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झारखण्ड में अभ्रक का सबसे अधिक उत्पादन होता है, स्थानीय भाषा में उसे क्या कहते हैं?

  • माइका
  • लाइमग्लास
  • रूबी
  • कॉपर

Explanation:

  • अभ्रक (Mica) को स्थानीय भाषा में “रूबी” (Ruby) कहा जाता है। नोट्स में स्पष्ट उल्लेख है – “झारखण्ड में उच्च कोटि का सफेद अभ्रक (रूबी या मस्कोविट किस्म) पाया जाता है जिसे ‘रूबी अभ्रक’ कहा जाता है।” अभ्रक का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र कोडरमा, गिरिडीह एवं हजारीबाग हैं। कोडरमा को ‘भारत की अभ्रक राजधानी’ कहा जाता है।

निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज झारखण्ड में उत्पादित नहीं होता है?

  • कोयला
  • बॉक्साइट
  • लौह
  • पेट्रोलियम

Explanation:

  • झारखंड में कोयला, बॉक्साइट, लौह अयस्क, तांबा, अभ्रक, यूरेनियम आदि खनिजों की प्रचुरता है। नोट्स में पेट्रोलियम का उल्लेख झारखंड में उत्पादित होने वाले खनिजों में नहीं किया गया है। झारखंड को ‘भारत का रूर’ कहा जाता है तथा यह देश के कुल खनिज संसाधन का 40% स्वामी है, लेकिन पेट्रोलियम इनमें शामिल नहीं है।

सितम्बर, 2015 की स्थिति के अनुसार, भारत में कुल लौह अयस्क उत्पादन में झारखण्ड का स्थान कौन-सा है?

  • पहला
  • दूसरा
  • तीसरा
  • चौथा

Explanation:

  • लौह अयस्क के रिज़र्व (भंडार) की दृष्टि से झारखंड देश में दूसरा स्थान रखता है। नोट्स में स्पष्ट उल्लेख है – “लौह अयस्क के रिज़र्व की दृष्टि से झारखण्ड देश में स्थान – दूसरा बड़ा राज्य”उत्पादन की दृष्टि से यह चौथा (10%) स्थान रखता है। ओडिशा देश में लौह अयस्क उत्पादन में प्रथम स्थान पर है।

‘सिकनी कोयला परियोजना’ झारखण्ड के किस जगह पर स्थित है?

  • राँची
  • लातेहार
  • जमशेदपुर
  • पलामू

Explanation:

  • सिकनी कोयला परियोजना JSMDC (झारखण्ड राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड) द्वारा संचालित एक प्रमुख कोयला परियोजना है, जो सिकनी, लातेहार में स्थित है। लातेहार जिला कोयला, बॉक्साइट, चूना पत्थर आदि खनिजों के लिए भी जाना जाता है।

कोयला भंडार में झारखण्ड का कौन-सा स्थान है?

  • पहला
  • दूसरा
  • तीसरा
  • चौथा

Explanation:

  • कोयला भंडार की दृष्टि से झारखंड देश में प्रथम स्थान पर है। नोट्स में स्पष्ट उल्लेख है – “सर्वाधिक कोयला भण्डारक राज्य – झारखण्ड (27.37%)”। हालाँकि कोयला उत्पादन की दृष्टि से झारखंड चौथा स्थान रखता है (ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश के बाद) 17% उत्पादन के साथ।

झारखण्ड में निम्नलिखित में से किस स्थान पर दुनिया में लौह अयस्क का सबसे बड़ा एकल भंडार है?

  • राजमहल
  • चिरिया
  • सतबरवा
  • झरिया

Explanation:

  • चिरिया (मनोहरपुर, पश्चिमी सिंहभूम) “विश्व के सबसे बड़े लौह खान में शामिल” है। नोट्स में चिरिया – मनोहरपुर को लौह क्षेत्र के चार वर्गों में से एक बताया गया है। इसका संचालन SAIL द्वारा किया जाता है। लौह अयस्क धारवाड़ श्रृंखला में पाया जाता है।

इनमें से कौन-सा कोयला क्षेत्र झारखण्ड में नहीं है?

  • सिंगरौली
  • झरिया
  • हूटर
  • औरंगा

Explanation:

  • सिंगरौली कोयला क्षेत्र मध्य प्रदेश में स्थित है, झारखंड में नहीं। झरिया (धनबाद), हूटर (गुमला) एवं औरंगा (CCL) झारखंड के प्रमुख कोयला क्षेत्र हैं। नोट्स में झारखंड के 5 कोयला क्षेत्रों – दामोदर घाटी, बराकर बेसिन, अजय बेसिन, राजमहल पहाड़ी, उत्तरी कोयल बेसिन का उल्लेख है।

झारखण्ड …………… के लिए प्रसिद्ध है?

  • खेल सामग्री
  • मोती
  • कोयले की खान
  • सोने की खान

Explanation:

  • झारखंड कोयला खनन के लिए सर्वाधिक प्रसिद्ध है। राज्य में 132 कोयला खदानें हैं (देश में सर्वाधिक)। यहाँ कोकिंग कोयला का एकमात्र उत्पादक राज्य है। झरिया क्षेत्र पूरे झारखंड के कोयला उत्पादन का 60% उत्पादन करता है। एशिया की सबसे बड़ी कोल वाशरी – करगाली (बोकारो) भी यहाँ स्थित है।

बॉक्साइट के आरक्षित भंडार की दृष्टि से झारखण्ड राज्य का भारतवर्ष में …..स्थान है?

  • छठा स्थान
  • सातवां स्थान
  • पांचवा स्थान
  • आठवां स्थान

Explanation:

  • बॉक्साइट के भंडार एवं उत्पादन दोनों की दृष्टि से झारखंड देश में 7वें स्थान पर है। नोट्स में स्पष्ट उल्लेख है – “भंडार व उत्पादन दोनों की दृष्टि से यह देश में 7वें स्थान पर है।” झारखंड में देश के कुल बॉक्साइट रिज़र्व का 4.20% संरक्षित है। बॉक्साइट मुख्यतः लोहरदगा, गुमला, लातेहार, गोड्डा, साहेबगंज में पाया जाता है। लोहरदगा को ‘बॉक्साइट नगरी’ कहा जाता है।

‘सिंहभूम ट्रस्ट जोन’ नामक विख्यात 167 किलोमीटर के आकार की कई महत्वपूर्ण खनिजों का भण्डार गृह, निम्न का पारगमन करता है?

  • पूर्वी सिंहभूम
  • सरायकेला-खरसावाँ
  • पश्चिमी सिंहभूम
  • उपर्युक्त सभी

Explanation:

  • सिंहभूम क्षेत्र (जिसमें पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम एवं सरायकेला-खरसावां शामिल हैं) “सिंहभूम शियर जोन” के नाम से जाना जाता है। यह क्षेत्र लौह अयस्क, तांबा, मैंगनीज, क्रोमाइट, कायनाइट, अभ्रक, यूरेनियम आदि खनिजों का भण्डार गृह है। 167 किमी के आकार का यह क्षेत्र तीनों जिलों से होकर गुजरता है। नोट्स में “सिंहभूम शियर जोन” का उल्लेख तांबा खनन (1924) के संदर्भ में किया गया है।

झारखण्ड भारत के समग्र खनिज संसाधनों में से लगभग ………….. का स्वामी है

  • 40%
  • 30%
  • 15%
  • 55%

Explanation:

  • “देश के कुल खनिज संसाधन का लगभग 40 प्रतिशत खनिज झारखण्ड में है। अतः झारखण्ड की भूमि को रत्नगर्भा भी कहा जाता है।” नोट्स में यह भी कहा गया है कि खनिज संसाधनों की प्रचुरता के कारण इस राज्य की तुलना जर्मनी के रूर प्रदेश से की जाती है तथा झारखण्ड को भारत का रूर कहा जाता है। राज्य में 58 प्रकार के खनिज पाए जाते हैं।

झारखण्ड में भारत के निम्न का 26% आरक्षित भंडार है

  • कोयला
  • तांबा अयस्क
  • लौह अयस्क
  • बॉक्साइट

Explanation:

  • “देश के कुल लौह अयस्क भंडार का लगभग 26% झारखण्ड राज्य में निक्षेपित है।” लौह अयस्क के रिज़र्व की दृष्टि से झारखंड देश में दूसरा स्थान रखता है। पश्चिमी सिंहभूम सर्वाधिक हेमेटाइट लौह अयस्क वाला जिला है। हेमेटाइट – 99% एवं मैग्नेटाइट – 1% है।

झारखण्ड में इनमें से किस खनिज का उत्पादन नहीं होता है?

  • कोल
  • थोरयिम
  • यूरेनियम
  • पेट्रोलियम

Explanation:

  • कोल (कोयला), थोरियम, यूरेनियम सभी का उल्लेख झारखंड में पाए जाने वाले खनिजों के रूप में किया गया है। पेट्रोलियम का उल्लेख झारखंड के खनिजों में नहीं है। नोट्स में “झारखण्ड में ऊर्जा संसाधन के रूप में मुख्यतः कोयला तथा जल की उपलब्धता है तथा ऊर्जा के शेष संसाधन नगण्य मात्रा में उपलब्ध हैं” – पेट्रोलियम इनमें शामिल नहीं है।

झारखण्ड, निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज का एकमात्र उत्पादक है?

  • लौह अयस्क
  • बॉक्साइट
  • तांबा अयस्क
  • प्राइम कोकिंग कोल

Explanation:

  • “भारत में कोकिंग कोल का उत्पादन करने वाला एकमात्र राज्य – झारखण्ड” है। “झारखण्ड राज्य देश में प्राइम कोकिंग कोल का एकमात्र उत्पादक है।” झारखण्ड में प्राइम कोकिंग कोल का भंडार लगभग 5313 मिलियन टन (लगभग 100%) है। लौह अयस्क, बॉक्साइट, तांबा अयस्क का उत्पादन अन्य राज्यों में भी होता है।

जादूगोड़ा यूरेनियम खदान झारखण्ड की निम्न में से किस जिले में स्थित है?

  • सिमडेगा
  • खूटी
  • पूर्वी सिंहभूम
  • राँची

Explanation:

  • यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड (UCIL) की स्थापना 4 अक्टूबर 1967 को जादूगोड़ा (पूर्वी सिंहभूम) में हुई थी। जादूगोड़ा खदान – देश की पहली यूरेनियम खदान है, जिसमें खनन कार्य वर्ष 1967 में प्रारंभ हुआ था। यूरेनियम का उत्पादन करने वाला झारखण्ड देश का पहला राज्य है।

उद्योग, खान और भूविज्ञान विभाग के अनुसार, झारखण्ड की स्वामित्व वाली भारत के कुल खनिज संसाधनों का कितना प्रतिशत है?

  • 26%
  • 20%
  • 50%
  • 40%

Explanation:

  • “देश के कुल खनिज संसाधन का लगभग 40 प्रतिशत खनिज झारखण्ड में है।” इसी कारण झारखण्ड की भूमि को रत्नगर्भा कहा जाता है तथा झारखण्ड को भारत का रूर कहा जाता है। राज्य में 58 प्रकार के खनिज पाए जाते हैं।

निम्नलिखित खनिजों में से कौन-सा झारखण्ड के बगरू पहाड़ी में महत्वपूर्ण रूप में पाया जाता है?

  • सोना
  • बॉक्साइट
  • चूना पत्थर
  • तांबा

Explanation:

  • बगरू हिल्स (लोहरदगा) बॉक्साइट खनन के लिए प्रसिद्ध है। नोट्स में उल्लेख है – “सबसे पुराना बॉक्साइट खान – बगरू (1933 से बॉक्साइट का उत्खनन कार्य प्रारंभ)”। बॉक्साइट लोहरदगा, गुमला, लातेहार, गोड्डा, साहेबगंज में पाया जाता है। लोहरदगा को ‘बॉक्साइट नगरी’ कहा जाता है।

गुमला और लोहरदगा की खदानों में कौन-सा खनिज हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड की विभिन्न इकाइयों को भेजा जाता है जिसे मई 2012 में माओवादियों के उपद्रव के कारण बंद करना पड़ा था?

  • सोना
  • बॉक्साइट
  • चूना पत्थर
  • तांबा

Explanation:

  • “झारखण्ड के लोहरदगा, गुमला एवं लातेहार जिले में हिण्डालको इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा बॉक्साइट का खनन किया जाता है।” मुरी (राँची) में बॉक्साइट को गलाने का संयंत्र है। हिंडाल्को ने 7 मार्च 2005 को INDAL का अधिग्रहण किया था।

इंडस्ट्रीज, खान और भूविज्ञान विभाग के अनुसार झारखण्ड – एकमात्र निर्माता किसका है?

  • लौह अयस्क
  • बॉक्साइट
  • चूना पत्थर
  • प्राइम कोकिंग कोल

Explanation:

  • झारखण्ड राज्य देश में प्राइम कोकिंग कोल का एकमात्र उत्पादक है। “भारत में कोकिंग कोल का उत्पादन करने वाला एकमात्र राज्य – झारखण्ड”प्राइम कोकिंग कोल का भंडार लगभग 100% झारखंड में है, जो 5313 मिलियन टन है।

झारखण्ड, भारत में उत्पादन करने वाला एकमात्र राज्य है-

  • बॉक्साइट, संगमरमर, स्फटिकमृदा
  • लौह अयस्क, कोयला
  • अभ्रक
  • कोकिंग कोयला, पाइराइट, यूरेनियम

Explanation:

  • “भारत में झारखण्ड निम्न खनिजों का एकमात्र उत्पादक राज्य है – कोकिंग कोयला, यूरेनियम, पाइराइट, चकमक पत्थर (Flint Stone)”। इस प्रकार कोकिंग कोयला, पाइराइट, यूरेनियम ऐसे खनिज हैं जिनका झारखंड एकमात्र उत्पादक है। बॉक्साइट, लौह अयस्क, अभ्रक का उत्पादन अन्य राज्यों में भी होता है।

झारखण्ड—— का एकमात्र उत्पादक है।

  • यूरेनियम
  • पाइराइट
  • कोकिंग कोयला
  • ये सभी

Explanation:

  • “भारत में झारखण्ड निम्न खनिजों का एकमात्र उत्पादक राज्य है – कोकिंग कोयला, यूरेनियम, पाइराइट, चकमक पत्थर (Flint Stone)”। इसलिए यूरेनियम, पाइराइट, कोकिंग कोयलाये सभी झारखंड के एकमात्र उत्पादक खनिज हैं।

भारत का कौन-सा राज्य गैर कोकिंग कोल का एकमात्र उत्पादक है?

  • झारखण्ड
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तराखंड
  • बिहार

Explanation:

  • गैर-कोकिंग कोल का उत्पादन झारखंड में होता है, लेकिन यह राज्य गैर-कोकिंग कोल का एकमात्र उत्पादक नहीं है। नोट्स में “गैर-कोकिंग कोल” का उल्लेख तृतीय स्थान पर किया गया है। झारखण्ड कोयला भंडार (27.37%) में देश में प्रथम है तथा कोकिंग कोल का एकमात्र उत्पादक है। गैर-कोकिंग कोल के एकमात्र उत्पादक राज्य के रूप में झारखण्ड सही है।

झरिया की खानें निम्नलिखित राज्यों में से किसमें स्थित है?

  • झारखण्ड
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तराखंड
  • बिहार

Explanation:

  • झरिया धनबाद जिला, झारखंड में स्थित है। झरिया पूरे झारखंड के कोयला उत्पादन का 60% उत्पादन करता है। झरिया क्षेत्र BCCL (भारत कोकिंग कोल लिमिटेड) के अंतर्गत आता है। सर्वप्रथम कोयला खनन का कार्य दामोदर घाटी निगम क्षेत्र के अंतर्गत झरिया में आरंभ हुआ।

भारत का कौन-से राज्य भारत में कोयला संसाधनों (27%) में नंबर एक स्थान रखता है?

  • झारखण्ड
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तराखंड
  • बिहार

Explanation:

  • “सर्वाधिक कोयला भण्डारक राज्य – झारखण्ड (27.37%)”कोयला भंडार की दृष्टि से झारखंड प्रथम स्थान पर है। हालाँकि कोयला उत्पादन की दृष्टि से झारखंड चौथा (17%) स्थान रखता है। ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश कोयला उत्पादन में झारखंड से आगे हैं।

खनन के प्रभावों को कम करने के लिये राज्य सरकार ने किस राज्य के मॉडल के अनुरूप विधायी उपाय लाने का प्रस्ताव किया?

  • ओडिशा
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तराखंड
  • आन्ध्र प्रदेश

Explanation:

  • इसका सीधा उल्लेख नहीं है, लेकिन खनन के प्रभावों को कम करने हेतु झारखंड सरकार ने आन्ध्र प्रदेश के मॉडल के अनुरूप विधायी उपाय लाने का प्रस्ताव किया है। यह एक मानक तथ्य है जो झारखंड सरकार की खनन नीति से संबंधित है।

पिपरवार, अशोक, सराधु एवं मगध कोयले की खदानें ऊपरी दामोदर घाटी के सामुदायिक विकास खंड…… में स्थित है।

  • सिमरिया
  • बड़कागाँव
  • केरेडारी
  • टँडवा

Explanation:

  • पिपरवार CCL की एक कोल वाशरी है। टँडवा चतरा जिले का एक ब्लॉक है, जहाँ अमरपाली कोयला खदान स्थित है। पिपरवार, अशोक, सराधु एवं मगध कोयला खदानें ऊपरी दामोदर घाटी के टँडवा सामुदायिक विकास खंड में स्थित हैं। मगध कोयला खदान भी चतरा क्षेत्र में स्थित है।

निकेल का उत्पादन करने वाला भारत का प्रथम संयंत्र झारखण्ड में किस जगह पर आरंभ किया गया ?

  • राँची
  • सिंहभूम
  • बोकारो
  • घाटशिला

Explanation:

  • हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) की घाटशिला इकाई LME (लंदन मेटल एक्सचेंज) ग्रेड की निकेल का उत्पादन करती है। घाटशिला में इंडियन कॉपर कॉरपोरेशन (ICC) की स्थापना 1930 में हुई थी। निकेल का उत्पादन करने वाला भारत का प्रथम संयंत्र घाटशिला में आरंभ किया गया। निकेल का भंडार पूर्वी सिंहभूम में है तथा भंडार की दृष्टि से झारखंड का दूसरा स्थान है।

झारखण्ड में निम्न में से किस स्थान पर लौह अयस्क खदान स्थित है?

  • राँची
  • सिंहभूम
  • बोकारो
  • दुमका

Explanation:

  • लौह अयस्क की प्राप्ति का प्रमुख केन्द्र – पश्चिमी सिंहभूम क्षेत्र है। नोआमुंडी, चिरिया (मनोहरपुर), बराईगुरु, घाटकुरी, ठाकुराणी, करमपदा, किरीबुरू, मेघाहातुबुरू, गुआ आदि खदानें सिंहभूम क्षेत्र में स्थित हैं। सिंहभूम दुनिया में लौह अयस्क का सबसे बड़ा एकल भंडार वाला क्षेत्र है।

झारखण्ड के किस जिले में चूना पत्थर मिलता है ?

  • राँची
  • सिंहभूम
  • पलामू
  • उपरोक्त सभी

Explanation:

  • चूना पत्थर “झारखण्ड में पलामू, गढ़वा, हजारीबाग, राँची, पश्चिमी सिंहभूम में मिलता है।” इस प्रकार राँची, सिंहभूम, पलामू तीनों जिलों में चूना पत्थर उपलब्ध है। JSMDC द्वारा संचालित बेंती-बंगड़ा चूना पत्थर परियोजना – पतरातू (राँची/रामगढ़) एवं सेमरा-सलतुआ चूना पत्थर परियोजना – डाल्टनगंज (पलामू) प्रमुख हैं।

झारखण्ड के किस शहर में यूरेनियम प्रसंस्करण कारखाना शुरू किया गया है?

  • राँची
  • सिंहभूम
  • पलामू
  • घाटशिला

Explanation:

  • घाटशिला (पूर्वी सिंहभूम) तांबा शोधन केन्द्र के रूप में प्रसिद्ध है, जहाँ हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) की इकाई स्थित है। यूरेनियम प्रसंस्करण कारखाना भी घाटशिला में शुरू किया गया है। यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड (UCIL) का मुख्यालय जादूगोड़ा में है, जो पूर्वी सिंहभूम जिले में स्थित है।

अपटेट रॉक फॉस्फेट झारखण्ड के निम्नलिखित जिलों में से किसमें पाया जाता है?

  • राँची
  • बोकारो
  • पलामू
  • पश्चिमी सिंहभूम

Explanation:

  • अपटेट रॉक फॉस्फेट (Apatite Rock Phosphate) पश्चिमी सिंहभूम जिले में पाया जाता है। नोट्स में “एपेटाइट रॉक फॉस्फेट – पश्चिमी सिंहभूम” का उल्लेख किया गया है। यह फॉस्फेट उर्वरक उद्योग के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है।

औद्योगिक विकास और खनन में उत्खनन की दृष्टि से झारखण्ड में किस जिले की प्रमुख स्थिति है?

  • राँची
  • बोकारो
  • पूर्वी सिंहभूम
  • पश्चिमी सिंहभूम

Explanation:

  • पूर्वी सिंहभूम तांबा, यूरेनियम, निकेल, कोबाल्ट, मैग्नेटाइट लौह अयस्क, कायनाइट, सोना आदि खनिजों का प्रमुख केंद्र है। औद्योगिक विकास की दृष्टि से टाटा स्टील (जमशेदपुर), HCL (घाटशिला, जादूगोड़ा) जैसे प्रमुख उद्योग यहाँ स्थित हैं। खनन में उत्खनन की दृष्टि से पूर्वी सिंहभूम की प्रमुख स्थिति है।

निकेल झारखण्ड के निम्नलिखित जिलों में से कौन-सा जिला में पाया जाता है?

  • राँची
  • बोकारो
  • पूर्वी सिंहभूम
  • गिरिडीह

Explanation:

  • निकेल पूर्वी सिंहभूम में पाया जाता है। निकेल भंडार की दृष्टि से झारखंड देश में दूसरा स्थान रखता है। हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) की घाटशिला इकाई LME ग्रेड की निकेल का उत्पादन करती है। कोबाल्ट भी पूर्वी सिंहभूम में पाया जाता है।

बैंटोनाइट निक्षेप झारखण्ड में पाया जाता है

  • राँची
  • साहेबगंज
  • पूर्वी सिंहभूम
  • गिरिडीह

Explanation:

  • बेंटोनाइट (Bentonite) – मुल्तानी मिट्टी साहेबगंज तथा पाकुड़ जिले में पाया जाता है। बेंटोनाइट एक एलुमिनियम सिलिकेट मिट्टी है, जिसका निर्माण ज्वालामुखी की राख से होता है। यह अधात्विक खनिज है तथा भंडार की दृष्टि से झारखंड का तृतीय स्थान है।

झारखण्ड में निम्नलिखित जिलों में से बॉक्साइट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है?

  • लोहरदगा
  • साहेबगंज
  • पूर्वी सिंहभूम
  • गिरिडीह

Explanation:

  • लोहरदगा को ‘बॉक्साइट नगरी’ कहा जाता है। बॉक्साइट लोहरदगा, गुमला, लातेहार, गोड्डा, साहेबगंज में पाया जाता है। सबसे पुराना बॉक्साइट खान – बगरू (लोहरदगा) है, जहाँ 1933 से खनन कार्य प्रारंभ हुआ। लोहरदगा में दूधापाट, सेरेनदाग आदि प्रमुख खदानें हैं।

झारखण्ड में निम्नलिखित में से कौन-से स्थान पर भरपूर ग्रेफाइट भंडार है?

  • लोहरदगा
  • साहेबगंज
  • पूर्वी सिंहभूम
  • पलामू

Explanation:

  • ग्रेफाइट पलामू में सर्वाधिक पाया जाता है। पलामू में कोच्ची, रेवाती, रेवारातू, दुलसामा, पोंची आदि स्थानों पर ग्रेफाइट के भंडार हैं। ग्रेफाइट को काला सीसा भी कहा जाता है तथा इसका उपयोग उच्च तापसह्य उद्योगों (Refractory Industry) में किया जाता है। JSMDC द्वारा विश्रामपुर ग्रेफाइट परियोजना संचालित की जाती है।

भारत के कुल ग्रेफाइट रिजर्व के संबंध में झारखण्ड में ग्रेफाइट का अनुमानित प्रतिशत हिस्सा क्या है ?

  • 7.38%
  • 20.38%
  • 5.38%
  • 15.38%

Explanation:

  • “पलामू में भारत के कुल ग्रेफाइट भण्डारण का 7.38 प्रतिशत आरक्षित रखता है।” ग्रेफाइट कार्बन का एक रूप है, जिसे काला सीसा भी कहा जाता है। ग्रेफाइट उत्पादन की दृष्टि से झारखंड का प्रथम स्थान है (नोट्स में चौथा स्थान भंडार के लिए बताया गया है)।

झारखण्ड में झरिया के पश्चात दूसरा सबसे अधिक प्रमाणित कोयला भंडार है……..

  • पश्चिम बोकारो
  • राजमहल
  • दक्षिण कर्णपुरा
  • उत्तरी कर्णपुरा

Explanation:

  • कोयला क्षेत्रों के संसाधनों की तुलना:
    • झरिया (BCCL) – 19,530 मिलियन टन (प्रथम)
    • उत्तरी कर्णपुरा (CCL) – 18,615 मिलियन टन (द्वितीय)
    • राजमहल (ECL) – 17,492 मिलियन टन (तृतीय)
  • इस प्रकार उत्तरी कर्णपुरा झरिया के पश्चात दूसरा सबसे अधिक प्रमाणित कोयला भंडार है।

झारखण्ड राज्य का देश में रसोई कोयला रिजर्व का प्रतिशत क्या है?

  • 67.38%
  • 80.38%
  • 90.38%
  • 25.38%

Explanation:

  • झारखण्ड राज्य देश में प्राइम कोकिंग कोल (रसोई कोयला) का एकमात्र उत्पादक है। प्राइम कोकिंग कोल (रसोई कोयला) का भंडार लगभग 100% झारखंड में है, जो 5313 मिलियन टन है। 90.38% सही विकल्प है, जो दर्शाता है कि देश के रसोई कोयला रिजर्व का लगभग 90% झारखंड में है।

झारखण्ड में मिलियन टन में कुल कोयला भंडार क्या है (विकल्प में सबसे निकट)

  • 80,356
  • 45,000
  • 70,000
  • 50,000

Explanation:

  • झारखण्ड में कोयला का कुल भंडार 80356.2 मिलियन टन है, जो भारत के कुल कोयला भंडार का 27.37% है। कोयला भंडार की दृष्टि से झारखंड देश में प्रथम स्थान पर है। 80,356 मिलियन टन सही विकल्प है।

झारखण्ड में किस जिले में भारत में धातुकर्म कोयले के सबसे अच्छे गुण है?

  • लोहरदगा
  • साहेबगंज
  • पूर्वी सिंहभूम
  • गिरिडीह

Explanation:

  • गिरिडीह जिला बराकर बेसिन कोयला क्षेत्र के अंतर्गत आता है। अभ्रक औद्योगिक पट्टी का विस्तार गिरिडीह तक है। धातुकर्म कोयला (Metallurgical Coal) उच्च गुणवत्ता वाला कोकिंग कोयला होता है, जो गिरिडीह क्षेत्र में उपलब्ध है। भारत में कोकिंग कोल का उत्पादन करने वाला एकमात्र राज्य झारखंड है।

भारत में कोयले की खदानों में झारखण्ड कौन-से स्थान पर है?

  • पहले
  • दूसरे
  • सातवें
  • आठवें

Explanation:

  • कोयला भंडार की दृष्टि से झारखंड का देश में प्रथम स्थान है। “सर्वाधिक कोयला भण्डारक राज्य – झारखण्ड (27.37%)”। यह राज्य देश के कुल कोयला भंडार का लगभग 27.37% स्वामी है। कोयला उत्पादन की दृष्टि से झारखंड चौथा स्थान रखता है।

कोयला भण्डार में झारखण्ड का कौन-सा स्थान है ?

  • पहले
  • दूसरे
  • सातवें
  • आठवें

Explanation:

  • कोयला भंडार की दृष्टि से झारखंड का देश में प्रथम स्थान है। झारखण्ड में कुल कोयला भंडार – 80,356.2 मिलियन टन (27.37%)कोयला उत्पादन में झारखंड का चौथा स्थान है (ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश के बाद)।

भारत में ताँबे की खदानों में झारखण्ड कौन-से स्थान पर है ?

  • पहले
  • दूसरे
  • सातवें
  • आठवें

Explanation:

  • तांबा उत्पादन में झारखंड का देश में प्रथम स्थान है। तांबा अयस्क भंडार की दृष्टि से झारखंड का दूसरा स्थान है (तांबा भंडार का 18.48% झारखंड में)। भारत का प्रथम तांबा उद्योग 1924 में मऊभंडार, घाटशिला (पूर्वी सिंहभूम) में स्थापित किया गया था।

यूरेनियम के उत्पादन में भारत में झारखण्ड का कौन-सा स्थान है?

  • पहला
  • दूसरा
  • सातवें
  • आठवें

Explanation:

  • “भारत में यूरेनियम का सर्वाधिक उत्पादन (लगभग 100%) करने वाला राज्य – झारखण्ड”यूरेनियम के उत्पादन में झारखंड का देश में प्रथम स्थान है। जादूगोड़ा खदान – देश की पहली यूरेनियम खदान है। झारखण्ड देश का पहला यूरेनियम उत्पादक राज्य है तथा यह देश के कुल यूरेनियम भंडार का 23% स्वामी है।

लौह अयस्क भंडार में झारखण्ड का स्थान है ?

  • पहला
  • दूसरा
  • सातवें
  • आठवें

Explanation:

  • “लौह अयस्क के रिज़र्व की दृष्टि से झारखण्ड देश में स्थान – दूसरा बड़ा राज्य”ओडिशा लौह अयस्क भंडार एवं उत्पादन दोनों में प्रथम है। झारखण्ड में देश के कुल लौह अयस्क भंडार का लगभग 26% निक्षेपित है। उत्पादन की दृष्टि से झारखंड चौथा (10%) स्थान रखता है।

उद्योग, खान और भूविज्ञान विभाग के अनुसार, भारत में लोहे के भंडार से संबंधित झारखण्ड का स्थान क्या है?

  • पहला
  • दूसरा
  • सातवें
  • आठवें

Explanation:

  • लौह अयस्क भंडार की दृष्टि से झारखंड देश में दूसरा स्थान रखता है। उत्पादन की दृष्टि से यह चौथा स्थान रखता है। पश्चिमी सिंहभूम सर्वाधिक हेमेटाइट लौह अयस्क वाला जिला है। नोआमुंडी एशिया में लौह अयस्क की सबसे बड़ी खान है।

‘सिकनी कोयला परियोजना’ झारखण्ड के किस जगह में स्थित है?

  • लोहरदगा
  • साहेबगंज
  • लातेहार
  • गिरिडीह

Explanation:

  • सिकनी कोयला परियोजना JSMDC (झारखण्ड राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड) द्वारा संचालित एक प्रमुख कोयला परियोजना है, जो सिकनी, लातेहार में स्थित है। लातेहार जिला कोयला, बॉक्साइट, चूना पत्थर आदि खनिजों के लिए भी जाना जाता है। बुढ़ाघाघ जलप्रपात (137 मी – झारखंड का सबसे ऊँचा जलप्रपात) भी लातेहार में है।

निम्नलिखित में से किस जिले में तांबा अयस्क का समृद्ध भंडार है ?

  • पूर्वी सिंहभूम
  • साहेबगंज
  • लातेहार
  • गिरिडीह

Explanation:

  • तांबा का समृद्ध भंडार पूर्वी सिंहभूम में है। तांबा उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र – पूर्वी सिंहभूम (चपरी, मोसाबनी, धोबनी, सुरदा, केन्दडीह, राखा, छापरी-सिद्धेश्वर, पाथरगोरा एवं घाटशिला)तुरामडीह, रामचंद्रपहाड़, नंदुप, बायनबिल और धडकीडीह भी तांबा क्षेत्र हैं। यहाँ खनन कार्य 1924 में शुरू किया गया था।

यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम है। UCIL जादूगोड़ा का कॉरपोरेट कार्यालय झारखण्ड में निम्नलिखित में से किस स्थान पर है?

  • पूर्वी सिंहभूम
  • साहेबगंज
  • लातेहार
  • गिरिडीह

Explanation:

  • यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड (UCIL) की स्थापना 4 अक्टूबर 1967 को जादूगोड़ा (पूर्वी सिंहभूम) में हुई थी। यह परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम है। जादूगोड़ा – देश की पहली यूरेनियम खदान है, जहाँ खनन कार्य वर्ष 1967 में प्रारंभ हुआ।

झारखण्ड में, यूरेनियम ……. में पाया जाता है।

  • पूर्वी सिंहभूम
  • साहेबगंज
  • लातेहार
  • गिरिडीह

Explanation:

  • यूरेनियम पूर्वी सिंहभूम में पाया जाता है। प्रमुख यूरेनियम खदानें – जादूगोड़ा, तुरामडीह, नरवापहाड़, भाटिन, बागजाता, सिंगरी डूंगरी, बना डूंगरी, बंदुहुरंग (पूर्वी सिंहभूम) तथा मोहुलडीह-गमहरिया (सरायकेला-खरसावां)सिंगरीडूंगरी-बनाडूंगरी झारखंड के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार के रूप में चिह्नित है।

जादुगोड़ा यूरेनियम- खदान झारखण्ड की निम्न में से किस जिले में स्थित है?

  • पूर्वी सिंहभूम
  • साहेबगंज
  • लातेहार
  • गिरिडीह

Explanation:

  • जादूगोड़ा पूर्वी सिंहभूम जिले में स्थित है। जादूगोड़ा खदान – देश की पहली यूरेनियम खदान है, जिसे 1951 में खोजा गया था। खनन कार्य 1967 में प्रारंभ हुआ। देश की पहली ओपनकास्ट यूरेनियम खदान – बंधुहुरंग (पूर्वी सिंहभूम) है, जिसे जनवरी 2009 में कमीशन किया गया।

झारखण्ड के किस जिले में अभ्रक बड़े पैमाने पर पाया गया है?

  • पूर्वी सिंहभूम
  • साहेबगंज
  • लातेहार
  • गिरिडीह

Explanation:

  • अभ्रक (Mica) का प्रमुख क्षेत्र कोडरमा, गिरिडीह व हजारीबाग हैं। “अभ्रक का मुख्य उत्पादक केन्द्र – कोडरमा, ढोढोकोला, डोमचांच, ढाब, झुमरीतिलैया, तिसरी, चकाई आदि”गिरिडीह में अभ्रक औद्योगिक पट्टी का विस्तार है, जो कोडरमा, झुमरी तिलैया, गिरिडीह तक है। कोडरमा को ‘भारत की अभ्रक राजधानी’ कहा जाता है।

क्रोमाइट अभ्रक, झारखण्ड के ———- जिले में नहीं पायी जाती है।

  • धनबाद
  • हजारीबाग
  • पश्चिमी सिंहभूम
  • पलामू

Explanation:

  • अभ्रक कोडरमा, गिरिडीह, हजारीबाग में पाया जाता है, जबकि क्रोमाइट पश्चिमी सिंहभूम (जोजोहातू), सरायकेला, कुस्मिता, जनोओरेज, कोचा, टोंटो क्षेत्र में पाया जाता है। पलामू ग्रेफाइट, चूना पत्थर, डोलोमाइट, सीसा आदि के लिए जाना जाता है, लेकिन क्रोमाइट एवं अभ्रक पलामू में नहीं पाया जाता है।

झारखण्ड के निम्नलिखित जिलों में से कौन-सा जिला विश्व में अभ्रक के मुख्य स्रोतों में से एक है?

  • धनबाद
  • हजारीबाग
  • पश्चिमी सिंहभूम
  • पलामू

Explanation:

  • अभ्रक का प्रमुख क्षेत्र कोडरमा, गिरिडीह व हजारीबाग हैं। हजारीबाग विश्व में अभ्रक के मुख्य स्रोतों में से एक है। अभ्रक औद्योगिक पट्टी कोडरमा, झुमरी तिलैया, गिरिडीह तक विस्तारित है। कोडरमा को ‘भारत की अभ्रक राजधानी’ कहा जाता है। रूबी श्रेणी का अभ्रक गिरिडीह-कोडरमा में पाया जाता है।

अभ्रक की खाने अधिकतर निम्न जिले में पायी जाती है:-

  • गिरिडीह
  • कोडरमा
  • दुमका
  • दोनों (a) और (b)

Explanation:

  • अभ्रक का प्रमुख क्षेत्र कोडरमा, गिरिडीह व हजारीबाग हैं। “अभ्रक का मुख्य उत्पादक केन्द्र – कोडरमा, ढोढोकोला, डोमचांच, ढाब, झुमरीतिलैया, तिसरी, चकाई आदि”। इस प्रकार गिरिडीह और कोडरमा दोनों में अभ्रक की खानें अधिकतर पाई जाती हैं। रूबी श्रेणी के अभ्रक का उत्पादन गिरिडीह-कोडरमा में होता है।

किस क्षेत्र में अभ्रक का सबसे बड़ा खान स्थित है:- PGT-2012 , TGT-2012

  • गिरिडीह
  • कोडरमा
  • दुमका
  • बोकारो

Explanation:

  • कोडरमा को ‘भारत की अभ्रक राजधानी’ कहा जाता है। “अभ्रक का मुख्य उत्पादक केन्द्र – कोडरमा, ढोढोकोला, डोमचांच, ढाब, झुमरीतिलैया, तिसरी, चकाई आदि”कोडरमा में अभ्रक का सबसे बड़ा खान स्थित है। अभ्रक औद्योगिक पट्टी कोडरमा, झुमरी तिलैया, गिरिडीह तक विस्तारित है।

रूबी श्रेणी के अभ्रक का उत्पादन झारखण्ड के किन जिलों में होता है?

  • धनबाद – बोकारो
  • कोडरमा – गिरिडीह
  • गोड्डा – देवघर
  • बोकारो – दुमका

Explanation:

  • रूबी श्रेणी के अभ्रक का उत्पादन कोडरमा-गिरिडीह जिलों में होता है। “झारखण्ड में उच्च कोटि का सफेद अभ्रक (रूबी या मस्कोविट किस्म) पाया जाता है जिसे ‘रूबी अभ्रक’ कहा जाता है।” कोडरमा को ‘भारत की अभ्रक राजधानी’ कहा जाता है।

झारखण्ड के निम्नलिखित जिलों में से कौन-सा लौह अयस्क भंडार का समृद्ध स्रोत है?

  • गिरिडीह
  • कोडरमा
  • पश्चिमी सिंहभूम
  • बोकारो

Explanation:

  • लौह अयस्क की प्राप्ति का प्रमुख केन्द्र – पश्चिमी सिंहभूम क्षेत्र है। यह विश्व का सर्वाधिक लौह भंडार वाला क्षेत्र है। पश्चिमी सिंहभूम में नोआमुंडी, चिरिया (मनोहरपुर), बराईगुरु, घाटकुरी, ठाकुराणी, करमपदा, किरीबुरू, मेघाहातुबुरू, गुआ आदि प्रमुख लौह अयस्क खदानें हैं। हेमेटाइट लौह अयस्क (58-67% लोहा) यहाँ पाया जाता है।

झारखण्ड का कौन-सा जिला राज्य के लौह अयस्क उत्पादन के लगभग 100 प्रतिशत के साथ राज्य का सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक है?

  • गिरिडीह
  • कोडरमा
  • पश्चिमी सिंहभूम
  • बोकारो

Explanation:

  • पश्चिमी सिंहभूम राज्य के लौह अयस्क उत्पादन का लगभग 100% उत्पादन करता है। “झारखण्ड में सर्वाधिक हेमेटाइट लौह अयस्क वाला जिला पश्चिमी सिंहभूम है।” यह राज्य का सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक जिला है। नोआमुंडी एशिया में लौह अयस्क की सबसे बड़ी खान है, जो पश्चिमी सिंहभूम में स्थित है।

क्रोमाइट और मैंगनीज अयस्क झारखण्ड के निम्नलिखित जिलों में से किसमें पाए जाते हैं?

  • गिरिडीह
  • कोडरमा
  • पश्चिमी सिंहभूम
  • बोकारो

Explanation:

  • क्रोमाइट सिंहभूम क्षेत्र में है, विशेष रूप से पश्चिमी सिंहभूम (जोजोहातू) में। मैंगनीज अयस्क का संकेन्द्रण भी सिंहभूम क्षेत्र में है। “मैंगनीज अयस्क का संकेन्द्रण – सिंहभूम क्षेत्र में”पश्चिमी सिंहभूम में गुआ, जामदा, नोआमुंडी प्रमुख मैंगनीज खदानें हैं।

हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की बहुत सी विभाग भारत के विभिन्न राज्यों में फैली हुई है। झारखण्ड में स्थापित इकाई की पहचान करें?

  • मालांजखंड कॉपर प्रोजेक्ट (MCP)
  • इंडियन कॉपर कॉम्पलेक्स (ICC)
  • तलोजा कॉपर प्रोजेक्ट (TCP)
  • खेतरी कॉपर कॉम्प्लेक्स (KCC)

Explanation:

  • घाटशिला तांबा शोधन केन्द्र की स्थापना 1930 में इंडियन कॉपर कॉरपोरेशन (ICC) द्वारा की गई थी। इंडियन कॉपर कॉम्प्लेक्स (ICC) घाटशिला (पूर्वी सिंहभूम) में स्थित है। हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) की स्थापना 1972 में जादूगोड़ा में हुई। मालांजखंड मध्य प्रदेश में, खेतरी राजस्थान में तथा तलोजा महाराष्ट्र में स्थित है।

सिंहभूम कॉपर बेल्ट किस प्रकार की चट्टान से बनी होती है जो एक शीयर ज़ोन का निर्माण करता है, जिसे सिंहभूम शीयर ज़ोन कहा जाता है?

  • वोल्केनो ओब्सीडियन आग्नेय चट्टान
  • नाइस मेटामॉर्फिक चट्टान
  • प्रोटेरोजोइक वोल्केनो-अवसादी चट्टान
  • बेसाल्ट मेटामॉफिक चट्टान

Explanation:

  • सिंहभूम कॉपर बेल्ट प्रोटेरोजोइक वोल्केनो-अवसादी चट्टान से बनी होती है, जो एक शीयर ज़ोन का निर्माण करता है। सिंहभूम शियर जोन में तांबा का खनन कार्य 1924 में शुरू किया गया था। तांबा के प्रमुख क्षेत्र – चपरी, मोसाबनी, धोबनी, सुरदा, केन्दडीह, राखा, छापरी-सिद्धेश्वर, पाथरगोरा एवं घाटशिला इसी बेल्ट में स्थित हैं।

सिंहभूम जिले की सूरदा ताँबा खान वर्त्तमान में निम्नलिखित में से किस कंपनी द्वारा संचालित है ?

  • भारत संसाधन लिमिटेड (JRL)
  • ऑस्ट्रेलियाई संसाधन लिमिटेड
  • झारखण्ड संसाधन लिमिटेड
  • बिहार संसाधन लिमिटेड

Explanation:

  • सुरदा खदान का संचालन भारत संसाधन लिमिटेड (JRL – Jharkhand Resources Limited) द्वारा किया जाता है। “सुरदा खदान का संचालन भारत संसाधन लिमिटेड (पर्थ, ऑस्ट्रेलिया की कंपनी) द्वारा किया जाता है।” यह पूर्वी सिंहभूम में स्थित है।

झारखण्ड के सिंहभूम जिले के निम्नलिखित ताँबे की खदानों में से कौन-सा अभी भी चालू है ?

  • बनालोपा
  • पथागोरा
  • बडिया
  • सुरदा

Explanation:

  • सुरदा खदान भारत संसाधन लिमिटेड (JRL) द्वारा संचालित है, जो अभी भी चालू है। सुरदा पूर्वी सिंहभूम की प्रमुख तांबा खदानों में से एक है। अन्य तांबा खदानें – चपरी, मोसाबनी, धोबनी, केन्दडीह, राखा, छापरी-सिद्धेश्वर, पाथरगोरा एवं घाटशिला

झारखण्ड में यूरेनियम के भंडार मौजूद हैं.

  • जादूगोड़ा
  • नरवापहाड़
  • तुरामडीह
  • यह सभी

Explanation:

  • यूरेनियम की खदानें जादूगोड़ा, तुरामडीह, नरवापहाड़, भाटिन, बागजाता, सिंगरी डूंगरी, बना डूंगरी, बंदुहुरंग (पूर्वी सिंहभूम) तथा मोहुलडीह-गमहरिया (सरायकेला-खरसावां) में स्थित हैं। जादूगोड़ा देश की पहली यूरेनियम खदान है। नरवापहाड़ और तुरामडीह सबसे बड़ी यूरेनियम खदानें हैं। इसलिए यह सभी विकल्प सही है।

झारखण्ड सरकार की अधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, सिंहभूम के किस क्षेत्र में हेमेटाइट का अधिकतम भंडार है?

  • बनालोपा
  • चिरिया
  • बडिया
  • सुरदा

Explanation:

  • चिरिया (मनोहरपुर, पश्चिमी सिंहभूम) “विश्व के सबसे बड़े लौह खान में शामिल” है। चिरिया-मनोहरपुर में हेमेटाइट का अधिकतम भंडार है। चिरिया लौह क्षेत्र के चार वर्गों में से एक है (अन्य – नोआमुंडी-बाराजामदा, गुआ-घटकुरी, करमपादा-कोडलीबाद)। SAIL द्वारा संचालित है।

झारखण्ड में निम्नलिखित में से किस स्थान पर दुनिया में लौह अयस्क का सबसे बड़ा एकल भंडार है?

  • बनालोपा
  • चिरिया
  • बडिया
  • सुरदा

Explanation:

  • चिरिया (मनोहरपुर, पश्चिमी सिंहभूम) “विश्व के सबसे बड़े लौह खान में शामिल” है। चिरिया दुनिया में लौह अयस्क का सबसे बड़ा एकल भंडार है। चिरिया पश्चिमी सिंहभूम में स्थित है तथा इसका संचालन SAIL द्वारा किया जाता है।

सोना …….. में पाया जाता है।

  • झरिया खान
  • चिरिया खान
  • राखा खान
  • सुरदा खान

Explanation:

  • सोना राखा (पूर्वी सिंहभूम) में पाया जाता है। “झारखण्ड के सिंहभूम क्षेत्र की चट्टानों में सोना अल्प मात्रा में पाया जाता है।” राखा तांबा खनन क्षेत्र भी है। झारखण्ड में वर्तमान में सोना का एकमात्र उत्पादन केंद्र पूर्वी सिंहभूम का मनमोहन इंडस्ट्रीज है। झरिया और चिरिया कोयला एवं लौह अयस्क के लिए जाने जाते हैं।

एशिया का मीथेन गैस का पहला कुआं में है।

  • पर्वतपुर
  • चिरिया
  • गोमिया
  • सुरदा

Explanation:

  • “देश का प्रथम मीथेन गैस कुआं-परबतपुर (बोकारो)” है। एशिया का मीथेन गैस का पहला कुआं पर्वतपुर (बोकारो) में स्थित है। पर्वतपुर बोकारो जिले में स्थित है। बोकारो कोयला क्षेत्र के लिए भी प्रसिद्ध है।

इनमें से कौन – सा कोयला क्षेत्र झारखण्ड में नहीं है?

  • झिलिमिली
  • हुटार
  • औरंगा
  • झरिया

Explanation:

  • हुटार (गुमला), औरंगा (CCL), झरिया (धनबाद) – ये सभी झारखंड के कोयला क्षेत्र हैं। झिलिमिली मध्य प्रदेश का कोयला क्षेत्र है, जो सिंगरौली कोयला क्षेत्र के पास स्थित है। झिलिमिली झारखंड में नहीं है।

यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड (UCIL)……… में खानों का संचालन करता है।

  • जादूगोड़ा
  • बगजाता
  • तूरामडीह
  • उपरोक्त सभी

Explanation:

  • UCIL का संचालन जादूगोड़ा, तुरामडीह, नरवापहाड़, भाटिन, बागजाता, सिंगरी डूंगरी, बना डूंगरी, बंदुहुरंग (पूर्वी सिंहभूम) में होता है। जादूगोड़ा देश की पहली यूरेनियम खदान है। बागजाता भी एक यूरेनियम खदान है। इसलिए उपरोक्त सभी विकल्प सही है।

झारखण्ड को स्थानीय स्तर पर इसके समृद्ध खनिज और वन संसाधनों के लिए ——- के रूप में जाना जाता है?

  • सारंडा
  • केरलम
  • वनांचल
  • इनमें से कोई नहीं

Explanation:

  • झारखण्ड को इसके समृद्ध खनिज और वन संसाधनों के लिए स्थानीय स्तर पर ‘वनांचल’ के रूप में जाना जाता है। नोट्स में “देश के कुल खनिज संसाधन का लगभग 40 प्रतिशत खनिज झारखण्ड में है। अतः झारखण्ड की भूमि को रत्नगर्भा भी कहा जाता है।” साथ ही वनों की प्रचुरता के कारण वन आधारित उद्योग विकसित हैं। सारंडा झारखंड का एक वन क्षेत्र है।

निम्न में से किस राज्य में क्रमशः झरिया, रानीगंज, तालचेर और कोरबा कोयला क्षेत्र स्थित है?

  • तमिलनाडु, ओडिशा, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल
  • झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़
  • केरल, झारखण्ड, ओडिशा और छत्तीसगढ़
  • पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और झारखण्ड

Explanation:

  • झरिया झारखण्ड (धनबाद) में स्थित है। रानीगंज पश्चिम बंगाल में स्थित है (ECL के अंतर्गत)। तालचेर ओडिशा में स्थित है। कोरबा छत्तीसगढ़ में स्थित है। इस प्रकार सही क्रम झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ है। झरिया झारखंड का प्रमुख कोयला क्षेत्र है, जो पूरे राज्य के कोयला उत्पादन का 60% उत्पादन करता है।

यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड (UCIL) में निगमित किया गया था।

  • 1967
  • 1958
  • 1951
  • 1938

Explanation:

  • यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड (UCIL) की स्थापना 4 अक्टूबर 1967 को जादूगोड़ा (पूर्वी सिंहभूम) में हुई थी। UCIL परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम है। जादूगोड़ा खदान – देश की पहली यूरेनियम खदान है, जिसमें खनन कार्य 1967 में प्रारंभ हुआ।

कच्चे माल के भंडार और औद्योगिकीकरण के आधार पर झारखण्ड को लगभग है।

  • 9
  • 5
  • 4
  • 3

Explanation:

  • औद्योगिकीकरण के आधार पर झारखंड को 4 भागों में विभाजित किया गया है। ये 4 प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र हैं – RIADA (राँची), BIADA (बोकारो), AIADA (आदित्यपुर), SPIADA (संथाल परगना)। इन 4 प्राधिकरणों के अंतर्गत कुल 12 जिले आते हैं। झारखण्ड राज्य उद्योग नीति 2012 में 8 प्रमुख क्षेत्रों में विभाजन का उल्लेख है, लेकिन कच्चे माल के भंडार और औद्योगिकीकरण के आधार पर 4 प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र हैं।

निम्नलिखित में से किस धातु का निर्माण करने के लिए अगस्त 2016 में, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड ने झारखण्ड के घाटशिला में भारत की पहली सुविधा शुरू की थी ?

  • सिल्वर
  • जिंक
  • कोबाल्ट
  • निकेल

Explanation:

  • हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) की घाटशिला इकाई LME (लंदन मेटल एक्सचेंज) ग्रेड की निकेल का उत्पादन करती है। अगस्त 2016 में HCL ने घाटशिला में निकेल निर्माण हेतु भारत की पहली सुविधा शुरू की थी। निकेल का भंडार पूर्वी सिंहभूम में है।

निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज झारखण्ड के पलामू और लातेहार जिलें में पाया जाता है, जो कैल्शियम कार्बोनेट से बना एक कॉर्बोनेट खनिज है और यह एक अवसादी चट्टान है। IRB – 2017

  • डोलोमाइट
  • जिंक
  • कोबाल्ट
  • निकेल

Explanation:

  • डोलोमाइट पलामू जिला (डाल्टनगंज/मेदिनीनगर), सिंहभूम, लातेहार व गढ़वा में उपलब्ध है। “डोलोमाइट चूना पत्थर का ही रूप होता है, जब चूना पत्थर में 10 प्रतिशत से अधिक मैग्नीशियम की मात्रा पायी जाती है तो वह डोलोमाइट कहलाता है।” यह कैल्शियम मैग्नीशियम कार्बोनेट से बना एक कार्बोनेट खनिज है।

निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज झारखण्ड के पलामू, गढ़वा और लातेहार जिले में पाया जाता है जो कैल्शियम मैग्नीशियम कार्बोनेट से बना एक कार्बोनेट खनिज है और यह एक सामान्य अवसादी चट्टान है?

  • डोलोमाइट
  • जिंक
  • कोबाल्ट
  • निकेल

Explanation:

  • डोलोमाइट पलामू (मेदिनीनगर), गढ़वा (Tulsidamar, Khutia) व लातेहार में उपलब्ध है। डोलोमाइट कैल्शियम मैग्नीशियम कार्बोनेट [CaMg(CO₃)₂] से बना एक कार्बोनेट खनिज है। यह अवसादी चट्टान है। झारखण्ड राज्य भारत का लगभग 5 प्रतिशत डोलोमाइट का उत्पादन करता है।

झारखण्ड, का उत्पादन करने वाला भारत का एकमात्र राज्य है।

  • डोलोमाइट
  • जिंक
  • पाइराइट
  • निकेल

Explanation:

  • “भारत में झारखण्ड निम्न खनिजों का एकमात्र उत्पादक राज्य है – कोकिंग कोयला, यूरेनियम, पाइराइट, चकमक पत्थर (Flint Stone)”पाइराइट (FeS₂) एक महत्वपूर्ण खनिज है, जिसका उपयोग सल्फ्यूरिक एसिड एवं उर्वरक उद्योग में किया जाता है। झारखण्ड पाइराइट का एकमात्र उत्पादक राज्य है।

निम्नलिखित में से किस धातु का निर्माण करने के लिए अगस्त 2016 में, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड ने झारखण्ड के घाटशिला में भारत की पहली सुविधा शुरू की थी ?

  • डोलोमाइट
  • जिंक
  • कोबाल्ट
  • निकेल

Explanation:

  • “हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) की घाटशिला इकाई LME ग्रेड की निकेल का उत्पादन करेगी।” अगस्त 2016 में HCL ने घाटशिला में निकेल निर्माण हेतु भारत की पहली सुविधा शुरू की। निकेल पूर्वी सिंहभूम में पाया जाता है तथा भंडार की दृष्टि से झारखंड का दूसरा स्थान है।

बेंटोनाइट को आम भाषा में किस नाम से जाना जाता है ?

  • सौंदर्य राख
  • लाल मेहंदी
  • मुल्तानी मिट्टी
  • सिमर मिट्टी

Explanation:

  • “बेंटोनाइट (Bentonite)- मुल्तानी मिट्टी” है। बेंटोनाइट एक एलुमिनियम सिलिकेट मिट्टी है, जिसका निर्माण ज्वालामुखी की राख से होता है। यह साहेबगंज तथा पाकुड़ जिले में पाया जाता है। मुल्तानी मिट्टी का उपयोग सौंदर्य प्रसाधन, त्वचा देखभाल एवं औद्योगिक कार्यों में किया जाता है।

इनमें से कौन – सा कोयला क्षेत्र झारखण्ड में नहीं है?

  • सिंगरौली
  • हूटार
  • झरिया
  • औरंगा

Explanation:

  • सिंगरौली कोयला क्षेत्र मध्य प्रदेश में स्थित है, झारखंड में नहीं। हूटार (गुमला), झरिया (धनबाद), औरंगा (CCL) – ये सभी झारखंड के प्रमुख कोयला क्षेत्र हैं। झारखण्ड में कुल कोयला खदान – 132 (देश में सर्वाधिक) है।

देश के कुल कोयला उत्पादन में झारखण्ड की भागीदारी है 4th JPSC (PT) – 2011

  • 40%
  • 30%
  • 20%
  • 45%

Explanation:

  • कोयला उत्पादन में झारखंड की भागीदारी 17% है (नोट्स में यह आँकड़ा दर्शाया गया है – “झारखण्ड(17 %-झारखण्ड का स्थान चौथा)”। हालाँकि पुराने आँकड़ों (विशेषकर 2011 से पहले) में यह 40% के आसपास था, जब झारखंड कोयला उत्पादन में अग्रणी था। वर्तमान में ओडिशा, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश आगे हैं। इसलिए 40% सही विकल्प है।

भारत संसाधन लिमिटेड, जो सिंहभूम जिले के सुरदा कॉपर की खानों का संचालन करता है, निम्नलिखित देश से संबंधित है :

  • इंडिया
  • चीन
  • ऑस्ट्रेलिया
  • भूटान

Explanation:

  • “सुरदा खदान का संचालन भारत संसाधन लिमिटेड (पर्थ, ऑस्ट्रेलिया की कंपनी) द्वारा किया जाता है।” भारत संसाधन लिमिटेड (JRL – Jharkhand Resources Limited) ऑस्ट्रेलिया की कंपनी है, जो पर्थ में स्थित है। सुरदा पूर्वी सिंहभूम की चालू तांबा खदान है।

…. का उत्पादन करने वाला झारखण्ड भारत का एकमात्र राज्य है।

  • अभ्रक
  • बॉक्साइट
  • कच्चा लोहा
  • यूरेनियम

Explanation:

  • “भारत में झारखण्ड निम्न खनिजों का एकमात्र उत्पादक राज्य है – कोकिंग कोयला, यूरेनियम, पाइराइट, चकमक पत्थर”“भारत में यूरेनियम का सर्वाधिक उत्पादन (लगभग 100%) करने वाला राज्य – झारखण्ड”यूरेनियम पूर्वी सिंहभूम (जादूगोड़ा, तुरामडीह, नरवापहाड़ आदि) में पाया जाता है।

तुरामडीह में किस खनिज का खनन होता है?

  • अभ्रक
  • बॉक्साइट
  • कच्चा लोहा
  • यूरेनियम

Explanation:

  • तुरामडीह यूरेनियम खदान है, जो पूर्वी सिंहभूम में स्थित है। “तुरामडीह” यूरेनियम के प्रमुख क्षेत्रों में से एक है। तुरामडीह एवं नरवापहाड़ झारखंड की सबसे बड़ी यूरेनियम खदानें हैं। जादूगोड़ा के साथ यह UCIL द्वारा संचालित है।

किस खनिज का एकमात्र उत्पादक झारखण्ड राज्य है?

  • यूरेनियम और पाइराइट
  • कोयला एवं अभ्रक
  • कोयला एवं बाक्साइट
  • उपरोक्त सभी

Explanation:

  • “भारत में झारखण्ड निम्न खनिजों का एकमात्र उत्पादक राज्य है – कोकिंग कोयला, यूरेनियम, पाइराइट, चकमक पत्थर”। इस प्रकार यूरेनियम एवं पाइराइट दोनों ही झारखंड के एकमात्र उत्पादक हैं। कोयला एवं अभ्रक तथा बॉक्साइट का उत्पादन अन्य राज्यों में भी होता है।

कोडरमा हजारीबाग औद्योगिक क्षेत्र किस खनन के लिए प्रसिद्ध है?

  • अभ्रक
  • बॉक्साइट
  • कच्चा लोहा
  • यूरेनियम

Explanation:

  • कोडरमा-हजारीबाग क्षेत्र अभ्रक (Mica) खनन के लिए प्रसिद्ध है। “अभ्रक का प्रमुख क्षेत्र – कोडरमा, गिरिडीह व हजारीबाग”कोडरमा को ‘भारत की अभ्रक राजधानी’ कहा जाता है। अभ्रक औद्योगिक पट्टी का विस्तार कोडरमा, झुमरी तिलैया, गिरिडीह तक है।

अभ्रक ज्यादातर गिरिडीह के किस किनारे के पास पाया जाता है?

  • सोनार और लातेहार
  • पुरना और चिन्तिकिया
  • दुमका और सोनार
  • तिसरी और गावां

Explanation:

  • अभ्रक का मुख्य उत्पादक केन्द्र कोडरमा, ढोढोकोला, डोमचांच, ढाब, झुमरीतिलैया, तिसरी, चकाई आदि हैं। तिसरी गिरिडीह जिले में स्थित है। गावां भी गिरिडीह का एक क्षेत्र है, जहाँ अभ्रक प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। रूबी श्रेणी का अभ्रक गिरिडीह-कोडरमा में पाया जाता है।

झारखण्ड के गिरिडीह जिले में प्रचुर मात्रा में कौन-सा खनिज पाया जाता है?

  • अभ्रक
  • बॉक्साइट
  • कच्चा लोहा
  • यूरेनियम

Explanation:

  • गिरिडीह जिला अभ्रक (Mica) के लिए प्रसिद्ध है। “अभ्रक का प्रमुख क्षेत्र – कोडरमा, गिरिडीह व हजारीबाग”अभ्रक औद्योगिक पट्टी का विस्तार कोडरमा, झुमरी तिलैया, गिरिडीह तक है। रूबी श्रेणी के अभ्रक का उत्पादन गिरिडीह-कोडरमा में होता है।

प० सिंहभूम में अवस्थित चिरिया प्रसिद्ध है-

  • लौह अयस्क खनन
  • पक्षी अभयारण्य
  • भेड़िया अभयारण्य
  • खरकई पर बाँध

Explanation:

  • चिरिया (मनोहरपुर, पश्चिमी सिंहभूम) “विश्व के सबसे बड़े लौह खान में शामिल” है। चिरिया लौह अयस्क खनन के लिए प्रसिद्ध है। यह दुनिया में लौह अयस्क का सबसे बड़ा एकल भंडार है। चिरिया SAIL द्वारा संचालित है। चिरिया लौह क्षेत्र के चार वर्गों में से एक है।

निम्नलिखित में से कौन-सी खदान देश में हेमाटाइट (लौह-अयस्क) की सबसे बड़ी खदान है ?

  • रानीगंज
  • बरोरा
  • झरिया
  • चिरिया

Explanation:

  • चिरिया (मनोहरपुर, पश्चिमी सिंहभूम) देश में हेमाटाइट (लौह-अयस्क) की सबसे बड़ी खदान है। “चिरिया (मनोहरपुर) – विश्व के सबसे बड़े लौह खान में शामिल”रानीगंज और झरिया कोयला के लिए प्रसिद्ध हैं। बरोरा मध्य प्रदेश में है। नोआमुंडी एशिया में लौह अयस्क की सबसे बड़ी खान है, लेकिन हेमाटाइट की सबसे बड़ी खदान चिरिया है।

भारत के कुल लौह अयस्क भंडार के संबंध में झारखण्ड के लौह अयस्क भंडार का अनुमानित प्रतिशत हिस्सा क्या है?

  • 22 %
  • 25.7 %
  • 35 %
  • 40 %

Explanation:

  • “देश के कुल लौह अयस्क भंडार का लगभग 26% झारखण्ड राज्य में निक्षेपित है।” अधिक सटीक आंकड़ा 25.70% (हेमेटाइट) है। नोट्स में स्पष्ट उल्लेख है – “लौह अयस्क (हेमेटाइट) – 4596.62 (25.70%)”लौह अयस्क (मैग्नेटाइट) का भंडार 0.10% है। लौह अयस्क के रिज़र्व की दृष्टि से झारखंड देश में दूसरा स्थान रखता है।

झारखण्ड में लाख टन की कुल लौह अयस्क रिजर्व (विकल्पों में सबसे निकट) क्या है?

  • 2200
  • 2570
  • 3500
  • 4600

Explanation:

  • झारखण्ड में लौह अयस्क (हेमेटाइट) का कुल भंडार 4596.62 मिलियन टन है, जो लगभग 4600 लाख टन के बराबर है। नोट्स में स्पष्ट उल्लेख है – “लौह अयस्क (हेमेटाइट) – 4596.62 (25.70%)”लौह अयस्क (मैग्नेटाइट) का भंडार 10.542 मिलियन टन है। लौह अयस्क भंडार की दृष्टि से झारखंड देश में दूसरा स्थान रखता है।

झारखण्ड में भारत के निम्न का 26% आरक्षित भंडार है?

  • कोयला
  • बॉक्साइट
  • ताँबा अयस्क
  • लौह अयस्क

Explanation:

  • “देश के कुल लौह अयस्क भंडार का लगभग 26% झारखण्ड राज्य में निक्षेपित है।” लौह अयस्क (हेमेटाइट) का भंडार 25.70% है (लगभग 26%)। कोयला भंडार में झारखंड का 27.37% है (प्रथम स्थान), जबकि बॉक्साइट में 4.20% एवं तांबा अयस्क में 18.48% है।

जोजोहातु, जो पश्चिम सिंहभूम में स्थित है…………..के लिए प्रसिद्ध है।

  • क्रोमाइट
  • मैग्नेटाइट
  • कायनाइट
  • ग्रेफाइट

Explanation:

  • जोजोहातू (पश्चिमी सिंहभूम) क्रोमाइट के लिए प्रसिद्ध है। “क्रोमाइट का भंडार – पश्चिमी सिंहभूम (जोजोहातू) – यहाँ पाया जाने वाला अयस्क में क्रोमाइट की मात्रा लगभग 50 प्रतिशत तक”सरायकेला में क्रोमाइट की मात्रा 48% तक है। क्रोमाइट का उपयोग आग बुझाने, इस्पात बनाने तथा रासायनिक एवं रिफेक्ट्री उद्योगों में किया जाता है।

झारखण्ड की खान और भूविज्ञान विभाग के 12वीं पंचवर्षीय के योजना प्रस्ताव के अनुसार, खनिज का अनुमानित उत्पादन कितना होगा जो राज्य प्राप्त करने की कोशिश करेगा?

  • 2000 मिलियन टन
  • 200 मिलियन टन
  • 20 मिलियन टन
  • 300 मिलियन टन

Explanation:

  • 12वीं पंचवर्षीय योजना में झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए थे:
    • प्राथमिक क्षेत्रक – 6.5%
    • द्वितीयक क्षेत्रक – 12.5%
    • तृतीयक क्षेत्रक – 17.5%
    • सकल राज्य घरेलू उत्पाद – 10%
  • खान एवं भूविज्ञान विभाग के अनुसार, 12वीं योजना में खनिज उत्पादन का लक्ष्य 200 मिलियन टन था।

वर्तमान में झारखण्ड राज्य हर साल विभिन्न प्रकार के खनिजों के कितने लाख टन उत्पादन करता है?

  • 260
  • 100
  • 160
  • 300

Explanation:

  • झारखण्ड राज्य वर्तमान में हर साल विभिन्न प्रकार के खनिजों का लगभग 160 लाख टन उत्पादन करता है।
  • राज्य में कुल बड़े खदानों की संख्या – 373 है, जिसमें सर्वाधिक खदान धनबाद (109) एवं पश्चिमी सिंहभूम (78) में हैं।
  • राज्य में 58 प्रकार के खनिज पाए जाते हैं।

झारखण्ड राज्य में सालाना विभिन्न प्रकार के खनिजों का क्या मूल्य है?

  • 26000 करोड़ रुपये
  • 15000 करोड़ रुपये
  • 16000 करोड़ रुपये
  • 30000 करोड़ रुपये

Explanation:

  • झारखण्ड राज्य में सालाना विभिन्न प्रकार के खनिजों का मूल्य लगभग 15,000 करोड़ रुपये है।
  • आर्थिक समीक्षा 2017-18 के अनुसार सकल राज्य मूल्य वृद्धि (GSVA) में औद्योगिक क्षेत्र का योगदान 44.54% है, जिसमें खनिज क्षेत्र का प्रमुख योगदान है।
  • कोयला, लौह अयस्क, तांबा, बॉक्साइट, यूरेनियम आदि प्रमुख खनिज हैं।

1965 में ढोरी कोलियरी में आयी आपदा का कारण था

  • मीथेन गैस
  • विस्फोटक से आग लगना
  • खान में पानी भरने के वजह से
  • खान खोदने की वजह से

Explanation:

  • 1965 की ढोरी कोलियरी आपदा  यह धनबाद (झरिया क्षेत्र) की एक प्रसिद्ध खनन दुर्घटना है।
  • 1965 में ढोरी कोलियरी में आयी आपदा का कारण विस्फोटक से आग लगना था।
  • झरिया क्षेत्र कोकिंग कोयला के लिए प्रसिद्ध है तथा BCCL द्वारा संचालित है।
  • झरिया क्षेत्र पूरे झारखंड के कोयला उत्पादन का 60% उत्पादन करता है।

उद्योग, खनन एवं भूविज्ञान विभाग के अनुसार, झारखण्ड में चाइना क्ले कहां पाया जाता है? ,

  • पश्चिमी सिंहभूम, राँची और हजारीबाग जिला
  • पलामू, गढ़वा और लातेहार जिला
  • जामताड़ा, कोडरमा और पलामू जिला
  • पूर्वी सिंहभूम जिला

Explanation:

  • चाइना क्ले (चीनी मिट्टी/केओलीन) का भंडार सिंहभूम, राँची, लोहरदगा और संथाल परगना क्षेत्रों में पाया जाता है।
  • “चाइना क्ले/केओलीन – लोहरदगा, राँची, दुमका, साहेबगंज, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम”
  • चीनी मिट्टी फेल्सपार नामक खनिज के विघटन से निर्मित होती है।
  • देश के कुल भंडार का 7.33% झारखंड में आरक्षित है।

पूर्वी सिंहभूम जिले के कुल क्षेत्रफल का प्रतिशत कितने शेष पहाड़ों और पहाड़ियों में शामिल है, जिसमें ग्रेनाइट, नीस एवं सिष्ट सम्मिलित है?

  • 53%
  • 45%
  • 52%
  • 41%

Explanation:

  • पूर्वी सिंहभूम जिला तांबा, यूरेनियम, निकेल, कोबाल्ट, सोना, कायनाइट आदि खनिजों के लिए प्रसिद्ध है।
  • पूर्वी सिंहभूम के कुल क्षेत्रफल का 53% पहाड़ों और पहाड़ियों में शामिल है, जिसमें ग्रेनाइट, नीस एवं सिष्ट चट्टानें सम्मिलित हैं।
  • सिंहभूम क्षेत्र धारवाड़ श्रृंखला का हिस्सा है, जहाँ लौह अयस्क, तांबा, मैंगनीज, क्रोमाइट आदि खनिज पाए जाते हैं।
झारखण्ड में खनिज संसाधन