मल्टीमीटर इलेक्ट्रॉनिक्स रिपेयरिंग का सबसे महत्वपूर्ण औजार है। इसे ‘मल्टी’-मीटर इसलिए कहते हैं क्योंकि यह एक साथ कई चीज़ों (Voltage, Current, Resistance) को माप सकता है।
यहाँ मल्टीमीटर के उपयोग और कंपोनेंट्स चेक करने की पूरी जानकारी दी गई है:
मल्टीमीटर के मुख्य भाग (Parts of Multimeter)
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Display: यहाँ आपको रीडिंग दिखाई देती है।
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Selection Knob: इसकी मदद से आप चुनते हैं कि आपको क्या चेक करना है (जैसे AC या DC)।
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Probes (Pipes): दो तार होते हैं— लाल (Positive) और काला (Negative/Common)।
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Ports: काले तार को हमेशा COM पोर्ट में लगाएं। लाल तार को VΩmA पोर्ट में लगाएं।
मल्टीमीटर के फंक्शन्स (Functions)
1. DC Voltage ($V-$)
इसका उपयोग बैटरी, मोबाइल चार्जर और लैपटॉप मदरबोर्ड के वोल्टेज चेक करने के लिए होता है।
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कैसे चेक करें: नॉब को 20V पर सेट करें। लाल प्रोब को (+) और काले को (-) पर रखें।
2. AC Voltage ($V\sim$)
घर के बिजली बोर्ड (Socket) में आने वाली सप्लाई चेक करने के लिए।
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सावधानी: इसे हमेशा 750V या 600V पर सेट करके ही चेक करें।
3. Continuity / Buzzer Mode ($\cdot\nu\prime\prime$)
यह रिपेयरिंग में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला मोड है। जब दोनों प्रोब्स को आपस में छुआते हैं, तो ‘बीप’ की आवाज़ आती है। इसका उपयोग तार टूटने या शॉर्टिंग चेक करने के लिए होता है।
कंपोनेंट्स को चेक करने का तरीका (Checking Components)
मल्टीमीटर से आप यह पता लगा सकते हैं कि कोई पार्ट सही (OK) है या खराब (Faulty):
| कंपोनेंट (Component) | मोड (Mode) | सही होने की पहचान (OK Condition) | खराब होने की पहचान (Faulty) |
| Fuse (फ्यूज) | Continuity | बीप की आवाज़ आएगी। | कोई आवाज़ नहीं आएगी। |
| Resistor (प्रतिरोधक) | Ohm (Ω) | स्क्रीन पर उसकी वैल्यू (Value) दिखेगी। | कोई वैल्यू नहीं या ‘1’ दिखेगा। |
| Capacitor (कैपेसिटर) | Continuity | एक पल के लिए बीप आकर बंद हो जाएगी या नंबर बढ़ेंगे। | लगातार बीप बजना (Short)। |
| Diode (डायोड) | Diode Mode | एक तरफ से वैल्यू (400-700) आएगी, दूसरी तरफ से कुछ नहीं। | दोनों तरफ से बीप या दोनों तरफ से वैल्यू आना। |
| Coil / Inductor | Continuity | बीप की आवाज़ आएगी। | बीप नहीं आएगी (Open circuit)। |
रिपेयरिंग के लिए जरूरी टिप्स
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Shorting Check: अगर मदरबोर्ड पर किसी भी कंपोनेंट (खासकर कैपेसिटर) के दोनों तरफ बीप आ रही है, तो समझिये कि उस लाइन में Shorting है।
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Open Circuit: अगर फ्यूज या कॉइल चेक करते समय बीप नहीं आ रही, तो वह Open (टूटा हुआ) है।
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Safety: कभी भी चालू सर्किट में Continuity मोड का इस्तेमाल न करें, इससे मल्टीमीटर खराब हो सकता है। वोल्टेज चेक करते समय प्रोब्स को आपस में टच न होने दें।
Relays
रिपेयरिंग सीखते समय सबसे पहले खराब बोर्ड्स पर कंपोनेंट्स को बार-बार चेक करने का अभ्यास करें ताकि आपको वैल्यूज का सही अंदाज़ा हो सके।
कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में इस्तेमाल होने वाले Relays (रिले) एक प्रकार के इलेक्ट्रो-मैकेनिकल स्विच होते हैं। जब आप कंप्यूटर रिपेयरिंग या चिप-लेवल रिपेयरिंग (जैसे लैपटॉप मदरबोर्ड या इन्वर्टर) का काम करते हैं, तो रिले की कार्यप्रणाली समझना बहुत जरूरी है।
- इसका मुख्य काम कम वोल्टेज वाले सिग्नल (जैसे 5V या 12V DC) का उपयोग करके हाई वोल्टेज सर्किट (जैसे 230V AC) को चालू या बंद करना होता है।
यहाँ रिले रिपेयरिंग और टेस्टिंग के विस्तृत नोट्स हिंदी में दिए गए हैं:
रिले (Relay) कैसे काम करता है, इसे समझने के लिए कार के हॉर्न (Car Horn) का उदाहरण सबसे अच्छा है।
कल्पना कीजिए कि कार के हॉर्न को बजने के लिए बहुत ज्यादा बिजली (High Current) चाहिए। अगर आप बैटरी से आने वाले उस भारी करंट वाले तार को सीधे स्टयरिंग व्हील के बटन से जोड़ दें, तो बटन दबाते ही भारी करंट की वजह से बटन पिघल सकता है या आपको झटका लग सकता है।
यहाँ रिले एक बीच के रक्षक (Intermediate) की तरह काम करता है।
रिले का काम: स्टेप-बाय-स्टेप
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छोटा करंट (Input): जब आप स्टयरिंग पर लगे हॉर्न के बटन को दबाते हैं, तो आप बहुत ही कम बिजली (Low Current) को रिले के अंदर मौजूद एक कॉइल (Coil) में भेजते हैं।
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चुंबक बनना: जैसे ही कॉइल में बिजली जाती है, वह एक चुंबक की तरह काम करने लगती है।
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बड़ा स्विच खिंचना: यह चुंबक रिले के अंदर लगी लोहे की एक भारी पत्ती (Armature) को अपनी ओर जोर से खींचती है।
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सर्किट पूरा होना: जैसे ही वह पत्ती खिंचती है, वह कार की बैटरी और हॉर्न के बीच के “भारी बिजली वाले रास्ते” को आपस में जोड़ देती है।
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हॉर्न बजना: अब भारी करंट सीधे बैटरी से हॉर्न में जाता है और हॉर्न बजने लगता है।
इस उदाहरण का मुख्य लाभ
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सुरक्षा: आपके हाथ के नीचे वाला बटन सिर्फ एक छोटे से चुंबक को चालू कर रहा है, वह सीधे भारी बिजली को नहीं छू रहा।
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दक्षता: पतले तारों से भारी करंट नहीं ले जाना पड़ता, जिससे तार जलने का खतरा नहीं रहता।
एक और सरल उदाहरण: इनवर्टर
जब बिजली कट जाती है, तो इनवर्टर के अंदर की रिले “कट” की आवाज के साथ स्विच हो जाती है। वह तुरंत घर की लाइन को सरकारी बिजली (Main Supply) से हटाकर बैटरी वाली लाइन से जोड़ देती है। यह सब पलक झपकते ही हो जाता है।
सरल शब्दों में: रिले एक “दुभाषिया (Translator)” की तरह है जो कम शक्ति वाली भाषा (Low Power) को समझकर बड़ी शक्ति वाली मशीन (High Power) को चालू कर देता है।
1. रिले के मुख्य भाग (Parts of a Relay)
रिले मुख्य रूप से पांच भागों से मिलकर बना होता है:
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Electromagnet (विद्युत चुंबक): इसमें तांबे के तार की एक कॉइल होती है जो बिजली मिलने पर चुंबकीय क्षेत्र बनाती है।
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Armature (आर्मेचर): यह लोहे का एक गतिशील हिस्सा है जो चुंबक की ओर खिंचता है।
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Spring (स्प्रिंग): यह आर्मेचर को वापस उसकी पुरानी स्थिति में लाने का काम करता है।
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Contacts (संपर्क बिंदु): यह वह जगह है जहाँ से बिजली का स्विचिंग होता है। इसके तीन मुख्य पिन होते हैं:
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COM (Common): मुख्य पिन जहाँ इनपुट दिया जाता है।
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NC (Normally Closed): सामान्य स्थिति में यह COM से जुड़ा रहता है।
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NO (Normally Open): बिजली मिलने पर COM इस पिन से जुड़ जाता है।
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Yoke (योक): यह चुंबक को अपनी जगह पर स्थिर रखने वाला फ्रेम है।

2. कॉमन फॉल्ट लिस्ट (Common Faults)
रिले में आमतौर पर निम्नलिखित समस्याएं आती हैं:
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Coil Burn (कॉइल का जलना): ओवरवोल्टेज के कारण अंदर की बारीक वायरिंग टूट जाती है।
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Contact Pitting/Carbon (कार्बन जमना): बार-बार स्विचिंग होने से पॉइंट्स पर काला कार्बन जमा हो जाता है, जिससे बिजली पास नहीं होती।
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Sticky Contacts (चिपक जाना): स्पार्किंग के कारण NO और COM आपस में वेल्ड होकर चिपक जाते हैं।
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Mechanical Fatigue (स्प्रिंग की खराबी): स्प्रिंग ढीला होने से आर्मेचर सही से मूव नहीं कर पाता।
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Clicking Sound Issue: रिले से ‘कट-कट’ की आवाज आती है पर आउटपुट नहीं मिलता।
3. रिपेयरिंग और टेस्टिंग के तरीके (Testing & Solutions)
चूंकि रिले एक सील्ड यूनिट (Sealed Unit) होता है, इसलिए इसे “रिपेयर” करने के बजाय अक्सर “रिप्लेस” किया जाता है, लेकिन डायग्नोसिस (पहचान) सबसे महत्वपूर्ण है।
मल्टीमीटर से टेस्टिंग (Multimeter Testing)
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Continuity Mode पर रखें: मल्टीमीटर को बीप साउंड (Continuity) पर सेट करें।
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Coil की जांच: रिले की दो कॉइल पिनों पर प्रोब रखें। अगर कुछ ओहम (Resistance) दिखा रहा है (जैसे 50$\Omega$ से 400$\Omega$), तो कॉइल ठीक है। ‘OL’ दिखाने पर कॉइल जल चुकी है।
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Default Contacts: COM और NC पिन पर बीप की आवाज आनी चाहिए। COM और NO पर बीप नहीं आनी चाहिए।
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Voltage Test: रिले पर लिखे वोल्टेज (जैसे 5V, 12V या 24V DC) को कॉइल पर दें। अब COM और NO के बीच बीप आनी चाहिए। अगर आवाज आई लेकिन बीप नहीं आई, तो अंदर कार्बन जमा है।
समाधान (Solutions)
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कार्बन की सफाई: अगर रिले खुला हुआ है, तो पॉइंट्स को बारीक रेगमाल (Sandpaper) या CRC क्लीनर से साफ करें।
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रिप्लेसमेंट: अगर कॉइल ओपन हो गई है, तो उसी रेटिंग (वोल्टेज और एम्पीयर) का नया रिले लगाएं।
4. रिपेयरिंग के लिए महत्वपूर्ण टिप्स
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Diode Check: सर्किट में रिले के साथ अक्सर एक ‘Flyback Diode’ लगा होता है। अगर रिले काम नहीं कर रहा, तो इस डायोड को भी चेक करें; इसके शॉर्ट होने पर रिले ऑन नहीं होगा।
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Dry Solder: कभी-कभी पीसीबी पर रिले की पिंस के शोल्डर क्रैक हो जाते हैं। उन्हें दोबारा शोल्डर (Reflow) करने से समस्या हल हो जाती है।
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Voltage Level: हमेशा सुनिश्चित करें कि रिले की कॉइल को पूरा वोल्टेज मिल रहा है। अगर वोल्टेज कम होगा, तो रिले ‘चैटरिंग’ (लगातार कट-कट) करेगा।
नोट: कंप्यूटर एसएमपीएस (SMPS) या लैपटॉप मदरबोर्ड में रिले का इस्तेमाल कम, लेकिन यूपीएस (UPS) और इन्वर्टर रिपेयरिंग में बहुत ज्यादा होता है। इन स्टेप्स का पालन करके आप किसी भी रिले आधारित सर्किट को आसानी से ठीक कर सकते हैं।
सरल शब्दों में कहें तो रिले (Relay) एक ऐसा बिजली से चलने वाला स्विच है जिसे आप दूर से या किसी सेंसर की मदद से कंट्रोल कर सकते हैं।
इसे एक उदाहरण से समझते हैं: जैसे आपके घर की लाइट का स्विच आप उंगली से दबाते हैं, वैसे ही रिले को चालू करने के लिए बिजली (Current) का इस्तेमाल किया जाता है।
यहाँ इसके काम करने का तरीका दिया गया है:
1. रिले के अंदर क्या होता है?
रिले के अंदर एक इलेक्ट्रोमैग्नेट (चुंबक) और एक लोहे की पत्ती (Switch Contact) होती है।
2. यह कैसे काम करता है? (How it works)
रिले दो हिस्सों में काम करती है:
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चुंबक बनना (The Coil): जब हम रिले के छोटे पॉइंट्स (Pins) को थोड़ी सी बिजली (जैसे 5V या 12V) देते हैं, तो उसके अंदर लगा तांबे का तार एक चुंबक बन जाता है।
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स्विच का खिंचना (The Switch): यह चुंबक पास में लगी लोहे की पत्ती को अपनी ओर खींचता है। जैसे ही पत्ती खिंचती है, वह दूसरे सर्किट को आपस में जोड़ देती है और आपका बड़ा उपकरण (जैसे पंखा या मोटर) चालू हो जाता है।
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वापस आना: जैसे ही आप बिजली बंद करते हैं, चुंबक खत्म हो जाता है और एक स्प्रिंग उस पत्ती को वापस पुरानी जगह खींच लेती है, जिससे स्विच ‘Off’ हो जाता है।
3. रिले की जरूरत क्यों पड़ती है?
मान लीजिए आपको अपने मोबाइल (जो बहुत कम बिजली पर चलता है) से घर का बड़ा वाटर पंप चलाना है। मोबाइल की बिजली इतनी नहीं होती कि पंप चला सके, लेकिन मोबाइल इतनी बिजली दे सकता है कि वह रिले को चालू कर दे। फिर वह रिले पंप को सीधे मेन लाइन से जोड़ देती है।
मुख्य पॉइंट्स (याद रखने के लिए):
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सुरक्षा: यह आपके कम पावर वाले सर्किट (जैसे रिमोट या मोबाइल) को हाई वोल्टेज से दूर और सुरक्षित रखता है।
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आवाज: जब रिले चालू या बंद होती है, तो “कट-कट” की आवाज आती है, जो लोहे की पत्ती के टकराने की होती है।
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ऑटोमेशन: इसका इस्तेमाल स्टेबलाइजर, इनवर्टर और कारों के हॉर्न या लाइट में सबसे ज्यादा होता है।
