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संथाल जनजाति की ‘माँझी परगना शासन व्यवस्था’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए तथा सत्य कूट का चयन कीजिए:
1.संथालों ने यह शासन व्यवस्था मूल रूप से सौरिया पहाड़िया जनजाति से ग्रहण की है।
2.माँझी को गाँव के सभी प्रकार के विवादों (हत्या सहित) का अंतिम रूप से निपटारा करने का पूर्ण न्यायिक अधिकार प्राप्त है।
3.इस व्यवस्था को वर्ष 1856 के ‘यूल रूल्स’ (Yule Rules) के आधार पर कानूनी मान्यता प्रदान की गई थी।
- केवल 1 और 3
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3 सभी
Explanation:
- कथन 1 और 3 सत्य हैं । संथालों ने यह व्यवस्था सौरिया पहाड़िया जनजाति से सीखी थी और 1856 में यूल रूल्स के तहत इसे कानूनी स्वीकृति मिली ।
- कथन 2 असत्य है क्योंकि हत्या जैसे गंभीर मामलों में गाँव स्तर पर फैसला नहीं होता, उसमें सरकारी (पुलिस/अदालत) हस्तक्षेप अनिवार्य होता है ।
माँझी शासन व्यवस्था में माँझी की अनुपस्थिति में उसके प्रशासनिक दायित्वों का संचालन कौन करता है, जिसे ‘उप-माँझी’ भी कहा जाता है?
- प्रमाणिक (प्रानीक)
- जोगमाँझी
- गुडैत
- लासेर टंगाय
Explanation:
- प्रमाणिक (या प्रानीक) को माँझी का उप-प्रमुख/उप-माँझी कहा जाता है ।
- जब माँझी अनुपस्थित होता है, तब गाँव के प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों का संचालन प्रमाणिक द्वारा ही किया जाता है ।
संथाल समाज में जन्म एवं विवाह संबंधी महत्वपूर्ण मामलों पर सलाह देने तथा नैतिक आचरण एवं विवाह से जुड़े विवादों को सुलझाने का दायित्व किस अधिकारी का होता है?
- जोगमाँझी
- जोग प्रानीक
- नायके
- भग्दो प्रजा
Explanation:
- जोगमाँझी माँझी का एक प्रमुख सहायक होता है ।
- इसका मुख्य कार्य गाँव के युवाओं के नैतिक आचरण पर नज़र रखना, जन्म तथा विवाह संबंधी मामलों में सलाह देना व विवाह विवादों को निपटाना है ।
यदि कोई विवाद गाँव के माँझी के स्तर पर नहीं सुलझ पाता है, तो उसे परगनैत के पास भेजने से पूर्व किस मध्यवर्ती अधिकारी/स्तर पर स्थानांतरित किया जाता है?
- देशमाँझी (मोड़े माँझी)
- दिशुम परगना
- सेंदरा बैंसी
- लोबीर सेंदरा
Explanation:
- देशमाँझी (मोड़े माँझी) 5 से 8 गाँवों का प्रधान और परगनैत का सहायक होता है ।
- जो मामला ग्राम माँझी द्वारा नहीं सुलझता, वह पहले देशमाँझी की पंचायत में जाता है, और वहाँ भी समाधान न होने पर परगनैत को भेजा जाता है ।
माँझी परगना शासन व्यवस्था में ‘गुडैत’ (गोड़ाइत) की भूमिका के संदर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?
- वह यौन अपराधों के मामलों में अपराधी को सजा सुनाने का कार्य करता है
- यह माँझी के सचिव के रूप में कार्य करता है
- यह गाँव के परिवारों से संबंधित सूचनाएँ एवं आँकड़े एकत्रित करता है
- यह ग्रामीणों को बैठकों, पर्व-त्योहारों व कार्यक्रमों की जानकारी देकर एक स्थान पर एकत्रित करता है
Explanation:
- कथन (A) असत्य है क्योंकि यौन अपराधों में सजा का निर्णय पंचायत या संपूर्ण समाज (बिटलाहा) द्वारा होता है, न कि गुडैत द्वारा ।
- गुडैत का मुख्य काम सचिवीय, सूचना एकत्र करना और ग्रामीणों तक सूचना पहुँचाना (संदेशवाहक) है ।
संथालों की प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत गाँव की बाहरी आक्रमणों से सुरक्षा हेतु ‘प्रहरी’ (Guard) के रूप में कौन कार्य करता है?
- लासेर टंगाय
- चौकीदार
- जोग प्रानीक
- कुडाम नायके
Explanation:
- लासेर टंगाय गाँव के सुरक्षा प्रहरी/सिपाही की भाँति कार्य करता है ।
- इसका मुख्य दायित्व गाँव को बाहरी आक्रमणों या शत्रुओं से सुरक्षा प्रदान करना होता है ।
माँझी परगना शासन व्यवस्था में ‘चौकीदार’ का मुख्य कार्य क्या होता है?
- माँझी के आदेशानुसार किसी अपराधी या व्यक्ति को गिरफ्तार करना (पुलिस की भांति)
- गाँव के बाहर स्थित देवी-देवताओं की पूजा करना
- गाँव का लगान एकत्र कर पटना काउंसिल भेजना
- शिकार यात्राओं का नेतृत्व करना
Explanation:
- चौकीदार गाँव में पुलिस अधिकारी की भाँति कार्य करता है ।
- यह माँझी के निर्देशों व आदेशों के अनुसार किसी दोषी या अभियुक्त को गिरफ्तार करने का कार्य करता है ।
माँझी शासन व्यवस्था के अंतर्गत ‘बिटलाहा’ (Bitlaha) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन सही है?
- यह इस शासन व्यवस्था की सबसे कठोर सजा है, जो यौन अपराधों के दोषी का पूर्ण सामाजिक बहिष्कार कर गाँव से निकालने हेतु दी जाती है
- यह केवल ₹5 से ₹150 का एक आर्थिक दण्ड है
- यह धार्मिक अनुष्ठानों में रुकावट डालने पर दी जाने वाली एक हल्की चेतावनी है
- बिटलाहा की सजा मिलने के बाद इसे किसी भी परिस्थिति में समाप्त नहीं किया जा सकता
Explanation:
- बिटलाहा यौन अपराधों या समाज के गंभीर नियमों के उल्लंघन पर दी जाने वाली सबसे कठोर सजा है जिसमें अपराधी का पूर्ण बहिष्कार कर गाँव से निकाल दिया जाता है ।
- हालाँकि, दोषी द्वारा क्षमा याचना करने और पूरे गाँव को ‘जाति भोज’ (सामूहिक भोज) देने पर यह सजा समाप्त भी की जा सकती है ।
संथाल गाँव के धार्मिक प्रधान ‘नायके’ और उप-धार्मिक प्रधान ‘कुडाम नायके’ के कार्यों के विभाजन का सही विकल्प कौन-सा है?
- नायके: गाँव के अंदर के धार्मिक अनुष्ठान | कुडाम नायके: गाँव के बाहर/सीमा पर देवी-देवताओं की पूजा
- नायके: गाँव के बाहर की पूजा | कुडाम नायके: गाँव के अंदर की पूजा
- नायके: केवल बलि देना | कुडाम नायके: शादी-विवाह कराना
- नायके: लगान वसूलना | कुडाम नायके: धार्मिक न्याय करना
Explanation:
- गाँव का मुख्य धार्मिक प्रधान नायके होता है जो गाँव के भीतर पूजा-पाठ व धार्मिक न्याय देखता है ।
- कुडाम नायके उप-नायके की तरह गाँव की सीमा से बाहर स्थित देवी-देवताओं व बुरी आत्माओं की शांति हेतु पूजा-अर्चना करता है ।
माँझी शासन व्यवस्था में सबसे हल्का आर्थिक दण्ड क्या कहलाता है, जिसके तहत दोषी पर ₹5 से ₹150 तक का जुर्माना लगाया जाता है?
- करेला दण्ड
- बिटलाहा
- जाति भोज
- सेंदरा दण्ड
Explanation:
- करेला दण्ड माँझी शासन व्यवस्था का सबसे हल्का आर्थिक दण्ड है । इसके अंतर्गत अपराधी पर ₹5 से लेकर ₹150 तक का मामूली जुर्माना लगाया जाता है ।
माँझी परगना शासन व्यवस्था में ‘लोबीर सेंदरा’ (Lobir Sendra) किस रूप में जानी जाती है?
- सर्वोच्च न्यायिक संस्था (Supreme Judicial Authority)
- वार्षिक कृषि उत्सव समिति
- गाँव की युवा संस्था (युवा गृह)
- धार्मिक अनुष्ठान परिषद
Explanation:
- लोबीर सेंदरा संथालों की माँझी परगना व्यवस्था में सर्वोच्च न्यायिक संस्था होती है, जहाँ बड़े विवादों और जटिल सामाजिक नियमों पर सर्वोच्च फैसला लिया जाता है ।
संथाल समाज में शिकार से संबंधित मामलों एवं शिकार यात्राओं के संचालन हेतु गठित परिषद को क्या कहा जाता है?
- सेंदरा बैंसी
- लोबीर सेंदरा
- दिशुम परगना
- भग्दो प्रजा
Explanation:
- सेंदरा बैंसी संथाल जनजाति में शिकार परिषद (Hunting Council) होती है, जो शिकार से जुड़े नियमों, तिथियों और विवादों का प्रबंधन करती है ।
माँझी परगना शासन व्यवस्था में ‘भग्दो प्रजा’ किसे कहा जाता है तथा उनकी क्या विशेषता है?
- गाँव के वरिष्ठ/अनुभवी लोग जिनसे विवाद निपटारे में सलाह ली जाती है; इन्हें कोई लगान-मुक्त भूमि नहीं मिलती
- गाँव के भूमिहीन मजदूर जिन्हें प्रशासनिक पद दिया जाता है
- परगनैत के वे विशेष अंगरक्षक जिन्हें भूमि दी जाती है
- विवाह संबंधी मामलों का प्रबंधन करने वाले युवा
Explanation:
- भग्दो प्रजा गाँव के वरिष्ठ और बुद्धिजीवी लोग होते हैं, जिनकी सलाह से माँझी बड़े झगड़ों का समाधान करता है ।
- विशेष तथ्य यह है कि भग्दो प्रजा को छोड़कर इस शासन व्यवस्था के अन्य सभी पदधारियों को सेवा के बदले भूमि प्रदान की जाती है ।
लगभग 15 से 20 गाँवों को मिलाकर बनने वाले ‘परगना’ के प्रमुख ‘परगनैत’ के संदर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?
- यह अंतर-ग्रामीण विवादों (विभिन्न गाँवों के आपसी झगड़ों) का निपटारा करता है
- यह केवल गाँव के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करता है
- यह अंग्रेजों द्वारा मनोनीत एक स्थायी पुलिस अधिकारी होता है
- यह केवल युवाओं के विवाह तय कराने का कार्य करता है
Explanation:
- 15-20 गाँवों को मिलाकर परगना बनता है जिसका प्रमुख परगनैत होता है ।
- जब दो या दो से अधिक गाँवों के बीच विवाद (जैसे भूमि या सीमा विवाद) उत्पन्न होता है, तो उसका निपटारा परगनैत की सभा में किया जाता है ।
यदि कोई मामला परगनैत की सभा में भी नहीं सुलझ पाता है, तो उसे किस उच्च स्तरीय संस्था को हस्तांतरित किया जाता है?
- दिशुम परगना
- देशमाँझी
- जोग प्रानीक
- यूल काउंसिल
Explanation:
- दिशुम परगना परगनैत से भी उच्च स्तर पर स्थित संस्था/अधिकारी होता है ।
- जो मामले परगनैत द्वारा अनसुलझे रह जाते हैं, उन्हें दिशुम परगना को हस्तांतरित कर दिया जाता है (यह सभी क्षेत्रों में मौजूद नहीं होता) ।
माँझी परगना शासन व्यवस्था में अधिकारियों एवं पदधारियों का चुनाव/नवीनीकरण सामान्यतः किस अवसर पर किया जाता है?
- माग सिम
- सोहराय
- बाहा पर्व
- सरहुल
Explanation:
- संथाल समाज में वार्षिक कृषि वर्ष के समापन/आरंभ के समय मनाए जाने वाले ‘माग सिम’ (Magh Sim) त्योहार के अवसर पर शासन व्यवस्था के अधिकारियों के पुनर्चयन या पदों के हस्तांतरण संबंधी प्रक्रियाएँ होती हैं ।
माँझी शासन व्यवस्था के विभिन्न अधिकारियों को उनके सही कार्यों से सुमेलित कीजिए:
सूची-I (अधिकारी): (A) जोग प्रानीक, (B) कुडाम नायके, (C) लासेर टंगाय, (D) गुडैत
सूची-II (कार्य): (1) गाँव का सुरक्षा प्रहरी, (2) जोगमाँझी की अनुपस्थिति में कार्य संचालन, (3) गाँव के बाहर पूजा-पाठ कराना, (4) सूचनाएँ एवं आँकड़े एकत्र करना
- A-2, B-3, C-1, D-4
- A-1, B-2, C-3, D-4
- A-3, B-4, C-1, D-2
- A-4, B-1, C-2, D-3
Explanation:
- सही सुमेलित रूप है: जोग प्रानीक (जोगमाँझी की अनुपस्थिति में कार्य), कुडाम नायके (गाँव के बाहर पूजा), लासेर टंगाय (सुरक्षा प्रहरी), तथा गुडैत (सूचना व बैठक प्रबंधक) ।
माँझी परगना शासन व्यवस्था में ‘जोग प्रानीक’ का प्राथमिक दायित्व क्या होता है?
- जोगमाँझी की अनुपस्थिति में उसके दायित्वों का निष्पादन करना
- माँझी की अनुपस्थिति में उप-माँझी बनना
- नायके की अनुपस्थिति में बलि चढ़ाना
- देशमाँझी को रिपोर्ट देना
Explanation:
- जिस प्रकार प्रमाणिक/प्रानीक माँझी का अनुपस्थिति-सहायक (उप-माँझी) होता है, उसी प्रकार जोग प्रानीक जोगमाँझी की गैर-मौजूदगी में उसके कार्यों का संचालन करता है ।
1856 में लागू ‘यूल रूल्स’ (Yule Rules) का संथाल परगना क्षेत्र और माँझी परगना व्यवस्था पर क्या मुख्य प्रभाव पड़ा?
- संथालों की पारंपरिक माँझी परगना शासन व्यवस्था को ब्रिटिश शासन द्वारा कानूनी और प्रशासनिक मान्यता मिली
- माँझी परगना व्यवस्था को पूरी तरह से अवैध घोषित कर दिया गया
- संथालों की भूमि पर पूरी तरह से अंग्रेजी जमींदारों का अधिकार स्थापित हो गया
- परगनैत के पद को समाप्त कर दिया गया
Explanation:
- 1855 के संथाल विद्रोह (हूल) के बाद 1856 में भागलपुर के कमिश्नर जॉर्ज यूल द्वारा ‘यूल रूल्स’ बनाए गए, जिसके तहत संथालों की पारंपरिक माँझी परगना व्यवस्था को पुलिस व न्यायिक अधिकार देकर कानूनी मान्यता प्रदान की गई ।
माँझी परगना शासन व्यवस्था के संदर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?
- भग्दो प्रजा सहित इस व्यवस्था के सभी अधिकारियों को उनके कार्य के बदले लगान-मुक्त भूमि दी जाती है
- यह शासन व्यवस्था एक लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रणाली के समरूप प्रतीत होती है
- धार्मिक अपराधों पर फैसला गाँव का नायके सुनाता है
- यौन अपराध के दोषी को जाति भोज देने पर पुनः समाज में शामिल किया जा सकता है
Explanation:
- कथन (A) असत्य है क्योंकि इस व्यवस्था में भग्दो प्रजा को छोड़कर ही शेष सभी पदधारियों को कार्य के बदले भूमि प्रदान की जाती है (भग्दो प्रजा को भूमि नहीं मिलती) ।
