JharkhandGK
वर्तमान में झारखंड विधानसभा में कितनी सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं?
- 21
- 44
- 28
- 9
Explanation:
- झारखंड विधानसभा की कुल 81 निर्वाचित सीटों में से आरक्षित हैं
- 9 सीटें अनुसूचित जाति (Scheduled Castes) के लिए
- 28 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST)
- 44 सीटें सामान्य (General) वर्ग के लिए हैं।
झारखंड के 14 लोकसभा सीटों में कितने अनुसूचित जनजाति (ST) हेतु आरक्षित हैं?
- 8
- 5
- 1
- 6
Explanation:
- झारखंड में कुल 14 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं, जिनमें से 5 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए, 1 सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए और शेष 8 सीटें अनारक्षित (General) श्रेणी में आती हैं।
झारखंड राज्य में निम्नलिखित में से कौन-से दो जिले पूर्णतः अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं?
- पाकुड़ और दुमका
- देवघर और गोड्डा
- गुमला और लोहरदगा
- पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम
Explanation:
- सांविधिक और प्रशासनिक निर्वाचन क्षेत्रों के अंतर्गत गुमला और लोहरदगा जिले ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ की विधानसभा सीटें पूरी तरह से अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित की गई हैं।
- गुमला जिले में अनुसूचित जनजाति की आबादी का अनुपात बहुत अधिक है; 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 68.94%।
- लोहरदगा में 2011 के अनुसार अनुसूचित जनजाति की आबादी लगभग 56.89% थी।
- झारखंड विधानसभा में कुल 81 निर्वाचित सीटें हैं।
- इनमें 28 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं।
- 9 सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं।
- शेष 44 सीटें अनारक्षित (General) हैं।
- झारखंड की 14 लोकसभा सीटों में 5 सीटें ST के लिए आरक्षित हैं।
- संविधान के अनुच्छेद 330 और 332 के तहत अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभा में सीटें आरक्षित की जाती हैं।
- आरक्षण मुख्यतः संबंधित क्षेत्र की ST जनसंख्या के अनुपात के आधार पर तय किया जाता है।
झारखंड विधानसभा में सदस्यों की कुल संख्या क्या है?
- 84
- 89
- 81
- 82
Explanation:
- झारखंड विधानसभा में कुल निर्वाचित सदस्यों की संख्या 81 है (तथा पूर्व में एंग्लो-इंडियन समुदाय के 1 मनोनीत सदस्य को मिलाकर कुल संख्या 82 तक मानी जाती थी)। वर्तमान में नियमित निर्वाचित सदस्यों की संख्या 81 है।
- झारखंड विधानसभा में कुल सदस्य: 81
- झारखंड में एक सदनीय (Unicameral) विधानमंडल है।
- विधानसभा में 81 निर्वाचित विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं।
- इनमें:
- 28 सीटें — अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित
- 9 सीटें — अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित
- 44 सीटें — अनारक्षित
- विधानसभा का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष होता है।
- 2026 में भी झारखंड विधानसभा की सदस्य संख्या 81 है। झारखंड विधानसभा के आधिकारिक e-Vidhan पोर्टल पर भी 81 सदस्य दर्ज हैं
झारखंड में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या कितनी है?
- 81
- 80
- 82
- 85
Explanation:
- झारखंड राज्य के भौगोलिक क्षेत्र के अंतर्गत कुल 81 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं जहाँ से विधायक चुने जाते हैं।
- एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में नामित सीटों का प्रावधान 25 जनवरी 2020 से समाप्त हो गया।
- इसे 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 द्वारा समाप्त किया गया।
- संविधान के अनुच्छेद 331 और 333 में एंग्लो-इंडियन सदस्यों के नामांकन का प्रावधान था।
- 104वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 → SC/ST के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में आरक्षण की अवधि बढ़ाई गई, लेकिन एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
- अंतिम बार एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए नामांकन की व्यवस्था 25 जनवरी 2020 तक थी।
भारतीय संसद ने झारखंड के लिए अलग राज्य के रूप में किस वर्ष विधेयक पास किया?
- 2000
- 1999
- 1998
- 1997
Explanation:
- भारतीय संसद द्वारा ‘बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000’ पारित किया गया था, जिसके फलस्वरूप 15 नवंबर 2000 को झारखंड देश का 28वां राज्य बना था।
- भारतीय संसद ने झारखंड को अलग राज्य बनाने के लिए “बिहार पुनर्गठन विधेयक, 2000 (Bihar Reorganisation Bill, 2000)” पारित किया।
- वर्ष: 2000
- लोकसभा में पारित: 2 अगस्त 2000
- राज्यसभा में पारित: 11 अगस्त 2000
- राष्ट्रपति की मंजूरी: 25 अगस्त 2000
- अधिनियम का नाम: बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 (Act No. 30 of 2000)
- झारखंड राज्य का गठन: 15 नवंबर 2000
2026 की स्थिति के अनुसार झारखंड के खेल एवं युवा मामलों के मंत्री कौन हैं?
- राधा कृष्ण किशोर
- सुदिव्य कुमार
- योगेंद्र प्रसाद
- संजय प्रसाद यादव
Explanation:
-
झारखंड सरकार की 2026 की आधिकारिक सूची के अनुसार मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद् के प्रमुख सदस्य इस प्रकार हैं:
- मुख्यमंत्री: हेमंत सोरेन — झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)
- राधा कृष्ण किशोर — वित्त, वाणिज्यिक कर, योजना एवं विकास, संसदीय कार्य
- दीपक बिरुआ — राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार; परिवहन
- चमरा लिंडा — अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण
- योगेंद्र प्रसाद — पेयजल एवं स्वच्छता; उत्पाद एवं मद्यनिषेध
- इरफान अंसारी — स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण; खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले; आपदा प्रबंधन
- सुदिव्य कुमार — उच्च एवं तकनीकी शिक्षा; पर्यटन, कला-संस्कृति, खेल एवं युवा कार्य; नगर विकास एवं आवास
- संजय प्रसाद यादव — उद्योग; श्रम, रोजगार, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास
- हफीजुल हसन — जल संसाधन; अल्पसंख्यक कल्याण
- दीपिका पांडेय सिंह — ग्रामीण विकास; ग्रामीण कार्य; पंचायती राज
- शिल्पी नेहा तिर्की — कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता
- हेमंत सोरेन के पास उपर्युक्त विभागों के अतिरिक्त गृह, कारा, भवन निर्माण, सड़क निर्माण, ऊर्जा, खान एवं भू-विज्ञान, वन एवं पर्यावरण, स्कूली शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, सूचना एवं जनसंपर्क, कार्मिक, विधि आदि विभाग भी हैं।
निम्नलिखित विभागों में से कौन-सा मुख्य रूप से झारखंड में गरीबी और बेरोजगारी उन्मूलन की समस्याओं से संबंधित है?
- ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड
- योजना सह वित्त विभाग, झारखंड
- सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, झारखंड
- शहरी विकास एवं कल्याण विभाग, झारखंड
Explanation:
- राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के साधन जुटाने, रोजगार सृजन (जैसे मनरेगा आदि के माध्यम से) और गरीबी दूर करने की प्रमुख जिम्मेदारी ग्रामीण विकास विभाग की होती है।
- विभाग: ग्रामीण विकास विभाग (Rural Development Department), झारखंड सरकार
- वर्तमान मंत्री (2026): दीपिका पांडेय सिंह
- प्रमुख कार्यक्षेत्र:
- ग्रामीण क्षेत्रों का विकास
- ग्रामीण सड़क एवं आधारभूत संरचना से संबंधित योजनाएँ
- ग्रामीण रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम
- मनरेगा (MGNREGA) का क्रियान्वयन
- प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G)
- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से संबंधित कार्य
- ग्रामीण विकास योजनाओं का संचालन एवं निगरानी
…… राज्य सरकार के प्रधान एवं डी.सी. को संप्रेषण द्वारा जोड़ने वाली कड़ी है?
- डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर
- डिविजनल कलेक्टर
- डिविजन कमिश्नर
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- प्रमंडल स्तर के प्रशासनिक प्रमुख यानी डिविजन कमिश्नर (प्रमंडलीय आयुक्त) राज्य सरकार और जिलों के उपायुक्तों (DC) के बीच संवाद, समन्वय और संप्रेषण की मुख्य कड़ी के रूप में कार्य करते हैं।
- प्रमंडलीय आयुक्त (Divisional Commissioner) —
- प्रमंडलीय आयुक्त किसी प्रमंडल (Division) का प्रशासनिक प्रमुख होता है।
- यह पद सामान्यतः भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के वरिष्ठ अधिकारी को दिया जाता है।
- प्रमंडलीय आयुक्त के अधीन उस प्रमंडल के सभी जिले आते हैं।
- इसके प्रमुख कार्य:
- जिलों के प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करना।
- राज्य सरकार की नीतियों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करना।
- राजस्व प्रशासन की निगरानी।
- कानून-व्यवस्था एवं विकास कार्यों की समीक्षा।
- अधीनस्थ जिलों के उपायुक्तों (DC) के साथ समन्वय।
- उपायुक्त (DC) → जिले का प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी।
- प्रमंडलीय आयुक्त → एक प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले जिलों के प्रशासन की निगरानी करने वाला अधिकारी।
झारखंड राज्य के सत्रहवें मुख्य सचिव कौन थे / (2017 की वर्तमान मुख्य सचिव कौन हैं)?
- अविनाश कुमार
- सजल चक्रवर्ती
- अलका तिवारी
- राजबाला वर्मा
Explanation:
- राजबाला वर्मा झारखंड राज्य की मुख्य सचिव रह चुकी हैं और उस समयावधि में इस पद को संभालने वाली प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों में शामिल थीं।
- झारखंड के प्रथम मुख्य सचिव: विजय शंकर दुबे
- वर्तमान मुख्य सचिव (2026): अविनाश कुमार
- अविनाश कुमार झारखंड के 24वें मुख्य सचिव हैं।
- उन्होंने 1 अक्टूबर 2025 को निवर्तमान मुख्य सचिव अलका तिवारी के सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद संभाला था।
- अलका तिवारी → 1 नवम्बर 2024 से 30 सितम्बर 2025
- एल. खियांग्ते → 6 दिसम्बर 2023 से 31 अक्टूबर 2024
- सुखदेव सिंह → 1 अप्रैल 2020 से 6 दिसम्बर 2023
- मुख्य सचिव राज्य प्रशासन का सबसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी होता है।
झारखंड के प्रथम मुख्य सचिव कौन हैं?
- पी.पी. शर्मा
- सजल चक्रवर्ती
- विजय शंकर दुबे
- राजबाला वर्मा
Explanation:
- नवंबर 2000 में जब झारखंड राज्य का गठन हुआ था, तब राज्य के प्रशासनिक ढांचे को स्थापित करने वाले प्रथम मुख्य सचिव विजय शंकर दुबे (V.S. Dubey) थे।
- झारखंड के मुख्य सचिवों की सूची — तिथि सहित
- विजय शंकर दुबे — 15 नवंबर 2000 से 31 जुलाई 2002
- जी. कृष्णन — 1 अगस्त 2002 से 31 मार्च 2003
- ए. के. मिश्रा — 1 अप्रैल 2003 से 31 अक्टूबर 2003
- लक्ष्मी सिंह — 1 नवंबर 2003 से 13 दिसंबर 2004
- पी. पी. शर्मा — 14 दिसंबर 2004 से 18 जनवरी 2006
- एम. के. मंडल — 19 जनवरी 2006 से 28 फरवरी 2007
- ए. के. चुग — 1 मार्च 2007 से 15 अगस्त 2007
- पी. पी. शर्मा — 16 अगस्त 2007 से 24 फरवरी 2008
- ए. के. बसु — 25 फरवरी 2008 से 31 अगस्त 2009
- शिव बसंत — 1 सितंबर 2009 से 3 अप्रैल 2010
- ए. के. सिंह — 3 अप्रैल 2010 से 15 मार्च 2011
- ए. के. चौधरी — 15 मार्च 2011 से 31 मार्च 2013
- आर. एस. शर्मा — 31 मार्च 2013 से 30 अप्रैल 2014
- सजल चक्रवर्ती — 30 अप्रैल 2014 से 14 अगस्त 2014
- सुधीर प्रसाद — 14 अगस्त 2014 से 30 सितंबर 2014
- सजल चक्रवर्ती — 1 अक्टूबर 2014 से 15 दिसंबर 2014
- आर. एस. पोद्दार — 16 दिसंबर 2014 से 19 दिसंबर 2014
- सजल चक्रवर्ती — 19 दिसंबर 2014 से 20 जनवरी 2015
- राजीव गौबा — 27 जनवरी 2015 से 31 मार्च 2016
- राजबाला वर्मा — 31 मार्च 2016 से 28 फरवरी 2018
- सुधीर त्रिपाठी — 28 फरवरी 2018 से 31 मार्च 2019
- डी. के. तिवारी — 31 मार्च 2019 से 31 मार्च 2020
- सुखदेव सिंह — 1 अप्रैल 2020 से 6 दिसंबर 2023
- एल. खियांग्ते — 6 दिसंबर 2023 से 31 अक्टूबर 2024
- अलका तिवारी — 1 नवंबर 2024 से 30 सितंबर 2025
- अविनाश कुमार — 1 अक्टूबर 2025 से वर्तमान (2026)।
झारखंड से राज्यसभा में कितनी सीटें हैं?
- 6
- 9
- 14
- 20
Explanation:
- भारतीय संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) के लिए झारखंड राज्य को कुल 6 सीटें आवंटित की गई हैं, जहाँ से राज्य के प्रतिनिधि चुने जाते हैं।
- झारखंड के लिए राज्यसभा में 6 सदस्य निर्वाचित होते हैं।
- राज्यसभा सीटों का आवंटन: राज्यों की जनसंख्या के आधार पर किया जाता है।
- कार्यकाल: राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष होता है।
- प्रत्येक 2 वर्ष में लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं।
- झारखंड की तुलना में बिहार की राज्यसभा सीटें अधिक हैं, जबकि झारखंड की लोकसभा सीटें 14 हैं।
झारखंड विधानसभा में सदस्यों की कुल संख्या है?
- 81
- 75
- 84
- 90
Explanation:
- झारखंड विधानसभा में जनता द्वारा चुनकर आने वाले निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या 81 है। (यदि मनोनीत सदस्य को मिलाया जाए तो यह संख्या 82 होती है, किंतु बहुविकल्पीय परीक्षाओं में मानक संख्या 81 मानी जाती है)।
झारखंड विधानसभा में सदस्यों की कुल संख्या है? , V.L.W.-2012, , Primary Teacher – 2008
- 82
- 75
- 84
- 90
Explanation:
- संविधान के प्रावधानों और ऐतिहासिक परीक्षा पैटर्न के अनुसार, 81 निर्वाचित सदस्यों के साथ 1 एंग्लो-इंडियन सदस्य के मनोनयन के प्रावधान को जोड़कर कुल संख्या 82 भी सही मानी जाती है।
- एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में नामित सीटों का प्रावधान 25 जनवरी 2020 से समाप्त हो गया।
- इसे 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 द्वारा समाप्त किया गया।
- संविधान के अनुच्छेद 331 और 333 में एंग्लो-इंडियन सदस्यों के नामांकन का प्रावधान था।
- 104वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 → SC/ST के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में आरक्षण की अवधि बढ़ाई गई, लेकिन एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
- अंतिम बार एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए नामांकन की व्यवस्था 25 जनवरी 2020 तक थी।
- जोसेफ पंचोली गॉलस्टेन (Joseph Pecheli Galstaun) — झारखंड के पहले मनोनीत एंग्लो-इंडियन विधायक।
- 2005 में मनोनीत हुए।
- 2009 में पुनः मनोनीत हुए।
- ग्लेन जोसेफ गॉलस्टेन (Glen Joseph Galstaun) — जोसेफ पंचोली गॉलस्टेन के पुत्र।
- 2014 में मनोनीत हुए।
- 2019 में पुनः मनोनीत हुए।
- वे झारखंड विधानसभा के अंतिम मनोनीत एंग्लो-इंडियन विधायक थे।
- 25 जनवरी 2020 से एंग्लो-इंडियन समुदाय के मनोनयन की संवैधानिक व्यवस्था समाप्त हो गई।
- 2024 के बाद झारखंड विधानसभा में कोई एंग्लो-इंडियन मनोनीत विधायक नहीं है; विधानसभा की निर्वाचित सदस्य संख्या 81 है।
झारखंड विधानसभा के चुनावों में 2000 में गठन के समय से कितनी बार चुनाव हुए हैं?
- 8
- 5
- 6
- 9
Explanation:
- वर्ष 2000 में झारखंड राज्य के गठन के बाद से वर्ष 2026 तक झारखंड विधानसभा के लिए कुल 5 बार नियमित आम चुनाव संपन्न कराए जा चुके हैं।
- ये विधानसभा चुनाव हुए: 2005, 2009, 2014, 2019 और 2024 —
- 2024 का झारखंड विधानसभा राज्य का छठा विधानसभा चुनाव था, लेकिन इसमें 2000 में गठित पहली विधानसभा के बाद हुए चुनावों की संख्या 5 है।
- झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 — परिणाम
- कुल विधानसभा सीटें: 81
- मतदान: 13 नवंबर 2024 और 20 नवंबर 2024 को 2 चरणों में हुआ।
- मतगणना/परिणाम: 23 नवंबर 2024।
- विजेता गठबंधन: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेतृत्व वाला INDIA/Mahagathbandhan
- गठबंधन की कुल सीटें: 56
- JMM: 34 सीटें
- कांग्रेस (INC): 16 सीटें
- RJD: 4 सीटें
- CPI(ML): 2 सीटें
- BJP: 21 सीटें
- AJSU Party: 1 सीट
- JD(U): 1 सीट
- LJP (Ram Vilas): 1 सीट
- JLKM: 1 सीट
वर्तमान झारखंड विधानसभा में एंग्लो-इंडियन सदस्यों की संख्या ……. है?
- 2
- 1
- 4
- 9
Explanation:
- झारखंड विधानसभा में राज्यपाल द्वारा एंग्लो-इंडियन समुदाय के प्रतिनिधित्व के लिए अधिकतम 1 सदस्य को मनोनीत किए जाने का प्रावधान रहा है।
- झारखंड राज्य के भौगोलिक क्षेत्र के अंतर्गत कुल 81 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं जहाँ से विधायक चुने जाते हैं।
- एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में नामित सीटों का प्रावधान 25 जनवरी 2020 से समाप्त हो गया।
- इसे 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 द्वारा समाप्त किया गया।
- संविधान के अनुच्छेद 331 और 333 में एंग्लो-इंडियन सदस्यों के नामांकन का प्रावधान था।
- 104वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 → SC/ST के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में आरक्षण की अवधि बढ़ाई गई, लेकिन एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
- अंतिम बार एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए नामांकन की व्यवस्था 25 जनवरी 2020 तक थी।
झारखंड में कितनी लोकसभा सीटें हैं?
- 20
- 6
- 14
- 81
Explanation:
- भारतीय संसद के निचले सदन (लोकसभा) के लिए झारखंड राज्य को कुल 14 सीटें आवंटित की गई हैं, जहाँ से सांसद चुने जाते हैं।
- झारखंड में लोकसभा की कुल सीटें — 14
- इनमें 5 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं।
- 1 सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है।
- 8 सीटें सामान्य (अनारक्षित) हैं।
- लोकसभा सदस्य का कार्यकाल: 5 वर्ष
- झारखंड से पहली बार लोकसभा चुनाव: 2004 में हुए।
- झारखंड की 14 लोकसभा सीटें और 6 राज्यसभा सीटें हैं।
- सभी 28 राज्यों की लोकसभा सीटें — 524
- भारत में कुल लोकसभा सीटें — 543 (राज्य + केंद्रशासित प्रदेश)
- सबसे अधिक लोकसभा सीटें: उत्तर प्रदेश — 80
- दूसरे स्थान पर: महाराष्ट्र — 48
- सबसे कम: मिजोरम, नागालैंड और सिक्किम — 1-1 सीट
- झारखंड: 14 लोकसभा + 6 राज्यसभा सीटें
झारखंड राज्य के 14 लोकसभा सीटों में कितने अनुसूचित जनजाति (ST) हेतु आरक्षित हैं?
- 8
- 5
- 1
- 9
Explanation:
- झारखंड में लोकसभा की कुल सीटें — 14
- इनमें 5 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं।
- 1 सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है।
- 8 सीटें सामान्य (अनारक्षित) हैं।
- लोकसभा सदस्य का कार्यकाल: 5 वर्ष
- झारखंड से पहली बार लोकसभा चुनाव: 2004 में हुए।
- झारखंड की 14 लोकसभा सीटें और 6 राज्यसभा सीटें हैं।
- India लोकसभा की कुल निर्वाचित सीटें: 543 (राज्य + केंद्रशासित प्रदेश)
- अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटें: 47
- अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीटें: 84
- सामान्य (अनारक्षित) सीटें: 412
- ST आरक्षण का संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 330
- परीक्षा तथ्य: 543 − 84 (SC) − 47 (ST) = 412 सामान्य सीटें।
झारखंड राज्य के 14 लोकसभा सीटों में कितने अनुसूचित जाति (SC) हेतु आरक्षित हैं?
- 8
- 5
- 1
- 9
Explanation:
- राज्य की 14 लोकसभा सीटों में से मात्र 1 सीट (पलामू लोकसभा क्षेत्र) अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है।
- झारखंड में लोकसभा की कुल सीटें — 14
- इनमें 5 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं।
- 1 सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है।
- 8 सीटें सामान्य (अनारक्षित) हैं।
- लोकसभा सदस्य का कार्यकाल: 5 वर्ष
- झारखंड से पहली बार लोकसभा चुनाव: 2004 में हुए।
- झारखंड की 14 लोकसभा सीटें और 6 राज्यसभा सीटें हैं।
- India लोकसभा की कुल निर्वाचित सीटें: 543 (राज्य + केंद्रशासित प्रदेश)
- अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटें: 47
- अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीटें: 84
- सामान्य (अनारक्षित) सीटें: 412
- ST आरक्षण का संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 330
- परीक्षा तथ्य: 543 − 84 (SC) − 47 (ST) = 412 सामान्य सीटें।
वर्तमान में झारखंड विधान सभा में कितनी सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं?
- 44
- 28
- 1
- 9
Explanation:
- झारखंड विधानसभा की कुल 81 सीटों में से 9 सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं।
- झारखंड में लोकसभा की कुल सीटें — 14
- इनमें 5 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं।
- 1 सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है।
- 8 सीटें सामान्य (अनारक्षित) हैं।
- लोकसभा सदस्य का कार्यकाल: 5 वर्ष
- झारखंड से पहली बार लोकसभा चुनाव: 2004 में हुए।
- झारखंड की 14 लोकसभा सीटें और 6 राज्यसभा सीटें हैं।
- India लोकसभा की कुल निर्वाचित सीटें: 543 (राज्य + केंद्रशासित प्रदेश)
- अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटें: 47
- अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीटें: 84
- सामान्य (अनारक्षित) सीटें: 412
- ST आरक्षण का संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 330
- परीक्षा तथ्य: 543 − 84 (SC) − 47 (ST) = 412 सामान्य सीटें।
वर्तमान में झारखंड विधान सभा में कितनी सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं?
- 44
- 28
- 1
- 9
Explanation:
- झारखंड विधानसभा में आदिवासियों/जनजातियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए 28 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित की गई हैं।
- झारखंड में लोकसभा की कुल सीटें — 14
- इनमें 5 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं।
- 1 सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है।
- 8 सीटें सामान्य (अनारक्षित) हैं।
- लोकसभा सदस्य का कार्यकाल: 5 वर्ष
- झारखंड से पहली बार लोकसभा चुनाव: 2004 में हुए।
- झारखंड की 14 लोकसभा सीटें और 6 राज्यसभा सीटें हैं।
- India लोकसभा की कुल निर्वाचित सीटें: 543 (राज्य + केंद्रशासित प्रदेश)
- अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटें: 47
- अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीटें: 84
- सामान्य (अनारक्षित) सीटें: 412
- ST आरक्षण का संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 330
- परीक्षा तथ्य: 543 − 84 (SC) − 47 (ST) = 412 सामान्य सीटें।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने लोकसभा चुनाव 2024 में कितनी सीटें जीती थीं?
- 4
- 2
- 1
- 9
Explanation:
- वर्तमान 18वीं लोकसभा का कार्यकाल 24 जून 2024 से 23 जून 2029 तक है।
- यदि आपका आशय लोकसभा चुनाव 2024 से है, तो JMM ने झारखंड में 3 सीटें जीती थीं।
- 2024 में JMM की जीती सीटें: दुमका, राजमहल और गिरिडीह।
- झारखंड में कुल 14 लोकसभा सीटें हैं।
- 18वीं लोकसभा चुनाव 2024 — झारखंड का परिणाम
- भाजपा (BJP) — 8 सीटें
- झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) — 3 सीटें
- कांग्रेस (INC) — 2 सीटें
- आजसू पार्टी (AJSU) — 1 सीट
- कुल — 14 सीटें
झारखंड मंत्रिमंडल में मंत्रालयों की कुल संख्या है?
- 34
- 32
- 31
- 29
Explanation:
- संविधान के 91वें संशोधन के अनुसार मंत्रिपरिषद की संख्या विधानसभा सदस्यों (81) के 15% तक सीमित होती है।
- झारखंड सरकार में कुल 31 विभाग (Departments) हैं।
- ये विभाग मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद के विभिन्न मंत्रियों को आवंटित किए जाते हैं।
- वर्तमान मंत्रिपरिषद (2026) में मुख्यमंत्री के अलावा 11 मंत्री हैं।
झारखंड राज्य से कुल कितने संसद के सदस्य हैं?
- 34
- 32
- 31
- 20
Explanation:
- झारखंड से संसद के कुल सदस्य
- लोकसभा सदस्य: 14
- राज्यसभा सदस्य: 6
- संसद के दोनों सदनों को मिलाकर कुल सदस्य: 20
- अर्थात, झारखंड से संसद में कुल 20 प्रतिनिधि होते हैं।
मई 2012 में झारखंड में दो सीटों के लिए कराए गए राज्यसभा चुनाव में कौन-कौन प्रत्याशी विजयी हुए?
- प्रदीप कुमार बालमुचू और संजीव कुमार
- संजीव कुमार और एस.एस. अहलुवालिया
- सी.पी. सिंह और संजीव कुमार
- प्रदीप कुमार बालमुचू और आर.के. अग्रवाल
Explanation:
- वर्ष 2012 के मई माह में झारखंड की दो रिक्त राज्यसभा सीटों पर संपन्न हुए द्विवार्षिक चुनावों में कांग्रेस के प्रदीप कुमार बालमुचू और जेएमएम समर्थित संजीव कुमार विजयी घोषित हुए थे।
झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन हैं? J.E. – 2012
- प्रदीप कुमार बालमुचू
- संजीव कुमार
- सी.पी. सिंह
- बाबूलाल मरांडी
Explanation:
- झारखंड के पहले मुख्यमंत्री रहे बाबूलाल मरांडी ने भारतीय जनता पार्टी से अलग होकर झारखंड विकास मोर्चा (JVM-P) नामक क्षेत्रीय राजनीतिक दल की स्थापना की थी और वे इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष थे (बाद में इस दल का विलय भाजपा में हो गया)।
2012 के राज्यसभा चुनाव के दौरान झारखंड में विपक्षी दल के नेता कौन थे?
- प्रदीप कुमार बालमुचू
- राजेंद्र प्रसाद सिंह
- सी.पी. सिंह
- बाबूलाल मरांडी
Explanation:
- वर्ष 2012 के दौरान झारखंड विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता एवं प्रमुख राजनेता राजेंद्र प्रसाद सिंह विधानसभा में विपक्षी दल के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे थे।
निम्नलिखित में से कौन झारखंड में राज्यसभा से सदस्य हैं जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्य कोषाध्यक्ष और एक उद्योगपति भी हैं?
- प्रदीप कुमार बालमुचू
- राजेंद्र प्रसाद सिंह
- सी.पी. सिंह
- महेश पोद्दार
Explanation:
- जाने-माने उद्यमी और भाजपा नेता महेश पोद्दार झारखंड से भारतीय जनता पार्टी के कोटे से राज्यसभा सांसद तथा पार्टी के कोषाध्यक्ष रह चुके हैं।
झारखंड से राज्यसभा के सदस्य हैं जो कि भारतीय जनता पार्टी से संबंधित हैं?
- प्रदीप कुमार बालमुचू
- राजेंद्र प्रसाद सिंह
- सी.पी. सिंह
- महेश पोद्दार
Explanation:
- जाने-माने उद्यमी और राजनीतिकर्मी महेश पोद्दार भारतीय जनता पार्टी के कोटे से झारखंड राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं।
झारखंड के विधानसभा में वर्तमान में विपक्ष के नेता कौन हैं?
- हेमंत सोरेन
- राजेंद्र प्रसाद सिंह
- बाबूलाल मरांडी
- महेश पोद्दार
Explanation:
- झारखंड विधानसभा के राजनीतिक घटनाक्रम के तहत प्रमुख विपक्षी नेताओं में बाबूलाल मरांडी एवं अन्य वरिष्ठ नेता इस पद की जिम्मेदारी संभालते रहे हैं।
झारखंड विधानसभा के अंतिम मनोनीत एंग्लो-इंडियन विधायक कौन हैं?
- ग्लेन जोसेफ गालस्टीन
- जोसेफ पेचेली गॉलस्टीन
- जॉर्ज बेकर
- रिचर्ड हे
Explanation:
- एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में नामित सीटों का प्रावधान 25 जनवरी 2020 से समाप्त हो गया।
- इसे 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 द्वारा समाप्त किया गया।
- संविधान के अनुच्छेद 331 और 333 में एंग्लो-इंडियन सदस्यों के नामांकन का प्रावधान था।
- 104वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 → SC/ST के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में आरक्षण की अवधि बढ़ाई गई, लेकिन एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
- अंतिम बार एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए नामांकन की व्यवस्था 25 जनवरी 2020 तक थी।
- जोसेफ पंचोली गॉलस्टेन (Joseph Pecheli Galstaun) — झारखंड के पहले मनोनीत एंग्लो-इंडियन विधायक।
- 2005 में मनोनीत हुए।
- 2009 में पुनः मनोनीत हुए।
- ग्लेन जोसेफ गॉलस्टेन (Glen Joseph Galstaun) — जोसेफ पंचोली गॉलस्टेन के पुत्र।
- 2014 में मनोनीत हुए।
- 2019 में पुनः मनोनीत हुए।
- वे झारखंड विधानसभा के अंतिम मनोनीत एंग्लो-इंडियन विधायक थे।
- 25 जनवरी 2020 से एंग्लो-इंडियन समुदाय के मनोनयन की संवैधानिक व्यवस्था समाप्त हो गई।
- 2024 के बाद झारखंड विधानसभा में कोई एंग्लो-इंडियन मनोनीत विधायक नहीं है; विधानसभा की निर्वाचित सदस्य संख्या 81 है।
झारखंड की विधानसभा के वर्तमान स्पीकर कौन हैं?
- बागुन सुंबरुई
- इंदर सिंह नामधारी
- दिनेश उरांव
- रवीन्द्रनाथ महतो
Explanation:
- झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष (Speaker) पद पर विभिन्न अवधियों में दिनेश उरांव, रवीन्द्रनाथ महतो जैसे वरिष्ठ विधायक आसीन रहे हैं, जो सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं।
किस विधानसभा चुनाव में पहली बार झारखंड राज्य में भाजपा पूरी बहुमत में आई थी?
- 28 दिसंबर 2014 (तथा 2014 के चुनावी परिणाम संदर्भ)
- 15 नवंबर 2000
- 30 दिसंबर 2009
- 2 मार्च 2005
Explanation:
- वर्ष 2014 के झारखंड विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने सहयोगियों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया था और राज्य में पहली बार पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनी थी।
2014 में हुए झारखंड विधानसभा चुनाव में किस राजनीतिक दल को सबसे अधिक सीटें मिलीं?
- RJD
- JDU
- INC
- BJP
Explanation:
- वर्ष 2014 के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसने सबसे अधिक सीटें जीतकर सरकार का गठन किया था।
झारखंड एक …… विधायकीय राज्य है?
- एकलसदनीय (Unicameral)
- चतुरसदनीय
- द्विसदनीय (Bicameral)
- त्रिसदनीय
Explanation:
- भारत के कई अन्य राज्यों की तरह झारखंड में विधान परिषद नहीं है, इसलिए यहाँ केवल विधानसभा है, जिसके कारण यह एक एकलसदनीय (Unicameral) विधायिका वाला राज्य है।
2014 के विधानसभा चुनाव में अर्जुन मुंडा किस निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़े थे?
- रांची
- डुमरी
- मांडू
- खरसावां
Explanation:
- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में खरसावां विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था।
निम्नलिखित में से कौन …… विधानसभा क्षेत्र नहीं है?
- धनबाद
- झरिया
- वासेपुर
- खरसावां
Explanation:
- वासेपुर कोई स्वतंत्र विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह धनबाद शहर के अंतर्गत एक क्षेत्र/मोहल्ला है। जबकि धनबाद, झरिया और खरसावां आधिकारिक विधानसभा क्षेत्र हैं।
झारखंड विधानसभा में ……. सत्र नहीं होता है?
- शीतकालीन सत्र
- बजट सत्र
- मानसून सत्र
- ग्रीष्मकालीन सत्र
Explanation:
- संसदीय प्रणाली के नियमों के तहत सामान्यतः बजट सत्र, मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र आयोजित होते हैं, लेकिन कोई आधिकारिक ग्रीष्मकालीन सत्र (Summer Session) आयोजित नहीं किया जाता है।
निम्नलिखित में से कौन अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षित विधानसभा क्षेत्र नहीं है?
- देवघर
- पश्चिमी सिंहभूम (क्षेत्र अंतर्गत आरक्षित सीटें)
- सिमडेगा
- खूंटी
Explanation:
- देवघर एक सामान्य (General/SC विशिष्ट संदर्भ) विधानसभा क्षेत्र है, जबकि सिमडेगा, खूंटी और आदिवासी बहुल जिलों के क्षेत्र अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं।
अक्टूबर 2015 की स्थिति के अनुसार झारखंड के मुख्यमंत्री कौन हैं?
- तरुण गोगोई
- डॉ. रमन सिंह
- रघुवर दास
- वीरभद्र सिंह
Explanation:
- वर्ष 2015 के दौरान झारखंड राज्य के मुख्यमंत्री पद की कमान रघुवर दास के पास थी, जो राज्य के पहले गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री बने थे।
झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री कौन हैं?
- स्वराज कौशल
- वी.सी. पांडेय
- राजा जोयस
- बाबूलाल मरांडी
Explanation:
- झारखंड राज्य के गठन (15 नवंबर 2000) के पश्चात राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी बनाए गए थे।
नवनिर्मित झारखंड राज्य की पहली सरकार किस राजनीतिक पार्टी की थी?
- झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)
- भारतीय जनता पार्टी (BJP)
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)
- झारखंड विकास मोर्चा (JVM)
Explanation:
- नवंबर 2000 में अलग झारखंड राज्य के गठन के बाद सत्ता में आने वाली पहली सरकार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व में गठबंधन के तहत बनी थी।
झारखंड के पहले गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री कौन हैं?
- अर्जुन मुंडा
- रघुवर दास
- मधु कोड़ा
- बाबूलाल मरांडी
Explanation:
- रघुवर दास झारखंड राज्य के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बने थे जो गैर-आदिवासी पृष्ठभूमि से आते हैं। उन्होंने वर्ष 2014 से 2019 तक अपना कार्यकाल पूरा किया था।
झारखंड का पहला मुख्यमंत्री कौन था?
- अर्जुन मुंडा
- बिरसा मुंडा
- बाबूलाल मरांडी
- मधु कोड़ा
Explanation:
- राज्य के गठन (15 नवंबर 2000) के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता बाबूलाल मरांडी झारखंड के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।
निम्न में से कौन-सा झारखंड के पहले गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री के संदर्भ में गलत है? JSSC-CGL (PT) – 2016
- उन्हें बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार में पहली बार एक कैबिनेट मंत्री पद पोर्टफोलियो मिला था।
- उन्हें 1975 के आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किया गया था।
- वे झारखंड के दसवें मुख्यमंत्री हैं। (या अन्य क्रमिक संदर्भ)
- वे सिर्फ तीन बार विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं।
Explanation:
- रघुवर दास अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कई बार विधायक निर्वाचित हो चुके हैं, अतः उनका “सिर्फ तीन बार विधानसभा सदस्य रहना” कथन तथ्यात्मक रूप से गलत है।
वर्ष 2000 में झारखंड नया राज्य बनते समय बिहार के मुख्यमंत्री कौन थे?
- नीतीश कुमार
- लालू प्रसाद यादव
- जीतन राम मांझी
- राबड़ी देवी
Explanation:
- जब नवंबर 2000 में बिहार पुनर्गठन अधिनियम के तहत झारखंड राज्य का विभाजन होकर अलग राज्य बना, उस समय अविभाजित बिहार की मुख्यमंत्री राबड़ी देवी थीं।
झारखंड के दूसरे मुख्यमंत्री कौन बने? ,
- रघुवर दास
- अर्जुन मुंडा
- बाबूलाल मरांडी
- हेमंत सोरेन
Explanation:
- बाबूलाल मरांडी के इस्तीफे के बाद झारखंड के दूसरे मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा बने, जिन्होंने मार्च 2003 में पहली बार पदभार संभाला था।
झारखंड के पहले समाज कल्याण मंत्री के रूप में कैबिनेट मंत्री थे?
- रघुवर दास
- अर्जुन मुंडा
- मधु कोड़ा
- सुदेश महतो
Explanation:
- राज्य गठन के शुरुआती चरण में बाबूलाल मरांडी की सरकार में अर्जुन मुंडा ने समाज कल्याण मंत्री के रूप में कैबिनेट जिम्मेदारी संभाली थी।
झारखंड के दूसरे मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा राज्य के किस क्षेत्र से आते थे?
- रामगढ़
- खरसावां
- रांची
- जमशेदपुर
Explanation:
- अर्जुन मुंडा मुख्य रूप से झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के अंतर्गत आने वाले खरसावां विधानसभा क्षेत्र से राजनीतिक रूप से जुड़े रहे हैं।
झारखंड के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री कौन हैं?
- मधु कोड़ा
- अर्जुन मुंडा (तथा समयानुसार अन्य नेता)
- बाबूलाल मरांडी
- शिबू सोरेन
Explanation:
- अपने तीन अलग-अलग कार्यकाल के माध्यम से अर्जुन मुंडा ने झारखंड में कुल मिलाकर सबसे लंबी अवधि तक मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने वाले शुरुआती नेताओं में प्रमुख स्थान पाया है।
कौन-से स्वतंत्र उम्मीदवार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे हैं? ,
- मधु कोड़ा
- अर्जुन मुंडा
- बाबूलाल मरांडी
- शिबू सोरेन
Explanation:
- मधु कोड़ा झारखंड के एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं जिन्होंने निर्दलीय (इंडिपेंडेंट/स्वतंत्र) उम्मीदवार के रूप में विजयी होने के बाद गठबंधन के सहयोग से राज्य के मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली थी।
झारखंड के पहले मुख्यमंत्री कौन थे?
- मधु कोड़ा
- अर्जुन मुंडा
- बाबूलाल मरांडी
- शिबू सोरेन
Explanation:
- वर्ष 2000 में राज्य के नव-गठन के पश्चात बाबूलाल मरांडी झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बने थे।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) से झारखंड का मुख्यमंत्री इनमें से कौन है?
- मधु कोड़ा
- अर्जुन मुंडा
- बाबूलाल मरांडी
- हेमंत सोरेन
Explanation:
- झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के प्रमुख नेताओं में से हेमंत सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री पद पर आसीन रहे हैं, जो पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का प्रमुख हिस्सा हैं।
झारखंड के पहले गैर-भाजपा मुख्यमंत्री निम्नलिखित में से कौन थे?
- मधु कोड़ा
- अर्जुन मुंडा
- बाबूलाल मरांडी
- शिबू सोरेन
Explanation:
- झारखंड के शुरुआती मुख्यमंत्रियों (बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा) के बाद, शिबू सोरेन राज्य के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बने थे जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) से संबंधित नहीं थे।
निम्न में से किसने सबसे कम अवधि के लिए झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की है (एक बार में)?
- मधु कोड़ा
- अर्जुन मुंडा
- बाबूलाल मरांडी
- शिबू सोरेन
Explanation:
- अपने पहले कार्यकाल के दौरान शिबू सोरेन ने केवल कुछ ही दिनों (महज 10 दिन) के लिए मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया था, जो झारखंड में किसी भी मुख्यमंत्री का सबसे छोटा एकल कार्यकाल रहा है।
झारखंड के तीसरे मुख्यमंत्री किसे नियुक्त किया गया था?
- मधु कोड़ा
- अर्जुन मुंडा
- बाबूलाल मरांडी
- शिबू सोरेन
Explanation:
- बाबूलाल मरांडी (पहले) और अर्जुन मुंडा (दूसरे) के पश्चात शिबू सोरेन झारखंड राज्य के तीसरे मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किए गए थे।
निम्नांकित में से कौन झारखंड राज्य के पहले गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री हैं?
- मधु कोड़ा
- अर्जुन मुंडा
- बाबूलाल मरांडी
- रघुवर दास
Explanation:
- रघुवर दास झारखंड राज्य के इतिहास में पहले ऐसे मुख्यमंत्री बने जो गैर-आदिवासी समुदाय से आते हैं।
उस समय झारखंड के मुख्यमंत्री कौन थे, जब श्री रघुवर दास झारखंड के उप मुख्यमंत्री थे?
- शिबू सोरेन
- अर्जुन मुंडा
- बाबूलाल मरांडी
- रघुवर दास
Explanation:
- जब शिबू सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री बने थे, तब उनकी गठबंधन सरकार में रघुवर दास ने उप मुख्यमंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं।
फरवरी 1, 2016 की स्थिति के अनुसार झारखंड के खेल एवं युवा मामलों के मंत्री कौन हैं? JSSC-CGL-2016
- श्री राज पालीवार
- श्रीमती नीरा यादव
- श्री अमर कुमार बाउरी
- श्री रामचंद्र चंद्रवंशी
Explanation:
- निर्धारित तिथि के अनुसार झारखंड सरकार के मंत्रिमंडल में अमर कुमार बाउरी खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री थे।
झारखंड में मंत्रिपरिषद में शहरी विकास, आवास पंजीकरण और आपदा प्रबंधन मंत्री कौन हैं?
- चंद्रेश्वर सिंह (सी.पी. सिंह)
- श्रीमती नीरा यादव
- श्री अमर कुमार बाउरी
- श्री रामचंद्र चंद्रवंशी
Explanation:
- तत्कालीन मंत्रिपरिषद में शहरी विकास एवं आवास विभाग की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता चंद्रेश्वर सिंह (सी.पी. सिंह) के पास थी।
सितंबर 2017 तक, निम्न में से किसने तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री का पद संभाला है? ,
- शिबू सोरेन और अर्जुन मुंडा
- केवल मधु कोड़ा
- केवल अर्जुन मुंडा
- बाबूलाल मरांडी और मधु कोड़ा
Explanation:
- झारखंड के राजनीतिक सफर में शिबू सोरेन और अर्जुन मुंडा दोनों ही ऐसे नेता रहे हैं जिन्होंने अलग-अलग समय पर तीन-तीन बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है।
निम्नलिखित राजनीतिक दलों में से कौन-सा दल झारखंड राज्य में पूर्ण बहुमत या प्रत्यक्ष रूप से अपने दम पर पहली बार सरकार गठन के संदर्भ में अलग श्रेणी में रहा है?
- भारतीय जनता पार्टी
- स्वतंत्र
- झारखंड मुक्ति मोर्चा
- कांग्रेस
Explanation:
- झारखंड राज्य के शुरुआती दशकों में कांग्रेस पार्टी ने क्षेत्रीय दलों या गठबंधन के साथ समर्थन दिया, परंतु अपने दम पर लंबे समय तक प्रत्यक्ष पूर्ण बहुमत की सरकार का नेतृत्व सीधे तौर पर नहीं किया था।
झारखंड के तीसरे मुख्यमंत्री किस राजनीतिक दल से थे?
- भारतीय जनता पार्टी
- स्वतंत्र
- झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)
- कांग्रेस
Explanation:
- झारखंड के तीसरे मुख्यमंत्री के रूप में आसीन होने वाले शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) पार्टी के संस्थापक और शीर्ष नेता हैं।
झारखंड के दूसरे मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा किस राजनीतिक दल से थे?
- भारतीय जनता पार्टी (BJP)
- स्वतंत्र
- झारखंड मुक्ति मोर्चा
- कांग्रेस
Explanation:
- अर्जुन मुंडा भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और वे इसी दल से झारखंड के मुख्यमंत्री बने थे।
नवनिर्मित झारखंड राज्य की पहली सरकार निम्नलिखित में से किस राजनीतिक पार्टी की थी?
- भारतीय जनता पार्टी (BJP)
- स्वतंत्र
- झारखंड मुक्ति मोर्चा
- कांग्रेस
Explanation:
- वर्ष 2000 में अलग राज्य बनने के बाद झारखंड में पहली सरकार भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में गठबंधन के तहत बनी थी।
झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी किस राजनीतिक दल के थे?
- भारतीय जनता पार्टी (BJP)
- स्वतंत्र
- झारखंड मुक्ति मोर्चा
- कांग्रेस
Explanation:
- झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी उस समय भारतीय जनता पार्टी के टिकट और पार्टी के प्रमुख चेहरे के रूप में इस पद पर आसीन हुए थे।
झारखंड के 6 मुख्यमंत्रियों में से 2000 में निर्माण के बाद से उनमें से कितने निर्दलीय उम्मीदवार थे?
- 0
- 1
- 2
- 3
Explanation:
- झारखंड के शुरुआती 6 मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल के दौरान केवल मधु कोड़ा ही एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं जिन्होंने निर्दलीय (स्वतंत्र) उम्मीदवार के रूप में यह पद संभाला था।
मधु कोड़ा ने झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कितनी बार सेवा की है?
- 0
- 1
- 2
- 3
Explanation:
- मधु कोड़ा ने अपने राजनीतिक जीवन में एक बार झारखंड राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की है।
सन् 2000 में निर्माण के बाद से कितने लोगों ने झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की है?
- 6
- 5
- 7
- 3
Explanation:
- परीक्षा के संदर्भ और प्रारंभिक कालखंड के अनुसार 2000 से लेकर एक निश्चित चरण तक कुल 6 अलग-अलग व्यक्तियों ने मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली थी।
2000 में झारखंड के निर्माण के बाद से 6 मुख्यमंत्रियों में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के कितने थे?
- 1
- 5
- 2
- 3
Explanation:
- उक्त 6 मुख्यमंत्रियों में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) पार्टी से संबंधित मुख्यमंत्री 2 प्रमुख चेहरे (शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन) रहे हैं।
कितनी बार शिबू सोरेन ने झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की है?
- 1
- 5
- 2
- 3
Explanation:
- शिबू सोरेन ने अलग-अलग समय पर कुल तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है।
अर्जुन मुंडा ने झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कितनी बार सेवा की है?
- 1
- 5
- 2
- 3
Explanation:
- भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अर्जुन मुंडा ने भी अपने राजनीतिक सफर में तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया है।
हेमंत सोरेन ने झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कितनी बार सेवा की है?
- 1
- 5
- 2 (आरंभिक संदर्भ अनुसार)
- 3
Explanation:
- निर्धारित परीक्षा प्रश्न और उस समयावधि के आंकड़ों के अनुसार हेमंत सोरेन ने दो बार मुख्यमंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं।
कितनी बार झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड विधानसभा के सदस्य के रूप में कार्य किया?
- 1
- 5
- 2
- 3
Explanation:
- रघुवर दास अपने विधायक कार्यकाल के दौरान कुल 5 बार झारखंड विधानसभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित होकर कार्य कर चुके हैं।
बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कितनी बार सेवा की है?
- 1
- 5
- 2
- 3
Explanation:
- राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में बाबूलाल मरांडी ने एक बार अपने कार्यकाल की सेवा पूरी की थी।
2000 में राज्य बनने के बाद से झारखंड के 6 मुख्यमंत्रियों में से उनमें से कितने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के थे?
- 1
- 5
- 2
- 3
Explanation:
- शुरुआती 6 मुख्यमंत्रियों में से 3 नेता (बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और रघुवर दास) भारतीय जनता पार्टी (BJP) से संबंधित थे।
जनजातीय परामर्शी परिषद् (Tribe Advisory Council) के अध्यक्ष इनमें से कौन होते हैं?
- मुख्यमंत्री
- राज्यपाल
- जनजातीय मामलों के मंत्री
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- झारखंड राज्य में जनजातीय परामर्शी परिषद के पदेन अध्यक्ष राज्य के मुख्यमंत्री होते हैं, जो जनजातीय विकास और कल्याण से जुड़े मामलों पर दिशा-निर्देश देते हैं।
बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के मुख्यमंत्री पद संभालते ही कौन-से जिले को उप-राजधानी के रूप में विकसित करने का ऐलान किया था?
- लोहरदगा
- सरायकेला
- सिमडेगा
- दुमका
Explanation:
- राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने उप-राजधानी के रूप में उप-क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने हेतु दुमका जिले को झारखंड की उप-राजधानी के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी।
झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री रहे रघुवर दास को भाजपा की राष्ट्रीय समिति में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में किस वर्ष नियुक्त किया गया था?
- अगस्त 2011
- अगस्त 2014
- अगस्त 2013
- अगस्त 2012
Explanation:
- रघुवर दास को राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक जिम्मेदारी देते हुए अगस्त 2014 में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय समिति का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
झारखंड के मुख्यमंत्री रहे रघुवर दास ने झारखंड में किस वर्ष भारतीय आम चुनाव का नेतृत्व किया था?
- 2009 (प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के रूप में)
- 2014
- 2013
- 2012
Explanation:
- रघुवर दास ने वर्ष 2009 के आम लोकसभा चुनावों के दौरान झारखंड प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष के रूप में पार्टी का नेतृत्व संभाला था।
झारखंड में मुख्यमंत्री रहे रघुवर दास को झारखंड राज्य के उप मुख्यमंत्री के रूप में किस वर्ष नियुक्त किया गया था?
- अगस्त 2011
- दिसंबर 2009
- दिसंबर 2007
- अगस्त 2012
Explanation:
- शिबू सोरेन के नेतृत्व में दिसंबर 2009 में बनी गठबंधन सरकार के दौरान रघुवर दास को राज्य का उप मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था।
झारखंड के मुख्यमंत्री रहे रघुवर दास को किस साल पहली बार बिहार विधानसभा का सदस्य चुना गया था?
- 1991
- 1994
- 1995
- 1992
Explanation:
- राज्य विभाजन से पूर्व वर्ष 1995 के बिहार विधानसभा चुनाव में रघुवर दास पहली बार जमशेदपुर पूर्व क्षेत्र से विधायक चुने गए थे।
बाबूलाल मरांडी ने किस अवधि से किस अवधि तक झारखंड के मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाला था?
- 15 नवंबर, 2000 – 17 मार्च, 2003
- 15 नवंबर, 2000 – 17 मार्च, 2001
- 15 नवंबर, 2000 – 17 मार्च, 2002
- 15 नवंबर, 2000 – 17 मार्च, 2004
Explanation:
- झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने राज्य गठन की तिथि (15 नवंबर 2000) से लेकर 17 मार्च 2003 तक अपने पद का कार्यकाल संभाला था।
शिबू सोरेन ने किस अवधि के दौरान पहली बार झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया है?
- 20 मार्च, 2005 से 12 मार्च, 2007 तक
- 10 मार्च, 2005 से 12 मार्च, 2005 तक
- 4 मार्च, 2005 से 12 मार्च, 2005 तक
- 2 मार्च, 2005 से 12 मार्च, 2005 तक
Explanation:
- शिबू सोरेन ने अपने राजनीतिक जीवन में पहली बार मात्र 10 दिनों (2 मार्च 2005 से 12 मार्च 2005 तक) के अल्प कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया था।
इनमें से कौन-सा पहला कार्यकाल है जिसमें अर्जुन मुंडा झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत रहे हैं?
- 20 मार्च, 2005 से 12 मार्च, 2007 तक
- 10 मार्च, 2003 से 12 मार्च, 2005 तक
- 18 मार्च, 2003 – 2 मार्च, 2005
- 2 मार्च, 2005 से 12 मार्च, 2005 तक
Explanation:
- बाबूलाल मरांडी के इस्तीफे के पश्चात अर्जुन मुंडा ने 18 मार्च 2003 से 2 मार्च 2005 की अवधि के दौरान अपना पहला मुख्यमंत्री कार्यकाल पूरा किया था।
मधु कोड़ा झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में किस अवधि तक रहे हैं?
- 20 मार्च, 2005 से 23 अगस्त, 2008
- 14 सितंबर, 2006 – 23 अगस्त, 2008
- 18 मार्च, 2003 – 2 मार्च, 2005
- 2 मार्च, 2005 से 23 अगस्त, 2008
Explanation:
- स्वतंत्र/निर्दलीय विधायक के रूप में समर्थन प्राप्त कर मधु कोड़ा ने 14 सितंबर 2006 से 23 अगस्त 2008 तक झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा दी थी।
झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में एक अन्य कार्यकाल (या हेमंत सोरेन/अन्य संदर्भ) किस अवधि से संबंधित है?
- 20 जुलाई, 2013 – 28 दिसंबर, 2014
- 14 जुलाई, 2013 – 28 दिसंबर, 2014
- 13 जुलाई, 2013 – 28 दिसंबर, 2014
- 2 मार्च, 2013 – 28 दिसंबर, 2014
Explanation:
- हेमंत सोरेन ने 13 जुलाई 2013 से 28 दिसंबर 2014 के बीच गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री के रूप में सफलतापूर्वक अपना कार्यकाल संचालित किया था।
झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी राज्य के मूल रूप से किस निर्वाचन क्षेत्र/जिले से जुड़े रहे हैं?
- राजधनवार / गिरिडीह (या विकल्पों के अनुसार संबंधित जिला क्षेत्र)
- धनबाद
- रांची
- जमशेदपुर
Explanation:
- बाबूलाल मरांडी का मूल राजनीतिक कार्यक्षेत्र गिरिडीह जिले के अंतर्गत राजधनवार और कोडरमा संसदीय क्षेत्र से मुख्य रूप से जुड़ा रहा है।
झारखंड के तीसरे मुख्यमंत्री शिबू सोरेन किस राजनीतिक दल से थे?
- बीजेपी
- स्वतंत्र
- झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)
- कांग्रेस
Explanation:
- शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक एवं सर्वोच्च नेता हैं, और इसी दल से वे मुख्यमंत्री बने थे।
झारखंड के प्रमुख नेता (जैसे हेमंत सोरेन/वर्तमान मुख्यमंत्री) किस विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं?
- बरहेट
- धनबाद
- रांची
- जमशेदपुर
Explanation:
- झारखंड के प्रमुख शीर्ष नेतृत्वकर्ता और मुख्यमंत्री साहिबगंज जिले के अंतर्गत आने वाले बरहेट विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने जाते रहे हैं।
झारखंड के मुख्यमंत्री रहे रघुवर दास ने अपने शुरुआती जीवन में निम्नलिखित में से किस कंपनी में काम किया था?
- हिंदुस्तान मोटर्स
- टाटा स्टील
- आईटीसी
- हिंडाल्को
Explanation:
- राजनीति में आने से पहले रघुवर दास जमशेदपुर स्थित प्रसिद्ध औद्योगिक संस्थान टाटा स्टील में कर्मचारी के रूप में कार्य कर चुके हैं।
झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री निम्नलिखित संगठन में से किसके सदस्य थे?
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)
- किसान कृषि संगठन
- किसान मंच
- एनयूएसयूआई (NSUI)
Explanation:
- बाबूलाल मरांडी अपने शुरुआती स्वयंसेवी जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और संघ परिवार की विचारधारा से जुड़े रहे हैं।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्य मंत्री के रूप में किस विभाग में कार्य किया था, जो 2005 में NDA सरकार के दौरान अर्जुन मुंडा के अधीन था?
- शहरी विकास मंत्री
- कोयला मंत्री
- ग्रामीण विकास मंत्री
- परिवहन मंत्री
Explanation:
- वर्ष 2005 की अर्जुन मुंडा के नेतृत्व वाली सरकार में रघुवर दास ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शहरी विकास विभाग की कमान संभाली थी।
निम्नलिखित में से कौन झारखंड में राज्यसभा से सदस्य थे जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्य कोषाध्यक्ष और एक उद्योगपति भी थे?
- जयंत सिन्हा
- महेश पोद्दार
- रविन्द्र कुमार पांडेय
- कड़िया मुंडा
Explanation:
- जाने-माने उद्यमी और राजनीतिकर्मी महेश पोद्दार भारतीय जनता पार्टी के कोटे से झारखंड से राज्यसभा के सदस्य तथा पार्टी के राज्य कोषाध्यक्ष रहे हैं।
- महेश पोद्दार झारखंड से भाजपा (BJP) के राज्यसभा सदस्य रहे हैं।
- वे झारखंड भाजपा के प्रदेश कोषाध्यक्ष (State Treasurer) भी रहे।
- वे पेशे से उद्योगपति (Industrialist) और इंजीनियर हैं।
- राज्यसभा कार्यकाल: 2016–2022।
- वे 8 जुलाई 2016 से 7 जुलाई 2022 तक झारखंड से राज्यसभा सदस्य रहे।
- भाजपा प्रदेश कोषाध्यक्ष के रूप में कार्यकाल: लगभग 2004–2020।
निम्नलिखित स्थानों में से किस स्थान पर उच्च न्यायालय की एक नई बेंच को स्थापित करने के लिए झारखंड विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव अंगीकृत किया है?
- दुमका
- सिमडेगा
- खूंटी
- धनबाद
Explanation:
- राज्य के उप-राजधानी क्षेत्र दुमका में उच्च न्यायालय की एक उप-पीठ (Bench) स्थापित किए जाने हेतु झारखंड विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया था।
- झारखंड विधानसभा ने 8 जनवरी 2015 को दुमका में झारखंड उच्च न्यायालय की नई/स्थायी बेंच स्थापित करने के लिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था।
- दुमका झारखंड की उप-राजधानी (Second Capital) है।
जून 3, 2015 को झारखंड कैबिनेट ने कौन-से मामलों के शीघ्र ट्रायल के लिए झारखंड विशेष न्यायालयों को अनुमोदित किया?
- आतंकवाद
- भ्रष्टाचार
- डकैती
- ऋण
Explanation:
- राज्य मंत्रिमंडल द्वारा भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों के त्वरित निष्पादन और स्पीडी ट्रायल के लिए झारखंड विशेष न्यायालयों के गठन व अनुमोदन का निर्णय लिया गया था।
- झारखंड विशेष न्यायालय अधिनियम, 2016 (Jharkhand Special Court Act, 2016) के तहत विशेष न्यायालयों की स्थापना का प्रावधान किया गया।
- इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों का त्वरित विचारण (Speedy Trial) करना है।
- राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा आवश्यकता के अनुसार एक या अधिक विशेष न्यायालय स्थापित कर सकती है।
झारखंड में उच्च न्यायालय कहाँ स्थित है?
- रांची
- धनबाद
- बोकारो
- हजारीबाग
Explanation:
- झारखंड राज्य का उच्च न्यायालय (Jharkhand High Court) राज्य की राजधानी रांची में स्थित है।
- स्थान: धुर्वा, रांची, झारखंड।
- स्थापना: 15 नवंबर 2000
- झारखंड में कुल 24 जिला न्यायिक इकाइयाँ (Judicial Districts) हैं।
- प्रत्येक न्यायिक जिले में जिला एवं अधीनस्थ न्यायालय (District & Subordinate Courts) कार्य करते हैं।
- झारखंड में जिला न्यायालयों के अंतर्गत Civil Judge, Judicial Magistrate, District & Additional Sessions Judge आदि न्यायालय शामिल हैं।
- जिला एवं अधीनस्थ न्यायालय (District & Subordinate Courts) वे न्यायालय हैं जो उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन जिला स्तर और उससे नीचे के स्तर पर न्याय प्रदान करते हैं।
- ये न्यायालय दीवानी (Civil) और फौजदारी/आपराधिक (Criminal) मामलों की सुनवाई करते हैं।
- जिला न्यायालय (District Court) का प्रमुख सामान्यतः जिला एवं सत्र न्यायाधीश (District & Sessions Judge) होता है।
- दीवानी मामलों में जिला एवं सत्र न्यायाधीश को जिला न्यायाधीश (District Judge) कहा जाता है।
- आपराधिक मामलों में वही अधिकारी सत्र न्यायाधीश (Sessions Judge) के रूप में कार्य करता है।
- इनके अधीन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सिविल जज, न्यायिक मजिस्ट्रेट आदि न्यायिक अधिकारी कार्य करते हैं।
- झारखंड में: प्रत्येक न्यायिक जिले में जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों की व्यवस्था है।
झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश कौन थे?
- दीपक गुप्ता
- राजेंद्र मेनन
- नवीन सिन्हा
- वीरेन्द्र सिंह
Explanation:
- न्यायमूर्ति वीरेन्द्र सिंह झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
- कार्यकाल: 1 नवंबर 2014 से 6 अक्टूबर 2016।
इससे पहले बिहार के उच्च न्यायालय की सीट अब झारखंड के उच्च न्यायालय की है?
- दुमका
- रांची
- देवघर
- हजारीबाग
Explanation:
- विभाजन से पूर्व जो पटना उच्च न्यायालय की सर्किट/स्थाई बेंच रांची में कार्य करती थी, वही मूल ढांचागत रूप में अब स्वतंत्र रांची स्थित झारखंड उच्च न्यायालय के रूप में अवस्थित है।
झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श कर की जाती है। यह संविधान के किस अनुच्छेद के अनुसार है?
- अनुच्छेद 215
- अनुच्छेद 216
- अनुच्छेद 217
- अनुच्छेद 218
Explanation:
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 217 के प्रावधानों के अंतर्गत उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्य के राज्यपाल के परामर्श से की जाती है।
झारखंड उच्च न्यायालय के पहले मुख्य न्यायाधीश कौन थे?
- दीपक गुप्ता
- राजेंद्र मेनन
- विनोद कुमार गुप्ता (V.K. Gupta)
- वीरेन्द्र सिंह
Explanation:
- नवंबर 2000 में उच्च न्यायालय की स्थापना के समय न्यायमूर्ति विनोद कुमार गुप्ता झारखंड उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश बनाए गए थे।
- वर्तमान मुख्य न्यायाधीश (2026): न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनक (Mahesh Sharadchandra Sonak)।
- उन्होंने 9 जनवरी 2026 को झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। झारखंड उच्च न्यायालय के वर्तमान (18वें) मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनाक (M. S. Sonak) हैं। उन्होंने 9 जनवरी 2026 को इस पद की शपथ ली थी।
- प्रथम मुख्य न्यायाधीश: न्यायमूर्ति विनोद कुमार गुप्ता — 5 दिसंबर 2000 से 4 मार्च 2003।
- इससे पहले न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान 23 जुलाई 2025 से 8 जनवरी 2026 तक मुख्य न्यायाधीश रहे।
- न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा (Gyan Sudha Misra) — झारखंड उच्च न्यायालय की प्रथम महिला मुख्य न्यायाधीश थीं। कार्यकाल: 13 जुलाई 2008 से 30 अप्रैल 2010।
- बाद में उन्हें भारत के सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया।
- झारखंड उच्च न्यायालय की दूसरी महिला मुख्य न्यायाधीश — न्यायमूर्ति आर. बनुमति (R. Banumathi)। आर. बनुमति का कार्यकाल: 16 नवंबर 2013 से 12 अगस्त 2014।
महेश शरदचंद्र सोनक झारखंड उच्च न्यायालय के ……. मुख्य न्यायाधीश हैं?
- 9वें
- 18वें
- 10वें
- 5वें
Explanation:
- वर्तमान मुख्य न्यायाधीश (2026): न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनक (Mahesh Sharadchandra Sonak)।
- उन्होंने 9 जनवरी 2026 को झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। झारखंड उच्च न्यायालय के वर्तमान (18वें) मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनाक (M. S. Sonak) हैं। उन्होंने 9 जनवरी 2026 को इस पद की शपथ ली थी।
- प्रथम मुख्य न्यायाधीश: न्यायमूर्ति विनोद कुमार गुप्ता — 5 दिसंबर 2000 से 4 मार्च 2003।
- इससे पहले न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान 23 जुलाई 2025 से 8 जनवरी 2026 तक मुख्य न्यायाधीश रहे।
झारखंड उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत/निर्धारित संख्या क्या है?
- 29
- 28
- 20
- 25
Explanation:
- झारखंड उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की निर्धारित संख्या 25 (या तदनुरूप स्वीकृत पद) मानी गई है।
- झारखंड उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत/निर्धारित संख्या — 25 है।
- इनमें:
- स्थायी न्यायाधीश (Permanent Judges): 19
- अतिरिक्त न्यायाधीश (Additional Judges): 6
- झारखंड उच्च न्यायालय (Jharkhand High Court) की स्थापना: 15 नवंबर 2000
- इसका गठन बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत झारखंड राज्य के गठन के साथ हुआ।
- स्थान: रांची
- झारखंड उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश: न्यायमूर्ति विनोद कुमार गुप्ता
- झारखंड उच्च न्यायालय, पटना उच्च न्यायालय से अलग होकर अस्तित्व में आया।
झारखंड उच्च न्यायालय देश में ……. (क्रम संख्या) का उच्च न्यायालय है?
- 29वां
- 28वां
- 21वां
- 25वां
Explanation:
- देश के उच्च न्यायालयों की क्रमबद्धता में झारखंड उच्च न्यायालय भारत का 21वां उच्च न्यायालय है।
- झारखंड उच्च न्यायालय (Jharkhand High Court) की स्थापना: 15 नवंबर 2000
- इसका गठन बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत झारखंड राज्य के गठन के साथ हुआ।
- स्थान: रांची
- झारखंड उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश: न्यायमूर्ति विनोद कुमार गुप्ता
- झारखंड उच्च न्यायालय, पटना उच्च न्यायालय से अलग होकर अस्तित्व में आया।
झारखंड का उच्च न्यायालय किस शहर में स्थित है?
- दुमका
- सिमडेगा
- रांची
- धनबाद
Explanation:
- झारखंड का उच्च न्यायालय प्रशासनिक राजधानी रांची में स्थित है।
- झारखंड उच्च न्यायालय (Jharkhand High Court) की स्थापना: 15 नवंबर 2000
- इसका गठन बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत झारखंड राज्य के गठन के साथ हुआ।
- स्थान: रांची
- झारखंड उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश: न्यायमूर्ति विनोद कुमार गुप्ता
- झारखंड उच्च न्यायालय, पटना उच्च न्यायालय से अलग होकर अस्तित्व में आया।
झारखंड उच्च न्यायालय की स्थापना कब हुई थी?
- 15 नवंबर, 2000
- 12 अक्टूबर, 2000
- 20 नवंबर, 2000
- 1 नवंबर, 2000
Explanation:
- जिस दिन झारखंड राज्य का गठन हुआ (15 नवंबर, 2000), उसी दिन झारखंड उच्च न्यायालय की भी स्थापना की गई थी।
- झारखंड उच्च न्यायालय (Jharkhand High Court) की स्थापना: 15 नवंबर 2000
- इसका गठन बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत झारखंड राज्य के गठन के साथ हुआ।
- स्थान: रांची
- झारखंड उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश: न्यायमूर्ति विनोद कुमार गुप्ता
- झारखंड उच्च न्यायालय, पटना उच्च न्यायालय से अलग होकर अस्तित्व में आया।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा ……. वर्ष है?
- 65
- 62
- 55
- 68
Explanation:
- भारतीय संविधान के प्रावधानों के अनुसार उच्च न्यायालय (High Court) के न्यायाधीशों की सेवा-निवृत्ति (Retirement) की अधिकतम आयु सीमा 62 वर्ष निर्धारित की गई है।
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक पद पर बने रहते हैं।
- इसका संवैधानिक प्रावधान अनुच्छेद 217(1) में है।
- उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीश: 65 वर्ष
- उच्च न्यायालय (High Court) के न्यायाधीश: 62 वर्ष
