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आर्थिक सर्वेक्षण 2024–25 में कहा गया है कि भारत की विदेशी मुद्रा आरक्षित निधि दिसंबर 2024 तक की स्थिति के अनुसार विदेशी ऋण के लगभग कितने प्रतिशत को पूरा करने के लिए पर्याप्त थी?

  • 110% से अधिक
  • लगभग 60%
  • लगभग 90%
  • लगभग 75%

Explanation:

  • आर्थिक सर्वेक्षण 2024–25 के अनुसार, दिसंबर 2024 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) देश के कुल विदेशी ऋण (External Debt) का लगभग 90% कवर करने के लिए पर्याप्त था।
  • यह मजबूत विदेशी मुद्रा स्थिति भारत की बाहरी झटकों से निपटने और वृहद आर्थिक स्थिरता (Macroeconomic Stability) को बनाए रखने की क्षमता को दर्शाती है।
  • अन्य प्रमुख आर्थिक तथ्य –
    • भारत दुनिया के सबसे बड़े विदेशी मुद्रा भंडार वाले देशों में शीर्ष स्थान (प्रायः चौथे या पांचवें स्थान) पर शामिल रहता है।
    • विदेशी मुद्रा भंडार में मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा संपत्ति (FCA), स्वर्ण (Gold), स्पेशल ड्राइंग राइट्स (SDR), और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास आरक्षित स्थिति शामिल होती है।
    • दिसंबर 2024 तक भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 600 बिलियन डॉलर के आंकड़े से ऊपर मजबूत स्थिति में बना रहा था।

मल्टी ब्रांड रिटेल ट्रेड में FDI की अनुमत सीमा क्या है?

  • 49%
  • 51%
  • 100%
  • 74%

Explanation:

  • भारत में मल्टी-ब्रांड रिटेल ट्रेड (Multi-Brand Retail Trade – MBRT) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अधिकतम अनुमत सीमा 51 प्रतिशत है।
  • सिंगल ब्रांड रिटेल ट्रेड (SBRT) में ऑटोमैटिक रूट के माध्यम से 100% FDI की अनुमति है, जबकि मल्टी-ब्रांड रिटेल में कड़े सरकारी दिशानिर्देश और राज्यों की सहमति लागू होती है।
  • अन्य एफडीआई क्षेत्र संबंधी तथ्य –
    • रक्षा क्षेत्र (Defense) में ऑटोमैटिक रूट से 74% और सरकारी मार्ग से 100% तक FDI की अनुमति है।
    • बीमा क्षेत्र (Insurance) में FDI की सीमा को बढ़ाकर 74% कर दिया गया है।
    • अंतरिक्ष क्षेत्र (Space Sector) के उपग्रह निर्माण और लॉन्चिंग खंड में हाल ही में 100% FDI की अनुमति दी गई है।

गोल्डर और कुमारी द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र में कुल साधन उत्पादकता (TFP) वृद्धि में कार्यमंदन का प्रमुख कारण क्या था?

  • विदेशी पूंजी पर अत्यधिक निर्भरता
  • कुशल श्रमिकों की कमी
  • क्षमता उपयोग में गिरावट
  • निर्यात पर अत्यधिक नियमन

Explanation:

  • प्रसिद्ध अर्थशास्त्रियों गोल्डर और कुमारी (Goldar and Kumari) के अध्ययन के अनुसार, भारतीय विनिर्माण क्षेत्र में कुल साधन उत्पादकता (Total Factor Productivity – TFP) की वृद्धि दर में सुस्ती या कार्यमंदन का मुख्य कारण क्षमता उपयोग में गिरावट (Fall in Capacity Utilisation) था।
  • जब औद्योगिक संयंत्रों और मशीनरी का पूरा उपयोग नहीं हो पाता, तो पूंजी और श्रम की उत्पादकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • अन्य संबंधित औद्योगिक तथ्य –
    • कुल साधन उत्पादकता (TFP) यह मापती है कि उत्पादन प्रक्रिया में श्रम और पूंजी जैसे आ Inputs का कितनी कुशलता से उपयोग किया जा रहा है।
    • औद्योगिक सुधारों (1991 के बाद) का मुख्य उद्देश्य उत्पादन क्षमता के पूर्ण उपयोग और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना था।
    • भारत में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) देश के विनिर्माण, खनन और बिजली क्षेत्रों के मासिक प्रदर्शन को ट्रैक करता है।

मानव विकास के कितने मुख्य उपागम हैं?

  • पाँचः आय, कल्याण, क्षमता, अधिकार-आधारित और संधारणीयता उपागम
  • छह: आय, कल्याण, मूल आवश्यकता, क्षमता, अधिकार-आधारित, सहभागी उपागम
  • चार: आय, कल्याण, न्यूनतम आवश्यकता और क्षमता उपागम
  • तीनः आय, कल्याण और क्षमता उपागम

Explanation:

  • मानव विकास (Human Development) के मुख्य रूप से चार प्रमुख उपागम (Approaches) माने जाते हैं: आय उपागम, कल्याण उपागम, न्यूनतम आवश्यकता उपागम और क्षमता उपागम।
  • आय उपागम: मानव विकास को आय के स्तर से जोड़कर देखता है (जितनी अधिक आय, उतना अधिक मानव विकास स्तर)।
  • कल्याण उपागम: इसमें मानव को लाभार्थियों के रूप में देखा जाता है और सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य आदि पर सामाजिक कल्याण के खर्चे बढ़ाती है।
  • न्यूनतम आवश्यकता उपागम: इसकी मूल अवधारणा ILO द्वारा दी गई थी, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, भोजन, जल और स्वच्छता जैसी न्यूनतम छह बुनियादी जरूरतों पर जोर दिया जाता है।
  • क्षमता उपागम: यह प्रो. अमर्त्य सेन से जुड़ा है, जो मानव क्षमताओं के निर्माण और विकल्पों के विस्तार पर केंद्रित है।

वित्तीय वर्ष 2024-25 में, विदेशों में रहने वाले भारतीयों द्वारा घर भेजे गए ________ के कुल प्रेषण ने एक नया रिकॉर्ड बनाया।

  • 135.46 बिलियन डॉलर
  • 122.57 बिलियन डॉलर
  • 126.76 बिलियन डॉलर
  • 156.10 बिलियन डॉलर

Explanation:

  • वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान, प्रवासी भारतीयों (Non-Resident Indians – NRIs) द्वारा भारत में भेजे गए कुल प्रेषण (Remittances) बढ़कर 135.46 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए।
  • भारत पिछले कई वर्षों से दुनिया में प्रेषण (Remittances) प्राप्त करने वाला शीर्ष देश बना हुआ है।
  • अन्य महत्वपूर्ण प्रेषण और अर्थव्यवस्था तथ्य –
    • प्रवासी भारतीय देश की विदेशी मुद्रा आय का एक बहुत बड़ा और स्थिर स्रोत माने जाते हैं।
    • अमेरिका, खाड़ी देश (GCC) और यूनाइटेड किंगडम भारत के लिए प्रेषण के प्रमुख स्रोत देश हैं।
    • यह विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती प्रदान करने में प्रत्यक्ष भूमिका निभाता है।

वर्ष 1950-51 से वर्ष 2016-17 तक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में कृषि की हिस्सेदारी में क्या रुझान देखा गया है?

  • तीव्र वृद्धि और त्वरित गिरावट
  • उल्लेखनीय कमी
  • उछाल के साथ निरंतर गिरावट
  • उतार-चढ़ाव के साथ मध्यम वृद्धि

Explanation:

  • स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद (वर्ष 1950-51 से 2016-17 तक) भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में कृषि और संबंधित क्षेत्रों की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय कमी (Significant Decline) दर्ज की गई है।
  • वर्ष 1950-51 में भारतीय GDP में कृषि की हिस्सेदारी 50% से अधिक थी, जो समय के साथ घटकर लगभग 15-18% के आसपास आ गई है, हालांकि देश की एक बड़ी आबादी अभी भी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है।
  • अन्य आर्थिक विकास से जुड़े तथ्य –
    • कृषि हिस्सेदारी में यह गिरावट एक विकासशील अर्थव्यवस्था का सामान्य लक्षण है, जहां उद्योग और सेवा क्षेत्र (Service Sector) तेजी से आगे बढ़ते हैं।
    • वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र (Service Sector) का योगदान सबसे अधिक (लगभग 50% से अधिक) है।
    • हरित क्रांति (Green Revolution) ने 1960 के दशक के उत्तरार्ध में कृषि उत्पादन में खाद्यान्न आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी।

नवंबर 2025 तक प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन विद्युत का योगदान कितना प्रतिशत है?

  • 40.2%
  • 45.8%
  • 51.5%
  • 60.0%

Explanation:

  • नवंबर 2025 तक के आधिकारिक ऊर्जा आंकड़ों के अनुसार, भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन (Non-Fossil Fuels – सौर, पवन, पनबिजली, परमाणु आदि) का योगदान बढ़कर 51.5% हो गया है।
  • भारत ने अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (INDC) लक्ष्यों को समय से पहले प्राप्त करने की दिशा में मील का पत्थर छुआ है।
  • अन्य नवीकरणीय ऊर्जा तथ्य –
    • भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट (GW) गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करना है।
    • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का मुख्यालय भारत के गुरुग्राम (हरियाणा) में स्थित है।
    • प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य देश के करोड़ों घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करना है।

निम्नलिखित में से किस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण निर्धनों के लिए स्वरोजगार प्रदान करना है?

  • राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन
  • प्रधानमंत्री आवास योजना
  • दीनदयाल अंत्योदय योजना
  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम

Explanation:

  • ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने और उनकी आजीविका में सुधार करने के प्रमुख उद्देश्य से दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) की शुरुआत की गई है।
  • यह योजना मुख्य रूप से ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से संगठित कर उन्हें वित्तीय सहायता और कौशल प्रशिक्षण देती है।
  • अन्य प्रमुख कल्याणकारी योजनाएं –
    • मनरेगा (MGNREGA): ग्रामीण परिवारों को वित्तीय वर्ष में 100 दिन के अकुशल शारीरिक रोजगार की गारंटी देता है (यह मजदूरी रोजगार है, स्वरोजगार नहीं)।
    • प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY): ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बेघर या कच्चे मकान वाले परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराती है।
    • राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NHRM): ग्रामीण भारत में सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने पर केंद्रित है।

भारत में बिना लाइसेंस वाली विनिर्माण गतिविधियों के लिए वर्ष 1991 में कौन-सा प्राथमिक उपाय शुरू किया गया था?

  • परियोजना अनुमोदन लाइसेंस (Project Approval Licence)
  • विशेष आर्थिक फाइलिंग प्रमाणपत्र (Special Economic Filing Certificate)
  • औद्योगिक उद्यमी ज्ञापन (Industrial Entrepreneurs Memoranda)
  • उद्यमशीलता मंजूरी प्रपत्र (Entrepreneurial Clearance Form)

Explanation:

  • वर्ष 1991 की नई औद्योगिक नीति (New Industrial Policy) के तहत, उन उद्योगों और विनिर्माण गतिविधियों के लिए जिन्हें औद्योगिक लाइसेंस की आवश्यकता नहीं थी, औद्योगिक उद्यमी ज्ञापन (Industrial Entrepreneurs Memoranda – IEM) दाखिल करने की व्यवस्था शुरू की गई थी।
  • इसके तहत उद्यमियों को केवल एक साधारण पंजीकरण फॉर्म या ज्ञापन भरना होता था, जिससे लाइसेंस राज की जकड़न समाप्त हुई।
  • 1991 की आर्थिक सुधार नीति के प्रमुख स्तंभ –
    • उदारीकरण (Liberalisation), निजीकरण (Privatisation) और वैश्वीकरण (Globalisation) – जिन्हें एलपीजी (LPG) मॉडल भी कहा जाता है।
    • केवल कुछ गिने-चुने उद्योगों (जैसे रक्षा उपकरण, खतरनाक रसायन और तंबाकू उत्पाद) को छोड़कर बाकी सभी के लिए अनिवार्य लाइसेंसिंग को समाप्त कर दिया गया।
    • मनमोहन सिंह उस समय देश के वित्त मंत्री थे और पी.वी. नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे।

RBI और केंद्र सरकार के बीच मार्च 1997 में हुए समझौते के अनुसार, 1 अप्रैल 1997 से कौन-सा अभ्यास बंद कर दिया गया था?

  • तदर्थ ट्रेजरी बिल जारी करने का अभ्यास
  • राजकोषीय घाटे का स्वतः मुद्रीकरण
  • दिनांकित प्रतिभूतियों के माध्यम से बाजार ऋण
  • 91 दिनों के ट्रेजरी बिल जारी करना

Explanation:

  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार के बीच सितंबर 1994 में एक ऐतिहासिक समझौता हुआ था जिसे मार्च 1997 से पूर्ण रूप से लागू किया गया, जिसके तहत 1 अप्रैल 1997 से सरकार के राजकोषीय घाटे की भरपाई के लिए तदर्थ ट्रेजरी बिल (Ad-hoc Treasury Bills) जारी करने की प्रथा को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।
  • इस व्यवस्था के बंद होने से राजकोषीय घाटे के स्वतः मुद्रीकरण (Automatic Monetisation of Deficit) पर रोक लगी, जिससे मुद्रास्फीति (Inflation) को नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिली।
  • अन्य मौद्रिक तथ्य –
    • RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हिल्टन यंग आयोग की सिफारिश पर हुई थी।
    • वर्तमान में मौद्रिक नीति समिति (MPC) भारत में ब्याज दरों (Repo Rate आदि) का निर्धारण करती है।

भारत में राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम की स्थापना ____ में हुई थी।

  • 1982
  • 1954
  • 1955
  • 1975

Explanation:

  • राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (National Small Industries Corporation – NSIC) की स्थापना भारत सरकार द्वारा वर्ष 1955 में की गई थी।
  • यह सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME Ministry) के तहत आने वाला एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (PSU) है।
  • NSIC के मुख्य कार्य –
    • देश में लघु उद्योगों (MSMEs) के विकास को बढ़ावा देना, उनकी सहायता करना और उन्हें प्रोत्साहित करना।
    • लघु उद्योगों को तकनीकी सहायता, कच्चा माल उपलब्ध कराना और विपणन (Marketing) में मदद करना।
    • MSME क्षेत्र भारत में कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है।

GST परिषद के निर्णयन की प्रक्रिया में, केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच मतदान शक्ति का वितरण कैसे होता है?

  • केंद्र = 2/3, राज्य = 1/3
  • केंद्र = 1/2, राज्य = 1/2
  • केंद्र = 1/3, राज्य = 2/3
  • अकेले राज्य = 1, केंद्र = 0

Explanation:

  • वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद के निर्णयों में मतदान के दौरान मतों का भारांश (Voting Weightage) इस प्रकार होता है कि केंद्र सरकार के पास कुल मतों का 1/3 हिस्सा (33.33%) होता है, जबकि सभी राज्य सरकारों के पास संयुक्त रूप से 2/3 हिस्सा (66.67%) होता है।
  • GST परिषद में किसी भी प्रस्ताव को पारित होने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम तीन-चौथाई (75% या 3/4) बहुमत की आवश्यकता होती है।
  • GST परिषद से जुड़े मुख्य बिंदु –
    • GST परिषद का गठन संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत किया गया है।
    • GST परिषद के अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री होते हैं, और सभी राज्यों के वित्त/कर मंत्री इसके सदस्य होते हैं।
    • भारत में 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 के माध्यम से GST को लागू किया गया था (1 जुलाई 2017 से)।

मर्चंडाइज एक्सपोर्टर्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (MEIS) के अंतर्गत निर्यातकों को निम्नलिखित में से किस रूप में पुरस्कृत किया जाता है?

  • स्वतंत्र रूप से अंतरणीय ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप (Duty Credit Scrip)
  • अन्तरणीय (Non-transferable) नकद वाउचर
  • उपयोग करने पर एक्सपायर (expire) होने वाली निर्यात कर छूट
  • निर्यात-उन्मुख इकाइयों में इक्विटी शेयर

Explanation:

  • मर्चंडाइज एक्सपोर्टर्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (MEIS) के तहत पात्र निर्यातकों को उत्पाद के निर्यात पर स्वतंत्र रूप से अंतरणीय ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप (Duty Credit Scrip) के रूप में प्रोत्साहन/पुरस्कार दिया जाता था।
  • इन स्क्रिप्स का उपयोग बाद में सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क या अन्य शुल्कों के भुगतान में किया जा सकता था और इन्हें बाजार में अन्य लोगों को आसानी से हस्तांतरित (Transfer) भी किया जा सकता था।
  • व्यापार नीति तथ्य –
    • MEIS को विदेश व्यापार नीति (FTP) के तहत लॉन्च किया गया था, जिसे बाद में WTO नियमों के अनुपालन के तहत अन्य योजनाओं (जैसे RODTEP) से प्रतिस्थापित कर दिया गया।
    • भारत का विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) देश की आयात-निर्यात नीतियों और प्रदायक योजनाओं का संचालन करता है।

जुलाई 1991 में रुपये का अवमूल्यन कितना हुआ था?

  • 10 प्रतिशत
  • 18 प्रतिशत
  • 30 प्रतिशत
  • 25 प्रतिशत

Explanation:

  • जुलाई 1991 में गंभीर भुगतान संतुलन (Balance of Payments – BoP) संकट के समय भारतीय रुपये का दो चरणों में कुल लगभग 18 से 19 प्रतिशत (मुख्यतः दो चरणों में – 1 जुलाई और 3 जुलाई 1991 को) अवमूल्यन (Devaluation) किया गया था।
  • इस रणनीतिक कदम का मुख्य उद्देश्य भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना और देश के घटते विदेशी मुद्रा भंडार को संभालना था।
  • 1991 के आर्थिक संकट से जुड़े तथ्य –
    • जुलाई 1991 का यह अवमूल्यन उदारीकरण और वैश्वीकरण के सुधारों की शुरुआत का एक अहम हिस्सा था।
    • उस समय देश का विदेशी मुद्रा भंडार केवल कुछ हफ्तों के आयात के भुगतान लायक ही बचा था।
    • देश के इतिहास में इससे पहले 1966 और 1949 में भी रुपये का अवमूल्यन किया जा चुका था।

निम्नलिखित में से कौन-सा, 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भारत की मौद्रिक नीति में हुए संरचनात्मक समायोजन को प्रदर्शित करता है?

  • रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप में कमी के साथ बाजार द्वारा निर्धारित ब्याज दरें
  • घाटे के वित्तपोषण के माध्यम से मुद्रा आपूर्ति का विस्तार
  • नियामक उपकरण के रूप में खुला बाजार के संचालन का उन्मूलन
  • कृषि और MSME के लिए नियंत्रित ऋण दरें

Explanation:

  • 1991 के आर्थिक सुधारों के पश्चात भारत की मौद्रिक नीति में सबसे बड़ा संरचनात्मक बदलाव यह आया कि ब्याज दरों को प्रशासनिक नियंत्रण से मुक्त करके बाज़ार की ताकतों (Market Forces) द्वारा निर्धारित होने दिया गया, जिसमें रिजर्व बैंक का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप कम हुआ।
  • इस सुधार का उद्देश्य वित्तीय क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना और संसाधनों का कुशल आबंटन करना था।
  • मौद्रिक सुधारों से जुड़े अन्य मुख्य तथ्य –
    • नरसिम्हम समिति (Narasimham Committee) की सिफारिशों ने भारतीय बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तनों की नींव रखी थी।
    • बैंक रेट और रेपो रेट जैसे उपकरणों को मौद्रिक प्रबंधन के मुख्य साधन के रूप में स्थापित किया गया।

दिसंबर 2025 में, US डॉलर के मुकाबले रुपये (₹) की मूल्यवृद्धि का सर्वाधिक संभावित कारण RBI द्वारा की गई निम्नलिखित में से कौन-सी कार्रवाई थी?

  • ब्याज दरों में वृद्धि
  • सोने का आयात
  • डॉलर की बिक्री
  • बॉन्ड की खरीद

Explanation:

  • दिसंबर 2025 में अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के मुकाबले भारतीय रुपये में मजबूती या मूल्यवृद्धि का प्रमुख कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की बिक्री (Dollar Selling) करना था, जिससे बाजार में रुपये की मांग बढ़ी और डॉलर की अधिकता को नियंत्रित किया गया।
  • जब केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर बेचता है, तो इसके विपरीत प्रवाह से रुपये को मजबूती मिलती है।
  • विदेशी मुद्रा प्रबंधन से जुड़े तथ्य –
    • RBI विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 के तहत देश के विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधन करता है।
    • रुपये की विनिमय दर को स्थिर रखने के लिए RBI समय-समय पर हस्तक्षेप करता है।

कौन-सा पद उस स्थिति का वर्णन करता है जिसमें एक व्यक्ति नियोजित तो होता है, लेकिन वेतन, कार्य-घंटे या कौशल स्तर के संदर्भ में वांछित क्षमता में नहीं होता है?

  • अंशकालिक रोजगार
  • अनैच्छिक रोजगार
  • निम्न वेतन रोजगार
  • अल्प-रोजगार

Explanation:

  • जब कोई व्यक्ति कार्य कर रहा होता है (नियोजित होता है) लेकिन उसकी योग्यता, कौशल या उसकी पूरी क्षमता के अनुसार उसे काम नहीं मिलता या वह अपनी योग्यता से नीचे के स्तर की नौकरी करने के लिए विवश होता है, तो उसे अल्प-रोजगार (Underemployment) कहा जाता है।
  • यह विकासशील देशों में एक प्रमुख श्रम बाजार की चुनौती है।
  • रोजगार के अन्य प्रकार –
    • प्रच्छन्न बेरोजगारी (Disguised Unemployment): जहां आवश्यकता से अधिक लोग काम पर लगे प्रतीत होते हैं लेकिन उनकी सीमांत उत्पादकता शून्य होती है (विशेषकर कृषि क्षेत्र में)।
    • चक्रीय बेरोजगारी (Cyclical Unemployment): आर्थिक मंदी या चक्रों के उतार-चढ़ाव के कारण उत्पन्न बेरोजगारी।

डॉ. सी. रंगराजन समिति द्वारा भारत में गरीबी के मापन की प्रविधि पर रिपोर्ट किस वर्ष प्रस्तुत की गई थी?

  • 2008
  • 2014
  • 2010
  • 2017

Explanation:

  • डॉ. सी. रंगराजन समिति (Rangarajan Committee) का गठन भारत में गरीबी रेखा के निर्धारण और उसके आकलन की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए किया गया था, जिसने अपनी रिपोर्ट वर्ष 2014 में प्रस्तुत की थी।
  • इस समिति ने सुरेश तेंदुलकर समिति की तुलना में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों दोनों के लिए उपभोग व्यय की सीमा को थोड़ा अधिक संशोधित किया था।
  • भारत में गरीबी आकलन से जुड़ी अन्य समितियां –
    • लकड़वाला समिति (1993)
    • सुरेश तेंदुलकर समिति (2009)
    • Y.K. अलग समिति (1979) – गरीबी रेखा तय करने वाली पहली आधिकारिक समिति।

निम्नलिखित कथनों पर विचार करें। 1. ऑपरेशन ट्विस्ट केंद्रीय बैंकों की एक मौद्रिक नीति है जिसका उपयोग ब्याज दरों को कम करने और देश में निवेश को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। 2. इस ऑपरेशन के तहत, RBI ने बाजारों में तरलता लाने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों के प्रतिफल में बदलाव किया। 3. यह ऑपरेशन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) के माध्यम से अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार की सरकारी प्रतिभूतियों की एक साथ खरीद और बिक्री करके किया जाता है। नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए।

  • 1, 2 और 3
  • केवल 2 और 3
  • केवल 1 और 2
  • केवल 1 और 3

Explanation:

  • दिए गए तीनों कथन सही हैं। ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ (Operation Twist) केंद्रीय बैंकों (जैसे RBI और US Fed) द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली एक विशेष मौद्रिक नीति है।
  • इसके तहत दीर्घकालिक प्रतिभूतियों की खरीद और अल्पकालिक प्रतिभूतियों की बिक्री एक साथ की जाती है ताकि दीर्घकालिक ब्याज दरों को नीचे लाया जा सके और अर्थव्यवस्था में निवेश को बढ़ावा मिले।
  • इसकी शुरुआत पहली बार अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा वर्ष 1961 में की गई थी, और भारत में RBI ने इसे दिसंबर 2019 में अपनाया था।

भारतीय अर्थव्यवस्था में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकारी व्यय बढ़ाने में निम्नलिखित में से कौन-सी सीमा है?

  • विदेशी व्यापार में उत्पादन से वृद्धि करना
  • प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रवृत्तियां बनाना
  • मुद्रास्फीति में वृद्धि की संभावना
  • सामाजिक पूंजी विकास में उत्पादन से वृद्धि करना

Explanation:

  • आर्थिक विकास को गति देने के लिए जब सरकार अत्यधिक सार्वजनिक व्यय (Public Expenditure) बढ़ाती है, तो इसके साथ सबसे बड़ी आर्थिक सीमा मुद्रास्फीति में वृद्धि की संभावना (Potential Rise in Inflation) होती है, क्योंकि बाजार में मुद्रा की कुल आपूर्ति (Money Supply) बढ़ जाती है।
  • यह स्थिति ‘मांग-प्रेरित मुद्रास्फीति’ (Demand-Pull Inflation) का कारण बन सकती है।
  • राजकोषीय नीति संबंधी तथ्य –
    • राजकोषीय नीति (Fiscal Policy) सरकार के कर निर्धारण और व्यय से संबंधित नीतियों का समुच्चय है।
    • भारत में राजकोषीय नीति वित्त मंत्रालय द्वारा तैयार की जाती है।

निम्नलिखित में से कौन-सा, भारत की अर्थव्यवस्था में वैश्वीकरण का परिणाम है?

  • बहिर्गमन
  • उदारीकरण
  • निजीकरण
  • राष्ट्रीयकरण

Explanation:

  • भारत की अर्थव्यवस्था में वैश्वीकरण (Globalisation) के प्रमुख परिणामों में दुनिया के विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार, पूंजी प्रवाह, प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान और श्रम का बहिर्गमन/प्रवास (Outflow/Migration) तथा अंतर्गमन शामिल है।
  • वैश्वीकरण ने भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजारों के साथ एकीकृत करने में अहम भूमिका निभाई है।
  • 1991 के सुधारों के अन्य आयाम –
    • उदारीकरण (Liberalisation) और निजीकरण (Privatisation) वैश्वीकरण के पूरक उपाय थे।
    • इसने भारत को आईटी और सेवा क्षेत्र में वैश्विक महाशक्ति बनने का अवसर प्रदान किया।

31 मार्च 2025 तक की स्थिति के अनुसार, भारत में राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई ______ रिपोर्ट की गई।

  • 1,75,123 km
  • 1,20,076 km
  • 91,287 km
  • 1,46,204 km

Explanation:

  • सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) की कुल लंबाई बढ़कर 1,46,204 किलोमीटर दर्ज की गई थी।
  • भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क वाला देश है।
  • बुनियादी ढांचे से जुड़े अन्य तथ्य –
    • भारतमाला परियोजना (Bharatmala Pariyojana) का संबंध देश में राजमार्गों के विकास और आर्थिक गलियारों के निर्माण से है।
    • राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण, रख-रखाव और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार शीर्ष निकाय है।

मंदी के दौरान किस प्रकार की राजकोषीय नीति का उपयोग किया जाना चाहिए?

  • तटस्थ राजकोषीय नीति
  • विस्तारवादी राजकोषीय नीति
  • संकुचनकारी राजकोषीय नीति
  • निष्प्रभावी राजकोषीय नीति

Explanation:

  • आर्थिक मंदी (Economic Recession) के दौर में अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने और रोजगार सृजन के लिए विस्तारवादी राजकोषीय नीति (Expansionary Fiscal Policy) का उपयोग किया जाना चाहिए, जिसके तहत सरकार करों में कटौती करती है और सार्वजनिक व्यय (Public Expenditure) में भारी वृद्धि करती है।
  • यह कीनेशियन अर्थशास्त्र (Keynesian Economics) का एक प्रमुख सिद्धांत है।
  • विस्तारवादी नीति के विपरीत, मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए संकुचनकारी (Contractionary) नीति अपनाई जाती है।

निम्नलिखित में से कौन-सा देश, 2024 के लिए सबसे कम औसत आयु के संदर्भ में सबसे युवा देश है?

  • इराक
  • फिलीपींस
  • नाइजर
  • अफगानिस्तान

Explanation:

  • जनसांख्यिकीय आंकड़ों और वैश्विक डेटा (जैसे संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट) के अनुसार, अफ्रीकी देश नाइजर (Niger) दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है, जिसकी औसत आयु (Median Age) सबसे कम है (यहां की लगभग आधी आबादी 15 वर्ष से कम आयु की है)।
  • कम औसत आयु उच्च प्रजनन दर और तीव्र जनसंख्या वृद्धि को दर्शाती है।
  • वैश्विक जनसांख्यिकी तथ्य –
    • भारत भी दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है, जहां कामकाजी उम्र की आबादी (Demographic Dividend) का बड़ा अनुपात मौजूद है।
    • जापान और यूरोप के कई देश दुनिया में सबसे अधिक औसत आयु (Aging Population) वाले देशों में गिने जाते हैं।

1991 में कर सुधार समिति ने धन कर के संबंध में क्या अनुशंसा की थीं?

  • संपत्ति कर का युक्तिकरण
  • धन कर का उन्मूलन
  • संपदा शुल्क का पुनर्गठन
  • उपहार कर को हटाना

Explanation:

  • वर्ष 1991 में गठित राजा चेलैया की अध्यक्षता वाली कर सुधार समिति (Tax Reforms Committee) ने प्रत्यक्ष करों को सरल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे, जिसमें धन कर (Wealth Tax) के उन्मूलन या उसमें भारी कटौती की सिफारिश भी प्रमुख रूप से शामिल थी (हालांकि बाद में इसे कई चरणों में बदला गया और अंततः समाप्त किया गया)।
  • कर सुधारों का मुख्य उद्देश्य कर अनुपालन (Tax Compliance) को आसान बनाना और कर चोरी को रोकना था।
  • प्रत्यक्ष करों में सुधार –
    • चेलैया समिति की रिपोर्ट ने भारत में कर के दायरे को व्यापक बनाने और स्लैब को तर्कसंगत बनाने की दिशा में मार्ग प्रशस्त किया।
    • वर्तमान में भारत में प्रत्यक्ष करों का प्रबंधन केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा किया जाता है।

भारत सरकार द्वारा मौद्रिक नीति समिति के ढांचे के अंतर्गत अप्रैल 2026 तक मुद्रास्फीति का लक्ष्य कितना निर्धारित किया गया है?

  • ±2% की सहिष्णुता के साथ 4%
  • ±1% की सहिष्णुता के साथ 3%
  • ±2% की सहिष्णुता के साथ 5%
  • बिना किसी विनिर्दिष्ट सहिष्णुता के 6%

Explanation:

  • भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत केंद्र सरकार द्वारा मौद्रिक नीति समिति (MPC) के लिए मुद्रास्फीति का लक्ष्य 4 प्रतिशत (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक – CPI आधारित) निर्धारित किया गया है, जिसमें ऊपर और नीचे ±2 प्रतिशत की सहिष्णुता बैंड (Tolerance Band) यानी 2% से 6% की सीमा तय की गई है।
  • इस लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (Flexible Inflation Targeting) फ्रेमवर्क को पहली बार 2016 में अपनाया गया था।
  • मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण से जुड़े तथ्य –
    • यदि मुद्रास्फीति लगातार तीन तिमाहियों तक इस सहिष्णुता बैंड से बाहर रहती है, तो RBI को सरकार को इसका स्पष्टीकरण देना होता है।
    • MPC में कुल 6 सदस्य होते हैं (3 RBI से और 3 सरकार द्वारा नियुक्त)।

1990-91 के भुगतान संतुलन संकट के दौरान, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार केवल _____ के आयात के वित्तपोषण के लिए पर्याप्त था।

  • दो सप्ताह
  • एक सप्ताह
  • तीन माह
  • एक माह

Explanation:

  • वर्ष 1990-91 के गंभीर भुगतान संतुलन (Balance of Payments – BoP) संकट के समय भारत का विदेशी मुद्रा भंडार इतना कम हो गया था कि वह केवल लगभग दो सप्ताह (लगभग 15 दिन) के आयात के भुगतान के लिए ही पर्याप्त बचा था।
  • इस ऐतिहासिक वित्तीय आपातकाल के कारण ही भारत को जुलाई 1991 में नई आर्थिक नीति (LPG Reforms) लागू करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
  • संकट के निवारण से जुड़े तथ्य –
    • भारत ने इस संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से आपातकालीन ऋण सहायता प्राप्त की थी।
    • सोने को गिरवी रखकर नकदी जुटाने जैसी आपातकालीन प्रक्रियाएं भी उस समय अपनाई गई थीं।

वर्ष 1991-92 से वर्ष 1998-99 के दौरान, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के अनुसार किस औद्योगिक क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई?

  • खनन और उत्खनन
  • बिजली और उपयोगिताएँ
  • मूलभूत और पूंजीगत वस्तुएँ
  • विनिर्माण और इंजीनियरिंग

Explanation:

  • 1991 के सुधारों के तुरंत बाद के दशक (1991-92 से 1998-99) में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के अनुसार मूलभूत और पूंजीगत वस्तुएं (Basic and Capital Goods) क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि दर में सबसे अधिक सुस्ती और गिरावट दर्ज की गई थी।
  • इसका मुख्य कारण मांग में कमी और नई औद्योगिक नीतियों के समायोजन में आने वाली शुरुआती बाधाएं थीं।
  • IIP से जुड़े तथ्य –
    • IIP देश में औद्योगिक प्रदर्शन को मापने का प्रमुख संकेतक है, जिसे राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी किया जाता है।
    • IIP में विनिर्माण (Manufacturing) का भारांश (Weightage) सबसे अधिक होता है।

1951–1991 के दौरान भारत में किस पॉलिसी ट्रेड-ऑफ ने संतुलित क्षेत्रीय वृद्धि को सीमित कर दिया?

  • निजी बनाम सार्वजनिक क्षेत्र
  • आयात बनाम निर्यात
  • कृषि बनाम उद्योग
  • सेवाएँ बनाम विनिर्माण

Explanation:

  • वर्ष 1951 से 1991 की अवधि के दौरान भारत की पंचवर्षीय योजनाओं में मुख्य रूप से भारी उद्योगों के त्वरित विकास पर जोर दिए जाने के कारण कृषि बनाम उद्योग (Agriculture vs Industry) के बीच का नीतिगत ट्रेड-ऑफ (Policy Trade-off) उभरकर सामने आया, जिसने देश के कई हिस्सों में संतुलित क्षेत्रीय विकास को सीमित कर दिया।
  • शुरुआती योजनाओं में पूंजीगत वस्तुओं और भारी उद्योगों को अधिक प्राथमिकता मिली थी।
  • आर्थिक नियोजन तथ्य –
    • भारत में पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत 1951 में पहली योजना के साथ हुई थी (योजना आयोग द्वारा)।
    • वर्तमान में योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग (NITI Aayog) कार्यरत है।

कौन-सी संस्था वर्ष 1999 में शुरू की गई राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (NAIS) की कार्यान्वयन एजेंसी थी?

  • एग्रीकल्चर इन्श्योरेंस कंपनी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (AIC)
  • भारतीय खाद्य निगम (FCI)
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)
  • राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD)

Explanation:

  • वर्ष 1999 में शुरू की गई राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (National Agricultural Insurance Scheme – NAIS) की मूल कार्यान्वयन एजेंसी एग्रीकल्चर इन्श्योरेंस कंपनी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (AIC) थी (बाद में इस क्षेत्र में अन्य सुधार भी किए गए)।
  • इस योजना का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और रोगों के कारण फसल खराब होने की स्थिति में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना था।
  • कृषि बीमा से जुड़े अन्य तथ्य –
    • वर्तमान में किसानों के लिए केंद्र सरकार द्वारा **प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)** संचालित की जा रही है, जिसे 2016 में लॉन्च किया गया था।
    • PMFBY के तहत खरीफ फसलों के लिए मात्र 2% और रबी फसलों के लिए 1.5% प्रीमियम देय होता है।

मानव विकास के संकल्पनात्मक फ्रेमवर्क का प्रतिपादन _____ के द्वारा किया गया था।

  • डॉ. अब्दुस सलाम
  • एलन सी. सेम्पुल
  • डॉ. महबूब-उल-हक
  • प्रो. अमर्त्य सेन

Explanation:

  • मानव विकास (Human Development) के संकल्पनात्मक फ्रेमवर्क और प्रसिद्ध **मानव विकास सूचकांक (HDI)** का मूल प्रतिपादन पाकिस्तानी अर्थशास्त्री **डॉ. महबूब-उल-हक** द्वारा किया गया था।
  • उन्होंने पहली बार वर्ष 1990 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के माध्यम से पहली मानव विकास रिपोर्ट प्रकाशित की थी।
  • मानव विकास सूचकांक के प्रमुख आयाम –
    • लंबा और स्वस्थ जीवन (जीवन प्रत्याशा)
    • ज्ञान (शिक्षा स्तर और साक्षरता)
    • जीवन का एक अच्छा स्तर (प्रति व्यक्ति आय)
    • नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. अमर्त्य सेन ने भी इसके सैद्धांतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उदारीकरण के बाद के युग में, कृषि विपणन प्रणाली किस संरचनात्मक कारक के कारण अप्रभावी बनी रही?

  • निर्यात का पूर्ण विनियमन
  • एकसमान E-NAM अंगीकरण
  • उत्पादों का अति-निगमीकरण
  • APMC सुधार का अप्रभावी कार्यान्वयन

Explanation:

  • उदारीकरण के पश्चात भी भारत में कृषि विपणन (Agricultural Marketing) प्रणाली इसलिए अप्रभावी बनी रही क्योंकि कृषि उपज मंडी समिति (APMC) कानूनों और सुधारों का राज्यों में अप्रभावी और असमान कार्यान्वयन (Ineffective Implementation of APMC Reforms) हुआ।
  • इससे किसानों को बिचौलियों से पूरी तरह मुक्ति नहीं मिल पाई और वे अपनी उपज खुले बाजार में स्वतंत्र रूप से बेचने में कई बाधाओं का सामना करते रहे।
  • कृषि विपणन सुधार –
    • राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) पोर्टल की शुरुआत किसानों को डिजिटल रूप से देश की मंडियों से जोड़ने के लिए की गई है।
    • कृषि उपज के भंडारण के लिए देश में वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (WDRA) कार्यरत है।

केंद्रीय बजट 2025-26 के तहत, बीमा क्षेत्र में FDI की सीमा को _____ किया गया है।

  • 26% से बढाकर 49%
  • 51% से बढाकर 100%
  • 74% से बढाकर 100%
  • 49% से बढाकर 74%

Explanation:

  • केंद्रीय बजट 2025-26 के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को बढ़ाकर 100% कर दिया गया है (इससे पहले यह सीमा 74% थी)।
  • इस ऐतिहासिक कदम का उद्देश्य बीमा क्षेत्र में विदेशी पूंजी निवेश को आकर्षित करना और बीमा सेवाओं की पहुंच को देश के दूर-दराज के इलाकों तक बढ़ाना है।
  • बीमा विनियामक तथ्य –
    • भारत में बीमा क्षेत्र का नियमन **इरडा (IRDAI – Insurance Regulatory and Development Authority of India)** द्वारा किया जाता है।
    • IRDAI का मुख्यालय हैदराबाद, तेलंगाना में स्थित है।

1991 में भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के परिणामस्वरूप निम्नलिखित में से कौन-सा राजकोषीय परिणाम सामने आया?

  • उच्च आयात शुल्क
  • प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर दरों में कमी
  • मूल्य निर्धारण पर सरकारी नियंत्रण में तीव्र वृद्धि
  • सभी सार्वजनिक ऋणों का उन्मूलन

Explanation:

  • वर्ष 1991 के उदारीकरण और कर सुधारों के फलस्वरूप देश में कर प्रणाली को युक्तिसंगत बनाया गया, जिसके तहत प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर दरों में कमी (Reduction in Direct and Indirect Tax Rates) की गई ताकि कर अनुपालन बढ़ाया जा सके और अर्थव्यवस्था में निवेश को बढ़ावा मिले।
  • उच्च कर दरों से कर चोरी की प्रवृत्ति बढ़ रही थी, जिसे सुधारों ने कम किया।
  • राजकोषीय सुधार –
    • सीमा शुल्क (Customs Duties) की दरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुकूल काफी हद तक घटाया गया।
    • इससे भारतीय उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए सक्षम हुए।

1990 तक GDP में किस क्षेत्रक के शेयर में सर्वाधिक वृद्धि हुई, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में परिवर्तन को दर्शाती है?

  • उद्योग
  • सेवा
  • कृषि
  • खनन

Explanation:

  • स्वतंत्रता के पश्चात से लेकर 1990 के दशक तक की विकास यात्रा में भारतीय अर्थव्यवस्था की संरचना में धीरे-धीरे बदलाव आया, जिसमें प्राथमिक क्षेत्र (कृषि) की तुलना में द्वितीयक क्षेत्र यानी उद्योग (Industry) के साथ-साथ समग्र रूप से आधुनिक क्षेत्रों की हिस्सेदारी में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई, जो पारंपरिक कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था से आधुनिक अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण को दर्शाती है।
  • वर्तमान में हालांकि सेवा क्षेत्र (Service Sector) भारतीय GDP में सबसे बड़ा योगदानकर्ता है।
  • आर्थिक संवृद्धि के चरण –
    • किसी भी विकासशील अर्थव्यवस्था में सामान्यतः प्राथमिक से द्वितीयक (औद्योगिक) और फिर तृतीयक (सेवा) क्षेत्र की ओर बदलाव देखा जाता है।
    • भारत में हरित क्रांति और औद्योगिक नीतियों ने इस संक्रमण को गति दी थी।

आर्थिक अवसंरचना, विकास में प्रत्यक्ष रूप से किस प्रकार योगदान देती है?

  • यह विभिन्न क्षेत्रों में भौतिक पूंजी के विस्तार और वृद्धि को सीमित करती है।
  • यह श्रम की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाली मानव पूंजी में सुधार को प्रतिबंधित करती है।
  • यह विभिन्न क्षेत्रों में सभी इनपुट की समग्र उत्पादकता में कमी करती है।
  • अवसंरचना के विभिन्न खंडों का आउटपुट या अंतिम उत्पाद

Explanation:

  • आर्थिक अवसंरचना (Economic Infrastructure) जैसे ऊर्जा, परिवहन, संचार और सिंचाई आदि अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को महत्वपूर्ण इनपुट प्रदान करती है और स्वयं अवसंरचना के विभिन्न खंडों का आउटपुट या अंतिम उत्पाद समग्र आर्थिक विकास को गति देता है।
  • यह उत्पादन लागत को कम करने और बाजारों तक पहुंच को सुगम बनाने में प्रत्यक्ष भूमिका निभाती है।
  • बुनियादी ढांचा विकास से जुड़े तथ्य –
    • किसी भी देश की आर्थिक वृद्धि दर (GDP Growth) को बनाए रखने के लिए मजबूत भौतिक और सामाजिक अवसंरचना रीढ़ की हड्डी मानी जाती है।
    • भारत में गति शक्ति (PM Gati Shakti) योजना मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और अवसंरचना विकास को एकीकृत करने के लिए शुरू की गई है।

निम्नलिखित में से कौन-सा भारतीय क्षेत्र, विशाल जनसंख्या और शहरी केंद्रों के होते हुए भी औपचारिक तृतीय क्षेत्रक में सबसे कम योगदान देता है?

  • उत्तर-पूर्वी भारत
  • पश्चिमी भारत
  • उत्तरी भारत
  • दक्षिणी भारत

Explanation:

  • भौगोलिक अलगाव, कम औद्योगिकरण और सीमित कनेक्टिविटी के कारण उत्तर-पूर्वी भारत (North-East India), पर्याप्त जनसंख्या और कुछ शहरी केंद्रों के बावजूद औपचारिक तृतीयक क्षेत्रक (Service Sector) में सबसे कम योगदान देने वाले क्षेत्रों में शामिल है।
  • इस क्षेत्र में आजीविका के लिए अभी भी प्राथमिक क्षेत्र (कृषि और संबद्ध गतिविधियाँ) पर निर्भरता अधिक है।
  • क्षेत्रीय विकास तथ्य –
    • भारत के पश्चिमी और दक्षिणी राज्य (जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु) औपचारिक सेवा क्षेत्र और आईटी (IT) उद्योगों के विकास में सबसे आगे हैं।
    • उत्तर-पूर्व के विकास के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) विशेष योजनाएं संचालित करता है।

नीति आयोग भारत में गरीबी का विश्लेषण करने के लिए किस सूचकांक का उपयोग करता है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर जैसे कई कारकों पर विचार किया जाता है?

  • उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI)
  • बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI)
  • मानव विकास सूचकांक (HDI)
  • आय गरीबी सूचकांक (IPI)

Explanation:

  • नीति आयोग भारत में गरीबी के व्यापक और बहु-आयामी स्वरूप को मापने के लिए बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Multidimensional Poverty Index – MPI) का उपयोग करता है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के तीन समान रूप से महत्वपूर्ण आयामों पर आधारित है।
  • यह सूचकांक केवल आय तक सीमित न रहकर वंचितों की वास्तविक सामाजिक-आर्थिक स्थिति को दर्शाता है।
  • MPI से जुड़े तथ्य –
    • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) डेटा इसके प्रमुख स्रोतों में शामिल है।
    • हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में बहुआयामी गरीबों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

कौन-सी मापन विधि संदर्भ वर्ष में बेरोजगार पाए गए सभी व्यक्तियों को शामिल करती है और दीर्घकालिक बेरोजगारी को दर्शाती है?

  • वर्तमान दैनिक स्थिति बेरोजगारी (Current Daily Status Unemployment)
  • वर्तमान साप्ताहिक स्थिति बेरोजगारी (Current Weekly Status Unemployment)
  • सामान्य सहायक स्थिति बेरोजगारी (Usual Subsidiary Status Unemployment)
  • सामान्य प्रमुख स्थिति बेरोजगारी (Usual Principal Status Unemployment)

Explanation:

  • रोजगार और बेरोजगारी के मापन में सामान्य प्रमुख स्थिति बेरोजगारी (Usual Principal Status – UPS Unemployment) वह विधि है जो संदर्भ वर्ष के दौरान अधिकांश समय के लिए बेरोजगार रहे व्यक्तियों को गिनती है, और यह दीर्घकालिक (Chronic) बेरोजगारी को दर्शाती है।
  • राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा श्रम बल सर्वेक्षणों में इन विभिन्न पैमानों का उपयोग किया जाता है।
  • बेरोजगारी के अन्य माप –
    • वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (CWS) पिछले एक सप्ताह की स्थिति देखती है।
    • वर्तमान दैनिक स्थिति (CDS) प्रत्येक दिन के आधे या पूरे दिन के काम को आधार बनाती है।

पारंपरिक विकास (traditional development) अर्थशास्त्र में, विकास का अर्थ मुख्य रूप से क्या था?

  • प्रति व्यक्ति वास्तविक आय में वृद्धि
  • राष्ट्रीय आय के स्तरों में वृद्धि
  • रोजगार के अवसरों में वृद्धि
  • औद्योगिक उत्पादन का विस्तार

Explanation:

  • पारंपरिक विकास अर्थशास्त्र के शुरुआती दौर में आर्थिक विकास का तात्पर्य मुख्य रूप से प्रति व्यक्ति वास्तविक आय में वृद्धि (Growth in Per Capita Real Income) से था, जिसमें यह माना जाता था कि कुल और प्रति व्यक्ति आय बढ़ने से देश की गरीबी स्वतः दूर हो जाएगी।
  • बाद में इस संकुचित दृष्टिकोण को बदलकर मानव विकास और कल्याण को शामिल किया गया।
  • विकास अर्थशास्त्र तथ्य –
    • साइमन कुजनेट्स और आर्थर लुईस जैसे अर्थशास्त्रियों ने पारंपरिक विकास मॉडल के विकास में योगदान दिया था।
    • आधुनिक दृष्टिकोण धन के साथ-साथ क्षमताओं और स्वतंत्रता (अमर्त्य सेन का दृष्टिकोण) पर भी जोर देता है।

निम्नलिखित में से, तृतीयक क्रियाकलाप की पहचान कीजिए।

  • स्थावर संपदा
  • जैव प्रौद्योगिकी
  • निर्माण उद्योग
  • पेय उद्योग

Explanation:

  • दिए गए विकल्पों में स्थावर संपदा (Real Estate – रियल एस्टेट) तृतीयक क्रियाकलाप (Tertiary Activity / सेवा क्षेत्र) का एक उदाहरण है।
  • प्राथमिक क्षेत्र कच्चे माल का उत्पादन करता है, द्वितीयक क्षेत्र विनिर्माण (उद्योग) से जुड़ा है, और तृतीयक क्षेत्र सेवाओं (जैसे व्यापार, बैंकिंग, रियल एस्टेट, परिवहन) से संबंधित है।
  • आर्थिक क्रियाओं का वर्गीकरण –
    • जैव प्रौद्योगिकी, निर्माण और पेय उद्योग द्वितीयक क्षेत्र (Secondary Sector) के अंतर्गत आते हैं।
    • सेवा क्षेत्र आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र है।

उदारीकरण के बाद भारतीय उद्योग में किस संरचनात्मक परिवर्तन ने प्रतिस्पर्धा को विस्तृत किया?

  • मूल्य नियंत्रण
  • MNC का प्रवेश
  • औद्योगिक संरक्षण
  • सार्वजनिक एकाधिकार

Explanation:

  • 1991 के उदारीकरण के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) के प्रवेश ने घरेलू बाजारों में प्रतिस्पर्धा को व्यापक रूप से विस्तृत और तेज कर दिया।
  • इससे उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता के उत्पाद और विकल्प मिलने लगे।
  • सुधारों के प्रभाव –
    • विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के नियमों को उदार बनाने से बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में अपने प्लांट और सेवाएं स्थापित कीं।
    • प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) का गठन बाद में बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए किया गया।

भारत की 1991 से पूर्व की आर्थिक संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा, क्षेत्रीय GDP योगदान और रोजगार समावेश के बीच विरोधाभास को सर्वोत्तम रूप से दर्शाता है?

  • विनिर्माण क्षेत्र, रोजगार का प्रमुख स्रोत बन गया।
  • GDP की गिरावट में कृषि का योगदान रहा, लेकिन इसने अधिकांश रोजगार का समावेश किया।
  • GDP और रोजगार में सबसे अधिक योगदान उद्योग का था।
  • सेवाओं ने GDP वृद्धि और रोजगार सृजन में समान रूप से योगदान दिया।

Explanation:

  • 1991 से पूर्व और उसके आसपास भी भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य विरोधाभास यह था कि GDP में कृषि का योगदान लगातार घट रहा था, लेकिन इसके बावजूद इसने देश के अधिकांश कार्यबल (रोजगार) को समाहित किया हुआ था।
  • यह कृषि क्षेत्र में छिपी हुई बेरोजगारी (Prachann Bekari) और कम उत्पादकता को उजागर करता है।
  • संरचनात्मक विरोधाभास –
    • जबकि सेवा और उद्योग क्षेत्र ने GDP में बड़ा हिस्सा देना शुरू कर दिया था, वे उस अनुपात में रोजगार पैदा करने में असमर्थ थे।
    • यह आज भी भारतीय श्रम बाजार की एक प्रमुख विशेषता बनी हुई है।

भारत में निम्नलिखित में से कौन-सा औद्योगिक वित्तपोषण संस्थान 1990 में स्थापित किया गया था?

  • भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI)
  • भारतीय औद्योगिक वित्त निगम (IFCI)
  • इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (IDBI)
  • इंडस्ट्रियल क्रेडिट एंड इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (ICICI)

Explanation:

  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के संवर्धन, वित्तपोषण और विकास के लिए प्रमुख वित्तीय संस्थान के रूप में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI – Small Industries Development Bank of India) की स्थापना 2 अप्रैल 1990 को की गई थी।
  • इसका मुख्यालय लखनऊ, उत्तर प्रदेश में स्थित है।
  • अन्य वित्तीय संस्थान –
    • IFCI की स्थापना 1948 में देश के पहले विकास वित्त संस्थान के रूप में हुई थी।
    • ICICI और IDBI को बाद में यूनिवर्सल बैंकों में परिवर्तित कर दिया गया।

अनौपचारिक रोजगार की उच्च दर और सामाजिक सुरक्षा कवरेज की निम्न दर वाले देश में, गरीबी उन्मूलन और रोजगार के औपचारिकरण दोनों में कौन-सी नीति सबसे प्रभावी होने की संभावना है?

  • अनौपचारिक क्षेत्र में सामाजिक बीमा का विस्तार
  • अनियंत्रित मुक्त श्रम कानून
  • लक्षित खाद्य सब्सिडी
  • सार्वभौमिक मूल आय

Explanation:

  • जिस अर्थव्यवस्था में अनौपचारिक रोजगार बहुत अधिक हो और सामाजिक सुरक्षा का दायरा सीमित हो, वहां अनौपचारिक क्षेत्र में सामाजिक बीमा (Social Insurance) का विस्तार करना श्रमिकों को सुरक्षा देने और धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था के औपचारिकरण (Formalisation) की दिशा में सबसे प्रभावी नीति मानी जाती है।
  • यह श्रमिकों को स्वास्थ्य, पेंशन और दुर्घटना कवर प्रदान करती है।
  • श्रम सुधार तथ्य –
    • भारत सरकार ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए ई-श्रम (e-Shram) पोर्टल की शुरुआत की है।
    • आयुष्मान भारत और अटल पेंशन योजना जैसी योजनाएं इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

निम्नलिखित में से कौन-सा, भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्वीकरण का प्रभाव नहीं है?

  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को उदार बनाया गया
  • अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए विदेशी संस्थागत निवेशों को अधिक प्रतिबंधित करना
  • जुलाई, 1991 में रुपये का दो चरणों में लगभग बीस प्रतिशत अवमूल्यन
  • रुपये की आंशिक संपरिवर्तनीयता प्रणाली की शुरुआत

Explanation:

  • वैश्वीकरण का मुख्य उद्देश्य सीमाओं को खोलना और वैश्विक पूंजी प्रवाह को सुगम बनाना है; इसलिए विदेशी संस्थागत निवेशों (FIIs) को अधिक प्रतिबंधित करना वैश्वीकरण का प्रभाव या परिणाम नहीं बल्कि इसके विपरीत (संरक्षणवादी) कदम है।
  • इसके विपरीत, उदारीकरण के तहत FIIs और FDI के लिए नियमों को लचीला और उदार बनाया गया था।
  • वैश्वीकरण के प्रभाव –
    • रुपये की आंशिक और बाद में चालू खाता संपरिवर्तनीयता (Convertibility) की शुरुआत की गई।
    • विदेशी मुद्रा भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

विकसित देशों में, कुल उत्पादन के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा क्षेत्र सर्वाधिक महत्वपूर्ण हो गया है?

  • तृतीयक क्रियाकलाप
  • प्राथमिक क्रियाकलाप
  • पंचम क्रियाकलाप
  • द्वितीयक क्रियाकलाप

Explanation:

  • विकसित अर्थव्यवस्थाओं (Developed Economies) में कुल उत्पादन, राष्ट्रीय आय और रोजगार के सृजन के मामले में तृतीयक क्रियाकलाप (Tertiary Sector / सेवा क्षेत्र) सबसे अधिक महत्वपूर्ण और प्रमुख क्षेत्र बन चुका है।
  • वहां की जीडीपी का 70% से अधिक हिस्सा सेवा क्षेत्र से ही आता है।
  • आर्थिक विकास के चरण –
    • प्राथमिक से द्वितीयक और फिर तृतीयक (और चतुर्थक) क्षेत्र की ओर संक्रमण किसी भी उन्नत अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषता है।
    • सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाएं और पर्यटन इसके प्रमुख स्तंभ हैं।

1991 के सुधारों के दौरान निम्नलिखित में से किसके लिए, औद्योगिक लाइसेंस में छूट नहीं दी गई थी?

  • कोयला
  • एल्कोहॉल
  • इस्पात
  • खाद्य प्रसंस्करण

Explanation:

  • 1991 की नई औद्योगिक नीति के तहत अधिकांश उद्योगों से लाइसेंस राज समाप्त कर दिया गया था, लेकिन जनस्वास्थ्य, सुरक्षा और पर्यावरणीय कारणों से कुछ चुनिंदा उद्योगों (जैसे तंबाकू, खतरनाक रसायन, रक्षा उपकरण, और अल्कोहल / मदिरा उत्पाद) के लिए औद्योगिक लाइसेंस अनिवार्य रखा गया था, यानी इनमें छूट नहीं दी गई थी।
  • एल्कोहॉल (शराब) का उत्पादन सामाजिक और स्वास्थ्य नियमों के अंतर्गत कड़े नियंत्रण में रहता है।
  • औद्योगिक लाइसेंसिंग तथ्य –
    • वर्तमान में केवल कुछ ही रणनीतिक और खतरनाक उद्योगों को छोड़कर बाकी सभी को लाइसेंस मुक्त कर दिया गया है।
    • यह नीति उदारीकरण का एक प्रमुख मील का पत्थर थी।

निम्नलिखित में से कौन-सा क्षेत्र, अमेरिका (US) अर्थव्यवस्था में सर्वाधिक योगदान देता है?

  • चतुर्थक क्रियाकलाप
  • द्वितीयक क्रियाकलाप
  • तृतीयक क्रियाकलाप
  • प्राथमिक क्रियाकलाप

Explanation:

  • संयुक्त राज्य अमेरिका (US) जैसी अत्यधिक विकसित और उन्नत अर्थव्यवस्था में कुल आर्थिक उत्पादन और रोजगार में तृतीयक क्रियाकलाप (Tertiary Sector / सेवा क्षेत्र) का योगदान सर्वाधिक होता है।
  • इसमें वित्त, बीमा, रियल एस्टेट, स्वास्थ्य सेवाएं और सूचना प्रौद्योगिकी प्रमुख रूप से शामिल हैं।
  • अमेरिकी अर्थव्यवस्था –
    • अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जिसकी जीडीपी का लगभग 80% हिस्सा सेवा क्षेत्र से उत्पन्न होता है।
    • यह पोस्ट-इंडस्ट्रियल (औद्योगिक-ोत्तर) अर्थव्यवस्था का सर्वोत्तम उदाहरण है।

निम्नलिखित में से कौन-सी एक तृतीयक गतिविधि है?

  • जूते चमकाना
  • खनिज निष्कर्षण
  • इस्पात निर्माण
  • धातु कर्मण

Explanation:

  • जूते चमकाना (या वैयक्तिक सेवाएं) एक प्रकार की तृतीयक गतिविधि (Tertiary Activity / सेवा क्षेत्र) है, जो व्यक्तिगत और व्यावसायिक सेवाएं प्रदान करने से संबंधित है।
  • खनिज निष्कर्षण प्राथमिक गतिविधि है, जबकि इस्पात निर्माण और धातु कर्मण द्वितीयक (विनिर्माण) गतिविधियां हैं।
  • मानव भूगोल और अर्थव्यवस्था में सेवाओं को विभिन्न श्रेणियों (जैसे तृतीयक, चतुर्थक) में बांटा जाता है।

पर्यटन को किस प्रकार की गतिविधि के रूप में वर्गीकृत किया जाता है?

  • तृतीयक
  • प्राथमिक
  • द्वितीयक
  • चतुर्थक

Explanation:

  • पर्यटन (Tourism) को मुख्य रूप से एक तृतीयक गतिविधि (Tertiary Activity) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, क्योंकि यह यात्रा, आतिथ्य, मनोरंजन और अन्य सेवा आधारित व्यवसायों से जुड़ी होती है।
  • यह दुनिया के सबसे बड़े सेवा क्षेत्रों में से एक है जो बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करता है।
  • पर्यटन क्षेत्र से जुड़े तथ्य –
    • यह विदेशी मुद्रा अर्जित करने का एक प्रमुख साधन है।
    • इको-पर्यटन और सांस्कृतिक पर्यटन इसके लोकप्रिय रूप हैं।

विस्तृत और गहन कृषि प्रणालियों के बीच मुख्य अंतर क्या है?

  • प्रयुक्त सिंचाई
  • बीज का आकार
  • मशीनरी प्रकार
  • प्रति भूमि इकाई उत्पादन

Explanation:

  • विस्तृत कृषि (Extensive Farming) और गहन कृषि (Intensive Farming) प्रणालियों के बीच सबसे बड़ा बुनियादी अंतर प्रति भूमि इकाई उत्पादन (Yield per unit of land) का होता है।
  • गहन कृषि में कम भूमि पर अधिक श्रम, पूंजी और उर्वरकों का उपयोग करके प्रति एकड़ अधिक उत्पादन लिया जाता है, जबकि विस्तृत कृषि में बड़े भूभाग पर कम श्रम का उपयोग होता है।
  • कृषि प्रणालियों के प्रकार –
    • गहन निर्वाह कृषि घनी आबादी वाले क्षेत्रों (जैसे दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया) में की जाती है।
    • विस्तृत वाणिज्यिक अनाज कृषि कम आबादी वाले आंतरिक अक्षांशों के घास के मैदानों में की जाती है।

निम्नलिखित में से किसे भारत में LPG सुधारों का लाभ नहीं माना जाता है?

  • निजी क्षेत्र का विस्तार
  • व्यापार प्रतिबंधों में वृद्धि
  • उच्च प्रौद्योगिकियों को अपनाना
  • अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियों में वृद्धि

Explanation:

  • 1991 के उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) सुधारों का मुख्य उद्देश्य व्यापार को सुगम बनाना और प्रतिबंधों को हटाना था; इसलिए व्यापार प्रतिबंधों में वृद्धि इसका परिणाम या लाभ नहीं बल्कि इसके विपरीत (संरक्षणवादी) प्रक्रिया है।
  • LPG सुधारों ने निजी क्षेत्र के विस्तार, आधुनिक तकनीकी समावेश और वैश्विक एकीकरण को बढ़ावा दिया।

समकालीन काल में कौन-सी प्रक्रिया, वैश्विक स्तर पर देशों के आर्थिक एकीकरण के लिए उत्तरदायी है?

  • औद्योगीकरण (Industrialisation)
  • विश्व-स्थानीय-सम्मिश्रण (Glocalisation)
  • पारराष्ट्रीयकरण (Transnationalisation)
  • वैश्वीकरण (Globalisation)

Explanation:

  • समकालीन समय में दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्थाओं, समाजों और संस्कृतियों के परस्पर जुड़ाव और आर्थिक एकीकरण के लिए मुख्य रूप से वैश्वीकरण (Globalisation) उत्तरदायी है।
  • इसके तहत वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और श्रम का स्वतंत्र प्रवाह देशों की सीमाओं के पार होता है।

निम्नलिखित में से कौन-सा सिद्धांत, दादाभाई नौरोजी की 1901 में प्रकाशित पुस्तक ‘पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल in इंडिया’ में प्रतिपादित किया गया था?

  • सहायक गठबंधन सिद्धांत
  • दो राष्ट्र सिद्धांत
  • व्यपगत सिद्धांत
  • धन-निष्कासन सिद्धांत

Explanation:

  • दादाभाई नौरोजी (जिन्हें ‘ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया’ कहा जाता है) की 1901 की प्रसिद्ध पुस्तक में धन-निष्कासन सिद्धांत (Drain of Wealth Theory) का प्रतिपादन किया गया था।
  • इस सिद्धांत के माध्यम से उन्होंने यह समझाया था कि कैसे ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन भारत के धन और संसाधनों को बिना किसी उचित प्रतिफल के ब्रिटेन ले जा रहा है, जो भारत की गरीबी का प्रमुख कारण था।

निम्नलिखित में से कौन-सा कारक उत्तर-सुधार युग में रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा समूह जैसी भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उदय में उल्लेखनीय रूप से योगदान देता है?

  • सरकारी सब्सिडी जारी रहना
  • राष्ट्रीयकृत क्षेत्रों का विस्तार
  • कृषि निर्यात में वृद्धि
  • वैश्वीकरण और निजीकरण

Explanation:

  • वर्ष 1991 के बाद के सुधार युग (Post-Reform Era) में वैश्वीकरण और निजीकरण (Globalisation and Privatisation) की नीतियों ने भारतीय कॉरपोरेट जगत को वैश्विक बाजारों में विस्तार करने, विदेशी पूंजी जुटाने और घरेलू स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अवसर दिया, जिससे बड़ी भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियों का उदय हुआ।
  • इसने लाइसेंस राज की बाधाओं को समाप्त किया।

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारत में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भूमिका का सर्वोत्तम वर्णन करता है?

  • वे किसानों को बड़े पैमाने पर औद्योगिक ऋण प्रदान करते हैं।
  • वे सरकारी स्वामित्व वाले सहकारी बैंकों के रूप में कार्य करते हैं।
  • वे भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालयों के रूप में कार्य करते हैं।
  • वे मितव्ययिता को प्रोत्साहित करते हैं और गरीब ग्रामीण महिलाओं को सूक्ष्म-ऋण सुविधाएं प्रदान करते हैं।

Explanation:

  • भारत में स्वयं सहायता समूह (Self-Help Groups – SHGs) मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों और विशेषकर महिलाओं के बीच आपसी बचत (मितव्ययिता) को बढ़ावा देते हैं और बिना भारी औपचारिक गारंटी के उन्हें सूक्ष्म-ऋण (Micro-finance) सुविधाएं प्रदान करते हैं।
  • यह महिला सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) का एक अत्यंत सफल मॉडल रहा है।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) इस क्षेत्र को बड़े पैमाने पर समर्थन देता है।

भारत में, केंद्र-राज्य संबंधों में वित्त आयोग की मुख्य भूमिका क्या है?

  • GST में राज्यों के हिस्से का आवंटन करना
  • केंद्र और राज्यों के बीच करों से प्राप्त शुद्ध आगमों के वितरण की अनुशंसा करना
  • राज्य के बजट को स्वीकृति देना
  • आर्थिक विकास निधियाँ की योजना बनाना

Explanation:

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत गठित वित्त आयोग (Finance Commission) की मुख्य संवैधानिक भूमिका केंद्र और राज्यों के बीच करों से प्राप्त शुद्ध आगमों (Net Proceeds of Taxes) के ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज वितरण (Devolution) की सिफारिश करना है।
  • यह एक अर्ध-न्यायिक निकाय है जो हर पांच वर्ष पर राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट सौंपता है।
  • वित्त आयोग से जुड़े तथ्य –
    • पहले वित्त आयोग के अध्यक्ष के.सी. नियोगी थे।
    • यह केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संतुलन स्थापित करने का मुख्य माध्यम है।

द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956) के अनुसार, भारतीय सरकार ने अर्थव्यवस्था के किन क्षेत्रकों को सीधे विकसित और प्रबंधित करने का निर्णय लिया?

  • भारी उद्योग
  • कृषि क्षेत्रक
  • सेवा क्षेत्रक
  • लघु व्यवसाय

Explanation:

  • पीसी महालनोबिस मॉडल पर आधारित द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-61) का मुख्य जोर देश में तीव्र औद्योगीकरण और विशेष रूप से भारी उद्योगों (Heavy Industries) तथा पूंजीगत वस्तुओं के विकास पर था, जिन्हें सरकार ने सीधे अपने नियंत्रण में विकसित करने का निर्णय लिया।
  • इस योजना ने सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector) को अर्थव्यवस्था की कमांडिंग हाइट्स दीं।

भारत में गेहूँ मुख्य रूप से किस मौसम की फसल है?

  • जायद
  • खरीफ
  • रबी
  • मानसून-पूर्व

Explanation:

  • गेहूँ भारत में एक प्रमुख रबी की फसल (Rabi Crop) है, जिसकी बुआई सर्दियों की शुरुआत (अक्टूबर-नवंबर) में की जाती है और कटाई गर्मियों की शुरुआत (मार्च-अप्रैल) में होती है।
  • इसे बढ़ने के लिए ठंडी जलवायु और पकने के समय तेज धूप की आवश्यकता होती है।

भारत ने 1947 के बाद विभिन्न क्षेत्रकों के विकास को संतुलित करने के लिए कौन-सी आर्थिक प्रणाली अपनाई थी?

  • शुद्ध समाजवाद
  • मिश्रित अर्थव्यवस्था
  • निर्देशित अर्थव्यवस्था
  • शुद्ध पूँजीवाद

Explanation:

  • स्वतंत्रता के पश्चात भारत ने पूंजीवादी और समाजवादी दोनों अर्थव्यवस्थाओं की विशेषताओं को समाहित करते हुए मिश्रित अर्थव्यवस्था (Mixed Economy) के मॉडल को अपनाया, जिसमें सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों को सह-अस्तित्व के साथ काम करने की अनुमति दी गई।

निम्नलिखित में से कौन-सा, भारत की मौद्रिक प्रणाली अवसंरचना का एक प्रमुख तत्व है?

  • पावर स्टेशन (Power station)
  • रेलवे (Railway)
  • बैंक (Bank)
  • सड़कें (Roads)

Explanation:

  • दिए गए विकल्पों में बैंक (Banks) मौद्रिक प्रणाली (Monetary System) और वित्तीय अवसंरचना का मुख्य अंग हैं, जो मुद्रा के प्रवाह, साख सृजन और वित्तीय लेन-देन को संचालित करते हैं।
  • पावर स्टेशन और सड़कें भौतिक अवसंरचना के अंतर्गत आती हैं।

निम्नलिखित में से कौन-सा कारक, भारत में कृषि की विविधता में योगदान नहीं देता है?

  • एकसमान भू-आकृति
  • मृदा के प्रकार
  • सिंचाई की उपलब्धता
  • जलवायु

Explanation:

  • एकसमान भू-आकृति (Uniform Topography) कृषि में विविधता पैदा नहीं करती, बल्कि इसके विपरीत भारत में भू-आकृति में विविधता (जैसे पहाड़, पठार, मैदान) पाई जाती है जो कृषि स्वरूप को प्रभावित करती है।
  • मृदा के प्रकार, जलवायु और सिंचाई की उपलब्धता कृषि विविधता के प्रमुख निर्धारक हैं।

1991 के प्रलेख में आर्थिक नीति के कौन-से तीन उद्देश्य सूचीबद्ध हैं?

  • संरक्षणवाद, विनियमन, सार्वजनिक स्वामित्व
  • राष्ट्रीयकरण, अविनियमन, विकेंद्रीकरण
  • बाजार उदारीकरण, व्यापार प्रतिबंध, राजकीय नियंत्रण
  • उदारीकरण, वैश्वीकरण, निजीकरण

Explanation:

  • वर्ष 1991 के आर्थिक सुधारों (New Economic Policy) का मुख्य आधार उदारीकरण (Liberalisation), निजीकरण (Privatisation) और वैश्वीकरण (Globalisation) – LPG था, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजार के लिए खोल दिया।

ग्रामीण विकास किन विषयों से संबंधित है?

  • विदेशी व्यापार संबंधों में सुधार
  • औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार
  • आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय
  • महानगर क्षेत्रों का विकास

Explanation:

  • ग्रामीण विकास एक व्यापक प्रक्रिया है जो मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय (Economic Development and Social Justice) को सुनिश्चित करने से जुड़ी है, जिसमें गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं।

1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भारत के कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में कौन-सा प्रमुख परिवर्तन आया?

  • सरकार ने निजी उद्योगों पर नियंत्रण बढ़ा दिया।
  • कृषि राष्ट्रीय आय का एकमात्र स्रोत बन गई।
  • अधिक निजी कंपनियों और विदेशी निवेश की अनुमति दी गई।
  • केवल कृषि को महत्व दिया गया, उद्योग को नहीं।

Explanation:

  • 1991 के सुधारों के बाद औद्योगिक और आर्थिक मोर्चे पर लाइसेंस राज को समाप्त कर अधिक निजी कंपनियों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी गई, जिससे बाजार आधारित प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिला।

भारत में बड़े शहरों में तृतीयक गतिविधियों का अनुपात अधिक क्यों होता है?

  • प्राथमिक संसाधनों की कमी के कारण
  • उपजाऊ भूमि के कारण
  • शहरी समूहन और सेवाओं की मांग के कारण
  • खनन कार्यों के कारण

Explanation:

  • बड़े शहरों में जनसंख्या घनत्व, आर्थिक गतिविधियों के संकेन्द्रण और व्यावसायिक आवश्यकताओं के कारण शहरी समूहन (Urban Agglomeration) और विभिन्न सेवाओं (बैंकिंग, परिवहन, व्यापार, आईटी) की उच्च मांग होती है, जिससे तृतीयक क्षेत्र का विस्तार होता है।

मौद्रिक नीति का प्राथमिक उद्देश्य ______ है।

  • मूल्य स्थिरता बनाए रखना
  • रोजगार को अधिकतम करना
  • करों का अपवंचन करना
  • चुनाव के लिए धन जुटाना

Explanation:

  • केंद्रीय बैंक (RBI) द्वारा संचालित मौद्रिक नीति (Monetary Policy) का मुख्य और प्राथमिक उद्देश्य अर्थव्यवस्था में आर्थिक विकास के साथ-साथ मूल्य स्थिरता बनाए रखना (Price Stability) और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना है।

1991 के बाद राजकोषीय नीति सुधारों का प्राथमिक लक्ष्य ______ था।

  • कर संग्रह को रोकना
  • निजी बैंकों पर प्रतिबंध लगाना
  • बजटीय घाटे को बढाना
  • राजकोषीय घाटे और मुद्रास्फीति को कम करना

Explanation:

  • 1991 के संकट के बाद राजकोषीय सुधारों का मुख्य उद्देश्य सरकारी खर्चों को तर्कसंगत बनाना और राजकोषीय घाटे तथा उच्च मुद्रास्फीति को कम करना था, ताकि व्यापक आर्थिक स्थिरता (Macroeconomic Stability) हासिल की जा सके।
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