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साका कैलेंडर के अनुसार माघ महीने के पहले दिन झारखण्ड में निम्नलिखित में से कौन-सा त्योहार आयोजित किया जाता है?

  • हल पुन्ह्या
  • सरहुल
  • करम
  • बन्दना

Explanation:

  • हल पुन्ह्या साका कैलेंडर के अनुसार माघ महीने के पहले दिन मनाया जाता है।
  • यह झारखण्ड का एक प्रमुख कृषि पर्व है, जिसमें हल (हल) की पूजा की जाती है तथा नए कृषि वर्ष की शुरुआत होती है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य:
    • माघे पर्व – माघ माह में मनाया जाता है, इसके साथ ही कृषि वर्ष का अंत होता है तथा नया कृषि वर्ष प्रारंभ होता है। यह कृषि श्रमिकों (धांगर) की विदाई का पर्व है।
    • रोहिन / रोहिणी – झारखण्ड राज्य में कैलेंडर वर्ष का प्रथम त्योहार है, जो बीज बोने के त्योहार के रूप में मनाया जाता है।

 

निम्नलिखित त्योहारों में से कौन-सा त्यौहार केवल झारखण्ड में ही मनाया जाता है?

  • शिवरात्रि
  • जन्माष्टमी
  • सोहराई
  • पोंगल

Explanation:

  • सोहराई झारखण्ड का एक प्रमुख पर्व है, जो केवल झारखण्ड में ही मनाया जाता है
  • यह संथाल जनजाति का सबसे बड़ा पर्व है तथा दीपावली के दूसरे दिन, पौष माह में फसल कट जाने के बाद मनाया जाता है।
  • सोहराई में मवेशियों (जानवरों) की पूजा की जाती है तथा यह पर्व पांच दिनों तक चलता है।

 

निम्नलिखित में से कौन-सा त्योहार मार्च-अप्रैल के महीने में मनाया जाता है और इसे ‘फूलों का त्योहार’ कहा जाता है?

  • सरहुल
  • करम
  • जावा
  • मकर

Explanation:

  • सरहुल को ‘फूलों का त्योहार’ कहा जाता है तथा यह मार्च-अप्रैल (चैत्र माह) में मनाया जाता है।
  • यह जनजातियों का सबसे बड़ा पर्व है तथा प्रकृति से संबंधित त्योहार है।
  • पर्व का आयोजनचैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को, बसंत के मौसम में।
  • इस पर्व में साल के वृक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है तथा यह चार दिनों तक मनाया जाता है।
  • अन्य नाम:
    • खद्दी (उराँव जनजाति)
    • बा परब (संथाल जनजाति)
    • जकोर (खड़िया जनजाति)

 

कौन-सा त्योहार झारखण्ड का सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक मानी जाती है और वर्ष में दो बार अर्थात मार्च और नवंबर के महीने में मनायी जाती है?

  • सरहुल
  • करम
  • बंदना
  • छठ

Explanation:

  • छठ पर्व वर्ष में दो बार मार्च और नवंबर में मनाया जाता है।
  • इस पर्व के दौरान सूर्य भगवान की पूजा की जाती है तथा अस्त होते हुए सूर्य को प्रसन्न करने हेतु मनाया जाता है।
  • प्रसाद/मिठाई (व्यंजन) – ‘ठेकुआ‘ का वितरण किया जाता है।
  • महत्वपूर्ण: ठेकुआ झारखण्ड में एक प्रसिद्ध मिठाई (व्यंजन) है।

 

झारखण्ड में सरहुल किस रूप में जाना जाता है?

  • आभूषण
  • उत्सव
  • नदी
  • पक्षी

Explanation:

  • सरहुल झारखण्ड में एक उत्सव (त्योहार) के रूप में जाना जाता है।
  • यह जनजातियों का सबसे बड़ा पर्व है तथा प्रकृति से संबंधित त्योहार है।
  • इसे ‘फूलों का त्योहार’ भी कहा जाता है तथा चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को बसंत के मौसम में मनाया जाता है।

 

किस त्यौहार के दौरान, जनजातीय महिलाएं पूरे दिन पुरुष के कपड़े पहन कर पशुओं का शिकार करती हैं?

  • कर्मा
  • मनसा पूजा
  • छठ पूजा
  • मुक्का सेंदरा

Explanation:

  • मुक्का सेंदरा उराँव जनजाति में महिलाओं द्वारा शिकार खेलने की प्रथा है, जिसमें जनजातीय महिलाएं पुरुष के कपड़े पहनकर पशुओं का शिकार करती हैं।
  • सेंदरा का शाब्दिक अर्थ ‘शिकार‘ होता है तथा यह उराँव जनजाति से संबंधित है।
  • सेंदरा के प्रकार:
    • मुक्का सेंदरा – महिलाओं द्वारा शिकार
    • सू सेंदरा – वैशाख में
    • फागु सेंदरा – फागुन में
    • जेठ शिकार – वर्षा ऋतु के प्रारंभ होने पर

 

झारखण्ड में ‘ठेकुआ’ किस रूप में जाना जाता है?

  • मिठाई (व्यंजन)
  • संगीत का प्रकार
  • विवाह समारोह
  • हथियार का नाम

Explanation:

  • ठेकुआ झारखण्ड में एक मिठाई (व्यंजन) के रूप में जाना जाता है।
  • इसका वितरण छठ पर्व के दौरान प्रसाद के रूप में किया जाता है।
  • छठ पर्व वर्ष में दो बार (मार्च और नवंबर) मनाया जाता है तथा इसमें अस्त होते हुए सूर्य को प्रसन्न करने हेतु पूजा की जाती है।

 

निम्न में से किस त्यौहार को झारखण्ड में बीज बोने के त्योहार के रूप में मनाया जाता है?

  • करम
  • रोहिणी
  • बंदना
  • मकर संक्रांति

Explanation:

  • रोहिन / रोहिणी को झारखण्ड में बीज बोने के त्योहार के रूप में मनाया जाता है।
  • यह झारखण्ड राज्य में कैलेंडर वर्ष का प्रथम त्योहार है तथा इस दिन बीज बोने की शुरुआत की जाती है।
  • महत्वपूर्ण: इस त्योहार के दौरान किसी प्रकार का नृत्य प्रदर्शन या लोकगीत गायन नहीं किया जाता है।
  • अन्य कृषि पर्व:
    • हल पुन्ह्या – माघ महीने के पहले दिन (हल की पूजा)
    • नवाखानी – करमा पर्व के बाद (नया अन्न ग्रहण करना)

 

झारखण्ड में ‘कार्तिक अमावस्या’ के दौरान निम्नलिखित में से कौन-सा त्यौहार मनाया जाता है?

  • सरहुल
  • सोहराय
  • टुसू
  • बंदना

Explanation:

  • बंदना पर्व कार्तिक अमावस्या के दौरान मनाया जाता है।
  • पर्व की शुरुआत ओहिरा गीत के साथ होती है तथा यह पालतू जानवरों से संबंधित है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य:
    • कार्तिक शुक्ल पक्ष के चतुर्दशी के दिन देव उठान पर्व मनाया जाता है, जिसमें देवों को जागृत किया जाता है।
    • देव उठान के बाद ही विवाह हेतु कन्या अथवा वर देखने की प्रथा आरंभ की जाती है।

 

गलत कथन की पहचान करें

  • दनसाई और सोहराई, जहाँ युवा वर्ग करम की रात को गाता और नाचता है।
  • दुसु, फसल पर्व मुख्यतः अविवाहित कन्याओं द्वारा मनाया जाता है।
  • सरहुल/बाहा, जहाँ साल और महुआ के फूलों का प्रयोग आनुष्ठानिक रूप में किया जाता है।
  • माघी पूजा, ओंग जनजाति का एक महत्वपूर्ण त्योहार है।

Explanation:

  • माघी पूजा ओंग जनजाति का त्योहार नहीं है।
  • सही तथ्य:
    • सरहुल में साल के वृक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है तथा इसे ‘फूलों का त्योहार‘ कहा जाता है।
    • करमा में करम वृक्ष की दो डालियाँ गाड़ दी जाती हैं तथा पाहन द्वारा करमा कथा सुनाई जाती है।
    • सोहराई संथाल जनजाति का सबसे बड़ा पर्व है, जिसमें मवेशियों की पूजा की जाती है।
  • ओंग जनजाति अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की एक जनजाति है, झारखण्ड की नहीं।

 

यह त्योहार मुख्यतः पशुओं के लिए है

  • बंदना
  • जनी शिकार
  • रोहिणी
  • हलपुन्या

Explanation:

  • बंदना त्योहार मुख्यतः पशुओं (पालतू जानवरों) से संबंधित है।
  • यह कार्तिक अमावस्या के दौरान मनाया जाता है तथा पर्व की शुरुआत ओहिरा गीत के साथ होती है।
  • अन्य पशु-संबंधी त्योहार:
    • सोहराईमवेशियों (जानवरों) की पूजा की जाती है (संथाल जनजाति का सबसे बड़ा पर्व)।
    • देव उठान – कार्तिक शुक्ल पक्ष के चतुर्दशी को, इसके बाद विवाह की प्रथा आरंभ होती है।

 

कार्तिक के महीने में काले चंद्रमा के दौरान मनाया जाने वाला सबसे अधिक प्रसिद्ध पर्व है

  • जावा
  • सरहुल
  • वंदना
  • करम

Explanation:

  • बंदना (वंदना) पर्व कार्तिक अमावस्या (काले चंद्रमा) के दौरान मनाया जाता है।
  • यह पालतू जानवरों से संबंधित है तथा पर्व की शुरुआत ओहिरा गीत के साथ होती है।
  • महत्वपूर्ण: कार्तिक माह में देव उठान (कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी) तथा बंदना (कार्तिक अमावस्या) दो प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं।

 

यह पर्व मुख्यतः अविवाहित जनजाति बालिकाओं द्वारा और मुख्यतः उत्तम उर्वरता और परिवार की खातिर मनाया जाता है

  • जावा
  • सरहुल
  • वंदना
  • करम

Explanation:

  • जावा पर्व अविवाहित आदिवासी युवतियों द्वारा प्रजनन क्षमता में वृद्धि तथा अच्छे वर हेतु मनाया जाता है।
  • पर्व का आयोजन भादो माह में किया जाता है।
  • मुण्डा जनजाति की कुंआरी लड़कियाँ करमा पर्व में सात प्रकार के अनाजों की ‘जावा‘ उगाने की प्रथा का पालन करती हैं।
  • अन्य महत्वपूर्ण पर्व:
    • जितिया – माँ द्वारा पुत्र के दीर्घायु जीवन तथा समृद्धि के लिए
    • बहुराअच्छी वर्षा तथा संतान प्राप्ति हेतु महिलाओं द्वारा मनाया जाता है (भादो माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी)

 

निम्न कथन की सहायता से पर्व की पहचान करें – गाँव का पुजारी मिट्टी के तीन पात्र लेता है और उन्हें ताजे पानी से भरता है। अगले दिन सबेरे वह मिट्टी के तीन पात्रों को देखता है जिनमें पानी का स्तर घट गया है। यदि पानी का स्तर घट गया है तो वह अकाल की भविष्यवाणी करता है और यदि पानी का स्तर सामान्य रहता है तो उसे उत्तम वर्षा का संकेत समझा जाता है।

  • जावा
  • सरहुल
  • वंदना
  • करम

Explanation:

  • सरहुल पर्व के दौरान गाँव का पुजारी मिट्टी के तीन पात्र लेता है जिनमें पानी भरा होता है।
  • अगले दिन सुबह वह तीनों पात्रों को देखता है:
    • पानी का स्तर घट गया हैअकाल की भविष्यवाणी
    • पानी का स्तर सामान्य रहता हैउत्तम वर्षा का संकेत
  • सरहुल जनजातियों का सबसे बड़ा पर्व है, जो प्रकृति से संबंधित है तथा चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को बसंत के मौसम में मनाया जाता है।
  • इसे ‘फूलों का त्योहार’ भी कहा जाता है तथा इसमें साल के वृक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

 

झारखण्ड का प्रसिद्ध पारसी अग्नि मंदिर कहाँ स्थित है?

  • जमशेदपुर
  • धनबाद
  • देवघर
  • गिरिडीह

Explanation:

  • झारखण्ड का प्रसिद्ध पारसी अग्नि मंदिर जमशेदपुर में स्थित है।
  • जमशेदपुर को झारखण्ड की औद्योगिक राजधानी भी कहा जाता है, जहाँ पारसी समुदाय का ऐतिहासिक संबंध रहा है।
  • पारसी अग्नि मंदिर (आग का मंदिर) पारसी धर्म के अनुयायियों का पवित्र स्थल है, जहाँ अग्नि को पवित्र मानकर उसकी पूजा की जाती है।

 

‘चैत पर्व’ किस महीने में मनाया जाता है?

  • अप्रैल
  • मार्च
  • जनवरी
  • अगस्त

Explanation:

  • चैत पर्व अप्रैल महीने में मनाया जाता है।
  • चैत माह हिंदू कैलेंडर का अंतिम महीना है, जो मार्च-अप्रैल (ग्रेगोरियन कैलेंडर) में आता है।
  • सरहुल पर्व भी चैत्र माह में ही मनाया जाता है।
  • महत्वपूर्ण: बिसुआ मेला (गोड्डा) 14 अप्रैल से शुरू होता है (हर वर्ष चैत माह के अंतिम तारीखवैशाख की पहली तारीख को)।

 

‘बहुरा पर्व’ किस महीने में मनाया जाता है?

  • भादो
  • आश्विन
  • कार्तिक
  • अगहन

Explanation:

  • बहुरा पर्व भादो माह में मनाया जाता है।
  • इसे राइज बहरलक के नाम से भी जाना जाता है।
  • पर्व का आयोजन – भादो माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन।
  • यह अच्छी वर्षा तथा संतान प्राप्ति हेतु महिलाओं द्वारा मनाया जाता है।

 

कर्मा पर्व किस महीने में मनाया जाता है?

  • भादो
  • आश्विन
  • कार्तिक
  • अगहन

Explanation:

  • कर्मा पर्व भाद्रपद (भादो) माह में मनाया जाता है।
  • पर्व का आयोजन – भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को।
  • यह प्रकृति संबंधी त्योहार है तथा भाई-बहन के प्रेम का पर्व है।
  • इस पर्व का संदेशकर्म की जीवन में प्रधानता
  • त्योहार के नृत्य के मैदान (अखड़ा) में करम वृक्ष की दो डालियाँ गाड़ दी जाती हैं।

 

जावा पर्व किस महीने में मनाया जाता है?

  • भादो
  • आश्विन
  • कार्तिक
  • अगहन

Explanation:

  • जावा पर्व भादो माह में मनाया जाता है।
  • यह अविवाहित आदिवासी युवतियों द्वारा प्रजनन क्षमता में वृद्धि तथा अच्छे वर हेतु मनाया जाता है।
  • मुण्डा जनजाति की कुंआरी लड़कियाँ करमा पर्व में सात प्रकार के अनाजों की ‘जावा‘ उगाने की प्रथा का पालन करती हैं।

 

कडलेटा पर्व किस महीने में मनाया जाता है?

  • भादो
  • आश्विन
  • कार्तिक
  • अगहन

Explanation:

  • कडलेटा पर्व भादो माह में करमा से पहले मनाया जाता है।
  • इसका आयोजन मेढ़क भूत को शांत करने के लिए किया जाता है।
  • इसमें अखरा में साल, भेलवा तथा केन्दु की डालियां रखकर पूजा की जाती है तथा पूजा के बाद लोग इस डाल को अपने खेतों में गाड़ते हैं ताकि फसल को रोगमुक्त रखा जा सके।

 

भेलवा फारेक पर्व किस महीने में मनाया जाता है?

  • भादो
  • आश्विन
  • कार्तिक
  • अगहन

Explanation:

  • भेलवा फारेख (जिसे भाख काटेक भी कहा जाता है) भादो माह में कदलेटा के दो-तीन दिन बाद मनाया जाता है।
  • यह कदलेटा पर्व से संबंधित एक अनुष्ठान है।
  • महत्वपूर्ण: भादो माह में करमा, जावा, कदलेटा, बहुरा एवं भेलवा फारेख जैसे अनेक प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं।

 

गांगी आड़या पर्व किस महीने में मनाया जाता है?

  • भादो
  • आश्विन
  • कार्तिक
  • अगहन

Explanation:

  • गांगी आड़या पर्व भादो माह में नई फसल कटने पर मनाया जाता है।
  • यह माल पहाड़िया जनजाति द्वारा मनाया जाता है।
  • भादो माह झारखण्ड में कृषि एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माह है, जिसमें अनेक जनजातीय पर्व मनाए जाते हैं।

 

सोहराई पर्व किस महीने में मनाया जाता है?

  • भादो
  • आश्विन
  • कार्तिक
  • अगहन

Explanation:

  • सोहराई पर्व कार्तिक माह में मनाया जाता है।
  • पर्व का आयोजन – दीपावली के दूसरे दिन, पौष माह में (फसल कट जाने के बाद)।
  • यह संथाल जनजाति का सबसे बड़ा पर्व है तथा मवेशियों (जानवरों) की पूजा की जाती है।
  • यह पर्व पांच दिनों तक चलता है।

 

बंदना पर्व किस महीने में मनाया जाता है?

  • भादो
  • आश्विन
  • कार्तिक
  • अगहन

Explanation:

  • बंदना पर्व कार्तिक अमावस्या के दौरान मनाया जाता है।
  • पर्व की शुरुआत ओहिरा गीत के साथ होती है तथा यह पालतू जानवरों से संबंधित है।
  • कार्तिक माह में देव उठान (कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी) तथा बंदना (कार्तिक अमावस्या) दो प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं।

 

देव उठान पर्व किस महीने में मनाया जाता है?

  • भादो
  • आश्विन
  • कार्तिक
  • अगहन

Explanation:

  • देव उठान पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष के चतुर्दशी के दिन मनाया जाता है।
  • इस दिन देवों को जागृत किया जाता है।
  • इसके बाद ही विवाह हेतु कन्या अथवा वर देखने की प्रथा आरंभ की जाती है।
  • महत्वपूर्ण: कार्तिक पूर्णिमा पर नरसिंहस्थान मेला (हजारीबाग) तथा रामरेखा धाम मेला (सिमडेगा) आयोजित किए जाते हैं।

 

निम्न में से कौन सा त्योहार असुर जनजाति द्वारा लोहा गलाने के उद्योग की उन्नति हेतु मनाया जाता है?

  • कुटसी
  • साकरात
  • एरोक
  • बाहा

Explanation:

  • कुटसी त्योहार असुर जनजाति द्वारा लोहा गलाने के उद्योग की उन्नति हेतु मनाया जाता है।
  • असुर जनजाति झारखण्ड की प्राचीन जनजातियों में से एक है, जो लोहा गलाने के कार्य से जुड़ी हुई है।
  • अन्य जनजाति एवं त्योहार:
    • संथालसोहराई, बाहा, साकरात, एरोक, हरियाड़
    • उराँवसरहुल (खद्दी), मण्डा, चाण्डी, जतरा
    • खड़ियासरहुल (जकोर), जंकोर पूजा, पाटो सरना, जाडकोर पूजा

 

झारखण्ड की जनजातियों का सबसे बड़ा पर्व है?

  • कुटसी
  • साकरात
  • सरहुल
  • बाहा

Explanation:

  • सरहुल झारखण्ड की जनजातियों का सबसे बड़ा पर्व है।
  • यह प्रकृति से संबंधित त्योहार है तथा इसे ‘फूलों का त्योहार’ भी कहा जाता है।
  • पर्व का आयोजन – चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को, बसंत के मौसम में।
  • अन्य नाम:
    • खद्दी (उराँव जनजाति)
    • बा परब (संथाल जनजाति)
    • जकोर (खड़िया जनजाति)

 

सरहुल पर्व कब मनाया जाता है?

  • चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को
  • श्रावन माह के कृण्ण पक्ष की तृतीया को
  • ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को
  • कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया को

Explanation:

  • सरहुल पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है।
  • यह बसंत के मौसम (मार्च-अप्रैल) में आयोजित किया जाता है।
  • यह जनजातियों का सबसे बड़ा पर्व है तथा फूलों का त्योहार है।
  • इस पर्व में साल के वृक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है तथा यह चार दिनों तक मनाया जाता है।

 

सरहुल पर्व को ‘बा परब’ के रूप में किस जनजाति के द्वारा मनाया जाता है?

  • संथाल जनजाति द्वारा
  • उराँव जनजाति द्वारा
  • खड़िया जनजाति द्वारा
  • माल पहाड़िया जनजाति द्वारा

Explanation:

  • सरहुल पर्व को संथाल जनजाति द्वारा ‘बा परब‘ के रूप में मनाया जाता है।
  • सरहुल झारखण्ड की जनजातियों का सबसे बड़ा पर्व है।
  • अन्य नाम एवं संबंधित जनजातियाँ:
    • खद्दीउराँव जनजाति
    • जकोरखड़िया जनजाति

 

सरहुल पर्व को ‘जकोर’ के रूप में किस जनजाति के द्वारा मनाया जाता है?

  • संथाल जनजाति द्वारा
  • उराँव जनजाति द्वारा
  • खड़िया जनजाति द्वारा
  • माल पहाड़िया जनजाति द्वारा

Explanation:

  • सरहुल पर्व को खड़िया जनजाति द्वारा ‘जकोर‘ के रूप में मनाया जाता है।
  • यह प्रकृति से संबंधित त्योहार है तथा इसे ‘फूलों का त्योहार’ कहा जाता है।
  • खड़िया जनजाति झारखण्ड की प्रमुख जनजातियों में से एक है।

 

सरहुल पर्व को ‘खद्दी’ के रूप में किस जनजाति के द्वारा मनाया जाता है?

  • संथाल जनजाति द्वारा
  • उराँव जनजाति द्वारा
  • खड़िया जनजाति द्वारा
  • माल पहाड़िया जनजाति द्वारा

Explanation:

  • सरहुल पर्व को उराँव जनजाति द्वारा ‘खद्दी‘ के रूप में मनाया जाता है।
  • उराँव झारखण्ड की प्रमुख जनजातियों में से एक है, जो मुख्यतः राँची, गुमला, लोहरदगा आदि क्षेत्रों में निवास करती है।

 

मण्डा पर्व कब मनाया जाता है?

  • चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को
  • बैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अक्षय तृतीया को
  • ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को
  • कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया को

Explanation:

  • मण्डा पर्व बैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अक्षय तृतीया को मनाया जाता है।
  • इसमें महादेव (शिव) की पूजा होती है तथा यह झारखण्ड में शिव की सबसे कठोर पूजा है।
  • भगता – उपवास रखने वाले पुरुष-व्रती को कहा जाता है।
  • सोखताइनमहिला-व्रती को कहा जाता है।
  • धुवांसी – भोगताओं को रात में आग के ऊपर उल्टा लटकाकर झूलने की प्रथा।
  • फूल-खुंदी – भोगताओं को आग के अंगारों पर चलने की प्रथा।
  • मण्डा मेला हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो में बैशाख, जेठ एवं आषाढ़ माह में लगता है।

 

निम्न में से कौन-सा एक पर्व बारह वर्ष में एक बार मनाया जाता है?

  • कुटसी
  • साकरात
  • भाई भीख
  • बाहा

Explanation:

  • भाई भीख पर्व बारह वर्ष में एक बार मनाया जाता है।
  • इस पर्व में बहन अपने भाई के घर से भिक्षा मांगकर अनाज लाती है तथा एक निश्चित दिन निमंत्रण देकर उसे अपने घर पर भोजन कराती है।
  • यह झारखण्ड की सांस्कृतिक परंपराओं में भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक है।

 

निम्न में से कौन-सा एक पर्व बारह वर्ष में एक बार मनाया जाता है?

  • कुटसी
  • साकरात
  • जनी शिकार
  • बाहा

Explanation:

  • जनी शिकार पर्व बारह वर्ष के अंतराल पर मनाया जाता है।
  • इस पर्व के दौरान महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से पुरुषों का वेश धारण करके परंपरागत हथियार से जानवरों का शिकार किया जाता है।
  • यह भारत में केवल झारखण्ड राज्य में ही मनाया जाता है।

 

निम्न में से कौन-सा एक पर्व बारह वर्ष में एक बार मनाया जाता है?

  • कुटसी
  • साकरात
  • देशाऊली
  • बाहा

Explanation:

  • देशाऊली पर्व 12 वर्ष में एक बार मनाया जाने वाला उत्सव है।
  • इस त्योहार में मरांग बुरू देवता को काड़ा (भैंसा) की बलि दी जाती है।
  • मरांग बुरू झारखण्ड की जनजातियों के प्रमुख देवताओं में से एक हैं।

 

निम्न में से किस पर्व में महिलाएँ भाग नहीं लेती हैं?

  • कुटसी
  • सूर्याही
  • देशाऊली
  • बाहा

Explanation:

  • सूर्याही पूजा में महिलाएँ भाग नहीं लेती हैं।
  • पर्व का आयोजन – अगहन माह में।
  • इस पर्व को किसी टांड़ (एक प्रकार का ऊँचा स्थान) पर मनाया जाता है तथा केवल पुरुष भाग लेते हैं।
  • चाण्डी पर्व (उराँव जनजाति) में भी महिलाएँ भाग नहीं लेती हैं तथा जिस परिवार में कोई महिला गर्भवती हो, उस परिवार का पुरुष भी इस पर्व में भाग नहीं लेता है।

 

निम्न में से किस पर्व के दौरान माँ द्वारा अपने पुत्र के दीर्घायु जीवन तथा समृद्धि की कामना की जाती है?

  • कुटसी
  • सूर्याही
  • देशाऊली
  • जितिया

Explanation:

  • जितिया पर्व में माँ द्वारा अपने पुत्र के दीर्घायु जीवन तथा समृद्धि की कामना की जाती है।
  • यह पर्व मातृत्व और पुत्र के प्रति माता के प्रेम का प्रतीक है।
  • महत्वपूर्ण: बहुरा पर्व संतान प्राप्ति हेतु मनाया जाता है तथा जावा पर्व प्रजनन क्षमता में वृद्धि हेतु मनाया जाता है।

 

निम्न में से कौन-सा पर्व गाँव से चेचक की समाप्ति हेतु मनाया जाता है?

  • आसाड़ी पूजा
  • सूर्याही
  • देशाऊली
  • जितिया

Explanation:

  • आसाड़ी पूजा (आषाढ़ी पूजा) आषाढ़ माह में मनाई जाती है।
  • इस पर्व से गाँव में चेचक जैसी बीमारी का प्रकोप नहीं होता है, ऐसी मान्यता है।
  • रोग खेदना पर्व रोगों को गाँव से बाहर निकालने हेतु मनाया जाता है।

 

इस पर्व में मरांग बुरू नामक देवता को भैंसा की बली दी जाती है?

  • कुटसी
  • साकरात
  • देशाऊली
  • बाहा

Explanation:

  • देशाऊली पर्व में मरांग बुरू नामक देवता को काड़ा (भैंसा) की बलि दी जाती है।
  • यह 12 वर्ष में एक बार मनाया जाने वाला उत्सव है।
  • मरांग बुरू झारखण्ड की जनजातियों के प्रमुख देवता हैं, जिन्हें प्रकृति का देवता माना जाता है।

 

कौन-सा पर्व मकर सक्रांति के दिन मनाया जाता है?

  • टुशु
  • साकरात
  • देशाऊली
  • बाहा

Explanation:

  • टुसू पर्व मकर सक्रांति के दिन मनाया जाता है।
  • यह सूर्य पूजा से संबंधित त्योहार है तथा टुसू नाम की कन्या की स्मृति में मनाया जाता है।
  • इस अवसर पर पंचपरगना में टुसू मेला लगता है।
  • इस पर्व के दौरान लड़कियों द्वारा रंगीन कागज से लकड़ी या बांस के एक फ्रेम को सजाया जाता है तथा इसे किसी नदी में बहा दिया जाता है।

 

कौन-सा पर्व मेढ़क भूत को शांत करने हेतु मनाया जाता है?

  • टुशु
  • साकरात
  • देशाऊली
  • कडलेता

Explanation:

  • कडलेटा पर्व मेढ़क भूत को शांत करने के लिए मनाया जाता है।
  • पर्व का आयोजन – भादो माह में करमा से पहले
  • इसमें अखरा में साल, भेलवा तथा केन्दु की डालियां रखकर पूजा की जाती है तथा पूजा के बाद लोग इस डाल को अपने खेतों में गाड़ते हैं ताकि फसल को रोगमुक्त रखा जा सके।
  • महत्वपूर्ण: भेलवा फारेख कदलेटा के दो-तीन दिन बाद मनाया जाता है।

 

झारखण्ड में, निम्नलिखित में से कौन-से त्योहार में लड़कियां रंगीन कागज से लकड़ी/बांस के एक फ्रेम को सजाती हैं और आस-पास की पहाड़ी नदी को भेंट कर देती हैं?

  • हैल पुन्हा
  • टुसू पर्व
  • भगता पर्व
  • रोहिणी

Explanation:

  • टुसू पर्व के दौरान लड़कियां रंगीन कागज से लकड़ी या बांस के एक फ्रेम को सजाती हैं और इसे आस-पास की पहाड़ी नदी को भेंट (बहा) देती हैं।
  • यह पर्व मकर सक्रांति के दिन मनाया जाता है तथा सूर्य पूजा से संबंधित है।
  • यह टुसू नाम की कन्या की स्मृति में मनाया जाता है।
  • इस अवसर पर पंचपरगना में टुसू मेला लगता है।

 

बसंत पंचमी का त्योहार किस मौसम के आगमन का अग्रदूत है?

  • गर्मी
  • सर्दी
  • बरसात
  • वसंत

Explanation:

  • बसंत पंचमी का त्योहार वसंत मौसम के आगमन का अग्रदूत है।
  • यह पर्व माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है।
  • झारखण्ड में: बसंत ऋतु (फरवरी-मार्च) में हिजला मेला (दुमका) का आयोजन होता है।
  • भगता पर्व बसंत एवं ग्रीष्म ऋतु के मध्य मनाया जाता है।
  • खड़िया जनजाति का जंकोर पूजा वसंतोत्सव है।

 

झारखण्ड की प्रसिद्ध छठ पूजा किस देवता की आराधना करने के लिए की जाती है?

  • सूर्य
  • चंद्रमा
  • नदी देवता
  • वन देवता

Explanation:

  • झारखण्ड की प्रसिद्ध छठ पूजा सूर्य देवता की आराधना के लिए की जाती है।
  • यह पर्व वर्ष में दो बार मार्च और नवंबर में मनाया जाता है।
  • इस पर्व के दौरान अस्त होते हुए सूर्य को प्रसन्न करने हेतु पूजा की जाती है।
  • प्रसाद/मिठाई (व्यंजन) – ‘ठेकुआ‘ का वितरण किया जाता है।

 

झारखण्ड के तमाड़ क्षेत्र में बसंत और गर्मी के काल के दौरान कौन-सा त्यौहार मनाया जाता है और बुद्ध बाबा की पूजा लिए जाना जाता है ?

  • टुसु परब
  • जावा
  • जनी शिकार
  • भगता परब

Explanation:

  • झारखण्ड के तमाड़ क्षेत्र में बसंत और गर्मी के काल के दौरान भगता पर्व मनाया जाता है।
  • इसे ‘बुढ़ा बाबा की पूजा’ के रूप में मनाया जाता है।
  • भगता पर्व बसंत एवं ग्रीष्म ऋतु के मध्य मनाया जाता है तथा यह तमाड़ क्षेत्र में प्रचलित है।
  • महत्वपूर्ण: तमाड़ झारखण्ड का एक प्रमुख क्षेत्र है, जो अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है।

 

आदिवासी त्यौहारों में पूजित कौन-सा वृक्ष झारखण्ड का राज्य वृक्ष माना जाता है ?

  • सखुआ
  • सेमल
  • गम्हार
  • मौघा

Explanation:

  • सखुआ (साल का वृक्ष) झारखण्ड का राज्य वृक्ष माना जाता है।
  • आदिवासी त्योहारों में साल के वृक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, विशेष रूप से सरहुल पर्व में।
  • सरहुल पर्व में साल के फूल का प्रयोग किया जाता है तथा सरहुल फूल का विसर्जन स्थान गिड़िवा है।
  • महत्वपूर्ण: सरहुल को ‘फूलों का त्योहार‘ भी कहा जाता है।

 

कर्म देवता की पूजा कर्म त्यौहार पर होती है जो की ………. देवता है।

  • विनाश
  • संपत्ति
  • भलाई और बुराई
  • शक्ति, यौवन और जवानी

Explanation:

  • कर्म देवता शक्ति, यौवन और जवानी के देवता हैं।
  • करमा पर्व में करम देवता की पूजा की जाती है तथा पाहन द्वारा करमा कथा (करमा एवं धरमा नामक भाईयों की कथा) सुनाई जाती है।
  • यह पर्व भाई-बहन के प्रेम का पर्व है तथा भाई के जीवन की कामना हेतु बहन द्वारा उपवास रखा जाता है।

 

……. त्यौहार शक्ति, युवा अवस्था और यौवन के देवता की पूजा है।

  • टुसु परब
  • करम
  • जनी शिकार
  • भगता परब

Explanation:

  • करम त्यौहार शक्ति, युवा अवस्था और यौवन के देवता की पूजा है।
  • पर्व का आयोजन – भाद्रपद (भादो) माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को।
  • यह प्रकृति संबंधी त्योहार है तथा पर्व का संदेश – कर्म की जीवन में प्रधानता
  • त्योहार के नृत्य के मैदान (अखड़ा) में करम वृक्ष की दो डालियाँ गाड़ दी जाती हैं।

 

जनजातियों में होने वाली “कर्मा पूजा” हिन्दू धर्म के पर्व के सामान है।

  • दीपावली
  • रक्षाबंधन
  • जनी शिकार
  • दशहरा

Explanation:

  • कर्मा पूजा हिन्दू धर्म के पर्व रक्षाबंधन के समान है।
  • जिस प्रकार रक्षाबंधन में भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है, उसी प्रकार करमा भी भाई-बहन के प्रेम का पर्व है।
  • इस पर्व में भाई के जीवन की कामना हेतु बहन द्वारा उपवास रखा जाता है।
  • महत्वपूर्ण: मुण्डा जनजाति में करमा की दो श्रेणियाँ हैं:
    • राज करमा – घर आंगन में की जाने वाली पारिवारिक पूजा
    • देश करमा – अखरा में की जाने वाली सामूहिक पूजा

 

“कर्म” नाम किस चीज को दर्शाता है?

  • एक पक्षी
  • एक जनजातीय समुदाय
  • एक जानवर
  • एक पेड़

Explanation:

  • “कर्म” नाम एक पेड़ (करम वृक्ष) को दर्शाता है।
  • करमा पर्व में करम वृक्ष की दो डालियाँ नृत्य के मैदान (अखड़ा) में गाड़ दी जाती हैं।
  • करम देवता शक्ति, यौवन और जवानी के देवता हैं तथा इन्हीं की पूजा इस पर्व में की जाती है।

 

भाद्र महीने के शुक्ल पक्ष के 11वें दिन कौन-सा त्यौहार मनाया जाता है ?

  • करम
  • जनी – शिकार
  • बन्दना
  • सरहुल

Explanation:

  • करमा पर्व भाद्रपद (भादो) माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी (11वें दिन) को मनाया जाता है।
  • यह प्रकृति संबंधी त्योहार है तथा भाई-बहन के प्रेम का पर्व है।
  • मुण्डा जनजाति की कुंआरी लड़कियाँ इस पर्व में सात प्रकार के अनाजों की ‘जावा‘ उगाने की प्रथा का पालन करती हैं।

 

झारखण्ड की महिलाएँ उनके बच्चों के कल्याण के लिए निम्न में से कौन-सा उपवास या व्रत रखती है?

  • करम
  • जितिया
  • बन्दना
  • सरहुल

Explanation:

  • जितिया पर्व में माँ द्वारा अपने पुत्र के दीर्घायु जीवन तथा समृद्धि की कामना के लिए उपवास या व्रत रखा जाता है।
  • यह पर्व मातृत्व और पुत्र के प्रति माता के प्रेम का प्रतीक है।
  • महत्वपूर्ण: बहुरा पर्व संतान प्राप्ति हेतु मनाया जाता है तथा जावा पर्व प्रजनन क्षमता में वृद्धि हेतु मनाया जाता है।

 

निम्नलिखित में से कौन-सा त्यौहार अविवाहित आदिवासी लड़कियों द्वारा मनाया जाता है ?

  • करम
  • जितिया
  • बन्दना
  • जावा

Explanation:

  • जावा पर्व अविवाहित आदिवासी लड़कियों द्वारा मनाया जाता है।
  • पर्व का आयोजन – भादो माह में।
  • इस पर्व का उद्देश्य – अविवाहित आदिवासी युवतियों में प्रजनन क्षमता में वृद्धि तथा अच्छे वर हेतु।
  • मुण्डा जनजाति की कुंआरी लड़कियाँ करमा पर्व में भी जावा उगाने की प्रथा का पालन करती हैं।

 

अच्छी प्रजनन क्षमता की उम्मीद और बेहतर कुटुम्ब के लिए झारखण्ड में निम्नलिखित में से कौन-सा त्यौहार मनाया जाता है?

  • करम
  • जितिया
  • बन्दना
  • जावा

Explanation:

  • जावा पर्व अच्छी प्रजनन क्षमता की उम्मीद और बेहतर कुटुम्ब (गृहस्थी) के लिए मनाया जाता है।
  • यह अविवाहित आदिवासी युवतियों द्वारा प्रजनन क्षमता में वृद्धि तथा अच्छे वर हेतु मनाया जाता है।
  • पर्व का आयोजन – भादो माह में।

 

जावा त्यौहार इसकी उम्मीद में मनाया जाता है :

  • अच्छी उर्वरता और बेहतर गृहस्थी
  • अच्छा पति
  • शक्ति
  • धन

Explanation:

  • जावा त्यौहार अच्छी उर्वरता (प्रजनन क्षमता) और बेहतर गृहस्थी की उम्मीद में मनाया जाता है।
  • यह अविवाहित आदिवासी युवतियों द्वारा अच्छे वर की कामना हेतु मनाया जाता है।
  • पर्व का आयोजन – भादो माह में।
  • महत्वपूर्ण: बहुरा पर्व संतान प्राप्ति हेतु तथा जितिया पर्व पुत्र की दीर्घायु हेतु मनाया जाता है।

 

जावा उत्सव किनके द्वारा मनाया जाता है?

  • विवाहित महिलाएँ
  • अविवाहित कन्याएँ
  • विवाहित पुरुष
  • अविवाहित लड़के

Explanation:

  • जावा उत्सव अविवाहित कन्याओं (कुंआरी लड़कियों) द्वारा मनाया जाता है।
  • पर्व का आयोजन – भादो माह में।
  • इसका उद्देश्य – अविवाहित आदिवासी युवतियों में प्रजनन क्षमता में वृद्धि तथा अच्छे वर हेतु।
  • मुण्डा जनजाति की कुंआरी लड़कियाँ करमा पर्व में सात प्रकार के अनाजों की ‘जावा‘ उगाने की प्रथा का पालन करती हैं।

 

झारखण्ड में, निम्नलिखित में से कौन-से त्यौहार में लड़कियां रंगीन कागज से लकड़ी/बांस के एक फ्रेम को सजाती हैं और आस-पास की पहाड़ी नदी को भेंट कर देती है?

  • हैल पुन्हा
  • रोहिणी
  • टुसू परब
  • भगता परब

Explanation:

  • टुसू पर्व के दौरान लड़कियां रंगीन कागज से लकड़ी या बांस के एक फ्रेम को सजाती हैं और इसे आस-पास की पहाड़ी नदी को भेंट (बहा) देती हैं।
  • यह सूर्य पूजा से संबंधित त्योहार है तथा मकर सक्रांति के दिन मनाया जाता है।
  • यह टुसू नाम की कन्या की स्मृति में मनाया जाता है।
  • इस अवसर पर पंचपरगना में टुसू मेला लगता है।

 

साका कैलेंडर के अनुसार माघ महीने के पहले दिन झारखण्ड में निम्नलिखित में से कौन-सा त्यौहार आयोजित किया जाता है?

  • हैल पुन्हा
  • रोहिणी
  • टुसू परब
  • भगता परब

Explanation:

  • हल पुन्ह्या (हैल पुन्हा) साका कैलेंडर के अनुसार माघ महीने के पहले दिन मनाया जाता है।
  • यह झारखण्ड का एक प्रमुख कृषि पर्व है, जिसमें हल (हल) की पूजा की जाती है तथा नए कृषि वर्ष की शुरुआत होती है।
  • महत्वपूर्ण: माघे पर्व माघ माह में मनाया जाता है, जिसके साथ ही कृषि वर्ष का अंत होता है तथा नया कृषि वर्ष प्रारंभ होता है।

 

यह त्यौहार मुख्यतः पशुओं के लिए है?

  • हैल पुन्हा
  • बन्दना
  • टुसू परब
  • भगता परब

Explanation:

  • बंदना त्यौहार मुख्यतः पशुओं (पालतू जानवरों) से संबंधित है।
  • यह कार्तिक अमावस्या के दौरान मनाया जाता है तथा पर्व की शुरुआत ओहिरा गीत के साथ होती है।
  • अन्य पशु-संबंधी त्योहार:
    • सोहराईमवेशियों (जानवरों) की पूजा की जाती है (संथाल जनजाति का सबसे बड़ा पर्व)।

 

कार्तिक माह में अमावस्या के कृष्ण पक्ष में मनाया जाने वाला सबसे प्रसिद्ध त्यौहार कौन-सा है ?

  • हैल पुन्हा
  • बन्दना
  • टुसू परब
  • भगता परब

Explanation:

  • बंदना पर्व कार्तिक अमावस्या (कृष्ण पक्ष) के दौरान मनाया जाता है।
  • यह पालतू जानवरों से संबंधित है तथा पर्व की शुरुआत ओहिरा गीत के साथ होती है।
  • कार्तिक माह में देव उठान (कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी) तथा बंदना (कार्तिक अमावस्या) दो प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं।

 

निम्नांकित में से किस जनजातीय त्यौहार को झारखण्ड के नववर्ष के रूप में मनाया जाता है?

  • हैल पुन्हा
  • बन्दना
  • टुसू परब
  • भगता परब

Explanation:

  • बंदना को झारखण्ड के नववर्ष के रूप में मनाया जाता है।
  • यह कार्तिक अमावस्या के दौरान मनाया जाता है तथा पर्व की शुरुआत ओहिरा गीत के साथ होती है।
  • महत्वपूर्ण: रोहिन / रोहिणी झारखण्ड राज्य में कैलेंडर वर्ष का प्रथम त्योहार है, जबकि बंदना को नववर्ष के रूप में मनाया जाता है।

 

मुंडा का कौन-सा उत्सव “सरहुल” कहलाता है?

  • हैल पुन्हा
  • बन्दना
  • बा-पर्व
  • देसाई

Explanation:

  • मुंडा जनजाति के बा-पर्व उत्सव को ही “सरहुल” कहा जाता है।
  • सरहुल को संथाल जनजाति द्वारा ‘बा परब‘ के रूप में भी मनाया जाता है।
  • सरहुल जनजातियों का सबसे बड़ा पर्व है, जो चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को बसंत के मौसम में मनाया जाता है।
  • इसे ‘फूलों का त्योहार‘ भी कहा जाता है।

 

संथाल विभिन्न नामों के साथ सरहुल उत्सव मनाते हैं, इनमें से कौन सरहुल का दूसरा नाम है ?

  • हैल पुन्हा
  • बाहा
  • बा-पर्व
  • देसाई

Explanation:

  • संथाल जनजाति सरहुल उत्सव को बाहा (या बा परब) के नाम से मनाती है।
  • बाहा फागुन माह में शुद्ध जल से खेली जाने वाली होली है।
  • सरहुल के अन्य नाम:
    • खद्दीउराँव जनजाति
    • बा परब / बाहासंथाल जनजाति
    • जकोरखड़िया जनजाति

 

झारखण्ड में सरहुल त्यौहार किस ऋतु में मनाया जाता है?

  • पतझड़
  • बसंत
  • गर्मी
  • सर्दी

Explanation:

  • सरहुल त्यौहार बसंत ऋतु में मनाया जाता है।
  • पर्व का आयोजन – चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को, जो मार्च-अप्रैल (बसंत ऋतु) में आता है।
  • यह जनजातियों का सबसे बड़ा पर्व है तथा इसे ‘फूलों का त्योहार’ कहा जाता है।
  • महत्वपूर्ण: खड़िया जनजाति का जंकोर पूजा भी वसंतोत्सव है।

 

हिन्दू संस्कृति के अनुसार, सरहुल पर्व को सामान्यतः बैसाख महीने के……..दिन मनाया जाता है ।

  • पहले
  • चौदहवें
  • आखिरी
  • तेरहवें

Explanation:

  • हिन्दू संस्कृति के अनुसार, सरहुल पर्व को सामान्यतः बैसाख महीने के आखिरी दिन मनाया जाता है।
  • वास्तव में सरहुल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है, जो मार्च-अप्रैल (बसंत ऋतु) में आता है।
  • महत्वपूर्ण: बिसुआ मेला (गोड्डा) 14 अप्रैल से शुरू होता है (हर वर्ष चैत माह के अंतिम तारीखवैशाख की पहली तारीख को)।

 

झारखण्ड में आदिवासियों के फूलों के त्यौहार का नाम क्या है?

  • सरहुल
  • बाहा
  • बा-पर्व
  • देसाई

Explanation:

  • झारखण्ड में आदिवासियों के फूलों के त्योहार का नाम सरहुल है।
  • यह जनजातियों का सबसे बड़ा पर्व है तथा प्रकृति से संबंधित त्योहार है।
  • पर्व का आयोजन – चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को, बसंत के मौसम में।
  • इस पर्व में साल के वृक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है तथा साल के फूल का प्रयोग किया जाता है।

 

किस त्यौहार के दौरान गांव का पुजारी गाँव के हर घर की छत/छप्पर पर साल के फूल रखता है?

  • हैल पुन्हा
  • सरहुल
  • टुसू परब
  • भगता परब

Explanation:

  • सरहुल पर्व के दूसरे दिन गांव का पुजारी गाँव के हर घर की छत/छप्पर पर साल के फूल रखता है।
  • सरहुल पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है:
    • पहला दिन – मछली के अभिषेक किए हुए जल को घर में छिड़का जाता है।
    • दूसरा दिन – उपवास रखा जाता है तथा पुजारी घर की छत पर साल के फूल रखता है।
    • तीसरा दिनपाहन द्वारा सरना (पूजा स्थल) पर सरई के फूलों की पूजा की जाती है।
    • चौथा दिन – सरहुल फूल का विसर्जन (गिड़िवा में)।

 

झारखण्ड में मनाया जाने वाला एक लोकप्रिय जनजातीय त्यौहार है:-

  • हैल पुन्हा
  • सरहुल
  • टुसू परब
  • भगता परब

Explanation:

  • सरहुल झारखण्ड में मनाया जाने वाला एक लोकप्रिय जनजातीय त्यौहार है।
  • यह जनजातियों का सबसे बड़ा पर्व है तथा प्रकृति से संबंधित त्योहार है।
  • इसे ‘फूलों का त्योहार’ कहा जाता है तथा चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को बसंत के मौसम में मनाया जाता है।
  • इस पर्व में साल के वृक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

 

निम्नलिखित में से कौन-सा त्यौहार मार्च-अप्रैल के महीने में मनाया जाता है और इसे ‘फूलों का त्यौहार’ कहा जाता है?

  • हैल पुन्हा
  • सरहुल
  • टुसू परब
  • भगता परब

Explanation:

  • सरहुल त्यौहार मार्च-अप्रैल (चैत्र माह) में मनाया जाता है तथा इसे ‘फूलों का त्योहार’ कहा जाता है।
  • यह जनजातियों का सबसे बड़ा पर्व है तथा प्रकृति से संबंधित त्योहार है।
  • पर्व का आयोजन – चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को, बसंत के मौसम में।
  • इस पर्व में साल के वृक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

 

निम्न कथन की सहायता से पर्व की पहचान करें : गाँव का पुजारी मिट्टी के तीन पात्र लेता है और उन्हें ताजे पानी से भरता है। अगले दिन सवेरे वह मिट्टी के तीन पात्रों को देखता है किसमें पानी का स्तर घट गया है। यदि पानी का स्तर घट गया है तो वह अकाल की भविष्यवाणी करता है यदि पानी का स्तर सामान्य रहता है, तो उसे उत्तम वर्षा का संकेत समझा जाता है ।

  • हैल पुन्हा
  • सरहुल
  • टुसू परब
  • भगता परब

Explanation:

  • सरहुल पर्व के दौरान गाँव का पुजारी मिट्टी के तीन पात्र लेता है जिनमें पानी भरा होता है।
  • अगले दिन सुबह वह तीनों पात्रों को देखता है:
    • पानी का स्तर घट गया हैअकाल की भविष्यवाणी
    • पानी का स्तर सामान्य रहता हैउत्तम वर्षा का संकेत
  • सरहुल जनजातियों का सबसे बड़ा पर्व है, जो चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को बसंत के मौसम में मनाया जाता है।

 

झारखण्ड राज्य में, पशु धोया जाता है और पूजा की जाती है, निम्नलिखित त्यौहारों में से किसमें ?

  • हैल पुन्हा
  • सरहुल
  • सोहराय
  • भगता परब

Explanation:

  • सोहराई पर्व में पशुओं (मवेशियों) को धोया जाता है और पूजा की जाती है।
  • यह संथाल जनजाति का सबसे बड़ा पर्व है तथा दीपावली के दूसरे दिन, पौष माह में फसल कट जाने के बाद मनाया जाता है।
  • सोहराई पर्व पांच दिनों तक चलता है:
    • पहला दिन – ‘गोड टाण्डी’ (बथान) में जाहेर एरा का आह्वान
    • दूसरा दिन – गोहाल पूजा, गाय/पशु के सींग पर तेल व सिंदूर
    • तीसरा दिन – पशुओं को धान की बाली एवं मालाओं से सजाकर ‘सण्टाऊ’ खूटा जाता है
    • चौथा दिन – युवक-युवतियाँ गांव से चावल, दाल आदि मांगकर जमा करते हैं
    • पांचवा दिन – एकत्रित सामग्री से खिचड़ी बनाकर गांव के लोग साथ में खाते हैं

 

झारखण्ड में कौन-सा त्यौहार मवेशियों की पूजा से संबंधित है?

  • हैल पुन्हा
  • सरहुल
  • सोहराय
  • भगता परब

Explanation:

  • सोहराई पर्व मवेशियों (जानवरों) की पूजा से संबंधित है।
  • यह संथाल जनजाति का सबसे बड़ा पर्व है तथा दीपावली के दूसरे दिन, पौष माह में फसल कट जाने के बाद मनाया जाता है।
  • यह पर्व पांच दिनों तक चलता है:
    • पहला दिन – ‘गोड टाण्डी’ (बथान) में जाहेर एरा का आह्वान
    • दूसरा दिन – गोहाल पूजा, गाय/पशु के सींग पर तेल व सिंदूर
    • तीसरा दिन – पशुओं को धान की बाली एवं मालाओं से सजाकर ‘सण्टाऊ’ खूटा जाता है
    • चौथा दिन – युवक-युवतियाँ गांव से चावल, दाल आदि मांगकर जमा करते हैं
    • पांचवा दिन – एकत्रित सामग्री से खिचड़ी बनाकर गांव के लोग साथ में खाते हैं

 

निम्नलिखित त्यौहारों में से कौन-सा त्यौहार केवल झारखण्ड में ही मनाया जाता है?

  • शिवरात्रि
  • पोंगल
  • सोहराय
  • जन्माष्टमी

Explanation:

  • सोहराई झारखण्ड का एक प्रमुख पर्व है, जो केवल झारखण्ड में ही मनाया जाता है
  • यह संथाल जनजाति का सबसे बड़ा पर्व है तथा पशुओं की पूजा से संबंधित है।
  • महत्वपूर्ण: पोंगल तमिलनाडु में, शिवरात्रि एवं जन्माष्टमी पूरे भारत में मनाए जाते हैं, जबकि सोहराई केवल झारखण्ड में मनाया जाता है।

 

निम्न में से कौन झारखण्ड स्थानीय जनजातियों में एक महोत्सव गीत है ?

  • उदासी
  • पावस
  • सोहराय
  • भदवाही

Explanation:

  • सोहराय झारखण्ड की स्थानीय जनजातियों में एक महोत्सव गीत है।
  • सोहराई पर्व संथाल जनजाति का सबसे बड़ा पर्व है, जिसमें गीत-संगीत एवं नृत्य की विशेष परंपरा है।
  • महत्वपूर्ण: दनसाई और सोहराई गीत करमा की रात को गाए जाते हैं, जहाँ युवा वर्ग गाता और नाचता है।

 

सावन के महीने में किस तरह का त्यौहार मनाया जाता है ?

  • हरियाड़
  • सरहुल
  • सोहराय
  • नवाखाई

Explanation:

  • हरियाड़ त्यौहार सावन महीने में मनाया जाता है।
  • यह संथाल जनजाति द्वारा अच्छी फसल के लिए मनाया जाता है।
  • संथाल जनजाति द्वारा मनाए जाने वाले अन्य प्रमुख पर्व:
    • एरोक – आषाढ़ महीने में बीज बोते समय
    • हरियाड़ – सावन माह में (अच्छी फसल के लिए)
    • साकरात – पूस माह में
    • बाहा – फागुन माह में (शुद्ध जल से खेली जाने वाली होली)

 

किस त्यौहार में 9 दिन उपवास के बाद 10वें दिन उपासक जलते कोयले पर नंगे पांव चलते हैं?

  • हरियाड़
  • सरहुल
  • मंडा
  • नवाखाई

Explanation:

  • मण्डा त्यौहार में 9 दिन उपवास के बाद 10वें दिन उपासक जलते कोयले पर नंगे पांव चलते हैं।
  • इसमें महादेव (शिव) की पूजा होती है तथा यह झारखण्ड में शिव की सबसे कठोर पूजा है।
  • धुवांसी – भोगताओं को रात में आग के ऊपर उल्टा लटकाकर झूलने की प्रथा।
  • फूल-खुंदी – भोगताओं को आग के अंगारों पर चलने की प्रथा (जलते कोयले पर नंगे पांव चलना)।
  • मण्डा मेला हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो में लगता है।

 

निम्न में से कौन-से त्यौहार को झारखण्ड में बीज बोने के त्यौहार के रूप में जाना जाता है ?

  • हरियाड़
  • रोहीन
  • मंडा
  • नवाखाई

Explanation:

  • रोहिन / रोहिणी को झारखण्ड में बीज बोने के त्योहार के रूप में जाना जाता है।
  • यह झारखण्ड राज्य में कैलेंडर वर्ष का प्रथम त्योहार है तथा इस दिन बीज बोने की शुरुआत की जाती है।
  • महत्वपूर्ण: इस त्योहार के दौरान किसी प्रकार का नृत्य प्रदर्शन या लोकगीत गायन नहीं किया जाता है।
  • नवाखानीनया अन्न ग्रहण करना (करमा पर्व के बाद मनाया जाता है)।

 

वार्षिक सामूहिक शिकार उत्सव का नाम क्या है?

  • हरियाड़
  • रोहीन
  • सेंदरा
  • नवाखाई

Explanation:

  • सेंदरा वार्षिक सामूहिक शिकार उत्सव है।
  • सेंदरा का शाब्दिक अर्थ ‘शिकार‘ होता है तथा यह उराँव जनजाति से संबंधित है।
  • सेंदरा के प्रकार:
    • मुक्का सेंदरा – उराँव जनजाति में महिलाओं द्वारा शिकार खेलने की प्रथा
    • सू सेंदरा – वैशाख में
    • फागु सेंदरा – फागुन में
    • जेठ शिकार – वर्षा ऋतु के प्रारंभ होने पर

 

निम्नलिखित कौन-से त्यौहारों के दौरान, जनजाति महिलाएं पूरे दिन पुरुष के कपड़े पहन कर पशुओं का शिकार करती है ।

  • हरियाड़
  • रोहीन
  • मुक्का सेन्द्रा
  • नवाखाई

Explanation:

  • मुक्का सेंदरा के दौरान जनजातीय महिलाएं पूरे दिन पुरुष के कपड़े पहन कर पशुओं का शिकार करती हैं।
  • यह उराँव जनजाति की सांस्कृतिक धरोहर है।
  • जनी शिकार भी इसी प्रकार का त्योहार है, जो 12 वर्षों के अंतराल पर मनाया जाता है तथा केवल झारखण्ड में मनाया जाता है।

 

कौन-सा त्यौहार झारखण्ड के सबसे महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक मानी जाती है और वर्ष में दो बार अर्थात् मार्च और नवंबर के महीने में मनायी जाती है?

  • हरियाड़
  • छठ
  • मुक्का सेन्द्रा
  • नवाखाई

Explanation:

  • छठ पर्व वर्ष में दो बार मार्च और नवंबर में मनाया जाता है।
  • इस पर्व के दौरान सूर्य भगवान की पूजा की जाती है तथा अस्त होते हुए सूर्य को प्रसन्न करने हेतु मनाया जाता है।
  • प्रसाद/मिठाई (व्यंजन) – ‘ठेकुआ‘ का वितरण किया जाता है।

 

गलत कथन की पहचान करें :

  • दनसाई और सोहराई, जहाँ युवावर्ग करम की रात को गाता और नाचता है।
  • टुसू, फसल पर्व मुख्यतः अविवाहित कन्याओं द्वारा मनाया जाता है।
  • सरहुल, बाहा, जहाँ साल और महुआ के फूलों का प्रयोग आनुष्ठानिक रूप में किया जाता है।
  • माघी पूजा, ओंग जनजाति का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है।

Explanation:

  • माघी पूजा ओंग जनजाति का त्योहार नहीं है।
  • सही तथ्य:
    • दनसाई और सोहराई गीत करमा की रात को गाए जाते हैं।
    • टुसू अविवाहित कन्याओं द्वारा मनाया जाता है तथा फसल पर्व है (मकर सक्रांति पर)।
    • सरहुल/बाहा में साल और महुआ के फूलों का प्रयोग आनुष्ठानिक रूप में किया जाता है।
  • ओंग जनजाति अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की एक जनजाति है, झारखण्ड की नहीं।

 

‘चैत पर्व’ किस महीने में मनाया जाता है?

  • अप्रैल
  • जनवरी
  • मार्च
  • अगस्त

Explanation:

  • चैत पर्व अप्रैल महीने में मनाया जाता है।
  • चैत माह हिंदू कैलेंडर का अंतिम महीना है, जो मार्च-अप्रैल (ग्रेगोरियन कैलेंडर) में आता है।
  • सरहुल पर्व भी चैत्र माह में ही मनाया जाता है।
  • महत्वपूर्ण: बिसुआ मेला (गोड्डा) 14 अप्रैल से शुरू होता है।

 

बसंत पंचमी का त्यौहार किस मौसम के आगमन का अग्रदूत है?

  • गर्मी
  • बसंत
  • सर्दी
  • बरसात

Explanation:

  • बसंत पंचमी का त्यौहार वसंत मौसम के आगमन का अग्रदूत है।
  • यह पर्व माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है।
  • झारखण्ड में: बसंत ऋतु (फरवरी-मार्च) में हिजला मेला (दुमका) का आयोजन होता है।
  • खड़िया जनजाति का जंकोर पूजा वसंतोत्सव है।

 

बुरु पर्व सामान्यतः माह में मनाया जाता है।

  • अप्रैल
  • जनवरी
  • मार्च
  • दिसम्बर

Explanation:

  • बुरू पर्व सामान्यतः दिसम्बर माह में मनाया जाता है।
  • यह मुण्डा जनजाति द्वारा मनाया जाता है।
  • पर्व का मुख्य उद्देश्य:
    • वन्य जीवों तथा मानव का तालमेल स्थापित करना
    • प्राकृतिक प्रकोपों से समाज की रक्षा हेतु कामना करना
  • महत्वपूर्ण: बुरू का अर्थ पहाड़ होता है तथा यह प्रकृति पूजा से संबंधित है।

 

झारखण्ड में ‘ठेकुआ’ किस रूप में जाना जाता है?

  • मिठाई
  • एक हथियार का नाम
  • संगीत का प्रकार
  • विवाह समारोह

Explanation:

  • ठेकुआ झारखण्ड में एक मिठाई (व्यंजन) के रूप में जाना जाता है।
  • इसका वितरण छठ पर्व के दौरान प्रसाद के रूप में किया जाता है।
  • छठ पर्व वर्ष में दो बार (मार्च और नवंबर) मनाया जाता है तथा इसमें अस्त होते हुए सूर्य को प्रसन्न करने हेतु पूजा की जाती है।

 

झारखण्ड की प्रसिद्ध छठ पूजा किस देवता की आराधना करने के लिए की जाती है?

  • सूर्य
  • वन देवता
  • चंद्रमा
  • नदी देवता

Explanation:

  • झारखण्ड की प्रसिद्ध छठ पूजा सूर्य देवता की आराधना के लिए की जाती है।
  • यह पर्व वर्ष में दो बार मार्च और नवंबर में मनाया जाता है।
  • इस पर्व के दौरान अस्त होते हुए सूर्य को प्रसन्न करने हेतु पूजा की जाती है।
  • प्रसाद/मिठाई (व्यंजन) – ‘ठेकुआ‘ का वितरण किया जाता है।

 

सेंदरा पर्व —– जनजाति की सांस्कृतिक धरोहर है।

  • होरो
  • गोंड
  • संथाल
  • उरांव

Explanation:

  • सेंदरा पर्व उराँव जनजाति की सांस्कृतिक धरोहर है।
  • सेंदरा का शाब्दिक अर्थ ‘शिकार‘ होता है।
  • सेंदरा के प्रकार:
    • मुक्का सेंदरा – उराँव जनजाति में महिलाओं द्वारा शिकार खेलने की प्रथा
    • सू सेंदरा – वैशाख में
    • फागु सेंदरा – फागुन में
    • जेठ शिकार – वर्षा ऋतु के प्रारंभ होने पर
  • महत्वपूर्ण: उराँव झारखण्ड की प्रमुख जनजातियों में से एक है।

 

सेंदरा क्या है?

  • लोक नृत्य
  • स्थानीय मदिरा
  • वार्षिक सामूहिक शिकार
  • लोक गीत

Explanation:

  • सेंदरा वार्षिक सामूहिक शिकार उत्सव है।
  • सेंदरा का शाब्दिक अर्थ ‘शिकार‘ होता है तथा यह उराँव जनजाति से संबंधित है।
  • सेंदरा के प्रकार:
    • मुक्का सेंदरा – उराँव जनजाति में महिलाओं द्वारा शिकार खेलने की प्रथा
    • सू सेंदरा – वैशाख में
    • फागु सेंदरा – फागुन में
    • जेठ शिकार – वर्षा ऋतु के प्रारंभ होने पर

 

“मंडा” पर्व में भगवान…… का पूजन किया जाता है ।

  • सूर्य
  • महादेव
  • चंद्रमा
  • नदी देवता

Explanation:

  • “मंडा” पर्व में महादेव (शिव) का पूजन किया जाता है।
  • पर्व का आयोजन – बैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अक्षय तृतीया को।
  • यह झारखण्ड में शिव की सबसे कठोर पूजा है।
  • भगता – उपवास रखने वाले पुरुष-व्रती को कहा जाता है।
  • सोखताइनमहिला-व्रती को कहा जाता है।
  • मण्डा मेला हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो में बैशाख, जेठ एवं आषाढ़ माह में लगता है।

 

सोहराई त्यौहार दीपावली के दूसरे दिन झारखण्ड में किसके महिमा में मनाई जाती है?

  • खेती धन
  • खन्न धन
  • जंगल धन
  • जानवर धन

Explanation:

  • सोहराई त्यौहार दीपावली के दूसरे दिन जानवर धन (मवेशियों) के महिमा में मनाई जाती है।
  • यह संथाल जनजाति का सबसे बड़ा पर्व है तथा पौष माह में फसल कट जाने के बाद मनाया जाता है।
  • इस पर्व में मवेशियों की पूजा की जाती है तथा पशुओं को धोया जाता है और सजाया जाता है।

 

संथाल जनजाति का कौन-सा त्यौहार ‘सोहराय’ कहलाता है?

  • शीतकालीन त्यौहार
  • सोविंग महोत्सव
  • पशु बलिदान
  • किसानी त्यौहार

Explanation:

  • संथाल जनजाति का सोहराई त्यौहार किसानी त्यौहार कहलाता है।
  • यह फसल कट जाने के बाद पौष माह में मनाया जाता है।
  • इस पर्व में मवेशियों की पूजा की जाती है तथा यह पांच दिनों तक चलता है।
  • महत्वपूर्ण: सोहराई केवल झारखण्ड में मनाया जाता है तथा संथाल जनजाति का सबसे बड़ा पर्व है।

 

भगता पर्व ………में मनाया जाता है।

  • वन
  • बैद्यनाथ मंदिर
  • पारसनाथ मंदिर
  • सरना मंदिर

Explanation:

  • भगता पर्व सरना मंदिर में मनाया जाता है।
  • सरना आदिवासियों का पूजा स्थल है, जहाँ प्रकृति की पूजा की जाती है।
  • भगता पर्व बसंत एवं ग्रीष्म ऋतु के मध्य तमाड़ क्षेत्र में मनाया जाता है।
  • इसे ‘बुढ़ा बाबा की पूजा’ के रूप में मनाया जाता है।
  • सरहुल पूजा के दौरान भी ग्रामीण सरना स्थान को घेरते हैं।

 

झारखण्ड में सरहुल किस के रूप में जाना जाता है?

  • एक आभूषण
  • राज्य पक्षी
  • एक उत्सव
  • एक नदी

Explanation:

  • सरहुल झारखण्ड में एक उत्सव (त्योहार) के रूप में जाना जाता है।
  • यह जनजातियों का सबसे बड़ा पर्व है तथा प्रकृति से संबंधित त्योहार है।
  • इसे ‘फूलों का त्योहार’ भी कहा जाता है तथा चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को बसंत के मौसम में मनाया जाता है।

 

सरहुल पूजा के दौरान, ग्रामीण ……… स्थान को घेरते हैं।

  • सरना
  • श्मशान
  • मंदिर
  • गिरिजाघर

Explanation:

  • सरहुल पूजा के दौरान, ग्रामीण सरना (पूजा स्थल) स्थान को घेरते हैं।
  • सरना आदिवासियों का पारंपरिक पूजा स्थल है, जहाँ प्रकृति की पूजा की जाती है।
  • सरहुल पर्व के तीसरे दिन पाहन (पुरोहित) द्वारा सरना पर सरई के फूलों की पूजा की जाती है।

 

गांव का पुजारी जो सरहुल के दौरान उपवास करता है……. कहलाता है।

  • मुखिया
  • पुजारी
  • पाहन
  • माँझी

Explanation:

  • गांव का पुजारी जो सरहुल के दौरान उपवास करता है, पाहन कहलाता है।
  • सरहुल पर्व के तीसरे दिन पाहन (पुरोहित) द्वारा सरना (पूजा स्थल) पर सरई के फूलों की पूजा की जाती है तथा मुर्गी की बलि दी जाती है।
  • महत्वपूर्ण: पाहन आदिवासी समाज का धार्मिक पुरोहित होता है।

 

झारखण्ड में आदिवासी के सरहुल उत्सव के दौरान …… पूजा की जाती है।

  • चन्दन वृक्ष
  • साल वृक्ष
  • भगवान शिव
  • रूद्र

Explanation:

  • झारखण्ड में आदिवासी के सरहुल उत्सव के दौरान साल वृक्ष की पूजा की जाती है।
  • इस पर्व में साल के वृक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है तथा साल के फूल का प्रयोग किया जाता है।
  • सरहुल फूलों का त्योहार है तथा साल झारखण्ड का राज्य वृक्ष है।
  • सरहुल फूल का विसर्जन स्थान गिड़िवा है।

 

त्यौहारों के निम्नलिखित समूह में से कौन-सा आदिवासी समूहों के बीच मनाया जाता है?

  • सरहुल, कन्ना, धागु और मोध
  • कर्मा, खलती, लोहारी और वाहा
  • सोहराई, चतुर्थी, पोंगल, सरहूल
  • माघे, पोंगल, होली, सरहूल

Explanation:

  • सरहुल, कन्ना, धागु और मोध आदिवासी समूहों के बीच मनाए जाने वाले त्योहार हैं।
  • सरहुल – जनजातियों का सबसे बड़ा पर्व (चैत्र माह में)
  • कर्मा – भाई-बहन के प्रेम का पर्व (भादो माह में)
  • सोहराई – संथाल जनजाति का सबसे बड़ा पर्व (पशुओं की पूजा)
  • टुसू – सूर्य पूजा से संबंधित (मकर सक्रांति पर)
  • मण्डा – महादेव (शिव) की पूजा (अक्षय तृतीया को)

 

बंदना उत्सव, मुख्य रूप से किस लिए मनाया जाता है ?

  • पशु
  • महिलाएं
  • अविवाहित कन्याएं
  • लड़के

Explanation:

  • बंदना उत्सव, मुख्य रूप से पशुओं (पालतू जानवरों) के लिए मनाया जाता है।
  • यह कार्तिक अमावस्या के दौरान मनाया जाता है तथा पर्व की शुरुआत ओहिरा गीत के साथ होती है।
  • सोहराई पर्व भी पशुओं (मवेशियों) से संबंधित है, जबकि बंदना पालतू जानवरों से संबंधित है।

 

हल पुन्हिया को इसकी शुरुआत के रूप में माना जाता है

  • फसल कटाई
  • गृहस्थी
  • जुताई
  • इनमें से कोई नहीं

Explanation:

  • हल पुन्ह्या (हैल पुन्हा) को जुताई की शुरुआत के रूप में माना जाता है।
  • यह साका कैलेंडर के अनुसार माघ महीने के पहले दिन मनाया जाता है।
  • इस पर्व में हल (हल) की पूजा की जाती है तथा नए कृषि वर्ष की शुरुआत होती है।
  • महत्वपूर्ण: रोहिणी बीज बोने के त्योहार के रूप में जाना जाता है, जबकि हल पुन्ह्या जुताई की शुरुआत है।

 

टुसू महोत्सव निम्नलिखित त्यौहार में से किसके साथ मनाया जाता है?

  • होली
  • नाग पंचमी
  • मकर संक्रांति
  • इनमें से कोई नहीं

Explanation:

  • टुसू महोत्सव मकर संक्रांति के साथ मनाया जाता है।
  • यह सूर्य पूजा से संबंधित त्योहार है तथा टुसू नाम की कन्या की स्मृति में मनाया जाता है।
  • इस अवसर पर पंचपरगना में टुसू मेला लगता है।
  • इस पर्व के दौरान लड़कियों द्वारा रंगीन कागज से लकड़ी या बांस के एक फ्रेम को सजाया जाता है तथा इसे किसी नदी में बहा दिया जाता है।

 

“सर्दियों के दौरान ……….. मास के अंतिम दिन पर टुसू नाम का त्यौहार फसल काटने के बाद मनाया जाता है। “

  • पौष
  • माघ
  • अग्रहायण
  • फाल्गुन

Explanation:

  • टुसू नाम का त्यौहार सर्दियों के दौरान पौष मास के अंतिम दिन पर फसल काटने के बाद मनाया जाता है।
  • यह मकर सक्रांति के दिन मनाया जाता है, जो पौष माह के अंतिम दिन आती है।
  • सोहराई पर्व भी पौष माह में फसल कट जाने के बाद मनाया जाता है।
  • महत्वपूर्ण: पौष माह में सोहराई (संथाल जनजाति) तथा टुसू दो प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं।

 

करमा त्यौहार के दिन श्रद्धालु लगभग ……. का उपवास रखते हैं।

  • 6 घंटे
  • 28 घंटे
  • 12 घंटे
  • 24 घंटे

Explanation:

  • करमा त्यौहार के दिन श्रद्धालु लगभग 24 घंटे का उपवास रखते हैं।
  • इस पर्व में भाई के जीवन की कामना हेतु बहन द्वारा उपवास रखा जाता है।
  • पर्व का आयोजन – भाद्रपद (भादो) माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को।
  • महत्वपूर्ण: करमा भाई-बहन के प्रेम का पर्व है, जो रक्षाबंधन के समान है।
  • जितिया पर्व में भी माँ द्वारा पुत्र के लिए उपवास रखा जाता है।

 

त्यौहार