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बुद्धि के ‘द्विकारक सिद्धांत’ का प्रतिपादन किसने किया?

  • थार्नडाइक
  • स्पीयरमैन
  • गार्डनर
  • स्टर्नबर्ग

  • उत्तर: स्पीयरमैन
  • बुद्धि के ‘द्विकारक सिद्धांत’ (Two-Factor Theory) का प्रतिपादन चार्ल्स स्पीयरमैन (Charles Spearman) ने किया था।
    • स्पीयरमैन का मानना है कि बुद्धि दो कारकों से मिलकर बनी है:
      1. सामान्य योग्यता कारक (G-Factor) – यह एक जन्मजात प्रतिभा कारक है और प्रत्येक व्यक्ति में भिन्न-भिन्न मात्रा में पायी जाती है। G कारक के कारण ही तर्क करने की क्षमता और समस्या समाधान करने की क्षमता का निर्धारण होता है।
      2. विशिष्ट योग्यता कारक (S-Factor) – यह विशिष्ट कार्यों (जैसे संगीत, गणित, भाषा आदि) में सहायता करते हैं।
    • सामान्य कारक (G-Factor) मानसिक क्रियाओं का मूल रूप है। जिस व्यक्ति में G-Factor उपस्थित है, वही अपनी मानसिक क्रियाओं को कर सकता है।

बच्चों के आचरण को प्रबलीकरण और दण्डों द्वारा परिवर्तित किया जा सकता है – यह विचार किस पर आधारित है?

  • आनुवंशिकता पर
  • वातावरण पर
  • आनुवंशिकता + वातावरण दोनों से
  • ना आनुवंशिकता ना वातावरण दोनों से नहीं

  • उत्तर: वातावरण पर
  • यह अवधारणा कि बच्चों के आचरण को प्रबलीकरण (Reinforcement) और दण्डों (Punishments) द्वारा परिवर्तित किया जा सकता है, इस विचार पर आधारित है कि प्राथमिक रूप से विकास केवल वातावरण (Environment) से प्रभावित होता है।
    • वातावरण द्वारा ही बच्चों के आचरण को परिवर्तित किया जा सकता है।
    • बालक को जो मूल प्रवृत्तियाँ वंशानुक्रम (Heredity) से प्राप्त होती हैं (जिन्हें परिवर्तित नहीं किया जा सकता), उनका विकास वातावरण में होता है।
    • अतः घर, परिवार, समाज तथा विद्यालय को बच्चों की वांछित योग्यताओं के विकास हेतु एवं अवांछित योग्यताओं को रोकने हेतु उचित वातावरण उत्पन्न करने का प्रयास किया जाना चाहिए।

हॉवर्ड गार्डनर के बहु-बुद्धि सिद्धांत के अनुसार, अपनी भावनात्मक अवस्था, संवेगों और अभिप्रेरणाओं के बारे में जागरूक रहने की योग्यता को क्या कहा जाता है?

  • अंतर्वैयक्तिक बुद्धि
  • अन्तरावैयक्तिक बुद्धि
  • अंतःवैयक्तिक बुद्धि
  • भावनात्मक बुद्धि

  • उत्तर: अंतःवैयक्तिक बुद्धि
  • हॉवर्ड गार्डनर के बहु-बुद्धि सिद्धांत (Theory of Multiple Intelligences) के अनुसार, अपनी भावनात्मक अवस्था, संवेगों और अभिप्रेरणाओं के बारे में जागरूक रहने की योग्यता को ‘अंतःवैयक्तिक बुद्धि’ (Intrapersonal Intelligence) कहा जाता है।
    • अंतःवैयक्तिक बुद्धि से तात्पर्य अपने भावों व संवेगों को मॉनिटर करने, विभेद करने तथा स्वयं के व्यवहार को निर्देशित करने की क्षमता से है।
    • इस बुद्धि वाले व्यक्ति आत्म-चिंतन (Self-Reflection) और आत्म-जागरूकता (Self-Awareness) में सक्षम होते हैं।

विकास का शीर्षगामी (Cephalocaudal) सिद्धांत क्या बताता है?

  • विकास सिर से पाँव की ओर होता है
  • विकास शरीर के मध्य से बाहर की ओर होता है
  • विकास पाँव से सिर की ओर होता है
  • विकास एक साथ सभी अंगों में होता है

  • उत्तर: विकास सिर से पाँव की ओर होता है
  • विकास का शीर्षगामी (Cephalocaudal) सिद्धांत प्रतिपादित करता है कि विकास सिर से पाँव की ओर होता है। इसे ‘सिरापुख्य दिशा’ (Head to Foot Direction) भी कहा जाता है।
    • सबसे पहले मस्तिष्क क्षेत्र (Brain Region), फिर धड़ क्षेत्र (Trunk), तथा सबसे अंत में पैर क्षेत्र (Legs) का विकास होता है।
    • बालक शरीर के ऊपरी अंगों (सिर) का नियंत्रण सबसे पहले सीखता है, फिर हाथों का नियंत्रण, फिर धड़ का नियंत्रण, तथा अंत में पैरों का नियंत्रण सीखता है।
    • यह सिद्धांत प्रोक्सिमोडिस्टल (Proximodistal) सिद्धांत से भिन्न है, जो शरीर के मध्य से बाहर की ओर विकास को बताता है (जैसे पहले स्पाइनल कॉर्ड, फिर हृदय, फिर अन्य अंग)।

व्यक्तित्व की कौन-सी विशेषता सही नहीं है?

  • आत्म चेतना व्यक्तित्व की मुख्य विशेषता है।
  • आत्म चेतना का विकास सामाजिक अंत:क्रिया से होता है।
  • अच्छे व्यक्तित्व के लिए शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दोनों घटक आवश्यक हैं।
  • व्यक्तित्व में समय के साथ स्थिरता आ जाती है।

  • उत्तर: व्यक्तित्व में समय के साथ स्थिरता आ जाती है।
  • व्यक्तित्व (Personality) की अंतिम किन्तु महत्वपूर्ण विशेषता है – विकास की निरन्तरता (Continuity of Development)। इसके विकास में कभी स्थिरता (Stability) नहीं आती है।
    • व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ:
      • आत्म चेतना (Self-Consciousness) – व्यक्तित्व की पहली और मुख्य विशेषता।
      • आत्म चेतना का विकास समाज के अन्य व्यक्तियों के सम्पर्क में आकर क्रिया और अंत:क्रिया (Interaction) द्वारा होता है।
      • अच्छे व्यक्तित्व के लिए शारीरिक (Physical) और मनोवैज्ञानिक (Psychological) दोनों ही घटकों का होना जरूरी है।
      • व्यक्तित्व कभी स्थिर नहीं होता, यह जीवन भर विकसित होता रहता है।

निम्नलिखित में से कौन से कारक वातावरणीय कारक हैं?

  • सामाजिक कारक
  • सांस्कृतिक कारक
  • आर्थिक कारक
  • ये सभी

  • उत्तर: ये सभी
  • सामाजिक कारक (Social Factors), सांस्कृतिक कारक (Cultural Factors) तथा आर्थिक कारक (Economic Factors) ये तीनों ही वातावरणीय (Environmental) कारक हैं, जो व्यक्ति को प्रभावित करते हैं।
    • वातावरणीय कारकों में भौतिक (Physical) तथा सामाजिक (Social) दोनों प्रकार का वातावरण आता है।
      • भौतिक वातावरण – भौगोलिक परिवेश, जलवायु, उपलब्ध भौतिक साधन व परिस्थितियाँ।
      • सामाजिक वातावरण – व्यक्ति को उपलब्ध सामाजिक अंत:क्रिया की गुणवत्ता तथा सम्भावना। इसके अंतर्गत परिवार, पास-पड़ोस, धर्म, संस्कृति, विद्यालय तथा जनसंचार के परम्परागत व आधुनिक साधन आते हैं।

अनास्तासी (Anastasi) के अनुसार वातावरण क्या है?

  • व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करने वाली आंतरिक शक्ति
  • व्यक्ति के जीन्स  के अतिरिक्त प्रत्येक वस्तु जो व्यक्ति को प्रभावित करती है।
  • व्यक्ति की आनुवंशिक संरचना
  • व्यक्ति की बुद्धि

  • उत्तर: व्यक्ति के जीन्स के अतिरिक्त प्रत्येक वस्तु जो व्यक्ति को प्रभावित करती है।
  • अनास्तासी (Anastasi) के अनुसार, “वातावरण वह वस्तु है जो व्यक्ति के जीन्स के अतिरिक्त प्रत्येक वस्तु को प्रभावित करती है।”
    • बैरिंगं, लैंगफील्ड तथा बेल्ड (Baring, Langfeld & Weld) के अनुसार – “वातावरण वह प्रत्येक वस्तु है, जो व्यक्ति के पिरिकों (आनुवंशिक गुणों) के अतिरिक्त उनकी अन्य सभी बातों को प्रभावित करती है।”
    • वातावरण अनेक वस्तुओं के समावेश से बनता है तथा इसके अंतर्गत वे सभी बातें आ जाती हैं, जो बालक के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक विकास को प्रभावित करती हैं।

व्यवसाय चयन में वैयक्तिक विभिन्नताओं को किसके द्वारा समझाया जाता है?

  • अभिक्षमता में अंतर द्वारा
  • रुचि में अंतर द्वारा
  • बुद्धि में अंतर द्वारा
  • अभिक्षमता में अंतर द्वारा

  • उत्तर: अभिक्षमता में अंतर द्वारा
  • व्यवसाय चयन (Vocational Choice) में वैयक्तिक विभिन्नताओं (Individual Differences) को ‘अभिक्षमता में अंतर’ (Aptitude Differences) द्वारा समझाया जाता है।
    • वैयक्तिक विभिन्नता से तात्पर्य दो व्यक्तियों के रंग-रूप, आकार, बुद्धि एवं अभिक्षमता में अंतर से है।
    • जब व्यवसाय का चयन किया जाता है तो व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता (Intellectual Ability) को ध्यान में रखना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि क्षमता के अनुकूल कार्य को ही व्यक्ति सुचारू रूप से करने में सक्षम रहता है।
    • अतः यह आवश्यक है कि भिन्न-भिन्न अभिक्षमता वाले व्यक्तियों के लिए व्यवसाय का चयन भी भिन्न हो।

सीखने में विविधता रखने वाले विद्यार्थियों की कक्षा में एक शिक्षक को क्या करना चाहिए?

  • पढ़ाने के मानकीय तरीके को पहचानना चाहिए।
  • सीखने में विविध गति रखने वाले विद्यार्थियों की भागीदारी के लिए सृजनात्मक तरीके खोजने चाहिए।
  • ‘विशिष्ट उपलब्धि’ एवं ‘प्रतिविधिक’ कक्षाएं बनानी चाहिए।
  • कक्षा में योग्यता के आधार पर समूहीकरण करना चाहिए।

  • उत्तर: सीखने में विविध गति रखने वाले विद्यार्थियों की भागीदारी के लिए सृजनात्मक तरीके खोजने चाहिए।
  • सीखने में विविधता (Diversity in Learning) रखने वाले विद्यार्थियों की कक्षा में एक शिक्षक को सीखने में विविध गति रखने वाले विद्यार्थियों की भागीदारी के लिए सृजनात्मक (Creative) तरीके खोजने चाहिए।
    • शिक्षक को अपनी शिक्षण तकनीक में परिवर्तन करना चाहिए तथा छात्रों को सृजनात्मक कार्यों में सहयोग देना चाहिए।
    • छात्रों के समक्ष छोटी-छोटी समस्याओं की प्रस्तुति करनी चाहिए, जिससे छात्र उनके समाधान के लिए सृजनात्मक तथ्यों की व्यवस्था कर सकें।
    • शिक्षक को विद्यार्थियों में सकारात्मक चिंतन (Positive Thinking) को बढ़ावा देना चाहिए तथा विद्यार्थियों के विचारों एवं सुझावों का सम्मान एवं स्वागत करना चाहिए।
    • विद्यार्थियों के व्यक्त कौशलों के अतिरिक्त उन्हें अन्य कौशलों के विषय में जानने हेतु प्रेरित करना चाहिए।

एक बालक की वृद्धि से कौन सा कारक सम्बन्धित नहीं है?

  • पोषण
  • स्वास्थ्य
  • निद्रा
  • अधिवास

  • उत्तर: अधिवास
  • एक बालक की वृद्धि (Growth) से अधिवास (Habitat) कारक सम्बन्धित नहीं है, क्योंकि अधिवास बालक की आवश्यकताओं से संबंधित है।
    • मानव जिस स्थान को अपने आश्रय हेतु चुनकर वहाँ जिन मकानों, घरों, झोपड़ियों आदि का निर्माण करता है, वह उसका अधिवास कहलाता है।
    • वृद्धि से सम्बंधित कारक: पोषण (Nutrition), स्वास्थ्य (Health), निद्रा (Sleep), वंशानुक्रम (Heredity), वातावरण (Environment), लिंग (Gender), तथा बुद्धि (Intelligence) आदि।

निम्न में से कौन-सी विशेषता परिपक्वता को अधिगम से अलग करती है?

  • यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है
  • यह अभ्यास पर निर्भर करती है
  • यह प्रेरकों पर निर्भर करती है
  • यह जीवन पर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया है।

  • उत्तर: यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है
  • परिपक्वता (Maturation) एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसका सम्बन्ध प्राकृतिक विकास से है, परन्तु अधिगम (Learning) एक उद्देश्यपूर्ण प्रक्रिया है।
    • परिपक्वता और अधिगम में निम्न भिन्नताएँ पायी जाती हैं:
      1. परिपक्वता मात्र शारीरिक अभिवृद्धि है, जबकि सीखना व्यवहार में परिवर्तन है।
      2. परिपक्वता एक स्थिति विशेष की ओर संकेत करती है, जबकि अधिगम एक अनवरत प्रक्रिया है।
      3. परिपक्वता जन्मजात प्रक्रिया है, जबकि अधिगम अर्जित प्रक्रिया है।
      4. परिपक्वता स्वाभाविक एवं प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें अभ्यास की कोई आवश्यकता नहीं होती है, जबकि अधिगम में अभ्यास की आवश्यकता होती है।
      5. परिपक्वता स्वाभाविक अभिवृद्धि है व इसमें अनुभव का कोई स्थान नहीं होता, जबकि अधिगम केवल अनुभव द्वारा ही सम्भव है।
      6. परिपक्व विद्यार्थी अपनी बौद्धिकता के साथ अपने सभी प्रकार के द्वन्द्व का शीघ्र समाधान कर लेते हैं।

हॉवर्ड गार्डनर के बहु-बुद्धि सिद्धांत के अनुसार किस बुद्धि वाले व्यक्ति अमूर्त विचार के साथ कार्य कर पाते हैं तथा प्रतीकों का हेर-फेर कर समस्या-समाधान कर सकते हैं?

  • संज्ञानात्मक
  • स्थानिक
  • तर्कशास्त्रीय-गणितीय
  • प्रकृतिवादी

  • उत्तर: तर्कशास्त्रीय-गणितीय
  • हॉवर्ड गार्डनर के बहु-बुद्धि सिद्धांत (Theory of Multiple Intelligences) के अनुसार – तर्कशास्त्रीय-गणितीय (Logical-Mathematical) बुद्धि वाले व्यक्ति अमूर्त विचार (Abstract Thinking) के साथ कार्य कर पाते हैं तथा प्रतीकों (Symbols) का हेर-फेर कर समस्या का समाधान कर सकते हैं।
    • इसके अंतर्गत वैज्ञानिक चिन्तन (Scientific Thinking) और समस्या समाधान (Problem Solving) के कौशल से परिपूर्ण व्यक्ति आते हैं।
    • गार्डनर के अनुसार 8 प्रकार की बुद्धियाँ हैं – भाषात्मक (Linguistic), तार्किक-गणितीय (Logical-Mathematical), संगीतात्मक (Musical), स्थानिक (Spatial), शारीरिक-गत्यात्मक (Bodily-Kinesthetic), अंतर्वैयक्तिक (Interpersonal), अंतःवैयक्तिक (Intrapersonal) और प्रकृतिवादी (Naturalistic)।

प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के क्या अभिलक्षण हैं?

  • समकक्षियों की तुलना में उच्च सामाजिक कौशल व परिपक्वता
  • कार्यों को करने में धैर्य की कमी
  • कौतूहल व जिज्ञासा
  • निम्नस्तर संज्ञानात्मक कार्यों का चुनाव

  • उत्तर: कौतूहल व जिज्ञासा
  • प्रतिभाशाली (Gifted) विद्यार्थियों में कौतूहल (Curiosity)जिज्ञासा (Inquisitiveness) प्रमुख अभिलक्षण हैं।
    • जिन बालकों की बुद्धि या मानसिक क्षमता सामान्य बालक से अधिक होती है, उन्हें प्रतिभाशाली बालक (Gifted Children) कहा जाता है।
    • उनमें पढ़ने-लिखने व कठिन विषयों के प्रति अधिक रुचि होती है।
    • अन्य अभिलक्षण: निरन्तर प्रवीणता अभिमुखीकरण व्यवहार, स्वतंत्र रूप से समस्या-समाधान, बौद्धिक जिज्ञासा, अमूर्त विषयों में अधिक रुचि, सामान्य ज्ञान अधिक होना, अन्तर्दृष्टि (Insight) का अधिक होना, क्रियाकलापों में विविधताएँ होना।

स्कूल में ‘सफलता’ के पैमाने को विशिष्ट अकादमिक उपलब्धि तक सीमित न रखकर, व्यापक होना चाहिए। ऐसा किस प्रकार किया जा सकता है?

  • अनुशिक्षण संस्थानों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त करके।
  • सामाजिक-संवेगिक क्षमताओं का विकास करके जो शिक्षा का एक अहम अंग है।
  • घर पर की जाने वाली अतिरिक्त कक्षाओं के द्वारा।
  • सिर्फ़ उन क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित करके जिस में बच्चा ‘कमजोर’ है।

  • उत्तर: सामाजिक-संवेगिक क्षमताओं का विकास करके जो शिक्षा का एक अहम अंग है।
  • स्कूल में ‘सफलता’ (Success) के पैमाने को विशिष्ट अकादमिक उपलब्धि तक सीमित न रखकर, व्यापक (Broad) होना चाहिए। ऐसा सामाजिक-संवेगिक क्षमताओं (Social-Emotional Abilities) का विकास करके किया जा सकता है, जो शिक्षा का एक अहम अंग है।
    • स्कूल में विद्यार्थियों की विविधता (Diversity) को ध्यान में रखते हुए शैक्षिक व्यवस्था का आयोजन करना चाहिए।
    • विद्यार्थियों की आवश्यकता, योग्यता/क्षमता एवं रुचि के अनुसार सीखने का वातावरण उपलब्ध करवाना चाहिए।
    • इससे स्कूल में सफलता का स्तर व्यापक बन सकेगा और विद्यार्थी की प्रगति निरन्तर होती रहेगी।

गर्भ में बालक को विकसित होने में कितने दिन लगते हैं?

  • 150
  • 280
  • 390
  • 640

  • उत्तर: 280
  • सामान्यतः जन्म-पूर्व काल (Prenatal Period) की अवधि चालीस सप्ताह अथवा 280 दिन की होती है।
    • जन्म-पूर्व काल को तीन काल-खण्डों में बाँटा जा सकता है:
      1. डिंबावस्था (Period of Ovum) – निषेचन से 2 सप्ताह तक
      2. पिण्डावस्था (Period of Embryo) – 2 से 8 सप्ताह तक
      3. पूर्णावस्था (Period of Fetus) – 8 सप्ताह से जन्म तक

मनोसामाजिक सिद्धान्त निम्नलिखित में से किस पर बल देता है?

  • उद्दीपन व प्रतिक्रिया
  • लिंगीय व प्रजनन स्तर
  • उद्यम के मुकाबले में हीनता स्तर
  • क्रियाप्रसूत (सक्रिय) अनुबंधन

  • उत्तर: उद्यम के मुकाबले में हीनता स्तर
  • एरिक्सन (Erikson) द्वारा विकास का मनोसामाजिक सिद्धान्त (Psychosocial Theory) दिया गया है।
    • एरिक्सन के अनुसार यह चौथा विकासात्मक चरण (Industry vs Inferiority) है, जो बाल्यावस्था के मध्य (6-12 वर्ष) में परिलक्षित होता है।
    • इस चरण में बालक द्वारा की गई पहल से वह नए अनुभवों के सम्पर्क में आता है और अपनी योग्यता को बौद्धिक कौशल और ज्ञान से हासिल करने की दिशा में मोड़ देता है।
    • अन्य विकल्प: उद्दीपन-प्रतिक्रिया (व्यवहारवाद – Watson), लिंगीय स्तर (मनोयौन सिद्धांत – Freud), क्रियाप्रसूत अनुबंधन (Operant Conditioning – Skinner) – ये अन्य सिद्धांतों से संबंधित हैं।

निम्नलिखित में से कौन-से अभिलक्षण एक प्रतिभाशाली विद्यार्थी की पहचान नहीं है?

  • निरंतर प्रवीणता अभिमुखीकरण व्यवहार
  • समकक्षियों की तुलना में उन्नतर सामाजिक कौशल व परिपक्वता
  • स्वतंत्र रूप से समस्या-समाधान
  • बौद्धिक जिज्ञासा

  • उत्तर: समकक्षियों की तुलना में उन्नतर सामाजिक कौशल व परिपक्वता
  • प्रतिभाशाली (Gifted) विद्यार्थी की पहचान यह नहीं है कि उनमें समकक्षियों (Peers) की तुलना में उच्चतर सामाजिक कौशल (Social Skills) व परिपक्वता (Maturity) होती है।
    • प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को पहचानने के लिए अभिलक्षण निम्न हैं:
      1. निरंतर प्रवीणता अभिमुखीकरण व्यवहार (Continuous Proficiency Orientation)
      2. स्वतंत्र रूप से समस्या-समाधान (Independent Problem Solving)
      3. बौद्धिक जिज्ञासा (Intellectual Curiosity)
      4. अमूर्त विषयों में अधिक रुचि
      5. सामान्य ज्ञान अधिक अच्छा होना
      6. अन्तर्दृष्टि (Insight) का अधिक होना
      7. क्रियाकलापों में विविधताएँ होना

यदि एक बच्चा कतार-क्रिया (संयोजक शब्द) संबंध में गलती करता है, तो एक शिक्षक उसकी मदद कर सकता है—

  • कक्षा में उस बच्चे पर विशेष ध्यान देते हुए उदाहरण देकर समझाना।
  • उसे डाँटकर और सजा देकर।
  • उसे 10 बार लिखने को कहकर
  • व्याकरण के नियमों को फिर से बताकर

  • उत्तर: कक्षा में उस बच्चे पर विशेष ध्यान देते हुए उदाहरण देकर समझाना।
  • यदि एक बच्चा कतार-क्रिया (Conjunction) के सम्बन्ध में गलती करता है, तो एक शिक्षक को कक्षा में उस बच्चे पर विशेष ध्यान (Special Attention) देते हुए उदाहरण (Example) देकर समझाना चाहिए।
    • यदि कक्षा में एक बच्चा कतार-क्रिया सम्बन्ध में गलती करता है, तो वह व्याकरण विषय में कमजोर है और उसे इस तरह के उदाहरण देकर समझाना चाहिए, जिसमें कतार-क्रिया का विशेष प्रयोग हुआ हो।
    • एक बच्चा गलती कर रहा है तो सम्पूर्ण शिक्षण प्रक्रिया दोषपूर्ण नहीं है, यह एक वैयक्तिक समस्या (Individual Problem) है।
    • डाँटना, सजा देना, या 10 बार लिखने को कहना सकारात्मक दृष्टिकोण नहीं है और इससे बालक का आत्मविश्वास कम हो सकता है।

निम्नलिखित में से कौन-सी किशोरों की एक प्रमुख चुनौती नहीं है?

  • अपराध
  • मादक द्रव्यों का दुरुपयोग
  • आहार ग्रहण संबंधी विकार
  • असुरक्षा एवं निर्भरता

  • उत्तर: असुरक्षा एवं निर्भरता
  • असुरक्षा (Insecurity) एवं निर्भरता (Dependence) किशोरों की एक प्रमुख चुनौती नहीं है।
    • किशोरों की प्रमुख चुनौतियाँ: अपराध (Crime), मादक द्रव्यों का दुरुपयोग (Substance Abuse), आहार ग्रहण संबंधी विकार (Eating Disorders), अवसाद (Depression), पहचान का संकट (Identity Crisis) आदि।
    • किशोरावस्था को ‘तूफान और तनाव’ (Storm and Stress) की अवस्था कहा गया है।
    • इस अवस्था में किशोर मादक द्रव्यों का दुरुपयोग करके स्वयं के स्वास्थ्य को क्षति पहुँचाने लगते हैं तथा संतुलित आहार का ध्यान न रखकर बाजार की वस्तुओं का सेवन करके रोगों से ग्रसित हो जाते हैं।

अधिगम की अवधारणा के लिये कौन सा कथन सत्य नहीं है?

  • अधिगम व्यवहार में परिवर्तन है।
  • अपेक्षाकृत रूप से स्थायी अंतर परिलक्षित होता है।
  • अधिगम अभ्यास द्वारा प्रभावित होता है।
  • अधिगम एक जन्मजात प्रक्रिया है।

  • उत्तर: अधिगम एक जन्मजात प्रक्रिया है।
  • अधिगम (Learning) एक जन्मजात (Inborn) प्रक्रिया नहीं है; यह कथन अधिगम की अवधारणा के लिए सत्य नहीं है।
    • अधिगम या सीखना एक निरन्तर चलने वाली सार्वभौमिक प्रक्रिया है।
    • व्यक्ति जन्म से ही सीखना प्रारम्भ कर देता है तथा परिस्थिति और आवश्यकता के अनुरूप सीखने की गति घटती-बढ़ती रहती है।
    • अतः अधिगम जन्मजात नहीं, अपितु अर्जित (Acquired) प्रक्रिया है।
    • किम्बल (Kimball) के अनुसार, “पुनरावलोकित अभ्यास के फलस्वरूप व्यवहारजन्य क्षमता में आने वाले अपेक्षाकृत स्थायी प्रकृति का परिवर्तन अधिगम है।”

एक शिक्षिका अपनी कक्षा में सृजनात्मक विद्यार्थियों की पहचान कैसे कर सकती हैं?

  • उनकी अभिसारी सोच की क्षमता के आधार पर
  • समकक्षियों के बीच उनकी प्रसिद्धि को आंककर
  • उनकी मौलिक सोच के आधार पर
  • उनके सरल व प्रत्यास्मरण आधारित क्रियाकलापों के चुनाव के आधार पर

  • उत्तर: उनकी मौलिक सोच के आधार पर
  • एक शिक्षिका अपनी कक्षा में सृजनात्मक (Creative) विद्यार्थियों की पहचान उनकी मौलिक सोच (Original Thinking) के आधार पर कर सकती है, क्योंकि किसी समस्या पर नये ढंग से सोचने तथा समाधान खोजने के प्रयास से सृजनात्मकता परिलक्षित होती है।
    • सृजनात्मक विद्यार्थियों की विशेषताएँ:
      • रचनात्मक आलोचना करना
      • दृढ़ भावात्मकता (Emotional Stability)
      • उत्साही, दृढ़ निश्चय, जिज्ञासा से परिपूर्ण
      • एकान्तप्रियता
      • निर्णय व चिंतन में स्वतंत्रता
      • जटिल विचारों तथा कठिन कार्यों को करना
      • बच्चों के प्रति जागरूकता, अव्यवस्था को स्वीकारना
      • आत्म-सचेत, स्वचालित, बहुमुखी एवं दूरगामी लक्ष्यों का आकांक्षी

शिक्षा के स्तर में ह्रास का मुख्य कारण है—

  • छात्रों की लापरवाही
  • शिक्षकों की अपारंगता
  • अभिभावकों की विचारमग्नता
  • इनमें से सभी

  • उत्तर: इनमें से सभी
  • शिक्षा के स्तर में ह्रास (Decline in Education Level) का मुख्य कारण छात्रों की लापरवाही (Carelessness), शिक्षकों की अपारंगता (Incompetence) तथा अभिभावकों की विचारमग्नता (Indifference) आदि सभी हैं।
    • शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले तीनों पक्ष (छात्र, शिक्षक, अभिभावक) इस ह्रास में योगदान देते हैं।
    • छात्रों की लापरवाही – अध्ययन में रुचि की कमी
    • शिक्षकों की अपारंगता – अक्षम शिक्षण विधियाँ
    • अभिभावकों की विचारमग्नता – बच्चों की शिक्षा में उदासीनता

निम्नलिखित में से किसका विकास किशोरावस्था में नहीं होता?

  • अहम् केन्द्रिकता
  • अभिरुचियाँ
  • तर्क शक्ति
  • प्रेक्षण की योग्यता

  • उत्तर: अहम् केन्द्रिकता
  • किशोरावस्था (Adolescence) में अहम् केन्द्रिकता (Egocentrism) नहीं होती है; यह गुण शैशवावस्था (Early Childhood) का है।
    • किशोरावस्था में निम्न का विकास होता है:
      • तर्क क्षमता (Logical Ability) का विकास
      • अभिरुचियाँ (Interests) में परिवर्तन
      • प्रेक्षण की योग्यता (Observation Ability) का विकास

एक विद्यार्थी गुणन के सवालों को हल करना सीखता है। वह अपने ‘जोड़’ के पूर्व ज्ञान का प्रयोग करता है। इस प्रकार के अधिगम अंतरण को क्या कहा जाता है?

  • धनात्मक अंतरण
  • क्षैतिज अंतरण
  • ऊर्ध्व अंतरण
  • द्विपक्षीय अंतरण

  • उत्तर: ऊर्ध्व अंतरण
  • गुणन के सवालों को हल करने में अपने ‘जोड़’ के पूर्व ज्ञान का प्रयोग करना ऊर्ध्व अंतरण (Vertical Transfer) कहलाता है।
    • ऊर्ध्व अंतरण (Vertical Transfer) – जब किसी परिस्थिति में अर्जित ज्ञान, अनुभव अथवा प्रशिक्षण का प्रयोग व्यक्ति किसी अन्य प्रकार अथवा उच्चस्तरीय (Higher Level) परिस्थितियों के अध्ययन में करता है।
    • जैसे – गुणन के सवालों को हल करने में अपने जोड़ के पूर्व अनुभव या ज्ञान का प्रयोग करना अधिगम का ऊर्ध्व अंतरण है।
    • क्षैतिज अंतरण (Horizontal Transfer) – जब एक विषय का ज्ञान दूसरे समकक्ष विषय में प्रयोग किया जाता है।
    • धनात्मक अंतरण (Positive Transfer) – जब पूर्व अधिगम नए अधिगम में सहायक होता है।

स्किनर बॉक्स का प्रयोग किसके लिए किया जाता है?

  • परम्परागत अनुबंधन
  • सूत्रीकरण
  • प्रसूत (सक्रिय) अनुबन्धन
  • अन्तर्दृष्टि

  • उत्तर: प्रसूत (सक्रिय) अनुबन्धन
  • स्किनर बॉक्स (Skinner Box) का प्रयोग प्रसूत अनुबन्धन (Operant Conditioning) के लिए किया जाता है।
    • बी.एफ. स्किनर (B.F. Skinner) को सबसे प्रभावशाली मनोवैज्ञानिक माना जाता है, जो सीखने में संचालक अनुकूलन की भूमिका की वकालत करता है।
    • उन्होंने चूहों में सीखने की प्रक्रिया का अध्ययन करने के लिए एक प्रायोगिक कक्ष (जिसे स्किनर बॉक्स कहा जाता है) विकसित किया।
    • 1938 में बी.एफ. स्किनर द्वारा “द बिहेवियर ऑफ ऑर्गेनिज्म” (The Behavior of Organisms) पुस्तक लिखी गयी, जिसमें उन्होंने बताया कि व्यवहार जीवन को बदल देता है
    • इस सिद्धांत में प्रबलीकरण (Reinforcement) और दण्ड (Punishment) के माध्यम से व्यवहार को नियंत्रित किया जाता है।

बालकों के सामाजिक विकास को प्रभावित करने वाले व्यक्तिगत कारक हैं—

  • स्वास्थ्य, संवेग एवं बुद्धि
  • मित्र-मण्डली एवं आस-पड़ोस
  • आयु एवं लिंग
  • पोषण एवं आहार

  • उत्तर: स्वास्थ्य, संवेग एवं बुद्धि
  • बालक के सामाजिक विकास (Social Development) को प्रभावित करने वाले व्यक्तिगत कारक (Individual Factors) हैं – स्वास्थ्य (Health), संवेग (Emotion) तथा बुद्धि (Intelligence)
    • बच्चे की मित्र-मण्डली (Peer Group) सामूहिक कारक (Collective Factor) के अंतर्गत आता है, जो उसके सामाजिक विकास में सहायक होता है।

एक कुशल शिक्षक के लिए आवश्यक है—

  • विषय का गहन ज्ञान
  • शिक्षण विधियों का ज्ञान
  • शिक्षा दर्शन का ज्ञान
  • बाल मनोविज्ञान का ज्ञान

  • उत्तर: बाल मनोविज्ञान का ज्ञान
  • एक कुशल शिक्षक (Effective Teacher) को अपने विषय में पारंगत होने के साथ-साथ बाल मनोविज्ञान (Child Psychology) का भी ज्ञान होना आवश्यक है।
    • बाल मनोविज्ञान के ज्ञान से शिक्षक बच्चों के व्यवहार, मानसिक स्थिति, योग्यता एवं क्षमता के अनुसार शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का संचालन कर सकता है।
    • इससे शिक्षक बालक के व्यवहार को आसानी से समझ सकता है तथा अपना शिक्षण कार्य सुचारू रूप से चला सकता है।
    • अपने विद्यार्थियों को समझने के लिए शिक्षक के निम्न गुण होने चाहिए:
      • बाल मनोविज्ञान की समझ
      • बच्चों की बुद्धि स्तर की समझ
      • बच्चों की अभिवृत्ति की समझ
      • बच्चों की समस्याओं के बारे में समझ

प्रेरणा किसकी एक कला है?

  • कार्य योजना
  • रुचि पैदा करना
  • मस्तिष्क को नियंत्रित करना
  • सिलेबस के अनुसार पढ़ाना

  • उत्तर: रुचि पैदा करना
  • प्रेरणा (Motivation) रुचि (Interest) पैदा करने की एक कला है।
    • शिक्षा में प्रेरणा के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए थॉमसन (Thomson) महोदय ने कहा है, “प्रेरणा छात्र में रुचि उत्पन्न करने की कला है।”
    • शिक्षक आन्तरिक प्रेरणा (Intrinsic Motivation) का प्रयोग करके बालक में पढ़ने के प्रति रुचि जागृत कर सकता है।
    • प्रेरणा द्वारा उन्हें स्वयं पढ़ने की रुचि हो जाती है।

यदि कोई विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने के लिए कठिन परिश्रम करता है ताकि वह प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण हो सके, तो यह किस प्रकार की अभिप्रेरणा है?

  • आन्तरिक अभिप्रेरणा
  • बाह्य अभिप्रेरणा
  • सकारात्मक अभिप्रेरणा
  • बाध्य अभिप्रेरणा

  • उत्तर: बाध्य अभिप्रेरणा
  • यदि कोई विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने के लिए कठिन परिश्रम करता है ताकि वह प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण हो सके, तो इसका अर्थ है कि वह विद्यार्थी बाध्य रूप से अभिप्रेरित (Compulsory Motivation) है।
    • इस प्रकार की अभिप्रेरणा को बाध्य अभिप्रेरणा या नकारात्मक अभिप्रेरणा (Negative Motivation) कहते हैं।
    • बाध्य अभिप्रेरणा बालक की कार्य में अरुचि उत्पन्न कर सकती है, फलस्वरूप वह कार्य को पूर्ण करने के लिए किसी अनुचित विधि का प्रयोग कर सकता है।
    • आन्तरिक अभिप्रेरणा (Intrinsic Motivation) – आंतरिक रुचि से प्रेरित होना।
    • बाह्य अभिप्रेरणा (Extrinsic Motivation) – बाहरी पुरस्कार/दण्ड से प्रेरित होना।

निचली कक्षाओं में शिक्षण की खेल पद्धति मूल रूप से किस पर आधारित है?

  • सामाजिक सिद्धांतों पर
  • विकास एवं वृद्धि के मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों पर
  • शारीरिक सिद्धांतों पर
  • बौद्धिक सिद्धांतों पर

  • उत्तर: विकास एवं वृद्धि के मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों पर
  • निचली कक्षाओं में शिक्षण की खेल पद्धति (Play-way Method) मूल रूप से विकास एवं वृद्धि (Development & Growth) के मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों (Psychological Principles) पर आधारित है।
    • निचली कक्षाओं के बच्चे सामान्यतः बाल्यावस्था (Childhood) में होते हैं और बाल्यावस्था में बच्चे पढ़ने से ज्यादा खेलने में रुचि लेते हैं।
    • इसलिए छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षण की खेल पद्धति का प्रयोग किया जाता है।
    • खेल-आधारित शिक्षण (Play-based Learning) बच्चों के सर्वांगीण विकास (Holistic Development) के लिए अत्यंत प्रभावी है।
JTET CDP Questions SET 01