
    • 26 सितंबर, 1857 – चेरो जनजाति (भवानी बख्श राय के नेतृत्व में) इस विद्रोह में शामिल हो गई।
    • 21 अक्टूबर, 1857 – विद्रोहियों ने शाहपुर पर धावा बोल दिया।
    • विद्रोहियों ने शाहपुर थाना, लेस्लीगंज थाना एवं चैनपुर गढ़ पर हमला किया।
    • 28 मार्च, 1859 – नीलांबर-पीतांबर को लेस्लीगंज (पलामू) में एक आम के पेड़ पर फाँसी दे दी गई।

1857 के विद्रोह के दौरान मुक्तिवाहिनी सेना का गठन किसने किया था?

  • विश्वनाथ शाहदेव
  • नीलांबर-पीतांबर
  • रामनाथ सिंह
  • अर्जुन सिंह

Explanation:

  • विश्वनाथ शाहदेव (नागवंशी ठाकुर) ने मुक्तवाहिनी सेना की स्थापना की।
  • विश्वनाथ शाहदेव से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य:
    • वे 1857 के विद्रोह के प्रेरक थे।
    • उन्हें बाबू कुंवर सिंह (बिहार में 1857 के विद्रोह के नेता) का मार्गदर्शन प्राप्त था।
    • उन्होंने बढ़कागढ़ में विद्रोह का नेतृत्व किया।
    • पाण्डेय गणपत राय उनके सेनापति थे।
    • विद्रोह के दौरान उन्होंने डोरंडा स्थित अंग्रेज अधिकारियों के बंगले व कचहरी जला दी तथा खजाना लूट लिया।
    • गिरफ्तारी एवं फाँसी:
      • विश्वनाथ दुबे तथा महेश नारायण शाही की गद्दारी से कैप्टन ओक्स और कैप्टन नेशन ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
      • 16 अप्रैल, 1858 – विश्वनाथ शाहदेव को राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार के समीप कदम्ब के पेड़ पर फाँसी दे दी गई।
      • 21 अप्रैल, 1858 – पाण्डेय गणपत राय को भी फाँसी दे दी गई।
      • फाँसी का आदेश छोटानागपुर के आयुक्त कमिश्नर डाल्टन ने दिया।

मुक्तिवाहिनी सेना का सेनापति कौन था?

  • विश्वनाथ शाहदेव
  • नीलांबर-पीतांबर
  • गणपत राय
  • अर्जुन सिंह

Explanation:

  • मुक्तिवाहिनी सेना की स्थापना ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव ने की थी।
  • इस सेना के सेनापति पाण्डेय गणपत राय थे।
    • गणपत राय ने डोरंडा में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह का नेतृत्व किया।
    • विश्वनाथ शाहदेव के साथ मिलकर उन्होंने डोरंडा स्थित अंग्रेज अधिकारियों के बंगले व कचहरी को जला दिया तथा खजाना लूट लिया।
    • विश्वनाथ शाहदेव एवं गणपत राय को विश्वनाथ दुबे तथा महेश नारायण शाही की गद्दारी से पकड़ा गया।
    • 21 अप्रैल, 1858 को गणपत राय को राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार के समीप फाँसी दे दी गई।

चतरा का ऐतिहासिक युद्ध कब लड़ा गया?

  • 2 अगस्त, 1857 को
  • 2 अक्टूबर, 1857 को
  • 10 जून, 1857 को
  • 26 सितंबर, 1857 को

Explanation:

  • चतरा का ऐतिहासिक युद्ध 2 अक्टूबर, 1857 को लड़ा गया।
  • युद्ध का विवरण:
    • अंग्रेजों की ओर से मेजर इंग्लिश, मेजर सिम्पसन, लेफ्टिनेंट अर्ल एवं सार्जेंट डाइनन ने नेतृत्व किया।
    • विद्रोहियों का नेतृत्व जयमंगल पाण्डेय ने किया।
    • इस लड़ाई में सूबेदार नादिर अली खाँ घायल हो गए तथा जमादार माधव सिंह भाग गया।
    • अंग्रेजों ने जमादार माधव सिंह पर 1,000 रुपये इनाम की घोषणा की।
    • 3 अक्टूबर, 1857 को सूबेदार नादिर अली खाँ व जयमंगल पाण्डेय को गिरफ्तार कर लिया गया।
    • 4 अक्टूबर, 1857 को इन्हें चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट आम के पेड़ से लटकाकर फाँसी दे दी गई।

1857 के विद्रोह के प्रमुख विद्रोहियों जयमंगल पाण्डेय तथा नादिर अली खाँ को अंग्रेजों ने किस तिथि को फांसी पर चढ़ा दिया?

  • 2 अगस्त, 1857 को
  • 2 अक्टूबर, 1857 को
  • 4 अक्टूबर, 1857 को
  • 6 सितंबर, 1857 को

Explanation:

  • 4 अक्टूबर, 1857 को सूबेदार नादिर अली खाँ व जयमंगल पाण्डेय को फाँसी दी गई।
  • घटनाक्रम:
    • 2 अक्टूबर, 1857 – चतरा का ऐतिहासिक युद्ध हुआ।
    • इस युद्ध में नादिर अली खाँ घायल हो गए तथा माधव सिंह भाग गया।
    • 3 अक्टूबर, 1857 – नादिर अली खाँ व जयमंगल पाण्डेय को गिरफ्तार कर लिया गया।
    • 4 अक्टूबर, 1857 – कमिश्नर सिम्पसन के आदेश पर चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट आम के पेड़ से लटकाकर फाँसी दे दी गई।

विश्वनाथ शाहदेव को किस तिथि को फांसी दी गयी?

  • 2 अगस्त, 1858 को
  • 2 अक्टूबर, 1858 को
  • 4 अक्टूबर, 1858 को
  • 16 अप्रैल, 1858 को

Explanation:

  • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को 16 अप्रैल, 1858 को फाँसी दी गई।
  • घटनाक्रम:
    • विश्वनाथ शाहदेव 1857 के विद्रोह के प्रेरक थे।
    • उन्होंने मुक्तवाहिनी सेना की स्थापना की।
    • विश्वनाथ दुबे तथा महेश नारायण शाही की गद्दारी से कैप्टन ओक्स ने कैप्टन नेशन के साथ मिलकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
    • 16 अप्रैल, 1858 – राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार के समीप कदम्ब के पेड़ पर फाँसी दे दी गई।
    • फाँसी का आदेश छोटानागपुर के आयुक्त कमिश्नर डाल्टन ने दिया।

गणपत राय को किस तिथि को फांसी दी गयी?

  • 2 अगस्त, 1858 को
  • 21 अप्रैल, 1858 को
  • 4 अक्टूबर, 1858 को
  • 16 अप्रैल, 1858 को

Explanation:

  • पाण्डेय गणपत राय को 21 अप्रैल, 1858 को फाँसी दी गई।
  • घटनाक्रम:
    • गणपत राय मुक्तिवाहिनी सेना के सेनापति थे।
    • विश्वनाथ शाहदेव के साथ उन्हें भी विश्वनाथ दुबे एवं महेश नारायण शाही की गद्दारी से पकड़ा गया।
    • 21 अप्रैल, 1858 – राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार के समीप कदम्ब के पेड़ पर फाँसी दे दी गई।
    • फाँसी का आदेश छोटानागपुर के आयुक्त कमिश्नर डाल्टन ने दिया।

नीलांबर-पीतांबर को किस तिथि को फांसी दी गयी थी?

  • 28 मार्च, 1859 को
  • 21 अप्रैल, 1858 को
  • 4 अक्टूबर, 1859 को
  • 16 अप्रैल, 1858 को

Explanation:

  • नीलांबर-पीतांबर को 28 मार्च, 1859 को फाँसी दी गई।
  • घटनाक्रम:
    • नीलांबर-पीतांबर पलामू में 1857 के विद्रोह के नेता थे।
    • इन्होंने चेरो, खरवार तथा भोगता जनजातियों को एकत्र कर सैन्य दल का गठन किया।
    • 26 सितंबर, 1857 – चेरो जनजाति (भवानी बख्श राय के नेतृत्व में) विद्रोह में शामिल हुई।
    • 21 अक्टूबर, 1857 – विद्रोहियों ने शाहपुर पर धावा बोला।
    • लंबे संघर्ष के बाद 28 मार्च, 1859 – लेस्लीगंज (पलामू) में एक आम के पेड़ पर फाँसी दे दी गई।

टिकैत उमरांव सिंह को किस तिथि को अंग्रेजों द्वारा फांसी दी गयी थी?

  • 28 मार्च, 1859 को
  • 21 अप्रैल, 1858 को
  • 8 जनवरी, 1858 को
  • 16 अप्रैल, 1858 को

Explanation:

  • टिकैत उमरांव सिंह को 8 जनवरी, 1858 को फाँसी दी गई।
  • घटनाक्रम:
    • उमरांव सिंह ओरमांझी के 12 गाँवों के जमींदार थे।
    • राँची के कमिश्नर डाल्टन ने उमरांव सिंह एवं उसके दीवान शेख भिखारी को गिरफ्तार कर लिया।
    • 8 जनवरी, 1858 – टैगोर हिल के पास इन्हें फाँसी दे दी गई।
    • इस फाँसी स्थल को ‘टुंगरी फाँसी’ के नाम से जाना जाता है।

शेख भिखारी को किस तिथि को अंग्रेजों द्वारा फांसी दी गयी थी?

  • 28 मार्च, 1859 को
  • 21 अप्रैल, 1858 को
  • 8 जनवरी, 1858 को
  • 16 अप्रैल, 1858 को

Explanation:

  • शेख भिखारी को 8 जनवरी, 1858 को फाँसी दी गई।
  • घटनाक्रम:
    • शेख भिखारी उमरांव सिंह के दीवान थे।
    • उमरांव सिंह एवं शेख भिखारी को राँची के कमिश्नर डाल्टन ने गिरफ्तार कर लिया।
    • 8 जनवरी, 1858 – टैगोर हिल के पास इन्हें फाँसी दे दी गई।
    • इस फाँसी स्थल को ‘टुंगरी फाँसी’ के नाम से जाना जाता है।

झारखण्ड का कौन-सा क्षेत्र 1857 के विद्रोह से अछूता रहा?

  • संथाल परगना
  • पलामू
  • सिंहभूम
  • राँची

Explanation:

  • संथाल परगना 1857 के विद्रोह से अछूता रहा।
  • कारण:
    • संथाल परगना में 1855-56 का संथाल विद्रोह हुआ था, जिसके कारण अंग्रेजों ने यहाँ कड़ा नियंत्रण स्थापित कर लिया था।
    • संथाल परगना की अलग भौगोलिक एवं जनजातीय संरचना के कारण 1857 का विद्रोह यहाँ नहीं फैल पाया।
    • वहीं पलामू, सिंहभूम, राँची, हजारीबाग, मानभूम आदि क्षेत्रों में विद्रोह फैल गया था।

1857 के विद्रोह के दौरान चतरा का उपायुक्त कौन था?

  • रफसेज
  • विल्किंसन
  • सिम्पसन
  • टेलन

Explanation:

  • 1857 के विद्रोह के दौरान चतरा के उपायुक्त मेजर सिम्पसन थे।
  • सिम्पसन की भूमिका:
    • वे हजारीबाग के उपायुक्त भी थे।
    • 30 जुलाई, 1857 को हजारीबाग में विद्रोह के बाद वे कलकत्ता भाग गए।
    • 2 अक्टूबर, 1857 – चतरा के ऐतिहासिक युद्ध में उन्होंने अंग्रेजी सेना का नेतृत्व किया।
    • उनके आदेश पर 4 अक्टूबर, 1857 को नादिर अली खाँ एवं जयमंगल पाण्डेय को फाँसी दी गई।

1857 के विद्रोह के दौरान धनबाद का उपायुक्त कौन था?

  • ओकस
  • विल्किंसन
  • सिम्पसन
  • टेलन

Explanation:

  • धनबाद के उपायुक्त ओकस (G.N. Oakes) थे।
  • ओकस की भूमिका:
    • 5 अगस्त, 1857 – मानभूम में विद्रोह के बाद वे रानीगंज भाग गए।
    • सितंबर में वापस लौटने पर उन्होंने पंचेत के राजा नीलमणि सिंह से मदद मांगी।
    • नीलमणि सिंह ने अंग्रेजों की मदद करने के बजाय संथालों को भड़काया।
    • ओकस ने कैप्टेन माउंट गोमरी को संथालों को नियंत्रित करने हेतु भेजा।
    • उन्होंने कैप्टन ओक्स के रूप में विश्वनाथ शाहदेव को गिरफ्तार करने में भी भूमिका निभाई।

1857 के विद्रोह के दौरान हजारीबाग का उपायुक्त कौन था?

  • ओकस
  • विल्किंसन
  • सिम्पसन
  • टेलन

Explanation:

  • हजारीबाग के उपायुक्त मेजर सिम्पसन थे।
  • सिम्पसन की भूमिका:
    • 30 जुलाई, 1857 – हजारीबाग में विद्रोह हुआ।
    • सिम्पसन सहित अंग्रेज अधिकारी कलकत्ता भाग गए।
    • वे चतरा में भी उपायुक्त के रूप में तैनात थे।
    • 4 अक्टूबर, 1857 – उनके आदेश पर नादिर अली खाँ एवं जयमंगल पाण्डेय को फाँसी दी गई।

1857 के विद्रोह के दौरान छोटानागपुर क्षेत्र का आयुक्त कौन था?

  • डाल्टन
  • विल्किंसन
  • सिम्पसन
  • टेलन

Explanation:

  • छोटानागपुर क्षेत्र के आयुक्त कमिश्नर डाल्टन थे।
  • डाल्टन की भूमिका:
    • राँची में विद्रोह के बाद उनकी सलाह पर अगस्त में पूरे छोटानागपुर में मार्शल कानून लागू कर दिया गया।
    • उन्होंने उमरांव सिंह एवं शेख भिखारी को गिरफ्तार करवाया।
    • 8 जनवरी, 1858 – उनके आदेश पर टैगोर हिल के पास ‘टुंगरी फाँसी’ दी गई।
    • 16 अप्रैल, 1858 – उनके आदेश पर विश्वनाथ शाहदेव को फाँसी दी गई।
    • 21 अप्रैल, 1858 – उनके आदेश पर गणपत राय को फाँसी दी गई।
    • 3 फरवरी, 1858 – डाल्टन पलामू भी गए।
    • 16 फरवरी, 1859 – अर्जुन सिंह ने डाल्टन के समक्ष आत्मसमर्पण किया।

शेख भिखारी को किस स्थान पर फांसी दी गयी थी?

  • टैगोर हिल, राँची
  • ओरमांझी, राँची
  • चुटूपालू घाटी, रामगढ़
  • सारंडा वन, सिंहभूम

Explanation:

  • शेख भिखारी को टैगोर हिल, राँची में फाँसी दी गई थी।
  • इस फाँसी स्थल को ‘टुंगरी फाँसी’ के नाम से जाना जाता है।
  • उनके साथ टिकैत उमरांव सिंह को भी इसी स्थान पर फाँसी दी गई थी।
  • 1857 के विद्रोह के प्रमुख शहीद – फाँसी तिथि एवं स्थान
    • पाण्डेय गणपत राय – फाँसी : 21 अप्रैल, 1858 – स्थान: राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार के समीप (कदम्ब का पेड़) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • सूबेदार नादिर अली खाँ – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • जयमंगल पाण्डेय – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • शेख भिखारी – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • टिकैत उमरांव सिंह – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • नीलांबर-पीतांबर – फाँसी : 28 मार्च, 1859 – स्थान: लेस्लीगंज (पलामू) – (आम का पेड़)
    • दीवान जग्गू – फाँसी : 20 नवंबर, 1857 – स्थान: चक्रधरपुर – (अर्जुन सिंह के दीवान)

टिकैत उमरांव सिंह को किस स्थान पर फांसी दी गयी थी?

  • टैगोर हिल, राँची
  • ओरमांझी, राँची
  • चुटूपालू घाटी, रामगढ़
  • सारंडा वन, सिंहभूम

Explanation:

  • टिकैत उमरांव सिंह को टैगोर हिल, राँची में फाँसी दी गई थी।
  • इस फाँसी स्थल को ‘टुंगरी फाँसी’ के नाम से जाना जाता है।
  • उनके साथ शेख भिखारी को भी इसी स्थान पर फाँसी दी गई थी।
  • फाँसी का आदेश कमिश्नर डाल्टन ने दिया था।
  • 1857 के विद्रोह के प्रमुख शहीद – फाँसी तिथि एवं स्थान
    • पाण्डेय गणपत राय – फाँसी : 21 अप्रैल, 1858 – स्थान: राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार के समीप (कदम्ब का पेड़) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • सूबेदार नादिर अली खाँ – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • जयमंगल पाण्डेय – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • शेख भिखारी – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • टिकैत उमरांव सिंह – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • नीलांबर-पीतांबर – फाँसी : 28 मार्च, 1859 – स्थान: लेस्लीगंज (पलामू) – (आम का पेड़)
    • दीवान जग्गू – फाँसी : 20 नवंबर, 1857 – स्थान: चक्रधरपुर – (अर्जुन सिंह के दीवान)

नीलांबर-पीतांबर को किस स्थान पर फांसी दी गयी थी?

  • टैगोर हिल, राँची
  • ओरमांझी, राँची
  • चुटूपालू घाटी, रामगढ़
  • लेस्लीगंज, पलामू

Explanation:

  • नीलांबर-पीतांबर को लेस्लीगंज (पलामू) में फाँसी दी गई थी।
  • विशेष:
    • इन्हें 28 मार्च, 1859 को एक आम के पेड़ पर लटकाकर फाँसी दी गई।
    • ये भोगता जनजाति के नेता थे।
    • इन्होंने पलामू में विद्रोह का नेतृत्व किया था।
  • 1857 के विद्रोह के प्रमुख शहीद – फाँसी तिथि एवं स्थान
    • पाण्डेय गणपत राय – फाँसी : 21 अप्रैल, 1858 – स्थान: राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार के समीप (कदम्ब का पेड़) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • सूबेदार नादिर अली खाँ – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • जयमंगल पाण्डेय – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • शेख भिखारी – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • टिकैत उमरांव सिंह – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • नीलांबर-पीतांबर – फाँसी : 28 मार्च, 1859 – स्थान: लेस्लीगंज (पलामू) – (आम का पेड़)
    • दीवान जग्गू – फाँसी : 20 नवंबर, 1857 – स्थान: चक्रधरपुर – (अर्जुन सिंह के दीवान)

ठाकुर विश्वनाथ को किस स्थान पर फांसी दी गयी थी?

  • टैगोर हिल, राँची
  • ओरमांझी, राँची
  • राँची जिला स्कूल के द्वार पर
  • लेस्लीगंज, पलामू

Explanation:

  • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार के समीप फाँसी दी गई थी।
  • विशेष:
    • इन्हें 16 अप्रैल, 1858 को कदम्ब के पेड़ पर लटकाकर फाँसी दी गई।
    • ये नागवंशी ठाकुर एवं मुक्तवाहिनी सेना के संस्थापक थे।
    • फाँसी का आदेश कमिश्नर डाल्टन ने दिया था।
  • 1857 के विद्रोह के प्रमुख शहीद – फाँसी तिथि एवं स्थान
    • पाण्डेय गणपत राय – फाँसी : 21 अप्रैल, 1858 – स्थान: राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार के समीप (कदम्ब का पेड़) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • सूबेदार नादिर अली खाँ – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • जयमंगल पाण्डेय – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • शेख भिखारी – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • टिकैत उमरांव सिंह – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • नीलांबर-पीतांबर – फाँसी : 28 मार्च, 1859 – स्थान: लेस्लीगंज (पलामू) – (आम का पेड़)
    • दीवान जग्गू – फाँसी : 20 नवंबर, 1857 – स्थान: चक्रधरपुर – (अर्जुन सिंह के दीवान)
    • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव – फाँसी : 16 अप्रैल, 1858 – स्थान: राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार – (कदम्ब के पेड़)- आदेश: कमिश्नर डाल्टन

गणपत राय को किस स्थान पर फांसी दी गयी थी?

  • टैगोर हिल, राँची
  • ओरमांझी, राँची
  • राँची जिला स्कूल के द्वार पर
  • लेस्लीगंज, पलामू

Explanation:

  • पाण्डेय गणपत राय को राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार के समीप फाँसी दी गई थी।
  • विशेष:
    • इन्हें 21 अप्रैल, 1858 को कदम्ब के पेड़ पर लटकाकर फाँसी दी गई।
    • ये मुक्तिवाहिनी सेना के सेनापति थे।
    • फाँसी का आदेश कमिश्नर डाल्टन ने दिया था।
  • 1857 के विद्रोह के प्रमुख शहीद – फाँसी तिथि एवं स्थान
    • पाण्डेय गणपत राय – फाँसी : 21 अप्रैल, 1858 – स्थान: राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार के समीप (कदम्ब का पेड़) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • सूबेदार नादिर अली खाँ – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • जयमंगल पाण्डेय – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • शेख भिखारी – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • टिकैत उमरांव सिंह – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • नीलांबर-पीतांबर – फाँसी : 28 मार्च, 1859 – स्थान: लेस्लीगंज (पलामू) – (आम का पेड़)
    • दीवान जग्गू – फाँसी : 20 नवंबर, 1857 – स्थान: चक्रधरपुर – (अर्जुन सिंह के दीवान)
    • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव – फाँसी : 16 अप्रैल, 1858 – स्थान: राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार – (कदम्ब के पेड़)- आदेश: कमिश्नर डाल्टन

जयमंगल पाण्डेय को किस स्थान पर फांसी दी गयी थी?

  • टैगोर हिल, राँची
  • पंसीहारी तालाब, चतरा
  • राँची जिला स्कूल के द्वार पर
  • लेस्लीगंज, पलामू

Explanation:

  • जयमंगल पाण्डेय को चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट फाँसी दी गई थी।
  • विशेष:
    • इन्हें 4 अक्टूबर, 1857 को आम के पेड़ से लटकाकर फाँसी दी गई।
    • उनके साथ सूबेदार नादिर अली खाँ को भी इसी स्थान पर फाँसी दी गई।
    • फाँसी का आदेश कमिश्नर सिम्पसन ने दिया था।
  • 1857 के विद्रोह के प्रमुख शहीद – फाँसी तिथि एवं स्थान
    • पाण्डेय गणपत राय – फाँसी : 21 अप्रैल, 1858 – स्थान: राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार के समीप (कदम्ब का पेड़) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • सूबेदार नादिर अली खाँ – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • जयमंगल पाण्डेय – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • शेख भिखारी – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • टिकैत उमरांव सिंह – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • नीलांबर-पीतांबर – फाँसी : 28 मार्च, 1859 – स्थान: लेस्लीगंज (पलामू) – (आम का पेड़)
    • दीवान जग्गू – फाँसी : 20 नवंबर, 1857 – स्थान: चक्रधरपुर – (अर्जुन सिंह के दीवान)
    • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव – फाँसी : 16 अप्रैल, 1858 – स्थान: राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार – (कदम्ब के पेड़)- आदेश: कमिश्नर डाल्टन

नादिर अली खाँ को किस स्थान पर फांसी दी गयी थी?

  • टैगोर हिल, राँची
  • पंसीहारी तालाब, चतरा
  • राँची जिला स्कूल के द्वार पर
  • लेस्लीगंज, पलामू

Explanation:

  • सूबेदार नादिर अली खाँ को चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट फाँसी दी गई थी।
  • विशेष:
    • इन्हें 4 अक्टूबर, 1857 को आम के पेड़ से लटकाकर फाँसी दी गई।
    • उनके साथ जयमंगल पाण्डेय को भी इसी स्थान पर फाँसी दी गई।
    • 2 अक्टूबर, 1857 के चतरा युद्ध में ये घायल हो गए थे।
    • फाँसी का आदेश कमिश्नर सिम्पसन ने दिया था।
  • 1857 के विद्रोह के प्रमुख शहीद – फाँसी तिथि एवं स्थान
    • पाण्डेय गणपत राय – फाँसी : 21 अप्रैल, 1858 – स्थान: राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार के समीप (कदम्ब का पेड़) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • सूबेदार नादिर अली खाँ – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • जयमंगल पाण्डेय – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • शेख भिखारी – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • टिकैत उमरांव सिंह – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • नीलांबर-पीतांबर – फाँसी : 28 मार्च, 1859 – स्थान: लेस्लीगंज (पलामू) – (आम का पेड़)
    • दीवान जग्गू – फाँसी : 20 नवंबर, 1857 – स्थान: चक्रधरपुर – (अर्जुन सिंह के दीवान)
    • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव – फाँसी : 16 अप्रैल, 1858 – स्थान: राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार – (कदम्ब के पेड़)- आदेश: कमिश्नर डाल्टन

ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को किस पेड़ पर फांसी दी थी?

  • आम
  • बरगद
  • कदम्ब
  • साल

Explanation:

  • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को कदम्ब के पेड़ पर फाँसी दी गई थी।
  • घटनाक्रम:
    • 16 अप्रैल, 1858 – विश्वनाथ शाहदेव को राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार के समीप कदम्ब के पेड़ पर फाँसी दी गई।
    • ये नागवंशी ठाकुर एवं मुक्तवाहिनी सेना के संस्थापक थे।
    • फाँसी का आदेश छोटानागपुर के आयुक्त कमिश्नर डाल्टन ने दिया था।
    • विश्वनाथ शाहदेव को विश्वनाथ दुबे तथा महेश नारायण शाही की गद्दारी से पकड़ा गया था।
  • 1857 के विद्रोह के प्रमुख शहीद – फाँसी तिथि एवं स्थान
    • पाण्डेय गणपत राय – फाँसी : 21 अप्रैल, 1858 – स्थान: राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार के समीप (कदम्ब का पेड़) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • सूबेदार नादिर अली खाँ – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • जयमंगल पाण्डेय – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • शेख भिखारी – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • टिकैत उमरांव सिंह – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • नीलांबर-पीतांबर – फाँसी : 28 मार्च, 1859 – स्थान: लेस्लीगंज (पलामू) – (आम का पेड़)
    • दीवान जग्गू – फाँसी : 20 नवंबर, 1857 – स्थान: चक्रधरपुर – (अर्जुन सिंह के दीवान)
    • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव – फाँसी : 16 अप्रैल, 1858 – स्थान: राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार – (कदम्ब के पेड़)- आदेश: कमिश्नर डाल्टन

गणपत राय को किस पेड़ पर फांसी दी थी?

  • आम
  • बरगद
  • कदम्ब
  • साल

Explanation:

  • पाण्डेय गणपत राय को कदम्ब के पेड़ पर फाँसी दी गई थी।
  • घटनाक्रम:
    • 21 अप्रैल, 1858 – गणपत राय को राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार के समीप कदम्ब के पेड़ पर फाँसी दी गई।
    • ये मुक्तिवाहिनी सेना के सेनापति थे।
    • फाँसी का आदेश कमिश्नर डाल्टन ने दिया था।
    • विश्वनाथ शाहदेव के साथ इन्हें भी विश्वनाथ दुबे एवं महेश नारायण शाही की गद्दारी से पकड़ा गया था।
  • 1857 के विद्रोह के प्रमुख शहीद – फाँसी तिथि एवं स्थान
    • पाण्डेय गणपत राय – फाँसी : 21 अप्रैल, 1858 – स्थान: राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार के समीप (कदम्ब का पेड़) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • सूबेदार नादिर अली खाँ – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • जयमंगल पाण्डेय – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • शेख भिखारी – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • टिकैत उमरांव सिंह – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • नीलांबर-पीतांबर – फाँसी : 28 मार्च, 1859 – स्थान: लेस्लीगंज (पलामू) – (आम का पेड़)
    • दीवान जग्गू – फाँसी : 20 नवंबर, 1857 – स्थान: चक्रधरपुर – (अर्जुन सिंह के दीवान)
    • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव – फाँसी : 16 अप्रैल, 1858 – स्थान: राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार – (कदम्ब के पेड़)- आदेश: कमिश्नर डाल्टन

नीलांबर-पीतांबर को किस पेड़ पर फांसी दी थी?

  • आम
  • बरगद
  • कदम्ब
  • साल

Explanation:

  • नीलांबर-पीतांबर को आम के पेड़ पर फाँसी दी गई थी।
  • घटनाक्रम:
    • 28 मार्च, 1859 – नीलांबर-पीतांबर को लेस्लीगंज (पलामू) में आम के पेड़ पर लटकाकर फाँसी दी गई।
    • ये भोगता जनजाति के नेता थे जिन्होंने पलामू में विद्रोह का नेतृत्व किया था।
    • इन्होंने चेरो, खरवार तथा भोगता जनजातियों को एकत्र कर सैन्य दल का गठन किया था।
  • 1857 के विद्रोह के प्रमुख शहीद – फाँसी तिथि एवं स्थान
    • पाण्डेय गणपत राय – फाँसी : 21 अप्रैल, 1858 – स्थान: राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार के समीप (कदम्ब का पेड़) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • सूबेदार नादिर अली खाँ – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • जयमंगल पाण्डेय – फाँसी : 4 अक्टूबर, 1857 – स्थान: चतरा के ‘पंसीहारी तालाब’ के निकट (आम का पेड़) – आदेश: कमिश्नर सिम्पसन
    • शेख भिखारी – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • टिकैत उमरांव सिंह – फाँसी : 8 जनवरी, 1858 – स्थान: टैगोर हिल, राँची (‘टुंगरी फाँसी’) – आदेश: कमिश्नर डाल्टन
    • नीलांबर-पीतांबर – फाँसी : 28 मार्च, 1859 – स्थान: लेस्लीगंज (पलामू) – (आम का पेड़)
    • दीवान जग्गू – फाँसी : 20 नवंबर, 1857 – स्थान: चक्रधरपुर – (अर्जुन सिंह के दीवान)
    • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव – फाँसी : 16 अप्रैल, 1858 – स्थान: राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वार – (कदम्ब के पेड़)- आदेश: कमिश्नर डाल्टन

झारखण्ड में वहाबी आंदोलन का प्रसार किसने किया?

  • शाह मो. हुसैन
  • नादिर खा
  • मुबारक हुसैन
  • इस्माइल औलिया

Explanation:

  • झारखण्ड में वहाबी आंदोलन का प्रसार – शाह मोहम्मद हुसैन ने किया।
  • वहाबी आंदोलन के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य:
    • राजमहल में वहाबी आंदोलन की शाखा खोली गई थी।
    • संथाल परगना क्षेत्र में पीर हुसैन ने वहाबी आंदोलन का प्रचार-प्रसार किया।
    • पाकुड़ क्षेत्र के इब्राहिम मंडल को वहाबी आंदोलन के दौरान आजीवन कारावास की सजा दी गई थी।

संथाल परगना क्षेत्र में वहाबी आंदोलन का प्रसार किसने किया?

  • शाह मो. हुसैन
  • नादिर खा
  • पीर हुसैन
  • इस्माइल औलिया

Explanation:

  • संथाल परगना क्षेत्र में वहाबी आंदोलन का प्रसार – पीर हुसैन ने किया।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य:
    • राजमहल में वहाबी आंदोलन की शाखा शाह मोहम्मद हुसैन ने खोली थी।
    • पाकुड़ क्षेत्र के इब्राहिम मंडल को आजीवन कारावास की सजा दी गई थी।

उग्र राष्ट्रवाद के दौर में झारखण्ड में क्रांतिकारी गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र था ?

  • पलामू
  • राँची
  • देवघर
  • बोकारो

Explanation:

  • उग्र राष्ट्रवाद के दौर में झारखण्ड में क्रांतिकारी गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र – देवघर था।
  • देवघर में क्रांतिकारी गतिविधियाँ:
    • ‘शीलेर बाड़ी’ मकान में 1908 के अलीपुर बम कांड से जुड़े कई बंगाली क्रांतिकारी छुपकर रहते थे।
    • इस मकान का प्रयोग बम बनाने एवं प्रशिक्षण हेतु किया जाता था।
    • 1915 में देवघर के ‘शीलेर बाड़ी’ से बम बनाने की सामग्रियाँ बरामद की गईं।
    • वारीन्द्र कुमार घोष द्वारा देवघर में स्वर्ण संघ (गोल्डन लीग) का गठन किया गया था।
    • देवघर में स्थित मित्रा उच्च विद्यालय के प्राचार्य शांति कुमार बख्शी द्वारा युवाओं को क्रांतिकारी प्रशिक्षण प्रदान किया जाता था।

देवघर के किस मकान का प्रयोग क्रांतिकारियों द्वारा बम बनाने तथा प्रशिक्षण हेतु किया जाता था?

  • शीलेर बाड़ी
  • शांति निवास
  • बाबा मेंशन
  • दयाल हाउस

Explanation:

  • देवघर के ‘शीलेर बाड़ी’ मकान का प्रयोग क्रांतिकारियों द्वारा बम बनाने एवं प्रशिक्षण हेतु किया जाता था।
  • विशेषताएँ:
    • 1908 के अलीपुर बम कांड से जुड़े कई बंगाली क्रांतिकारी यहाँ छुपकर रहते थे।
    • 1915 में इसी मकान से बम बनाने की सामग्रियाँ बरामद की गई थीं।

देवघर के शीलेर बाड़ी से बम बनाने की सामग्रियाँ किस वर्ष बरामद हुयी थी?

  • 1857
  • 1911
  • 1920
  • 1915

Explanation:

  • 1915 में देवघर के ‘शीलेर बाड़ी’ नामक मकान से बम बनाने की सामग्रियाँ बरामद की गई थीं।
  • यह मकान 1908 के अलीपुर बम कांड से जुड़े क्रांतिकारियों का अड्डा था।

स्वर्ण संघ (गोल्डन लीग) का संस्थापक कौन थे ।

  • वारीन्द्र कुमार घोष
  • अरविंद घोष
  • वैद्यनाथ विश्वास
  • राज नारायण बसु

Explanation:

  • स्वर्ण संघ (गोल्डन लीग) के संस्थापक वारीन्द्र कुमार घोष थे।
  • वारीन्द्र कुमार घोष के बारे में:
    • वे एक प्रसिद्ध क्रांतिकारी थे।
    • वे अरविंद घोष के भाई थे।
    • उन्होंने देवघर में स्वर्ण संघ (गोल्डन लीग) का गठन किया था।

स्वर्ण संघ (गोल्डन लीग) का स्थापना किस जिले में किया गया था ।

  • पलामू
  • हजारीबाग
  • रांची
  • देवघर

Explanation:

  • स्वर्ण संघ (गोल्डन लीग) का गठन देवघर में किया गया था।
  • स्थापना:
    • इसे वारीन्द्र कुमार घोष ने स्थापित किया था।
    • देवघर उग्र राष्ट्रवाद के दौरान झारखंड में क्रांतिकारी गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र था।

देवघर षड़यंत्र केस किस वर्ष हुआ?

  • 1857
  • 1927
  • 1920
  • 1915

Explanation:

  • देवघर षड़यंत्र केस 1927 में हुआ था।
  • घटनाक्रम:
    • वर्ष 1927 में वीरेन्द्र नाथ भट्टाचार्य के घर छापा मारकर हथियार तथा क्रांतिकारी साहित्य बरामद किया गया था।
    • इस केस में 20 व्यक्तियों की गिरफ्तारी हुई।
    • गिरफ्तार किए गए प्रमुख व्यक्ति:
      • वीरेन्द्र नाथ भट्टाचार्य
      • सुरेन्द्र नाथ भट्टाचार्य
      • तेजेश चंद्र घोष आदि।

निम्नलिखित में से कौन-से आयोग ने उस ज्ञापन को प्रस्तुत किया था, जिसमें अलग झारखण्ड राज्य के गठन की मांग की गयी थी?

  • सरकारिया आयोग
  • ऐचीसन आयोग
  • साइमन आयोग
  • टॉटनहम आयोग

Explanation:

  • 1928 में छोटानागपुर उन्नति समाज ने साइमन कमीशन को छोटानागपुर राज्य के गठन हेतु मांग पत्र सौंपा था।
  • साइमन कमीशन के बारे में:
    • साइमन कमीशन 1928 में झारखण्ड आया था।
    • राँची में श्याम कृष्ण सहाय के नेतृत्व में ‘साइमन कमीशन वापस जाओ’ के नारे लगाए गए।
    • हजारीबाग में देवकी नंदन लाल एवं पी. सी. मित्रा ने काला झंडा दिखाकर विरोध किया।
    • छोटानागपुर उन्नति समाज ने पृथक राज्य की मांग वाला ज्ञापन प्रस्तुत किया।

नीलाम्बर और पीताम्बर शाही नामक दोनों भाई जिन्होंने स्वाधीनता आंदोलन के दौरान अंग्रेजों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी थी, किसके नेता थे?

  • संथाल जनजाति
  • खरवार जनजाति
  • सबर जनजाति
  • इनमें से कोई नहीं ।

Explanation:

  • नीलांबर-पीतांबर भोगता जनजाति के नेता थे, जो खरवार जनजाति की एक उप-शाखा है।
  • विद्रोह का विवरण:
    • इन्होंने पलामू में 1857 के विद्रोह को नेतृत्व प्रदान किया।
    • इन्होंने चेरो, खरवार तथा भोगता को एकत्र कर सैन्य दल का गठन किया तथा स्वयं को स्वतंत्र शासक घोषित कर दिया।
    • चकला के भवानी बख्श राय के नेतृत्व में 26 सितंबर, 1857 को चेरो जनजाति विद्रोह में शामिल हुई।
    • 28 मार्च, 1859 – नीलांबर-पीतांबर को लेस्लीगंज (पलामू) में आम के पेड़ पर फाँसी दी गई।

स्वतंत्रता सेनानी पोटो सरदार था- 6th JPSC (PT) – 2016

  • संथाल जनजाति
  • खरवार जनजाति
  • सबर जनजाति
  • हो जनजाति

Explanation:

  • पोटो सरदार हो जनजाति के स्वतंत्रता सेनानी थे।
  • हो जनजाति के बारे में:
    • हो जनजाति सिंहभूम क्षेत्र में मुख्य रूप से निवास करती है।
    • 1857 के विद्रोह में हो जनजाति ने राजा अर्जुन सिंह के नेतृत्व में भाग लिया था।

निम्नलिखित में से कौन झारखण्ड के स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे?

  • धनंजय महतो
  • बिरसा मुंडा
  • बिस्माल खान
  • कानू मुर्मू

Explanation:

  • बिस्माल खान झारखण्ड के स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे।
  • अन्य विकल्पों के बारे में:
    • धनंजय महतो – झारखण्ड के स्वतंत्रता सेनानी (आदिवासी नेता)
    • बिरसा मुंडा – झारखण्ड के स्वतंत्रता सेनानी (मुण्डा विद्रोह के नेता)
    • कानू मुर्मू – झारखण्ड के स्वतंत्रता सेनानी (संथाल विद्रोह के नेता)
    • बिस्माल खान – असम के स्वतंत्रता सेनानी (पठान नेता)

भारत की आज़ादी के पहले युद्ध के दौरान, 1857 में, 12 गांवों के एक जमींदार ने भारतीय सेना की डोरंडा (राँची) में मदद की और ब्रिटिश कंपनी के खिलाफ़ संथाल आदिवासियों को जुटाया। इस जमींदार को पहचानिए ।

  • माधो सिंह
  • गणपत राव
  • शेख भिखारी
  • विश्वनाथ शाहदेव

Explanation:

  • शेख भिखारी ओरमांझी के 12 गाँवों के जमींदार उमराव सिंह के दीवान थे।
  • शेख भिखारी के बारे में:
    • उन्होंने डोरंडा (राँची) में विद्रोह में भाग लिया।
    • उन्होंने उमराव सिंह के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया।
    • राँची के कमिश्नर डाल्टन ने उमराव सिंह एवं शेख भिखारी को गिरफ्तार कर लिया।
    • 8 जनवरी, 1858 – टैगोर हिल के पास ‘टुंगरी फाँसी’ पर फाँसी दे दी गई।

निम्न में से किसने भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम 1857, जिसे सिपाही विद्रोह भी कहा गया है, में भाग लिया था?

  • शहीद शाहिद लाल
  • शेख भिखारी
  • विश्वनाथ शाहदेव
  • सभी विकल्प सही हैं।

Explanation:

  • शहीद शाहिद लाल, शेख भिखारी तथा विश्वनाथ शाहदेव – तीनों ने 1857 के विद्रोह में भाग लिया था।
  • विद्रोह में भूमिका:
    • शेख भिखारी – राँची/डोरंडा में विद्रोह
    • विश्वनाथ शाहदेव – मुक्तवाहिनी सेना के संस्थापक, डोरंडा विद्रोह
    • शहीद शाहिद लाल – 1857 के विद्रोह के अन्य प्रमुख नेताओं में से एक

झारखण्ड के निम्नलिखित नेताओं में से किन्होंने 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी ?

  • गंगा नारायण सिंह
  • मौजी मानकी
  • शेख भिखारी
  • भूखन सिंह

Explanation:

  • शेख भिखारी ने 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
  • अन्य विकल्पों के बारे में:
    • गंगा नारायण सिंह – 1832-33 के कोल विद्रोह से संबंधित
    • मौजी मानकी – 1831-32 कोल विद्रोह के नेता
    • शेख भिखारी – 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों के खिलाफ लड़े
    • भूखन सिंह – 1855 के संथाल विद्रोह से संबंधित

भारतीय स्वतंत्रता का पहला युद्ध, 1857 झारखण्ड में 30 जुलाई को एक स्थान पर शुरू हुआ, जब संथालों ने ब्रिटिश कंपनी के खिलाफ विद्रोह किया, जेल तोड़ दी और कैदियों को मुक्त कर दिया। निम्न में से कौन-सा स्थान संदर्भित किया जा रहा है?

  • गुमला
  • जामताड़ा
  • हजारीबाग
  • दुमका

Explanation:

  • 30 जुलाई, 1857 को हजारीबाग में विद्रोह हुआ था।
  • घटनाक्रम:
    • 25 जुलाई, 1857 – दानापुर रेजिमेंट के सैनिकों ने विद्रोह कर दिया।
    • इसकी सूचना पाकर हजारीबाग स्थित रामगढ़ बटालियन के सैनिक उत्साहित हो गए।
    • 30 जुलाई, 1857 – रामगढ़ बटालियन ने हजारीबाग में विद्रोह कर दिया।
    • विद्रोहियों ने जेल से कैदियों को छुड़ा लिया।
    • मेजर सिम्पसन (उपायुक्त) सहित अंग्रेज अधिकारी कलकत्ता भाग गए।
    • इस विद्रोह में संथाल शामिल थे, हालाँकि मुख्य नेतृत्व रामगढ़ बटालियन के सैनिकों का था।

1857 के विद्रोह के दौरान रामगढ़ बटालियन का मुख्यालय कहां था?

  • गुमला
  • राँची
  • हजारीबाग
  • दुमका

Explanation:

  • रामगढ़ बटालियन का मुख्यालय राँची में अवस्थित था।
  • घटनाक्रम:
    • 25 जुलाई, 1857 – दानापुर रेजिमेंट के सैनिकों ने विद्रोह कर दिया।
    • इसकी सूचना पाकर हजारीबाग स्थित रामगढ़ बटालियन के सैनिक उत्साहित हो गए।
    • 30 जुलाई, 1857 – रामगढ़ बटालियन ने हजारीबाग में विद्रोह कर दिया।
    • विद्रोह के बाद मेजर सिम्पसन (उपायुक्त) सहित अंग्रेज अधिकारी कलकत्ता भाग गए।
    • रामगढ़ के राजा शम्भू नारायण सिंह ने विद्रोह की सूचना गवर्नर जनरल लार्ड कैनिंग को भेजी।

जयमंगल पांडेय के नेतृत्व के अंतर्गत 1857 का विद्रोह कहाँ शुरू हुआ था ?

  • हजारीबाग
  • डोरंडा
  • गोड्डा
  • राजमहल

Explanation:

  • जयमंगल पाण्डेय के नेतृत्व में 1857 का विद्रोह डोरंडा (राँची) में शुरू हुआ था।
  • घटनाक्रम:
    • राँची के कमिश्नर डाल्टन ने विद्रोह दबाने हेतु लेफ्टिनेंट ग्राहम को रामगढ़ भेजा।
    • रामगढ़ के जमादार माधव सिंह एवं डोरंडा के सूबेदार नादिर अली खाँ व सूबेदार जयमंगल पाण्डेय ने विद्रोह कर दिया।
    • जयमंगल पाण्डेय ने डोरंडा में विद्रोह का नेतृत्व किया।
    • विद्रोहियों ने ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के नेतृत्व में डोरंडा स्थित अंग्रेज अधिकारियों के बंगले व कचहरी जला दी तथा खजाना लूट लिया।
    • 2 अक्टूबर, 1857 – चतरा के ऐतिहासिक युद्ध में जयमंगल पाण्डेय ने विद्रोहियों का नेतृत्व किया।
    • 4 अक्टूबर, 1857 – जयमंगल पाण्डेय को पंसीहारी तालाब, चतरा में फाँसी दे दी गई।

1857 के विद्रोह में पलामू में अंग्रेजों के विरुद्ध किस कबीलाई ने विद्रोह किया था?

  • चेरो
  • भोक्ता
  • खोंड
  • इनमें से कोई नहीं

Explanation:

  • भोगता (भोक्ता) जनजाति ने पलामू में अंग्रेजों के विरुद्ध 1857 के विद्रोह में भाग लिया।
  • नेतृत्व:
    • नीलांबर-पीतांबर (भोगता जनजाति के दोनों भाई) ने पलामू क्षेत्र में विद्रोह का नेतृत्व किया।
    • इन्होंने चेरो, खरवार तथा भोगता को एकत्र कर सैन्य दल का गठन किया।
    • 26 सितंबर, 1857 – चकला के भवानी बख्श राय के नेतृत्व में चेरो जनजाति विद्रोह में शामिल हुई।
    • 28 मार्च, 1859 – नीलांबर-पीतांबर को लेस्लीगंज (पलामू) में फाँसी दे दी गई।

1857 की क्रांति में सम्पूर्ण सिंहभूम क्षेत्र में क्रांतिकारियों के प्रमुख नेता कौन थे?

  • राजा दुर्जन साल
  • राजा अर्जुन सिंह
  • ठाकुर विश्वनाथ शाही
  • टिकैत उमराव सिंह

Explanation:

  • संपूर्ण सिंहभूम क्षेत्र में क्रांतिकारियों का नेतृत्व राजा अर्जुन सिंह (पोरहाट नरेश) ने किया।
  • अर्जुन सिंह से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य:
    • 3 सितंबर, 1857 – सिंहभूम में विद्रोह प्रारंभ हुआ (भगवान सिंह एवं रामनाथ सिंह ने प्रारंभ किया)।
    • 7 सितंबर, 1857 – अर्जुन सिंह ने संजय नदी पार करवाकर विद्रोहियों की सहायता की।
    • अर्जुन सिंह ने पौरी देवी को साक्षी मानकर विश्वासघात नहीं करने की कसम खाई।
    • 13 सितंबर, 1857 – अर्जुन सिंह ने स्वयं को ‘सिंहभूम का राजा’ घोषित कर दिया।
    • अंग्रेजों ने अर्जुन सिंह की गिरफ्तारी पर 1,000 रुपये इनाम घोषित किया।
    • 16 फरवरी, 1859 – अर्जुन सिंह ने कमिश्नर डाल्टन के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।

ढाका, मेमन सिंह और कोलकाता के क्रांतिकारी किस स्थान पर छुपकर गुप्त प्रचार करते थे?

  • रामगढ़
  • राँची
  • भागलपुर
  • जमशेदपुर

Explanation:

  • ढाका, मैमनसिंह तथा कलकत्ता से कई क्रांतिकारी आकर सिंहभूम के जमशेदपुर एवं चाईबासा में छुपते थे तथा क्रांति का गुप्त प्रचार करते थे।
  • प्रमुख क्रांतिकारी:
    • गिरीन्द्र नाथ मुखर्जी (टाटा कंपनी के कर्मचारी) – 1908 में न्यूयॉर्क से घोषणा की कि ‘रक्तरंजित क्रांति से ही भारत को मुक्त किया जा सकता है।’
    • अमरनाथ मुखर्जी (गिरीन्द्र के भाई)
    • दुर्गादास बनर्जी
    • सुरेंद्र कुमार राय
    • सुधांशु भूषण मुखर्जी – अप्रैल, 1916 में अलीपुर जेल से रिहा होने के बाद सोनुआ ग्राम (सिंहभूम) में रहे।

1913 में गिरिडीह में खम्भे पर “आवर स्वाधीन भारत” शीर्षक के पर्चे किसने चिपकाये थे?

  • रघुनाथ मुरमू
  • शरत चंद्र राय
  • शीतल बनर्जी
  • निर्मल चन्द्र बनर्जी

Explanation:

  • निर्मल बनर्जी ने 1913 में गिरिडीह नगर में एक खंभे पर ‘आवर स्वाधीन भारत’ शीर्षक से परचे चिपकाए थे।
  • ये पर्चे चौबीस परगना के क्रिस्टो राय बंगाल से लेकर आए थे।
  • इस घटना ने हजारीबाग जिले में उग्र राष्ट्रीयता के प्रसार को दर्शाया।

वीरेंद्र नाथ भट्टाचार्य के मकान पर अक्टूबर 1927 में छापा मारा गया जहाँ से क्रांतिकारी साहित्य के साथ पिस्तौल और कारतूस भी बरामद किया गया। इस केस को क्या नाम दिया गया?

  • वासेपुर षड़यंत्र केस
  • हजारीबाग षड़यंत्र केस
  • रामगढ़ षड़यंत्र केस
  • देवघर षड़यंत्र केस

Explanation:

  • वर्ष 1927 में देवघर षड़यंत्र केस में वीरेन्द्र नाथ भट्टाचार्य के घर छापा मारकर हथियार तथा क्रांतिकारी साहित्य बरामद किया गया था।
  • इस केस में 20 व्यक्तियों की गिरफ्तारी हुई:
    • वीरेन्द्र नाथ भट्टाचार्य
    • सुरेन्द्र नाथ भट्टाचार्य
    • तेजेश चंद्र घोष
  • देवघर उग्र राष्ट्रवाद के दौर में झारखंड में क्रांतिकारी गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र था।

गिरिडीह का कौन-सा व्यक्ति क्रांतिकारियों को धन मुहैया कराता था ?

  • संजीव कुमार
  • शेख भिखारी
  • मनोरंजन गुहा
  • रघुनाथ मुरमू

Explanation:

  • गिरिडीह के मनोरंजन गुहा (उपनाम – ठाकुर दा) क्रांतिकारियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराते थे।
  • अन्य सहायक:
    • हेमेन्द्र नाथ घोष (दुमका) – क्रांतिकारियों को आर्थिक सहायता देते थे।
  • हजारीबाग के राम विनोद सिंह को ‘हजारीबाग का जतिन बाघा’ कहा जाता था।

झारखण्ड इलाके में वहाबी आंदोलन के प्रसार का दायित्व किसे सौंपा गया था ?

  • संजीव कुमार
  • शेख भिखारी
  • मनोरंजन गुहा
  • शाह मोहम्मद हुसैन

Explanation:

  • शाह मोहम्मद हुसैन ने राजमहल में वहाबी आंदोलन की शाखा खोली थी।
  • अन्य प्रमुख व्यक्ति:
    • पीर हुसैन – संथाल परगना क्षेत्र में वहाबी आंदोलन का प्रचार-प्रसार किया।
    • इब्राहिम मंडल (पाकुड़ क्षेत्र) – वहाबी आंदोलन के दौरान आजीवन कारावास की सजा दी गई।

जमशेदपुर लेबर एसोसिएशन की स्थापना 1920 ई. में किसने की थी?

  • एस. एन. हलदर
  • शेख भिखारी
  • मनोरंजन गुहा
  • शाह मोहम्मद हुसैन

Explanation:

  • 1920 में जमशेदपुर वर्कर्स एसोसिएशन (जमशेदपुर लेबर एसोसिएशन) की स्थापना एस. एन. हलधर (एस. एन. हलदर) तथा व्योमेश चक्रवर्ती ने की थी।
  • मजदूर आंदोलन की प्रमुख घटनाएँ:
    • 1920-22, 1925, 1928 – टाटा आयरन एण्ड स्टील वर्कर्स की व्यापक हड़ताल।
    • 18 अगस्त, 1928 – सुभाष चंद्र बोस का जमशेदपुर आगमन।
    • 20 अगस्त, 1928 – सुभाष चंद्र बोस को टाटा लेबर एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया (9 वर्षों तक रहे)।
    • 12 सितंबर, 1928 – सुभाष चंद्र बोस के प्रयास से हड़ताल समाप्त हुई।
    • 1929 – जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में झरिया में भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस का अधिवेशन।
    • 1938 – अब्दुल बारी सिद्दीकी द्वारा ‘टाटा वर्कर्स यूनियन’ की स्थापना।

संथाल परगना में किसके नेतृत्व में वहाँ की महिलाओं ने नमक कानून को चुनौती दी थी?

  • सिस्टर निर्मला
  • रानी सर्वेश्वरी
  • शैलबाला राय
  • सावित्री पूर्ती

Explanation:

  • संथाल परगना में शैलबाला राय के नेतृत्व में महिलाओं ने सविनय अवज्ञा आंदोलन (नमक कानून) को चुनौती दी थी।
  • संथाल परगना में महिलाओं की भूमिका:
    • शैलबाला राय ने महिलाओं को संगठित किया।
    • सविनय अवज्ञा आंदोलन में राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
    • संथाल परगना के कांग्रेसी नेता शशि भूषण राय को इस आंदोलन के सिलसिले में मुंगेर जाने के बाद वहाँ गिरफ्तार कर लिया गया।

28 अगस्त, 1942 को ब्रिटिश पुलिस द्वारा गोली से उड़ा दी गयी बिरजी, संथाल परगना के किस नेता की पत्नी थी?

  • एस. एन. हलदर
  • शेख भिखारी
  • मनोरंजन गुहा
  • हरिहर मिर्धा

Explanation:

  • 28 अगस्त, 1942 को ब्रिटिश पुलिस द्वारा गोली से उड़ा दी गयी बिरजी देवी, संथाल परगना के नेता हरिहर मिर्धा की पत्नी थीं।
  • भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महिलाओं का योगदान:
    • सरस्वती देवी – हजारीबाग (गिरफ्तार की गईं)
    • जांबवती देवी – दुमका (जुलूस का नेतृत्व)
    • प्रमा देवी – दुमका (जुलूस का नेतृत्व)
    • राजेश्वरी सरोज दास – पलामू (मजदूरों का नेतृत्व)
    • महादेवी केजरीवाल – दुमका (व्यक्तिगत सत्याग्रह)

जामताड़ा जिले में किसके नेतृत्व में व्यापक आंदोलन चलाया गया था?

  • एस. एन. हलदर
  • शेख भिखारी
  • सत्यकाली बाबू
  • हरिहर मिर्धा

Explanation:

  • जामताड़ा जिले में सत्यकाली बाबू के नेतृत्व में व्यापक आंदोलन चलाया गया था।
  • जामताड़ा संथाल परगना का एक प्रमुख जिला है।
  • जामताड़ा के अन्य नेता:
    • नरसिंह राय – रक्त, आँसू और अन्य विज्ञापनों के माध्यम से आंदोलन को जीवित रखा।

जामताड़ा के किस नेता ने रक्त, आँसू और अन्य विज्ञापनों के माध्यम से आंदोलन को जीवित रखा?

  • एस. एन. हलदर
  • शेख भिखारी
  • नरसिंह राय
  • हरिहर मिर्धा

Explanation:

  • जामताड़ा के नरसिंह राय ने रक्त, आँसू और अन्य विज्ञापनों के माध्यम से आंदोलन को जीवित रखा।
  • यह भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जामताड़ा क्षेत्र में जनजागरण का एक अनूठा प्रयास था।
  • नरसिंह राय ने प्रचार के अपरंपरागत माध्यमों का उपयोग किया।

भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 26 अगस्त, 1942 को देवघर में चली गोली से शहीद होने वाले व्यक्ति …. थे।

  • एस. एन. हलदर
  • शेख भिखारी
  • अशर्फी लाल
  • हरिहर मिर्धा

Explanation:

  • 26 अगस्त, 1942 को देवघर में चली गोली से अशर्फी लाल शहीद हो गए।
  • यह भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देवघर में हुआ था।
  • अन्य शहीद/घटनाएँ:
    • 11 अगस्त, 1942 – विनोदानन्द झा के नेतृत्व में देवघर में जुलूस।
    • देवघर के सरवण में आंदोलनकारियों ने समानांतर सरकार बनाई।

रामगढ़ कांग्रेस अधिवेशन कब आयोजित किया गया था?

  • 1940
  • 1939
  • 1922
  • 1941

Explanation:

  • कांग्रेस का 53वाँ अधिवेशन रामगढ़ में 19-20 मार्च, 1940 को आयोजित किया गया था।
  • अधिवेशन की विशेषताएँ:
    • अध्यक्ष – मौलाना अबुल कलाम आजाद (लगातार 6 वर्षों तक अध्यक्ष)
    • झारखंड में कांग्रेस का पहला तथा एकमात्र अधिवेशन।
    • स्वागत समिति के अध्यक्ष – डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
    • स्वागत समिति के महासचिव – अनुग्रह नारायण सिंह
    • मुख्य द्वार का नाम – बिरसा मुंडा द्वार
    • सभा स्थल का नाम – मजहर नगर (मजहर-उल-हक के नाम पर)
    • 14 मार्च, 1940 – गाँधीजी ने खादी ग्रामोद्योग का शुभारंभ किया।
    • सत्याग्रह का प्रस्ताव – जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत, जे. बी. कृपलानी द्वारा अनुमोदित।
    • इस अधिवेशन के बाद 1941-45 तक कांग्रेस का कोई अधिवेशन नहीं हुआ।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गया अधिवेशन किस वर्ष आयोजित किया गया जिसमें छोटानागपुर के 800 आदिवासियों ने हिस्सा लिया?

  • 1940
  • 1932
  • 1922
  • 1941

Explanation:

  • कांग्रेस का गया अधिवेशन 1922 में आयोजित किया गया था।
  • गया अधिवेशन की विशेषताएँ:
    • यह कांग्रेस का 37वाँ अधिवेशन था।
    • इस अधिवेशन में छोटानागपुर के 800 आदिवासियों ने हिस्सा लिया।
    • अधिवेशन से लौटकर राँची के पी. सी. मित्रा एवं देवकी प्रसाद ने ‘तिलक स्वराज कोष’ हेतु धन एकत्र किया।

53वां वार्षिक कांग्रेस सत्र झारखण्ड के में आयोजित किया गया था।

  • रामगढ़
  • जामताड़ा
  • पलामू
  • पश्चिमी सिंहभूम

Explanation:

  • 53वाँ वार्षिक कांग्रेस सत्र रामगढ़ में आयोजित किया गया था।
  • अधिवेशन का विवरण:
    • तिथि – 19-20 मार्च, 1940
    • अध्यक्ष – मौलाना अबुल कलाम आजाद
    • यह झारखंड में कांग्रेस का पहला तथा एकमात्र अधिवेशन था।
    • रामगढ़ अधिवेशन में टाना भगतों ने महात्मा गाँधी को 400 रुपये की थैली भेंट की थी।
    • अधिवेशन के दौरान ही सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में अखिल भारतीय समझौता विरोधी सम्मेलन (बिहिटा, रामगढ़) का आयोजन किया गया।
झारखण्ड में भारतीय राष्टीय आंदोलन