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‘झारखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण’ (JSDMA) का गठन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की किस धारा के तहत किया गया है?

  • धारा 14 (1)
  • धारा 20 (1)
  • धारा 25 (1)
  • धारा 30 (2)

Explanation:

  • झारखंड में 28 मई 2010 को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 14 (1) के तहत JSDMA (Jharkhand State Disaster Management Authority) का गठन किया गया था ।
  • इसके अध्यक्ष राज्य के मुख्यमंत्री होते हैं और इसमें अधिकतम 9 सदस्य हो सकते हैं ।

झारखंड का कौन-सा जिला प्राकृतिक आपदा ‘तड़ित’ (Lightning/Thundering) से सर्वाधिक प्रभावित जिलों में शामिल है?

  • गुमला और लातेहार
  • देवघर और दुमका
  • साहिबगंज और पाकुड़
  • गोड्डा और साहिबगंज

Explanation:

  • झारखंड में वज्रपात (Lightning) एक प्रमुख आपदा है, जिससे राज्य के गुमला, लातेहार, रांची और पलामू अत्यधिक प्रभावित रहते हैं ।
  • राज्य सरकार ने तड़ित आपदा से सुरक्षा एवं पूर्व चेतावनी के लिए विशेष सूचना तंत्र और तड़ित चालक लगाने की योजना शुरू की है ।

झारखंड में सूखे (Drought) की समस्या से निपटने और जल संरक्षण हेतु संचालित ‘डोभा निर्माण’ योजना किस आपदा प्रबंधन रणनीति का हिस्सा है?

  • अनुकूलन एवं जोखिम न्यूनीकरण (Mitigation)
  • आपदा के बाद का पुनर्वास (Rehabilitation)
  • आपदा प्रतिक्रिया (Emergency Response)
  • खोज एवं बचाव (Search and Rescue)

Explanation:

  • डोभा निर्माण (Farm Ponds) वर्षा जल संचयन के माध्यम से भूजल स्तर सुधारने और सूखे के प्रभाव को कम करने की एक आपदा न्यूनीकरण (Mitigation) रणनीति है ।
  • झारखंड के 24 में से अधिकांश जिले अनियमित मानसून के कारण सूखे के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं ।

झारखंड के झरिया (धनबाद) क्षेत्र में कौन-सी मुख्य मानवजनित एवं पर्यावरणीय आपदा वर्षों से गंभीर समस्या बनी हुई है?

  • भूमिगत खदानों में आग (Underground Mine Fire)
  • रेडियोधर्मी प्रदूषण
  • रासायनिक गैस रिसाव
  • औद्योगिक सुनामी लहरें

Explanation:

  • धनबाद के झरिया कोयला क्षेत्र में कोयला खदानों में लगी भूमिगत आग और भू-धंसान (Land Subsidence) राज्य की सबसे बड़ी आपदाओं में से एक है ।
  • इसके स्थायी समाधान और प्रभावित आबादी के पुनर्वास के लिए ‘झरिया पुनर्वास विकास प्राधिकरण’ (JRDA) कार्यरत है ।

झारखंड के जादूगोड़ा (पूर्वी सिंहभूम) क्षेत्र में किस खनिज के खनन के कारण पर्यावरणीय एवं स्वास्थ्य आपदा का जोखिम बना रहता है?

  • यूरेनियम
  • बॉक्साइट
  • क्रोमाइट
  • कोयला

Explanation:

  • जादूगोड़ा में यूरेनियम खनन और टेलिंग पोंड (Tailings Pond) के कारण रेडियोधर्मी विकिरण (Radioactive Radiation) का खतरा बना रहता है ।
  • इसके सुरक्षित निपटान और आसपास के ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) सुरक्षा मानकों का अनुपालन करता है ।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM) के अनुसार, झारखंड को मुख्य रूप से कितने भूकंपीय क्षेत्रों (Seismic Zones) में विभाजित किया गया है?

  • Zone II, Zone III और Zone IV
  • केवल Zone I और Zone II
  • Zone IV और Zone V
  • केवल Zone V

Explanation:

  • झारखंड का भू-भाग मुख्य रूप से Zone II (कम जोखिम), Zone III (मध्यम जोखिम) और Zone IV (उच्च जोखिम) में आता है ।
  • साहिबगंज और गोड्डा जिले का उत्तरी भाग भूकंपीय ज़ोन IV (Zone IV) के अंतर्गत आता है जो सर्वाधिक संवेदनशील है ।

झारखंड में बाढ़ (Flood) आपदा से मुख्य रूप से कौन-सा मैदानी जिला सर्वाधिक प्रभावित होता है?

  • साहिबगंज
  • रांची
  • गुमला
  • सिमडेगा

Explanation:

  • गंगा नदी के प्रवाह क्षेत्र में स्थित होने के कारण साहिबगंज जिला राज्य में मानसून के दौरान बाढ़ की समस्या से सबसे अधिक प्रभावित होता है ।
  • इसके अतिरिक्त उत्तर-पूर्वी जिले (जैसे पाकुड़) भी गंगा और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर बढ़ने पर बाढ़ प्रभावित हो जाते हैं ।

झारखंड में जंगलों की आग (Forest Fire) की आपदा से सुरक्षा और नियंत्रण हेतु किस नोडल विभाग को उत्तरदायी बनाया गया है?

  • वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग
  • गृह एवं आपदा प्रबंधन विभाग
  • कृषि विभाग
  • राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग

Explanation:

  • वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग राज्य में वनाग्नि की घटनाओं की मॉनिटरिंग और नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है ।
  • बसंत और ग्रीष्म ऋतु के दौरान शुष्क पत्तों के कारण राज्य के लातेहार, पलामू, गढ़वा और सिमडेगा के वनों में आग लगने का खतरा अधिक रहता है ।

झारखंड राज्य में आपदा प्रबंधन ज्ञान सह प्रदर्शन केंद्र (Disaster Management Knowledge cum Demonstration Centre) को किस नाम से जाना जाता है?

  • सृजन (SRIJAN)
  • कवच (KAVACH)
  • राहत (RAHAT)
  • सुरक्षा (SURAKSHA)

Explanation:

  • झारखंड में आपदाओं के प्रति जागरूकता, प्रशिक्षण और ज्ञान प्रसार हेतु स्थापित केंद्रों को ‘सृजन’ (SRIJAN) नाम दिया गया है ।
  • यह केंद्र आम नागरिकों और अधिकारियों को आपदा पूर्व तैयारियों और बचाव उपायों का प्रशिक्षण प्रदान करता है ।

झारखंड आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा राज्य के किस संस्थान को भूकंप एवं भू-धंसान आपदा पर शोध एवं तकनीकी सहायता हेतु नोडल केंद्र बनाया गया है?

  • IIT (ISM) धनबाद
  • BIT मेसरा
  • NIT जमशेदपुर
  • बिरसा कृषि विश्वविद्यालय

Explanation:

  • खनन, भू-धंसान और भू-गर्भीय आपदाओं के तकनीकी अध्ययन एवं विशेषज्ञता के लिए IIT (ISM) धनबाद को तकनीकी भागीदार बनाया गया है ।
  • इसी प्रकार रांची विश्वविद्यालय को सूखा और बाढ़ तथा BIT मेसरा को जलविद्युत व तकनीकी आपदाओं के अध्ययन की जिम्मेदारी दी गई है ।
झारखंड में आपदा प्रबंधन-5 JPSC PT C1 Question Bank #35