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वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार झारखंड की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes – ST) का प्रतिशत कितना है तथा राज्य में कुल कितनी जनजातियाँ सूचीबद्ध हैं?
- 26.21% प्रतिशत तथा 33 जनजातियाँ
- 28.30% प्रतिशत तथा 30 जनजातियाँ
- 24.50% प्रतिशत तथा 32 जनजातियाँ
- 30.12% प्रतिशत तथा 34 जनजातियाँ
Explanation:
- 2011 की जनगणना के अनुसार झारखंड में जनजातीय जनसंख्या राज्य की कुल आबादी का 26.21% है ।
- राज्य में कुल 32 जनजातियाँ थीं, परंतु 2022 में ‘कोल’ जनजाति को 33वीं अनुसूची में शामिल करने की अधिसूचना जारी होने के बाद वर्तमान में कुल 33 (अथवा संविधान की मूल सूची में 32/33) सूचीबद्ध जनजातियाँ हैं ।
झारखंड की जनजातियों को उनके आर्थिक क्रियाकलापों और जीविकोपार्जन के साधनों के आधार पर वर्गीकृत करने पर कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?
- घुमंतू/खाद्य संग्राहक – बिरहोर, कोरवा, हिल खड़िया | कृषक जनजाति – संथाल, उराँव, मुंडा, हो
- घुमंतू/खाद्य संग्राहक – संथाल, उराँव | कृषक जनजाति – बिरहोर, माल पहाड़िया
- शिल्पकार जनजाति – मुंडा, हो, भुईंया | कृषक जनजाति – लोहरा, कर्माली, चिक-बड़ाइक
- झूम कृषक – चिक-बड़ाइक, कर्माली | शिल्पकार जनजाति – बिरहोर, कोरवा
Explanation:
- बिरहोर, कोरवा और हिल खड़िया मुख्य रूप से जंगलों में भोजन संग्रह एवं शिकार करने वाली आदम (घुमंतू) जनजातियाँ हैं ।
- संथाल, उराँव, मुंडा और हो स्थायी कृषि कार्य करने वाली प्रमुख कृषक जनजातियाँ हैं ।
झारखंड की किस आदिम जनजाति (Primitive Tribe) को ‘लोहा गलाने की प्राचीन कला’ (Iron Smelting Craft) का विशेषज्ञ और राज्य की सबसे प्राचीन जनजाति माना जाता है?
- असुर (Asur)
- सबर (Sabar)
- परहिया (Parhaiya)
- बैगा (Baiga)
Explanation:
- असुर जनजाति झारखंड की सबसे प्राचीन आदिम जनजातियों में से एक है ।
- इन्हें पारंपरिक रूप से लोहा पिघलाने और उससे औज़ार बनाने की कला के अग्रदूत के रूप में जाना जाता है ।
संथाल जनजाति की प्रशासनिक एवं स्वशासन व्यवस्था ‘मांझी परगना शासन व्यवस्था’ में गाँव के धार्मिक प्रधान को क्या कहा जाता है?
- नायके (Naike)
- मांझी (Manjhi)
- गोड़ैत (Godait)
- जोग मांझी (Jog Manjhi)
Explanation:
- संथालों की ग्राम पंचायत का प्रमुख ‘मांझी’ होता है ।
- गाँव के धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ को संपन्न कराने वाले धार्मिक प्रधान को ‘नायके’ कहा जाता है ।
उराँव जनजाति के पारंपरिक शासन ढाँचे ‘पड़हा पंचायत शासन व्यवस्था’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए तथा सत्य कूट का चयन कीजिए:
1.कई गाँवों (जैसे 7, 12, 21 आदि) को मिलाकर एक ‘पड़हा’ (Parha) का गठन किया जाता है ।
2.पड़हा स्तर पर अंतर-ग्रामीण विवादों का निपटारा ‘पड़हा राजा’ और उसकी परिषद द्वारा किया जाता है ।
3.उराँव जनजाति में गाँव का धार्मिक प्रधान ‘पाहन’ कहलाता है ।
- 1, 2 और 3 सभी
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
Explanation:
- तीनों कथन सत्य हैं; उराँव जनजाति में ग्राम स्तर पर महतो (प्रशासनिक प्रमुख) और पाहन (धार्मिक प्रमुख) होते हैं ।
- कई गाँवों को मिलाकर ‘पड़हा’ बनता है, जिसके सर्वोच्च अधिकारी को पड़हा राजा कहते हैं जो अंतर्ग्रामीण मामलों का निपटारा करता है ।
मुंडा जनजाति की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था में ‘हातू मुंडा’ और ‘पड़ा राजा’ के पदों का स्वरूप क्या है?
- ‘हातू मुंडा’ ग्राम स्तर का वंशानुगत प्रधान होता है, जबकि ‘पड़ा राजा’ कई गाँवों की पट्टी/पड़ा का निर्वाचित या सर्वोच्च प्रमुख होता है
- दोनों पद केवल महिलाओं के लिए आरक्षित होते हैं
- ये दोनों पद राज्य सरकार द्वारा नियुक्त सरकारी कर्मचारी के होते हैं
- दोनों पद केवल तांत्रिक और झाड़-फूँक करने वाले व्यक्तियों को दिए जाते हैं
Explanation:
- मुंडा शासन व्यवस्था में गाँव के प्रधान को हातू मुंडा कहा जाता है जो वंशानुगत पद है ।
- कई मुंडा गाँवों को मिलाकर बने ‘पड़ा’ या ‘पट्टी’ के प्रमुख को पड़ा राजा कहा जाता है, जो अंतर-ग्राम विवादों का सर्वोच्च न्यायालय होता है ।
झारखंड की खड़िया जनजाति की पारंपरिक शासन व्यवस्था, जिसे ‘ढोकलो सोहोर’ (Doklo Sohor) कहा जाता है, में ‘सोहोर’ शब्द का क्या अर्थ है?
- संपूर्ण खड़िया समाज का सर्वोच्च राजा / सभापति
- गाँव का संदेशवाहक (गोटिया)
- पूजा कराने वाला पाहन
- युवागृह का संरक्षक
Explanation:
- खड़िया समाज की केंद्रीय महासभा को ‘ढोकलो’ और उसके द्वारा चुने गए संपूर्ण समाज के सर्वोच्च प्रमुख को ‘ढोकलो सोहोर’ (सोहोर अर्थात राजा/अध्यक्ष) कहा जाता है ।
झारखंड की ‘हो’ जनजाति की ‘मुंडा-मानकी शासन व्यवस्था’ (Munda-Manki System) को किस ब्रिटिश अधिकारी द्वारा औपचारिक कानूनी स्वीकृति प्रदान की गई थी?
- कैप्टन विलकिन्सन (Captain Wilkinson) – 1837
- लॉर्ड कॉर्नवालिस (Lord Cornwallis) – 1793
- थॉमस विल्सन (Thomas Wilson) – 1857
- अलेक्जेंडर क्लीवलैंड (Augustus Cleveland) – 1782
Explanation:
- हो जनजाति बहुल कोल्हान क्षेत्र में विद्रोहों के बाद 1837 में दक्षिण-पश्चिम सीमांत एजेंसी (SWFA) के तहत एजेंट कैप्टन विलकिन्सन ने उनकी पारंपरिक ‘मुंडा-मानकी व्यवस्था’ को स्वीकार कर विल्किन्सन रूल (Wilkinson Rule) के तहत कानूनी मान्यता दी ।
झारखंड की किस जनजाति में ‘पितृसत्तात्मक’ समाज के विपरीत मातृसत्तात्मक व्यवस्था के कुछ अवशेष पाए जाते हैं, जहाँ संपत्ति और वंश-परंपरा में महिलाओं का विशेष स्थान रहा है?
- चेरो और खरवार जनजाति (यद्यपि वर्तमान में अधिकांश जनजातियाँ पितृसत्तात्मक हैं)
- उराँव और मुंडा जनजाति
- संथाल और हो जनजाति
- बिरहोर और कोरवा जनजाति
Explanation:
- झारखंड की लगभग सभी जनजातियाँ मुख्य रूप से पितृसत्तात्मक (Patriarchal) और पितृवंशीय हैं ।
- यद्यपि कुछ अध्ययन दिखाते हैं कि प्राचीन काल में खड़िया और कुछ अन्य समुदायों में मातृवंशीय लक्षण थे, परंतु वर्तमान में झारखंड की सभी प्रमुख 32/33 जनजातियों का सामाजिक ढांचा पितृसत्तात्मक ही है ।
झारखंड की जनजातियों के धार्मिक जीवन के संदर्भ में ‘सरना’ (Sarna) और ‘शासन/सासंदिरी’ (Sasan / Sasandiri) क्या हैं?
- ‘सरना’ उनका पवित्र पूजा स्थल (पूजा स्थल/ग्राम देवता का स्थान) है और ‘शासन’ उनका समाधि स्थल है जहाँ पूर्वजों के स्मृति-प्रस्तर (Sasandiri) गाड़े जाते हैं
- ‘सरना’ उनका पारंपरिक नृत्य है और ‘शासन’ उनका भोजन है
- ‘सरना’ उनका युवागृह है और ‘शासन’ उनकी जातीय पंचायत है
- ‘सरना’ वधु-मूल्य प्रथा है और ‘शासन’ उनका ग्राम प्रधान है
Explanation:
- जनजातीय संस्कृति में गाँव के उस पवित्र साल/सखुआ वृक्षों के झुरमुट को ‘सरना’ कहते हैं जहाँ ग्राम देवता (सिंगबोंगा/जाहेर एरा) का निवास होता है ।
- ‘शासन’ या ‘सासंदिरी’ वह स्थान है जहाँ मृतकों की अस्थियाँ दफनाई जाती हैं और उस पर पूर्वजों की याद में बड़े पत्थर (हड़गड़ी/मेन्हिर) खड़े किए जाते हैं ।
