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‘झारखंड के सदान’ के संदर्भ में ‘सदान’ शब्द का मूल और प्राथमिक अर्थ क्या है?

  • झारखंड के मूल गैर-जनजातीय (Non-Tribal) अधिवासी
  • बाहर से आकर बसे केवल व्यापारी वर्ग
  • केवल घुमंतू शिकारी जनजातियाँ
  • झारखंड के जमींदार और शासक वर्ग

Explanation:

  • झारखंड की जनसंख्या को मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया जाता है: ‘आदिवासी’ (जनजातीय) तथा ‘सदान’ (गैर-जनजातीय मूल निवासी)
  • सदान वे लोग हैं जो कई शताब्दियों या सदियों से झारखंड में स्थायी रूप से निवास कर रहे हैं परंतु वे जनजातीय श्रेणी में नहीं आते ।

झारखंड के सदानों द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं (जैसे नागपुरी, खोरठा, कुरमाली, पंचपरगनिया) को सामूहिक रूप से किस भाषा समूह के अंतर्गत रखा जाता है?

  • सदानी / सादरी (आर्य भाषा परिवार)
  • द्रविड़ भाषा परिवार
  • ऑस्ट्रो-एशियाटिक भाषा परिवार
  • तिब्बती-बर्मन भाषा परिवार

Explanation:

  • सदानों की मातृभाषाओं (नागपुरी, खोरठा, कुरमाली, पंचपरगनिया) को सामूहिक रूप से सदानी/सादरी कहा जाता है ।
  • यह भाषा समूह इंडो-आर्यन (आर्य) भाषा परिवार से संबंधित है ।

सदान और आदिवासी (जनजातीय) समाज के बीच संबंधों के संदर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?

  • सदान और आदिवासी दोनों शताब्दियों से एक-दूसरे के पूरक के रूप में साथ-साथ सांस्कृतिक सह-अस्तित्व में रहते आए हैं
  • सदान और आदिवासियों के बीच ऐतिहासिक रूप से केवल हिंसक जातीय संघर्ष रहा है
  • सदान अंग्रेजों के शासनकाल में पहली बार 19वीं सदी में बाहर से लाए गए थे
  • सदानों की भाषा-संस्कृति का आदिवासियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा

Explanation:

  • झारखंड की सामाजिक संरचना में सदान और आदिवासी एक-दूसरे के सांस्कृतिक व सामाजिक पूरक हैं ।
  • दोनों वर्ग ग्रामीण व्यवस्था, पर्व-त्योहारों (जैसे सरहुल, कर्मा) और कृषि गतिविधियों में एक-दूसरे के साथ गहरे ताने-बाने में बंधे हुए हैं ।

सदान समाज की सामाजिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं के संदर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?

  • सदान समाज पूर्णतः मातृसत्तात्मक होता है तथा इनमें वंश परंपरा माता के नाम से चलती है
  • सदान समाज पितृसत्तात्मक होता है
  • सदानों में हिंदू धर्म तथा स्थानीय लोक-संस्कृति का सुंदर समन्वय पाया जाता है
  • सदानों के प्रमुख त्योहारों में कर्मा, जितिया, सोहराय और टुसु आदि शामिल हैं

Explanation:

  • कथन (A) असत्य है क्योंकि सदान समाज पितृसत्तात्मक (Patriarchal) होता है, जहाँ परिवार का मुखिया पिता होता है ।

झारखंड की सदान जनजातियों/जातियों के मुख्य आर्थिक आधार एवं व्यवसाय के संदर्भ में सही विकल्प कौन-सा है?

  • कृषि, पशुपालन तथा पारंपरिक शिल्पकला (जैसे लुहार, कुम्हार, बड़ाई आदि कार्य)
  • केवल बड़े पैमाने पर जहाजरानी और समुद्री व्यापार
  • केवल जंगलों से कंद-मूल एवं शिकार का संग्रहण
  • केवल आईटी (IT) और कॉर्पोरेट नौकरियाँ

Explanation:

  • सदानों का प्राथमिक व्यवसाय कृषि एवं पशुपालन है ।
  • साथ ही विभिन्न सदान जातियाँ गाँव की आवश्यकताओं हेतु लोहारी, कुम्भकारी, बढ़ईगिरी और बुनाई जैसे पारंपरिक हस्तशिल्प कार्यों में संलग्न रही हैं ।

झारखंड के ‘सदान’ के सांस्कृतिक इतिहास और पहचान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए तथा सत्य कूट का चयन कीजिए:
1.’दीकू’ और ‘सदान’ दोनों शब्द एक ही अर्थ को व्यक्त करते हैं और दोनों बाहर से आए नए लोगों के लिए प्रयोग होते हैं।
2.सदानों की अपनी विशिष्ट भाषाएँ (नागपुरी, खोरठा आदि) हैं जिन्हें सदानी भाषाएँ कहा जाता है।
3.झारखंड आंदोलन में सदान और आदिवासी दोनों समुदायों ने क्षेत्रीय पहचान हेतु योगदान दिया।

  • केवल 2 और 3
  • केवल 1 और 2
  • केवल 1 और 3
  • 1, 2 और 3 सभी

Explanation:

  • कथन 1 असत्य है क्योंकि ‘दीकू’ शब्द मुख्यतः बाहर से आए शोषणकारी/गैर-झारखण्डियों के लिए प्रयुक्त होता है, जबकि सदान झारखंड के भूमिपुत्र (मूल निवासी) हैं ।
  • कथन 2 और 3 सत्य हैं ।

सदानों की शारीरिक बनावट और जातीय विविधता के संदर्भ में कौन-सा कथन झारखंड के सामाजिक इतिहास को सटीक रूप से दर्शाता है?

  • सदानों में विभिन्न जातियों (जैसे प्रमाणिक, महतो, अहीर, लोहरा, कुम्हार आदि) का समावेश है, जिनमें आर्य और द्रविड़ दोनों प्रजातीय लक्षण मिलते हैं
  • सदान केवल एक ही विशिष्ट जाति का नाम है
  • सदानों का जातीय वर्गीकरण केवल ब्रिटिश काल के दौरान ही संभव हुआ
  • सदान झारखंड के केवल शहरी क्षेत्रों में ही पाए जाते हैं

Explanation:

  • सदान कोई एक अकेली जाति नहीं बल्कि विभिन्न जातियों का एक समूह (जैसे महतो/कुड़मी, नाई, लोहार, कुम्हार, तमोली, सोनार आदि) है ।
  • इनमें प्रजातीय दृष्टि से आर्य और द्रविड़ दोनों समूहों के शारीरिक लक्षण देखने को मिलते हैं ।

सदान समाज में प्रचलित पारंपरिक लोक नृत्य एवं लोक संगीत के संदर्भ में कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?

  • लोक नृत्य: झूमर, डमकच, फगुआ | लोक संगीत: नागपुरी/सदानी संगीत
  • लोक नृत्य: बिहू | लोक संगीत: बाऊल
  • लोक नृत्य: गरबा | लोक संगीत: लावणी
  • लोक नृत्य: छऊ (केवल) | लोक संगीत: कर्नाटकी संगीत

Explanation:

  • सदान संस्कृति में झूमर (जनानी व मर्दानी), डमकच, फगुआ, अगनई आदि लोक नृत्य तथा सदानी लोकगीत अत्यंत लोकप्रिय और समृद्ध हैं ।

झारखंड के संदर्भ में ‘सदान’ और ‘दीकू’ के अंतर को स्पष्ट करने वाला सबसे उपयुक्त तर्क कौन-सा है?

  • सदान झारखंड के सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक मूल निवासी हैं, जबकि दीकू उन बाहरी लोगों को कहा गया जो शोषण के उद्देश्य से बाद में आए
  • सदान बाहरी व्यापारी हैं और दीकू झारखंड के आदिवासी हैं
  • सदान केवल संस्कृत बोलते हैं और दीकू केवल अंग्रेजी बोलते हैं
  • सदान और दीकू में कोई अंतर नहीं है, दोनों एक ही जनजाति के दो नाम हैं

Explanation:

  • झारखंडी संदर्भ में ‘सदान’ यहाँ की मिट्टी से जुड़े प्राचीन गैर-जनजातीय मूल निवासी हैं, जबकि ‘दीकू’ (दिक्कू) उन शोषक बाहरी मध्यस्थों/महाजनों को कहा गया जो ब्रिटिश काल में यहाँ आकर बसे थे ।

सदानों की धार्मिक मान्यताओं और देवी-देवताओं की पूजा पद्धति के संदर्भ में कौन-सा कथन सही है?

  • सदान मुख्य रूप से हिंदू धर्म और उसकी स्थानीय मान्यताओं को मानते हैं तथा सूर्य (सूरजही), शीतला देवी, मनसा देवी और ग्राम देवताओं की पूजा करते हैं
  • सदान किसी भी प्रकार के धार्मिक रीति-रिवाज या पूजा-पाखंड को स्वीकार नहीं करते
  • सदान केवल बौद्ध धर्म के नियमों का पालन करते हैं
  • सदान केवल वैदिक यज्ञों का आयोजन करते हैं और स्थानीय लोक-देवताओं को नहीं मानते

Explanation:

  • सदानों की धार्मिक आस्था मुख्य रूप से सनातन/हिंदू परंपराओं से जुड़ी है ।
  • वे शिव, विष्णु, दुर्गा के साथ-साथ ग्राम देवता, सूरजही (सूर्य पूजा), शीतला, मनसा माँ और करम/जितिया जैसे लोक अनुष्ठानों को पूरी निष्ठा से मनाते हैं ।
झारखण्ड के सदान – 1 JPSC PT C1 Question Bank #8