Hindi
‘तो पर बारोो उरबसी, सुन राधिके सुजान। तू मोहन की उरबसी, ह्वै, उरबसी, समान।’ इस अवतरण में कौन-सा अलंकार है?
- अनुप्रास
- यमक
- श्लेष
- रूपक
Explanation:
- यहाँ ‘उरबसी’ शब्द की आवृत्ति भिन्न-भिन्न अर्थों में हुई है, इसलिए यमक अलंकार है।
‘पीपर पात सरिस मन डोला’, पंक्ति में अलंकार है-
- उत्प्रेक्षा
- उपमा
- रूपक
- अतिशयोक्ति
Explanation:
- यहाँ ‘सरिस’ (समान) शब्द के प्रयोग से उपमा अलंकार है।
‘मुदित महीपति मंदिर आए सेवक सचिव सुमंत बुलाए’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
- उपमा
- रूपक
- अनुप्रास
- यमक
Explanation:
- यहाँ ‘म’ वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार है।
‘चरण धरत चिंता करत, चितवत चारिउ ओर। सुबरन को ढूँढ़त फिरत, कवि व्यभिचारी चोर।’ उपर्युक्त दोहे में कौन-सा अलंकार है :
- श्लेष
- यमक
- उपमा
- रूपक
Explanation:
- यहाँ ‘सुबरन’ (सोना/सुन्दर वर्ण) और ‘चोर’ आदि शब्दों में श्लेष अलंकार है।
‘तीन बेर खाती सो वे तीन बैर खाती हैं।’ पंक्ति में अलंकार चयनित कीजिए :
- अनुप्रास
- श्लेष
- अन्योक्ति
- यमक
Explanation:
- ‘बेर’ (फल) और ‘बैर’ (शत्रुता) में यमक है, क्योंकि ध्वनि समान है पर अर्थ भिन्न है।
‘चरण-कमल बन्दी हरिराई।’ पंक्ति में अलंकार है :
- उपमा
- रूपक
- श्लेष
- अतिशयोक्ति
Explanation:
- यहाँ ‘चरण’ को ‘कमल’ कहा गया है, अतः रूपक अलंकार है।
‘उम काल मारे क्रोध के, तनु काँपने उनका लगा। मानो हवा के जोर से, सोता हुआ सागर जा गा।’ इस उद्धरण में कौन-सा अलंकार है।
- अतिशयोक्ति
- उपमा
- उत्प्रेक्षा
- रूपक
Explanation:
- ‘मानो’ शब्द के प्रयोग से उत्प्रेक्षा अलंकार है।
निम्नलिखित विकल्पों में से शब्दालंकार को चिह्नित कीजिए :
- यमक
- रूपक
- व्यतिरेक
- प्रतीप
Explanation:
- यमक शब्दालंकार है, जबकि रूपक, व्यतिरेक, प्रतीप अर्थालंकार हैं।
नीचे लिखे विकल्पों में से कौन-सा विकल्प रूपक अलंकार से संबंधित है :
- इसका मुख चन्द्रमा के समान हैं
- चन्द्रमा इसके मुख के समाने हैं
- इसका मुख ही चन्द्रमा है
- यह मुख है अथवा चन्द्रमा
Explanation:
- रूपक में उपमेय पर उपमान का अभेद आरोप किया जाता है।
‘तरिन तनुजा तट तमाल तरुवर बहु छाए’ में कौन-सा अलंकार है
- अनुप्रास
- यमक
- उत्प्रेक्षा
- उपमा
Explanation:
- यहाँ ‘त’ और ‘त’ वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार है।
‘नवल सुन्दर श्याम-शरीर की, सजल नीरद-सी कल-क्रान्ति धी’ में कौन-सा अलंकार है?
- उपमा
- रूपक
- श्लेष
- उत्प्रेक्षा
Explanation:
- ‘नीरद-सी’ में ‘सी’ शब्द से उपमा अलंकार है।
‘सेस महेस गनेस दिनेस सुरेसहू जाहि निरंतर गार्वे’ – इस पंक्ति में अलंकार है-
- रूपक
- यमक
- अनुप्रास
- श्लेष
Explanation:
- यहाँ ‘स’ और ‘स’ वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार है।
‘फूले काँस सकल महि छाई जनु बरसा रितु प्रकट बुढाई’ – में अलंकार है-
- यमक
- श्लेष
- रूपक
- उत्प्रेक्षा
Explanation:
- ‘जनु’ (मानो) शब्द के प्रयोग से उत्प्रेक्षा अलंकार है।
रूपक अलंकार यहाँ होता है
- उपमेय उपमान की समानता में
- उपमेय उपमान के अभेद में
- उपमेय से उपमान की विशिष्टता में
- उपमेय से उपमान की हीनता में
Explanation:
- रूपक में उपमेय और उपमान का अभेद (एकरूपता) दिखाई जाती है।
‘ज्यों-ज्यों बूझें स्याम रंग, त्यों-त्यों उज्ज्वल होय’- इस पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
- विरोधाभास
- यमक
- उत्प्रेक्षा
- उपमा
Explanation:
- श्याम (काले) रंग के बूझने से उज्ज्वल होना विरोधाभास है।
सिर झुका तूने नियति की मान ली यह बात। स्वयं ही मुरझा गया तेरा हृदय-जलजाता। इस पंक्तियों में कौन सा अलंकार है?
- अनुप्रास
- श्लेष
- उत्प्रेक्षा
- रूपक
Explanation:
- हृदय को ‘जलजात’ (कमल) कहा गया है, अतः रूपक अलंकार है।
उपमेय में उपमान का आरोप होने पर अलंकार होता है
- उत्प्रेक्षा
- रूपक
- मानवीकरण
- अपहृति
Explanation:
- अपहृति अलंकार में उपमेय का निषेध करके उपमान का आरोप किया जाता है।
उपमेय में कल्पित उपमान की संभावना को कहते हैं
- उपमा
- रूपक
- उत्प्रेक्षा
- दृष्टांत
Explanation:
- उत्प्रेक्षा में उपमेय में उपमान की संभावना/कल्पना की जाती है।
उपमान और उपमेय का अभेद कहलाता है
- उपमा
- रूपक
- उत्प्रेक्षा
- भ्रांतिमान
Explanation:
- रूपक में उपमेय और उपमान का अभेद दिखाया जाता है।
‘तरिन तन्जा तट तमाल तरुवर बहु छाए’ में कौन सा अलंकार है?
- अनुप्रास
- यमक
- उत्प्रेक्षा
- उपमा
Explanation:
- यहाँ ‘त’ वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार है।
‘चर मर र खुल गए अर रवस्फुटों से’ में कौन-सा अलंकार है?
- अनुप्रास
- श्लेष
- यमक
- उत्प्रेक्षा
Explanation:
- यहाँ ‘र’ वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार है।
बड़े न हुए गुनन बिनु वरद बड़ाई पाय कहत धतूरे सो कनक, गहनो गहो न जाय॥ प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- अतिशयोक्ति
- प्रतिवस्तूपमा
- अर्थान्तरन्यास
- विरोधाभास
Explanation:
- यहाँ सामान्य सिद्धांत (गुण बिना बड़ाई नहीं) को उदाहरण द्वारा समर्थित किया गया है।
‘बरण-कमल बन्दी हरि राई’ में कौन-सा अलंकार है?
- श्लेष
- उपमा
- रूपक
- अतिशयोक्ति
Explanation:
- ‘बरण’ (वर्ण) को ‘कमल’ कहा गया है, अतः रूपक अलंकार है।
कनक कनक ते सौगुनी, मादकता अधिकाय। वा खाए बौरात नर, या पाए बौराय॥ प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- उपमा
- यमक
- अनुप्रास
- श्लेष
Explanation:
- ‘कनक’ (सोना) और ‘कनक’ (धतूरा) में यमक है।
‘नवल सुन्दर श्याम शरीर’ में कौन-सा अलंकार है?
- अनुप्रास
- उपमा
- रूपक
- अतिशयोक्ति
Explanation:
- यहाँ ‘श’ वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार है।
दिवसावसान का समय मेघमय आसमान से उतर रही है वह संध्या-सुन्दरी परी सी धीरे-धीरे-धीरे । प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- उपमा
- रूपक
- मानवीकरण
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- ‘परी सी’ में ‘सी’ शब्द से उपमा अलंकार है।
‘तीन बेर खाती थी वे तीन बेर खाती हैं’ में कौन-सा अलंकार है?
- अनुप्रास
- श्लेष
- यमक
- अन्योक्ति
Explanation:
- ‘बेर’ (फल) और ‘बेर’ (बार/अवसर) में यमक है।
अब अलि रही गुलाब में, अपत कटीली डार में कौन-सा अलंकार है?
- उपमा
- उल्लेख
- अन्योक्ति
- अतिशयोक्ति
Explanation:
- यहाँ भौंरे के द्वारा परोक्ष रूप से किसी अन्य का वर्णन है, अतः अन्योक्ति अलंकार है।
अति मलीन वृषभानुकुमारी। अधोमुख रहति, उरध नहीं चितवत, ज्यों गथ हारे थकित जुआरी। छूटे चिहुर बदन कुहिलानो, ज्यों नलिनी हिमकर की मारी। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- अनुप्रास
- उल्लेख
- रूपक
- उपमा
Explanation:
- ‘ज्यों’ शब्द के प्रयोग से उपमा अलंकार है।
नहिं पराग नहिं मधुर, मधु, नहिं विकास इहि काल। अली कली ही सौं बिध्यों, आगे कौन हवाल।। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- रूपक
- विशेषोक्ति
- अन्योक्ति
- अतिशयोक्ति
Explanation:
- यहाँ कली के माध्यम से परोक्ष कथन है, अतः अन्योक्ति अलंकार है।
कबिरा सोई पीर है, जे जाने पर पीर। जे पर पीर न जानई, सो काफिर बेपीर।। प्रस्तुत पंक्तियों कौन-सा अलंकार है?
- यमक
- रूपक
- पुनरुक्ति
- श्लेष
Explanation:
- ‘पीर’ (पीड़ा) और ‘पीर’ (पीर/संत) में यमक है।
‘संदेशनि मधुबन-कूप भरे’ में कौन-सा अलंकार है?
- रूपक
- अन्योक्ति
- अतिशयोक्ति
- निरुक्ति
Explanation:
- यहाँ अत्युक्ति (अतिशयोक्ति) है कि मधुबन के कुएँ संदेशों से भरे हैं।
‘पट-पीत मानहुं तड़ित रुचि, सुचि नौमि जनक सुतावरं’ में कौन-सा अलंकार है?
- उपमा
- रूपक
- उत्प्रेक्षा
- उदाहरण
Explanation:
- ‘मानहुं’ (मानो) से उत्प्रेक्षा है, लेकिन विकल्पों में उपमा को सही माना गया है।
रहिमन जो गति दीप की, कुल कपूत गति सोय। बारे उजियारे लगै, बढ़ै अंधेरो होय। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- उपमा
- रूपक
- यमक
- श्लेष
Explanation:
- ‘गति’ (चाल) और ‘गति’ (दशा) में श्लेष है।
ध्वनि मयी कर के गिरि-कंदरा, कलित-कानन-केलि-निकुंज को। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- छेकानुप्रास
- वृत्यनुप्रास
- लाटानुप्रास
- यमक
Explanation:
- यहाँ ‘क’ वर्ण की आवृत्ति से वृत्यनुप्रास है।
‘कुन्द इन्दु सम देह, उमा रमन करुणा अयन’ में कौन-सा अलंकार है?
- श्लेष
- उपमा
- अनुप्रास
- रूपक
Explanation:
- यहाँ ‘न’ वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार है।
जहाँ बिना कारण के कार्य का होना पाया जाए वहाँ कौन सा अलंकार होता है?
- विरोधाभास
- विशेषोक्ति
- विभावना
- भ्रांतिमान
Explanation:
- विभावना अलंकार में कार्य होता है पर कारण नहीं होता।
पूत कपूत तो क्यों धन संचय। पूत सपूत तो क्यों धन संचय।। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- छेकानुप्रास
- लाटानुप्रास
- वृत्यनुप्रास
- अन्त्यानुप्रास
Explanation:
- यहाँ ‘पूत’ शब्द की आवृत्ति भिन्न-भिन्न अर्थों में है, इसलिए लाटानुप्रास है।
जहाँ उपमेय में उपमान की समानता की संभावना व्यक्त की जाती है, वहाँ अलंकार होता है :
- उत्प्रेक्षा
- उपमा
- रूपक
- सन्देह
Explanation:
- उपमा में उपमेय और उपमान में सादृश्य (समानता) दिखाई जाती है।
उपमेय पर उपमान का अभेद आरोप होने पर होता है :
- उपमालंकार
- रूपकालंकार
- श्लेषालंकार
- उत्प्रेक्षालंकार
Explanation:
- रूपक में उपमेय पर उपमान का अभेद आरोप किया जाता है।
जहाँ उपमेय का निषेध करके उपमान का आरोप किया जाय, वहाँ होता है :
- रूपक अलंकार
- उत्प्रेक्षा अलंकार
- अपहृति अलंकार
- उपमा अलंकार
Explanation:
- अपहृति अलंकार में उपमेय का निषेध करके उपमान का आरोप किया जाता है (विकल्पों में रूपक को सही माना गया है)।
निम्नलिखित में से कौन साझ्यमूलक अलंकार नहीं है?
- उपमा
- रूपक
- विशेषोक्ति
- उत्प्रेक्षा
Explanation:
- विशेषोक्ति साझ्यमूलक अलंकार (जो सादृश्य पर आधारित हैं) नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र अलंकार है।
किस पंक्ति में ‘अपहृति’ अलंकार है?
- इसका मुख चंद्रमा के समान है।
- चंद्र इसके मुख के समान है।
- इसका मुख ही चंद्र है।
- यह चंद्र नहीं मुख है।
Explanation:
- अपहृति में उपमेय (मुख) का निषेध करके उपमान (चंद्र) का आरोप किया जाता है।
‘रावण सिर सरोज बनवारी। चिल रघुवीर सिली-मुख धारी’ सिली-मुख में अलंकार है :
- श्लेष
- लाटानुप्रास
- वृत्यनुप्रास
- उपमा
Explanation:
- ‘सिली’ (पत्थर) और ‘सिली’ (शिला) में श्लेष है।
‘अथ सुनहले तीर बरसती जयलक्ष्मी सी उदित हुई। इसमें अलंकार हैं :
- मानवीकरण
- दृष्टान्त
- सन्देह
- विरोधाभास
Explanation:
- यहाँ जयलक्ष्मी को उदित होती हुई कहकर मानवीकरण किया गया है।
‘बिनु पद चलै सुने बिनु काना कर बिनु कर्म करै विधि नाना’ इस चौपाई में अलंकार हैं :
- विषम
- विभावना
- असंगति
- तद्गुण
Explanation:
- कार्य (चलना, सुनना, कर्म करना) हो रहा है पर कारण (पैर, कान, हाथ) नहीं है, अतः विभावना अलंकार है।
‘कुल कानन कुंडल मोर पखा, उर पे बनमाल विराजित है। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- अनुप्रास
- यमक
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- यहाँ ‘क’ और ‘क’ वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार है।
पूत सपूत तो का धन संचय। पूत कपूत तो का धन संचय। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- लाटानुप्रास
- यमक
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- ‘पूत’ की भिन्न-भिन्न अर्थों में आवृत्ति से लाटानुप्रास है।
काली घटा का घमण्ड घटा नभ मण्डल तारक बूंद खिले। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- लाटानुप्रास
- यमक
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- ‘घटा’ (बादल) और ‘घटा’ (कम/कमी) में यमक है।
जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोय। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- लाटानुप्रास
- यमक
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- ‘गति’ (चाल) और ‘गति’ (दशा) में श्लेष है।
को तुम? है घनश्याम हम, तो बरसो कित जाय। नहि, मनमोहन है प्रिये, फिर क्यों पकरत पाथय।। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- लाटानुप्रास
- यमक
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- यहाँ घनश्याम (कृष्ण) और मनमोहन (कृष्ण) के प्रति वक्रोक्ति (व्यंग्य) है।
बालों को खोलकर मत चला करो दिन में रात भूल जाएगा सूरज । प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- लाटानुप्रास
- यमक
- अतिशयोक्ति
- वक्रोक्ति
Explanation:
- यहाँ अत्युक्ति है कि बाल खोलने से सूरज रात भूल जाएगा।
पीपर पात सरस मन झोला। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- लाटानुप्रास
- उपमा
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- ‘सरिस’ (समान) शब्द से उपमा अलंकार है।
मुख बाल-रवि-सम लाल होकर, काल-सा बोधित हुआ। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- लाटानुप्रास
- उपमा
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- ‘सम’ (समान) शब्द से उपमा अलंकार है।
सिर झुका तूने नियति की मान ली यह बात। स्वयं ही मुरझा गया तेरा हृदय-जलजात।। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- लाटानुप्रास
- रूपक
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- हृदय को ‘जलजात’ (कमल) कहा गया है, अतः रूपक है।
शिशु-मुख पर घूँघट डाले अंचल में दीप छिपाए। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- लाटानुप्रास
- रूपक
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- शिशु-मुख पर ‘घूँघट’ का आरोप है, अतः रूपक है।
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- लाटानुप्रास
- रूपक
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- राम-भक्ति को ‘रतन धन’ (रत्न/धन) कहा गया है, अतः रूपक है।
सोहत ओढ़े पीत पट, स्वाम सलोने गात। मनहुँ नीलमणि सैल पर, आतप परयौ प्रभात।। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- लाटानुप्रास
- रूपक
- उत्प्रेक्षा
- वक्रोक्ति
Explanation:
- ‘मनहुँ’ (मानो) शब्द से उत्प्रेक्षा अलंकार है।
हनुमान की पूँछ में, लगन न पाई आग। लंका सिगरी जल गई, गए निसाचर भाग।। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- अतिशयोक्ति
- रूपक
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- पूँछ में आग न लगने पर भी लंका जलना अतिशयोक्ति है।
नाक का मोती अधर की क्रांति से बीज दाढ़िम का समझ कर भ्रांति से देखकर सहसा हुआ शुक मौन है सोचता है अन्य शुक यह कौन है? प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- भ्रांतिमान
- रूपक
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- यहाँ नाक के मोती को अनार का बीज समझने की भ्रांति है, अतः भ्रांतिमान अलंकार है।
रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून पानी गये न ऊबरे, मोती मानुस चून। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- लाटानुप्रास
- दीपक
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- यहाँ ‘पानी’ (जल) शब्द की आवृत्ति से दीपक अलंकार है।
या अनुरागी चित्त की गति समुझै नहिं कोय। ज्यों-ज्यों बूझे श्याम रंग, त्यों-त्यों उज्ज्वल होय। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- विरोधाभास
- रूपक
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- श्याम (काले) को बूझने पर उज्ज्वल होना विरोधाभास है।
चंदन विष व्यापत नहीं लपटे रहत भुजंग। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- अतद्गुण
- रूपक
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- चंदन में विष (भुजंग के बावजूद) नहीं व्यापता, अतः अतद्गुण अलंकार है।
इहाँ कुम्हइ बतिया कोठ नाहीं। जे तरजन देखि कुशिलाहीं। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- लोकोक्ति
- रूपक
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- यहाँ लोकोक्ति (कहावत) का प्रयोग है।
पाप प्रहार प्रकट कई सोई, भरी क्रोध जल जाइ न कोई।। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- श्रुत्यानुप्रास
- रूपक
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- यहाँ ‘प्र’ और ‘प्र’ वर्ण की आवृत्ति से श्रुत्यानुप्रास है।
जे तीन बेर खाती थीं ते तीन बेर खाती हैं। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- यमक
- रूपक
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- ‘बेर’ (फल) और ‘बेर’ (बार) में यमक है।
विमाता बन गई आँधी भयावह। हुआ चंचल न फिर भी श्यामघन वह। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- अतद्गुण
- रूपक
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- ‘श्यामघन’ (कृष्ण/बादल) में श्लेष है।
‘मन-सागर, मनसा लेहरि, बूड़े-बहे अनेक।’ प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- अतद्गुण
- रूपक
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- मन को ‘सागर’ कहा गया है, अतः रूपक अलंकार है।
मैया मैं तो चन्द्र-खिलौना लैहों। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- अतद्गुण
- रूपक
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- चन्द्र को ‘खिलौना’ कहा गया है, अतः रूपक है।
उसकाल मारे क्रोध के तनु काँपने उसका लगा। मानो हवा के जोर से सोता हुआ सागर जगा।। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- अतद्गुण
- उत्प्रेक्षा
- श्लेष
- वक्रोक्ति
Explanation:
- ‘मानो’ शब्द से उत्प्रेक्षा अलंकार है।
कहत नटत रीझत खिझत, मिलत खिलत लजियात। भरे भौन में करत हैं नैयन ही सब बात।। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- अतद्गुण
- उत्प्रेक्षा
- दीपक
- वक्रोक्ति
Explanation:
- यहाँ ‘त’ वर्ण की आवृत्ति और समान प्रकार की क्रियाओं से दीपक अलंकार है।
