कोल जनजाति के लोगों की अपनी मुख्य भाषा कौन-सी है?
- कोल (Kol)
- कुड़ुख (Kurukh)
- मुंडारी (Mundari)
- मालतो (Malto)
Explanation:
- कोल जनजाति की भाषा ‘कोल’ (Kol) है।
- भाषायी रूप से इनकी भाषा का संबंध कोलेरियन समूह से है।
भाषायी आधार पर कोल (Kol) भाषा का संबंध किस समूह से माना जाता है?
- कोलेरियन समूह (Kolarian Group)
- द्रविड़ समूह (Dravidian Group)
- इंडो-आर्यन समूह (Indo-Aryan Group)
- तिब्बती-बर्मी समूह (Tibeto-Burman Group)
Explanation:
- भाषायी रूप से कोल जनजाति का संबंध ‘कोलेरियन समूह’ से है।
- इनकी भाषा शब्दावली एवं शैली में संथाली भाषा से काफी मिलती-जुलती है।
कोल जनजाति की भाषा निम्नलिखित में से किस जनजाति की भाषा से अत्यधिक मिलती-जुलती है?
- संथाली (Santali)
- उरांव (Oraon)
- हो (Ho)
- खड़िया (Kharia)
Explanation:
- कोल जनजाति की भाषा संथाली भाषा से मिलती-जुलती बताई जाती है।
- दोनों भाषाएं आस्ट्रो-एशियाटिक / कोलेरियन भाषा परिवार से संबंधित मानी जाती हैं।
कोल झारखण्ड राज्य की कौन-वीं (क्रम) अनुसूचित जनजाति है?
- 32वीं जनजाति (32nd Tribe)
- 31वीं जनजाति (31st Tribe)
- 30वीं जनजाति (30th Tribe)
- 28वीं जनजाति (28th Tribe)
Explanation:
- कोल जनजाति को झारखण्ड की 32वीं जनजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
- यह झारखण्ड की नव-अधिसूचित जनजातियों में से एक है।
भारत सरकार ने किस वर्ष कोल को जनजाति (Scheduled Tribe) की श्रेणी में शामिल किया?
- 2003 में (In 2003)
- 2000 में (In 2000)
- 2005 में (In 2005)
- 2011 में (In 2011)
Explanation:
- भारत सरकार ने वर्ष 2003 में कोल को अनुसूचित जनजाति (ST) की श्रेणी में शामिल किया था।
- इसके शामिल होने से झारखण्ड में अनुसूचित जनजातियों की कुल संख्या 32 हो गई थी।
कोल जनजाति के लोगों में किस रक्त समूह (Blood Group) की अधिकता पाई जाती है?
- B रक्त समूह (Blood Group B)
- A रक्त समूह (Blood Group A)
- O रक्त समूह (Blood Group O)
- AB रक्त समूह (Blood Group AB)
Explanation:
- कोल जनजाति के लोगों में शारीरिक/जैविक दृष्टि से ‘B’ रक्त समूह की अधिकता पाई जाती है।
- यह इस जनजाति की विशेष अनुवांशिक पहचान को दर्शाती है।
झारखण्ड में कोल जनजाति का संकेन्द्रण मुख्य रूप से किन जिलों में है?
- देवघर, दुमका व गिरिडीह (Deoghar, Dumka, and Giridih)
- राँची, खूंटी व गुमला (Ranchi, Khunti, and Gumla)
- पलामू, गढ़वा व लातेहार (Palamau, Garhwa, and Latehar)
- पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम व सरायकेला (East Singhbhum, West Singhbhum, and Seraikela)
Explanation:
- झारखण्ड राज्य में कोल जनजाति का मुख्य संकेन्द्रण देवघर, दुमका तथा गिरिडीह जिलों में है।
- यह जनजाति संथाल परगना और उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र के जिलों में पाई जाती है।
कोल जनजाति की पारिवारिक सामाजिक व्यवस्था किस प्रकार की होती है?
- पितृसत्तात्मक व पितृवंशीय (Patriarchal and Patrilineal)
- मातृसत्तात्मक व मातृवंशीय (Matriarchal and Matrilineal)
- केवल मातृसत्तात्मक (Only Matriarchal)
- द्विपक्षीय (Bilateral)
Explanation:
- कोल जनजाति में पारिवारिक ढांचा पितृसत्तात्मक (Patriarchal) और पितृवंशीय (Patrilineal) होता है।
- परिवार में संपत्ति एवं वंश का हस्तांतरण पिता से पुत्र की ओर होता है।
कोल जनजाति कुल कितने गोत्रों (Clans) में विभक्त है?
- 12 (Twelve)
- 8 (Eight)
- 10 (Ten)
- 14 (Fourteen)
Explanation:
- कोल जनजाति कुल 12 गोत्रों में विभाजित है।
- इनके 12 गोत्रों के नाम हैं: हांसदा, सोरेन, किस्कू, मरांडी, हेम्ब्रम, बेसरा, मुर्मू, टुडू, चाउंडे, बास्के, चुनिआर तथा किसनोव।
कोल जनजाति में वधु मूल्य (Bride Price) को क्या कहा जाता है?
- पोटे (Pote)
- पोन (Pon)
- गोनोंग (Gonong)
- डाला-टका (Dala-Taka)
Explanation:
- कोल जनजाति में विवाह के समय वर पक्ष द्वारा दिए जाने वाले वधु मूल्य को ‘पोटे’ (Pote) कहा जाता है।
- झारखण्ड की अन्य जनजातियों में इसे पोन (संथाल) अथवा गोनोंग (मुंडा) आदि नामों से जाना जाता है।
कोल जनजाति के गांव के प्रधान (मुखिया) को क्या कहा जाता है?
- माँझी (Manjhi)
- महतो (Mahato)
- मुकद्दम (Mukaddam)
- पाहन (Pahan)
Explanation:
- कोल जनजाति के ग्राम प्रधान को ‘माँझी’ (Manjhi) कहा जाता है।
- माँझी गांव के सामाजिक विवादों को सुलझाने तथा परंपराओं के संचालन में मुख्य भूमिका निभाता है।
कोल जनजाति का पारंपरिक या परंपरागत पेशा क्या है?
- लोहा गलाना तथा उनसे सामान बनाना (Smelting iron and making goods)
- टोकरी एवं चटाई बुनना (Basket weaving)
- शिकार एवं कंद-मूल एकत्र करना (Hunting and gathering)
- कपड़ा बुनना (Weaving cloth)
Explanation:
- कोल जनजाति का परंपरागत पेशा लोहा गलाना तथा लोहे से औजार व सामान बनाना रहा है।
- असुर और बिरहोर की भांति यह भी धातु-कर्म से जुड़ी प्राचीन जनजाति मानी जाती है।
वर्तमान समय में कोल जनजाति के लोग तेजी से किस व्यवसाय को अपना रहे हैं?
- कृषि (Agriculture)
- व्यापार (Trade)
- मछली पालन (Fishery)
- खनन कार्य (Mining)
Explanation:
- वर्तमान समय में कोल जनजाति के लोग लोहा गलाने के अपने पारंपरिक पेशे को छोड़कर तीव्रता से कृषि (Agriculture) को अपना मुख्य व्यवसाय बना रहे हैं।
- कृषि ही अब इनकी जीविका का मुख्य साधन बनती जा रही है।
कोल जनजाति के लोग मुख्य रूप से किस धर्म के अनुयायी हैं?
- सरना धर्म (Sarna Religion)
- ईसाई धर्म (Christianity)
- बौद्ध धर्म (Buddhism)
- सिख धर्म (Sikhism)
Explanation:
- कोल जनजाति के लोग मुख्य रूप से प्रकृति-पूजक ‘सरना धर्म’ के अनुयायी हैं।
- यह धर्म प्रकृति और प्राकृतिक तत्वों की पूजा पर आधारित है।
कोल जनजाति के मुख्य/प्रमुख देवता कौन हैं?
- सिंगबोंगा (Singbonga)
- धर्मेश (Dharmesh)
- मरांग बुरु (Marang Buru)
- जाहेर एरा (Jaher Era)
Explanation:
- कोल जनजाति के सर्वोच्च एवं प्रमुख देवता ‘सिंगबोंगा’ (Singbonga) हैं।
- सिंगबोंगा को सूर्य का प्रतीक और सृष्टि का रचयिता माना जाता है।
झारखण्ड की कोल जनजाति पर किस धर्म का सर्वाधिक प्रभाव देखा जाता है?
- हिन्दू धर्म (Hinduism)
- ईसाई धर्म (Christianity)
- बौद्ध धर्म (Buddhism)
- जैन धर्म (Jainistic traditions)
Explanation:
- कोल जनजाति पर हिन्दू धर्म का सर्वाधिक प्रभाव है।
- प्रभावित होकर इस जनजाति के लोग पारंपरिक सरना धर्म के साथ-साथ हिन्दू रीति-रिवाजों को भी अपनाते हैं।
अपने मुख्य देवता के अलावा कोल जनजाति में किन हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा की जाती है?
- शंकर भगवान, बजरंगबली, दुर्गा एवं काली (Lord Shiva, Bajrangbali, Durga, and Kali)
- केवल श्री राम और सीता (Only Ram and Sita)
- केवल भगवान विष्णु और लक्ष्मी (Only Vishnu and Lakshmi)
- केवल भगवान गणेश (Only Lord Ganesha)
Explanation:
- कोल जनजाति में सिंगबोंगा के अतिरिक्त शंकर भगवान, बजरंगबली (हनुमान जी), माता दुर्गा एवं मां काली की भी पूजा की जाती है।
- यह उनके धार्मिक जीवन पर हिन्दू धर्म के सांस्कृतिक समन्वय को दर्शाता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा गोत्र कोल जनजाति के 12 गोत्रों में से एक है?
- मरांडी (Marandi)
- टोप्पो (Toppo)
- कुजूर (Kujur)
- तिर्की (Tirkey)
Explanation:
- ‘मरांडी’ (Marandi) कोल जनजाति के 12 मान्यता प्राप्त गोत्रों में से एक है।
- अन्य प्रमुख गोत्रों में हांसदा, सोरेन, किस्कू, हेम्ब्रम, बेसरा, मुर्मू, टुडू, चाउंडे, बास्के, चुनिआर व किसनोव शामिल हैं।
प्रश्न का शीर्षक: झारखण्ड की जनजाति के रूप में ‘कोल जनजाति’ (Kol Tribe) की आधिकारिक पहचान और मान्यता के संबंध में कौन-सा कथन सत्य है?
- भारत सरकार ने वर्ष 2003 में कोल जनजाति को झारखण्ड की 32वीं जनजाति के रूप में शामिल किया था।
- कोल जनजाति को वर्ष 2011 में झारखण्ड की 31वीं जनजाति के रूप में संवैधानिक दर्जा दिया गया था।
- यह जनजाति स्वतंत्रता से पूर्व ही वर्ष 1947 में अनुसूचित जनजाति की सूची में 30वें स्थान पर शामिल की गई थी।
- कोल जनजाति झारखण्ड की प्राथमिक/आदिम जनजाति श्रेणी में 8वें स्थान पर आती है।
Explanation:
- कोल जनजाति झारखण्ड राज्य की 32वीं जनजाति है। इसे भारत सरकार द्वारा वर्ष 2003 में अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) की श्रेणी में शामिल किया गया।
- यह तथ्य प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है क्योंकि 2003 में इसे अधिकारिक रूप से जनजाति का दर्जा दिया गया।
प्रश्न का शीर्षक: कोल जनजाति की प्रजातीय (Racial Group) और जैविक/रक्त समूह (Blood Group) विशेषताओं से संबंधित सही कथन कौन-सा है?
- कोल जनजाति का संबंध ‘प्रोटो-आस्ट्रेलायड’ (Proto-Australoid) समूह से है और इनमें ‘B’ रक्त समूह की अधिकता पाई जाती है।
- कोल जनजाति द्रविड़ (Dravidian) प्रजातीय समूह से संबंधित है और इनमें ‘A’ रक्त समूह सर्वाधिक पाया जाता है।
- कोल जनजाति का संबंध मंगोलायड (Mongoloid) समूह से है और इनमें ‘O’ रक्त समूह की प्रधानता पाई जाती है।
- यह जनजाति कॉकेसाइड (Caucasoid) प्रजातीय समूह का हिस्सा है और इनमें ‘AB’ रक्त समूह बहुतायत में है।
Explanation:
- शारीरिक एवं प्रजातीय दृष्टि से कोल जनजाति ‘प्रोटो-आस्ट्रेलायड’ (Proto-Australoid) समूह के अंतर्गत आती है।
- जैविक रूप से इस जनजाति के लोगों में ‘B’ रक्त समूह (B Blood Group) की अधिकता पाई जाती है।
प्रश्न का शीर्षक: कोल जनजाति की भाषा और उसके भाषायी वर्गीकरण (Linguistic Classification) के संदर्भ में कौन-सा कथन सही है?
- कोल जनजाति की भाषा ‘कोल’ (Kol) है, जो भाषायी रूप से कोलेरियन समूह से संबंधित है तथा संथाली भाषा से मिलती-जुलती है।
- कोल जनजाति की भाषा ‘कुड़ुख’ (Kurukh) है, जिसका संबंध द्रविड़ भाषा परिवार से है।
- कोल भाषा का संबंध इंडो-आर्यन भाषा परिवार से है तथा यह नागपुरी भाषा के समान है।
- कोल भाषा तिब्बती-बर्मी भाषा समूह का हिस्सा है और इसकी लिपि ‘ओल चिकी’ है।
Explanation:
- कोल जनजाति के लोग ‘कोल’ भाषा बोलते हैं। भाषायी वर्गीकरण के अनुसार, इसका संबंध ‘कोलेरियन समूह’ (Kolarian group) से है।
- यह भाषा संरचनात्मक एवं शब्दावली की दृष्टि से संथाली (Santhali) भाषा से काफी मिलती-जुलती है।
प्रश्न का शीर्षक: झारखण्ड राज्य में कोल जनजाति के भौगोलिक वितरण और मुख्य संकेन्द्रण (Geographical Distribution) के संबंध में सत्य कथन पहचानिए?
- झारखण्ड में कोल जनजाति का संकेन्द्रण मुख्यतः देवघर, दुमका व गिरिडीह जिलों में पाया जाता है।
- कोल जनजाति मुख्य रूप से पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों में केंद्रित है।
- इस जनजाति का सर्वाधिक संकेन्द्रण पलामू, गढ़वा और लातेहार जिलों के पठारी क्षेत्रों में है।
- कोल जनजाति मुख्यतः रांची, खूंटी और गुमला जिलों में निवास करती है।
Explanation:
- झारखण्ड राज्य के संताल परगना और उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के जिलों में कोल जनजाति का मुख्य निवास स्थान है।
- इनका संकेन्द्रण मुख्यतः देवघर (Deoghar), दुमका (Dumka) तथा गिरिडीह (Giridih) जिलों में देखा जाता है।
प्रश्न का शीर्षक: कोल जनजाति की सामाजिक व्यवस्था (Social System) और वधु मूल्य (Bride Price) से संबंधित सही कथन क्या है?
- कोल जनजाति का परिवार पितृसत्तात्मक व पितृवंशीय होता है तथा इनमें वधु मूल्य को ‘पोटे’ (Pote) कहा जाता है।
- कोल जनजाति मातृसत्तात्मक होती है और इनमें वधु मूल्य को ‘पोन’ (Pon) कहा जाता है।
- कोल जनजाति में पितृसत्तात्मक व्यवस्था है, किंतु वधु मूल्य की प्रथा को ‘झांका’ कहा जाता है।
- कोल जनजाति में परिवार मातृवंशीय होता है तथा वधु मूल्य को ‘दपा’ कहा जाता है।
Explanation:
- अन्य अधिकांश झारखण्ड की जनजातियों की तरह कोल जनजाति का परिवार भी पितृसत्तात्मक (Patriarchal) तथा पितृवंशीय (Patrilineal) होता है।
- कोल जनजाति में विवाह के समय दिए जाने वाले वधु मूल्य (Bride Price) को ‘पोटे’ (Pote) कहा जाता है।
प्रश्न का शीर्षक: कोल जनजाति के ग्रामीण शासन प्रबंध में गांव के प्रधान (Village Head) को किस नाम से जाना जाता है?
- कोल जनजाति में गांव के प्रधान को ‘माँझी’ (Manjhi) कहा जाता है।
- कोल जनजाति में गांव के प्रधान को ‘महतो’ (Mahato) कहा जाता है।
- कोल जनजाति के पारंपरिक गांव के प्रधान को ‘पाहन’ (Pahan) कहा जाता है।
- कोल जनजाति में गांव के मुखिया को ‘मुंडा’ (Munda) कहा जाता है।
Explanation:
- कोल जनजाति की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था में ग्रामीण स्तर पर नेतृत्व करने वाले गांव के प्रधान को ‘माँझी’ (Manjhi) कहा जाता है।
- माँझी गांव के सामाजिक और प्रशासनिक मामलों का निपटारा करता है।
प्रश्न का शीर्षक: कोल जनजाति के गोत्र (Clan/Gotra) विभाजन के संबंध में कौन-सा तथ्य सही है?
- कोल जनजाति कुल 12 गोत्रों (जैसे- हांसदा, सोरेन, किस्कू, मरांडी, मुर्मू आदि) में विभक्त है।
- कोल जनजाति में गोत्र व्यवस्था का पूर्णतः अभाव पाया जाता है।
- कोल जनजाति केवल 4 मुख्य गोत्रों में विभाजित है, जिन्हें ‘खूंट’ कहा जाता है।
- कोल जनजाति में 24 बहिर्विवाही गोत्र पाए जाते हैं जो आजीविका के आधार पर बंटे हैं।
Explanation:
- कोल जनजाति 12 गोत्रों में विभाजित है।
- इन गोत्रों के नाम हैं: हांसदा, सोरेन, किस्कू, मरांडी, हेम्ब्रम, बेसरा, मुर्मू, टुडू, चाउंडे, बास्के, चुनिआर और किसनोव।
प्रश्न का शीर्षक: कोल जनजाति के पारंपरिक एवं वर्तमान आर्थिक व्यवसाय (Occupation) के संबंध में कौन-सा कथन सत्य है?
- कोल जनजाति का परंपरागत पेशा लोहा गलाना एवं उससे सामान बनाना है, जबकि वर्तमान में ये तेजी से कृषि अपना रहे हैं।
- कोल जनजाति का मुख्य परंपरागत पेशा टोकरी बुनना है और वर्तमान में ये मुख्य रूप से पशुपालन कर रहे हैं।
- इनका पारंपरिक कार्य जड़ी-बूटी इकट्ठा करना था और वर्तमान में ये खनन कार्यों में लगे हैं।
- कोल जनजाति का पारंपरिक पेशा झूम खेती (Jhum Cultivation) था और वर्तमान में ये हस्तशिल्प का कार्य करते हैं।
Explanation:
- ऐतिहासिक रूप से कोल जनजाति का परंपरागत पेशा लोहा गलाना (Iron Smelting) तथा लोहे के उपकरण व सामान बनाना रहा है।
- आधुनिक समय में इस जनजाति के लोग आजीविका के लिए तेजी से कृषि (Agriculture) को अपना मुख्य व्यवसाय बना रहे हैं।
प्रश्न का शीर्षक: कोल जनजाति के धार्मिक जीवन एवं मुख्य देवता (Chief Deity) के संदर्भ में सही कथन चुनिए?
- कोल जनजाति के लोग सरना धर्म के अनुयायी हैं और इनके मुख्य देवता ‘सिंगबोंगा’ (Singbonga) हैं।
- कोल जनजाति के लोग ईसाई धर्म के अनुयायी हैं और इनके मुख्य देवता ‘मरांग बुरु’ हैं।
- कोल जनजाति पूर्णतः बौद्ध धर्म को मानती है और ‘धर्मेश’ को सर्वोच्च देवता मानती है।
- कोल जनजाति का अपना कोई विशिष्ट धर्म नहीं है और ये केवल ‘जाहर एरा’ की पूजा करते हैं।
Explanation:
- कोल जनजाति के लोग प्रकृति-पूजक सरना धर्म (Sarna Religion) के अनुयायी हैं।
- इस जनजाति के सर्वोच्च एवं मुख्य देवता ‘सिंगबोंगा’ (Singbonga) हैं।
प्रश्न का शीर्षक: कोल जनजाति की धार्मिक मान्यताओं और बाह्य सांस्कृतिक प्रभावों के संदर्भ में कौन-सा कथन सही है?
- कोल जनजाति पर हिन्दू धर्म का सर्वाधिक प्रभाव है तथा ये शंकर भगवान, बजरंगबली, दुर्गा एवं काली की भी पूजा करते हैं।
- कोल जनजाति पर इस्लाम धर्म का सर्वाधिक प्रभाव है और ये केवल सूफी संतों की आराधना करते हैं।
- इस जनजाति पर जैन धर्म का प्रभाव देखा जाता है तथा ये महावीर स्वामी की उपासना करते हैं।
- कोल जनजाति बाहरी किसी भी धर्म से प्रभावित नहीं है और केवल पितृ-पूजा (Ancestor Worship) करती है।
Explanation:
- कोल जनजाति के धार्मिक एवं सांस्कृतिक जीवन पर हिन्दू धर्म का सर्वाधिक प्रभाव देखने को मिलता है।
- अपने पारंपरिक सरना धर्म के साथ-साथ ये हिन्दू देवी-देवताओं जैसे- भगवान शंकर, बजरंगबली, मां दुर्गा और मां काली की भी पूजा-अर्चना करते हैं।
कोल जनजाति की प्रजातीय एवं भाषायी पृष्ठभूमि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोल जनजाति प्रजातीय दृष्टि से प्रोटो-ऑस्ट्रेलाॉयड (Proto-Australoid) समूह से संबंधित है।
2. इन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 2003 में झारखण्ड की 32वीं अनुसूचित जनजाति के रूप में शामिल किया गया था।
3. इनकी भाषा ‘कोल’ है, जिसका संबंध भाषायी रूप से कोलेरियन (Kolarian) समूह से है और यह संथाली भाषा से मिलती-जुलती है।
- 1, 2 और 3 सभी
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
Explanation:
- कथन 1, 2 और 3 तीनों सत्य हैं। कोल जनजाति प्रोटो-ऑस्ट्रेलाॉयड समूह में वर्गीकृत है।
- भारत सरकार ने वर्ष 2003 में कोल को झारखण्ड की 32वीं जनजाति के रूप में अधिसूचित किया था। इनकी भाषा ‘कोल’ है जो कोलेरियन परिवार की है तथा संथाली से साम्य रखती है।
कोल जनजाति की जैविक तथा भौगोलिक विशेषताओं के संबंध में कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
1. कोल जनजाति के लोगों में ‘B’ रक्त समूह (Blood Group B) की अधिकता पाई जाती है।
2. झारखण्ड में इस जनजाति का संकेन्द्रण मुख्य रूप से देवघर, दुमका और गिरिडीह जिलों में है।
3. कोल जनजाति का सामाजिक ढांचा मातृसत्तात्मक एवं मातृवंशीय होता है।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3 सभी
Explanation:
- कथन 1 और 2 सत्य हैं, जबकि कथन 3 असत्य है क्योंकि कोल जनजाति का परिवार पितृसत्तात्मक (Patriarchal) तथा पितृवंशीय (Patrilineal) होता है।
- इस जनजाति में ‘B’ रक्त समूह की प्रचुरता पाई जाती है तथा यह मुख्यतः संथाल परगना के देवघर, दुमका और गिरिडीह जिलों में केंद्रित हैं।
कोल जनजाति के गोत्र (Clans) विभाजन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोल जनजाति कुल 12 गोत्रों में विभक्त है।
2. हांसदा, सोरेन, किस्कू, मरांडी, हेम्ब्रम और मुर्मू इस जनजाति के गोत्रों में शामिल हैं।
3. बेसरा, टुडू, चाउंडे, बास्के, चुनिआर तथा किसनोव भी कोल जनजाति के प्रमुख गोत्र हैं।
- 1, 2 और 3 सभी
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
Explanation:
- कथन 1, 2 और 3 तीनों सत्य हैं। कोल जनजाति कुल 12 गोत्रों (Clans) में विभाजित है।
- इन 12 गोत्रों के नाम हांसदा, सोरेन, किस्कू, मरांडी, हेम्ब्रम, बेसरा, मुर्मू, टुडू, चाउंडे, बास्के, चुनिआर और किसनोव हैं।
कोल जनजाति की सामाजिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोल जनजाति में वधु मूल्य (Bride Price) देने की परंपरा है, जिसे ‘पोटे’ (Pote) कहा जाता है।
2. इस जनजाति में गाँव के पारंपरिक प्रधान को ‘माँझी’ (Manjhi) कहा जाता है।
3. कोल समाज में परिवार का नेतृत्व महिलाओं के हाथ में होता है।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3 सभी
Explanation:
- कथन 1 और 2 सत्य हैं। कोल जनजाति में वधु मूल्य को ‘पोटे’ कहा जाता है तथा इनके गाँव का प्रधान ‘माँझी’ कहलाता है।
- कथन 3 असत्य है क्योंकि कोल जनजाति का परिवार पितृसत्तात्मक व पितृवंशीय होता है, न कि महिला प्रधान।
कोल जनजाति की आर्थिक गतिविधियों एवं आजीविका के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस जनजाति का पारंपरिक पेशा लोहा गलाना तथा उससे उपकरण बनाना है।
2. वर्तमान समय में कोल जनजाति के लोग तेजी से कृषि (Agriculture) को अपने मुख्य व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं।
3. यह जनजाति पारंपरिक रूप से केवल जड़ी-बूटी एकत्र करने पर निर्भर रही है।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3 सभी
Explanation:
- कथन 1 और 2 सत्य हैं। कोल जनजाति का परंपरागत कार्य लोहा गलाना और लोहे के सामान बनाना है, जबकि वर्तमान में ये कृषि कार्य की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं।
- कथन 3 असत्य है क्योंकि इनका मुख्य परंपरागत पेशा लोहा गलाना रहा है।
कोल जनजाति की धार्मिक मान्यताओं एवं आस्था से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोल जनजाति के लोग सरना धर्म (Sarna Religion) के अनुयायी हैं।
2. सिंगबोंगा (Singbonga) कोल जनजाति के सर्वप्रमुख देवता हैं।
3. इस जनजाति पर हिन्दू धर्म का सर्वाधिक प्रभाव देखा जाता है।
- 1, 2 और 3 सभी
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
Explanation:
- कथन 1, 2 और 3 तीनों सत्य हैं। कोल जनजाति सरना धर्म को मानती है और इनके मुख्य देवता सिंगबोंगा हैं।
- झारखण्ड की जनजातियों में कोल जनजाति पर हिन्दू धर्म का सबसे अधिक प्रभाव देखा जाता है।
कोल जनजाति में धार्मिक समन्वय एवं पूजन पद्धतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
1. सरना धर्म का अनुयायी होने के बावजूद इनमें हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा का प्रचलन है।
2. इस जनजाति में शंकर भगवान, बजरंगबली, दुर्गा एवं काली माँ की भी पूजा की जाती है।
3. कोल जनजाति में केवल सिंगबोंगा के अतिरिक्त किसी अन्य देवी-देवता की पूजा वर्जित है।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3 सभी
Explanation:
- कथन 1 और 2 सत्य हैं। हिन्दू धर्म के व्यापक प्रभाव के कारण इस जनजाति के लोग सिंगबोंगा के साथ-साथ भगवान शिव, बजरंगबली, माँ दुर्गा और काली की भी श्रद्धा से पूजा करते हैं।
- कथन 3 असत्य है क्योंकि इनमें अन्य हिंदू देवी-देवताओं का पूजन व्यापक रूप से होता है।
कोल जनजाति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म/कथन असत्य है?
1. वधु मूल्य – पोटे (Pote)
2. गाँव का प्रधान – माँझी (Manjhi)
3. कुल गोत्रों की संख्या – 32
- केवल 3
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3 सभी
Explanation:
- कथन 3 असत्य है क्योंकि कोल जनजाति में गोत्रों की कुल संख्या 12 है (32 झारखण्ड में इस जनजाति का क्रम है)।
- कथन 1 और 2 सत्य हैं। वधु मूल्य को ‘पोटे’ तथा गाँव के प्रधान को ‘माँझी’ कहा जाता है।
कोल जनजाति के ऐतिहासिक तथा प्रशासनिक संदर्भ में दिए गए कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोल झारखण्ड राज्य की 32वीं मान्यता प्राप्त जनजाति है।
2. इसे भारत सरकार द्वारा वर्ष 2003 में अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) की श्रेणी में शामिल किया गया।
3. इनकी भाषा ‘कोल’ का संबंध द्रविड़ियन (Dravidian) भाषाई परिवार से है।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3 सभी
Explanation:
- कथन 1 और 2 सत्य हैं। कोल झारखण्ड की 32वीं जनजाति है जिसे वर्ष 2003 में जनजातीय दर्जा मिला।
- कथन 3 असत्य है क्योंकि इनकी भाषा ‘कोल’ का भाषायी संबंध कोलेरियन (Kolarian) समूह से है, द्रविड़ियन समूह से नहीं।
कोल जनजाति की सामाजिक-सांस्कृतिक विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं?
1. इस जनजाति के लोगों में ‘B’ रक्त समूह की प्रधानता पाई जाती है।
2. चुनिआर, किसनोव, चाउंडे और बास्के इनके 12 गोत्रों के अंतर्गत आते हैं।
3. यह जनजाति मुख्य रूप से पलामू और गढ़वा जिलों में ही निवास करती है।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3 सभी
Explanation:
- कथन 1 और 2 सत्य हैं। कोल जनजाति में B ब्लड ग्रुप की अधिकता होती है और चुनिआर, किसनोव, चाउंडे, बास्के आदि इनके 12 गोत्रों में शामिल हैं।
- कथन 3 असत्य है क्योंकि झारखण्ड में इस जनजाति का मुख्य संकेन्द्रण देवघर, दुमका और गिरिडीह जिलों में है।
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