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झारखण्ड में काली मिट्टी कहाँ पाई जाती है?
- दामोदर घाटी प्रदेश
- स्वर्णरेखा नदी घाटी प्रदेश
- राजमहल पहाड़ी प्रदेश
- पलामू प्रदेश
Explanation:
- काली मिट्टी का विस्तार राजमहल पहाड़ी क्षेत्र में है।
- काली मिट्टी की विशेषताएँ:
- उपनाम – रेगुर मिट्टी
- रंग – काले एवं भूरे
- निर्माण – अत्यंत बारीक कणों से तथा बेसाल्ट के अपक्षयन से
- पानी पड़ने पर चिपचिपी हो जाती है।
- इसमें लौह, चुना, मैग्नीशियम तथा एलोमिना का मिश्रण पाया जाता है।
- नाइट्रोजन, जैविक पदार्थ तथा फॉस्फोरिक एसिड की कमी।
- कपास की खेती हेतु अत्यंत उपयोगी।
- राजमहल क्षेत्र में धान एवं चने की खेती होती है।
- अन्य मिट्टी के विस्तार:
- लाल मिट्टी – संपूर्ण छोटानागपुर क्षेत्र (90% भाग)
- लैटेराइट मिट्टी – पलामू का दक्षिणी क्षेत्र, राँची का पश्चिमी क्षेत्र, संथाल परगना
- रेतीली मिट्टी – पूर्वी हजारीबाग व धनबाद
- जलोढ़ मिट्टी – संथाल परगना
- अभ्रकमूलक मिट्टी – कोडरमा, मांडू, झुमरी तिलैया, बड़कागाँव
छोटानागपुर पठार में कौन सी मिट्टी प्रमुख हैं ?
- लाल मिट्टी
- रेतीली/बलुई मिट्टी
- काली मिट्टी
- लैटेराइट मिट्टी
Explanation:
- छोटानागपुर पठार में लाल मिट्टी प्रमुख है।
- लाल मिट्टी झारखंड के 90% भाग में पाई जाती है।
- संपूर्ण छोटानागपुर क्षेत्र में विद्यमान।
- लाल मिट्टी की विशेषताएँ:
- दामोदर घाटी में मुख्य रूप से पाई जाती है।
- नीस एवं ग्रेनाइट के अवशेष से निर्मित।
- नाइट्रोजन, फास्फोरस और ह्यूमस की कमी।
- उर्वरा शक्ति कम होती है।
- लाल रंग का कारण – फेरिक ऑक्साइड तथा बॉक्साइट की अधिकता।
- फसलें – ज्वार, बाजारा, रागी, गन्ना, मूंगफली आदि।
निम्न में से किस क्षेत्र में काली मिट्टी पाई जाती है?
- रांची
- हज़ारीबाग़
- राजमहल
- पलामू
Explanation:
- काली मिट्टी राजमहल क्षेत्र में पाई जाती है।
- यह राजमहल पहाड़ी प्रदेश में विस्तारित है।
- काली मिट्टी के अन्य तथ्य:
- उपनाम – रेगुर मिट्टी
- निर्माण – बेसाल्ट चट्टानों के अपक्षयन से
- कपास की खेती के लिए सर्वोत्तम।
- राजमहल क्षेत्र में धान एवं चना की खेती होती है।
दुमका जिले के मिट्टी की उर्वरता क्यों खराब है?
- व्यापक कटाव के कारन
- अम्लीय प्रवृति के कारन
- कम पानी रोक पाने की क्षमता के कारन
- ये सभी
Explanation:
- दुमका जिले की मिट्टी की उर्वरता निम्न कारणों से खराब है:
- व्यापक कटाव – पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण मिट्टी का कटाव अधिक होता है।
- अम्लीय प्रवृत्ति – मिट्टी में अम्लीयता के कारण पोषक तत्वों की कमी।
- कम पानी रोक पाने की क्षमता – जल धारण क्षमता कम होने के कारण फसलों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पाती।
- दुमका संथाल परगना क्षेत्र का एक प्रमुख जिला है, जहाँ मयूराक्षी, ब्राह्मणी, अजय आदि नदियाँ बहती हैं।
- यहाँ की मिट्टी में जलोढ़ एवं लैटेराइट मिट्टी का मिश्रण पाया जाता है।
झारखंड के किस स्थान में लेटराइट मिट्टी नहीं पायी जाती है?
- रांची के पश्चिमी हिस्से में
- संथाल के कुछ भागो में
- राजमहल
- पलामू
Explanation:
- लैटेराइट मिट्टी का विस्तार राजमहल क्षेत्र में नहीं है।
- राजमहल क्षेत्र में काली मिट्टी पाई जाती है।
- लैटेराइट मिट्टी का विस्तार:
- पलामू का दक्षिणी क्षेत्र
- राँची का पश्चिमी क्षेत्र
- संथाल परगना
- पूर्वी राजमहल क्षेत्र
- सिंहभूम का ढालभूम क्षेत्र
- लैटेराइट मिट्टी की विशेषताएँ:
- रंग – गहरा लाल
- कंकड़ की अधिकता
- लौह ऑक्साइड की अधिकता
- उर्वरता – कम उर्वर
- निर्माण – मानसूनी जलवायु की आर्द्रता तथा शुष्कता में क्रमिक परिवर्तन से
- फसलें – धान तथा मोटे अनाज
राजमहल पहाड़ियों में निम्न में से कौन सी मिटटी अधिकतम मात्रा में पाई जाती है?
- लाल मिट्टी
- रेतीली/बलुई मिट्टी
- काली मिट्टी
- लैटेराइट मिट्टी
Explanation:
- राजमहल पहाड़ियों में अधिकतम मात्रा में काली मिट्टी पाई जाती है।
- राजमहल पहाड़ी प्रदेश काली मिट्टी का प्रमुख विस्तार क्षेत्र है।
- राजमहल पहाड़ियों के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य:
- राजमहल पहाड़ियाँ संथाल परगना क्षेत्र में स्थित हैं।
- यहाँ गंगा नदी की सहायक नदियाँ बहती हैं।
- यहाँ काली मिट्टी बेसाल्ट चट्टानों के अपक्षयन से बनी है।
निम्नलिखित में से किस प्रकार की मिट्टी का स्थानीय नाम गौरीस है?
- लाल मिट्टी
- बलुई दोमट मिट्टी
- काली मिट्टी
- लैटेराइट मिट्टी
Explanation:
- बलुई दोमट मिट्टी का स्थानीय नाम गौरीस (गोरिस) है।
- गोरिस – बलुई दोमट मिट्टी का स्थानीय नाम।
- मिट्टियों के स्थानीय नाम:
- बलुई दोमट मिट्टी – बाला, गोरिस, जारिया, गिटालहासा
- दोमट मिट्टी – खेरसी, चरका, लोबो, बालसुंदर, आराहासा
- चिकनी मिट्टी – केवाल, चीटा, नगरा, गोबरा, हलमाद, हासा
छोटा नागपुर में फुसफुस बलुई मिट्टी किस क्षेत्र में पायी जाती है?
- दामोदर घाटी प्रदेश
- स्वर्णरेखा नदी घाटी प्रदेश
- राजमहल पहाड़ी प्रदेश
- पलामू प्रदेश
Explanation:
- फुसफुस बलुई मिट्टी दामोदर घाटी क्षेत्र में पाई जाती है।
- यह रेतीली मिट्टी का एक प्रकार है।
- रेतीली मिट्टी के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य:
- विस्तार – पूर्वी हजारीबाग व धनबाद
- रंग – लाल तथा पीले रंग का मिश्रण
- फसलें – मोटे अनाज
हजारीबाग में आमतौर पर किस प्रकार की मिट्टी पाई जाती है?
- लाल मिट्टी
- रेतीली मिट्टी
- काली मिट्टी
- लैटेराइट मिट्टी
Explanation:
- हजारीबाग में आमतौर पर रेतीली मिट्टी पाई जाती है।
- हजारीबाग छोटानागपुर पठार का एक प्रमुख जिला है।
- यहाँ रेतीली/बलुई मिट्टी का विस्तार पूर्वी हजारीबाग व धनबाद में है।
- हजारीबाग जिले की अन्य विशेषताएँ:
- यहाँ दामोदर, बराकर, कोनार, सकरी आदि नदियाँ बहती हैं।
- कोनार बाँध एवं कोनार सिंचाई परियोजना यहाँ स्थित है।
- अभ्रक एवं कोयला के लिए भी जाना जाता है।
कोडरमा, झुमरीतिलैया तथा मंधार पहाड़ी के आसपास के इलाके में किस प्रकार की मिट्टी पाई जाती है?
- लाल मिट्टी
- रेतीली मिट्टी
- काली मिट्टी
- माइका युक्त मिट्टी
Explanation:
- कोडरमा, झुमरीतिलैया तथा मंधार पहाड़ी के आसपास माइका युक्त (अभ्रकमूलक) मिट्टी पाई जाती है।
- इस क्षेत्र को अभ्रक पट्टी के नाम से जाना जाता है।
- अभ्रकमूलक मिट्टी की विशेषताएँ:
- विस्तार – कोडरमा, मांडू, झुमरी तिलैया, बड़कागाँव
- बहुलता – अभ्रक (माइका)
- रंग – हल्का गुलाबी (पीला – नमी की कमी के कारण)
- उर्वरता – अत्यंत उपजाऊ
- कोडरमा को ‘भारत की अभ्रक राजधानी’ कहा जाता है।
माइका युक्त मिट्टी झारखंड में निम्नलिखित में से कौन से स्थान पर पाई जाती है? 1.कोडरमा, 2.झुमरीतिलैया 3.सिंहभूम
- 1 और 2
- केवल 3
- 2 और 3
- केवल 1
Explanation:
- माइका युक्त मिट्टी कोडरमा एवं झुमरीतिलैया में पाई जाती है।
- कोडरमा अभ्रक (माइका) के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
- झुमरी तिलैया भी अभ्रक क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण भाग है।
- अभ्रक मिट्टी के विस्तार क्षेत्र:
- कोडरमा, मांडू, झुमरी तिलैया, बड़कागाँव
- सिंहभूम लौह अयस्क, तांबा, मैंगनीज, क्रोमाइट आदि के लिए जाना जाता है, न कि अभ्रक के लिए।
झारखंड के कुल भौगोलिक क्षेत्र में से कौन से मिट्टी का क्रम राज्य के अधिकांश भाग में पाया जाता है?
- वर्टिसोल
- इनसेफ्टीसोल
- ऐन्टीसोल
- अलफीसोल
Explanation:
- अलफीसोल मिट्टी का क्रम झारखंड के अधिकांश भाग में पाया जाता है।
- नेशनल एटलस एंड थीमेटिक मैपिंग संस्थान ने झारखंड के एटलस में 4 बड़े मिट्टी वर्गों में 11 उपप्रकार बताए हैं।
- झारखंड में पाई जाने वाली मिट्टी के वर्ग एवं उपप्रकार:
- ऐन्टीसोल – नवीन जलोढ़ मिट्टी
- इनसेफ्टीसोल – छिछली काली मिट्टी
- अलफीसोल (सर्वाधिक) – पुरातन जलोढ़, लाल ककँकरीली, लाल बलुई, लाल दोमट, लाल चिकनी, मिश्रित लाल एवं काली मिट्टी
- अल्टीसोल – लाल एवं पीली मिट्टी, लेटराइट मिट्टी, लेटराइट प्रधान मिट्टी
दामोदर घाटी में मुख्य रूप से किस प्रकार की मिट्टी पाई जाती है?
- लाल मिट्टी
- रेतीली मिट्टी
- काली मिट्टी
- माइका युक्त मिट्टी
Explanation:
- दामोदर घाटी में मुख्य रूप से लाल मिट्टी पाई जाती है।
- दामोदर घाटी का गोंडवाना क्षेत्र तथा राजमहल उच्च भूमि को छोड़कर, संपूर्ण छोटानागपुर क्षेत्र में लाल मिट्टी पाई जाती है।
- दामोदर घाटी के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य:
- झारखंड की सबसे बड़ी नदी – दामोदर
- यहाँ दामोदर नदी घाटी परियोजना (DVC) स्थित है।
- यह क्षेत्र कोयला के लिए भी प्रसिद्ध है।
- फुसफुस बलुई मिट्टी भी यहाँ पाई जाती है।
निम्न में से कौन सी मिट्टी झारखंड के अधिकतम क्षेत्र में पायी जाती है
- लाल मिट्टी
- रेतीली मिट्टी
- काली मिट्टी
- माइका युक्त मिट्टी
Explanation:
- लाल मिट्टी झारखंड के अधिकतम क्षेत्र (90%) में पाई जाती है।
- यह झारखंड की सर्वप्रमुख मिट्टी है।
- लाल मिट्टी की विशेषताएँ:
- संपूर्ण छोटानागपुर क्षेत्र में विद्यमान
- नीस एवं ग्रेनाइट के अवशेष से निर्मित
- फेरिक ऑक्साइड के कारण लाल रंग
- उर्वरा शक्ति – कम
- फसलें – ज्वार, बाजारा, रागी, गन्ना, मूंगफली
निम्नलिखित में से किस प्रकार की मिट्टी का स्थानीय नाम बाला है?
- लाल मिट्टी
- बलुई दोमट मिट्टी
- काली मिट्टी
- लैटेराइट मिट्टी
Explanation:
- बलुई दोमट मिट्टी का स्थानीय नाम बाला है।
- बलुई दोमट मिट्टी में 12% चिकनी, 21% रेत, 67% बालू होता है।
- बलुई दोमट मिट्टी के स्थानीय नाम:
- बाला
- गोरिस (गौरीस)
- जारिया
- गिटालहासा
निम्नलिखित में से किस प्रकार की मिट्टी का स्थानीय नाम जारिया है?
- लाल मिट्टी
- बलुई दोमट मिट्टी
- काली मिट्टी
- लैटेराइट मिट्टी
Explanation:
- बलुई दोमट मिट्टी का स्थानीय नाम जारिया है।
- यह बलुई दोमट मिट्टी के स्थानीय नामों में से एक है।
- बलुई दोमट मिट्टी के अन्य स्थानीय नाम:
- बाला, गोरिस, जारिया, गिटालहासा
निम्नलिखित में से किस प्रकार की मिट्टी का स्थानीय नाम गिटालहासा है?
- लाल मिट्टी
- बलुई दोमट मिट्टी
- काली मिट्टी
- लैटेराइट मिट्टी
Explanation:
- बलुई दोमट मिट्टी का स्थानीय नाम गिटालहासा है।
- यह बलुई दोमट मिट्टी का एक स्थानीय नाम है।
- बलुई दोमट मिट्टी के स्थानीय नामों की सूची:
- बाला
- गोरिस (गौरीस)
- जारिया
- गिटालहासा
निम्नलिखित में से किस प्रकार की मिट्टी का स्थानीय नाम खेरसी है?
- लाल मिट्टी
- बलुई दोमट मिट्टी
- दोमट मिट्टी
- लैटेराइट मिट्टी
Explanation:
- दोमट मिट्टी का स्थानीय नाम खेरसी है।
- दोमट मिट्टी में 16% चिकनी, 40% रेत, 42% बालू होता है।
- दोमट मिट्टी के स्थानीय नाम:
- खेरसी
- चरका
- लोबो
- बालसुंदर
- आराहासा
निम्नलिखित में से किस प्रकार की मिट्टी का स्थानीय नाम चरका है?
- लाल मिट्टी
- बलुई दोमट मिट्टी
- दोमट मिट्टी
- लैटेराइट मिट्टी
Explanation:
- दोमट मिट्टी का स्थानीय नाम चरका है।
- यह दोमट मिट्टी के स्थानीय नामों में से एक है।
- दोमट मिट्टी के स्थानीय नाम:
- खेरसी, चरका, लोबो, बालसुंदर, आराहासा
निम्नलिखित में से किस प्रकार की मिट्टी का स्थानीय नाम लोबो है?
- लाल मिट्टी
- बलुई दोमट मिट्टी
- दोमट मिट्टी
- लैटेराइट मिट्टी
Explanation:
- दोमट मिट्टी का स्थानीय नाम लोबो है।
- यह दोमट मिट्टी के स्थानीय नामों में से एक है।
- दोमट मिट्टी के स्थानीय नाम:
- खेरसी, चरका, लोबो, बालसुंदर, आराहासा
निम्नलिखित में से किस प्रकार की मिट्टी का स्थानीय नाम बालसुंदर है?
- लाल मिट्टी
- बलुई दोमट मिट्टी
- दोमट मिट्टी
- लैटेराइट मिट्टी
Explanation:
- दोमट मिट्टी का स्थानीय नाम बालसुंदर है।
- यह दोमट मिट्टी के स्थानीय नामों में से एक है।
- दोमट मिट्टी के स्थानीय नामों की सूची:
- खेरसी
- चरका
- लोबो
- बालसुंदर
- आराहासा
निम्नलिखित में से किस प्रकार की मिट्टी का स्थानीय नाम आराहासा है?
- लाल मिट्टी
- बलुई दोमट मिट्टी
- दोमट मिट्टी
- लैटेराइट मिट्टी
Explanation:
- दोमट मिट्टी का स्थानीय नाम आराहासा है।
- दोमट मिट्टी में 16% चिकनी, 40% रेत, 42% बालू होता है।
- दोमट मिट्टी के सभी स्थानीय नाम:
- खेरसी
- चरका
- लोबो
- बालसुंदर
- आराहासा
निम्नलिखित में से किस प्रकार की मिट्टी का स्थानीय नाम केवाल है?
- चिकनी मिट्टी
- बलुई दोमट मिट्टी
- दोमट मिट्टी
- लैटेराइट मिट्टी
Explanation:
- चिकनी मिट्टी का स्थानीय नाम केवाल है।
- चिकनी मिट्टी में 42% चिकनी, 36% रेत, 22% बालू होता है।
- चिकनी मिट्टी के सभी स्थानीय नाम:
- केवाल
- चीटा
- नगरा
- गोबरा
- हलमाद
- हासा
निम्नलिखित में से किस प्रकार की मिट्टी का स्थानीय नाम चीटा है?
- चिकनी मिट्टी
- बलुई दोमट मिट्टी
- दोमट मिट्टी
- लैटेराइट मिट्टी
Explanation:
- चिकनी मिट्टी का स्थानीय नाम चीटा है।
- यह चिकनी मिट्टी के स्थानीय नामों में से एक है।
- चिकनी मिट्टी के स्थानीय नाम:
- केवाल, चीटा, नगरा, गोबरा, हलमाद, हासा
निम्नलिखित में से किस प्रकार की मिट्टी का स्थानीय नाम नगरा है?
- चिकनी मिट्टी
- बलुई दोमट मिट्टी
- दोमट मिट्टी
- लैटेराइट मिट्टी
Explanation:
- चिकनी मिट्टी का स्थानीय नाम नगरा है।
- यह चिकनी मिट्टी के स्थानीय नामों में से एक है।
- चिकनी मिट्टी के स्थानीय नाम:
- केवाल, चीटा, नगरा, गोबरा, हलमाद, हासा
निम्नलिखित में से किस प्रकार की मिट्टी का स्थानीय नाम गोबरा है?
- चिकनी मिट्टी
- बलुई दोमट मिट्टी
- दोमट मिट्टी
- लैटेराइट मिट्टी
Explanation:
- चिकनी मिट्टी का स्थानीय नाम गोबरा है।
- यह चिकनी मिट्टी के स्थानीय नामों में से एक है।
- चिकनी मिट्टी के स्थानीय नाम:
- केवाल, चीटा, नगरा, गोबरा, हलमाद, हासा
निम्नलिखित में से किस प्रकार की मिट्टी का स्थानीय नाम हलमाद है?
- चिकनी मिट्टी
- बलुई दोमट मिट्टी
- दोमट मिट्टी
- लैटेराइट मिट्टी
Explanation:
- चिकनी मिट्टी का स्थानीय नाम हलमाद है।
- यह चिकनी मिट्टी के स्थानीय नामों में से एक है।
- चिकनी मिट्टी के स्थानीय नाम:
- केवाल, चीटा, नगरा, गोबरा, हलमाद, हासा
निम्नलिखित में से किस प्रकार की मिट्टी का स्थानीय नाम हासा है?
- चिकनी मिट्टी
- बलुई दोमट मिट्टी
- दोमट मिट्टी
- लैटेराइट मिट्टी
Explanation:
- चिकनी मिट्टी का स्थानीय नाम हासा है।
- यह चिकनी मिट्टी के स्थानीय नामों में से एक है।
- चिकनी मिट्टी के सभी स्थानीय नामों की सूची:
- केवाल, चीटा, नगरा, गोबरा, हलमाद, हासा
निम्नलिखित में से किस प्रकार की भूमि का स्थानीय नाम दिहार है?
- टांड़
- दोन
- पाट
- इनमे से कोई नहीं
Explanation:
- टांड़ (ऊँची भूमि) का स्थानीय नाम दिहार है।
- टांड़ – ऊँची भूमि को कहा जाता है।
- टांड़ (ऊँची भूमि) के स्थानीय नाम:
- दिहार
- भीठा
- बहारसी
- बारी
निम्नलिखित में से किस प्रकार की भूमि का स्थानीय नाम भीठा है?
- टांड़
- दोन
- पाट
- इनमे से कोई नहीं
Explanation:
- टांड़ (ऊँची भूमि) का स्थानीय नाम भीठा है।
- टांड़ – ऊँची भूमि को कहा जाता है।
- टांड़ (ऊँची भूमि) के स्थानीय नाम:
- दिहार, भीठा, बहारसी, बारी
निम्नलिखित में से किस प्रकार की भूमि का स्थानीय नाम बहारसी है?
- टांड़
- दोन
- पाट
- इनमे से कोई नहीं
Explanation:
- टांड़ (ऊँची भूमि) का स्थानीय नाम बहारसी है।
- टांड़ – ऊँची भूमि को कहा जाता है।
- टांड़ (ऊँची भूमि) के स्थानीय नाम:
- दिहार, भीठा, बहारसी, बारी
निम्नलिखित में से किस प्रकार की भूमि का स्थानीय नाम बारी है?
- टांड़
- दोन
- पाट
- इनमे से कोई नहीं
Explanation:
- टांड़ (ऊँची भूमि) का स्थानीय नाम बारी है।
- टांड़ – ऊँची भूमि को कहा जाता है।
- टांड़ (ऊँची भूमि) के सभी स्थानीय नाम:
- दिहार, भीठा, बहारसी, बारी
निम्नलिखित में से किस प्रकार की भूमि का स्थानीय नाम गहड़ा है?
- टांड़
- दोन
- पाट
- इनमे से कोई नहीं
Explanation:
- दोन (नीची भूमि) का स्थानीय नाम गहड़ा है।
- दोन – नीची भूमि को कहा जाता है।
- दोन (नीची भूमि) के स्थानीय नाम:
- गहड़ा
- बहियार
- घोघरा
- जाह
- चौउरा
- कनारी
निम्नलिखित में से किस प्रकार की भूमि का स्थानीय नाम बहियार है?
- टांड़
- दोन
- पाट
- इनमे से कोई नहीं
Explanation:
- दोन (नीची भूमि) का स्थानीय नाम बहियार है।
- दोन – नीची भूमि को कहा जाता है।
- दोन (नीची भूमि) के स्थानीय नाम:
- गहड़ा, बहियार, घोघरा, जाह, चौउरा, कनारी
निम्नलिखित में से किस प्रकार की भूमि का स्थानीय नाम बहियार है?
- टांड़
- दोन
- पाट
- इनमे से कोई नहीं
Explanation:
- दोन (नीची भूमि) का स्थानीय नाम बहियार है।
- यह दोन भूमि का एक स्थानीय नाम है।
- दोन (नीची भूमि) के स्थानीय नाम:
- गहड़ा, बहियार, घोघरा, जाह, चौउरा, कनारी
निम्नलिखित में से किस प्रकार की भूमि का स्थानीय नाम जाह है?
- टांड़
- दोन
- पाट
- इनमे से कोई नहीं
Explanation:
- दोन (नीची भूमि) का स्थानीय नाम जाह है।
- यह दोन भूमि का एक स्थानीय नाम है।
- दोन (नीची भूमि) के स्थानीय नाम:
- गहड़ा, बहियार, घोघरा, जाह, चौउरा, कनारी
निम्नलिखित में से किस प्रकार की भूमि का स्थानीय नाम चौउरा है?
- टांड़
- दोन
- पाट
- इनमे से कोई नहीं
Explanation:
- दोन (नीची भूमि) का स्थानीय नाम चौउरा है।
- यह दोन भूमि का एक स्थानीय नाम है।
- दोन (नीची भूमि) के स्थानीय नाम:
- गहड़ा, बहियार, घोघरा, जाह, चौउरा, कनारी
निम्नलिखित में से किस प्रकार की भूमि का स्थानीय नाम कनारी है?
- टांड़
- दोन
- पाट
- इनमे से कोई नहीं
Explanation:
- दोन (नीची भूमि) का स्थानीय नाम कनारी है।
- यह दोन भूमि का एक स्थानीय नाम है।
- दोन (नीची भूमि) के सभी स्थानीय नाम:
- गहड़ा, बहियार, घोघरा, जाह, चौउरा, कनारी
