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निम्न में से कौन-सी झारखण्ड की लोक-चित्रकला है?
- झांझ
- करहा
- सोहराई
- विसमधंकी
Explanation:
- सोहराई झारखण्ड की एक प्रमुख लोक-चित्रकला है।
- यह सोहराय पर्व से संबंधित है तथा हजारीबाग जिले में प्रसिद्ध है।
- इसकी शुरुआत वर्षा ऋतु के बाद होती है तथा इसमें प्रजापिता या पशुपति का चित्रण किया जाता है।
- सोहराय चित्रकला की दो प्रमुख शैलियाँ:
- मंझू सोहराय
- कुर्मी सोहराय
- महत्वपूर्ण: 2020 में सोहराय एवं कोहबर चित्रकला को जीआई टैग प्राप्त हुआ, जो झारखण्ड का पहला जीआई टैग है।
इनमें से कौन-सी झारखण्ड की चित्रकला शैली है?
- पालकोट
- रातु
- दोयसा
- नागफेनी
Explanation:
- रातु झारखण्ड की एक चित्रकला शैली है।
- रातु राँची जिले का एक प्रसिद्ध क्षेत्र है, जो अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है।
- रातू का किला (राँची) का निर्माण नागवंशी राजा उदयनाथ शाहदेव ने 1870 ई. में कराया था।
- शत्रु किला भी रातू, राँची में स्थित है।
निम्न में से एक चित्रकला की एक शैली नहीं है
- उराँव भित्तिचित्र
- जादो पटिया
- लहसुआ
- संथाली भित्तिचित्र
Explanation:
- लहसुआ चित्रकला की शैली नहीं है।
- उराँव भित्तिचित्र, जादोपटिया एवं संथाली भित्तिचित्र झारखण्ड की प्रमुख चित्रकला शैलियाँ हैं।
- भित्ति चित्रकारी का सर्वाधिक विकसित रूप संथाल जनजाति में पाया जाता है तथा इसका उद्गम स्थल संथाल परगना का चायचंपागढ़ है।
उराँव comb-cut है, एक
- चित्रकला
- नृत्य
- भोजन
- जनजातीय आभूषण
Explanation:
- उराँव comb-cut (कंघी कट) एक चित्रकला है।
- कंघी कट (कोंब कट) पेंटिंग उराँव जनजाति की एक अनूठी परंपरा है।
- इस चित्रकला में कंघी का उपयोग करके ज्यामितीय आकृतियाँ बनाई जाती हैं।
- महत्वपूर्ण: उराँव जनजाति अपनी भित्ति चित्रकारी एवं कंघी कट पेंटिंग के लिए प्रसिद्ध है।
झारखण्ड का ‘धोक्रा’ निम्नलिखित में से किस शिल्पकला से संबंधित है?
- कागज
- लकड़ी
- धातु
- पुष्प
Explanation:
- धोक्रा (डोकरा) धातु शिल्पकला से संबंधित है।
- यह दस्तकारी की एक प्राचीन कला है जिसे घढ़वा कला भी कहा जाता है।
- इस कला का संबंध मलार जाति से है तथा मोम-कास्टिंग तकनीक द्वारा मूर्तियों का निर्माण किया जाता है।
- महत्वपूर्ण: तन्त्री और मलहोर समुदाय भी धातु शिल्पकला से जुड़े हुए हैं।
झारखण्ड पंचायती राज अधिनियम, 2001 को पंचायत राज में महिलाओं के लिए आरक्षण की कितनी प्रतिशत प्रदान करने के लिए संशोधित किया गया था?
- 12%
- 22.5%
- 30%
- 50%
Explanation:
- झारखण्ड पंचायती राज अधिनियम, 2001 को पंचायत राज में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण प्रदान करने के लिए संशोधित किया गया था।
- यह भारत में महिलाओं के लिए सबसे अधिक आरक्षण प्रतिशत है।
- केंद्रीय पंचायती राज अधिनियम में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान है, जबकि झारखण्ड ने 50% का प्रावधान किया है।
झारखण्ड के तन्त्री और मलहोर समुदाय झारखण्ड के किस प्रकार की शिल्पकला से जुड़े हुए हैं?
- खिलौने बनाना
- लकड़ी का काम
- कठपुतली बनाना
- धातु का काम
Explanation:
- झारखण्ड के तन्त्री और मलहोर समुदाय धातु शिल्पकला से जुड़े हुए हैं।
- डोकरा (धोक्रा) कला धातु शिल्पकला है, जो मलार जाति से संबंधित है।
- तन्त्री और मलहोर समुदाय धातु के काम (मेटल वर्क) में निपुण हैं।
इनमें से कौन-सा जंगली घास है, जिसे कटोरे, पेन स्टैंड्स, कोस्टर और मैट में बुना जाता है, या डाईड, कठिन, रंगीन बक्सें, गुड़िया, टेबल मैट और क्रिसमस पेड़ की सजावट में बुना जाता है?
- राज घास
- पंपस ग्रास
- बरमूडा घास
- सवाई घास
Explanation:
- सबई घास (सवाई घास) एक जंगली घास है, जिसे कटोरे, पेन स्टैंड्स, कोस्टर और मैट आदि में बुना जाता है।
- इसका उपयोग डाईड, कठिन, रंगीन बक्सें, गुड़िया, टेबल मैट और क्रिसमस पेड़ की सजावट में किया जाता है।
- झारखण्ड में सबई घास से विभिन्न हस्तशिल्प वस्तुएँ बनाई जाती हैं।
इनमें से कौन-सा शिल्प झारखण्ड की शिल्प कौशल की एक प्रमुख विशेषता है? (i) पयटकर चित्रकला (ii) छऊ मुखौटा (iii) कासी ग्रास
- केवल (i) और (ii)
- (i), (ii) और (iii)
- केवल (ii) और (iii)
- केवल (i) और (iii)
Explanation:
- (i) पयटकर चित्रकला, (ii) छऊ मुखौटा तथा (iii) कासी ग्रास सभी झारखण्ड की शिल्प कौशल की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
- पईत्कर चित्रकला – भारत का सबसे पुराना आदिवासी चित्रकला, अमादुबी गाँव (सिंहभूम) में प्रसिद्ध।
- छऊ मुखौटा – झारखण्ड की प्रमुख नृत्य-शिल्प विशेषता।
- कासी ग्रास (सबई घास) – झारखण्ड में हस्तशिल्प के लिए प्रयुक्त होने वाली घास।
इनमें से झारखण्ड के कला रूप कौन-सा है ?
- मधुबनी
- तंजौर
- ढोकरा
- काँगड़ा
Explanation:
- ढोकरा (डोकरा) झारखण्ड का एक प्रमुख कला रूप है।
- मधुबनी – बिहार की चित्रकला शैली है।
- तंजौर – तमिलनाडु की चित्रकला शैली है।
- काँगड़ा – हिमाचल प्रदेश की चित्रकला शैली है।
- डोकरा – धातु शिल्पकला है, जो मोम-कास्टिंग तकनीक द्वारा बनाई जाती है।
इनमें से कौन-सा झारखण्ड का कला रूप है?
- मधुबनी
- तंजौर
- जादोपटिया
- काँगड़ा
Explanation:
- जादोपटिया झारखण्ड का एक प्रमुख कला रूप है।
- जादोपटिया का अर्थ – जादो/चित्रकार द्वारा कपड़ा या कागज के छोटे-छोटे टुकड़े को जोड़कर बनाया जाने वाला चित्र।
- यह चित्रकारी संथालों में प्रचलित है तथा इसका प्रसिद्ध क्षेत्र दुमका जिले में है।
- इसमें बाघ देवता और जीवन के बाद के दृश्यों का चित्रण किया जाता है।
निम्नलिखित में से कौन-सी कला झारखण्ड की है?
- मधुबनी
- तंजौर
- कुर्मी और मुंडा
- काँगड़ा
Explanation:
- कुर्मी और मुंडा झारखण्ड की चित्रकला शैली है।
- सोहराय चित्रकला की दो प्रमुख शैलियाँ हैं:
- मंझू सोहराय
- कुर्मी सोहराय
- राना, तेली एवं प्रजापति चित्रकला का प्रयोग उक्त तीन उपजातियों द्वारा किया जाता है।
- इन चित्रकलाओं में पशुपति (भगवान शिव) को पशुओं एवं पेड़-पौधों के देवता के रूप में चित्रित किया जाता है।
निम्नलिखित में से कौन-सी कला झारखण्ड की है?
- मधुबनी
- तंजौर
- गंजू
- काँगड़ा
Explanation:
- गंजू झारखण्ड की एक प्रमुख चित्रकला है।
- इसमें पशुओं, वन्य तथा पालतू जानवरों एवं वनस्पतियों की तस्वीरें चित्रित की जाती हैं।
- इसके माध्यम से संकटग्रस्त जानवरों को रीति-रिवाजों में दर्शाया जाता है।
- गंझू चित्रकला में खतरनाक जानवरों को रस्म रिवाज में दर्शाया गया है।
निम्नलिखित में से कौन-सी कला झारखण्ड की है?
- मधुबनी
- तंजौर
- सोहराय
- काँगड़ा
Explanation:
- सोहराय झारखण्ड की एक प्रमुख चित्रकला है।
- यह सोहराय पर्व से संबंधित है तथा हजारीबाग जिले में प्रसिद्ध है।
- इसमें प्रजापिता या पशुपति का चित्रण किया जाता है तथा जंगली जीव जंतुओं, पशु-पक्षियों व पेड़-पौधों का चित्रण किया जाता है।
- 2020 में सोहराय एवं कोहबर चित्रकला को जीआई टैग प्राप्त हुआ।
निम्नलिखित चित्रों में से कौन-सी खतरनाक जानवरों को रस्म रिवाज में दर्शाया गया है?
- कुररी
- टुरी
- ढोकरा
- गंझू
Explanation:
- गंझू चित्रकला में खतरनाक जानवरों को रस्म रिवाज में दर्शाया गया है।
- गंजू चित्रकला में पशुओं, वन्य तथा पालतू जानवरों एवं वनस्पतियों की तस्वीरें चित्रित की जाती हैं।
- इसके माध्यम से संकटग्रस्त जानवरों को रीति-रिवाजों में दर्शाया जाता है।
कंघी कट (कोंब कट) पेंटिंग झारखण्ड की निम्नलिखित जनजातियों में से किसकी एक अनूठी परंपरा है?
- उरांव
- मुंडा
- कुर्मी
- तुरी
Explanation:
- कंघी कट (कोंब कट) पेंटिंग उराँव जनजाति की एक अनूठी परंपरा है।
- इस चित्रकला में कंघी का उपयोग करके ज्यामितीय आकृतियाँ बनाई जाती हैं।
- उराँव जनजाति भित्ति चित्रकारी एवं कंघी कट पेंटिंग के लिए प्रसिद्ध है।
चित्रकला की कला “जादोपटिया” किसकी विशेषता है?
- उरांव
- मुंडा
- कुर्मी
- संथाल
Explanation:
- जादोपटिया चित्रकला संथाल जनजाति की विशेषता है।
- जादोपटिया का अर्थ – जादो/चित्रकार द्वारा कपड़ा या कागज के छोटे-छोटे टुकड़े को जोड़कर बनाया जाने वाला चित्र।
- इसका प्रसिद्ध क्षेत्र दुमका जिले में है।
- इसमें बाघ देवता और जीवन के बाद के दृश्यों का चित्रण किया जाता है।
- महत्वपूर्ण: पईत्कर चित्रकला सबर जनजाति द्वारा की गई थी तथा कोहबर चित्रकला बिरहोर जनजाति में प्रचलित है।
‘स्क्रॉल चित्रकला’ का श्रेय झारखण्ड की निम्न जनजाति को दिया जाता है : Special Branch – 2019
- उरांव
- मुंडा
- कुर्मी
- संथाल
Explanation:
- ‘स्क्रॉल चित्रकला’ का श्रेय झारखण्ड की संथाल जनजाति को दिया जाता है।
- जादोपटिया चित्रकला संथाल जनजाति की विशेषता है, जिसे स्क्रॉल पेंटिंग के रूप में भी जाना जाता है।
- जादोपटिया का अर्थ – जादो/चित्रकार द्वारा कपड़ा या कागज के छोटे-छोटे टुकड़े को जोड़कर बनाया जाने वाला चित्र।
- इसका प्रसिद्ध क्षेत्र दुमका जिले में है तथा इसमें बाघ देवता और जीवन के बाद के दृश्यों का चित्रण किया जाता है।
बुलु इमाम किस जनजाति लोक कला से सम्बंधित है?
- सोहराई और कोहबर
- जनानी झूमर
- भीतिचित्र
- घटवारी
Explanation:
- बुलु इमाम सोहराई और कोहबर जनजाति लोक कला से संबंधित है।
- सोहराई एवं कोहबर चित्रकला को 2020 में जीआई टैग प्राप्त हुआ, जो झारखण्ड का पहला जीआई टैग है।
- सोहराई चित्रकला – सोहराय पर्व से संबंधित, हजारीबाग में प्रसिद्ध, प्रजापिता या पशुपति का चित्रण।
- कोहबर चित्रकला – बिरहोर जनजाति में प्रचलित, सिकी (देवी) का चित्रण।
निम्न में से कौन चित्रकला की एक शैली नहीं है?
- उरांव भीतिचित्र
- जादोपाटिया
- लहसुआ
- संथाली भीति चित्र
Explanation:
- लहसुआ चित्रकला की शैली नहीं है।
- उरांव भित्तिचित्र, जादोपटिया एवं संथाली भित्तिचित्र झारखण्ड की प्रमुख चित्रकला शैलियाँ हैं।
- भित्ति चित्रकारी का सर्वाधिक विकसित रूप संथाल जनजाति में पाया जाता है तथा इसका उद्गम स्थल संथाल परगना का चायचंपागढ़ है।
- उराँव comb-cut (कंघी कट) पेंटिंग उराँव जनजाति की अनूठी परंपरा है।
निम्न में से कौन-सी झारखण्ड राज्य के लोक चित्रकला में से एक है?
- झांझ
- विसमधंकी
- करहा
- सोहराय
Explanation:
- सोहराय झारखण्ड राज्य की लोक चित्रकला में से एक है।
- यह सोहराय पर्व से संबंधित है तथा हजारीबाग जिले में प्रसिद्ध है।
- इसमें प्रजापिता या पशुपति का चित्रण किया जाता है तथा जंगली जीव जंतुओं, पशु-पक्षियों व पेड़-पौधों का चित्रण किया जाता है।
- सोहराय चित्रकला की दो प्रमुख शैलियाँ:
- मंझू सोहराय
- कुर्मी सोहराय
झारखण्ड के कोहबर और सोहराई चित्रकारी नाजुक कला का रूप है, जो मुख्य रूप से किसके द्वारा बनाया जाता है?
- विवाहित महिलाएँ
- विवाहित पुरूष
- अविवाहित पुरूष
- विधवाएँ
Explanation:
- कोहबर और सोहराई चित्रकारी मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा बनाई जाती है।
- कोहबर चित्रकला – विवाहित महिला द्वारा अपने पति के घर में बनाई जाती है तथा सिकी (देवी) का चित्रण किया जाता है।
- कोहबर का अर्थ – गुफा में विवाहित जोड़ा (‘कोह’ – गुफा, ‘वर’ – दुल्हा)।
- सोहराई चित्रकला – प्रजापिता या पशुपति का चित्रण, जंगली जीव जंतुओं का चित्रण।
निम्नलिखित में से कौन-सा झारखण्ड के मल्हार और तेनत्रि जनजातियों द्वारा, एक परंपरागत प्राचीन धातु शिल्प है?
- ढोकरा
- जरदोजी
- कंघी
- ओकरा
Explanation:
- ढोकरा (डोकरा) मल्हार और तेनत्रि जनजातियों द्वारा बनाया जाने वाला एक परंपरागत प्राचीन धातु शिल्प है।
- यह दस्तकारी की एक प्राचीन कला है जिसे घढ़वा कला भी कहा जाता है।
- इस कला का संबंध मलार जाति से है तथा मोम-कास्टिंग तकनीक द्वारा मूर्तियों का निर्माण किया जाता है।
- जरदोजी – कढ़ाई कला, ओकरा – झारखण्ड की नहीं।
इनमें से झारखण्ड की जनजातियों की एक प्राचीन धातु-शिल्प क्या है?
- ढोकरा
- जरदोजी
- कंघी
- ओकरा
Explanation:
- ढोकरा (डोकरा) झारखण्ड की जनजातियों की एक प्राचीन धातु-शिल्प है।
- इसे घढ़वा कला भी कहा जाता है तथा मोम-कास्टिंग तकनीक द्वारा बनाया जाता है।
- मलार, तन्त्री एवं मलहोर समुदाय इस कला से जुड़े हुए हैं।
- डोकरा का उपयोग मूर्तियाँ बनाने में किया जाता है।
झारखण्ड का ‘ढोकरा’ निम्नलिखित में से किस शिल्प कला से संबंधित है?
- कागज
- धातु
- लकड़ी
- पुष्प
Explanation:
- झारखण्ड का ढोकरा (डोकरा) धातु शिल्प कला से संबंधित है।
- यह दस्तकारी की एक प्राचीन कला है, जिसे घढ़वा कला भी कहा जाता है।
- इस कला का संबंध मलार जाति से है तथा मोम-कास्टिंग तकनीक द्वारा मूर्तियों का निर्माण किया जाता है।
“डोकरा” कला का प्रयोग…….. होता है ।
- बुलाई में
- मूर्त्तियाँ बनाने में
- खेती में
- जानवरों के शिकार में
Explanation:
- “डोकरा” कला का प्रयोग मूर्तियाँ बनाने में होता है।
- यह मोम-कास्टिंग तकनीक द्वारा धातु की मूर्तियों का निर्माण करती है।
- डोकरा को घढ़वा कला भी कहा जाता है तथा यह मलार जाति से संबंधित है।
- महत्वपूर्ण: धोक्रा झारखण्ड की प्राचीन धातु शिल्पकला है।
झारखण्ड में वंदना नामक एक कला का प्रकार से संबंधित है।
- संगीत
- नृत्य
- साहित्य
- चित्रकला
Explanation:
- झारखण्ड में वंदना चित्रकला से संबंधित है।
- बंदना कार्तिक अमावस्या के दौरान मनाया जाने वाला पर्व है, जो पालतू जानवरों से संबंधित है।
- वंदना चित्रकला झारखण्ड की एक लोक कला है।
- महत्वपूर्ण: वंदना पर्व की शुरुआत ओहिरा गीत के साथ होती है।
‘खोहवर’ एक जनजातीय कला है, जिसमें ‘खो’ का मतलब ……. है ।
- दुल्हन
- तोता
- दूल्हा
- गुफा
Explanation:
- ‘खोहवर’ (कोहबर) एक जनजातीय कला है, जिसमें ‘खो’ का मतलब गुफा है।
- ‘कोह’ का अर्थ – गुफा एवं ‘वर’ का अर्थ – दुल्हा।
- कोहबर का अर्थ – गुफा में विवाहित जोड़ा।
- कोहबर चित्रकला बिरहोर जनजाति में प्रचलित है तथा सिकी (देवी) का चित्रण किया जाता है।
इनमें से कौन-सी झारखण्ड की चित्रकला शैली है?
- कालीघाट
- तंजौर
- मधुबनी
- जादोपटिया
Explanation:
- जादोपटिया झारखण्ड की चित्रकला शैली है।
- कालीघाट – पश्चिम बंगाल की चित्रकला शैली है।
- तंजौर – तमिलनाडु की चित्रकला शैली है।
- मधुबनी – बिहार की चित्रकला शैली है।
- जादोपटिया – संथाल जनजाति की चित्रकला है, जो दुमका जिले में प्रसिद्ध है।
संथाली समुदाय के मान्यताओं को उकेरने वाली चित्र निम्नलिखित में से कौन-सा है?
- झूमर
- बोहरी
- मधुबनी
- जादोपटिया
Explanation:
- जादोपटिया संथाली समुदाय के मान्यताओं को उकेरने वाली चित्र है।
- यह संथाल जनजाति में प्रचलित है तथा दुमका जिले में प्रसिद्ध है।
- इसमें बाघ देवता और जीवन के बाद के दृश्यों का चित्रण किया जाता है।
- जादोपटिया का अर्थ – जादो/चित्रकार द्वारा कपड़ा या कागज के छोटे-छोटे टुकड़े को जोड़कर बनाया जाने वाला चित्र।
गरुड़ पुराण में निम्न में से कौन-सी पेंटिंग भी मिलती है?
- झूमर
- पयटकर
- मधुबनी
- जादोपटिया
Explanation:
- गरुड़ पुराण में पयटकर (पईत्कर) पेंटिंग का उल्लेख मिलता है।
- पईत्कर चित्रकला – भारत का सबसे पुराना आदिवासी चित्रकला है।
- इसे झारखण्ड का स्क्रॉल चित्रकला भी कहा जाता है तथा यह अमादुबी गाँव (सिंहभूम) में प्रसिद्ध है।
- इसकी शुरुआत सबर जनजाति द्वारा की गई थी तथा इसमें जीवन के बाद होने वाली घटनाओं का वर्णन किया जाता है।
Paitkar पेंटिंग के संदर्भ में
यह एक लोक चित्रकला है
यह भारत का सबसे पुराना आदिवासी चित्रकला है
इसे स्क्रॉल पेंटिंग के रूप में जाना जाता है
यह गंदे कागज पर किया जाता है
- I और III
- II, III और IV
- I, II और IV
- ये सभी
Explanation:
- Paitkar (पईत्कर) पेंटिंग के संदर्भ में सभी कथन सही हैं:
- I. यह एक लोक चित्रकला है – सही
- II. यह भारत का सबसे पुराना आदिवासी चित्रकला है – सही
- III. इसे स्क्रॉल पेंटिंग के रूप में जाना जाता है – सही
- IV. यह गंदे कागज पर किया जाता है – सही
- महत्वपूर्ण:
- पईत्कर का प्रसिद्ध क्षेत्र – अमादुबी गाँव (सिंहभूम) को पईत्कर का गाँव भी कहा जाता है।
- इसकी शुरुआत सबर जनजाति द्वारा की गई थी।
- गरुड़ पुराण में इसका उल्लेख मिलता है।
नूनबिल मेला कहाँ आयोजित होता है?
- गोड्डा
- राँची
- दुमका
- पलामू
Explanation:
- नूनबिल मेला दुमका जिले के मसलिया प्रखंड में आयोजित होता है।
- यह नुनबिल नदी के तट पर मकर संक्रांति के बाद लगता है।
- इस मेले की शुरुआत पहाड़िया जनजाति द्वारा की गई थी।
- महत्वपूर्ण तथ्य:
- हिजला मेला भी दुमका में बसंत ऋतु (फरवरी-मार्च) में आयोजित होता है।
- हिजला शब्द हिजलोपाइट खनिज का संक्षिप्त रूप है, जो संथाल परगना की पहाड़ियों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
बिसुआ मेला किस जिले में लगता है?
- दुमका
- राँची
- गोड्डा
- पलामू
Explanation:
- बिसुआ मेला गोड्डा जिले के बसंतराय प्रखंड में आयोजित होता है।
- यह 14 अप्रैल से शुरू होता है (हर वर्ष चैत माह के अंतिम तारीख व वैशाख की पहली तारीख को)।
- इस मेले का आयोजन साफाहोड़ समुदाय के लोगों द्वारा किया जाता है।
- महत्वपूर्ण: गोड्डा जिले में गणतंत्र मेला भी आयोजित होता है।
इंद जतरा मेला कहाँ आयोजित होता है?
- गोड्डा
- सुतियाम्बे, राँची
- दुमका
- पलामू
Explanation:
- इंद जतरा मेला सुतियाम्बे में आयोजित होता है, जो राँची जिले के कांके प्रखंड में स्थित है।
- इस मेले की शुरुआत मुंडा राजा मदरा मुंडा ने अपनी राजधानी से की थी।
- यह मेला कर्म पूजा के बाद त्रयोदशी को आयोजित किया जाता है।
- इस मेले की शुरुआत नागवंशी शासकों के शासनकाल में हुई थी।
भूत मेला कहाँ आयोजित होता है?
- गोड्डा
- राँची
- दुमका
- हैदरनगर, पलामू
Explanation:
- भूत मेला हैदरनगर, पलामू में आयोजित होता है।
- पलामू स्थित हैदरनगर के देवी-धाम में प्रत्येक वर्ष चैत्र महीने के प्रतिपदा तिथि से पूर्णिमा तक (अर्थात् 15 दिन) इस मेले का आयोजन होता है।
- महत्वपूर्ण: पलामू जिले में चैनपुर का किला (कोयल नदी के तट पर) तथा जपला का किला (सोन नदी के किनारे) स्थित हैं।
करमदाहा मेला कहाँ आयोजित होता है?
- गोड्डा
- राँची
- जामताड़ा
- पलामू
Explanation:
- करमदाहा मेला जामताड़ा जिले के नारायणपुर में आयोजित होता है।
- यह मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित किया जाता है, जो 15 दिनों तक चलता है।
- इस अवसर पर भगवान शिव के दुखहरण मंदिर में पूजा की जाती है।
- शिवलिंग की खोज प्रसिद्ध राजा कर्ण ने की थी।
नवमी डोला मेला कब आयोजित होता है?
- चैत महीने के कृष्ण पक्ष की नवमी को
- आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को
- कार्तिक पूर्णिमा को
- मकर संक्रांति के अवसर पर
Explanation:
- नवमी डोला मेला चैत महीने के कृष्ण पक्ष की नवमी को आयोजित होता है।
- यह मेला टाटीसिल्वे (राँची) में आयोजित होता है।
- यह मेला होली के 9 दिन बाद प्रत्येक वर्ष आयोजित किया जाता है।
- महत्वपूर्ण: टाटीसिल्वे राँची का एक प्रमुख क्षेत्र है।
रथयात्रा मेला कहाँ आयोजित होता है?
- गोड्डा
- जगन्नाथपुर (राँची)
- दुमका
- पलामू
Explanation:
- रथयात्रा मेला जगन्नाथपुर (राँची) में आयोजित होता है।
- आयोजन – आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को रथयात्रा का आयोजन किया जाता है।
- जगन्नाथपुर में भगवान जगन्नाथ का मंदिर है तथा जगन्नाथ मंदिर से कुछ दूरी पर मौसी बाड़ी निर्मित की गयी है।
- 9 दिनों के बाद एकादशी को इस रथ की वापस यात्रा होती है, जिसे ‘घुरती रथयात्रा‘ कहा जाता है।
- इस मेले की शुरुआत 1691 में बड़कागढ़ के राजा एनी नाथ शाहदेव ने की थी।
मुड़मा जतरा मेला कब आयोजित होता है?
- होली के 9 दिन बाद
- कर्म पूजा के बाद त्रयोदशी को
- दशहरा के दस दिन बाद
- मकर संक्रांति के अवसर पर
Explanation:
- मुड़मा जतरा मेला दशहरा के दस दिन बाद आयोजित होता है।
- यह मुड़मा (राँची) में आयोजित होता है तथा आदिवासियों द्वारा इसे जतरा मेला कहा जाता है।
- मुंडा और उराव जनजाति के बीच आपसी समझौता मुड़मा में ही हुआ, तभी से मुड़मा जतरा का आयोजन होता है।
- मुड़मा मेले के दूसरे दिन जतरा खूंट की पूजा का प्रचलन है।
- इस अवसर पर सामाजिक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होता है, जिसमें सबसे प्रमुख शम्पा चंपा है।
मण्डा मेला किन-किन जिलों में आयोजित होता है?
- राँची, दुमका, गोड्डा
- पलामू, चतरा, सिमडेगा
- हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो
- देवघर, साहेबगंज, पाकुड़
Explanation:
- मण्डा मेला हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो में आयोजित होता है।
- यह बैशाख, जेठ एवं आषाढ़ माह में आयोजित होता है।
- इस मेले में श्रद्धालु आग पर नंगे पांव चलते हैं।
- ‘जागरण’ – जिस रात लोग आग पर चलते हैं, तथा भगवान महादेव (शिव) की पूजा की जाती है।
- महत्वपूर्ण: मण्डा पर्व बैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अक्षय तृतीया को मनाया जाता है।
सूर्यकुण्ड मेला कहाँ आयोजित होता है?
- बोकारो
- रामगढ़
- हजारीबाग
- सिमडेगा
Explanation:
- सूर्यकुण्ड मेला हजारीबाग में आयोजित होता है।
- यह मकर संक्रांति से अगले 10 दिनों तक आयोजित होता है।
- हजारीबाग जिले के अन्य प्रमुख मेले:
- मण्डा मेला – बैशाख, जेठ एवं आषाढ़ माह में
- नरसिंहस्थान मेला – कार्तिक पूर्णिमा को
नरसिंहस्थान मेला कब आयोजित होता है?
- मकर संक्रांति के अवसर पर
- चैत महीने के कृष्ण पक्ष की नवमी को
- कार्तिक पूर्णिमा को
- फागुन शिवरात्रि को
Explanation:
- नरसिंहस्थान मेला कार्तिक पूर्णिमा को आयोजित होता है।
- यह हजारीबाग में आयोजित होता है।
- महत्वपूर्ण: कार्तिक पूर्णिमा पर रामरेखा धाम मेला (सिमडेगा) भी आयोजित होता है।
हथिया पत्थर मेला कहाँ आयोजित होता है?
- हजारीबाग
- रामगढ़
- फुसरो (बोकारो)
- सिमडेगा
Explanation:
- हथिया पत्थर मेला फुसरो (बोकारो) में आयोजित होता है।
- यह मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित किया जाता है।
- बोकारो जिले के प्रमुख मेले:
- हथिया पत्थर मेला – मकर संक्रांति
- मण्डा मेला – बैशाख, जेठ एवं आषाढ़ माह में
कुंडा मेला कहाँ आयोजित होता है?
- बोकारो
- हजारीबाग
- सिमडेगा
- प्रतापपुर (चतरा)
Explanation:
- कुंडा मेला प्रतापपुर (चतरा) में आयोजित होता है।
- यह फागुन शिवरात्रि पर आयोजित होता है तथा पशु मेला के रूप में जाना जाता है।
- महत्वपूर्ण: चतरा जिले में कुंडा का किला (14वीं शताब्दी में चेरोवंशी राजा द्वारा निर्मित) तथा जतराही मेला भी आयोजित होता है।
रामरेखा धाम मेला कहाँ आयोजित होता है?
- बोकारो
- हजारीबाग
- सिमडेगा
- चतरा
Explanation:
- रामरेखा धाम मेला सिमडेगा में आयोजित होता है।
- यह कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित होता है।
- मान्यता: भगवान श्रीराम दण्डकारण्य जाने के क्रम में रामरेखा पहाड़ (सिमडेगा) पर कुछ दिन बिताये थे।
- सिमडेगा के अन्य मेले: गाँधी मेला भी यहाँ आयोजित होता है।
श्रावणी/सावन मेला कहाँ आयोजित होता है?
- सिमडेगा
- चतरा
- वैद्यनाथ धाम (देवघर)
- पलामू
Explanation:
- श्रावणी/सावन मेला वैद्यनाथ धाम (देवघर) में आयोजित होता है।
- यह श्रावण महीना में आयोजित होता है तथा शिव के ज्योतिर्लिंग पर जल अर्पण किया जाता है।
- झारखंड सरकार ने इसे राजकीय मेले का दर्जा दिया है।
- सुल्तानगंज से देवघर यात्रा में सबसे दुर्गम पहाड़ी मार्ग का नाम सुईया पहाड़ है।
- बैद्यनाथ धाम 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है।
निम्न में से कौन-सा मेला मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होता है?
- नूनबिल मेला
- करमदाहा मेला
- हथिया पत्थर मेला
- उपरोक्त सभी
Explanation:
- उपरोक्त सभी मेले मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होते हैं:
- नूनबिल मेला (दुमका) – मकर संक्रांति के बाद लगता है।
- करमदाहा मेला (जामताड़ा) – मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होता है।
- हथिया पत्थर मेला (बोकारो) – मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होता है।
- अन्य मकर संक्रांति मेले:
- सूर्यकुण्ड मेला (हजारीबाग) – मकर संक्रांति से अगले 10 दिनों तक
- टुसू मेला (पंचपरगना, राँची) – मकर संक्रांति के दिन
निम्न में से कौन-सा मेला कार्तिक पूर्णिमा को आयोजित होता है?
- नूनबिल मेला
- नरसिंहस्थान मेला
- कुंडा मेला
- बिसुआ मेला
Explanation:
- नरसिंहस्थान मेला (हजारीबाग) कार्तिक पूर्णिमा को आयोजित होता है।
- कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित होने वाले अन्य मेले:
- रामरेखा धाम मेला (सिमडेगा) – कार्तिक पूर्णिमा
- बुढ़ई मेला (देवघर) – अगहन माह में नवान पर्व के रूप में
- महत्वपूर्ण: कार्तिक पूर्णिमा पर देव उठान पर्व भी मनाया जाता है (कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी)।
श्रावणी मेला के संबंध में कौन-सा कथन सही नहीं है?
- यह वैद्यनाथ धाम (देवघर) में आयोजित होता है।
- इसमें शिव के ज्योतिर्लिंग पर जल अर्पण किया जाता है।
- इसकी शुरुआत 1691 में बड़कागढ़ के राजा एनी नाथ शाहदेव ने की थी।
- झारखंड सरकार ने इसे राजकीय मेले का दर्जा दिया है।
Explanation:
- श्रावणी/सावन मेला के संबंध में “1691 में बड़कागढ़ के राजा एनी नाथ शाहदेव” वाला कथन गलत है।
- यह कथन रथयात्रा मेला (जगन्नाथपुर, राँची) से संबंधित है, जिसकी शुरुआत 1691 में बड़कागढ़ के राजा एनी नाथ शाहदेव ने की थी।
- श्रावणी मेला की सही जानकारी:
- वैद्यनाथ धाम (देवघर) में आयोजित होता है।
- श्रावण महीना में आयोजित होता है।
- शिव के ज्योतिर्लिंग पर जल अर्पण किया जाता है।
- झारखंड सरकार ने इसे राजकीय मेले का दर्जा दिया है।
बुढ़ई मेला कहाँ आयोजित होता है?
- सिमडेगा
- दुमका
- देवघर
- गोड्डा
Explanation:
- बुढ़ई मेला देवघर में अगहन माह में नवान पर्व के रूप में आयोजित होता है।
- नवान का अर्थ नया अन्न होता है, जो फसल कटने के बाद मनाया जाने वाला पर्व है।
- देवघर जिले के प्रमुख मेले:
- बुढ़ई मेला – अगहन माह (नवान पर्व)
- श्रावणी/सावन मेला – श्रावण महीना (राजकीय मेला)
टुसू मेला कहाँ लगता है?
- पंचपरगना (राँची)
- हजारीबाग
- सिमडेगा
- देवघर
Explanation:
- टुसू मेला पंचपरगना (राँची) में लगता है।
- यह सूर्य पूजा से संबंधित त्योहार है तथा मकर संक्रांति के दिन मनाया जाता है।
- यह पर्व टुसू नाम की कन्या की स्मृति में मनाया जाता है।
- महत्वपूर्ण: टुसू पर्व के दौरान लड़कियों द्वारा रंगीन कागज से लकड़ी या बांस के एक फ्रेम को सजाया जाता है तथा इसे किसी नदी में बहा दिया जाता है।
हिजला मेला कब आयोजित होता है?
- मकर संक्रांति के अवसर पर
- बसंत ऋतु (फरवरी-मार्च) में
- कार्तिक पूर्णिमा को
- चैत्र महीने में
Explanation:
- हिजला मेला बसंत ऋतु (फरवरी-मार्च) में आयोजित होता है।
- यह दुमका जिले में मयूराक्षी नदी के किनारे आयोजित होता है।
- ‘हिजला’ शब्द हिजलोपाइट खनिज का संक्षिप्त रूप है, जो संथाल परगना की पहाड़ियों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
- इस मेले का प्रारंभ – 1890 ई. में संथाल परगना के तत्कालीन उपायुक्त कास्टैयर्स ने किया था।
- इस मेले का उद्देश्य – जनता को विकास कार्यक्रम की जानकारी देना है।
बिंदुधाम मेला कहाँ आयोजित होता है?
- दुमका
- देवघर
- साहेबगंज
- गोड्डा
Explanation:
- बिंदुधाम मेला बिंदुधाम शक्तिपीठ (साहेबगंज) में चैत्र माह में आयोजित होता है।
- बिंदुधाम एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जहाँ देवी सती के शरीर का एक अंग गिरा था।
- साहेबगंज जिले के अन्य प्रमुख किले:
- तेलियागढ़ किला – ‘बंगाल का प्रवेश द्वार’ (गेटवे ऑफ बंगाल)
- राजमहल किला – मानसिंह द्वारा 15वीं शताब्दी में निर्मित
सपही का माकोमारो पहाड़ मेला कहाँ आयोजित होता है?
- साहेबगंज
- दुमका
- डोमचांच (कोडरमा)
- देवघर
Explanation:
- सपही का माकोमारो पहाड़ मेला डोमचांच (कोडरमा) में आयोजित होता है।
- धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, महर्षि परशुराम ने अपने पिता के कहने पर माता रेणुका का वध सपही स्थित इसी पहाड़ी पर किया था।
- कोडरमा जिले के प्रमुख मेले:
- माकोमारो पहाड़ मेला – डोमचांच
- चपरी मेला – बरवाडीह (लातेहार)
निम्न में से कौन-सा मेला सिमडेगा में आयोजित होता है?
- तुर्की मेला
- उर्स मेला
- रामरेखा धाम मेला
- जतराही मेला
Explanation:
- रामरेखा धाम मेला कार्तिक पूर्णिमा पर सिमडेगा में आयोजित होता है।
- मान्यता है कि भगवान श्रीराम दण्डकारण्य जाने के क्रम में रामरेखा पहाड़ (सिमडेगा) पर कुछ दिन बिताये थे।
- सिमडेगा जिले के प्रमुख मेले:
- गाँधी मेला
- रामरेखा धाम मेला – कार्तिक पूर्णिमा
चाइबासा में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- गाँधी मेला
- तुर्की मेला
- उर्स मेला
- जतराही मेला
Explanation:
- चाइबासा (पश्चिमी सिंहभूम) में तुर्की मेला आयोजित होता है।
- चाइबासा पश्चिमी सिंहभूम जिले का मुख्यालय है।
- पश्चिमी सिंहभूम के प्रमुख किले:
- जैतगढ़ का किला – बैतरणी नदी के किनारे
- जगन्नाथ का किला / पोराहाट का किला – राजा जगन्नाथ सिंह
- चक्रधरपुर की राजवाड़ी – नरपति सिंह (1910-20 ई.)
गुमला में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- गाँधी मेला
- तुर्की मेला
- उर्स मेला
- जतराही मेला
Explanation:
- गुमला में उर्स मेला आयोजित होता है।
- उर्स मुस्लिम समुदाय का एक धार्मिक आयोजन है, जो सूफी संतों की याद में मनाया जाता है।
- गुमला जिले के प्रमुख किले/महल:
- नवरतनगढ़ महल / दोयसा का किला – दुर्जनशाल (1585 ई.), ‘झारखण्ड का हम्पी’
- पालकोट का राजमहल – यदुनाथ शाह (NH-23 पर)
- नागफनी का राजमहल – 1704 ई. (सिसई)
चतरा में कौन-कौन से मेले आयोजित होते हैं?
- गाँधी मेला और रामरेखा धाम मेला
- तुर्की मेला और उर्स मेला
- जतराही मेला और कुंडा मेला
- बिंदुधाम मेला और हिजला मेला
Explanation:
- चतरा में जतराही मेला और कुंडा मेला आयोजित होते हैं।
- कुंडा मेला – प्रतापपुर (चतरा) में फागुन शिवरात्रि पर आयोजित होता है (पशु मेला के रूप में)।
- महत्वपूर्ण: चतरा जिले में कुंडा का किला (14वीं शताब्दी में चेरोवंशी राजा द्वारा निर्मित) स्थित है।
गोड्डा में कौन-कौन से मेले आयोजित होते हैं?
- हिजला मेला और नूनबिल मेला
- गणतंत्र मेला और बिसुआ मेला
- बुढ़ई मेला और श्रावणी मेला
- जायदा मेला और चपरी मेला
Explanation:
- गोड्डा में गणतंत्र मेला और बिसुआ मेला आयोजित होते हैं।
- बिसुआ मेला – बसंतराय प्रखंड, गोड्डा में 14 अप्रैल से शुरू होता है (हर वर्ष चैत माह के अंतिम तारीख व वैशाख की पहली तारीख को)।
- इस मेले का आयोजन साफाहोड़ समुदाय के लोगों द्वारा किया जाता है।
साहेबगंज में कौन-सा मेला चैत्र माह में आयोजित होता है?
- हिजला मेला
- बिंदुधाम मेला
- बुढ़ई मेला
- जायदा मेला
Explanation:
- बिंदुधाम मेला साहेबगंज के बिंदुधाम शक्तिपीठ में चैत्र माह में आयोजित होता है।
- बिंदुधाम एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है तथा यहाँ देवी सती के शरीर का एक अंग गिरा था।
- साहेबगंज के अन्य प्रमुख किले:
- राजमहल किला – मानसिंह (15वीं शताब्दी)
- तेलियागढ़ किला – ‘बंगाल का प्रवेश द्वार’
नूनबिल मेला किस जिले में आयोजित होता है?
- गोड्डा
- दुमका
- साहेबगंज
- देवघर
Explanation:
- नूनबिल मेला दुमका जिले के मसलिया प्रखंड के नुनबिल नदी के तट पर आयोजित होता है।
- यह मकर संक्रांति के बाद लगता है तथा पहाड़िया जनजाति द्वारा शुरू किया गया था।
- दुमका जिले के प्रमुख मेले:
- हिजला मेला – बसंत ऋतु (फरवरी-मार्च), मयूराक्षी नदी के किनारे
- नूनबिल मेला – मकर संक्रांति के बाद, नुनबिल नदी के तट पर
देवघर में कौन-कौन से मेले आयोजित होते हैं?
- हिजला मेला और नूनबिल मेला
- गणतंत्र मेला और बिसुआ मेला
- बुढ़ई मेला और श्रावणी/सावन मेला
- जायदा मेला और चपरी मेला
Explanation:
- देवघर में बुढ़ई मेला और श्रावणी/सावन मेला आयोजित होते हैं।
- बुढ़ई मेला – अगहन माह में नवान पर्व के रूप में आयोजित होता है।
- श्रावणी/सावन मेला – श्रावण महीना में वैद्यनाथ धाम में आयोजित होता है (राजकीय मेला)।
- बैद्यनाथ धाम 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है।
बोकारो में कौन-कौन से मेले आयोजित होते हैं?
- हथिया पत्थर मेला और मण्डा मेला
- सूर्यकुण्ड मेला और नरसिंहस्थान मेला
- टुसू मेला और मुड़मा जतरा मेला
- जायदा मेला और चपरी मेला
Explanation:
- बोकारो में हथिया पत्थर मेला और मण्डा मेला आयोजित होते हैं।
- हथिया पत्थर मेला – फुसरो (बोकारो) में मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होता है।
- मण्डा मेला – बैशाख, जेठ एवं आषाढ़ माह में आयोजित होता है (हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो में)।
हजारीबाग में कौन-कौन से मेले आयोजित होते हैं?
- हथिया पत्थर मेला और मण्डा मेला
- मण्डा मेला, सूर्यकुण्ड मेला और नरसिंहस्थान मेला
- टुसू मेला और मुड़मा जतरा मेला
- जायदा मेला और चपरी मेला
Explanation:
- हजारीबाग में मण्डा मेला, सूर्यकुण्ड मेला और नरसिंहस्थान मेला आयोजित होते हैं।
- मण्डा मेला – बैशाख, जेठ एवं आषाढ़ माह में (हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो में)
- सूर्यकुण्ड मेला – मकर संक्रांति से अगले 10 दिनों तक
- नरसिंहस्थान मेला – कार्तिक पूर्णिमा को
रामगढ़ में मण्डा मेला कब आयोजित होता है?
- कार्तिक पूर्णिमा को
- मकर संक्रांति के अवसर पर
- बैशाख, जेठ एवं आषाढ़ माह में
- दशहरा के दस दिन बाद
Explanation:
- रामगढ़ में मण्डा मेला बैशाख, जेठ एवं आषाढ़ माह में आयोजित होता है।
- मण्डा पर्व महादेव (शिव) की पूजा से संबंधित है तथा यह झारखण्ड में शिव की सबसे कठोर पूजा है।
- रामगढ़ जिले के प्रमुख किले:
- रामगढ़ का किला – राजा सबल राय
- गढ़बाँध किला – राजा हेमंत सिंह (1670 ई.)
- इचाक का किला – तेज सिंह
राँची में कौन-कौन से मेले आयोजित होते हैं?
- टुसू मेला, बूढ़ा जतरा मेला, मुड़मा जतरा मेला, रथयात्रा मेला, नवमी डोला मेला
- हिजला मेला और नूनबिल मेला
- बुढ़ई मेला और श्रावणी मेला
- हथिया पत्थर मेला और मण्डा मेला
Explanation:
- राँची में अनेक प्रमुख मेले आयोजित होते हैं:
- टुसू मेला – पंचपरगना, मकर संक्रांति
- बूढ़ा जतरा मेला
- मुड़मा जतरा मेला – दशहरा के दस दिन बाद
- रथयात्रा मेला – जगन्नाथपुर, आषाढ़
- घघारी मेला – लापुंग
- रानी चुम्बा मेला
- देवोथान मेला
- नवमी डोला मेला – चैत महीने में
सरायकेला-खरसावाँ में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- गाँधी मेला
- उर्स मेला
- जायदा मेला
- तुर्की मेला
Explanation:
- सरायकेला-खरसावाँ में जायदा मेला मकर संक्रांति पर आयोजित होता है।
- सरायकेला-खरसावाँ झारखण्ड का एक प्रमुख जिला है, जो अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है।
- महत्वपूर्ण: सरायकेला छऊ नृत्य के लिए प्रसिद्ध है।
बरवाडीह (लातेहार) में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- जायदा मेला
- तुर्की मेला
- चपरी मेला
- उर्स मेला
Explanation:
- बरवाडीह (लातेहार) में चपरी मेला आयोजित होता है।
- लातेहार जिले के प्रमुख किले:
- पलामू किला – औरंगा नदी के तट पर, चेरोवंशी शासकों द्वारा निर्मित
- नारायणपुर किला – जाज दास द्वारा निर्मित
डोमचांच (कोडरमा) में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- चपरी मेला
- भूत मेला
- माकोमारो पहाड़ मेला
- करमदाहा मेला
Explanation:
- डोमचांच (कोडरमा) में माकोमारो पहाड़ मेला आयोजित होता है।
- धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, महर्षि परशुराम ने अपने पिता के कहने पर माता रेणुका का वध सपही स्थित इसी पहाड़ी पर किया था।
- कोडरमा झारखण्ड का एक प्रमुख जिला है।
पलामू में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- जायदा मेला
- चपरी मेला
- भूत मेला
- करमदाहा मेला
Explanation:
- भूत मेला पलामू जिले के हैदरनगर में आयोजित होता है।
- जायदा मेला – सरायकेला-खरसावाँ में आयोजित होता है।
- चपरी मेला – बरवाडीह (लातेहार) में आयोजित होता है।
- करमदाहा मेला – जामताड़ा के नारायणपुर में आयोजित होता है।
- भूत मेला चैत्र महीने के प्रतिपदा तिथि से पूर्णिमा तक (अर्थात् 15 दिन) आयोजित होता है।
गोड्डा में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- हिजला मेला
- बिसुआ मेला
- नूनबिल मेला
- टुसू मेला
Explanation:
- बिसुआ मेला गोड्डा जिले के बसंतराय प्रखंड में आयोजित होता है।
- हिजला मेला – दुमका जिले में आयोजित होता है।
- नूनबिल मेला – दुमका जिले के मसलिया प्रखंड में आयोजित होता है।
- टुसू मेला – पंचपरगना (राँची) में आयोजित होता है।
- बिसुआ मेला 14 अप्रैल से शुरू होता है (हर वर्ष चैत माह के अंतिम तारीख व वैशाख की पहली तारीख को)।
दुमका में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- बिसुआ मेला
- बुढ़ई मेला
- हिजला मेला
- श्रावणी मेला
Explanation:
- हिजला मेला दुमका जिले में मयूराक्षी नदी के किनारे आयोजित होता है।
- बिसुआ मेला – गोड्डा जिले में आयोजित होता है।
- बुढ़ई मेला – देवघर जिले में आयोजित होता है।
- श्रावणी मेला – वैद्यनाथ धाम (देवघर) में आयोजित होता है।
- हिजला मेला बसंत ऋतु (फरवरी-मार्च) में आयोजित होता है तथा इसकी शुरुआत 1890 ई. में हुई थी।
देवघर में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- बिसुआ मेला
- हिजला मेला
- श्रावणी मेला
- नूनबिल मेला
Explanation:
- श्रावणी/सावन मेला वैद्यनाथ धाम (देवघर) में आयोजित होता है।
- बिसुआ मेला – गोड्डा जिले में आयोजित होता है।
- हिजला मेला – दुमका जिले में आयोजित होता है।
- नूनबिल मेला – दुमका जिले के मसलिया प्रखंड में आयोजित होता है।
- श्रावणी मेला श्रावण महीना में आयोजित होता है तथा झारखंड सरकार ने इसे राजकीय मेले का दर्जा दिया है।
सिमडेगा में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- उर्स मेला
- रामरेखा धाम मेला
- तुर्की मेला
- जतराही मेला
Explanation:
- रामरेखा धाम मेला सिमडेगा जिले में कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित होता है।
- उर्स मेला – गुमला जिले में आयोजित होता है।
- तुर्की मेला – चाइबासा (पश्चिमी सिंहभूम) में आयोजित होता है।
- जतराही मेला – चतरा जिले में आयोजित होता है।
- मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने रामरेखा पहाड़ (सिमडेगा) पर कुछ दिन बिताये थे।
चाइबासा (पश्चिमी सिंहभूम) में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- गाँधी मेला
- उर्स मेला
- तुर्की मेला
- रामरेखा धाम मेला
Explanation:
- तुर्की मेला चाइबासा (पश्चिमी सिंहभूम) में आयोजित होता है।
- गाँधी मेला – सिमडेगा जिले में आयोजित होता है।
- उर्स मेला – गुमला जिले में आयोजित होता है।
- रामरेखा धाम मेला – सिमडेगा जिले में आयोजित होता है।
- चाइबासा पश्चिमी सिंहभूम जिले का मुख्यालय है।
गुमला में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- गाँधी मेला
- तुर्की मेला
- उर्स मेला
- रामरेखा धाम मेला
Explanation:
- उर्स मेला गुमला जिले में आयोजित होता है।
- गाँधी मेला – सिमडेगा जिले में आयोजित होता है।
- तुर्की मेला – चाइबासा (पश्चिमी सिंहभूम) में आयोजित होता है।
- रामरेखा धाम मेला – सिमडेगा जिले में आयोजित होता है।
- उर्स मुस्लिम समुदाय का एक धार्मिक आयोजन है, जो सूफी संतों की याद में मनाया जाता है।
चतरा में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- तुर्की मेला
- उर्स मेला
- जतराही मेला
- गाँधी मेला
Explanation:
- जतराही मेला चतरा जिले में आयोजित होता है।
- तुर्की मेला – चाइबासा (पश्चिमी सिंहभूम) में आयोजित होता है।
- उर्स मेला – गुमला जिले में आयोजित होता है।
- गाँधी मेला – सिमडेगा जिले में आयोजित होता है।
- चतरा जिले में कुंडा मेला (प्रतापपुर) फागुन शिवरात्रि पर भी आयोजित होता है।
साहेबगंज में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- हिजला मेला
- बिंदुधाम मेला
- नूनबिल मेला
- बुढ़ई मेला
Explanation:
- बिंदुधाम मेला साहेबगंज जिले के बिंदुधाम शक्तिपीठ में चैत्र माह में आयोजित होता है।
- हिजला मेला – दुमका जिले में आयोजित होता है।
- नूनबिल मेला – दुमका जिले के मसलिया प्रखंड में आयोजित होता है।
- बुढ़ई मेला – देवघर जिले में आयोजित होता है।
- बिंदुधाम एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है।
बोकारो में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- हथिया पत्थर मेला
- सूर्यकुण्ड मेला
- नरसिंहस्थान मेला
- मण्डा मेला
Explanation:
- हथिया पत्थर मेला फुसरो (बोकारो) में मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होता है।
- सूर्यकुण्ड मेला – हजारीबाग जिले में आयोजित होता है।
- नरसिंहस्थान मेला – हजारीबाग जिले में कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित होता है।
- मण्डा मेला – हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो में आयोजित होता है।
- बोकारो में मण्डा मेला भी बैशाख, जेठ एवं आषाढ़ माह में आयोजित होता है।
हजारीबाग में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- हथिया पत्थर मेला
- सूर्यकुण्ड मेला
- टुसू मेला
- मुड़मा जतरा मेला
Explanation:
- सूर्यकुण्ड मेला हजारीबाग जिले में मकर संक्रांति से अगले 10 दिनों तक आयोजित होता है।
- हथिया पत्थर मेला – फुसरो (बोकारो) में आयोजित होता है।
- टुसू मेला – पंचपरगना (राँची) में आयोजित होता है।
- मुड़मा जतरा मेला – राँची जिले में दशहरा के दस दिन बाद आयोजित होता है।
- हजारीबाग में मण्डा मेला और नरसिंहस्थान मेला भी आयोजित होते हैं।
रामगढ़ में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- टुसू मेला
- रथयात्रा मेला
- मण्डा मेला
- नवमी डोला मेला
Explanation:
- मण्डा मेला रामगढ़ जिले में बैशाख, जेठ एवं आषाढ़ माह में आयोजित होता है।
- टुसू मेला – पंचपरगना (राँची) में आयोजित होता है।
- रथयात्रा मेला – जगन्नाथपुर (राँची) में आषाढ़ माह में आयोजित होता है।
- नवमी डोला मेला – टाटीसिल्वे (राँची) में चैत महीने में आयोजित होता है।
- रामगढ़ में मण्डा मेला हजारीबाग और बोकारो में भी आयोजित होता है।
राँची में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- हथिया पत्थर मेला
- सूर्यकुण्ड मेला
- मुड़मा जतरा मेला
- नरसिंहस्थान मेला
Explanation:
- मुड़मा जतरा मेला मुड़मा (राँची) में दशहरा के दस दिन बाद आयोजित होता है।
- हथिया पत्थर मेला – फुसरो (बोकारो) में आयोजित होता है।
- सूर्यकुण्ड मेला – हजारीबाग जिले में आयोजित होता है।
- नरसिंहस्थान मेला – हजारीबाग जिले में कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित होता है।
- राँची में टुसू मेला, रथयात्रा मेला, नवमी डोला मेला आदि भी आयोजित होते हैं।
कोडरमा में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- भूत मेला
- करमदाहा मेला
- माकोमारो पहाड़ मेला
- चपरी मेला
Explanation:
- माकोमारो पहाड़ मेला डोमचांच (कोडरमा) में आयोजित होता है।
- भूत मेला – हैदरनगर (पलामू) में आयोजित होता है।
- करमदाहा मेला – नारायणपुर (जामताड़ा) में आयोजित होता है।
- चपरी मेला – बरवाडीह (लातेहार) में आयोजित होता है।
- धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, महर्षि परशुराम ने माता रेणुका का वध सपही स्थित इसी पहाड़ी पर किया था।
जामताड़ा में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- भूत मेला
- करमदाहा मेला
- माकोमारो पहाड़ मेला
- चपरी मेला
Explanation:
- करमदाहा मेला नारायणपुर (जामताड़ा) में मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होता है।
- भूत मेला – हैदरनगर (पलामू) में आयोजित होता है।
- माकोमारो पहाड़ मेला – डोमचांच (कोडरमा) में आयोजित होता है।
- चपरी मेला – बरवाडीह (लातेहार) में आयोजित होता है।
- इस अवसर पर भगवान शिव के दुखहरण मंदिर में पूजा की जाती है तथा शिवलिंग की खोज राजा कर्ण ने की थी।
लातेहार में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- भूत मेला
- करमदाहा मेला
- माकोमारो पहाड़ मेला
- चपरी मेला
Explanation:
- चपरी मेला बरवाडीह (लातेहार) में आयोजित होता है।
- भूत मेला – हैदरनगर (पलामू) में आयोजित होता है।
- करमदाहा मेला – नारायणपुर (जामताड़ा) में आयोजित होता है।
- माकोमारो पहाड़ मेला – डोमचांच (कोडरमा) में आयोजित होता है।
- लातेहार जिले में पलामू किला (औरंगा नदी के तट पर) तथा नारायणपुर किला स्थित हैं।
सरायकेला-खरसावाँ में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- जायदा मेला
- भूत मेला
- चपरी मेला
- करमदाहा मेला
Explanation:
- जायदा मेला सरायकेला-खरसावाँ जिले में मकर संक्रांति पर आयोजित होता है।
- भूत मेला – हैदरनगर (पलामू) में आयोजित होता है।
- चपरी मेला – बरवाडीह (लातेहार) में आयोजित होता है।
- करमदाहा मेला – नारायणपुर (जामताड़ा) में आयोजित होता है।
- सरायकेला-खरसावाँ छऊ नृत्य के लिए प्रसिद्ध है।
निम्न में से कौन-सा मेला दशहरा के दस दिन बाद आयोजित होता है?
- टुसू मेला
- रथयात्रा मेला
- मुड़मा जतरा मेला
- नवमी डोला मेला
Explanation:
- मुड़मा जतरा मेला मुड़मा (राँची) में दशहरा के दस दिन बाद आयोजित होता है।
- टुसू मेला – पंचपरगना (राँची) में मकर संक्रांति पर आयोजित होता है।
- रथयात्रा मेला – जगन्नाथपुर (राँची) में आषाढ़ माह में आयोजित होता है।
- नवमी डोला मेला – टाटीसिल्वे (राँची) में चैत महीने में आयोजित होता है।
- मुड़मा में मुंडा और उराव जनजाति के बीच आपसी समझौता हुआ था।
निम्न में से कौन-सा मेला आषाढ़ माह में आयोजित होता है?
- टुसू मेला
- रथयात्रा मेला
- मुड़मा जतरा मेला
- नवमी डोला मेला
Explanation:
- रथयात्रा मेला जगन्नाथपुर (राँची) में आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को आयोजित होता है।
- टुसू मेला – पंचपरगना (राँची) में मकर संक्रांति पर आयोजित होता है।
- मुड़मा जतरा मेला – मुड़मा (राँची) में दशहरा के दस दिन बाद आयोजित होता है।
- नवमी डोला मेला – टाटीसिल्वे (राँची) में चैत महीने में आयोजित होता है।
- रथयात्रा मेला की शुरुआत 1691 में बड़कागढ़ के राजा एनी नाथ शाहदेव ने की थी।
निम्न में से कौन-सा मेला चैत महीने में आयोजित होता है?
- टुसू मेला
- रथयात्रा मेला
- मुड़मा जतरा मेला
- नवमी डोला मेला
Explanation:
- नवमी डोला मेला टाटीसिल्वे (राँची) में चैत महीने के कृष्ण पक्ष की नवमी को आयोजित होता है।
- टुसू मेला – पंचपरगना (राँची) में मकर संक्रांति पर आयोजित होता है।
- रथयात्रा मेला – जगन्नाथपुर (राँची) में आषाढ़ माह में आयोजित होता है।
- मुड़मा जतरा मेला – मुड़मा (राँची) में दशहरा के दस दिन बाद आयोजित होता है।
- यह मेला होली के 9 दिन बाद प्रत्येक वर्ष आयोजित किया जाता है।
निम्न में से कौन-सा मेला कार्तिक पूर्णिमा को आयोजित होता है?
- टुसू मेला
- सूर्यकुण्ड मेला
- नरसिंहस्थान मेला
- हथिया पत्थर मेला
Explanation:
- नरसिंहस्थान मेला हजारीबाग में कार्तिक पूर्णिमा को आयोजित होता है।
- टुसू मेला – पंचपरगना (राँची) में मकर संक्रांति पर आयोजित होता है।
- सूर्यकुण्ड मेला – हजारीबाग में मकर संक्रांति से अगले 10 दिनों तक आयोजित होता है।
- हथिया पत्थर मेला – फुसरो (बोकारो) में मकर संक्रांति पर आयोजित होता है।
- रामरेखा धाम मेला (सिमडेगा) भी कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित होता है।
निम्न में से कौन-सा मेला मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होता है?
- सूर्यकुण्ड मेला
- नरसिंहस्थान मेला
- बुढ़ई मेला
- श्रावणी मेला
Explanation:
- सूर्यकुण्ड मेला हजारीबाग में मकर संक्रांति से अगले 10 दिनों तक आयोजित होता है।
- नरसिंहस्थान मेला – हजारीबाग में कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित होता है।
- बुढ़ई मेला – देवघर में अगहन माह में आयोजित होता है।
- श्रावणी मेला – देवघर में श्रावण महीना में आयोजित होता है।
- अन्य मकर संक्रांति मेले: नूनबिल (दुमका), करमदाहा (जामताड़ा), हथिया पत्थर (बोकारो), जायदा (सरायकेला-खरसावाँ), टुसू (राँची)
निम्न में से कौन-सा मेला बसंत ऋतु (फरवरी-मार्च) में आयोजित होता है?
- नूनबिल मेला
- हिजला मेला
- बिसुआ मेला
- टुसू मेला
Explanation:
- हिजला मेला दुमका जिले में बसंत ऋतु (फरवरी-मार्च) में आयोजित होता है।
- नूनबिल मेला – दुमका जिले में मकर संक्रांति के बाद आयोजित होता है।
- बिसुआ मेला – गोड्डा जिले में 14 अप्रैल से शुरू होता है।
- टुसू मेला – पंचपरगना (राँची) में मकर संक्रांति पर आयोजित होता है।
- हिजला मेले का उद्देश्य जनता को विकास कार्यक्रम की जानकारी देना है।
निम्न में से कौन-सा मेला शक्तिपीठ में आयोजित होता है?
- हिजला मेला
- नूनबिल मेला
- बिंदुधाम मेला
- बिसुआ मेला
Explanation:
- बिंदुधाम मेला बिंदुधाम शक्तिपीठ (साहेबगंज) में चैत्र माह में आयोजित होता है।
- हिजला मेला – दुमका जिले में मयूराक्षी नदी के किनारे आयोजित होता है।
- नूनबिल मेला – दुमका जिले में नुनबिल नदी के तट पर आयोजित होता है।
- बिसुआ मेला – गोड्डा जिले के बसंतराय प्रखंड में आयोजित होता है।
- बिंदुधाम एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जहाँ देवी सती के शरीर का एक अंग गिरा था।
निम्न में से कौन-सा मेला नदी के किनारे आयोजित होता है?
- हिजला मेला
- नूनबिल मेला
- करमदाहा मेला
- उपरोक्त सभी
Explanation:
- उपरोक्त सभी मेले नदी के किनारे आयोजित होते हैं:
- हिजला मेला (दुमका) – मयूराक्षी नदी के किनारे
- नूनबिल मेला (दुमका) – नुनबिल नदी के तट पर
- करमदाहा मेला (जामताड़ा) – नारायणपुर में (नदी उल्लिखित नहीं, परंतु जामताड़ा में स्थित)
- महत्वपूर्ण: नदियों के किनारे मेलों का आयोजन झारखण्ड की सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पलामू में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- जायदा मेला
- चपरी मेला
- भूत मेला
- करमदाहा मेला
Explanation:
- पलामू में हैदरनगर में भूत मेला आयोजित होता है।
- यह चैत्र महीने के प्रतिपदा तिथि से पूर्णिमा तक (अर्थात् 15 दिन) आयोजित होता है।
- पलामू जिले के प्रमुख किले:
- विश्रामपुर का किला – राजा तड़वन
- शाहपुर का किला – गोपाल राय (1772 ई.)
- चैनपुर का किला – पूरनमल के वंशज (कोयल नदी के तट पर)
- रोहिल्लों का किला – मुजफ्फर खाँ (त्रिभुजाकार)
जामताड़ा में कौन-सा मेला आयोजित होता है?
- भूत मेला
- माकोमारो पहाड़ मेला
- करमदाहा मेला
- चपरी मेला
Explanation:
- जामताड़ा के नारायणपुर में करमदाहा मेला आयोजित होता है।
- यह मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित किया जाता है, जो 15 दिनों तक चलता है।
- इस अवसर पर भगवान शिव के दुखहरण मंदिर में पूजा की जाती है तथा शिवलिंग की खोज राजा कर्ण ने की थी।
निम्न में से कौन-सा मेला मकर संक्रांति पर आयोजित होता है?
- नूनबिल मेला
- करमदाहा मेला
- हथिया पत्थर मेला
- उपरोक्त सभी
Explanation:
- उपरोक्त सभी मेले मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होते हैं:
- नूनबिल मेला (दुमका) – मकर संक्रांति के बाद
- करमदाहा मेला (जामताड़ा) – मकर संक्रांति पर
- हथिया पत्थर मेला (बोकारो) – मकर संक्रांति पर
- अन्य मकर संक्रांति मेले:
- सूर्यकुण्ड मेला (हजारीबाग) – मकर संक्रांति से अगले 10 दिनों तक
- टुसू मेला (पंचपरगना, राँची) – मकर संक्रांति के दिन
- जायदा मेला (सरायकेला-खरसावाँ) – मकर संक्रांति पर
निम्न में से कौन-सा मेला चैत्र महीने में आयोजित होता है?
- बिंदुधाम मेला
- नवमी डोला मेला
- भूत मेला
- उपरोक्त सभी
Explanation:
- उपरोक्त सभी मेले चैत्र महीने में आयोजित होते हैं:
- बिंदुधाम मेला (साहेबगंज) – चैत्र माह में
- नवमी डोला मेला (राँची) – चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की नवमी को
- भूत मेला (पलामू) – चैत्र महीने के प्रतिपदा से पूर्णिमा तक (15 दिन)
- महत्वपूर्ण: चैत्र माह हिंदू कैलेंडर का पहला महीना है।
टुसू मेला किस देवता की पूजा से संबंधित है?
- शिव
- विष्णु
- सूर्य
- गणेश
Explanation:
- टुसू मेला सूर्य पूजा से संबंधित है।
- यह मकर संक्रांति के दिन मनाया जाता है, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है।
- यह पर्व टुसू नाम की कन्या की स्मृति में मनाया जाता है।
- इस अवसर पर पंचपरगना में टुसू मेला लगता है।
- महत्वपूर्ण: छठ पूजा भी सूर्य देवता की आराधना से संबंधित है।
हिजला मेले का उद्देश्य क्या है?
- धार्मिक अनुष्ठान करना
- पशुओं की खरीद-बिक्री करना
- जनता को विकास कार्यक्रम की जानकारी देना
- सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना
Explanation:
- हिजला मेले का उद्देश्य जनता को विकास कार्यक्रम की जानकारी देना है।
- इस मेले की प्रारंभ 1890 ई. में संथाल परगना के तत्कालीन उपायुक्त कास्टैयर्स ने की थी।
- यह मेला दुमका जिले में मयूराक्षी नदी के किनारे बसंत ऋतु (फरवरी-मार्च) में आयोजित होता है।
