Hindi
‘तल्लीन’ शब्द का संधि विच्छेद होगा-
- तव + लीन
- तल + लीन
- ततः + लीन
- तत् + लीन
Explanation:
- तत् + लीन में व्यंजन संधि है, ‘त्’ और ‘ल’ के मेल से ‘तल्लीन’ बना है।
‘सदैव’ शब्द में कौन सी संधि है?
- यण संधि
- व्यंजन संधि
- वृद्धि संधि
- गुण संधि
Explanation:
- सदा + एव = सदैव (आ + ए = ऐ) – यह वृद्धि संधि है। (यहाँ ‘चूंद्र’ मुद्रण-त्रुटि है, सही ‘वृद्धि’ है।)
‘बाजाल’ का संधि विच्छेद होगा-
- वाक् + जाल
- वाक् + जाल
- वाग् + जाल
- वागः + जाल
Explanation:
- वाक् + जाल = वाजाल (क् + ज = ग्? वास्तव में ‘वाग्जाल’ सही है, पर दिए गए विकल्पों में ‘वाक् + जाल’ स्वीकृत है।)
‘द्वाविप’ का संधि-विच्छेद होगा :
- द् + आविप
- द्वौ + अविप
- दव + अयापि
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- द्वौ + अविप = द्वाविप (औ + अ = आ) – वृद्धि संधि।
‘अत्यधिक’ का शुद्ध संधि-विच्छेद क्या है :
- अत्य + धिक
- अति + अधिक
- अती + अधिक
- अत्यधि + क
Explanation:
- अति + अधिक = अत्यधिक (इ + अ = य) – यण संधि।
निम्नलिखित में से कौन विसर्ग संधि है ?
- निरन्तर
- दिग्गज
- जगदीश
- महीश
Explanation:
- निर् + अन्तर = निरन्तर (र् + अ = र) – यह विसर्ग संधि है (विसर्ग का र् होना)।
‘इति + आदि’ = इत्यादि में कौन सी संधि है?
- यण संधि
- दीर्घ संधि
- गुण संधि
- अयादि संधि
Explanation:
- इति + आदि = इत्यादि (इ + आ = य) – यण संधि।
‘मनोहर’ शब्द में संधि है :
- स्वर संधि
- विसर्ग संधि
- व्यंजन संधि
- दीर्घ संधि
Explanation:
- मनः + हर = मनोहर (विसर्ग + ह = ओ) – विसर्ग संधि।
निम्नलिखित में से एक कथन गलत है :
- संधि में दो पक्षों का मेल होता है।
- संधि तोड़ने को ‘विच्छेद’ कहते हैं।
- समाप्त में पदों के प्रत्यय समाप्त कर दिये जाते हैं।
- समाप्त तोड़ने को ‘विग्रह’ कहते हैं।
Explanation:
- संधि में दो वर्णों (पदों नहीं) का मेल होता है, अतः यह कथन गलत है।
निम्नलिखित में से एक कथन गलत है :
- दो वर्णों के मेल से होने वाले विकार को संधि कहते हैं।
- दो स्वरों के मेल से उत्पन्न विकार को स्वर संधि कहते हैं।
- व्यंजन से स्वर अथवा व्यंजन के मेल से उत्पन्न विकार को व्यंजन संधि कहते हैं।
- विसर्ग के साथ विसर्ग के मेल से उत्पन्न विकार को विसर्ग संधि कहते हैं।
Explanation:
- विसर्ग संधि विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से होती है, विसर्ग+विसर्ग से नहीं।
‘पुरस्कार’ में कौन सी संधि है ?:
- स्वर-संधि
- व्यंजन संधि
- विसर्ग संधि
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- पुरस् + कार = पुरस्कार (विसर्ग + क = स्) – विसर्ग संधि।
निम्नलिखित में से कौन सा व्यंजन संधि का उदाहरण है?
- सदैव
- मनोरथ
- निर्गुण
- सदाचार
Explanation:
- सत् + आचार = सदाचार (त् + आ = द) – व्यंजन संधि।
‘मृत्यु + उपरांत’ में संधि करने से एक शब्द निर्मित होगा :
- मृत्यूपरांत
- मृत्योपरांत
- मृत्युपर्यन्त
- मत्योपरांत
Explanation:
- मृत्यु + उपरांत = मृत्यूपरांत (उ + उ = ऊ) – दीर्घ संधि।
‘अनधिकृत’ शब्द का संधि-विच्छेद होगा :
- अन + अधिकृत
- अन् + अधिकृत
- अन्य + अधिकृत
- अत्रिध + कृत
Explanation:
- अन् + अधिकृत = अनधिकृत (न् + अ = न) – व्यंजन संधि।
‘कपि + ईश’ का सही संधि-संयोजन कीजिए :
- कपिश
- कपीश
- कपेश
- कपिश
Explanation:
- कपि + ईश = कपीश (इ + ई = ई) – दीर्घ संधि।
‘विसर्ग के साथ स्वर अथवा व्यंजन के संयोग से जो विकार उत्पन्न होता है, उसे किस संधि के नाम से जानते हैं :
- स्वर संधि
- व्यंजन संधि
- विसर्ग संधि
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- यह विसर्ग संधि की परिभाषा है।
‘परोपकार’ शब्द का संधि-विच्छेद होगा :
- परा + उपकार
- परो + पकार
- परोप + कार
- पर + उपकार
Explanation:
- पर + उपकार = परोपकार (अ + उ = ओ) – गुण संधि।
‘मनः + रमा’ में संधि करने से जो शब्द बनेगा, उसका संबंध किस संधि से होगा?
- विसर्ग संधि
- स्वर संधि
- व्यंजन संधि
- भाव संधि
Explanation:
- मनः + रमा = मनोरमा (विसर्ग + र = ओ) – विसर्ग संधि।
‘चन्द्रोदय’ में कौन-सी संधि है?
- यण संधि
- दीर्घ संधि
- वृद्धि संधि
- गुण संधि
Explanation:
- चन्द्र + उदय = चन्द्रोदय (अ + उ = ओ) – गुण संधि।
निम्नलिखित में से ‘वृद्धि स्वर संधि’ किस शब्द में है?
- रजनीश
- महोष्ण
- यतीन्द्र
- शोषार्थी
Explanation:
- महा + उष्ण = महोष्ण (आ + उ = ओ) – वृद्धि संधि? वास्तव में गुण है, पर विकल्प में ‘वृद्धि’ माना गया है।
‘सदाशय’ का सही संधि-विच्छेद होगा :
- सद + आशय
- सतत + आशय
- सत् + आशय
- सदा + आशय
Explanation:
- सत् + आशय = सदाशय (त् + आ = दा) – व्यंजन संधि।
निम्नलिखित में यह संधि विच्छेद सही है :
- परम + आत्मा
- परम + आत्म
- परमा + आत्मा
- पर + मात्मा
Explanation:
- परम + आत्मा = परमात्मा (अ + आ = आ) – दीर्घ संधि।
निम्नलिखित विकल्पों में यह शुद्ध है :
- पर + अधीन
- पर + आधीन
- पर + अधीन
- परा + आधीन
Explanation:
- पर + अधीन = पराधीन (अ + अ = आ) – दीर्घ संधि। (यहाँ विकल्प क्रम में त्रुटि है, पर ‘पर + अधीन’ को शुद्ध माना गया है।)
‘उच्चारण’ का सही संधि विच्छेद है
- उच्च + चारण
- उत + चारण
- उच् + चारण
- उत् + चारण
Explanation:
- उत् + चारण = उच्चारण (त् + च = च्च) – व्यंजन संधि।
‘महाशय’ शब्द का सही संधि विच्छेद है
- महः + आशय
- मह + आशय
- महा + आशय
- महाश् + अय
Explanation:
- महा + आशय = महाशय (आ + आ = आ) – दीर्घ संधि।
‘पावन’ शब्द का सही संधि विच्छेद है
- प + अवन
- पा + आवन
- पाव् + अन
- पौ + अन
Explanation:
- पो + अन? वास्तव में ‘पवन’ का संधि विच्छेद ‘पो + अन’ है, पर ‘पावन’ के लिए ‘पौ + अन’ दिया गया है।
‘उल्लास’ शब्द का सही संधि विच्छेद होगा
- उत् + लास
- उल् + लास
- उल + लास
- उल्ल + आस
Explanation:
- उत् + लास = उल्लास (त् + ल = ल्ल) – व्यंजन संधि। (यहाँ ‘उव्’ मुद्रण-त्रुटि है।)
निम्नलिखित में ‘यण’ संधि कौन सी है?
- यद्यपि
- एकैक
- सदैव
- महौजस्वी
Explanation:
- यदि + अपि = यद्यपि (इ + अ = य) – यण संधि।
निम्नलिखित में से ‘वृद्धि स्वर संधि’ कौन सी है?
- पृथ्वीश
- विद्यार्थी
- महीन्
- महौषध
Explanation:
- महा + औषध = महौषध (आ + औ = औ) – वृद्धि संधि।
‘अतएव’ शब्द का सही संधि विच्छेद है-
- अत + एव
- अति + एव
- अती + एव
- अतः + एव
Explanation:
- अतः + एव = अतएव (विसर्ग + ए = ए) – विसर्ग संधि। (उत्तर (d) दिया है।)
‘पवन’ शब्द में कौन-सी संधि है –
- गुण संधि
- यण संधि
- अयादि संधि
- वृद्धि संधि
Explanation:
- पो + अन = पवन (ओ + अ = अव्? वास्तव में ‘पो + अन’ में अयादि संधि है।)
‘उज्ज्वल’ में प्रयुक्त संधि है –
- गुण संधि
- व्यंजन संधि
- विसर्ग संधि
- दीर्घ संधि
Explanation:
- उत् + ज्वल = उज्ज्वल (त् + ज = ज्ज) – व्यंजन संधि।
‘तल्लीन’ शब्द में सही उपसर्ग का विच्छेद है –
- तल + लीन
- तद् + लीन
- तत + लीन
- तत् + लीन
Explanation:
- तत् + लीन = तल्लीन (त् + ल = ल्ल) – व्यंजन संधि।
‘अन्वेषण’ का शुद्ध संधि–विच्छेद है –
- अन्वेष + ण
- अन्वे + ण
- अनु + वेषण
- अनु + एषण
Explanation:
- अनु + एषण = अन्वेषण (उ + ए = वे) – यण संधि।
‘यण् संधि’ का सम्बन्ध किस संधि विशेष से है :
- व्यंजन संधि
- विसर्ग संधि
- स्वर संधि
- दीर्घ संधि
Explanation:
- यण संधि स्वर संधि का एक भेद है।
नवोढ़ा का संधि विच्छेद है :
- नव + उढ़ा
- नवो + ढ़ा
- नव + ऊढ़ा
- न + ओढ़ा
Explanation:
- नव + ऊढ़ा = नवोढ़ा (अ + ऊ = ओ) – गुण संधि।
‘जगन्नाथ’ शब्द में सही संधि है –
- स्वर संधि
- विसर्ग संधि
- व्यंजन संधि
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- जगत् + नाथ = जगन्नाथ (त् + न = न्न) – व्यंजन संधि।
‘अन्वेषण’ का शुद्ध संधि–विच्छेद है –
- अन्वेष + ण
- अन्वे + ण
- अनु + वेषण
- अनु + एषण
Explanation:
- अनु + एषण = अन्वेषण (उ + ए = वे) – यण संधि।
‘यण् संधि’ का सम्बन्ध किस संधि विशेष से है :
- व्यंजन संधि
- विसर्ग संधि
- स्वर संधि
- दीर्घ संधि
Explanation:
- यण संधि स्वर संधि का एक भेद है।
नवोढ़ा का संधि विच्छेद है :
- नव + उढ़ा
- नवो + ढ़ा
- नव + ऊढ़ा
- न + ओढ़ा
Explanation:
- नव + ऊढ़ा = नवोढ़ा (अ + ऊ = ओ) – गुण संधि।
‘जगन्नाथ’ शब्द में सही संधि है –
- स्वर संधि
- विसर्ग संधि
- व्यंजन संधि
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- जगत् + नाथ = जगन्नाथ (त् + न = न्न) – व्यंजन संधि।
‘व्याप्त’ में संधि है
- गुण संधि
- दीर्घ संधि
- यण संधि
- अयादि संधि
Explanation:
- वि + आप्त = व्याप्त (इ + आ = या) – यण संधि।
‘व्याप्त’ में संधि है
- गुण संधि
- दीर्घ संधि
- यण संधि
- अयादि संधि
Explanation:
- वि + आप्त = व्याप्त (इ + आ = या) – यण संधि।
उन्नति :
- उन् + नति
- उत् + नति
- उन् + ति
- उ + नति
Explanation:
- उत् + नति = उन्नति (त् + न = न्न) – व्यंजन संधि।
प्रतिच्छिव : (प्रतिच्छवि?)
- प्रति + च्छिव
- प्रति + छवि
- प्र + छिव
- प्राति + चवि
Explanation:
- प्रति + छवि = प्रतिच्छवि (इ + छ = इच्छ?) – व्यंजन संधि। (यहाँ ‘प्रतिच्छिव’ मुद्रण-त्रुटि है, ‘प्रतिच्छवि’ होना चाहिए।)
प्रणाम :
- प्र + णाम
- प्र + नाम
- प्रणा + म
- प्रो + णाम
Explanation:
- प्र + णाम = प्रणाम (व्यंजन संधि? वास्तव में ‘प्र + णाम’ है।)
प्रत्यक्ष :
- प्रति + अक्ष
- प्रति + अक्ष
- प्र + त्यक्ष
- प्रत्य + अक्ष
Explanation:
- प्रति + अक्ष = प्रत्यक्ष (इ + अ = य) – यण संधि।
स्वेच्छा :
- सु + इच्छा
- स्वे + इच्छा
- स्व + इच्छा
- कोई नहीं
Explanation:
- सु + इच्छा = स्वेच्छा (उ + इ = वे) – यण संधि? वास्तव में गुण संधि (उ + इ = वे) है।
सरोज :
- स + रोज
- सर: + ज
- सरो + ज
- सर + ओज
Explanation:
- सरः + ज = सरोज (विसर्ग + ज = ओ) – विसर्ग संधि।
मनोहर :
- मन: + हर
- मनो + हर
- मन + ओहर
- मनोह + र
Explanation:
- मनः + हर = मनोहर (विसर्ग + ह = ओ) – विसर्ग संधि।
जगदीश :
- जगत् + ईश
- जगत् + ईश
- जगद् + ईश
- जगद + ईश
Explanation:
- जगत् + ईश = जगदीश (त् + ई = दी) – व्यंजन संधि।
संविधान :
- सं + विधान
- सम् + विधान
- सम् + विधान
- कोई नहीं
Explanation:
- सम् + विधान = संविधान (म् + व = म्? वास्तव में ‘सम्’ + ‘विधान’ = ‘संविधान’ – व्यंजन संधि।)
संस्कृति :
- सं + स्कृति
- सम् + कृति
- सं + कृति
- सस + कृति
Explanation:
- सम् + कृति = संस्कृति (म् + क = स्क? वास्तव में ‘सम्’ + ‘कृति’ = ‘संस्कृति’ – व्यंजन संधि।)
यशोदा
- यशो + दा
- यशः+ दा
- यश+ दा
- कोई नहीं
Explanation:
- यशः + दा = यशोदा (विसर्ग + द = ओ) – विसर्ग संधि।
अन्तरात्मा
- अन्त + रात्मा
- अन्तर + आत्मा
- अन्तर + आत्मा
- अंतः + आत्मा
Explanation:
- अन्तर + आत्मा = अन्तरात्मा (अ + आ = आ) – दीर्घ संधि।
अन्ततोगत्वा :
- अन्ततः + गत्वा
- अन्ततः + तोगत्वा
- कोई नहीं
- अन्ततो + गत्वा
Explanation:
- अन्ततः + गत्वा = अन्ततोगत्वा (विसर्ग + ग = ओ) – विसर्ग संधि।
‘प्रत्यक्ष’ में संधि हैं –
- गुण
- अयादि
- दीर्घ
- यण
Explanation:
- प्रति + अक्ष = प्रत्यक्ष – यण संधि।
यदि ‘इ’, ‘उ’ और ‘ऋ’ के बाद कोई भिन्न स्वर आये तो इनका परिवर्तन क्रमशः ‘य’, ‘व्’ और ‘र’ में हो तो उसमें कौन-सी संधि होगी –
- गुण स्वर संधि
- यण स्वर संधि
- वृद्धि स्वर संधि
- अयादि स्वर संधि
Explanation:
- यह यण संधि की परिभाषा है।
मनोविज्ञान में कौन सी संधि है –
- व्यंजन संधि
- विसर्ग संधि
- यण संधि
- दीर्घ संधि
Explanation:
- मनः + विज्ञान = मनोविज्ञान (विसर्ग + व = ओ) – विसर्ग संधि।
‘इत्यादि’ शब्द का सही संधि विच्छेद होगा
- इति + आदि
- इति + यादि
- इत्य + यादि
- इत + यादि
Explanation:
- इति + आदि = इत्यादि (इ + आ = य) – यण संधि।
‘तेजोमय’ का सही संधि-विच्छेद है
- तेज + ओमय
- तेजः + मय
- तेजः + अमय
- तेजो + मय
Explanation:
- तेजः + मय = तेजोमय (विसर्ग + म = ओ) – विसर्ग संधि।
‘हरिश्चन्द्र’ में प्रयुक्त किस संधि का नाम सही है ?
- स्वर संधि
- व्यंजन संधि
- विसर्ग संधि
- इनमें से कोई नहीं।
Explanation:
- हरिः + चन्द्र = हरिश्चन्द्र (विसर्ग + च = श्च) – विसर्ग संधि? वास्तव में यह विसर्ग संधि है, पर विकल्प में ‘व्यंजन’ दिया है, मुद्रण-त्रुटि हो सकती है।
महा + उदय =
- महोदय
- महूदय
- महोदय
- महूदय
Explanation:
- महा + उदय = महोदय (आ + उ = ओ) – गुण संधि।
‘सद्भावना’ का संधि-विच्छेद है-
- स + भावना
- स + द्भावना
- सद् + भावना
- सत् + भावना
Explanation:
- सत् + भावना = सद्भावना (त् + भ = द्भ) – व्यंजन संधि।
‘वृक्षच्छाया’ का संधि-विच्छेद होगा-
- वृक्ष + छया
- वृक्ष + च्छाया
- वृक्षच् + छाया
- वृक्ष + छाया
Explanation:
- वृक्ष + छाया = वृक्षच्छाया (यहाँ ‘छ’ के साथ ‘च्छ’ नहीं, बल्कि ‘छ’ ही है – वास्तव में व्यंजन संधि है, पर विकल्प ‘वृक्ष + छाया’ है।)
निम्नलिखित शब्द का संधि-विच्छेद क्या होगा? भानूदय
- भानु + उदय
- भानू + उदय
- भानू + ऊदय
- भानू + ऊदय
Explanation:
- भानु + उदय = भानूदय (उ + उ = ऊ) – दीर्घ संधि।
‘निर्गुण’ का संधि-विच्छेद होगा-
- निर + गुण
- नि + गुण
- नि: + गुण
- निर + गुण
Explanation:
- निः + गुण = निर्गुण (विसर्ग + ग = र्) – विसर्ग संधि।
किस शब्द में गुण संधि है?
- सिंधुर्मि
- भारतेन्दु
- नारीश्वर
- लोकैश्वर्य
Explanation:
- भारत + इन्दु = भारतेन्दु (अ + इ = ए) – गुण संधि।
‘जगन्नाथ’ किस संधि का उदाहरण है?
- व्यंजन संधि
- विसर्ग संधि
- दीर्घ स्वर संधि
- यण् स्वर संधि
Explanation:
- जगत् + नाथ = जगन्नाथ (त् + न = न्न) – व्यंजन संधि।
पवन का संधि-विच्छेद है-
- प + अवन
- प + वन
- पो + अन
- पौ + अन
Explanation:
- पो + अन = पवन (ओ + अ = अव्) – अयादि संधि।
‘पुनर्जन्म’ का संधि-विच्छेद है
- पुनर + जन्म
- पु: + नरजन्म
- पुन: + जन्म
- पुनर + आजन्म
Explanation:
- पुनः + जन्म = पुनर्जन्म (विसर्ग + ज = र्) – विसर्ग संधि।
‘इत्यादि’ शब्द में कौन-सी संधि है?
- यण् संधि
- वृद्धि संधि
- गुण संधि
- दीर्घ संधि
Explanation:
- इति + आदि = इत्यादि (इ + आ = य) – यण संधि।
‘क्ष’ वर्ण किसके योग से बना है-
- क् + घ
- क् + च
- क् + छ
- क् + ष
Explanation:
- ‘क्ष’ = क् + ष के योग से बना है (व्यंजन संधि)।
‘गुडाकेश’ के संधि विच्छेद है-
- गुडा + केश
- गुडाके + ईश
- गुडाका + ईश
- गुड + आकेश
Explanation:
- गुडाका + ईश = गुडाकेश (आ + ई = ए) – वृद्धि? वास्तव में गुण संधि (आ + ई = ए) है।
‘महर्षि’ शब्द में कौन-सी संधि है?
- दीर्घ संधि
- वृद्धि संधि
- गुण संधि
- यण् संधि
Explanation:
- महा + ऋषि = महर्षि (आ + ऋ = अर्) – गुण संधि (अ + ऋ = अर्? वास्तव में ‘अ’ + ‘ऋ’ = ‘अर्’ होता है, जो गुण संधि है।)
‘उल्लास’ का संधि विच्छेद है-
- उल् + आस
- उल्ल + आस
- उल् + लास
- उत् + लास
Explanation:
- उत् + लास = उल्लास (त् + ल = ल्ल) – व्यंजन संधि।
‘यशः + दा’ का संधि युक्त पद होगा-
- जसोदा
- यशोदा
- यशुदा
- यशः दा
Explanation:
- यशः + दा = यशोदा (विसर्ग + द = ओ) – विसर्ग संधि।
‘अक्षौहिणी’ का संधि विच्छेद है-
- अक्ष: + हिणी
- अक्ष + ऊहिनी
- अक्षो + अहिणी
- अक्ष + ओहिणी
Explanation:
- अक्ष + ऊहिनी = अक्षौहिणी (अ + ऊ = औ) – वृद्धि संधि।
‘पुनर्जन्म’ शब्द का सही संधि-विच्छेद है?
- पुन: + जन्म
- पुनर् + जन्म
- पुन् + जन्म
- पुन: + आजन्म
Explanation:
- पुनः + जन्म = पुनर्जन्म (विसर्ग + ज = र्) – विसर्ग संधि।
