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लोहरा/लोहार जनजाति में दो गाँवों के आपसी विवादों को सुलझाने के लिए किस प्रकार की संस्था का गठन किया जाता है?
- किसी खास मौके पर निर्मित अंतर्ग्रामीण परिषद्
- स्थायी पड़हा राजा पंचायत
- सतगंवइया परगना परिषद
- केंद्रीय ढोकलो महासभा
Explanation:
- लोहरा जनजाति में कोई संगठित या स्थायी केंद्रीय शासन व्यवस्था नहीं होती ।
- दो गाँवों के बीच विवाद उत्पन्न होने पर किसी विशेष अवसर पर एक अस्थायी अंतर्ग्रामीण परिषद् का गठन कर मामले को सुलझाया जाता है ।
लोहरा/लोहार जनजाति की स्वशासन प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए तथा सत्य कूट का चयन कीजिए:
1.इस जनजाति में परगना स्तर पर वंशानुगत राजा की संगठित व्यवस्था पाई जाती है ।
2.जातीय समस्याओं और सामाजिक विवादों के समाधान हेतु इनमें जातीय पंचायत होती है ।
3.दो गाँवों के बीच विवादों का निपटारा एक तदर्थ (अस्थायी) अंतर्ग्रामीण परिषद् द्वारा किया जाता है ।
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 2
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3 सभी
Explanation:
- कथन 1 असत्य है क्योंकि लोहरा जनजाति में कोई संगठित या स्थायी शासन व्यवस्था नहीं पाई जाती ।
- कथन 2 और 3 सत्य हैं; जातीय विवादों के लिए जातीय पंचायत तथा दो गाँवों के आपसी मामलों के लिए अवसर विशेष पर निर्मित अंतर्ग्रामीण परिषद होती है ।
भूमिज जनजाति की जातीय पंचायत का मुखिया क्या कहलाता है, और यह पद किस प्रकार का होता है?
- प्रधान (वंशानुगत)
- महतो (निर्वाचित)
- माँझी (मनोनीत)
- सरदार (अस्थायी)
Explanation:
- भूमिज जनजाति में जातीय पंचायत के प्रमुख को प्रधान कहा जाता है ।
- यह पद परंपरा से वंशानुगत होता है ।
भूमिज जनजाति के सामाजिक नियमों और संपत्ति अधिकारों के संदर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?
- यदि किसी परिवार में पुत्र न हो, तो संपत्ति पर गाँव के प्रधान (मुखिया) का अधिकार हो जाता है
- पैतृक संपत्ति का विभाजन सभी भाइयों में बराबर-बराबर किया जाता है
- पुत्र न होने की स्थिति में संपत्ति पर पुत्री का अधिकार होता है
- इस जनजाति में सगोत्रीय विवाह (एक ही गोत्र में विवाह) को मान्यता प्राप्त नहीं है
Explanation:
- कथन (A) असत्य है क्योंकि यदि किसी परिवार में कोई पुत्र नहीं होता है, तो संपत्ति पर पुत्री का अधिकार होता है, न कि प्रधान का ।
महली जनजाति में गंभीर अपराध के दोषी व्यक्ति को सामाजिक रूप से किस प्रकार का दण्ड सुनाया जाता है?
- सामूहिक भोज (जाति भोज) देने की सजा
- गाँव की सीमा से बाहर जीवनभर के लिए निर्वासित करना
- केवल ₹5 का करेला दण्ड
- उम्रभर के लिए बेगार (मुफ्त मजदूरी) कराना
Explanation:
- महली समाज में गंभीर अपराध करने वाले व्यक्ति पर सामूहिक भोज (जाति भोज) देने का दण्ड आयोजित किया जाता है ताकि समाज में पुनः शुद्धि हो सके ।
महली जनजाति की सामाजिक एवं न्यायिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
1.इस जनजाति में राज्य स्तर पर एक सुसंगठित और त्रिस्तरीय राजनीतिक प्रणाली पाई जाती है ।
2.गाँव के स्तर पर गठित पंचायत के माध्यम से आपसी विवादों को सुलझाया जाता है ।
3.अपराधी को आवश्यकतानुसार आर्थिक तथा शारीरिक दोनों प्रकार के दण्ड दिए जा सकते हैं ।
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 2
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3 सभी
Explanation:
- कथन 1 असत्य है क्योंकि महली जनजाति में कोई सुसंगठित शासन प्रणाली नहीं है, केवल ग्राम स्तर पर पंचायतें होती हैं ।
- कथन 2 और 3 सत्य हैं; इनमें आर्थिक व शारीरिक दोनों दण्ड प्रचलित हैं ।
माल पहाड़िया जनजाति में ग्राम पंचायत के प्रधान को किस नाम से जाना जाता है?
- माँझी
- महतो
- मुकद्दम
- गौटिया
Explanation:
- माल पहाड़िया जनजाति में ग्राम पंचायत का प्रधान माँझी कहलाता है ।
माल पहाड़िया जनजाति की स्वशासन व्यवस्था के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
- इस जनजाति में सामाजिक अपराधों के लिए संथालों की भांति ‘बिटलाहा’ जैसी कठोर सजा दी जाती है
- माँझी की सहायता हेतु गोड़ाइत तथा दीवान नामक सहायक होते हैं
- दो या अधिक गाँवों के विवाद को अंतर्ग्रामीण पंचायत द्वारा सुलझाया जाता है जिसका प्रमुख सरदार कहलाता है
- पंचायत के निर्णय की अवहेलना करने वाले व्यक्ति को गाँव से बहिष्कृत कर दिया जाता है
Explanation:
- कथन (A) असत्य है क्योंकि माल पहाड़िया जनजाति में बिटलाहा जैसी सजा का प्रावधान नहीं है । निर्णय न मानने पर केवल गाँव से बहिष्कार किया जाता है ।
सौरिया पहाड़िया जनजाति की शासन व्यवस्था में 15 से 20 गाँवों के समूह पर किस अधिकारी की व्यवस्था होती है?
- नायक
- सरदार
- माँझी
- गोड़ाइत
Explanation:
- सौरिया पहाड़िया शासन व्यवस्था में 15-20 गाँवों के स्तर पर नायक की व्यवस्था होती है जो अंतर्ग्रामीण विवादों को देखता है ।
सौरिया पहाड़िया और माल पहाड़िया शासन व्यवस्था की तुलनात्मक संरचना के संदर्भ में कौन-सा कूट सही है?
1.दोनों जनजातियों में ग्राम पंचायत का प्रधान ‘माँझी’ कहलाता है ।
2.सौरिया पहाड़िया में 78-80 गाँवों पर ‘सरदार’ तथा 15-20 गाँवों पर ‘नायक’ अंतर्ग्रामीण विवाद निपटाते हैं ।
3.सौरिया पहाड़िया का माँझी केवल राजस्व वसूलता है और धार्मिक कार्यों में भाग नहीं लेता ।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3 सभी
Explanation:
- कथन 3 असत्य है क्योंकि सौरिया पहाड़िया में माँझी झगड़ों के निपटारे के साथ-साथ धार्मिक क्रियाकलापों का संपादन भी करता है ।
- कथन 1 और 2 पूर्णतः सत्य हैं ।
करमाली जनजाति में गाँव के स्तर पर जातीय पंचायत का प्रधान क्या कहलाता है?
- मालिक
- प्रधान
- महतो
- नाये
Explanation:
- करमाली जनजाति में ग्राम स्तर की जातीय पंचायत के प्रधान को मालिक कहा जाता है, और यह पद वंशानुगत होता है ।
करमाली जनजाति की बहुस्तरीय पंचायत संरचना में संस्थाओं को उनके बढ़ते क्षेत्र/स्तर के अनुसार सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
- ग्राम जातीय पंचायत (मालिक) → सतगंवइया (परगना स्तर) → बाईसी (20-22 गाँव)
- सतगंवइया → बाईसी → ग्राम जातीय पंचायत
- बाईसी → ग्राम जातीय पंचायत → सतगंवइया
- ग्राम जातीय पंचायत → बाईसी → सतगंवइया
Explanation:
- करमाली जनजाति में सबसे निचला स्तर ग्राम पंचायत (मालिक) है, इसके ऊपर परगना स्तर पर सतगंवइया तथा सबसे शीर्ष पर 20-22 गाँवों की ‘बाईसी’ पंचायत होती है ।
परहिया जनजाति में 8 से 10 गाँवों को मिलाकर गठित की जाने वाली अंतर्ग्रामीण पंचायत को क्या कहा जाता है?
- कारा भैयारी
- जातिगोठ
- बाईसी
- चट्टी
Explanation:
- परहिया जनजाति में ग्राम स्तर की पंचायत को भैयारी/जातिगोठ कहते हैं, जबकि 8-10 गाँवों की अंतर्ग्रामीण पंचायत को कारा भैयारी कहा जाता है ।
परहिया जनजाति की प्रशासनिक एवं धार्मिक व्यवस्था के संबंध में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. ग्राम पंचायत मुखिया – महतो
2. महतो का सहायक – कहतो/खतो
3. गाँव के कल्याण हेतु पूजा-पाठ – बैगा
उपरोक्त में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
- 1, 2 और 3 सभी
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
Explanation:
- सभी तीनों युग्म सही सुमेलित हैं । परहिया जनजाति में गाँव का प्रमुख महतो, उसका सहायक कहतो/खतो तथा धार्मिक व कल्याणकारी पूजा कराने वाला बैगा होता है ।
कोरवा जनजाति में सामाजिक बहिष्कार के पश्चात दोषी व्यक्ति को पुनः समाज में शामिल करने हेतु आयोजित सामूहिक भोज प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
- भात-भीतर
- करेला दण्ड
- सेंदरा बैंसी
- कारा भैयारी
Explanation:
- कोरवा समाज में जाति से बाहर विवाह करने पर बहिष्कृत व्यक्ति को ‘भोज भात’ देने पर पुनः समाज में लिया जाता है, जिसे भात-भीतर प्रथा कहा जाता है ।
कोरवा जनजाति की न्याय प्रणाली की उस विशिष्ट प्रक्रिया को पहचानिए जो आरोपों की सत्यता जांचने के लिए अपनाई जाती है:
- गवाहों को शपथ दिलाकर सत्यता का पता लगाना
- अग्नि परीक्षा द्वारा न्याय करना
- केवल दिउरी द्वारा दिए गए स्वप्न-आदेश को मानना
- गुप्तचरों द्वारा आरोपी की निगरानी करना
Explanation:
- कोरवा जनजाति की जातीय पंचायत में मामलों की सुनवाई के दौरान गवाहों को शपथ दिलाकर साक्ष्यों एवं आरोपों की सत्यता की जाँच की जाती है ।
असुर जनजाति की शासन व्यवस्था में गाँव के समस्त विवादों का निपटारा करने वाले ‘पंच’ का निर्माण कैसे होता है?
- पाँच गाँवों के वरिष्ठ नागरिकों को मिलाकर
- केवल राजा द्वारा नियुक्त 5 सरकारी कर्मचारियों द्वारा
- गाँव के महतो और उसके 4 पारिवारिक सदस्यों द्वारा
- केवल बैगा और पुजार के समूह द्वारा
Explanation:
- असुर समाज में पाँच गाँवों के वरिष्ठ नागरिकों (अनुभवी पुरुषों) को मिलाकर पंच का निर्माण किया जाता है जो गाँव के न्यायिक फैसले सुनाते हैं ।
असुर जनजाति के पंचायत अधिकारियों और उनके संदर्भों के संबंध में कौन-सा कूट सत्य है?
1.असुर पंचायत के प्रमुख अधिकारियों में महतो, बैगा, पुजार और गोड़ाइत शामिल हैं ।
2.असुर पंचायत की बैठक में गाँव के केवल वंशानुगत प्रमुख भाग ले सकते हैं, सामान्य वयस्क पुरुष नहीं ।
3.पंच द्वारा दोषी को शारीरिक तथा आर्थिक दोनों प्रकार के दण्ड दिए जा सकते हैं ।
- केवल 1 और 3
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3 सभी
Explanation:
- कथन 2 असत्य है क्योंकि असुर पंचायत में गाँव के सभी वयस्क पुरुष सदस्य भाग ले सकते हैं ।
- कथन 1 और 3 सत्य हैं ।
बिरहोर जनजाति के सामाजिक संगठन एवं शिकार समूह के सर्वोच्च संगठन को क्या कहा जाता है?
- टंडा
- अखड़ा
- गि lose/गितिओड़ा
- किली
Explanation:
- बिरहोर जनजाति घुमंतू शिकार-संग्राहक जीवन व्यतीत करती है । इनके शिकार समूह/बस्ती के सर्वोच्च संगठन को ‘टंडा’ कहा जाता है ।
बिरहोर जनजाति की स्वशासन प्रणाली में ‘नाये’ और ‘दिगुआर/कोतवार’ की भूमिका का सही विकल्प चुनिए:
- नाये: टंडा का मुखिया | दिगुआर/कोतवार: नाये का सहयोगी
- नाये: टंडा का धार्मिक रसोइया | दिगुआर: शिकारी का प्रमुख
- नाये: संदेशवाहक | दिगुआर: सर्वोच्च राजा
- नाये: आर्थिक प्रबंधक | दिगुआर: सीमा प्रहरी
Explanation:
- बिरहोर जनजाति के टंडा का प्रमुख ‘नाये’ कहलाता है तथा नाये के सहयोगी या संदेशवाहक को ‘दिगुआर’ या ‘कोतवार’ कहा जाता है ।
बिरजिया जनजाति की जातीय पंचायत के गठन में कौन-कौन से सदस्य शामिल होते हैं?
- बैगा, बेसरा, धावक तथा गाँव के बुजुर्ग व सम्मानित लोग
- केवल ब्रिटिश अधिकारी और जमींदार
- केवल गाँव का महतो और पाहन
- परगना का राजा और उसके सैनिक
Explanation:
- बिरजिया जनजाति की जातीय पंचायत में बैगा, बेसरा, धावक और गाँव के गणमान्य व बुजुर्ग लोग मिलकर सामाजिक मामलों का फैसला करते हैं ।
बिरजिया जनजाति की पंचायत व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1.इस जनजाति में जातीय पंचायत का मुखिया कोई गणमान्य व्यक्ति होता है ।
2.जातीय पंचायत के पास केवल विवाह संबंधी मामलों की सुनवाई का अधिकार है, संपत्ति विवादों का नहीं ।
3.इनकी पंचायत में धावक और बेसरा जैसे सहयोगी अधिकारी भी शामिल होते हैं ।
- केवल 1 और 3
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3 सभी
Explanation:
- कथन 2 असत्य है क्योंकि इनकी जातीय पंचायत सभी प्रकार के सामाजिक व पारिवारिक मामलों का निपटारा करती है ।
- कथन 1 और 3 सही हैं ।
सबर जनजाति की जातीय पंचायत का प्रमुख ‘प्रधान’ कहलाता है; प्रधान के आदेशों को ग्रामीणों तक कौन पहुँचाता है?
- गोड़ाइत
- डाकुआ
- कोतवार
- दिगुआर
Explanation:
- सबर जनजाति में प्रधान की सहायता गोड़ाइत करता है, जो उसके आदेशों एवं सूचनाओं को गाँव के लोगों तक पहुँचाने का काम करता है ।
सबर जनजाति की जातीय पंचायत व्यवस्था की एक प्रमुख विशेषता क्या है?
- जातीय पंचायत के सभी पद पूर्णतः वंशानुगत होते हैं
- प्रत्येक वर्ष लोकतांत्रिक मतदान से प्रधान चुना जाता है
- पंचायत में बाहरी ठेकेदारों का नियंत्रण होता है
- इसमें महिलाओं को प्रधान का पद देना अनिवार्य है
Explanation:
- सबर जनजाति की जातीय पंचायत व्यवस्था में परंपरा के अनुसार सभी पद वंशानुगत होते हैं ।
खोंड जनजाति में पारंपरिक रूप से गाँव के मुखिया को क्या कहा जाता था (जो वर्तमान में सर्वसम्मति से ‘सरपंच’ में बदल गया है)?
- गौटिया
- सयाना
- मादी
- दोहर
Explanation:
- खोंड जनजाति में पारंपरिक मुखिया को गौटिया कहा जाता था । वर्तमान समय में यह पद समाप्त हो चुका है और अब सर्वसम्मति से सरपंच चुना जाता है ।
खोंड जनजाति की शासन व्यवस्था में आए ऐतिहासिक परिवर्तन के संबंध में सही कथन चुनिए:
- पारंपरिक ‘गौटिया’ का पद अब समाप्त हो गया है और वर्तमान में ग्राम पंचायत का प्रधान सर्वसम्मति से चुना गया ‘सरपंच’ होता है
- वर्तमान में खोंड समाज में केवल ‘राजा’ का शासन चलता है
- ब्रिटिश काल से ही इनमें मानकी-मुंडा प्रणाली लागू की गई है
- खोंड जनजाति में केवल धार्मिक प्रधान ही प्रशासनिक फैसले लेता है
Explanation:
- खोंड जनजाति में समय के साथ बदलाव आया है; पुराना पारंपरिक पद ‘गौटिया’ समाप्त होकर अब सर्वसम्मत ‘सरपंच’ की व्यवस्था स्थापित हो चुकी है ।
बथुडी जनजाति की परंपरागत पंचायत व्यवस्था का प्रधान कौन होता है जो धार्मिक क्रियाकलाप भी कराता है?
- दोहर (वंशानुगत)
- नायके (निर्वाचित)
- पाहन (अस्थायी)
- लासेर टंगाय (मनोनीत)
Explanation:
- बथुडी जनजाति में पारंपरिक पंचायत के प्रमुख को दोहर कहा जाता है । यह पद वंशानुगत होता है और वह पूजा-पाठ भी संपन्न कराता है ।
बथुडी जनजाति के सामाजिक एवं प्रशासनिक ढाँचे के संबंध में सही कूट का चयन कीजिए:
1.ग्राम पंचायत का प्रधान ‘दोहर’ कहलाता है तथा अंतर्ग्रामीण पंचायत का मुखिया ‘प्रधान’ कहलाता है ।
2.इस जनजाति में सगोत्र विवाह को एक गंभीर अपराध माना जाता है ।
3.दोहर का पद प्रतिवर्ष बदलकर नए योग्य व्यक्ति को दिया जाता है ।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3 सभी
Explanation:
- कथन 3 असत्य है क्योंकि दोहर का पद वंशानुगत होता है, बदला नहीं जाता ।
- कथन 1 और 2 सही हैं (सगोत्र विवाह निषेध है तथा अंतर्ग्रामीण मुखिया प्रधान कहलाता है) ।
किसान जनजाति में अंतर्ग्रामीण विवादों के समाधान के लिए किस पंचायत का गठन किया जाता है?
- परगना पंचायत
- कारा भैयारी
- लोबीर सेंदरा
- सतगंवइया
Explanation:
- किसान जनजाति में कई गाँवों को मिलाकर परगना पंचायत बनाई जाती है, जो अंतर्ग्रामीण विवादों को सुलझाती है ।
किसान जनजाति की पंचायत व्यवस्था के नियमों के संदर्भ में कौन-सा कथन अत्यंत अनोखा और सत्य है?
- जो व्यक्ति पंचायत की बैठक बुलवाता है, उसे संचालन का सारा खर्च स्वयं वहन करना पड़ता है
- पंचायत में फैसला सुनाने पर केवल पुलिस अधिकारी को शुल्क दिया जाता है
- बैठक बुलाने वाले को संपूर्ण गाँव द्वारा कर दिया जाता है
- पंचायत का सारा खर्च परगना का राजा उठाता है
Explanation:
- किसान जनजाति में यह विशेष नियम है कि जो व्यक्ति पंचायत की बैठक आहूत करता/बुलाता है, वही उसके खान-पान एवं संचालन का सारा खर्च वहन करता है ।
घुमंतू बंजारा जनजाति में गाँव/समूह की समस्याओं के निवारण हेतु गठित ‘सामुदायिक परिषद्’ का प्रमुख कौन कहलाता है?
- नायक
- सरदार
- मादी
- सयाना
Explanation:
- बंजारा जनजाति में कोई संगठित स्वशासन प्रणाली नहीं है; इनमें एक सामुदायिक परिषद होती है जिसका प्रमुख नायक कहलाता है ।
बंजारा जनजाति की स्वशासन प्रणाली के संबंध में कौन-सा कथन सत्य है?
- नायक का चुनाव बंजारा जनजाति के सदस्यों द्वारा स्वयं लोकतांत्रिक ढंग से किया जाता है
- नायक का पद पूरी तरह से वंशानुगत और ब्रिटिश स्वीकृत होता है
- बंजारा समाज में 84 गाँवों पर एक राजा की स्थायी व्यवस्था होती है
- इनमें केवल महिलाएँ ही सामुदायिक परिषद की अध्यक्ष बनती हैं
Explanation:
- बंजारा जनजाति में सामुदायिक परिषद के प्रमुख नायक का चुनाव जनजाति के सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति/लोकतांत्रिक तरीके से किया जाता है ।
बिंझिया जनजाति में प्रत्येक घर के प्रतिनिधि सदस्यों द्वारा गठित समिति का प्रमुख क्या कहलाता है, जिसका निर्णय अंतिम होता है?
- करटाहा
- मादी
- गद्दी
- मुकद्दम
Explanation:
- बिंझिया जनजाति में प्रत्येक घर के प्रतिनिधि मिलकर एक समिति बनाते हैं जिसका प्रमुख करटाहा कहलाता है । करटाहा का फैसला अंतिम और सर्वमान्य होता है ।
बिंझिया जनजाति के सामाजिक निषेधों और जातीय पंचायत के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन असत्य है?
- इस समाज में गोमांस भक्षण पूरी तरह स्वीकार्य है और इस पर कोई दण्ड नहीं दिया जाता
- जातीय पंचायत के प्रधान ‘मादी’ तथा ‘गद्दी’ कहलाते हैं
- गोमांस भक्षण करने वाले व्यक्ति को समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है
- कुछ अपराधों के मामलों में गाँव को सामूहिक भोज (जाति भोज) देने पर बहिष्कृत व्यक्ति को पुनः शामिल किया जा सकता है
Explanation:
- कथन (A) असत्य है क्योंकि बिंझिया समाज में गोमांस का भक्षण सख्त वर्जित है, और ऐसा करने पर समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है ।
गोंड जनजाति में ग्राम स्तर की जातीय पंचायत के मुखिया को क्या कहा जाता है?
- बैगा (या सयाना)
- महतो
- मालिक
- प्रधान
Explanation:
- गोंड जनजाति में जातीय पंचायत का मुखिया बैगा कहलाता है, जिसे ‘सयाना’ भी कहा जाता है ।
गोंड जनजाति में यदि कोई व्यक्ति जातीय पंचायत द्वारा सुनाए गए फैसले की अवहेलना करता है, तो उसके साथ क्या कार्रवाई की जाती है?
- उसे समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है (जो क्षमा माँगने व जाति भोज देने पर ही वापस वापस समाप्त होता है)
- उसे तुरंत शारीरिक रूप से निष्कासित कर आजीवन कारावास दिया जाता है
- उस पर कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि पंचायत का फैसला बाध्यकारी नहीं है
- उसे गाँव का नया बैगा बना दिया जाता है
Explanation:
- गोंड जनजाति में फैसले की अवहेलना पर सामाजिक बहिष्कार की कठोर सजा है । हालाँकि, क्षमा माँगने और जाति भोज देने पर उसे पुनः समाज में शामिल कर लिया जाता है ।
चेरो जनजाति की त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में जिला स्तर के पंचायत प्रधान को किस नाम से जाना जाता है?
- सभापति
- मुखिया
- सरदार
- राजा
Explanation:
- चेरो जनजाति में ग्राम व अंचल स्तर पर पंचायत प्रधान ‘मुखिया’ कहलाता है, जबकि जिला स्तर की पंचायत का प्रधान सभापति कहलाता है ।
चेरो जनजाति की स्वशासन व्यवस्था की संरचनात्मक व्यवस्था का सही सुमेलित रूप कौन-सा है?
- गाँव व अंचल स्तर: मुखिया | जिला स्तर: सभापति
- गाँव स्तर: सभापति | जिला स्तर: मुखिया
- गाँव स्तर: राजा | जिला स्तर: दीवान
- अंचल स्तर: परगनैत | जिला स्तर: देशमाँझी
Explanation:
- चेरो जनजाति में पंचायत का ढांचा तीन स्तरों (गाँव, अंचल, जिला) में बंटा है, जहाँ गाँव/अंचल का प्रमुख मुखिया तथा जिला स्तर का प्रमुख सभापति होता है ।
चीक बड़ाइक जनजाति की अंतर्ग्रामीण पंचायत का प्रमुख कौन होता है, जिसकी सहायता दीवान और पानरे करते हैं?
- राजा
- महतो
- प्रधान
- सयाना
Explanation:
- चीक बड़ाइक में कोई सुव्यवस्थित ग्राम पंचायत नहीं होती । कई गाँव मिलकर अंतर्ग्रामीण पंचायत बनाते हैं जिसका प्रमुख राजा कहलाता है ।
चीक बड़ाइक जनजाति की स्वशासन प्रणाली के संदर्भ में कौन-सा कूट सही है?
1.इस जनजाति में सभी प्रशासनिक व सामाजिक पद वंशानुगत होते हैं ।
2.अंतर-ग्रामीण विवादों का निपटारा प्रथागत (पारंपरिक) नियमों के आधार पर राजा द्वारा किया जाता है ।
3.राजा की सहायता के लिए ‘दीवान’ तथा ‘पानरे’ जैसे पद मौजूद होते हैं ।
- 1, 2 और 3 सभी
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
Explanation:
- तीनों कथन सत्य हैं । चीक बड़ाइक समाज में पद वंशानुगत होते हैं और दीवान/पानरे की मदद से राजा पारंपरिक नियमों द्वारा न्याय करता है ।
बेदिया जनजाति में संपूर्ण समाज के स्तर पर अवस्थित सर्वोच्च पंचायत के प्रमुख को क्या कहा जाता है?
- परगनैत
- सरकार
- प्रधान
- महतो
Explanation:
- बेदिया जनजाति में त्रिस्तरीय व्यवस्था पाई जाती है: ग्राम स्तर पर ‘प्रधान/महतो’, अंतर्ग्रामीण स्तर पर ‘सरकार’, तथा संपूर्ण समाज के सर्वोच्च स्तर पर ‘परगनैत’ होता है ।
बेदिया जनजाति की प्रशासनिक संरचना को निचले स्तर से शीर्ष स्तर के सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
- ग्राम पंचायत (प्रधान/महतो) → अंतर्ग्रामीण पंचायत (सरकार) → संपूर्ण समाज पंचायत (परगनैत)
- अंतर्ग्रामीण पंचायत (सरकार) → ग्राम पंचायत (प्रधान) → संपूर्ण समाज (परगनैत)
- संपूर्ण समाज (परगनैत) → अंतर्ग्रामीण पंचायत (सरकार) → ग्राम पंचायत (प्रधान)
- ग्राम पंचायत (सरकार) → अंतर्ग्रामीण पंचायत (परगनैत) → संपूर्ण समाज (प्रधान)
Explanation:
- बेदिया समाज में पदों का क्रम है: ग्राम स्तर पर प्रधान/महतो (सहयोगी: गड़ौत), कई गाँवों के स्तर पर सरकार, तथा शीर्ष पर परगनैत (सभी पद वंशानुगत) ।
कोरा जनजाति की पारंपरिक ग्राम पंचायत का मुखिया ‘महतो’ कहलाता है; महतो के दो प्रमुख सहायक कौन होते हैं?
- प्रामाणिक तथा जोगमाँझी
- दीवान तथा पानरे
- गोड़ाइत तथा डाकुआ
- बैगा तथा पुजार
Explanation:
- कोरा जनजाति की ग्राम पंचायत में मुखिया महतो की सहायता के लिए प्रामाणिक तथा जोगमाँझी नामक दो सहयोगी पद होते हैं ।
कोरा जनजाति की ग्राम पंचायत के कार्यकरण के संदर्भ में कौन-सा कथन सही है?
- पंचायत में प्राचीन रीति-रिवाजों और पारंपरिक मान्यताओं के आधार पर निर्णय लिए जाते हैं
- महतो अकेला बिना किसी सहायक के तानाशाही निर्णय लेता है
- विवादों का समाधान केवल लिखित अंग्रेजी कानूनों के आधार पर होता है
- गाँव का मुखिया हर 6 महीने में बदल दिया जाता है
Explanation:
- कोरा जनजाति अपनी मौखिक परंपराओं और प्रचलित रीति-रिवाजों के आधार पर ही पंचायत में विवादों का निष्पादन करती है ।
गौड़ाइत जनजाति में पारिवारिक संपत्ति विभाजन के संदर्भ में कौन-सा सामाजिक नियम लागू होता है?
- पिता की संपत्ति केवल पुत्रों में बराबर बाँटी जाती है; पुत्री को कोई अधिकार नहीं होता
- पुत्री को पुत्र से दोगुना हिस्सा दिया जाता है
- संपत्ति का सारा अधिकार केवल ज्येष्ठ पुत्र (बड़े बेटे) को मिलता है
- पुत्र और पुत्री दोनों को बराबर-बराबर हिस्सा मिलता है
Explanation:
- गौड़ाइत जनजाति में पैतृक संपत्ति का विभाजन केवल पुत्रों के बीच समान रूप से होता है; पुत्री का पिता की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं होता ।
गौड़ाइत जनजाति की जातीय पंचायत के संदर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?
- तलाक और विधवा पुनर्विवाह जैसे पारिवारिक मामलों पर जातीय पंचायत को सुनवाई का कोई अधिकार नहीं है
- विभिन्न सामाजिक एवं पारिवारिक विवादों का निपटारा जातीय पंचायत द्वारा किया जाता है
- पिता की संपत्ति का बँटवारा केवल बेटों में होता है
- जातीय पंचायत में सामाजिक नियमों का पालन कराया जाता है
Explanation:
- कथन (A) असत्य है क्योंकि गौड़ाइत समाज में तलाक तथा विधवा विवाह से जुड़े संवेदनशील मामले सुनवाई हेतु जातीय पंचायत के समक्ष ही प्रस्तुत किए जाते हैं ।
कवर जनजाति में कई अंचलों को मिलाकर गठित की जाने वाली ‘केंद्रीय पंचायत’ का मुख्य कार्य क्या होता है?
- संपूर्ण क्षेत्र से संबंधित गंभीर विवादों एवं मामलों का निवारण करना
- केवल गाँव में पूजा-पाठ का प्रबंध करना
- केवल बाहरी राज्यों से लगान वसूलना
- केवल युवाओं का विवाह तय कराना
Explanation:
- कवर जनजाति में बहुस्तरीय ढांचा है जिसमें शीर्ष पर स्थित केंद्रीय पंचायत संपूर्ण क्षेत्र से जुड़े विवादों का समाधान करती है ।
कवर जनजाति के विभिन्न प्रशासनिक स्तरों और उनके प्रमुखों के युग्मों पर विचार कीजिए:
1. जातीय पंचायत का मुखिया – सयाना
2. ग्राम पंचायत का मुखिया – पटेल या प्रधान
3. अंचल स्तरीय पंचायत – अंतर्ग्रामीण विवादों का निपटारा
उपरोक्त में से कौन-से युग्म सही हैं?
- 1, 2 और 3 सभी
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
Explanation:
- कवर जनजाति में जातीय पंचायत प्रमुख सयाना, ग्राम पंचायत प्रमुख पटेल/प्रधान, और अंचल पंचायत अंतर्ग्रामीण विवादों के लिए जिम्मेदार होती है (सभी युग्म सही हैं) ।
कोल जनजाति की पारंपरिक पंचायत का मुखिया क्या कहलाता है, जिसका फैसला सभी ग्रामीणों के लिए बाध्यकारी होता है?
- माँझी
- महतो
- प्रधान
- मादी
Explanation:
- कोल जनजाति की पारंपरिक पंचायत का मुखिया ‘माँझी’ कहलाता है । वही गाँव के समस्त सामाजिक मुकदमों का निपटारा करता है ।
कोल जनजाति की स्वशासन प्रणाली के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
- पंचायत द्वारा सुनाए गए फैसले को गाँव वाले नकार सकते हैं और यह सर्वमान्य नहीं होता
- गाँव के सभी मामलों का निष्पादन पारंपरिक पंचायत में ही किया जाता है
- पंचायत का मुखिया ‘माँझी’ कहलाता है
- यह एक पारंपरिक पंचायत व्यवस्था का पालन करती है
Explanation:
- कथन (A) असत्य है क्योंकि कोल जनजाति की पंचायत द्वारा सुनाया गया फैसला अंतिम और सभी के लिए मान्य होता है ।
खरवार जनजाति में अंतर्ग्रामीण पंचायतों को गाँवों की संख्या के आधार पर क्या कहा जाता है (क्रमशः 4, 5 और 7 गाँव)?
- 4 गाँव: चट्टी | 5 गाँव: पचौरा | 7 गाँव: सतौरा
- 4 गाँव: सतौरा | 5 गाँव: पचौरा | 7 गाँव: चट्टी
- 4 गाँव: पचौरा | 5 गाँव: चट्टी | 7 गाँव: सतौरा
- 4 गाँव: कारा भैयारी | 5 गाँव: बाईसी | 7 गाँव: पड़हा
Explanation:
- खरवार जनजाति में अंतर्ग्रामीण पंचायतें गाँवों की संख्या से पहचानी जाती हैं: 4 गाँवों की पंचायत चट्टी, 5 गाँवों की पचौरा, तथा 7 गाँवों की पंचायत सतौरा कहलाती है ।
खरवार जनजाति की सामाजिक न्याय व्यवस्था के संदर्भ में कौन-सा कूट सत्य है?
1.जातीय पंचायत का प्रमुख ‘मुखिया’ कहलाता है ।
2.दो या अधिक गाँवों के विवादों को सुलझाने के लिए चट्टी, पचौरा तथा सतौरा जैसी व्यवस्थाएँ हैं ।
3.पंचायतों के निर्णय का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को गाँव से बहिष्कृत कर दिया जाता है ।
- 1, 2 और 3 सभी
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
Explanation:
- तीनों कथन सत्य हैं । खरवार जनजाति में मुखिया प्रधान होता है, चट्टी/पचौरा/सतौरा अंतर्ग्रामीण संस्थाएँ हैं और निर्णय न मानने पर बहिष्कार की सजा है ।
बैगा जनजाति में परंपरागत जातीय पंचायत का प्रमुख कौन होता है, और यह पद किस प्रकार का होता है?
- मुकद्दम (वंशानुगत)
- चारिदार (अस्थायी)
- सयाना (मनोनीत)
- सिख (निर्वाचित)
Explanation:
- बैगा जनजाति की पंचायत का प्रधान मुकद्दम कहलाता है और यह पद वंशानुगत होता है ।
बैगा जनजाति की शासन व्यवस्था में मुकद्दम, उसके सहायकों और संदेशवाहक की सही भूमिकाओं का चयन कीजिए:
- मुकद्दम: पंचायत प्रमुख | सयाना व सिख: ग्रामीणों द्वारा निर्वाचित सहायक | चारिदार: संदेशवाहक
- मुकद्दम: संदेशवाहक | सयाना: सर्वोच्च राजा | चारिदार: धार्मिक पुजारी
- मुकद्दम: केवल खजांची | सयाना व सिख: सिपाही | चारिदार: मुखिया
- मुकद्दम: बाहरी आक्रमणों का प्रहरी | चारिदार: न्याय करने वाला पंच
Explanation:
- बैगा जनजाति में मुकद्दम (प्रधान), उसके दो निर्वाचित सहयोगी सयाना एवं सिख, तथा पंचायत की सूचनाएँ ग्रामीणों तक पहुँचाने वाला संदेशवाहक चारिदार कहलाता है ।
