JharkhandGK

इनमें से कौन-सा झारखण्ड के लोकप्रिय संगीत वाद्ययंत्रों में से एक है?
I.संतूर
II.नागाड़ा
III.टमक

  • (i), (ii) और (iii)
  • केवल (i) और (iii)
  • केवल (i) और (ii)
  • केवल (ii) और (iii)

Explanation:

  • नागाड़ा एवं टमक झारखंड के लोकप्रिय वाद्ययंत्र हैं।
    • नागाड़ा – झारखंड का पारंपरिक ताल वाद्य है, संथाल परगना में इसे टामाक के नाम से भी जाना जाता है।
    • टमक (तमक) – बिरहोर जनजाति द्वारा प्रयुक्त वाद्ययंत्र है (नगाड़ा)।
    • संतूर – जम्मू-कश्मीर का लोकप्रिय वाद्ययंत्र है।
  • झारखंड के अन्य प्रमुख वाद्य:
    • तंतु वाद्य – एकतारा, केंदरा, भुआंग, बनम, टोहिला, सारंगी
    • सुषिर वाद्य – बाँसुरी, शहनाई, सिंगा, मुरली, मदनभेरी
    • ताल वाद्य – मांदर, ढोल, नगाड़ा, ढाक, धमसा, डमरू, करताल, झांझ, थाला, काठी

वाद्य यंत्र थाला को ………. द्वारा तैयार किया जाता है।

  • लोहा
  • कांसा
  • एल्युमिनियम
  • निकल

Explanation:

  • थाला एक घन वाद्य है, जो कांसा से निर्मित होता है।
    • यह कांसे की थाली की भांति होता है, जिसका गोलाकार किनारा ऊपर की ओर उभरा होता है।
    • इसे बजाने के लिए रस्सी को एक हाथ से थामकर दूसरे हाथ से मक्के की खलरी से बजाया जाता है।
  • घन वाद्य: कांसा से निर्मित वाद्य (करताल, झांझ, घंटा, काठ, खाला, थाला)

बांसुरी का अन्य प्रकार ….. है ।

  • मुरली
  • केन्द्री
  • शहनाई
  • मदनभेदी

Explanation:

  • बांसुरी को मुरली भी कहा जाता है।
    • बांसुरी एक सुषिर वाद्य है, जिसे फूंककर बजाया जाता है।
    • इसका निर्माण बांस से किया जाता है।
    • झारखंड में डोंगी नामक बांस से बहुत अच्छी बाँसुरी बजाई जाती है।
  • अन्य सुषिर वाद्य: शहनाई (सनाई), सिंगा, मदनभेरी

बी. पी. केसरी के अनुसार निम्नलिखित में से कौन सदान नहीं है?

  • तेली
  • भूमिहार
  • तुरी
  • भोक्ता

Explanation:

  • सदान झारखंड के मूल गैर-जनजाति लोग हैं।
    • तेली – सदान जाति
    • तुरी – सदान जाति (टोकरी बनाने वाले)
    • भोक्ता – सदान जाति (भोगता जनजाति)
    • भूमिहार – सदान नहीं हैं।
  • सदानों की परिभाषा:
    • भाषा के दृष्टि से – जिनकी भाषा मौलिक रूप से खोरठा, नागपुरी, पंचपरगनिया और कुरमाली है।
    • ये आदिवासी नहीं हैं, बल्कि मूल गैर-जनजाति हैं।
    • सदानों का मुख्य पेशा – कृषि कार्य

झारखण्ड के सदान का मुख्य व्यवसाय क्या है?

  • शिकार
  • व्यापार
  • खेती
  • बुनाई करना

Explanation:

  • सदानों का मुख्य व्यवसाय कृषि कार्य (खेती) है।
    • ये स्थायी निवासी हैं।
    • सदान समुदायी होते हैं, जबकि आदिवासी कबीलाई होते हैं।

झारखण्ड के छोटानागपुर क्षेत्र का एक अनोखा प्रसंग हाइब्रिड भाषा का उदय है, जिसका उपयोग उनके लिंगुआ फ्रैंका के रूप में किया जाता है। उस भाषा का नाम क्या है?

  • संथाल
  • खड़िया
  • बिरजिया
  • सादरी

Explanation:

  • छोटानागपुर क्षेत्र की हाइब्रिड भाषा (लिंगुआ फ्रैंका) सादरी (सदानी) है।
    • यह नागपुरी का ही एक रूप है।
    • सदानों की मातृभाषा सादरी/सदानी है।
    • यह खोरठा, नागपुरी, पंचपरगनिया, कुरमाली से संबंधित है।

झारखण्ड के पुरुषों की सबसे सामान्य पोशाक को क्या कहा जाता है, जो कपड़े का एक ही टुकड़ा होता है?

  • लुंगी
  • धोती
  • अचकन
  • भगवा

Explanation:

  • झारखंड के पुरुषों की सबसे सामान्य पोशाक भगवा है।
    • मुण्डा जनजाति में वृद्धों द्वारा भगवा प्रयुक्त किया जाता है।
    • बेदिया जनजाति में पुरुषों का परंपरागत वस्त्र काच्छा/भगवा है।
    • संथाल पुरुषों के वस्त्र – कांचा, कुपनी, पड़हान, पाटका, दहड़ी, लुंगी

झारखण्ड में निम्नलिखित में से कौन-सी आदिवासी महिला की पारंपरिक पोशाक है?

  • मेखला चादर
  • फेरन
  • पांची और परहन
  • भगवान

Explanation:

  • पांची और परहन (परेया) आदिवासी महिलाओं की पारंपरिक पोशाक है।
    • परेया – उराँव महिलाओं द्वारा त्योहार के अवसर पर पहना जाने वाला विशेष वस्त्र।
    • परिया – मुण्डा महिलाओं द्वारा साड़ी की तरह पहना जाने वाला वस्त्र।
    • ठेठी और पाचन – बेदिया महिलाओं का परंपरागत वस्त्र।
    • झूला – चेरो महिलाओं द्वारा शरीर के ऊपरी भाग में पहना जाने वाला वस्त्र।

झारखण्ड के संदर्भ में ‘झिप्ली’ ……. . है

  • साहित्य का एक प्रकार है
  • लड़कियों हेतु बनावटी आभूषण है
  • एक स्थानीय सिगार है
  • एक भाषा है

Explanation:

  • ‘झिप्ली’ लड़कियों हेतु एक बनावटी आभूषण है।
    • यह सिर पर पहना जाने वाला आभूषण है।
    • अन्य सिर के आभूषण – खोगसो, सुर्रा-खोंगसो, उंडू, झीका, चिरो, चिलपों, खोखरी, बेरा (पुरुष)

संथाल परगना से संबंधित जनजातीय कला का एक रूप ‘पंछी पड़वंद’ मूलतः …. है

  • साहित्य का एक प्रकार है
  • लड़कियों हेतु बनावटी आभूषण है
  • एक स्थानीय सिगार है
  • महिलाओं की वेशभूषा है

Explanation:

  • ‘पंछी पड़वंद’ संथाल परगना से संबंधित जनजातीय कला का एक रूप है, जो महिलाओं की वेशभूषा है।
    • यह संथाल परगना की पारंपरिक वेशभूषा है।

निम्नलिखित में से कौन झारखण्ड की महिलाओं का पारंपरिक आभूषण नहीं है?

  • तरपत
  • तरका
  • पईला
  • हंसली

Explanation:

  • पईला झारखंड की महिलाओं का पारंपरिक आभूषण नहीं है।
    • तरपत – कान का आभूषण
    • तरका – कान का आभूषण
    • हंसली – गला का आभूषण
    • पईला – पैर का आभूषण (पंजाब/उत्तर भारत में प्रचलित)
  • प्रमुख आभूषण :
    • कान – तरकी, कर्णफूल, लवंगफूल, पानरा, तरकुला, बिडियो, ठिप्पी, पिपरपत्ता, तरपत
    • गला – हंसुली, बेरनी, चन्दवा, हिसिर, सकड़ी, ठोसा, खंभिया, पुन, भुंडिया, सिकड़ी, ताबीज
    • पैर – बटरिया, बांक-बंकी

निम्नलिखित में से कौन-सा स्थानीय पेय चावल से बनता है ?

  • हिजला
  • तरका
  • हँडिया
  • विशु

Explanation:

  • हड़िया (हँडिया) चावल से बनने वाला स्थानीय पेय है।
    • यह स्थानीय मदिरा है।
    • संथाल जनजाति में इसे ‘हड़िया’ या ‘पोचाई’ कहा जाता है।
    • असुर जनजाति में हड़िया को ‘बोथा’ या ‘झरनुई’ भी कहा जाता है।
    • हड़िया के दो प्रकार – बिरो हड़िया (दवा), भरूनी हड़िया

हँड़िया एक है

  • लोक गीत
  • स्थानीय बोली
  • स्थानीय मदिरा
  • लोक नृत्य

Explanation:

  • हड़िया (हँडिया) एक स्थानीय मदिरा (शराब) है।
    • यह चावल से बनाई जाती है।
    • यह आदिवासी समाज में प्रिय पेय पदार्थ है।
    • संथाल, उराँव, असुर आदि जनजातियाँ इसका सेवन करती हैं।

झारखण्ड राज्य में झूमर गीत किस अवसर पर गाया जाता है?

  • पर्व-त्यौहार के अवसर पर
  • पूजा के अवसर पर
  • विवाह के अवसर पर
  • संतानोत्पति के अवसर पर

Explanation:

  • झूमर गीत पर्व-त्योहारों के अवसर पर गाया जाता है।
    • इसे झूमर राग में गाया जाता है।
    • विभिन्न त्योहारों (जैसे – जितिया, सोहराय, करमा आदि) के अवसर पर गाया जाता है।
    • यह स्त्री प्रधान नृत्य है, जो फसल की कटाई के अवसर पर भी किया जाता है।

निम्नलिखित लोक गीत में से कौन-सा झारखण्ड में विवाह के दौरान गाया जाता है ?

  • डोमकच
  • छऊ
  • झूमर
  • फगुआ

Explanation:

  • डोमकच विवाह के दौरान गाया जाता है।
    • यह लोकगीत एवं लोकनृत्य दोनों है।
    • स्त्री प्रधान नृत्य है, जो विवाह के पूर्व से ही वर व कन्या के घर के आंगन में रात्रि में किया जाता है।
    • यह परिवार या पड़ोस के सदस्य मिलकर घर के आंगन में ही करते हैं।
    • औंदी गीत भी विवाह के समय गाया जाता है।

डोमकच क्या है?

  • एक तरह का कला
  • एक प्रकार का त्यौहार
  • एक जनजाति समूह
  • एक प्रकार का लोकगीत

Explanation:

  • डोमकच एक लोकगीत है।
    • यह विवाह के अवसर पर गाया जाता है।
    • यह लोकनृत्य भी है, जिसे स्त्रियों द्वारा विशेष अवसरों पर आयोजित किया जाता है।
    • इसमें हास-परिहास, अश्लील हाव-भाव व संवाद का प्रदर्शन किया जाता है।
    • इसके प्रकार – जशपुरिया, असमिया, झुमटा, एकहरिया आदि।

झारखण्ड की कला और लोक संगीत में ….. की सुंदरता परिलक्षित होती है ।

  • उद्योग
  • धर्म
  • प्रकृति
  • इतिहास

Explanation:

  • झारखंड की कला और लोक संगीत में प्रकृति की सुंदरता परिलक्षित होती है।
    • आदिवासी कला एवं संगीत आम तौर पर प्रकृति पर आधारित है।
    • जनजातियों के पर्व-त्योहार कृषि एवं प्रकृति से संबद्ध होते हैं।
    • नृत्य, गीत एवं वाद्य प्राकृतिक परिवेश को दर्शाते हैं।

फगुआ एक प्रकार का स्थानीय संगीत है जिसे ………. के पर्व पर गाया जाता है।

  • रक्षाबंधन
  • दीपावली
  • होली
  • नव वर्ष

Explanation:

  • फगुआ (फागुआ) होली के पर्व पर गाया जाता है।
    • यह पुरुष प्रधान नृत्य है।
    • इसका प्रदर्शन बसंत उत्सव या होली के अवसर पर किया जाता है।
    • यह फाल्गुन और चैत के संधिकाल का नृत्य है।
    • इसके प्रकार – पंचरंगी फगुआ (हर कड़ी पर राग बदलते हैं) एवं फगुआ पुछारी (दो दलों के बीच प्रश्नोत्तर)।

प्रवासी झारखण्ड मजदूर किस प्रकार के संगीत गाते हैं?

  • भोजपुरी
  • नागपुरी संगीत
  • मगही
  • झूमर

Explanation:

  • प्रवासी झारखंड मजदूर नागपुरी संगीत गाते हैं।
    • नागपुरी झारखंड की प्रमुख संपर्क भाषा है।
    • इसे सादरी एवं गंवारी के नाम से भी जाना जाता है।
    • प्रवासी मजदूर अपनी संस्कृति को जीवित रखने के लिए नागपुरी गीत गाते हैं।

झारखण्ड के संगीत के संदर्भ में :
I.आम तौर पर आदिवासी प्रकृति का है
II.यहाँ पश्चिम बंगाल और बिहार के साथ समानता है
III. संगीत केवल धार्मिक व्यक्ति के लिए है
IV.इनमें से सभी

  • I और II
  • केवल IV
  • II और III
  • I, II और III

Explanation:

  • आपके नोट्स के अनुसार:
    • कथन I – सही है, झारखंड का संगीत आम तौर पर आदिवासी प्रकृति का है।
    • कथन II – सही है, यहाँ पश्चिम बंगाल और बिहार के साथ समानता है (जैसे छऊ नृत्य की तीन शैलियाँ – सरायकेला, मयूरभंज, पुरूलिया)।
    • कथन III – गलत है, संगीत केवल धार्मिक के लिए नहीं है, बल्कि सभी के लिए है।

झारखण्ड में लोक संगीत का एक रूप निम्न में से कौन-सा है?

  • नचनी
  • घाटवारी
  • जादुर
  • जनानी झूमर

Explanation:

  • जनानी झूमर झारखंड के लोक संगीत का एक रूप है।
    • नचनी, घाटवारी, जादुर – ये नृत्य के रूप हैं, संगीत नहीं।
    • जनानी झूमर – महिलाओं द्वारा गाया जाने वाला झूमर गीत।

‘ओहिरा’ गीत के साथ किस त्यौहार से संबंध है?

  • रोहिनी
  • बन्दना
  • सरहुल
  • मकर

Explanation:

  • ‘ओहिरा’ गीत बन्दना त्यौहार से संबंधित है।
    • बन्दना – खड़िया जनजाति का प्रमुख त्योहार है, जो कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है।

झुमर, टुनमुनियां, बारहमासा तथा झूलागीत, ये सभी स्थानीय संगीत के प्रकार…..की श्रेणी में आते हैं । SI(PT)-2017

  • बिहा
  • कुरमाली
  • कजली
  • सोहराई

Explanation:

  • झुमर, टुनमुनियां, बारहमासा तथा झूलागीत कजली की श्रेणी में आते हैं।
    • कजली – वर्षा ऋतु में गाया जाने वाला लोकगीत है।

कजली कब गाया जाता है?

  • चैत्र मास में
  • वर्षा ऋतु में
  • होली में
  • रबी फसल के समय

Explanation:

  • कजली वर्षा ऋतु में गाया जाता है।
    • यह स्थानीय संगीत की एक प्रमुख श्रेणी है।
    • टुनमुनिया, बाराहमास तथा झूलागीत भी कजली की ही श्रेणी में आते हैं।

औंदी गीत कब गाया जाता है ?

  • बसंत के समय
  • धान बोते समय
  • विवाह के समय
  • इनमें कोई नहीं

Explanation:

  • औंदी गीत विवाह के समय गाया जाता है।
    • यह विवाह संबंधी लोकगीत है।
    • डोमकच भी विवाह के समय गाया जाता है।

झारखण्ड के छोटानागपुर क्षेत्र में लोक-गीत का ज्ञात संगीत क्या है?

  • I.डोमकच, झूमर
  • II.विवाह – औगनी और डइंड़धरा
  • III. I और II दोनों
  • IV.इनमें कोई नहीं

Explanation:

  • छोटानागपुर क्षेत्र में:
    • डोमकच, झूमर – प्रमुख लोकगीत हैं।
    • औगनी (औंदी) और डइंड़धरा – विवाह के समय गाए जाने वाले लोकगीत हैं।

झारखण्ड में ‘पाइका’ क्या है?

  • नृत्य
  • लोकगीत
  • चित्रकला
  • लोककला

Explanation:

  • पाइका झारखंड का एक युद्ध/मार्शल नृत्य है।
    • यह ओजपूर्ण नृत्य है।
    • नर्तक सैनिक वेश धारण करते हैं, एक हाथ में तलवार और दूसरे में ढाल लिए होते हैं।
    • यह केवल पुरुष सदस्यों द्वारा किया जाता है।
    • यह मुण्डा जनजाति में सर्वाधिक प्रचलित है।

झारखण्ड में एक लोकप्रिय मार्शल नृत्य कौन-सा है?

  • दोहरी दोमकच
  • पाइका
  • फगुवा
  • विंसरिया

Explanation:

  • पाइका झारखंड का एक लोकप्रिय मार्शल (युद्ध) नृत्य है।
    • यह आदिवासी व सदान दोनों में प्रचलित है।
    • इसमें मार्शल आर्ट तकनीक का संयोजन है।
    • यह गीत रहित नृत्य है।
    • यह त्योहारों और शादियों जैसे अवसरों पर किया जाता है।

इनमें से कौन-सा एक लोकनृत्य झारखण्ड का नहीं है?

  • पइका
  • घूमर
  • नटुआ
  • छऊ

Explanation:

  • घूमर (घूमर) झारखंड का लोकनृत्य नहीं है।
    • घूमर – राजस्थान का प्रसिद्ध लोकनृत्य है।
    • झूमर – झारखंड का लोकनृत्य है (ध्यान दें – दोनों अलग हैं)।
    • पाइका, नटुआ, छऊ – ये झारखंड के लोकनृत्य हैं।

छऊ नृत्य की तीन शैलियाँ देखने में आती हैं, जिनका नामकरण उनके निष्पादन स्थल के अनुरूप किया जाता है। झारखण्ड में स्थान नाम है

  • मयूरभंज
  • पुरूलिया
  • सरायकेला
  • कोडरमा

Explanation:

  • छऊ नृत्य की तीन शैलियाँ हैं:
    • सरायकेला (झारखंड) – सबसे प्राचीन शैली
    • मयूरभंज (उड़ीसा)
    • पुरूलिया (पश्चिम बंगाल)
  • छऊ नृत्य की विशेषताएँ:
    • झारखंड का सबसे प्रसिद्ध लोकनृत्य
    • पुरुष प्रधान नृत्य
    • मुखौटा पहनकर किया जाता है
    • इसमें कथानक होता है (अन्य नृत्यों में केवल भाव)
    • 2010 में यूनेस्को द्वारा ‘विरासत नृत्य’ में शामिल
    • दो धाराएँ – हातियार धारा (वीर रस) एवं काली भंग धारा (शृंगार रस)

झारखण्ड के इस लोकनृत्य का नाम एक वृक्ष के नाम पर पड़ा है

  • पाइका
  • करमा
  • छऊ
  • संथाल

Explanation:

  • करमा नृत्य का नाम करम वृक्ष (करमा/करम) के नाम पर पड़ा है।
    • यह नृत्य करमा पर्व के अवसर पर किया जाता है।
    • यह झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश का लोकनृत्य है।
    • इसमें 8 पुरुष/8 स्त्री भाग लेते हैं।
    • इसके दो प्रकार – खेमटा और झिनसारी।

यह एक लोकनृत्य है, जिसका निष्पादन विवाह के दौरान दूल्हे के परिवार में किया जाता है

  • पाइका
  • करमा
  • डमकच
  • लहसुआ

Explanation:

  • डोमकच (डमकच) का निष्पादन विवाह के दौरान दूल्हे के परिवार में किया जाता है।
    • यह स्त्री प्रधान नृत्य है।
    • इसमें महिलाओं के दो दल होते हैं।
    • यह परिवार या पड़ोस के सदस्य मिलकर घर के आंगन में ही करते हैं।
    • इसे डराम-दारू नृत्य भी कहा जाता है (संथाल जनजाति में)।

झारखण्ड राज्य में पुरुषों द्वारा त्योहारों और शादियों आदि समारोहों जैसे मौका पर तलवार और ढाल के साथ कौन-सा नृत्य किया जाता है?

  • पाईका
  • फगुआ
  • अग्नि
  • अमर

Explanation:

  • पाइका (पाईका) नृत्य में पुरुष तलवार और ढाल के साथ नृत्य करते हैं।
    • यह त्योहारों और शादियों जैसे अवसरों पर किया जाता है।
    • यह एक युद्ध नृत्य है।
    • नर्तक रंग-बिरंगी कलगी या मोर पंख लगी पगड़ी बाँधते हैं।
    • यह केवल पुरुष सदस्यों द्वारा किया जाता है।

कृष्णलीला, भकुली बंका, कीर्तनिया, ये सभी…………..के प्रकार हैं ।

  • संगीत
  • नाटक
  • नृत्य
  • साहित्य

Explanation:

  • कृष्णलीला, भकुली-बंका, कीर्तनिया ये सभी लोकनाट्य (नाटक) के प्रकार हैं।
    • जट-जटिन – श्रावण से कार्तिक माह के बीच कुँवारी लड़कियों द्वारा
    • भकुली-बंका – श्रावण (सावन) से कार्तिक माह तक (भकुली-पत्नी, बंका-पति)
    • सामा-चकेवा – कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी से पूर्णमासी तक
    • कीर्तनिया – भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन

करमा नृत्य के दो प्रकार कौन से हैं?

  • घुड़ीया एवं पनारी
  • मागे एवं जोरगो
  • गोतियो एवं छऊ
  • खेमटा एवं भिनुसारी

Explanation:

  • करमा नृत्य के दो प्रकार हैं:
    • खेमटा
    • झिनसारी/भिनुसारी
  • करमा नृत्य की विशेषताएँ:
    • नाम करम वृक्ष के नाम पर पड़ा
    • इसमें 8 पुरुष/8 स्त्री भाग लेते हैं
    • यह करमा पर्व (भादो माह शुक्ल पक्ष एकादशी) पर किया जाता है
    • नृत्य के दौरान लहुसा गीत गाया जाता है

झारखण्ड के इस लोक नृत्य का नाम एक वृक्ष के नाम पर पड़ा है :

  • घुड़ीया
  • पइका
  • छऊ
  • करमा

Explanation:

  • करमा नृत्य का नाम करम वृक्ष (करमा/करम) के नाम पर पड़ा है।
    • यह करमा पर्व के अवसर पर किया जाता है।
    • करमा झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश का लोकनृत्य है।

निम्नलिखित में से किस राज्य का लोकनृत्य करमा है?

  • झारखण्ड और छत्तीसगढ़
  • केवल छत्तीसगढ़
  • केवल झारखण्ड
  • झारखण्ड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश

Explanation:

  • करमा नृत्य झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश का लोकनृत्य है।
    • यह तीनों राज्यों में करमा पर्व के अवसर पर किया जाता है।

इनमें से कौन-सा एक लोक नृत्य झारखण्ड का नहीं है? TGT – 2009

  • घूमर
  • पइका
  • छऊ
  • करमा

Explanation:

  • घूमर (राजस्थान) झारखंड का लोकनृत्य नहीं है।
    • झूमर – झारखंड का लोकनृत्य है (ध्यान दें – दोनों अलग हैं)।
    • पाइका, छऊ, करमा – ये झारखंड के लोकनृत्य हैं।

दशहरा में निम्नलिखित में से कौन-सा नृत्य शिक्षक और छात्र दोनों द्वारा एक साथ किया जाता है?

  • दोंगेड
  • बाहा
  • दोहा
  • दसंय

Explanation:

  • दसंय नृत्य दशहरा में शिक्षक और छात्र दोनों द्वारा एक साथ किया जाता है।
    • यह दशहरा के प्रथम दिन से विजयादशमी तक किया जाता है।
    • यह संथाल जनजाति में प्रचलित पुरुष प्रधान नृत्य है।
    • नर्तक महिलाओं की वेश-भूषा धारण करते हैं।

झारखण्ड में आयोजित मछुआ महोत्सव में सामान्यतः नृत्य प्रदर्शित किया जाता है।

  • दोंगेड
  • बाहा
  • भादुरिया
  • दसंय

Explanation:

  • मछुआ महोत्सव में सामान्यतः भादुरिया नृत्य प्रदर्शित किया जाता है।
    • धुबिया – झारखंड में एक लोकनृत्य है।
    • मछुआ महोत्सव मछुआरों/मछुआ समुदाय से संबंधित है।

नटुवा नाच में प्रयुक्त पगड़ी को पंच परगना क्षेत्र में सामान्यतः कहा जाता है।

  • दोंगेड
  • कालगा
  • टोपी
  • पगड़ी

Explanation:

  • नटुवा नाच में प्रयुक्त पगड़ी को पंच परगना क्षेत्र में कालगा कहा जाता है।
    • नटुआ नृत्य – मुण्डा जनजाति द्वारा किया जाने वाला पुरुष प्रधान नृत्य है।
    • इसमें पुरुषों द्वारा स्त्री वेश धारण करके नृत्य किया जाता है।
    • इसके प्रकार – पाखी नटुवा, झूमर नटुवा, डंडा नटुवा।

यह एक लोक नृत्य है, जिसका निष्पादन विवाह के दौरान दूल्हे के परिवार में किया जाता है?

  • दोंगेड
  • बाहा
  • डोमकच
  • दसंय

Explanation:

  • डोमकच नृत्य का निष्पादन विवाह के दौरान दूल्हे के परिवार में किया जाता है।
    • यह स्त्री प्रधान नृत्य है।
    • इसमें महिलाओं के दो दल होते हैं।
    • यह परिवार या पड़ोस के सदस्य मिलकर घर के आंगन में करते हैं।

झारखण्ड की स्थानीय जनजातियों के बीच प्रचलित जशपुरिया, असमिया, झुमटा, एकहरिया नृत्य के प्रकार है।

  • फगुआ
  • बाहा
  • डोमकच
  • दसंय

Explanation:

  • जशपुरिया, असमिया, झुमटा, एकहरिया डोमकच नृत्य के प्रकार हैं।
    • डोमकच – स्त्रियों द्वारा विशेष अवसरों (जैसे – विवाह) पर आयोजित किया जाता है।
    • इसमें हास-परिहास, अश्लील हाव-भाव व संवाद का प्रदर्शन किया जाता है।

झारखण्ड के किस नृत्य शैली को राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय प्रसिद्धि मिली है?

  • फगुआ
  • छऊ
  • डोमकच
  • पइका

Explanation:

  • छऊ नृत्य को राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय प्रसिद्धि मिली है।
    • 2010 में यूनेस्को द्वारा ‘विरासत नृत्य’ में शामिल किया गया।
    • इसकी तीन शैलियाँ – सरायकेला (झारखंड), मयूरभंज (उड़ीसा), पुरूलिया (पश्चिम बंगाल)
    • सरायकेला छऊ सबसे प्राचीन शैली है।

सरायकेला की मिट्टी, किसकी लय के साथ जीवंत है?

  • फगुआ
  • छऊ
  • डोमकच
  • पइका

Explanation:

  • सरायकेला की मिट्टी छऊ नृत्य की लय के साथ जीवंत है।
    • छऊ नृत्य का प्रारंभ सरायकेला में हुआ।
    • यहीं से यह मयूरभंज (उड़ीसा) व पुरूलिया (पश्चिम बंगाल) में विस्तारित हुआ।

सरायकेला छऊ निम्नलिखित में से किसके साथ जुड़े हैं?

  • छऊ नृत्य
  • छऊ संगीत
  • छऊ व्यापार
  • छऊ पेंटिंग्स

Explanation:

  • सरायकेला छऊ छऊ नृत्य से जुड़ा है।
    • सरायकेला छऊ – झारखंड की सबसे प्राचीन छऊ शैली।
    • यह पुरुष प्रधान नृत्य है।

छऊ ……. है।

  • छऊ नृत्य
  • छऊ संगीत
  • छऊ व्यापार
  • छऊ पेंटिंग्स

Explanation:

  • छऊ नृत्य है।
    • यह झारखंड का सबसे प्रसिद्ध लोकनृत्य है।
    • इसमें मुखौटा पहनकर पौराणिक व ऐतिहासिक कथाओं का मंचन किया जाता है।
    • इसमें कथानक होता है (अन्य नृत्यों में केवल भाव)।

छऊ नृत्य झारखण्ड के कौन-से जिले से संबंधित है?

  • देवघर
  • चतरा
  • सरायकेला-खरसावां
  • गोड्डा

Explanation:

  • छऊ नृत्य सरायकेला-खरसावां जिले से संबंधित है।
    • यह सरायकेला से ही मयूरभंज (उड़ीसा) व पुरूलिया (पश्चिम बंगाल) में विस्तारित हुआ।
    • छऊ नृत्य को सरायकेला रियासत का संरक्षण प्राप्त था।

निम्नलिखित पारंपरिक नृत्य रूपों में से झारखण्ड का नृत्य कौन-सा है ?

  • सत्रिया
  • पुलिकाली
  • घुमरा
  • पइका

Explanation:

  • पाइका (पइका) झारखंड का पारंपरिक नृत्य है।
    • यह युद्ध नृत्य/मार्शल नृत्य है।
    • मुण्डा जनजाति में सर्वाधिक प्रचलित है।
    • सत्रिया – असम, पुलिकाली – केरल, घुमरा – राजस्थान

निम्नलिखित में से किस नृत्य को ‘युद्ध नृत्य/मार्शियल नृत्य’ की संज्ञा दी गयी है ?

  • डोमकच
  • फगुआ
  • घुमरा
  • पइका

Explanation:

  • पाइका (पइका) को ‘युद्ध नृत्य/मार्शल नृत्य’ की संज्ञा दी गई है।
    • इसमें तलवार और ढाल का प्रयोग किया जाता है।
    • यह आदिवासी व सदान दोनों में प्रचलित है।
    • यह गीत रहित नृत्य है।
    • डॉ. रामदयाल मुण्डा के नेतृत्व में इसका मंचन रूस में किया गया था।

रूस में भारत महोत्सव में निम्नलिखित में से कौन-सा नृत्य प्रस्तुत किया गया है?

  • डोमकच
  • फगुआ
  • घुमरा
  • पइका

Explanation:

  • पाइका नृत्य का मंचन रूस में भारत महोत्सव में किया गया था।
    • इसका नेतृत्व डॉ. रामदयाल मुण्डा ने किया।
    • यह रूस में अत्यंत लोकप्रिय हुआ था।

पइका क्या है?

  • नृत्य
  • संगीत
  • लोक कला
  • पेंटिंग्स

Explanation:

  • पाइका एक नृत्य है।
    • यह झारखंड का लोकप्रिय मार्शल/युद्ध नृत्य है।
    • यह पुरुष प्रधान नृत्य है।

झारखण्ड राज्य में पुरुषों द्वारा त्यौहारों और शादियों आदि समारोहों जैसे मौके पर तलवार और ढ़ाल के साथ कौन-सा नृत्य किया जाता है?

  • डोमकच
  • फगुआ
  • घुमरा
  • पइका

Explanation:

  • पाइका नृत्य में पुरुष तलवार और ढाल के साथ नृत्य करते हैं।
    • यह त्योहारों और शादियों जैसे अवसरों पर किया जाता है।
    • नर्तक रंग-बिरंगी कलगी या मोर पंख लगी पगड़ी बाँधते हैं।

…… स्थानीय नृत्य संगीत का प्रकार नहीं है । ST (PT) – 2017

  • बिहा
  • डोमकच
  • लुझरी
  • खेमटा

Explanation:

  • बिहा स्थानीय नृत्य/संगीत का प्रकार नहीं है।
    • डोमकच – नृत्य एवं संगीत
    • लुझरी – नृत्य/संगीत
    • खेमटा – करमा नृत्य का प्रकार

झारखण्ड में किस लोक नृत्य को जन्मोत्सव आदि अवसरों पर पुरुषों के द्वारा किया जाता है?

  • करमा नृत्य
  • जोग्गा नृत्य
  • झरनी नृत्य
  • पंवड़िया नृत्य

Explanation:

  • पंवड़िया लोक नृत्य को जन्मोत्सव आदि अवसरों पर पुरुषों के द्वारा किया जाता है।
    • यह झारखंड का एक प्रमुख लोकनृत्य है।

झारखण्ड में ‘धुबिया’ किसको कहा जाता है?

  • नृत्य
  • संगीत
  • लोक कला
  • पेंटिंग्स

Explanation:

  • ‘धुबिया’ झारखंड का एक लोकनृत्य है।
    • यह उराँव जनजाति में विशेष रूप से प्रचलित है।
    • यह खेतों से धूल उड़ाते हुए किया जाता है।

लुरिसायरो, झारखण्ड की जनजातियों द्वारा किया जाने वाला एक प्रकार का …. है। Revenue Staff (Mains) – 2017

  • लोक नृत्य
  • लोक संगीत
  • लोक कला
  • पेंटिंग्स

Explanation:

  • लुरिसायरो लोक नृत्य है।
    • यह झारखंड की जनजातियों द्वारा किया जाने वाला एक प्रकार का लोकनृत्य है।

हंट के लिए तैयारी करने का कार्य किस नृत्य रूप में दर्शाया गया है?

  • हुंटा
  • मुंडारी
  • डोमकच
  • बराव

Explanation:

  • हुंटा नृत्य में शिकार (हंट) के लिए तैयारी का कार्य दर्शाया गया है।
    • यह झारखंड का एक प्रमुख लोकनृत्य है।

झारखण्ड की एक प्राचीन सांस्कृतिक विरासत निम्नलिखित में से कौन-सी है ?

  • शेरू
  • मुंडारी
  • छऊ
  • इनमें से कोई नहीं

Explanation:

  • छऊ झारखंड की एक प्राचीन सांस्कृतिक विरासत है।
    • इसे 2010 में यूनेस्को द्वारा ‘विरासत नृत्य’ में शामिल किया गया है।
    • यह झारखंड का सबसे प्रसिद्ध लोकनृत्य है।

चढ़नतरी, रसक्रीड़ा, ठढ़िया, तथा खेमटा नृत्य के प्रकार हैं।

  • भादुरिया
  • जनानी झूमर
  • अंगनई
  • मुंडारी

Explanation:

  • चढ़नतरी, रसक्रीड़ा, ठढ़िया, तथा खेमटा अंगनई नृत्य के प्रकार हैं।
    • अंगनई – पूजा के अवसर पर किया जाने वाला धार्मिक नृत्य है।
    • यह नृत्य मुख्यतः सदानों में प्रचलित है।

निम्न में से किस नृत्य के प्रकार को नचनी खेलड़ी नृत्य भी कहा जाता है ?

  • शेरू
  • नटुवा नाच
  • छऊ
  • कली

Explanation:

  • कली नृत्य को नचनी-खेलड़ी नाच भी कहा जाता है।
    • यह महिलाओं द्वारा किया जाता है।
    • नृत्य करने वाली महिलाएँ श्रृंगार से सजकर मुकुट पहनकर नृत्य करती हैं।
    • इसमें राधा-कृष्ण के प्रेम-प्रसंग की प्रमुखता होती है।

दोसमी नृत्य में ……. प्रकार के संगीत का प्रयोग किया जाता है। ST (PT) – 2017

  • शेरू
  • लांगड़े
  • बिहा
  • कर्मा

Explanation:

  • दोसमी नृत्य में लांगड़े प्रकार के संगीत का प्रयोग किया जाता है।
    • लांगड़े नृत्य – संथाली जनजाति का लोकनृत्य है।
    • यह किसी भी खुशी या उत्सव के अवसर पर किया जाता है।

सोहराइ नृत्य में महिला गाती हैं।

  • जमाव
  • चुमावड़ी
  • लंगड़े
  • सकरात

Explanation:

  • सोहराई नृत्य के दौरान महिलाओं के द्वारा चुमावड़ी गीत गाया जाता है।
    • सोहराई नृत्य – पालतू पशुओं के लिए आयोजित किया जाता है।
    • नृत्य के दौरान गोशाला में पूजा की जाती है।
    • पुरुष गाँव-जमाव गीत गाकर नाचते हैं।

लाँगड़े क्या है?

  • नृत्य
  • संगीत
  • लोक कला
  • वाद्य यंत्र

Explanation:

  • लाँगड़े एक नृत्य है।
    • यह संथाली जनजाति का लोकनृत्य है।
    • यह किसी भी खुशी या उत्सव के अवसर पर किया जाता है।

झूमर, पड़का, नटुआ तथा अग्नि सभी प्रकार हैं : TGT-2012

  • नृत्य के
  • संगीत के
  • लोक कला के
  • लिपिओं के

Explanation:

  • झूमर, पड़का, नटुआ तथा अग्नि सभी नृत्य के प्रकार हैं।
    • झूमर – स्त्री प्रधान, फसल कटाई
    • नटुआ – मुण्डा जनजाति, पुरुष प्रधान
    • अग्नि – धार्मिक नृत्य, शील की पूजा
लोकनृत्य, लोकगीत , वस्त्र-आभूषण , खान-पान, सदान,वाद्य यंत्र