CDP
छात्रों के वैयक्तिक अंतरों को सुलझाने के लिए विद्यालय किस प्रकार की सहायता मुहैया करा सकता है?
- सभी छात्रों के लिए समान स्तर की पाठ्यचर्या अनुसृत करना
- छात्र केंद्रित पाठ्यचर्या अनुसृत करना और छात्रों को बहुविधि अधिगम सुविधाएँ प्रदान करना
- छात्रों के वैयक्तिक अंतरों को दूर करने के लिए सभी संभावित कदमों का प्रयोग करना
- विशेष विद्यालयों में मंद शिक्षार्थी को भेजना
Explanation :
- उत्तर: छात्र केंद्रित पाठ्यचर्या अनुसृत करना और छात्रों को बहुविधि अधिगम सुविधाएँ प्रदान करना
- वैयक्तिक अंतरों (Individual Differences) को सुलझाने के लिए विद्यालय को छात्र-केंद्रित (Student-Centered) पाठ्यचर्या अपनानी चाहिए तथा बहुविधि अधिगम (Multi-learning) सुविधाएँ प्रदान करनी चाहिए।
- प्रत्येक बालक की योग्यता, रुचि, अभिवृत्ति, बुद्धि स्तर और सीखने की शैली (Learning Style) भिन्न-भिन्न होती है।
- छात्र-केंद्रित पाठ्यचर्या में शिक्षण को बालक की आवश्यकताओं, रुचियों और क्षमताओं के अनुसार अनुकूलित (Adapt) किया जाता है।
- बहुविधि अधिगम (जैसे दृश्य-श्रव्य सामग्री, प्रोजेक्ट, समूह चर्चा, व्यावहारिक कार्य, खेल-आधारित शिक्षा) से विभिन्न प्रकार के शिक्षार्थियों की आवश्यकताएँ पूरी होती हैं।
- इस दृष्टिकोण से सभी छात्रों को अपनी गति और स्तर के अनुसार सीखने का अवसर मिलता है, जिससे वे अधिक प्रभावी ढंग से सीख सकते हैं।
शिक्षण-अधिगम विधि में व्यक्तिगत ध्यान महत्त्वपूर्ण है क्योंकि-
- समूहों में शिक्षार्थी सदा बेहतर सीखते हैं।
- शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम इसे निर्धारित करते हैं।
- प्रत्येक शिक्षार्थी को अनुशासित करने के लिए शिक्षकों को यह बेहतर सुविधाएँ प्रदान करता है।
- शिशुओं का विकास विभिन्न रूप में होता है और भिन्न-भिन्न रूप में शिक्षा मिलती है।
Explanation :
- उत्तर: शिशुओं का विकास विभिन्न रूप में होता है और भिन्न-भिन्न रूप में शिक्षा मिलती है।
- शिक्षण-अधिगम (Teaching-Learning) प्रक्रिया में व्यक्तिगत ध्यान (Individual Attention) इसलिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि प्रत्येक बालक का विकास (Development) भिन्न-भिन्न रूप में होता है और उन्हें भिन्न-भिन्न प्रकार की शिक्षा की आवश्यकता होती है।
- सभी बालक एक समान नहीं होते। उनकी बुद्धि (IQ), योग्यता, रुचि, अभिवृत्ति और पार्श्वभूमि में भिन्नता होती है।
- कोई बालक प्रतिभाशाली (Gifted) होता है, कोई सामान्य (Average), तो कोई पिछड़ा (Backward) या मंद (Slow Learner) होता है।
- प्रत्येक छात्र की आवश्यकताओं को पूरा करने और उसका समुचित विकास सुनिश्चित करने के लिए शिक्षक को प्रत्येक छात्र पर व्यक्तिगत ध्यान देना चाहिए और उसके अनुसार शिक्षण विधियों में परिवर्तन करना चाहिए।
सृजनशील छात्र का गुण होता है-
- नमनीयता का अभाव
- चिंताग्रस्त
- समस्याओं से अनजान
- बुद्धि का अभाव
Explanation :
- उत्तर: चिंताग्रस्त
- सृजनशील (Creative) छात्रों में चिंताग्रस्त (Anxious) होने का गुण पाया जाता है, क्योंकि वे नई चीजों, समस्याओं और विचारों को लेकर संवेदनशील होते हैं।
- सृजनात्मक बालकों की प्रमुख विशेषताएँ:
- ये संवेदनशील (Sensitive) होते हैं।
- जटिलता (Complexity) में विशेष रुचि रखते हैं।
- जिम्मेदारी की भावना (Sense of Responsibility) होती है।
- इनका चिंतन स्पष्ट (Clear Thinking) होता है।
- अत्यधिक लगनशील (Dedicated) व परिश्रमी (Hardworking) होते हैं।
- ये अपने आस-पास के वातावरण व घटनाओं के प्रति जागरूक (Aware) होते हैं।
- संदेह (Skepticism) की मात्रा अधिक होती है, इसलिए हर चीज को परखकर मानने की प्रवृत्ति होती है।
- सृजनशीलता के लिए बुद्धि का निश्चित स्तर (न्यूनतम) आवश्यक है, परंतु अधिक बुद्धि होने का अर्थ सृजनशील होना नहीं है।
- सृजनात्मक बालकों की प्रमुख विशेषताएँ:
शिक्षा के स्तर में ह्रास का मुख्य कारण है-
- छात्रों की लापरवाही
- शिक्षकों की अपारगता
- अभिप्रायवकों की विचारमग्नता
- इनमें से सभी
Explanation :
- उत्तर: इनमें से सभी
- शिक्षा के स्तर में ह्रास के लिए छात्रों की लापरवाही, शिक्षकों की अपारगता (अक्षमता) तथा अभिप्रायवकों (अभिभावकों) की विचारमग्नता (उदासीनता) सभी जिम्मेदार हैं।
- शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले सभी तीनों पक्ष (छात्र, शिक्षक, अभिभावक) इस ह्रास में योगदान देते हैं।
- शिक्षक की अपारगता से पढ़ाने की गुणवत्ता प्रभावित होती है, छात्रों की लापरवाही से सीखने की प्रक्रिया बाधित होती है, और अभिभावकों की विचारमग्नता (ध्यान न देने) से बालक को उचित मार्गदर्शन नहीं मिल पाता।
स्वांगीकरण का दूसरा नाम है–
- प्रतिपादन
- चित्रण
- तुलना
- आख्यान
Explanation :
- उत्तर: प्रतिपादन
- स्वांगीकरण (Assimilation) का दूसरा नाम प्रतिपादन है।
- पियाजे (Piaget) के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत के अनुसार, स्वांगीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें नई संवेदी सूचना पुराने मनोबंध (स्कीमा) का अंग बन जाती है।
- जब कोई बालक नई वस्तु या अनुभव को अपने पूर्व ज्ञान के अनुसार आत्मसात करता है, तो वह स्वांगीकरण कहलाता है।
- स्वांगीकरण और समायोजन (Accommodation) के परिणामस्वरूप ही बालक का संज्ञानात्मक विकास होता है।
लज्जा एवं गर्व का भाव किस दशा में विकसित होता है?
- शैशवावस्था
- बाल्यावस्था
- किशोरावस्था
- यौवनावस्था
Explanation :
- उत्तर: बाल्यावस्था
- लज्जा और गर्व का भाव बाल्यावस्था (6-12 वर्ष) में विकसित होता है।
- बाल्यावस्था बालक के व्यक्तित्व निर्माण की महत्वपूर्ण अवस्था होती है।
- इस अवस्था में बालक में आदतें, व्यवहार, रुचियाँ, और इच्छाओं के प्रतिरूपों का निर्माण होता है।
- इस अवस्था में बालक अपने कार्यों और दूसरों की प्रतिक्रिया के प्रति जागरूक होने लगता है, जिससे उसमें लज्जा (शर्म) और गर्व (अहंकार/गौरव) जैसी भावनाएँ विकसित होती हैं।
निम्नलिखित में से मूल्यांकन शिक्षक के लिए किस रूप में सहायक है?
- यह क्रिया शोध हेतु नये मार्ग खोलता है।
- शिक्षक अपने छात्रों को विभिन्न समूहों में वर्गीकृत कर सकता है।
- शिक्षक अपने छात्रों को तत्काल प्रतिपुष्टि दे सकता है।
- इनमें से सभी
Explanation :
- उत्तर: इनमें से सभी
- मूल्यांकन (Evaluation) शिक्षक के लिए अनेक रूपों में सहायक है:
- यह शोध हेतु नए मार्ग खोलता है, क्योंकि मूल्यांकन से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में कमियों और सुधार के अवसरों का पता चलता है।
- शिक्षक छात्रों को विभिन्न समूहों (योग्यता, प्रतिभा, रुचि) में वर्गीकृत कर सकता है, जिससे विभेदित शिक्षण संभव होता है।
- शिक्षक छात्रों को तत्काल प्रतिपुष्टि (फीडबैक) दे सकता है, जिससे छात्रों को अपनी त्रुटियों का तुरंत पता चलता है और वे उन्हें सुधार सकते हैं।
बुद्धि एवं सृजनात्मकता है—
- धनात्मक रूप में संबंधित
- ऋणात्मक रूप से संबंधित
- एक दूसरे से बिल्कुल संबंधित नहीं है।
- सृजनात्मक होने के लिए बुद्धि का कम से कम एक सामान्य प्रारंभिक मान आवश्यक है।
Explanation :
- उत्तर: धनात्मक रूप में संबंधित
- बुद्धि और सृजनात्मकता (Creativity) धनात्मक (सकारात्मक) रूप से संबंधित हैं।
- सृजनात्मक होने के लिए बुद्धि का एक निश्चित स्तर (सामान्य बुद्धि स्तर) आवश्यक है, लेकिन इस निश्चित स्तर से अधिक या कम बुद्धि मान सृजनात्मकता पर सीधा प्रभाव नहीं डालता।
- सृजनशील व्यक्ति प्रायः बुद्धिमान होते हैं, परन्तु यह आवश्यक नहीं कि सभी बुद्धिमान व्यक्ति सृजनशील हों।
- बुद्धि सृजनात्मकता के लिए एक पूर्वापेक्षा (pre-requisite) है, लेकिन पर्याप्त शर्त नहीं।
निम्नलिखित में से संयुक्त राष्ट्रसंघ का कौन-सा संगठन शिक्षा से संबंधित है?
- UNICEF
- UNESCO
- UNO
- UNSC
Explanation :
- उत्तर: UNESCO
- UNESCO (यूनेस्को) – संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन – शिक्षा से संबंधित है।
- इसका गठन 16 नवम्बर 1945 को हुआ था और इसका मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में है।
- UNESCO का कार्य शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति और संचार के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना है।
- UNICEF (बाल कोष), UNO (संयुक्त राष्ट्र संघ), UNSC (सुरक्षा परिषद) – ये अन्य संयुक्त राष्ट्र संगठन हैं।
किस उम्र से बच्चों में आदत बनती है?
- बाल्यावस्था से
- जन्म से
- सर्वदा प्रवहमान
- गर्भावस्था के दौरान
Explanation :
- उत्तर: जन्म से
- बच्चों में आदत का विकास जन्म से ही प्रारम्भ हो जाता है।
- शिशु के जन्म के समय से ही उसकी संवेदनात्मक क्षमताएँ पर्याप्त रूप से विकसित होती हैं।
- आदतें नियमित अनुभवों और पुनरावृत्ति के माध्यम से बनती हैं, जो जन्म के तुरंत बाद शुरू हो जाती हैं (जैसे दूध पीने की आदत, सोने का समय, आदि)।
निम्नलिखित में से कौन-सा विकास का सिद्धांत है?
- यह सबके लिए समान गति से आगे नहीं बढ़ता है।
- विकास सदैव रेखीय होता है।
- यह एक असतत् प्रक्रिया है।
- विकास की सभी प्रक्रियाएँ अंत:संबंधित नहीं हैं।
Explanation :
- उत्तर: यह सबके लिए समान गति से आगे नहीं बढ़ता है।
- विकास की प्रमुख विशेषताओं में से एक है कि यह सभी व्यक्तियों के लिए समान गति से आगे नहीं बढ़ता है।
- व्यक्तियों के विकास की गति में विभिन्नता होती है, जो उनके आनुवंशिकता, वातावरण, पोषण, और अन्य कारकों पर निर्भर करती है।
- विकास एक सतत (निरंतर) प्रक्रिया है, न कि असतत।
- विकास वंशानुक्रम और वातावरण की अंत:क्रिया का परिणाम है।
बाल विकास एक प्रणाली है-
- धीमी तेज गति की
- सतत, क्रमिक लगातार चलती हुई
- समान रूप में लगातार चलते हुए विकास की
- प्रायिक विकास की
Explanation :
- उत्तर: सतत, क्रमिक लगातार चलती हुई
- बाल विकास एक सतत (Continuous), क्रमिक (Sequential) और निरंतर चलने वाली प्रणाली है।
- हरलॉक (Hurlock) के अनुसार, विकास व्यवस्थित तथा समयानुगत परिवर्तन है, जो सभी पक्षों (शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक) में होता है।
- यह परिवर्तन गर्भाधान से लेकर मृत्यु पर्यंत निरंतर चलते रहते हैं, परंतु सभी व्यक्तियों में समान रूप से नहीं होते।
यौन पुरुष या स्त्री होने के जैविक गुणों को संदर्भित करता है। जबकि लिंग संदर्भित करता है—
- पुरुष या स्त्री अथवा मातृजाति या पितृजाति होने के मनोवैज्ञानिक रूप से निर्मित गुण
- पुरुष या स्त्री अथवा मातृजाति या पितृजाति होने के सामाजिक रूप से निर्मित गुण
- लैटिन में स्वयं जैविक गुण
- चिकित्सा शास्त्र में मातृजाति या पितृजाति
Explanation :
- उत्तर: पुरुष या स्त्री अथवा मातृजाति या पितृजाति होने के सामाजिक रूप से निर्मित गुण
- ‘यौन’ (Sex) जैविक गुणों को संदर्भित करता है (जैसे क्रोमोसोम, हार्मोन, शारीरिक संरचना), जबकि ‘लिंग’ (Gender) सामाजिक रूप से निर्मित गुणों को संदर्भित करता है।
- लिंग (Gender) एक सामाजिक निर्माण है, जिसमें समाज द्वारा पुरुषों और महिलाओं को सौंपी गई भूमिकाएँ, व्यवहार, और अपेक्षाएँ शामिल हैं।
- यह जैविक सेक्स के विपरीत, संस्कृति, परिवार, और सामाजिक संरचनाओं द्वारा निर्धारित होता है।
हम किसी बच्चे को पिछड़ा कहते हैं यदि—
- उसके प्राप्तांक उसकी कक्षा का निम्नतम अंक होता है।
- वह निम्न औसत बुद्धिवाला मंद बच्चा हो।
- वह एक ही कक्षा में एक साल से अधिक रह जाता है।
- अपनी स्वाभाविक सामर्थ्य के निम्न स्तर पर उसके प्राप्तांक आते हैं।
Explanation :
- उत्तर: उसके प्राप्तांक उसकी कक्षा का निम्नतम अंक होता है।
- पिछड़ा बालक (Backward Child) वह बालक है जो अपनी आयु और कक्षा के अनुसार अपेक्षित स्तर पर प्रदर्शन नहीं कर पाता है।
- सिरिल बर्ट (Cyril Burt) के अनुसार, “पिछड़ा बालक वह है जो अपनी अवस्था के अनुरूप कक्षा का कार्य नहीं कर पाता।”
- शॉनेल (Schonell) के अनुसार, “जो छात्र अपनी आयु से कम योग्यता रखता है, उसे पिछड़ा बालक कहते हैं।”
- पिछड़ापन सीखने की अक्षमता, मंद बुद्धि, शारीरिक अक्षमता या सामाजिक-आर्थिक कारणों से हो सकता है।
उचित प्रेरक परिवेश स्थितियों के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा आवश्यक है?
- बैठने की समुचित व्यवस्था
- स्थिर एवं शालिपूर्ण परिवेश
- सहयोगी एवं स्पर्धामूलक समूह स्थिति
- इनमें से सभी
Explanation :
- उत्तर: इनमें से सभी
- उचित प्रेरक परिवेश (Motivating Environment) के लिए निम्न सभी आवश्यक हैं:
- बैठने की समुचित व्यवस्था – शारीरिक आराम और एकाग्रता के लिए आवश्यक।
- स्थिर एवं शांतिपूर्ण परिवेश – अध्ययन के लिए अनुकूल वातावरण।
- सहयोगी एवं स्पर्धामूलक समूह स्थिति – छात्रों को प्रेरित करने और सीखने में मदद करती है।
बच्चे का विकास निम्न में से किसका परिणाम है?
- आनुवंशिकता
- पर्यावरण
- आनुवंशिकता तथा पर्यावरण के मध्य अन्योन्य क्रिया
- आर्थिक कारक
Explanation :
- उत्तर: आनुवंशिकता तथा पर्यावरण के मध्य अन्योन्य क्रिया
- बच्चे का विकास आनुवंशिकता (heredity) और पर्यावरण (environment) के पारस्परिक प्रभाव (interaction) का परिणाम होता है।
- आनुवंशिकता बालक को उसके माता-पिता से प्राप्त जैविक विशेषताएँ प्रदान करती है (जैसे ऊँचाई, बुद्धि की क्षमता)।
- पर्यावरण (पोषण, शिक्षा, सामाजिक संपर्क, संस्कृति) इन जैविक विशेषताओं को विकसित या सीमित करता है।
- यह दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और बालक के समग्र विकास के लिए अनिवार्य हैं।
कक्षा कक्ष में छात्रों की इच्छा को प्रभावित करने वाले बाह्य कारक कौन-से हैं?
- संवेग, भावुकता और जटिलताएँ
- छात्रों की अभिवृत्तियाँ
- लक्ष्य एवं अभिप्राय
- संस्कृति एवं प्रशिक्षण
Explanation :
- उत्तर: संस्कृति एवं प्रशिक्षण
- बाह्य कारक (External Factors) वे कारक हैं जो बालक के बाहरी वातावरण से आते हैं।
- संस्कृति (Culture) और प्रशिक्षण (Training) बाह्य कारक हैं, क्योंकि ये समाज, परिवार, स्कूल और समुदाय से प्रभावित होते हैं।
- जबकि संवेग (Emotions), भावुकता (Sentiments), जटिलताएँ (Complexities), अभिवृत्तियाँ (Attitudes), लक्ष्य (Goals) और अभिप्राय (Intentions) आंतरिक कारक (Internal Factors) हैं, जो बालक की मानसिक स्थिति से संबंधित हैं।
शिक्षण समझ के क्रियाकलापों के स्तर को बनाए रखने के लिए महत्त्वपूर्ण विषय है–
- प्रबंधन
- कुशल प्रशासन
- योग्य शिक्षक
- इनमें से सभी
Explanation :
- उत्तर: इनमें से सभी
- शिक्षण-अधिगम के क्रियाकलापों के स्तर को बनाए रखने के लिए प्रबंधन, कुशल प्रशासन और योग्य शिक्षक तीनों आवश्यक हैं।
- प्रबंधन (Management) – कक्षा के संसाधनों, समय और गतिविधियों का उचित नियोजन।
- कुशल प्रशासन (Efficient Administration) – स्कूली नीतियों, अनुशासन और सुविधाओं का प्रभावी संचालन।
- योग्य शिक्षक (Qualified Teacher) – विषय ज्ञान, शैक्षणिक कौशल और छात्रों को प्रेरित करने की क्षमता।
कमजोर छात्र को प्रेरित करने के लिए शिक्षक को करना चाहिए–
- अच्छे काम के लिए प्रशंसा करना और उत्तम काम करने के लिए उन्हें कहना।
- उन्हें पहले बेंच पर बिठाना।
- कक्षा के प्रति थोड़ा अधिक ध्यान देना।
- कक्षा में उन पर ध्यान न देना।
Explanation :
- उत्तर: अच्छे काम के लिए प्रशंसा करना और उत्तम काम करने के लिए उन्हें कहना।
- कमजोर छात्रों को प्रेरित करने के लिए धनात्मक प्रोत्साहन (Positive Reinforcement) सबसे प्रभावी तरीका है।
- छोटी-छोटी उपलब्धियों पर प्रशंसा करने से आत्मविश्वास बढ़ता है।
- उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और अवसर देना चाहिए।
- कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान देना, उनके सवालों को प्रोत्साहित करना, और उन्हें स्थानीय परिवेश से जोड़कर पढ़ाना अधिक प्रभावी है।
डिस्लेक्सिया (Dyslexia) मुख्यतया संबंधित है–
- पठन की कठिनाई से
- वाचन की कठिनाई से
- वाचन और श्रवण की कठिनाई से
- श्रवण की कठिनाई से
Explanation :
- उत्तर: पठन की कठिनाई से
- डिस्लेक्सिया (Dyslexia) एक अधिगम अक्षमता (Learning Disability) है, जो मुख्य रूप से पठन (Reading) में कठिनाई से संबंधित है।
- डिस्लेक्सिया से प्रभावित छात्रों को शब्दों की पहचान, उच्चारण, और पढ़ने में समस्या होती है, हालाँकि उनकी बुद्धि सामान्य होती है।
- यह एक तंत्रिकीय (Neurological) विकार है, जो भाषा प्रसंस्करण को प्रभावित करता है।
- डिस्लेक्सिया से पीड़ित छात्रों को विशेष शैक्षणिक सहायता (जैसे मल्टीसेंसरी विधि) की आवश्यकता होती है।
निम्नलिखित में से मानसिक संघर्ष के महत्वपूर्ण कारण हैं–
- यौन आकांक्षाओं का दमन
- आत्म सम्मान और प्रतिष्ठा की क्षति
- खराब अंतर्वैयक्तिक संबंध
- इनमें से सभी
Explanation :
- उत्तर: इनमें से सभी
- मानसिक संघर्ष (Mental Conflict) के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें यौन आकांक्षाओं का दमन, आत्म-सम्मान की क्षति, और खराब अंतर्वैयक्तिक संबंध प्रमुख हैं।
- फ्रायड (Freud) के अनुसार, मानसिक संघर्ष ‘इदम्’ (Id), ‘अहम्’ (Ego) और ‘परा-अहम्’ (Superego) के बीच असंतुलन से उत्पन्न होता है।
- जब किसी व्यक्ति की इच्छाएँ (यौन आकांक्षाएँ) दब जाती हैं (दमन), तो यह संघर्ष का कारण बनता है।
- सामाजिक संबंधों में असफलता या आत्म-सम्मान को ठेस पहुँचने से भी मानसिक तनाव और संघर्ष उत्पन्न होता है।
मूल्यांकन को ‘उपयोगी और रोचक’ विधि बनाने के लिए किस सम्बन्ध में सावधानी बरतनी होगी—
- विभिन्न छात्रों के बीच तुलना करने में
- छात्रों को बुद्धिमता अथवा औसत विद्यार्थी के रूप में स्तरीकृत करने में
- छात्र के सीखने की शैक्षिक और सह-शैक्षिक सीमाओं के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के तरीकों की भिन्न किस्म का उपयोग करने में।
- प्रतिपूर्ति देने हेतु तकनीकी भाषा के प्रयोग करने में
Explanation :
- उत्तर: छात्र के सीखने की शैक्षिक और सह-शैक्षिक सीमाओं के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के तरीकों की भिन्न किस्म का उपयोग करने में।
- मूल्यांकन को उपयोगी और रोचक बनाने के लिए, शिक्षक को छात्रों की शैक्षिक और सह-शैक्षिक सीमाओं (शैक्षणिक, रुचि, सामाजिक, भावनात्मक) के बारे में जानकारी एकत्रित करने के विभिन्न तरीकों (जैसे अवलोकन, साक्षात्कार, पोर्टफोलियो, प्रोजेक्ट, आदि) का उपयोग करना चाहिए।
- विविध तरीकों का उपयोग करने से छात्रों की समग्र क्षमताओं का सही आकलन होता है।
- यह व्यक्तिगत अंतरों को समझने और प्रभावी शिक्षण योजना बनाने में सहायक होता है।
निम्नलिखित में से उत्प्रेरणा से कौन-सा कारक संबंधित नहीं है?
- इच्छा/रुचि
- जीवन के उद्देश्य
- शारीरिक तन्दुरूस्ती
- मानसिक स्वास्थ्य
Explanation :
- उत्तर: शारीरिक तन्दुरूस्ती
- उत्प्रेरणा (Motivation) एक आंतरिक प्रक्रिया है, जो व्यक्ति को लक्ष्य प्राप्ति की ओर प्रेरित करती है। यह मुख्यतः इच्छा/रुचि, जीवन के उद्देश्यों, और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित है।
- शारीरिक तन्दुरूस्ती (Physical Fitness) एक स्वास्थ्य कारक है, जो सीधे तौर पर उत्प्रेरणा से संबंधित नहीं है, हालाँकि यह अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकता है (जैसे बीमार व्यक्ति में प्रेरणा कम हो सकती है)।
- उत्प्रेरणा व्यक्ति की आवश्यकताओं, लक्ष्यों, मूल्यों और अभिवृत्तियों पर निर्भर करती है।
उच्च बुद्धि लब्धि सम्पन्न एक छात्र अध्ययन में अच्छा नहीं कर रहा है। शिक्षक के लिए सबसे अच्छी क्रिया विधि क्या है?
- उसके बेहतर निष्पादन तक प्रतीक्षा करना
- उसकी न्यून उपलब्धि के लिए कारणों की खोज करना
- परीक्षा में उसे प्रेस मार्क देना
- उसे स्कूल से निकाल लेने के लिए उसके माता-पिता से आग्रह करना
Explanation :
- उत्तर: उसकी न्यून उपलब्धि के लिए कारणों की खोज करना
- उच्च बुद्धि लब्धि (High IQ) वाला छात्र अगर अध्ययन में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा है, तो शिक्षक को सबसे पहले उसकी कम उपलब्धि (Underachievement) के कारणों का पता लगाना चाहिए।
- कारण शैक्षणिक, सामाजिक, भावनात्मक, या पारिवारिक हो सकते हैं, जैसे प्रेरणा की कमी, पारिवारिक समस्या, या सीखने की शैली में असंगति।
- कारण जानने के बाद शिक्षक छात्र के साथ चर्चा करके उचित समाधान (जैसे व्यक्तिगत ध्यान, अतिरिक्त सहायता, या काउंसलिंग) प्रदान कर सकता है।
आपकी कक्षा के कुछ छात्र विशिष्ट रूप से मेधावी हैं। आप उन्हें पढ़ायेंगे—
- कक्षा के शेष विद्यार्थियों के साथ
- समृद्ध पाठ्यचर्या के प्रयोग द्वारा
- उच्च कक्षा के साथ
- जब भी वे चाहें
Explanation :
- उत्तर: समृद्ध पाठ्यचर्या के प्रयोग द्वारा
- मेधावी (Gifted) छात्रों को उनकी क्षमता के अनुसार चुनौतीपूर्ण सामग्री प्रदान करने के लिए समृद्ध पाठ्यचर्या (Enriched Curriculum) का प्रयोग करना सबसे उपयुक्त है।
- समृद्ध पाठ्यचर्या में विषयवस्तु को अधिक गहराई, व्यापकता, और रोचकता के साथ प्रस्तुत किया जाता है।
- इसमें परियोजना कार्य, शोध, रचनात्मक लेखन, समस्या-समाधान, और अतिरिक्त पठन सामग्री शामिल की जा सकती है।
- इससे मेधावी छात्रों की रुचि और बौद्धिक क्षमता का समुचित विकास होता है और वे ऊब (bore) नहीं होते हैं।
कक्षा में कोई पाठ शुरू किया जा सकता है—
- प्रश्न पूछकर
- विवरण देकर
- कहानियाँ सुनाकर
- इनमें से सभी
Explanation :
- उत्तर: इनमें से सभी
- कक्षा में किसी नए पाठ को प्रारम्भ करने के विभिन्न तरीके हो सकते हैं, जिनमें प्रश्न पूछना, विवरण देना, और कहानियाँ सुनाना शामिल हैं।
- प्रश्न पूछने से बालक के पूर्व ज्ञान का पता चलता है और वह सक्रिय हो जाता है।
- विवरण (जानकारी) देने से विषय का परिचय मिलता है।
- कहानी सुनाने से बालक की रुचि बढ़ती है और वह आसानी से पाठ से जुड़ जाता है।
- ये सभी विधियाँ बालक के पूर्व ज्ञान को सक्रिय करती हैं और उसे अधिगम के लिए प्रेरित करती हैं।
कहानी सुनाने की सफल रणनीति बनाने के लिए किसी शिक्षक को क्या करना चाहिए?
- संप्रेषण कौशल और भावभंगिमा से कहानी को रोचक बनाना है।
- कहानी में स्वाभाविक घटनाओं को बनाए रखना चाहिए।
- कहानी में पात्रों का सही ढंग से चित्रण एवं आज की जीवन स्थितियों से तुलना होनी चाहिए।
- इनमें से सभी
Explanation :
- उत्तर: इनमें से सभी
- कहानी सुनाने (Storytelling) की सफल रणनीति के लिए:
- संप्रेषण कौशल (Communication Skills) और भावभंगिमा (Gestures) का उपयोग करके कहानी को रोचक और जीवंत बनाना चाहिए।
- कहानी में स्वाभाविकता (Natural Flow) बनाए रखनी चाहिए, जिससे छात्र उसे सहजता से समझ सकें।
- पात्रों का सही चित्रण और उन्हें आज की जीवन स्थितियों से जोड़ना, ताकि छात्र कहानी को अपने अनुभवों से संबंधित कर सकें और उससे शिक्षा ग्रहण कर सकें।
छात्रों को गृहकार्य देते समय निम्नलिखित में से कौन-सा आवश्यक नहीं है?
- छात्रों को समुचित रूप से गृहकार्य करने के लिए प्रेरित करना
- गृहकार्य पूरा करने के लिए स्पष्ट निर्देश प्रदान करना
- गृहकार्य का उद्देश्य समझाना
- चालू शिक्षण के आधार पर गृहकार्य देना
Explanation :
- उत्तर: गृहकार्य का उद्देश्य समझाना
- गृहकार्य (Homework) देते समय उसका उद्देश्य समझाना आवश्यक नहीं है, हालाँकि यह अच्छा अभ्यास हो सकता है, लेकिन इसकी अनिवार्यता नहीं है।
- गृहकार्य का उद्देश्य (objective) कभी-कभी शिक्षक स्पष्ट नहीं करता, क्योंकि छात्रों को कार्य की प्रकृति और उसके लाभों का पता होना चाहिए, लेकिन पूर्व निर्धारित उद्देश्य बताना अनिवार्य नहीं माना जाता।
- फिर भी, एक अच्छे शिक्षक को गृहकार्य का उद्देश्य (जैसे अभ्यास, पुनरावृत्ति, या विस्तार) समझाना चाहिए, क्योंकि इससे छात्रों को उसके महत्व का ज्ञान होता है।
कक्षा में श्यामपट्ट व्यवहार करते समय निम्नलिखित में से किस बिन्दु पर ध्यान दिया जाता है?
- स्पष्ट और पठनीय शब्दों में लिखना
- रेखाचित्र बनाते समय बहुरंगी चॉक का प्रयोग करना
- श्यामपट्ट पर सीधी रेखा खींचना
- इनमें से सभी
Explanation :
- उत्तर: इनमें से सभी
- श्यामपट्ट (Blackboard) का प्रभावी उपयोग करते समय शिक्षक को निम्न सभी बातों पर ध्यान देना चाहिए:
- स्पष्ट और पठनीय (सुलेख) अक्षरों में लिखना – जिससे पूरी कक्षा देख सके।
- बहुरंगी चॉक का प्रयोग – जिससे आकृतियाँ और रेखाचित्र आकर्षक और स्पष्ट हो सकें।
- सीधी रेखा खींचना – जिससे अनुशासित और सुव्यवस्थित रूप दिखे और बालकों की आँखों पर जोर न पड़े।
- इसके अलावा, विषयवस्तु की क्रमबद्धता और समस्याओं के हल को भी ध्यान में रखना चाहिए।
मनोविश्लेषण सिद्धांत के अनुसार विसामान्य व्यवहार होने के कारण है—
- उसमें सक्रिय अचेतन मन
- व्यक्ति की दमित इच्छाएँ
- इनमें से दोनों
- इनमें से कोई नहीं
Explanation :
- उत्तर: व्यक्ति की दमित इच्छाएँ
- मनोविश्लेषण सिद्धांत (Psychoanalytic Theory) के प्रवर्तक फ्रायड (Freud) के अनुसार, असामान्य व्यवहार (Abnormal Behavior) का मुख्य कारण व्यक्ति की दमित (Repressed) इच्छाएँ हैं।
- फ्रायड ने रक्षा युक्तियों (Defense Mechanisms) में ‘दमन’ (Repression) को सबसे महत्वपूर्ण माना है, जिसमें दुरिचता उत्पन्न करने वाले विचारों और भावनाओं को चेतना से हटा दिया जाता है।
- जब कोई व्यक्ति अपनी इच्छाओं (जैसे यौन या आक्रामक) को दबाता है, तो वे अचेतन में रहकर तनाव और संघर्ष उत्पन्न करती हैं, जो अंततः असामान्य व्यवहार के रूप में प्रकट होता है।
