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शांत रस का स्थायी भाव है :
- वैराग्य
- क्षमा
- दया
- निर्वेद
Explanation:
- शांत रस का स्थायी भाव ‘निर्वेद’ (वैराग्य/उदासीनता) है।
किस रस का स्थायी भाव रति है :
- भक्ति रस
- शृंगार रस
- दोनों का
- दोनों का नहीं
Explanation:
- शृंगार रस और भक्ति रस दोनों का स्थायी भाव ‘रति’ है।
हिन्दी काव्य-रसों की कुल संख्या है
- ग्यारह
- दस
- नौ
- आठ
Explanation:
- हिन्दी में नौ रस माने गए हैं – शृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, वीभत्स, अद्भुत, शांत।
‘यशोदा हरि पालने झुलावैं हलरावैं दुलराय मल्हार्वैं जोड़ सोड़ें कछु गार्वैं।।’ इस अवतरण में कौन-सा रस है?
- शृंगार रस
- वात्सल्य रस
- शांत रस
- करुण रस
Explanation:
- यशोदा द्वारा बालकृष्ण के प्रति ममता एवं प्रेम दिखाने से वात्सल्य रस है।
‘उत्साह’ स्थायीभाव से किस रस की निष्पत्ति होती है ?
- शांत रस
- भयानक रस
- रौद्र रस
- वीर रस
Explanation:
- वीर रस का स्थायी भाव ‘उत्साह’ है।
‘नभ में झपटत बाज लिख, भूल्यो सकल प्रपंच। कंपति तनु ब्याकुल नयन, लावक हिल्यों ने रंच।।’ इस उद्धरण में कौन-सा रस है ?
- रौद्र रस
- वीभत्स रस
- भयानक रस
- वीर रस
Explanation:
- यहाँ भय एवं विकार उत्पन्न करने वाला वर्णन है, अतः वीभत्स रस है।
‘निसिचर हीन करहुँ महि भुज उठाइ पन कीन्ह। सकल मुनिन्ह के आश्रमन जाइ जाइ सुख दीन्ह।।’ उपर्युक्त उदाहरण में किस रस की निष्पत्ति हुई है?
- करुण रस
- वीर रस
- रौद्र रस
- भयानक रस
Explanation:
- यहाँ राम द्वारा राक्षसों को मारने एवं मुनियों की रक्षा का संकल्प है, अतः वीर रस है।
गुरु गोबिंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोबिंद दियो बताय॥’ उपर्युक्त दोहों में किस रस का परिपाक हुआ है?
- शृंगार रस
- करुण रस
- अद्भुत रस
- शांत रस
Explanation:
- यहाँ गुरु की महिमा एवं वैराग्य भाव है, अतः शांत रस है।
रौद्र रस का स्थायी भाव है?
- क्रोध
- विस्मय
- शोक
- भय
Explanation:
- रौद्र रस का स्थायी भाव ‘क्रोध’ है।
‘शोक’ किस रस का स्थायी भाव है?
- शांत रस
- करुण रस
- हास्य रस
- वीर रस
Explanation:
- करुण रस का स्थायी भाव ‘शोक’ है।
किस रस को ‘रसराज’ कहा जाता है?
- शृंगार रस
- वीर रस
- हास्य रस
- उपर्युक्त में कोई नहीं
Explanation:
- शृंगार रस को ‘रसराज’ कहा जाता है।
‘अब लौ नसानी अब न नसैहों’ में कौन सा रस है?
- शांत रस
- करुण रस
- भक्ति रस
- अद्भुत रस
Explanation:
- यहाँ वैराग्य एवं निर्वेद भाव है, अतः शांत रस है।
‘कंकण किंकिण नूपुर धुनि सुनि। कहत लखन सन राम हृदय गुनि। मानहु मदन जुवा दीन्ही। मनसा विभव विजय कहि कीन्ही। तात जनकतनया यह सोई। धनुष जज्ञ जो कारन होई।” इन पंक्तियों में ‘जनकतनया’ है?
- अनुभाव
- आलम्बन
- विषय
- उद्दीपन
Explanation:
- ‘जनकतनया’ (सीता) यहाँ विषय (आलम्बन विभाव) है, जो शृंगार रस का आधार है।
स्थायी भावों की कुल संख्या है?
- 9
- 10
- 11
- 12
Explanation:
- स्थायी भावों की कुल संख्या 9 है – रति, हास, शोक, क्रोध, उत्साह, भय, जुगुप्सा, विस्मय, निर्वेद।
शांत रस का स्थायी भाव क्या है?
- जुगुप्सा
- क्रोध
- शोक
- निर्वेद
Explanation:
- शांत रस का स्थायी भाव निर्वेद है।
शृंगार रस का स्थायी भाव क्या है ?
- उत्साह
- शोक
- हास
- रति
Explanation:
- शृंगार रस का स्थायी भाव ‘रति’ है।
‘किलक ओर मैं नेह निहास्त। इन दाँतों पर मोती बास्त।’ इन पंक्तियों में कौन-सा रस है ?
- वीर रस
- शांत रस
- वात्सल्य रस
- हास्य रस
Explanation:
- यहाँ बालक के दाँतों पर मोती की कल्पना से ममता भाव है, अतः वात्सल्य रस है।
अति मलीन वृषभानुकुमारी। अधोमुख रहित करध नहिं चितवित ज्यों गथ हारे थकित जुआरी। छूटे, चिहुर, बदन कुहिलाने, ज्यों नलिनी हिमकर की मारी।। इन पंक्तियों में कौन-सा रस है ?
- हास्य रस
- करुण रस
- विप्रलम्भ शृंगार रस
- संयोग शृंगार रस
Explanation:
- यहाँ राधा का वियोग में दुखी होना दिखाया गया है, अतः विप्रलम्भ (वियोग) शृंगार रस है।
सर्वश्रेष्ठ रस किसे माना जाता है ?
- रौद्र रस
- शृंगार रस
- करुण रस
- वीर रस
Explanation:
- शृंगार रस को सर्वश्रेष्ठ (रसराज) माना जाता है।
कवि विहारी मुख्यतः किस रस के कवि हैं?
- करुण रस
- भक्ति रस
- शृंगार रस
- वीर रस
Explanation:
- विहारी मुख्यतः शृंगार रस के कवि हैं।
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई। जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई।। इन पंक्तियों में कौन-सा रस है ?
- शांत रस
- शृंगार रस
- करुण रस
- हास्य रस
Explanation:
- मीरा द्वारा कृष्ण के प्रति प्रेम एवं अनुरक्ति दिखाने से शृंगार रस है।
शोभित कर नवनीत लिए घुटकिन चलत रेजु तन मिथडत मुख दधि लेप किए। इन पंक्तियों में कौन-सा रस है ?
- शृंगार रस
- हास्य रस
- करुण रस
- वात्सल्य रस
Explanation:
- यशोदा द्वारा बालकृष्ण को माखन-मलाई खिलाने में ममता दिखती है, अतः वात्सल्य रस है।
रसोत्पत्ति में आश्रय की चेष्टाएं क्या कही जाती है ?
- विभाव
- आलम्बन
- अनुभाव
- उद्दीपन
Explanation:
- आश्रय (आलम्बन) की चेष्टाओं को ‘अनुभाव’ कहते हैं।
‘ट’, ‘ठ’, ‘ड’, ‘ढ’ वर्णों के प्रयोग का सम्बन्ध काव्य से किस गुण से है ?
- माधुर्य
- ओज
- प्रसाद
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- ट, ठ, ड, ढ वर्ग के वर्ण (कठोर वर्ण) ‘ओज’ गुण से संबंधित हैं।
माधुर्य गुण का किस रस में प्रयोग होता है ?
- शांत रस
- शृंगार रस
- भयानक रस
- रौद्र रस
Explanation:
- माधुर्य गुण (कोमलता) का प्रयोग शृंगार रस में होता है।
प्रिय पति वह मेरा प्राण प्यारा कहाँ है ? दुःख जल निधि दुबी का सहारा कहाँ है ? इन पंक्तियों में कौन-सा स्थायी भाव है ?
- विस्मय
- रति
- शोक
- क्रोध
Explanation:
- यहाँ पति के वियोग में दुःख है, अतः ‘शोक’ स्थायी भाव है।
रस कितने प्रकार के होते हैं ?
- 3
- 7
- 8
- 9
Explanation:
- रस 9 प्रकार के होते हैं।
क्रोध मोहिं बज विसरत नाहीं। हंससुता की सुन्दर कागरी और दुगन की छाँही। इन पंक्तियों में कौन-सा रस है ?
- शृंगार रस
- हास्य रस
- वीर रस
- करुण रस
Explanation:
- यहाँ सुन्दरी के प्रति आकर्षण एवं प्रेम है, अतः शृंगार रस है।
हिन्दी साहित्य का नौवाँ रस कौन-सा है ?
- भक्ति रस
- वात्सल्य रस
- शांत रस
- करुण रस
Explanation:
- हिन्दी साहित्य में नौवाँ रस ‘शांत रस’ है, जिसे बाद में स्वीकार किया गया।
उस कल मारे क्रोध के, तन काँपने उसका लगा। मानो हवा के जोर से, सोता हुआ सागर जगा। प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा रस है ?
- वीर रस
- रौद्र रस
- अद्भुत रस
- करुण रस
Explanation:
- क्रोध के कारण शरीर काँपना रौद्र रस का द्योतक है।
‘वाक्यं रसात्मकं काव्यम्’ किसका कथन है ?
- विश्वनाथ
- राजशेखर
- श्री हर्ष
- भास
Explanation:
- ‘वाक्यं रसात्मकं काव्यम्’ आचार्य विश्वनाथ का कथन है।
मन की उत्पत्ति वेदना, मन ही मन में बहती थी। चुप रहकर अन्तर्गत में, कुछ मौन व्यथा कहती थी।। तुम्हें पथ पर चलने का यो संबल छूट गया था। अविचल, अविकल वह प्राणी, भीतर से टूट गया था। उपर्युक्त काव्य-परिच्छेदों में कौन-सा रस अभिव्यंत्रित हो रहा है ?
- शांत रस
- विरह शृंगार रस
- करुण रस
- वात्सल्य रस
Explanation:
- यहाँ वेदना, व्यथा एवं टूटने का भाव है, अतः करुण रस है।
वीर रस का स्थायी भाव क्या होता है ?
- रति
- उत्साह
- हास्य
- क्रोध
Explanation:
- वीर रस का स्थायी भाव ‘उत्साह’ है।
किस रस को ‘रसराज’ कहा जाता है ?
- शृंगार रस
- हास्य रस
- वीर रस
- शांत रस
Explanation:
- शृंगार रस को ‘रसराज’ कहा जाता है।
संचारी भावों की संख्या है –
- 9
- 33
- 16
- 99
Explanation:
- संचारी (व्यभिचारी) भावों की संख्या 33 है।
भरतमुनि के रससूत्र में निम्नलिखित में से किसका उल्लेख नहीं है ?
- स्थायी भाव
- शांत
- अनुभाव
- व्यभिचारी भाव
Explanation:
- भरत के रससूत्र ‘विभावानुभाव व्यभिचारी संयोगात रसनिष्पत्ति’ में स्थायी भाव का उल्लेख नहीं है।
भरतमुनि के अनुसार रसों की संख्या है :
- आठ
- नौ
- ग्यारह
- दस
Explanation:
- भरतमुनि ने आठ रस माने हैं (शांत रस को नहीं माना)।
किस रस का स्थायी भाव निर्वेद है ?
- भक्ति रस
- शान्त रस
- वात्सल्य रस
- शृंगार रस
Explanation:
- शान्त रस का स्थायी भाव ‘निर्वेद’ है।
भरत के ‘रससूत्र’ में निम्नलिखित में से किसका उल्लेख नहीं है ?
- विभाव
- अनुभाव
- स्थायी भाव
- संचारी भाव
Explanation:
- भरत के रससूत्र में स्थायी भाव का उल्लेख नहीं है।
वीभत्स रस का स्थायी भाव है :
- भय
- निर्वेद
- जुगुप्सा
- घृणा
Explanation:
- वीभत्स रस का स्थायी भाव ‘जुगुप्सा’ (घृणा) है।
संचारी भावों की कुल संख्या है :
- आठ
- नौ
- तैंतीस
- छत्तीस
Explanation:
- संचारी भावों की कुल संख्या 33 (तैंतीस) है।
‘वाक्यं रसात्मकं काव्यम्’ कहने वाले आचार्य हैं :
- मम्मट
- विश्वनाथ
- भरत
- राजशेखर
Explanation:
- यह कथन आचार्य विश्वनाथ का है।
” केशव कहि न जाइ का कहिये! देखत तव रचना विचित्र अति समुक्ति मनहि मन रहिये।” में हैं :
- रौद्र रस
- शान्त रस
- भयानक रस
- अद्भुत रस
Explanation:
- रचना की विचित्रता देखकर आश्चर्य होना ‘अद्भुत रस’ है।
” जहाँ-तहाँ मज्जा माँस रचिर लिखि परत बगारे। जितन-जित लिटके हाइ, सेत कहाँ, कहाँ ततनारे।” इस अवतरण में हैं :
- वीभत्स रस
- अद्भुत रस
- भयानक रस
- हास्य रस
Explanation:
- माँस-मज्जा आदि घृणित वस्तुओं के वर्णन से वीभत्स रस है।
‘जब पहुँची चपला बीच धार, छिप गया चाँदनी का कगार’ में कौन सा रस है –
- वात्सल्य रस
- संयोग शृंगार रस
- वीर रस
- अद्भुत रस
Explanation:
- यहाँ चपला (बिजली) और चाँदनी का मिलन है, अतः संयोग शृंगार रस है।
‘कंकन किंकिन नूपुर धुनि सुनि में’ कौन-सा रस है ?
- वात्सल्य रस
- शृंगार रस
- वीर रस
- अद्भुत रस
Explanation:
- आभूषणों की ध्वनि से प्रेमी-प्रेमिका के मिलन का भाव है, अतः शृंगार रस है।
पुनि-पुनि मुनि उकसहि अकुलाहीं देखि दसा हर जन मुसकाहीं।! इन पंक्तियों में कौन-सा रस है ?
- वियोग शृंगार रस
- अद्भुत रस
- हास्य रस
- रौद्र रस
Explanation:
- मुनियों की अकुलाहट देखकर भक्तों का मुस्काना हास्य रस है।
” देखि सुदामा की दीन दसा करना करिकें करुनानिधि रोये।” में कौन सा रस है।
- शृंगार रस
- करुण रस
- वीर रस
- अद्भुत रस
Explanation:
- सुदामा की दीन दशा देखकर कृष्ण का रोना करुण रस है।
नेकु कही बैननि अनेक कही नैननि सौं। रही सही सोऊ कहि दीनों हिचकीन सौं।! इन पंक्तियों में कौन-सा रस है ?
- संयोग शृंगार रस
- वियोग शृंगार रस
- वीर रस
- करुण रस
Explanation:
- यहाँ वियोग में हिचकी आना एवं नेत्रों से कहना है, अतः वियोग शृंगार रस है।
सुर नर असुर गन्धर्व किज़र आदि कोई भी कहीं। कल शाम तक मुझसे जयद्रष्ट को बचा सकता नहीं।। इन पंक्तियों में कौन-सा रस है ?
- वीभत्स रस
- वीर रस
- रौद्र रस
- शान्त रस
Explanation:
- यहाँ क्रोधपूर्ण चुनौती है, अतः रौद्र रस है।
देखि रूप लोचन ललचाने। हरुवे जनु निज निधि पहचाने।।
- शृंगार रस
- करुण रस
- रौद्र रस
- अद्भुत रस
Explanation:
- रूप देखकर नेत्र ललचाना शृंगार रस है।
स्वान आंगुरिन काटि-काटि के खात विदारत में रस है-
- वीभत्स रस
- रौद्र रस
- भयानक रस
- करुण रस
Explanation:
- कुत्ते का अंगूठा काट-काटकर खाना घृणित है, अतः वीभत्स रस है।
प्रत्येक रस में संचरण करने वाले भाव को क्या कहते हैं ?
- स्थायीभाव
- अनुभाव
- संचारी भाव
- उद्दीपन
Explanation:
- प्रत्येक रस में संचरण करने वाले भावों को ‘संचारी’ या ‘व्यभिचारी’ भाव कहते हैं।
स्थायीभावों की संख्या कितनी मानी गई है ?
- आठ
- नौ
- दस
- ग्यारह
Explanation:
- स्थायीभावों की संख्या 9 है।
बतरस लालच लाल की सुरली धरी लुकाय। साँह बरे भाँहनु हंसे देन के निट जाय।। इस पंक्ति में कौन सा रस निहित है?
- शृंगार रस
- वीर रस
- शांत रस
- वात्सल्य रस
Explanation:
- यहाँ लाल (प्रियतम) के लिए बतरस (बातचीत) की लालसा है, अतः शृंगार रस है।
जसोदा हरि पालने झुलावै। हलरावै ठुलरावै, मल्हावै जोड़ सोई, कछु गावै। इस पंक्ति में कौन सा रस निहित है –
- शृंगार रस
- वीर रस
- शांत रस
- वात्सल्य रस
Explanation:
- यशोदा द्वारा बालकृष्ण को पालने में झुलाने से वात्सल्य रस है।
सिर पर बैठो काग आंखि दोड खात-निकारत। खाँचत जीभहि स्यार अतिहि आनन्द उर धारत।। इस पंक्ति में कौन सा रस निहित है ?
- शृंगार रस
- वीर रस
- शांत रस
- वीभत्स रस
Explanation:
- कौवे एवं सियार के द्वारा माँस खाने का घृणित वर्णन है, अतः वीभत्स रस है।
मैं सत्य कहता हूँ सखे। सुकुमार मत जानो मुझे। यमराज से भी युद्ध में प्रस्तुत सदा जानो मुझे।। इस पंक्ति में कौन सा रस निहित है ?
- शृंगार रस
- वीर रस
- शांत रस
- वात्सल्य रस
Explanation:
- यहाँ युद्ध के लिए उत्साह एवं साहस है, अतः वीर रस है।
सतगुरु की महिमा अनंत, अनंत किया उपगार। लोचन अनंत उद्याक्रिया, अनंत दिखावणहार।। इस पंक्ति में कौन सा रस निहित है ?
- शृंगार रस
- वीर रस
- शांत रस
- वात्सल्य रस
Explanation:
- सद्गुरु की महिमा का अनंत कथन एवं वैराग्य भाव है, अतः शांत रस है।
पाणी ही तै हिम भया, हिम ह्रै गया बिलाइ। जो कुछ था सोई भया, अब कुछ कहा न जाइ।। इस पंक्ति में कौन सा रस निहित है ?
- शृंगार रस
- वीर रस
- शांत रस
- वात्सल्य रस
Explanation:
- जल से बर्फ बनना एवं पिघलना – चक्र देखकर निर्वेद भाव है, अतः शांत रस है।
तपस्वी! क्यों इतने हो क्लान्त, वेदना का यह कैसा वेग? आह! तुम कितने अधिक हताश बताओ यह कैसा उद्देश? इस पंक्ति में कौन सा रस निहित है ?
- शृंगार रस
- वीर रस
- शांत रस
- वात्सल्य रस
Explanation:
- तपस्वी को क्लान्त एवं हताश देखकर उदासीनता एवं वैराग्य है, अतः शांत रस है।
प्रकृति के चौवन का शृंगार करेंगे कभी न बासी फूल; मिलेंगे वे जाकर अति शीघ्र इस पंक्ति में कौन सा रस निहित है ?
- शृंगार रस
- वीर रस
- शांत रस
- वात्सल्य रस
Explanation:
- बासी फूल न लेने का वैराग्य भाव है, अतः शांत रस है।
बिनु गोपाल बैरिन भई कुंजी। इस पंक्ति में कौन सा रस निहित है ?
- वियोग शृंगार रस
- वीर रस
- शांत रस
- वात्सल्य रस
Explanation:
- गोपाल (कृष्ण) के बिना कुंज बैरिन (अप्रिय) हो गई – वियोग भाव है, अतः वियोग शृंगार रस है।
मुझे फूल मत मारो, मैं अबला बाला विद्योगिनी, कुछ तो दया विचारो।। इस पंक्ति में कौन सा रस निहित है ?
- करुण रस
- वीर रस
- शांत रस
- वात्सल्य रस
Explanation:
- अबला होने पर दया की याचना है, अतः करुण रस है।
हाय! सब मिथ्या बात! आज तो सौरभ का मधुमास शिशिर में भरता सूर्नी साँस! इस पंक्ति में कौन सा रस निहित है ?
- वियोग शृंगार रस
- वीर रस
- भयानक रस
- वात्सल्य रस
Explanation:
- मधुमास में शिशिर के आने का भय एवं आश्चर्य है, अतः भयानक रस है।
पंथ होने दो अपरिचित प्राण रहने दो अकेला! घेर ले छाया अमा बन, आज कज्जल-अशुअों में रिमझिमा ले यह धिरा घन! और होंगे नयन सूखे, तिल बुझे औ पलक रूखे, आई चितवन में यहाँ शत विद्युतों में दीप खेला! इस पंक्ति में कौन सा रस निहित है ?
- वियोग शृंगार रस
- वीर रस
- करुण रस
- वात्सल्य रस
Explanation:
- अकेलापन, सूखे नयन एवं विद्युतों का दीप खेलना – वेदना है, अतः करुण रस है।
तूँ तूँ करता तूँ भया, मुझमें रही न हूँ। बारी फेरी बलि गई, जित देखाँ तित तूँ।। इस पंक्ति में कौन सा रस निहित है ?
- वियोग शृंगार रस
- वीर रस
- शान्त रस
- वात्सल्य रस
Explanation:
- ‘तूँ’ (तू) और ‘हूँ’ (मैं) का अभेद हो जाना – वैराग्य भाव है, अतः शांत रस है।
जब मैं था हरि नहीं, अब हरि हूँ मैं नाहीं। सब औंधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माहिं।। इस पंक्ति में कौन सा रस निहित है ?
- वियोग शृंगार रस
- वीर रस
- शान्त रस
- वात्सल्य रस
Explanation:
- अहंकार का नाश एवं ज्ञान-दीपक का प्रकाश – शांत रस है।
तरिन-तनुजा तट तमाल तकवर बहु छाये। झके कूल सों जल परसन हित मनहुँ सुहाये।। इस पंक्ति में कौन सा रस निहित है ?
- संयोग शृंगार रस
- वीर रस
- शान्त रस
- वात्सल्य रस
Explanation:
- यमुना तट पर तमाल वृक्ष एवं जल का सुहावना दृश्य – संयोग शृंगार रस है।
घिर रहे थे घुँघराले बाल अंश अवलम्बित मुख के पास; नील घन-शावक-से सुकुमार, सुधा भरने को विधु के पास। इस पंक्ति में कौन सा रस निहित है ?
- संयोग शृंगार रस
- वीर रस
- शान्त रस
- वात्सल्य रस
Explanation:
- प्रेमी-प्रेमिका के मिलन का सुंदर वर्णन है, अतः संयोग शृंगार रस है।
जब पहुँची चपला बीच धार, छिप गया चाँदनी का कगार! दो बाहों के दूरस्थ तीर धारा का कुश कोमल शरीर। आलिंगन करने को अधीर! इस पंक्ति में कौन सा रस निहित है ?
- संयोग शृंगार
- वीर रस
- शान्त रस
- वात्सल्य रस
Explanation:
- चपला एवं चाँदनी के मिलन की कल्पना, आलिंगन की अधीरता – संयोग शृंगार रस है।
ज्यों-ज्यों लगती है नाव पार, उर में आलोकित शत विचार। इस पंक्ति में कौन सा रस निहित है ?
- संयोग शृंगार रस
- वीर रस
- शान्त रस
- वात्सल्य रस
Explanation:
- नाव के पार लगने पर प्रसन्नता एवं विचारों का आलोक – संयोग शृंगार रस है।
