भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में प्रयुक्त वाक्यांश “राज्यों का संघ” (Union of States) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह दर्शाता है कि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है।
2. राज्यों को संघ से अलग होने (Secede) का कोई अधिकार नहीं है।
3. “भारत के राज्यक्षेत्र” (Territory of India) अभिव्यक्ति का दायरा “भारत का संघ” (Union of India) से अधिक व्यापक है।
- 1, 2 और 3
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
Explanation:
- डॉ. बी.आर. अंबेडकर के अनुसार, “राज्यों का संघ” (Union of States) शब्दावली का महत्व यह है कि भारतीय संघ राज्यों के समझौते से नहीं बना (जैसे अमेरिका) और कोई राज्य अलग नहीं हो सकता।
- “भारत के राज्यक्षेत्र” (Territory of India) में राज्यों के अलावा केंद्रशासित प्रदेश (Union Territories) और भविष्य में अर्जित किए जाने वाले क्षेत्र भी शामिल होते हैं, जबकि “भारत का संघ” (Union of India) में केवल राज्य शामिल होते हैं।
- अतः सभी तीनों कथन सत्य हैं।
अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के तहत संसद की शक्तियों के बीच मुख्य अंतर क्या है?
- अनुच्छेद 2 संसद को नए राज्यों को संघ में शामिल करने की शक्ति देता है जो पहले से भारत का हिस्सा नहीं हैं, जबकि अनुच्छेद 3 मौजूदा भारतीय राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित है।
- अनुच्छेद 2 के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है, जबकि अनुच्छेद 3 के लिए साधारण बहुमत की।
- अनुच्छेद 2 के तहत विधेयक केवल राज्यसभा में पेश किया जा सकता है, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत केवल लोकसभा में।
- अनुच्छेद 2 में राष्ट्रपति की पूर्व सहमति आवश्यक नहीं है, जबकि अनुच्छेद 3 में यह अनिवार्य है।
Explanation:
- अनुच्छेद 2 (Article 2) उन राज्यों के प्रवेश या स्थापना से संबंधित है जो भारतीय संघ का हिस्सा नहीं हैं (जैसे 1975 में सिक्किम का शामिल होना)।
- इसके विपरीत, अनुच्छेद 3 (Article 3) भारत के भीतर के मौजूदा राज्यों की सीमाओं, नामों या क्षेत्रों में परिवर्तन करने की शक्ति संसद को देता है।
यदि संसद अनुच्छेद 3 के तहत किसी राज्य के नाम या सीमा में परिवर्तन करने के लिए एक विधेयक लाती है, तो प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- राष्ट्रपति द्वारा तय समय सीमा के भीतर राज्य विधानमंडल को अपने विचार व्यक्त करने होते हैं, लेकिन संसद उन विचारों को मानने के लिए बाध्य नहीं है।
- संसद संबंधित राज्य विधानमंडल की सहमति के बिना उसकी सीमा या नाम नहीं बदल सकती।
- राष्ट्रपति के लिए संबंधित राज्य विधानमंडल के विचारों को मानना बाध्यकारी है।
- ऐसे विधेयक को संसद के दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग विशेष बहुमत से पारित किया जाना अनिवार्य है।
Explanation:
- अनुच्छेद 3 (Article 3) के तहत राज्य की राय जानने के लिए विधेयक को राष्ट्रपति (President) द्वारा राज्य विधानमंडल (State Legislature) के पास भेजा जाता है।
- हालांकि, राज्य की राय या सुझावों को स्वीकार करने या अस्वीकार करने के लिए संसद (Parliament) पूरी तरह स्वतंत्र है।
प्रसिद्ध ‘बेरुबारी संघ मामले’ (1960) में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- भारत के किसी क्षेत्र को किसी विदेशी राज्य को सौंपने की शक्ति अनुच्छेद 3 में शामिल नहीं है; इसके लिए अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन की आवश्यकता होती है।
- संसद अनुच्छेद 3 के तहत साधारण कानून बनाकर भारत का कोई भी क्षेत्र किसी विदेशी देश को सौंप सकती है।
- भारत और किसी अन्य देश के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए हमेशा संविधान संशोधन की आवश्यकता होती है।
- अनुच्छेद 1 के तहत भारत सरकार कभी भी कोई विदेशी क्षेत्र अर्जित नहीं कर सकती।
Explanation:
- सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने बेरुबारी मामले (Berubari Case) में स्पष्ट किया था कि अनुच्छेद 3 (Article 3) के तहत राज्यों के पुनर्गठन की शक्ति में देश का कोई हिस्सा किसी विदेशी राष्ट्र को सौंपना शामिल नहीं है।
- इसके लिए अनुच्छेद 368 (Article 368) के तहत संविधान में संशोधन करना होगा (जैसे 9वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1960)।
संविधान के अनुच्छेद 4 के प्रावधानों के अनुसार, अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के तहत बनाए गए कानूनों के संदर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?
1. ऐसे कानूनों को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान का संशोधन नहीं माना जाएगा।
2. इन कानूनों को संसद में एक साधारण बहुमत और सामान्य विधायी प्रक्रिया के माध्यम से पारित किया जा सकता है।
3. इनके परिणामस्वरूप संविधान की पहली और चौथी अनुसूची (Schedule 1 & 4) में स्वतः या आवश्यक बदलाव किए जाते हैं।
- 1, 2 और 3
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
Explanation:
- अनुच्छेद 4 (Article 4) स्पष्ट रूप से घोषित करता है कि नए राज्यों का प्रवेश (अनुच्छेद 2) या मौजूदा राज्यों का पुनर्गठन (अनुच्छेद 3) के लिए बनाए गए कानून साधारण बहुमत (Simple Majority) से पास होंगे और इन्हें अनुच्छेद 368 के तहत ‘संविधान संशोधन’ की जटिल प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता नहीं है।
- इन बदलावों के कारण पहली अनुसूची (First Schedule – राज्यों के नाम) और चौथी अनुसूची (Fourth Schedule – राज्यसभा में सीटों का आवंटन) में भी संशोधन किया जाता है।
- अतः सभी तीनों कथन सत्य हैं।
अनुच्छेद 12 के तहत ‘राज्य’ (State) की परिभाषा के संदर्भ में निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
1. भारत की सरकार और संसद।
2. राज्यों की सरकारें और विधानमंडल।
3. सभी स्थानीय प्राधिकारी (जैसे नगरपालिकाएँ, पंचायतें)।
4. वैधानिक या गैर-वैधानिक प्राधिकरण (जैसे LIC, ONGC, SAIL)।
- 1, 2, 3 और 4
- केवल 1 और 2
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 1, 3 और 4
Explanation:
- अनुच्छेद 12 (Article 12) के अनुसार ‘राज्य’ (State) शब्द का दायरा बहुत व्यापक है।
- इसमें भारत की सरकार और संसद (Government and Parliament of India), राज्यों की सरकारें और विधानमंडल (Government and Legislature of States), सभी स्थानीय प्राधिकारी (Local Authorities – जैसे नगरपालिकाएँ, पंचायतें) और वैधानिक या गैर-वैधानिक प्राधिकरण (Statutory or Non-Statutory Authorities – जैसे LIC, ONGC, SAIL) शामिल हैं।
- SSC CGL पॉइंटर: यहाँ तक कि सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के अनुसार, कोई भी निजी इकाई जो राज्य की एजेंसी के रूप में काम कर रही है, वह भी अनुच्छेद 12 के तहत ‘राज्य’ (State) है।
संविधान के अनुच्छेद 13 के तहत “न्यायिक समीक्षा” (Judicial Review) के सिद्धांत के संबंध में कौन-सा कथन असत्य है?
- इसके तहत केवल संसद द्वारा बनाए गए स्थायी कानूनों को ही चुनौती दी जा सकती है, राष्ट्रपति के अध्यादेशों को नहीं।
- यह घोषित करता है कि मौलिक अधिकारों से असंगत या उन्हें कम करने वाले कानून शून्य (Void) होंगे।
- ‘कानून’ शब्द के अंतर्गत नियम, उप-नियम, उपविधि (By-laws) और अधिसूचनाएं भी शामिल हैं।
- सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32) और उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226) को किसी कानून को असंवैधानिक घोषित करने की शक्ति प्राप्त है।
Explanation:
- यह कथन गलत है क्योंकि अनुच्छेद 13 (Article 13) के तहत राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा जारी किए गए अस्थायी कानून (अध्यादेश – Ordinances) को भी अदालत में इस आधार पर चुनौती दी जा सकती है कि वह मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) का उल्लंघन करता है।
- SSC CGL पॉइंटर: अनुच्छेद 13 ‘न्यायिक समीक्षा’ (Judicial Review) का आधार है, जिसके अंतर्गत किसी भी कानून को मौलिक अधिकारों से असंगत होने पर शून्य (Void) घोषित किया जा सकता है।
निम्नलिखित में से कौन-से मौलिक अधिकार केवल भारतीय नागरिकों (Citizens) को प्राप्त हैं, विदेशी नागरिकों (Foreigners) को नहीं?
- अनुच्छेद 15, 16, 19, 29 और 30
- अनुच्छेद 14, 20, 21 और 21A
- अनुच्छेद 23, 24, 25 और 28
- अनुच्छेद 14, 19, 21 और 32
Explanation:
- अनुच्छेद 15 (Article 15 – भेदभाव का निषेध), अनुच्छेद 16 (Article 16 – अवसर की समानता), अनुच्छेद 19 (Article 19 – स्वतंत्रता के छह अधिकार), अनुच्छेद 29 (Article 29 – अल्पसंख्यकों का हित) और अनुच्छेद 30 (Article 30 – अल्पसंख्यकों का शिक्षण संस्थान स्थापित करने का अधिकार) विशेष रूप से केवल भारतीय नागरिकों (Citizens) को मिलते हैं।
- SSC CGL पॉइंटर: यह SSC परीक्षाओं का एक पेट-क्वेश्चन (अक्सर पूछा जाने वाला प्रश्न) है। बाकी सभी मौलिक अधिकार (जैसे कानून के समक्ष समता या जीवन का अधिकार) विदेशियों (Foreigners) को भी प्राप्त हैं (शत्रु देश के नागरिकों को छोड़कर)।
अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचारों का अधिकार) के तहत जारी की जाने वाली ‘रिट’ (Writs) के संबंध में निम्नलिखित का सही मिलान कीजिए:
रिट (Writ)
1. बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)
2. परमादेश (Mandamus)
3. अधिकार पृच्छा (Quo-Warranto)
शाब्दिक अर्थ / उद्देश्य
(X) हम आदेश देते हैं (सरकारी अधिकारी के खिलाफ)
(Y) किस अधिकार से? (अवैध रूप से पद ग्रहण करने पर)
(Z) सशरीर प्रस्तुत करना (अवैध हिरासत के खिलाफ)
- 1-Z, 2-X, 3-Y
- 1-X, 2-Y, 3-Z
- 1-Z, 2-Y, 3-X
- 1-Y, 2-X, 3-Z
Explanation:
- बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) का अर्थ है “सशरीर प्रस्तुत करना” – यह अवैध हिरासत (Unlawful Detention) के खिलाफ जारी की जाती है।
- परमादेश (Mandamus) का अर्थ है “हम आदेश देते हैं” – यह सरकारी अधिकारी (Public Official) को अपना कर्तव्य करने का आदेश देती है।
- अधिकार पृच्छा (Quo-Warranto) का अर्थ है “किस अधिकार से?” – यह अवैध रूप से पद ग्रहण करने (Illegal Occupation of Office) के खिलाफ जारी की जाती है।
- SSC CGL पॉइंटर: डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने अनुच्छेद 32 (Article 32) को संविधान का “हृदय और आत्मा” (Heart and Soul) कहा था। इसके तहत सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) 5 तरह की रिट जारी करता है: बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus), परमादेश (Mandamus), प्रतिषेध (Prohibition), उत्प्रेषण (Certiorari) और अधिकार पृच्छा (Quo-Warranto)।
संविधान का कौन-सा अनुच्छेद संसद को यह शक्ति देता है कि वह सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों और पुलिस बलों के सदस्यों के मौलिक अधिकारों को प्रतिबंधित या संशोधित कर सकती है?
- अनुच्छेद 33
- अनुच्छेद 34
- अनुच्छेद 35
- अनुच्छेद 32
Explanation:
- अनुच्छेद 33 (Article 33) संसद (Parliament) को (राज्य विधानमंडलों को नहीं) यह विशेष शक्ति देता है ताकि सशस्त्र बलों (Armed Forces), अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) और पुलिस बलों (Police Forces) के सदस्यों के बीच अनुशासन (Discipline) बना रहे और वे अपने कर्तव्यों का उचित पालन कर सकें।
- SSC CGL पॉइंटर: अनुच्छेद 34 (Article 34) ‘मार्शल लॉ’ (Martial Law – सैन्य शासन) के दौरान मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) पर प्रतिबंध से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 35 (Article 35) मौलिक अधिकारों को प्रभावित करने वाले कानून बनाने की संसद की एकमात्र शक्ति से संबंधित है।
अनुच्छेद 12 के तहत ‘राज्य’ की परिभाषा में निम्नलिखित में से किसे शामिल नहीं किया गया है?
- भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI)
- भारत की संसद और सरकार
- दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA)
- राष्ट्रीयकृत बैंक (जैसे SBI)
Explanation:
- अनुच्छेद 12 (Article 12) के तहत ‘राज्य’ (State) की परिभाषा में भारत की संसद और सरकार, राज्यों की सरकारें और विधानमंडल, सभी स्थानीय प्राधिकारी (Local Authorities) और वैधानिक या गैर-वैधानिक प्राधिकरण (Statutory or Non-Statutory Authorities) शामिल हैं।
- राजनीतिक दलों के छात्र संगठन (जैसे NSUI) निजी निकाय (Private Bodies) हैं, वे राज्य के नियंत्रण में काम करने वाले प्राधिकरण नहीं हैं।
यदि संसद ऐसा कानून बनाती है जो मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो न्यायपालिका किस सिद्धांत के तहत उसे अमान्य घोषित कर सकती है?
- न्यायिक समीक्षा का सिद्धांत (Doctrine of Judicial Review)
- पृथक्करणीयता का सिद्धांत (Doctrine of Severability)
- आच्छादन का सिद्धांत (Doctrine of Eclipse)
- अधित्याग का सिद्धांत (Doctrine of Waiver)
Explanation:
- अनुच्छेद 13 (Article 13) न्यायपालिका को न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की शक्ति देता है, जिसके तहत वह किसी भी ऐसे कानून की समीक्षा कर सके जो मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) को कम करता है।
- यह सिद्धांत कानूनों को मौलिक अधिकारों के अनुरूप बनाए रखने का काम करता है।
‘विधि का शासन’ (Rule of Law) की अवधारणा, जो अनुच्छेद 14 का मूल आधार है, किस ब्रिटिश न्यायविद् के विचारों से प्रेरित है?
- ए. वी. डायसी (A. V. Dicey)
- लॉर्ड मैकाले (Lord Macaulay)
- जॉन ऑस्टिन (John Austin)
- जेरेमी बेंथम (Jeremy Bentham)
Explanation:
- ए. वी. डायसी (A. V. Dicey) ने ‘विधि के शासन’ (Rule of Law) की तीन विशेषताएं बताई थीं, जिनमें से दो (कानून के समक्ष समानता और मनमानी शक्ति का निषेध) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (Article 14) में शामिल हैं।
अनुच्छेद 15(3) के तहत राज्य को किसके पक्ष में ‘विशेष प्रावधान’ करने की अनुमति दी गई है?
- महिलाएँ और बच्चे
- सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग
- अनुसूचित जाति और जनजाति
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग
Explanation:
- अनुच्छेद 15(3) (Article 15(3)) राज्य को महिलाओं (Women) और बच्चों (Children) के कल्याण के लिए विशेष कानून (जैसे मातृत्व लाभ या मुफ्त शिक्षा) बनाने की सकारात्मक शक्ति देता है।
किस ऐतिहासिक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह व्यवस्था दी कि पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की कुल सीमा 50% से अधिक नहीं होनी चाहिए?
- इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ (मंडल केस)
- केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
- मेनका गांधी बनाम भारत संघ
- मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
Explanation:
- 1992 के इंदिरा साहनी (Indira Sawhney) मामले (जिसे मंडल केस (Mandal Case) भी कहा जाता है) में 9 न्यायाधीशों की पीठ ने क्रीमी लेयर (Creamy Layer) की पहचान करने और आरक्षण (Reservation) की 50% सीमा तय करने का ऐतिहासिक फैसला दिया था।
अनुच्छेद 17 के तहत ‘अस्पृश्यता’ (Untouchability) शब्द को संविधान में कहाँ परिभाषित किया गया है?
- यह संविधान या किसी अधिनियम में परिभाषित नहीं है
- अनुच्छेद 366 (परिभाषाएं) में
- नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 में
- अनुच्छेद 17 के स्पष्टीकरण में
Explanation:
- ‘अस्पृश्यता’ (Untouchability) शब्द को न तो संविधान (Constitution) में और न ही संसद के किसी कानून में परिभाषित किया गया है।
- न्यायालयों (Courts) ने इसके ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भ के आधार पर इसके अर्थ को स्पष्ट किया है।
यदि कोई भारतीय नागरिक किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि स्वीकार करना चाहता है, तो उसे किसकी पूर्व सहमति की आवश्यकता होगी?
- भारत के राष्ट्रपति
- भारत के प्रधानमंत्री
- भारत के मुख्य न्यायाधीश
- भारत के विदेश मंत्री
Explanation:
- अनुच्छेद 18(2) (Article 18(2)) के अनुसार, भारत का कोई नागरिक (Citizen) किसी विदेशी राज्य (Foreign State) से कोई उपाधि (Title) राष्ट्रपति (President) की सहमति के बिना स्वीकार नहीं करेगा।
अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत नागरिकों को प्राप्त ‘भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ पर किस आधार पर उचित प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है?
- सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना
- भारत की संप्रभुता और अखंडता
- लोक व्यवस्था (Public Order)
- न्यायालय का अवमान (Contempt of Court)
Explanation:
- अनुच्छेद 19(2) (Article 19(2)) में दिए गए 8 आधारों (जैसे संप्रभुता (Sovereignty), सुरक्षा (Security), लोक व्यवस्था (Public Order) आदि) के अलावा किसी अन्य आधार पर इस स्वतंत्रता को नहीं रोका जा सकता।
- नीतियों की आलोचना लोकतंत्र (Democracy) का हिस्सा है और इस पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।
अनुच्छेद 20(3) के अनुसार “किसी अपराध के लिए अभियुक्त किसी व्यक्ति को स्वयं अपने विरुद्ध साक्षी होने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।” इसे विधिक भाषा में क्या कहा जाता है?
- आत्म-अभिशंसन का निषेध (Privilege against Self-Incrimination)
- दोहरे दंड से संरक्षण (Double Jeopardy)
- कार्योत्तर विधि से संरक्षण (Ex-post facto law)
- बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)
Explanation:
- यह प्रावधान आत्म-अभिशंसन (Self-Incrimination) के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे किसी भी आरोपी (Accused) को पुलिस के सामने या अदालत में अपने ही खिलाफ गवाही देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
किस प्रसिद्ध मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि अनुच्छेद 21 के तहत ‘जीवन का अधिकार’ का मतलब केवल जीवित रहना नहीं, बल्कि ‘मानवीय गरिमा के साथ जीने का अधिकार’ है?
- मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978)
- ए. के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य (1950)
- गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य (1967)
- एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994)
Explanation:
- मेनका गांधी (Maneka Gandhi) मामले (1978) ने अनुच्छेद 21 (Article 21) की व्याख्या को व्यापक बनाया और कानून की “उचित प्रक्रिया” (Due Process of Law) के सिद्धांत को भारतीय न्यायशास्त्र में स्थापित किया।
- इसने यह स्थापित किया कि ‘जीवन का अधिकार’ (Right to Life) केवल जानवरों की तरह जीवित रहना नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा (Human Dignity) के साथ जीने का अधिकार है।
6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार को किस संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा मौलिक अधिकार बनाया गया था?
- 86वां संशोधन अधिनियम, 2002
- 42वां संशोधन अधिनियम, 1976
- 44वां संशोधन अधिनियम, 1978
- 91वां संशोधन अधिनियम, 2003
Explanation:
- 86वें संशोधन (86th Amendment) द्वारा अनुच्छेद 21A (Article 21A) को जोड़ा गया, जिसे प्रभावी बनाने के लिए बाद में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 पास किया गया।
अनुच्छेद 22 के तहत गिरफ्तार किए गए किसी भी व्यक्ति को यात्रा के समय को छोड़कर, गिरफ्तारी के कितने समय के भीतर निकटतम मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य है?
- 24 घंटे
- 12 घंटे
- 48 घंटे
- 72 घंटे
Explanation:
- यह सुरक्षात्मक अधिकार मनमानी पुलिस हिरासत (Police Custody) को रोकने के लिए दिया गया है।
- हालांकि, यह निवारक निरोध (Preventive Detention) के तहत पकड़े गए लोगों पर लागू नहीं होता है।
अनुच्छेद 23 के तहत निम्नलिखित में से किस प्रथा को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है?
- बंधुआ मजदूरी और बेगार (बिना वेतन के जबरन काम कराना)
- कारखानों में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का नियोजन
- सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए राज्य द्वारा अनिवार्य सेवा लागू करना
- हड़ताल करने का अधिकार
Explanation:
- अनुच्छेद 23 (Article 23) मानव तस्करी (Human Trafficking), बेगार और जबरन श्रम (Forced Labour) को रोकता है।
- कारखानों में बच्चों के काम करने पर रोक अनुच्छेद 24 (Article 24) के अंतर्गत आती है।
अनुच्छेद 24 के अनुसार, कितने वर्ष से कम आयु के किसी बालक को किसी कारखाने, खान या अन्य संकटमय नियोजन (Hazardous Employment) में काम के लिए नहीं लगाया जाएगा?
- 14 वर्ष
- 12 वर्ष
- 16 वर्ष
- 18 वर्ष
Explanation:
- अनुच्छेद 24 (Article 24) के अनुसार, 14 वर्ष से कम आयु के बालक (Child) को किसी कारखाने, खान या अन्य संकटमय नियोजन (Hazardous Employment) में काम के लिए नहीं लगाया जाएगा।
- बाल श्रम निषेध अधिनियमों (Child Labour Act) के माध्यम से इस अनुच्छेद को और कड़ा किया गया है।
अनुच्छेद 25 के स्पष्टीकरण के अनुसार, ‘कृपाण’ धारण करना और लेकर चलना किस धर्म के मानने वालों के धार्मिक आचरण का अंग माना गया है?
- सिख धर्म
- जैन धर्म
- बौद्ध धर्म
- पारसी धर्म
Explanation:
- अनुच्छेद 25 (Article 25) में विशेष रूप से स्पष्ट किया गया है कि सिखों (Sikhs) द्वारा कृपाण (Kirpan) धारण करना उनके धर्म के अबाध रूप से मानने और आचरण करने का वैध हिस्सा माना जाएगा।
अनुच्छेद 26 के तहत धार्मिक संप्रदायों को प्राप्त धार्मिक कार्यों के प्रबंधन का अधिकार निम्नलिखित में से किस शर्त के अधीन नहीं है?
- सामाजिक न्याय (Social Justice)
- लोक व्यवस्था (Public Order)
- सदाचार (Morality)
- स्वास्थ्य (Health)
Explanation:
- अनुच्छेद 26 (Article 26) के तहत अधिकार पूर्ण नहीं हैं, वे केवल लोक व्यवस्था (Public Order), सदाचार (Morality) और स्वास्थ्य (Health) के अधीन ही प्रबंधित किए जा सकते हैं।
- सामाजिक न्याय (Social Justice) इस अनुच्छेद के तहत प्रतिबंध का आधार नहीं है।
अनुच्छेद 27 राज्य को क्या करने से स्पष्ट रूप से रोकता है?
- जनता से कर (Tax) के रूप में एकत्र धन को किसी एक विशिष्ट धर्म के प्रचार या पोषण के लिए खर्च करना
- धार्मिक संस्थानों पर किसी भी प्रकार का शुल्क (Fee) लगाना
- स्कूलों में धार्मिक शिक्षा देना
- धार्मिक यात्राओं को सुरक्षा प्रदान करना
Explanation:
- अनुच्छेद 27 (Article 27) राज्य को कर (Tax) के पैसे का उपयोग किसी विशेष धर्म (Religion) को बढ़ावा देने के लिए करने से रोकता है क्योंकि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य (Secular State) है।
- ध्यान दें कि यह शुल्क (Fee) लगाने से नहीं रोकता, केवल टैक्स के पैसे के दुरुपयोग को रोकता है।
अनुच्छेद 28 के तहत किस प्रकार के शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा पूरी तरह से प्रतिबंधित (पूरी तरह वर्जित) है?
- पूरी तरह से राज्य द्वारा संचालित या पोषित संस्थान
- राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान
- राज्य निधि से सहायता पाने वाले संस्थान
- किसी धार्मिक ट्रस्ट द्वारा स्थापित लेकिन राज्य द्वारा प्रशासित संस्थान
Explanation:
- अनुच्छेद 28 (Article 28) के अनुसार, जो सरकारी संस्थान पूरी तरह सरकारी पैसे से चलते हैं (पूरी तरह से राज्य द्वारा संचालित या पोषित), उनमें कोई धार्मिक शिक्षा (Religious Instruction) नहीं दी जा सकती।
अनुच्छेद 29(1) भारत के किसी भी भाग में रहने वाले नागरिकों के किस समूह को अपनी विशिष्ट संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार देता है?
- नागरिकों के किसी भी वर्ग को (जिसकी अपनी विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति हो)
- केवल भाषाई अल्पसंख्यकों को
- केवल धार्मिक अल्पसंख्यकों को
- केवल आदिवासी और जनजातीय समूहों को
Explanation:
- हालांकि यह अल्पसंख्यकों (Minorities) के अधिकारों के तहत आता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के अनुसार ‘नागरिकों का वर्ग’ (Section of Citizens) शब्द का दायरा बड़ा है, जिसमें बहुसंख्यक भी शामिल हो सकते हैं यदि उनकी कोई विशिष्ट लिपि या संस्कृति हो।
अनुच्छेद 30 के तहत किस आधार पर अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी पसंद के शिक्षण संस्थानों की स्थापना करने का अधिकार दिया गया है?
- धर्म या भाषा दोनों में से किसी भी आधार पर
- केवल धर्म के आधार पर
- केवल भाषा के आधार पर
- जाति और नस्ल के आधार पर
Explanation:
- भारतीय संविधान धार्मिक (Religious) और भाषाई (Linguistic)—इन दो प्रकार के अल्पसंख्यकों (Minorities) को मान्यता देता है और अनुच्छेद 30 (Article 30) उन्हें अपने शिक्षण संस्थान (Educational Institutions) चलाने की आजादी देता है।
मूल संविधान में संपत्ति का अधिकार एक मौलिक अधिकार था, जिसे किस संविधान संशोधन द्वारा भाग 3 से हटाकर अनुच्छेद 300A के तहत एक कानूनी अधिकार बना दिया गया?
- 44वां संशोधन अधिनियम, 1978
- 24वां संशोधन अधिनियम, 1971
- 42वां संशोधन अधिनियम, 1976
- 73वां संशोधन अधिनियम, 1992
Explanation:
- जनता पार्टी सरकार द्वारा लाए गए 44वें संशोधन (44th Amendment) ने अनुच्छेद 19(1)(f) और अनुच्छेद 31 को समाप्त कर दिया, जिससे संपत्ति का अधिकार (Right to Property) मौलिक अधिकार (Fundamental Right) नहीं रहा और इसे अनुच्छेद 300A (Article 300A) के तहत एक कानूनी अधिकार (Legal Right) बना दिया गया।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने किस मौलिक अधिकार को “संविधान का हृदय और आत्मा” (Heart and Soul of the Constitution) कहा था?
- संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32)
- समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14)
- धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25)
- स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19)
Explanation:
- डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (Dr. B. R. Ambedkar) का मानना था कि अधिकारों को केवल लिख देने से कुछ नहीं होता, जब तक कि उनके उल्लंघन पर सीधे सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) जाने और उन्हें लागू करवाने का प्रभावी साधन न हो।
- इसलिए उन्होंने अनुच्छेद 32 (Article 32) को संविधान का “हृदय और आत्मा” (Heart and Soul) कहा था।
अनुच्छेद 33 संसद को किसके मौलिक अधिकारों को प्रतिबंधित या संशोधित करने की विशेष शक्ति देता है?
- सशस्त्र बलों, पुलिस बलों और खुफिया एजेंसियों के सदस्यों को
- देश के सभी सरकारी कर्मचारियों को
- केवल भारत के गैर-नागरिकों को
- संसद के सदस्यों और विधायकों को
Explanation:
- देश की सुरक्षा और अनुशासन (Discipline) बनाए रखने के लिए अनुच्छेद 33 (Article 33) संसद को सशस्त्र बलों (Armed Forces), पुलिस बलों (Police Forces) और खुफिया एजेंसियों (Intelligence Agencies) के सदस्यों के कुछ मौलिक अधिकारों (जैसे संघ बनाने या मीडिया से बात करने की आजादी) को सीमित करने की विशेष शक्ति देता है।
यदि भारत के किसी हिस्से में ‘सैन्य कानून’ (Martial Law) लागू है, तो मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
- अनुच्छेद 34
- अनुच्छेद 352
- अनुच्छेद 356
- अनुच्छेद 33
Explanation:
- अनुच्छेद 34 (Article 34) तब लागू होता है जब किसी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाने के कारण सेना का शासन (Martial Law) लगा दिया जाता है।
- यह राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency – अनुच्छेद 352) से अलग व्यवस्था है।
मौलिक अधिकारों को प्रभावी बनाने या उनके उल्लंघन के लिए दंड तय करने वाले कानून बनाने की शक्ति संविधान ने किसे दी है?
- केवल भारत की संसद को
- राज्यों की विधानसभाओं को
- संसद और राज्य विधानसभाओं दोनों को संयुक्त रूप से
- केवल भारत के सुप्रीम कोर्ट को
Explanation:
- अनुच्छेद 35 (Article 35) यह सुनिश्चित करता है कि पूरे देश में मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) और उनके उल्लंघन की सजा से जुड़े कानूनों में एकरूपता (Uniformity) बनी रहे, इसलिए यह शक्ति केवल केंद्रीय संसद (Parliament) को दी गई है, राज्यों को नहीं।
राज्यपाल (Governor) के पद से संबंधित मूल प्रावधान किस अनुच्छेद में दिया गया है?
- अनुच्छेद 153
- अनुच्छेद 152
- अनुच्छेद 154
- अनुच्छेद 155
Explanation:
- अनुच्छेद 153 (Article 153) में कहा गया है कि प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल (Governor) होगा ।
- अनुच्छेद 152 राज्यों की परिभाषा (Definition of States) से संबंधित है ।
- अनुच्छेद 154 राज्य की कार्यपालिका शक्ति (Executive Power) से संबंधित है ।
- अनुच्छेद 155 राज्यपाल की नियुक्ति (Appointment) से संबंधित है ।
किस अनुच्छेद के तहत राज्यपाल (Governor) अपना त्यागपत्र (Resignation) राष्ट्रपति को लिखकर दे सकता है?
- अनुच्छेद 156
- अनुच्छेद 153
- अनुच्छेद 155
- अनुच्छेद 157
Explanation:
- अनुच्छेद 156 (Article 156) के अनुसार, राज्यपाल (Governor) राष्ट्रपति (President) के प्रसादपर्यंत (during the pleasure) पद धारण करता है ।
- अनुच्छेद 156(2) में स्पष्ट किया गया है कि राज्यपाल अपना त्यागपत्र (Resignation) राष्ट्रपति को लिखकर दे सकता है ।
राज्यपाल (Governor) बनने के लिए न्यूनतम आयु (Minimum Age) कितने वर्ष होनी चाहिए?
- 35 वर्ष
- 25 वर्ष
- 30 वर्ष
- 40 वर्ष
Explanation:
- अनुच्छेद 157 (Article 157) के अनुसार, राज्यपाल (Governor) बनने के लिए व्यक्ति को भारत का नागरिक (Citizen of India) होना चाहिए और उसकी आयु 35 वर्ष (35 years) पूरी होनी चाहिए ।
राज्यपाल (Governor) अपना शपथ (Oath) किसके समक्ष लेता है?
- उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of the High Court) के समक्ष
- राष्ट्रपति (President) के समक्ष
- राज्य के मुख्यमंत्री (Chief Minister) के समक्ष
- सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष
Explanation:
- अनुच्छेद 159 (Article 159) के अनुसार, प्रत्येक राज्यपाल (Governor) अपना शपथ (Oath) उच्च न्यायालय (High Court) के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) की उपस्थिति में लेता है ।
- यदि मुख्य न्यायाधीश अनुपलब्ध हैं, तो उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश (senior-most Judge) यह कर्तव्य निभाते हैं ।
राज्यपाल (Governor) को क्षमादान की शक्ति (Power of Pardon) किस अनुच्छेद के तहत प्राप्त है?
- अनुच्छेद 161
- अनुच्छेद 160
- अनुच्छेद 162
- अनुच्छेद 158
Explanation:
- अनुच्छेद 161 (Article 161) राज्यपाल (Governor) को वह शक्ति देता है, जो राज्य की कार्यपालिका शक्ति (Executive Power) के विस्तार वाले विषयों से संबंधित है ।
- इसके तहत राज्यपाल किसी सजा को क्षमा (Pardon), प्रविलंबन (Reprieve), विराम (Respite), लघुकरण (Remission) या परिहार (Commutation) कर सकता है ।
राज्यपाल (Governor) किस विषय पर मृत्युदंड (Death Sentence) को क्षमा नहीं कर सकता?
- जब सजा किसी ऐसे विषय से संबंधित हो, जिस पर राज्य की कार्यपालिका शक्ति (Executive Power) का विस्तार नहीं है
- जब सजा किसी ऐसे कानून के तहत दी गई हो, जो राज्य सूची (State List) के विषय से संबंधित है
- जब राज्यपाल किसी सजा को स्थगित (Suspend) करना चाहता हो
- जब राज्यपाल किसी सजा को लघुकृत (Remit) करना चाहता हो
Explanation:
- अनुच्छेद 161 (Article 161) के तहत राज्यपाल (Governor) की क्षमादान शक्ति राज्य की कार्यपालिका शक्ति (Executive Power) के दायरे तक सीमित है ।
- मृत्युदंड (Death Sentence) को क्षमा करने की शक्ति राष्ट्रपति (President) के पास है, क्योंकि यह संघीय विषय है ।
यदि किसी राज्य में आपात स्थिति (Emergency) न होने पर भी राज्यपाल (Governor) राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) लगाने की सिफारिश करता है, तो कौन-सा अनुच्छेद लागू होता है?
- अनुच्छेद 356
- अनुच्छेद 352
- अनुच्छेद 153
- अनुच्छेद 161
Explanation:
- अनुच्छेद 356 (Article 356) राज्य में राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) लगाने से संबंधित है, जब राज्य का संवैधानिक तंत्र (Constitutional Machinery) विफल हो जाता है ।
- इसकी सिफारिश राज्यपाल (Governor) की रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रपति (President) कर सकता है ।
- अनुच्छेद 352 राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) से संबंधित है, जो पूरे देश में लागू होता है ।
राज्यपाल (Governor) को यह सुनिश्चित करने का अधिकार है कि राज्य का शासन संविधान के अनुसार चले। यह प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
- अनुच्छेद 159
- अनुच्छेद 158
- अनुच्छेद 160
- अनुच्छेद 162
Explanation:
- अनुच्छेद 159 (Article 159) में राज्यपाल (Governor) के शपथ (Oath) का प्रावधान है, जिसमें वह यह शपथ लेता है कि वह संविधान और कानूनों (Constitution and Laws) के अनुसार राज्य के शासन का संचालन करेगा ।
- यह राज्यपाल की निष्ठा (Loyalty) और कर्तव्यनिष्ठा को सुनिश्चित करता है ।
किस अनुच्छेद में यह परिभाषित किया गया है कि ‘राज्य’ की कार्यपालिका शक्ति (Executive Power) राज्यपाल (Governor) में निहित होगी?
- अनुच्छेद 154
- अनुच्छेद 152
- अनुच्छेद 153
- अनुच्छेद 155
Explanation:
- अनुच्छेद 154 (Article 154) के अनुसार, राज्य की कार्यपालिका शक्ति (Executive Power) राज्यपाल (Governor) में निहित (vested) होगी ।
- राज्यपाल इस शक्ति का प्रयोग स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों (Subordinate Officers) के माध्यम से करता है ।
