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भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, उनके क्रांतिकारी आंदोलन और ‘उलगुलान’ (Ulgulan) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
- बिरसा मुंडा ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ 1857 की महान क्रांति में सीधे तौर पर प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया था और वे 1857 के सिपाही विद्रोह के मुख्य नेता थे
- बिरसा मुंडा द्वारा चलाए गए महान आन्दोलन को ‘उलगुलान’ (महाविद्रोह) कहा जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य ‘अबुआ दिशुम रे अबुआ राज’ (अपना देश, अपना राज) स्थापित करना था
- बिरसा मुंडा को 2 फरवरी 2000 को चक्रधरपुर के जामकोइया जंगल में सोते समय गिरफ्तार किया गया था
- बिरसा मुंडा की 9 जून 1900 को रांची जेल में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी
Explanation:
- कथन A असत्य है क्योंकि बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को हुआ था, अतः वे 1857 की क्रांति के समय जीवित नहीं थे ।
- उन्होंने वर्ष 1895 से 1900 के बीच मुंडा उलगुलान (विद्रोह) का नेतृत्व किया था, न कि 1857 के विद्रोह का ।
झारखंड के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी, जिन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध सबसे पहले संगठित विद्रोह का बिगुल बजाया और जिन्हें ‘तिलका मांझी’ (जबरा पहाड़िया) के नाम से जाना जाता है, को किस वर्ष अंग्रेजों द्वारा फाँसी दी गई थी?
- वर्ष 1785 (भागलपुर में आम के पेड़ पर लटकाकर)
- वर्ष 1800
- वर्ष 1857
- वर्ष 1772
Explanation:
- तिलका मांझी ने 1780-1784 के दौरान ‘संथाल परगना’ (सुल्तानाबाद/भागलपुर क्षेत्र) में अंग्रेजों के विरुद्ध छापामार युद्ध का नेतृत्व किया था ।
- उन्हें धोखे से पकड़कर वर्ष 1785 में भागलपुर में एक बरगद/आम के पेड़ पर लटकाकर फाँसी दी गई थी ।
संथाल हूल (Santhal Hool) के महानायक सिद्धू और कान्हू मुर्मू ने किस ऐतिहासिक तिथि को अंग्रेजों और महाजनों के खिलाफ ‘बहिष्कार और विद्रोह’ का ऐलान करते हुए खुद को स्वतंत्र घोषित किया था?
- 30 जून 1855 (भोगनाडीह गाँव में)
- 15 नवंबर 1875
- 26 जनवरी 1850
- 10 अगस्त 1857
Explanation:
- 30 जून 1855 को साहिबगंज के भगनाडीह गाँव में हजारों संथाल एकत्रित हुए और सिद्धू-कान्हू के नेतृत्व में ‘संथाल हूल’ की शुरुआत की ।
- इसी ऐतिहासिक दिन की याद में प्रत्येक वर्ष 30 जून को झारखंड में ‘हुर् दिवस’ (Hool Diwas) मनाया जाता है ।
वीर शहीद पोटो हो (Poto Ho) के नेतृत्व में झारखंड के किस क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध ‘कोल्हान विद्रोह’ (1830-32) के दौरान जबरदस्त संघर्ष हुआ था, जिसके लिए उन्हें फाँसी दी गई थी?
- सिंहभूम (कोल्हान) क्षेत्र – रोरो नदी के तट पर
- छोटा नागपुर पठार का हजारीबाग क्षेत्र
- पलामू का शाहपुर क्षेत्र
- संथाल परगना का दुमका क्षेत्र
Explanation:
- पोटो हो और उनके साथियों ने सिंहभूम के जगन्नाथपुर के पास अंग्रेजी सेना के खिलाफ सशस्त्र विरोध किया था ।
- जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर रोरो नदी के तट पर (चाईबासा) फाँसी पर लटका दिया गया था ।
झारखंड के पलामू क्षेत्र में वर्ष 1857 के विद्रोह के प्रमुख नेता ‘नीलांबर और पीतांबर’ (भोगता बंधु) ने किसके नेतृत्व में अंग्रेजों के विरुद्ध जंग लड़ी थी?
- शेख भिखारी और उमराव सिंह के सहयोग से पलामू में चेरो-भोगता विद्रोह का नेतृत्व किया
- बाबू कुँवर सिंह के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में
- बिरसा मुंडा के साथ मिलकर
- तिलका मांझी के समय में
Explanation:
- 1857 के महान विद्रोह के दौरान पलामू के खरवार और भोगता जनजाति के वीरों नीलांबर और पीतांबर ने अंग्रेजी सत्ता के छक्के छुड़ा दिए थे, जिन्हें बाद में अंग्रेजों ने फाँसी दे दी थी ।
झारखंड के स्वतंत्रता सेनानी ‘बुद्धु भगत’ (Buddhu Bhagat), जिन्होंने लरका विद्रोह (1832) का नेतृत्व किया था, किस जनजाति से संबंधित थे?
- उराँव (Oraon) जनजाति
- मुंडा जनजाति
- संथाल जनजाति
- खरवार जनजाति
Explanation:
- बुद्धु भगत सिलगाई (रांची) के एक प्रसिद्ध उराँव नेता थे जिन्होंने ब्रिटिश लगान और अत्याचार के विरुद्ध ‘लरका विद्रोह’ (Kol Insurrection / 1831-32) का नेतृत्व किया था ।
- अंग्रेजों ने उन पर भारी इनाम रखा था और मुठभेड़ में वे शहीद हो गए थे ।
झारखंड के स्वतंत्रता संग्राम में ‘शेख भिखारी’ और ‘टिकैत उमराव सिंह’ को वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान किस स्थान पर अंग्रेजों द्वारा फाँसी दी गई थी?
- चुटियातू / चुटुपालू घाटी (रामगढ़) में एक पेड़ से लटकाकर
- राँची जेल के प्रांगण में
- हजारीबाग केंद्रीय कारा में
- डालटनगंज के किले के सामने
Explanation:
- छोटा नागपुर के कमिश्नर डाल्टन के आदेश पर रामगढ़ बटालियन के सेनानी शेख भिखारी और उनके दीवान टिकैत उमराव सिंह को रांची-रामगढ़ मार्ग पर स्थित चुटुपालू घाटी में फाँसी दी गई थी ।
झारखंड के महान स्वतंत्रता सेनानी एवं ‘धरती आबा’ के रूप में पूजे जाने वाले बिरसा मुंडा के गुरु का क्या नाम था, जिन्होंने उन्हें धार्मिक और सामाजिक सुधार की दीक्षा दी थी?
- आनंद पांडे (Anand Pandey)
- विश्वनाथ शाहदेव
- गणेश बड़ाइक
- रामदयाल मुंडा
Explanation:
- बिरसा मुंडा के प्रारंभिक जीवन और धार्मिक विचारों पर उनके गुरु आनंद पांडे का गहरा प्रभाव था, जिन्होंने उन्हें रामायण, महाभारत और हिंदू दर्शन का ज्ञान दिया था ।
1857 के विद्रोह में राँची क्षेत्र के मुक्ति आंदोलन के मुख्य सूत्रधार तथा ‘छोटा नागपुर के नागवंशियों’ के उस राजा का नाम बताइए जिन्हें अंग्रेजों ने विद्रोह के बाद फाँसी की सजा दी थी:
- विश्वनाथ शाहदेव (Thakur Vishwanath Shahdeo) एवं पांडे गणपत राय
- महाराजा दुर्जन साल
- राजा भूपाल राय
- राजा मेदनी राय
Explanation:
- ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव और उनके सेनापति पांडे गणपत राय ने 1857 में ‘विश्वनाथ मुक्ति वाहिनी सेना’ का गठन किया था ।
- दिसंबर 1858 में उन्हें राँची जिला स्कूल के पास स्थित एक पेड़ पर फाँसी दे दी गई थी ।
झारखंड की प्रथम महिला स्वतंत्रता सेनानी, जिन्होंने 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान हजारीबाग क्षेत्र में नमक सत्याग्रह और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का नेतृत्व किया था?
- सरला देवी (Sarla Devi)
- जया मुर्मू
- फूलझरी देवी
- सुशीला सामंत
Explanation:
- सरला देवी झारखंड की एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थीं जिन्होंने हजारीबाग और राँची में राष्ट्रीय आंदोलन को गति दी तथा महिलाओं को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा ।
