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झारखण्ड के पारंपरिक स्वायत्त शासन तंत्र (Traditional Self-Governance Systems) एवं PESA नियमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1.संथाल जनजाति की ‘मांझी परगना शासन व्यवस्था’ में ‘देश मांझी’ का पद परगणैत से वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर पर कार्य करता है।
2.झारखण्ड में अधिसूचित PESA नियमावली के अंतर्गत ‘ग्राम कोष’ के गठन का प्रावधान है, जिसके तहत मुख्य रूप से चार प्रकार के कोष (अनाज, श्रम, वस्तु एवं नकद कोष) का संचालन किया जाएगा।
3.पेसा (PESA) नियमावली के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में पुलिस द्वारा किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी की पूर्व सूचना अथवा जानकारी संबंधित ग्राम सभा को देना अनिवार्य किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
Explanation:
- कथन 1 असत्य है क्योंकि मांझी परगना व्यवस्था में ‘देश मांझी’, परगणैत का सहायक होता है और परगणैत से नीचे (ग्राम प्रधान एवं परगणैत के बीच) का पद है।
- कथन 2 और 3 सत्य हैं।
झारखण्ड विधानसभा (Legislative Assembly) की संरचना एवं संवैधानिक स्थिति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
- 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 के लागू होने के पश्चात झारखण्ड विधानसभा में आंग्ल-भारतीय (Anglo-Indian) समुदाय के मनोनयन (Nomination) का प्रावधान समाप्त हो गया है।
- झारखण्ड विधानसभा में कुल 81 निर्वाचित सीटें हैं, जिनमें 28 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) और 9 सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं।
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 170 के प्रावधानों के अनुसार झारखण्ड विधानसभा की सीटों का परिसीमन वर्तमान में 1971 की जनगणना के आधार पर निर्धारित है।
- झारखण्ड में मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद की कुल सदस्यों की अधिकतम संख्या 12 हो सकती है, जो कि कुल विधानसभा सदस्यों का ठीक 15 प्रतिशत है।
Explanation:
- अनुच्छेद 164(1A) के तहत मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित न्यूनतम संख्या 12 होनी चाहिए। झारखण्ड में विधानसभा सीटों (81) का 15% लगभग 12 ही बनता है, किंतु यह अधिकतम नहीं बल्कि न्यूनतम और अधिकतम दोनों की सीमा निर्धारित करता है (विधानसभा की स्थिति अनुसार)। साथ ही अनुच्छेद 371(A) नागालैंड से संबंधित है, झारखण्ड से नहीं (Q6 संदर्भ)।
सूची-I (स्वायत्त स्वायत्तता परिषद/व्यवस्था) को सूची-II (प्रासंगिक विवरण/अधिनियम) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I (व्यवस्था)
a. झारखण्ड क्षेत्रीय स्वायत्त परिषद (Jharkhand Area Autonomous Council – JAAC)
b. छोटानागपुर टेनेंसी (CNT) एक्ट
c. संथाल परगना टेनेंसी (SPT) एक्ट
d. विलकिंसन रूल (Wilkinson’s Rule)
सूची-II (प्रासंगिक विवरण)
1. 104 सदस्यों वाला एक निकाय, जिसका गठन 1995 में एकीकृत बिहार के समय हुआ
2. 1908 में लागू, जिसकी धारा 46 भूमि के अवैध हस्तांतरण को प्रतिबंधित करती है
3. 1949 में लागू, जिसकी धारा 20 गैर-कृषि उपयोग के लिए भूमि हस्तांतरण को नियंत्रित करती है
4. 1837 में कोल्हान क्षेत्र में पारंपरिक मुंडा-मानकी व्यवस्था को कानूनी मान्यता देने हेतु लागू
सही कूट का चयन कीजिए:
- a-1, b-2, c-3, d-4
- a-2, b-1, c-4, d-3
- a-1, b-3, c-2, d-4
- a-4, b-2, c-3, d-1
Explanation:
- सही सुमेलन है: JAAC (1995), CNT (1908), SPT (1949), Wilkinson’s Rule (1837)।
झारखण्ड के राजनीतिक इतिहास एवं पृथक राज्य आंदोलन (Jharkhand State Movement) के संबंध में निम्नलिखित घटनाक्रमों को कालक्रमानुसार (Chronological Order) व्यवस्थित कीजिए:
1.ऑल झारखण्ड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU) की स्थापना
2.झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना (धनबाद के गोल्फ ग्राउंड में)
3.छोटानागपुर उन्नति समाज की स्थापना
4.बिहार पुनर्गठन विधेयक, 2000 का लोक सभा में पारित होना
सही कूट का चयन कीजिए:
- 3 → 2 → 1 → 4
- 2 → 3 → 1 → 4
- 3 → 1 → 2 → 4
- 1 → 3 → 2 → 4
Explanation:
- छोटानागपुर उन्नति समाज (1915) → JMM (1973) → AJSU (1986) → बिहार पुनर्गठन विधेयक पारित (2000)।
झारखण्ड के संसदीय प्रतिनिधित्व (Parliamentary Representation) के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
लोकसभा सीट: आरक्षण की श्रेणी
1.सिंहभूम (Singhbhum): अनुसूचित जनजाति (ST)
2.पलामू (Palamu): अनुसूचित जाति (SC)
3.लोहरदगा (Lohardaga): अनुसूचित जनजाति (ST)
4.हजारीबाग (Hazaribagh): अनारक्षित (General)
उपर्युक्त में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1 और 4
- 1, 2, 3 और 4
Explanation:
- झारखण्ड में 14 लोकसभा सीटों में से 5 ST (सिंहभूम, लोहरदगा, खूंटी, दुमका, राजमहल), 1 SC (पलामू) तथा 8 अनारक्षित सीटें (जैसे हजारीबाग, रांची, धनबाद आदि) हैं।
झारखण्ड में लागू ‘स्थानीय नीति’ (Local Resident Policy) और ‘सार्न धर्म कोड’ (Sarna Code) प्रस्ताव के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
- झारखण्ड विधानसभा द्वारा 1932 के खतियान (Land Records) के आधार पर स्थानीय निवासियों की पहचान हेतु विधेयक पारित किया गया था।
- झारखण्ड विधानसभा ने सर्वसम्मति से ‘सार्ना धर्म कोड’ को पृथक धार्मिक पहचान के रूप में जनगणना में शामिल करने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा है।
- भारतीय संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल किए जाने हेतु 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति विधेयक को भेजा गया है।
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 371(A) झारखण्ड राज्य को विशेष राज्य का दर्जा और स्थानीय नीति बनाने का पूर्ण एकछत्र अधिकार प्रदान करता है।
Explanation:
- अनुच्छेद 371(A) नागालैंड के लिए विशेष प्रावधान करता है, न कि झारखण्ड के लिए।
‘ढोकलो सोहोर शासन व्यवस्था’ (Doklo Sohor System) जो खड़िया जनजाति की पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था है, के संदर्भ में कौन-सा कथन सही नहीं है?
- संपूर्ण खड़िया समाज के राजा/प्रमुख को ‘ढोकलो सोहोर’ कहा जाता है, जिसका चुनाव प्रत्येक तीन वर्ष में होता है।
- गांव के धार्मिक प्रधान को ‘पाहन’ या ‘कालो’ कहा जाता है।
- ‘करटाहा’ गांव का एक ऐसा अधिकारी होता है जो सामाजिक विवादों के निपटारे एवं गांव के शुद्धिकरण का कार्य करता है।
- ढोकलो सोहोर व्यवस्था में महिलाओं को शासन व्यवस्था के उच्चतम पदों (राजा एवं परगना प्रमुख) पर अनिवार्य रूप से 50% आरक्षण प्राप्त है।
Explanation:
- ढोकलो सोहोर व्यवस्था में महिलाओं के लिए ऐसा कोई संवैधानिक या पारंपरिक 50% अनिवार्य आरक्षण का प्रावधान नहीं है।
झारखण्ड के पंचायती राज अधिनियम, 2001 (Jharkhand Panchayat Raj Act, 2001) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1.झारखण्ड पंचायती राज अधिनियम में महिलाओं के लिए सभी स्तरों पर 50% आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
2.अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) में ग्राम पंचायत के अध्यक्ष (Mukhiya) का पद केवल अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित होता है।
3.गैर-अनुसूचित क्षेत्रों में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू है, जबकि अनुसूचित क्षेत्रों में केवल एक-स्तरीय (ग्राम सभा) व्यवस्था ही संवैधानिक रूप से मान्य है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
Explanation:
- कथन 3 असत्य है; अनुसूचित क्षेत्रों में भी PESA के तहत त्रिस्तरीय संरचना (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद) विद्यमान है।
झारखण्ड के ऐतिहासिक प्रशासनिक ढाँचों के संदर्भ में ‘मानकी-मुंडा व्यवस्था’ (Manki-Munda Governance System) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
- यह व्यवस्था मुख्य रूप से हो (Ho) जनजाति बहुल कोल्हान (Kolhan) प्रमंडल क्षेत्र में प्रचलित है।
- ‘मुंडा’ ग्राम स्तर का प्रधान होता है, जबकि 15-20 गांवों के समूह (पीढ़) के प्रधान को ‘मानकी’ कहा जाता है।
- ब्रिटिश काल में विलकिंसन रूल (1837) के तहत मानकी और मुंडाओं को लगान वसूलने और न्यायिक अधिकार प्रदान किए गए थे।
- स्वतंत्रता के पश्चात पंचायती राज अधिनियम लागू होते ही मानकी-मुंडा व्यवस्था को पूर्णतः निरस्त कर इसे असंवैधानिक घोषित कर दिया गया है।
Explanation:
- मानकी-मुंडा व्यवस्था को निरस्त नहीं किया गया है; इसे आज भी सीएनटी एक्ट और पेसा नियमावली के तहत पारंपरिक अधिकार प्राप्त हैं।
सूची-I (झारखण्ड के राज्यपाल/राजनीतिक पद) को सूची-II (विशेष तथ्य/ऐतिहासिक स्थिति) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I (व्यक्ति/पद)
a. प्रभात कुमार
b. वी. सी. पांडे
c. द्रौपदी मुर्मू
d. बाबूलाल मरांडी
सूची-II (ऐतिहासिक स्थिति)
1. झारखण्ड राज्य के प्रथम कार्यवाहक राज्यपाल
2. झारखण्ड राज्य के प्रथम पूर्णकालिक राज्यपाल
3. झारखण्ड की प्रथम महिला एवं सबसे लंबे समय तक (2015-2021) पद पर रहने वाली राज्यपाल
4. झारखण्ड के प्रथम मुख्यमंत्री एवं एकीकृत बिहार में पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री
सही कूट का चयन कीजिए:
- a-2, b-1, c-3, d-4
- a-1, b-2, c-3, d-4
- a-2, b-3, c-1, d-4
- a-3, b-1, c-2, d-4
Explanation:
- प्रभात कुमार प्रथम राज्यपाल, वी.सी. पांडे प्रथम कार्यवाहक राज्यपाल, द्रौपदी मुर्मू प्रथम महिला राज्यपाल तथा बाबूलाल मरांडी प्रथम मुख्यमंत्री थे।
