SCIENCE

अंगोरा ऊन (Angora Wool) निम्नलिखित में से किस जीव से प्राप्त की जाती है?

  • खरगोश (Rabbit)
  • अंगोरा बकरी (Angora Goat)
  • याक (Yak)
  • ऊंट (Camel)

Explanation:

  • अंगोरा ऊन विशेष रूप से ‘अंगोरा खरगोश’ (Angora Rabbit) से प्राप्त की जाती है, जो अपनी अत्यधिक कोमलता और गर्माहट के लिए प्रसिद्ध है ।
  • ध्यान दें: अंगोरा बकरी से प्राप्त ऊन को ‘मोहेर’ (Mohair) कहा जाता है, अंगोरा ऊन नहीं ।

अंगोरा बकरी (Angora Goat) से प्राप्त होने वाले अत्यंत चमकदार, मजबूत और लचकदार रेशे (ऊन) को किस नाम से जाना जाता है?

  • मोहेर (Mohair)
  • पश्मीना (Pashmina)
  • कैशमीरे (Cashmere)
  • शहतूश (Shahtoosh)

Explanation:

  • अंगोरा बकरी से मोहेर (Mohair) नामक ऊन प्राप्त होती है ।
  • यह ऊन अपने टिकाऊपन, चमक और डाई (रंग) को आसानी से सोखने के गुण के लिए जानी जाती है ।

विश्व प्रसिद्ध ‘पश्मीना ऊन’ (Pashmina Wool) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए तथा सत्य कूट का चयन कीजिए:
1. यह लद्दाख के उच्च हिमाच्छादित क्षेत्रों में पाली जाने वाली ‘चंगथांगी’ (Changthangi) नस्ल की बकरी से प्राप्त होती है ।
2. यह बकरी के शरीर पर उगने वाले ‘अंडरकोट’ (Undercoat) यानी बहुत ही बारीक और मुलायम आंतरिक बालों से प्राप्त की जाती है ।
3. पश्मीना रेशे का व्यास मानव बाल की तुलना में लगभग 6 गुना पतला होता है ।

  • 1, 2 और 3 सभी
  • केवल 1 और 2
  • केवल 2 और 3
  • केवल 1 और 3

Explanation:

  • तीनों कथन सत्य हैं; पश्मीना ऊन चंगथांगी (पाश्मीना) बकरी से प्राप्त होती है, जो अत्यधिक महीन (12-15 माइक्रोन) और गर्म होती है ।

खरगोश से प्राप्त ऊन (Angora Wool) की मुख्य शारीरिक/जैविक विशेषताओं के संदर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?

  • यह अत्यधिक हल्की, खोखली (Hollow fiber) और उच्च ऊष्मीय रोधी (High Insulation) क्षमता वाली होती है
  • यह बहुत भारी और खुरदरी होती है जिसका उपयोग केवल कालीन बनाने में होता है
  • इसमें प्राकृतिक रूप से जल को सोखने की क्षमता शून्य होती है
  • इसे केवल नर खरगोशों से ही प्राप्त किया जा सकता है

Explanation:

  • अंगोरा खरगोश के बाल अंदर से खोखले (Hollow core) होते हैं, जिससे इसमें हवा फंस जाती है और यह भेड़ की ऊन की तुलना में काफी हल्की और अधिक गर्म होती है ।

‘कैशमीरे ऊन’ (Cashmere Wool) मुख्य रूप से किस जानवर की विभिन्न नस्लों से प्राप्त की जाती है?

  • बकरी (Goat)
  • खरगोश (Rabbit)
  • भेड़ (Sheep)
  • लामा (Llama)

Explanation:

  • कैशमीरे (Cashmere) एक अत्यंत लक्जरी ऊन है जो मुख्य रूप से मध्य और पूर्वी एशिया (चीन, मंगोलिया, भारत) में पाई जाने वाली कैशमीयर बकरियों के सॉफ्ट अंडरकोट से प्राप्त होती है ।

बकरी से प्राप्त होने वाली ऊन और उसके स्रोत/नस्ल के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?

  • मोहेर – अंगोरा बकरी
  • अंगोरा ऊन – चंगथांगी बकरी
  • पश्मीना – खरगोश
  • कैशमीरे – याक

Explanation:

  • अंगोरा बकरी से मोहेर प्राप्त होता है ।
  • अंगोरा ऊन खरगोश से, पश्मीना चंगथांगी बकरी से, और कैशमीरे बकरी से प्राप्त होती है ।

भारत में ‘अंगोरा खरगोश’ (Angora Rabbit) का व्यावसायिक पालन (Rabbit Farming / Cuniculture) मुख्य रूप से किन राज्यों में बहुतायत से किया जाता है?

  • हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर
  • राजस्थान और गुजरात
  • तमिलनाडु और केरल
  • ओडिशा और पश्चिम बंगाल

Explanation:

  • अंगोरा खरगोश ठंडे पहाड़ी इलाकों में बेहतर तरीके से पनपते हैं, इसलिए भारत में हिमाचल प्रदेश (जैसे कुल्लू, कांगड़ा), उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में इनका व्यावसायिक पालन होता है ।

बकरियों से ऊन/रेशे प्राप्त करने की प्रक्रिया के संदर्भ में ‘कोंबिंग’ (Combing) तकनीक का प्रयोग मुख्य रूप से किस ऊन को निकालने के लिए किया जाता है?

  • पश्मीना एवं कैशमीरे (Pashmina & Cashmere)
  • मेरिनो ऊन
  • कारपेट ऊन
  • शहतूश ऊन

Explanation:

  • बसंत ऋतु में जब बकरियों के बाल स्वाभाविक रूप से झड़ने लगते हैं, तब विशेष कंधी (Comb) का उपयोग करके उनके शरीर से मुलायम अंडरकोट बालों को निकाला जाता है, जिसे ‘कोंबिंग’ कहते हैं ।

अंगोरा खरगोश से ऊन/बाल प्राप्त करने की आवृत्ति (Frequency) सामान्यतः कितनी होती है?

  • प्रति वर्ष 3 से 4 बार (हर 80-90 दिन में)
  • जीवन में केवल एक बार
  • प्रत्येक 2 वर्ष में एक बार
  • प्रति वर्ष केवल एक बार (शीत ऋतु में)

Explanation:

  • अंगोरा खरगोश के बाल बहुत तेजी से बढ़ते हैं, इसलिए इनसे वर्ष में 3 से 4 बार कतरन (Shearing) या बाल कंधी करके (Plucking/Combing) ऊन एकत्र की जाती है ।

‘गद्दी’ (Gaddi) और ‘भाकरवाल’ (Bakharwal) बकरियों की नस्लें, जो आंशिक रूप से ऊन और रफ बालों के उत्पादन के लिए जानी जाती हैं, भारत के किस क्षेत्र से संबंधित हैं?

  • उत्तर-पश्चिम हिमालयी क्षेत्र (हिमाचल प्रदेश एवं जम्मू-कश्मीर)
  • शुष्क पश्चिमी राजस्थान
  • दक्कन का पठार
  • पूर्वी तटीय मैदान

Explanation:

  • गद्दी और भाकरवाल मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश की घुमंतू जनजातियों द्वारा पाली जाने वाली बकरियां/भेड़ें हैं, जिनसे ऊन और मोटे बाल प्राप्त होते हैं ।

टेक्सटाइल उद्योग में ‘मोहेर’ (Mohair) ऊन की कौन-सी विशेषता इसे अन्य प्रकार की ऊन से अलग और मूल्यवान बनाती है?

  • इसमें ‘सिल्क’ जैसी चमक होती है तथा यह शिकन-रोधी (Wrinkle-resistant) होती है
  • यह जल में पूरी तरह घुलनशील होती है
  • यह केवल काले रंग में ही पाई जाती है
  • यह बहुत भारी होती है और इसमें लचक बिल्कुल नहीं होती

Explanation:

  • मोहेर को प्रायः ‘डायमंड फाइबर’ (Diamond Fiber) कहा जाता है क्योंकि इसमें प्राकृतिक रेशम जैसी चमक, उच्च स्थायित्व और शिकन न पड़ने का गुण होता है ।

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए तथा असत्य कथन का चयन कीजिए:

  • अंगोरा ऊन अंगोरा बकरी से प्राप्त होती है और यह बहुत खुरदरी होती है ।
  • पश्मीना शॉल का निर्माण चंगथांगी बकरी के बालों से होता है ।
  • खरगोश की ऊन का उपयोग मुख्य रूप से स्वेटर, टोपी और दस्ताने जैसे प्रीमियम विंटर वियर बनाने में होता है ।
  • अंगोरा खरगोश की प्रमुख प्रजातियों में फ्रेंच, इंग्लिश, जायंट और सैटिन अंगोरा शामिल हैं ।

Explanation:

  • पहला कथन असत्य है क्योंकि अंगोरा ऊन खरगोश से प्राप्त होती है और यह अत्यंत कोमल होती है (न कि खुरदरी) ।

व्यावसायिक स्तर पर अंगोरा खरगोश की किस नस्ल से सर्वाधिक मात्रा में ऊन (Wool Yield) प्राप्त होती है?

  • जायंट अंगोरा (Giant Angora)
  • इंग्लिश अंगोरा (English Angora)
  • फ्रेंच अंगोरा (French Angora)
  • सैटिन अंगोरा (Satin Angora)

Explanation:

  • जायंट अंगोरा खरगोश की सबसे बड़ी नस्ल है, जिससे प्रति वर्ष सबसे अधिक मात्रा में (लगभग 1 से 1.2 किग्रा तक) ऊन प्राप्त होती है ।

बकरी से प्राप्त होने वाले रेशे ‘कैशमीरे’ (Cashmere) के विश्व में सबसे बड़े उत्पादक देश कौन-से हैं?

  • चीन और मंगोलिया
  • भारत और पाकिस्तान
  • ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैण्ड
  • ब्राजील और अर्जेंटीना

Explanation:

  • विश्व के कुल कैशमीरे उत्पादन का लगभग 85% से अधिक हिस्सा चीन और मंगोलिया से आता है ।

खरगोश की ऊन (Angora Wool) को धागा बनाते समय अक्सर भेड़ की ऊन या सिंथेटिक रेशे (जैसे एक्रिलिक) के साथ क्यों मिलाया (Blend) जाता है?

  • क्योंकि अंगोरा का रेशा बहुत चिकना और छोटा होता है, जिससे अकेले इसकी कताई (Spinning) करना कठिन होता है
  • क्योंकि खरगोश की ऊन बहुत जहरीली होती है
  • ताकि इसकी गर्माहट पूरी तरह समाप्त हो जाए
  • क्योंकि खरगोश की ऊन पानी में गल जाती है

Explanation:

  • अंगोरा रेशे अत्यधिक चिकने और कम लोचदार (Low elasticity) होते हैं, इसलिए धागे में मजबूती और स्पेनेबिलिटी लाने के लिए इसे प्रायः अन्य रेशों के साथ ब्लेंड किया जाता है ।

भारत की ‘सिक्किम’ और ‘पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग)’ के पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाने वाली किस बकरी की नस्ल से महीन ऊन/बाल प्राप्त होते हैं?

  • सिंघल/सिक्किम बकरी (Singhale)
  • मारवाड़ी
  • जमुनापारी
  • सिरोही

Explanation:

  • पूर्वी हिमालयी क्षेत्रों (सिक्किम, दार्जिलिंग) में पाई जाने वाली सिंघल (Singhale) नस्ल की बकरियों से भी स्थानीय स्तर पर रेशे/ऊन प्राप्त किए जाते हैं ।

बकरी की त्वचा पर पाए जाने वाले दो प्रकार के बालों के संदर्भ में, ‘गार्ड हेयर’ (Guard Hair) और ‘अंडरकोट’ (Undercoat) में मुख्य अंतर क्या है?

  • गार्ड हेयर बाहरी मोटे/खुरदरे बाल होते हैं, जबकि अंडरकोट आंतरिक अत्यधिक मुलायम और गर्म बाल होते हैं
  • गार्ड हेयर से पश्मीना बनता है और अंडरकोट से रसियां बनती हैं
  • गार्ड हेयर केवल सर्दियों में उगते हैं और अंडरकोट केवल गर्मियों में
  • दोनों में कोई अंतर नहीं होता है

Explanation:

  • बकरी के बाहरी बाल (Guard hair) मोटे और रफ होते हैं जिन्हें हटा दिया जाता है (Dehairing), और अंदर के महीन बालों (Undercoat) से पश्मीना/कैशमीरे ऊन तैयार होती है ।

पश्मीना और कैशमीरे ऊन प्रसंस्करण में ‘डीहेयरिंग’ (Dehairing) प्रक्रिया का क्या उद्देश्य है?

  • मुलायम अंडरकोट (Fleece) से मोटे और खुरदरे गार्ड बालों (Guard Hairs) को अलग करना
  • ऊन को रासायनिक रंगों से धोना
  • धागे की बुनाई करना
  • बकरी के शरीर से बालों को शेव करना

Explanation:

  • Dehairing एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसमें मशीन या हाथ से मोटे गार्ड बालों को महीन पश्मीना रेशों से अलग किया जाता है ताकि गुणवत्ता बनी रहे ।

बकरी से प्राप्त ‘मोहेर’ (Mohair) ऊन का मूल उत्पत्ति स्थल कौन-सा देश माना जाता है, जहाँ से अंगोरा बकरी की शुरुआत हुई?

  • तुर्की (Turkey – अंकारा क्षेत्र)
  • ईरान
  • नेपाल
  • दक्षिण अफ्रीका

Explanation:

  • अंगोरा बकरी की उत्पत्ति तुर्की के अंकारा (प्राचीन नाम अंगोरा) क्षेत्र में हुई थी । वर्तमान में दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका (टेक्सास) भी इसके बड़े उत्पादक हैं ।

खरगोश की ऊन (Angora) और बकरी की ऊन (Pashmina/Mohair) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए तथा सत्य कूट चुनिए:
1. दोनों ही पशुजन्य प्राकृतिक प्रोटीन रेशे (Protein Fibers) हैं ।
2. दोनों ही रेशे अत्यधिक गर्माहट और प्रीमियम श्रेणी के परिधानों के लिए विश्वभर में जाने जाते हैं ।
3. दोनों को मुख्य रूप से ठंडे/शीतोष्ण जलवायु वाले क्षेत्रों में उत्पादित किया जाता है ।

  • 1, 2 और 3 सभी
  • केवल 1 और 2
  • केवल 2 और 3
  • केवल 1 और 3

Explanation:

  • तीनों कथन सत्य हैं; दोनों ही केराटिन (Protein) से बने प्राकृतिक पशु रेशे हैं जो उत्कृष्ट ऊष्मीय गुण और कोमलता प्रदान करते हैं ।

भैंस की प्रसिद्ध नस्ल ‘मुर्राह’ (Murrah) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

  • इसके दूध में वसा (Fat) की मात्रा अधिक होती है तथा इसके सींग जलेबी के आकार की भांति मुड़े (Tightly curled) होते हैं
  • यह मुख्य रूप से दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में पाई जाने वाली द्विकाजी नस्ल है
  • इसके शरीर का रंग पूर्णतः सफेद और धब्बेदार होता है
  • यह बकरी की एक प्रसिद्ध दुधारू नस्ल है

Explanation:

  • मुर्राह भारत की सबसे प्रसिद्ध दुधारू भैंस की नस्ल है, जिसे ‘ब्लैक गोल्ड’ भी कहा जाता है ।
  • इसके सींग मुड़े हुए (Jalebi shaped) होते हैं तथा इसके दूध में वसा (Fat) की मात्रा लगभग 7-8% तक होती है ।

भैंस की किस नस्ल के दूध में सर्वाधिक वसा (Fat Percentage – लगभग 12-13%) पाया जाता है, जिसका शरीर तांबे जैसे रंग (Copper colored) का होता है?

  • भदावरी (Bhadawari)
  • जाफराबादी (Jafarabadi)
  • सुर्ती (Surti)
  • नीली रावी (Nili Ravi)

Explanation:

  • भदावरी नस्ल की भैंस उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के चंबल क्षेत्र में पाई जाती है ।
  • इसके शरीर का रंग तांबे जैसा (Copper red) होता है और इसके दूध में सभी भैंसों की नस्लों की तुलना में सर्वाधिक वसा (Fat) पाया जाता है ।

गुजरात के काठियावाड़/गिर जंगल क्षेत्र से संबंधित भैंस की सबसे भारी और विशालकाय नस्ल कौन-सी है, जिसे ‘मिनी एलीफेंट’ भी कहा जाता है?

  • जाफराबादी (Jafarabadi)
  • महसाना (Mehsana)
  • नागपुरी (Nagpuri)
  • तोड़ा (Toda)

Explanation:

  • जाफराबादी भैंस की सबसे भारी और शक्तिशाली नस्ल मानी जाती है ।
  • इसके सींग चौड़े, चपटे और ढीले लटके हुए होते हैं ।

भारत की देशी गायों (Indigenous Cattle / Zebu) और विदेशी गायों (Exotic Cattle) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए तथा सत्य कूट का चयन कीजिए:
1. भारतीय देशी गायों की पीठ पर कुबड़ (Hump) पाया जाता है और इनका वैज्ञानिक नाम ‘बॉस इंडिकस’ (Bos indicus) है ।
2. विदेशी नस्ल की गायों में कुबड़ नहीं होता और इनका वैज्ञानिक नाम ‘बॉस टॉरस’ (Bos taurus) है ।
3. गिर, साहीवाल और रेड सिंधी भारत की प्रमुख भारवाही (Draught) गाय की नस्लें हैं ।

  • केवल 1 और 2
  • केवल 2 और 3
  • केवल 1 और 3
  • 1, 2 और 3 सभी

Explanation:

  • कथन 1 और 2 पूरी तरह सत्य हैं ।
  • कथन 3 असत्य है क्योंकि गिर, साहीवाल और रेड सिंधी भारत की दुधारू (Milch) नस्लें हैं, न कि भारवाही नस्लें ।

भारत में गाय की सर्वश्रेष्ठ दुधारू नस्ल ‘साहीवाल’ (Sahiwal) का मूल उत्पत्ति स्थान मुख्य रूप से कौन-सा माना जाता है?

  • मांटगोमरी जिला (वर्तमान पाकिस्तान) / पंजाब क्षेत्र
  • काठियावाड़ (गुजरात)
  • रोहतक (हरियाणा)
  • तमिलनाडु का तटीय क्षेत्र

Explanation:

  • साहीवाल भारतीय गायों में सर्वाधिक दूध देने वाली नस्ल है ।
  • इसकी त्वचा अत्यधिक ढीली होने के कारण इसे ‘लोला’ (Lola) या ‘मुलतानी’ भी कहा जाता है ।

गाय की उस प्रसिद्ध नस्ल का नाम बताइए जो गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र की है, जिसकी लाल-भूरी त्वचा, लटके हुए कान और अर्धचंद्र जैसे सींग होते हैं?

  • गिर (Gir)
  • थारपारकर (Tharparkar)
  • कांकरेज (Kankrej)
  • राठी (Rathi)

Explanation:

  • गिर गाय भारत की एक अत्यंत प्रसिद्ध दुधारू नस्ल है, जिसे ब्राजील सहित कई देशों में निर्यात किया गया है ।
  • इसके कान लंबे और लटके हुए तथा माथा उभरा हुआ होता है ।

राजस्थान के थार मरुस्थल क्षेत्र से संबंधित गाय की कौन-सी नस्ल अपने उच्च रोग प्रतिरोधक क्षमता और विकट परिस्थितियों में भी दूध देने की क्षमता के लिए जानी जाती है?

  • थारपारकर (Tharparkar)
  • अमृतमहल (Amritmahal)
  • हल्लीकर (Hallikar)
  • खिलारी (Khillari)

Explanation:

  • थारपारकर गाय को ‘सफेद सिंधी’ भी कहा जाता है । यह एक द्विकाजी (Dual-purpose) नस्ल है जो कम चारे और अत्यधिक गर्मी में भी जीवित रह सकती है ।

विश्व में सर्वाधिक दूध देने वाली विदेशी गाय की नस्ल ‘होलस्टीन फ्रीजियन’ (Holstein Friesian) का मूल उत्पत्ति देश कौन-सा है?

  • नीदरलैंड (Holland)
  • स्कॉटलैंड
  • स्विट्जरलैंड
  • जर्सी द्वीप (यूके)

Explanation:

  • होलस्टीन फ्रीजियन (HF) विश्व की सबसे बड़ी और सर्वाधिक दुग्ध उत्पादक गाय की नस्ल है, जो नीदरलैंड की मूल निवासी है ।
  • इसके शरीर पर काले और सफेद रंग के बड़े-बड़े चकत्ते होते हैं ।

भैंस की कौन-सी नस्ल ‘सवाई चाल’ (Sawai Chaal) और भारी शारीरिक बनावट के लिए जानी जाती है, जो गुजरात के कच्छ क्षेत्र में पाई जाती है?

  • कांकरेज (Kankrej – गाय की नस्ल जो द्विकाजी है) / बन्नी (Banni – भैंस)
  • मुर्राह
  • पंडारपुरी
  • संबलपुरी

Explanation:

  • गाय/पशुओं में कांकरेज भारत की सबसे भारी नस्लों में से एक है जो अपनी तेज और विशिष्ट ‘सवाई चाल’ के लिए प्रसिद्ध है ।
  • कच्छ क्षेत्र की ‘बन्नी’ भैंस रात में चरने और विषम जलवायु सहने के लिए जानी जाती है ।

‘गरीब की गाय’ (Poor man’s cow) के नाम से पशुपालन क्षेत्र में किस जानवर को संबोधित किया जाता है?

  • बकरी (Goat)
  • भेड़ (Sheep)
  • सुअर (Pig)
  • ऊंट (Camel)

Explanation:

  • बकरी को छोटे किसानों और भूमिहीन मजदूरों के लिए कम लागत में आजीविका और दूध उपलब्ध कराने के कारण ‘गरीब की गाय’ कहा जाता है ।

पश्मीना ऊन (Pashmina Wool) प्रदान करने वाली ‘चंगथांगी’ (Changthangi) किसकी एक विश्व प्रसिद्ध नस्ल है?

  • बकरी (Goat)
  • भेड़ (Sheep)
  • याक (Yak)
  • खरगोश (Rabbit)

Explanation:

  • चंगथांगी बकरी लद्दाख और चांगथांग पठार के उच्च हिमाच्छादित क्षेत्रों में पाई जाती है ।
  • इससे अत्यधिक बारीक और कीमती ‘पश्मीना ऊन’ प्राप्त होता है ।

भारत में पाई जाने वाली बकरियों की नस्लों के संदर्भ में कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है?

  • जमुनापारी – सबसे छोटी बौनी नस्ल
  • बीटल – पंजाब की प्रमुख दुधारू नस्ल
  • ब्लैक बंगाल – मांस उत्पादन एवं उत्कृष्ट चमड़े हेतु प्रसिद्ध
  • बरबरी – ‘सिटी गोट’ (शहरों में पालने योग्य)

Explanation:

  • जमुनापारी भारत में पाई जाने वाली बकरियों में सबसे बड़ी आकार की नस्ल है (तोतामुखी चेहरा), न कि सबसे छोटी ।
  • शहरी क्षेत्रों में शून्य चराई (Stall feeding) के लिए ‘बरबरी’ नस्ल सबसे उपयुक्त मानी जाती है ।

उत्तम गुणवत्ता की ‘मेरिनो ऊन’ (Merino Wool) देने वाली मेरिनो भेड़ का मूल उत्पत्ति स्थान कौन-सा देश है?

  • स्पेन (Spain)
  • ऑस्ट्रेलिया
  • न्यूजीलैंड
  • दक्षिण अफ्रीका

Explanation:

  • मेरिनो भेड़ की उत्पत्ति स्पेन में हुई थी । इसकी ऊन अत्यंत मुलायम, बारीक और विश्वस्तरीय होती है ।
  • वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया मेरिनो ऊन का बड़ा उत्पादक है ।

राजस्थान की किस भेड़ की नस्ल को उसकी महीन ऊन की गुणवत्ता के कारण ‘भारतीय मेरिनो’ (Indian Merino) कहा जाता है?

  • चोकला (Chokla)
  • मारवाड़ी (Marwari)
  • जैसलमेरी (Jaisalmeri)
  • मालगुरा (Malgura)

Explanation:

  • चोकला भेड़ राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में पाई जाती है । इसके ऊन की गुणवत्ता भारत में सर्वोत्तम होने के कारण इसे ‘भारतीय मेरिनो’ कहा जाता है ।

‘रेगिस्तान का जहाज’ कहे जाने वाले ऊंटों की भारतीय नस्लों के संदर्भ में एक-कुबड़ वाले ऊंटों (One-humped Camels) का वैज्ञानिक नाम क्या है?

  • कैमेलस ड्रोमेडेरियस (Camelus dromedarius)
  • कैमेलस बैक्टीरिएनस (Camelus bactrianus)
  • कैपरा हिरकस (Capra hircus)
  • ओविस एरीज़ (Ovis aries)

Explanation:

  • भारतीय मैदानी/मरुस्थलीय ऊंट एक-कुबड़ वाले (Camelus dromedarius) होते हैं ।
  • दो कुबड़ वाले ऊंट (Camelus bactrianus) भारत में केवल लद्दाख की नुब्रा घाटी में पाए जाते हैं ।

तमिलनाडु के जल्लीकट्टू (Jallikattu) खेल में मुख्य रूप से किस प्रसिद्ध भारतीय सांड/बैल की नस्ल का उपयोग किया जाता है?

  • कांगयम (Kangayam)
  • अमृतमहल (Amritmahal)
  • ओंगोल (Ongole)
  • वेचूर (Vechur)

Explanation:

  • कांगयम तमिलनाडु की एक शक्तिशाली भारवाही नस्ल है, जिसका उपयोग पार पारंपरिक खेल ‘जल्लीकट्टू’ में किया जाता है ।

विश्व की सबसे छोटी आकार की गाय की नस्ल कौन-सी है, जिसे केरल के कोट्टायम क्षेत्र में पाया जाता है और इसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है?

  • वेचूर (Vechur)
  • पुंगनूर (Punganur)
  • देवनी (Deoni)
  • डांगी (Dangi)

Explanation:

  • वेचूर गाय विश्व की सबसे छोटी बोनी (Dwarf) गाय की नस्ल है, जिसकी ऊँचाई लगभग 124 से 90 सेमी होती है ।
  • इसके दूध में औषधीय गुण और आसानी से पचने वाले वसा कण पाए जाते हैं ।

आंध्र प्रदेश की कौन-सी प्रसिद्ध गाय की नस्ल अपनी भारी काया, शक्ति और संक्रामक बीमारियों से लड़ने की क्षमता के लिए जानी जाती है, जिसका निर्यात अमेरिका और ब्राजील में भी हुआ है?

  • ओंगोल (Ongole)
  • कृष्णा वैली (Krishna Valley)
  • निमाड़ी (Nimari)
  • बछौर (Bachaur)

Explanation:

  • ओंगोल (नेल्लौर नस्ल) आंध्र प्रदेश की अत्यंत शक्तिशाली द्विकाजी नस्ल है । इसी नस्ल से अमेरिका में ‘अमेरिकन ब्राह्मण’ बैल विकसित किया गया था ।

मुर्गियों की प्रसिद्ध भारतीय नस्ल ‘कड़कनाथ’ (Kadaknath), जिसे जीआई टैग (GI Tag) प्राप्त है, के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए तथा सत्य कूट का चयन कीजिए:
1. इसका मूल उत्पत्ति स्थान मध्य प्रदेश का झाबुआ जिला है ।
2. इसके मांस, रक्त और हड्डियों का रंग काला (Melanin वर्णक के कारण) होता है ।
3. इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा काफी कम होती है ।

  • 1, 2 और 3 सभी
  • केवल 1 और 2
  • केवल 2 और 3
  • केवल 1 और 3

Explanation:

  • तीनों कथन सत्य हैं; कड़कनाथ (या कालीमासी) मध्य प्रदेश के आदिवासियों द्वारा पाली जाने वाली प्रसिद्ध मुर्गी की नस्ल है जिसमें औषधि गुण पाए जाते हैं ।

‘केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान’ (CSWRI – Central Sheep and Wool Research Institute) भारत में कहाँ स्थित है?

  • अविकानगर, टोंक (राजस्थान)
  • हिसार (हरियाणा)
  • मखदूम, मथुरा (उत्तर प्रदेश)
  • आनंद (गुजरात)

Explanation:

  • CSWRI राजस्थान के अविकानगर (टोंक) में स्थित है, जो भेड़ और ऊन विकास हेतु भारत का प्रमुख अनुसंधान संस्थान है ।
  • (हिसार में केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान स्थित है तथा मथुरा के मखदूम में केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान स्थित है) ।

कृषि क्षेत्र में ‘जीरो टिलेज’ (Zero Tillage / शून्य जुताई) तकनीक के उपयोग के संदर्भ में निम्नलिखित लाभों पर विचार कीजिए तथा सही कूट का चयन कीजिए:
1. इसके उपयोग से फसल अवशेषों (Crop Residues) को जलाए बिना पिछली फसल के ठूंठ में ही अगली फसल की बुआई संभव होती है ।
2. यह मृदा में नमी के संरक्षण और कार्बन संचयन (Carbon Sequestration) में सहायक होता है ।
3. इससे खेत की तैयारी में लगने वाले डीजल, श्रम और समय की भारी बचत होती है ।

  • 1, 2 और 3 सभी
  • केवल 1 और 2
  • केवल 2 और 3
  • केवल 1 और 3

Explanation:

  • जीरो टिलेज तकनीक के तहत बिना जुताई किए सीड ड्रिल (जैसे हैप्पी सीडर) के माध्यम से बुआई की जाती है ।
  • यह मृदा अपरदन को रोकता है, कार्बन संचयन में मदद करता है और पर्यावरण प्रदूषण (पराली जलाने) को कम करता है ।

भारत में कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की सिफारिश निम्नलिखित में से किस संस्था द्वारा की जाती है?

  • कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP)
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)
  • राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD)
  • नीति आयोग (NITI Aayog)

Explanation:

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की सिफारिश कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) द्वारा की जाती है ।
  • इसकी अंतिम मंजूरी प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) द्वारा दी जाती है ।

पौधों में पोषक तत्वों की कमी से होने वाले रोगों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है?

  • धान में खैरा रोग – नाइट्रोजन की कमी
  • मक्के में व्हाइट बड (White Bud) – जस्ता (Zinc) की कमी
  • नींबू में डाई-बैक (Die-back) रोग – तांबा (Copper) की कमी
  • सरसों में व्हिपटेल (Whiptail) रोग – मोलिब्डेनम की कमी

Explanation:

  • धान में ‘खैरा रोग’ (Khaira Disease) जस्ता (Zinc) की कमी के कारण होता है, न कि नाइट्रोजन की कमी से ।
  • इस रोग में धान की पत्तियों पर लाल-भूरे रंग के धब्बे बन जाते हैं, जिसके उपचार के लिए जिंक सल्फेट का छिड़काव किया जाता है ।

पशुपालन के संदर्भ में राष्ट्रीय गोकुल मिशन (Rashtriya Gokul Mission) का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  • देशी दुधारू नस्लों (Indigenous Bovine Breeds) का संरक्षण एवं आनुवंशिक सुधार करना
  • केवल विदेशी नस्ल की गायों के आयात को बढ़ावा देना
  • पशुधन बीमा कवरेज को 100% करना
  • केवल मुर्गियों में बर्ड फ्लू के नियंत्रण हेतु टीकाकरण करना

Explanation:

  • राष्ट्रीय गोकुल मिशन की शुरुआत दिसंबर 2014 में देशी मवेशियों (जैसे साहीवाल, गिर, रेड सिंधी) के संरक्षण और नस्ल सुधार हेतु की गई थी ।
  • इसके तहत कृत्रिम गर्भाधान और ‘गोकुल ग्राम’ की स्थापना पर बल दिया जाता है ।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (Soil Health Card Scheme) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए तथा सत्य कूट का चयन कीजिए:
1. यह योजना वर्ष 2015 में सूरतगढ़ (राजस्थान) से शुरू की गई थी ।
2. इस कार्ड में मृदा के कुल 12 मानकों (पोषक तत्वों व भौतिक गुणों) का विश्लेषण किया जाता है ।
3. इसका मुख्य उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग को कम करना है ।

  • 1, 2 और 3 सभी
  • केवल 1 और 3
  • केवल 2 और 3
  • केवल 1 और 2

Explanation:

  • तीनों कथन सत्य हैं; मृदा स्वास्थ्य कार्ड में 12 मानक (N, P, K, S, Zn, Fe, Cu, Mn, B, pH, EC, OC) शामिल होते हैं ।
  • इसका टैगलाइन “स्वस्थ धरा, खेत हरा” है ।

भारत में ‘श्वेत क्रांति’ (White Revolution / ऑपरेशन फ्लड) का जनक किसे माना जाता है, जिन्होंने देश को विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बनाने में योगदान दिया?

  • डॉ. वर्गीज कुरियन (Dr. Verghese Kurien)
  • डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन
  • प्रो. एन. जी. रंगा
  • डॉ. सुंदरलाल बहुगुणा

Explanation:

  • डॉ. वर्गीज कुरियन को भारत में ‘श्वेत क्रांति’ और अमूल (AMUL) के संस्थापक के रूप में जाना जाता है ।
  • ‘ऑपरेशन फ्लड’ (Operation Flood) की शुरुआत राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) द्वारा वर्ष 1970 में की गई थी ।

कृषि प्रणाली में ‘श्री विधि’ (System of Rice Intensification – SRI) किस फसल के उत्पादन को बढ़ाने और जल की बचत करने की एक आधुनिक तकनीक है?

  • धान (Paddy)
  • गेहूँ (Wheat)
  • गन्ना (Sugarcane)
  • कपास (Cotton)

Explanation:

  • SRI विधि (श्री विधि) धान की खेती की एक ऐसी पद्धति है जिसमें कम पानी, कम बीज और जैविक खाद के प्रयोग से धान की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि होती है ।

पशुओं में होने वाले संक्रामक रोगों और उनके कारकों के संदर्भ में कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?

  • खुरपका-मुँहपका रोग (Foot and Mouth Disease) – विषाणु (Virus)
  • एंथ्रेक्स (Anthrax) – कवक (Fungus)
  • गलघोंटू (Haemorrhagic Septicaemia) – प्रोटोजोआ
  • थनैल (Mastitis) – केवल विषाणु

Explanation:

  • खुरपका-मुँहपका (FMD) मवेशियों में होने वाला अत्यंत संक्रामक विषाणु जनित (Viral) रोग है ।
  • जबकि एंथ्रेक्स और गलघोंटू रोग जीवाणु (Bacteria) द्वारा फैलते हैं ।

भारतीय कृषि में ‘सस्य गहनता’ (Cropping Intensity) को किस प्रकार परिभाषित किया जाता है?

  • (कुल बोया गया क्षेत्रफल ÷ शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल) × 100
  • (शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल ÷ कुल सिंचित क्षेत्रफल) × 100
  • (वार्षिक कुल उपज ÷ कुल कृषि भूमि) × 100
  • (सिंचित क्षेत्रफल ÷ अंसिंचित क्षेत्रफल) × 100

Explanation:

  • सस्य गहनता (Cropping Intensity) एक कृषि वर्ष में एक ही भूमि पर उगाई गई फसलों की आवृत्ति दर्शाती है ।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा वर्गीकृत भारतीय मृदाओं में से किस मिट्टी को ‘स्व-जुताई वाली मिट्टी’ (Self-ploughing Soil) कहा जाता है?

  • काली मिट्टी (Black / Regur Soil)
  • जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil)
  • लाल मिट्टी (Red Soil)
  • लैटेराइट मिट्टी (Laterite Soil)

Explanation:

  • काली मिट्टी (रेगुर) में जल धारण क्षमता अधिक होती है । सूखने पर इसमें बड़ी-बड़ी दरारें पड़ जाती हैं, जिससे वायु का संचार सुगम हो जाता है; इसीलिए इसे ‘स्व-जुताई वाली मिट्टी’ कहते हैं ।
  • यह कपास की खेती के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है ।

कृषि क्षेत्र में ‘सत्यापित बीज’ (Certified Seed) के थैलों पर किस रंग का टैग (Tag) लगाया जाता है?

  • नीला रंग (Blue Tag)
  • सफेद रंग (White Tag)
  • पीला रंग (Yellow Tag)
  • हरा रंग (Green Tag)

Explanation:

  • सत्यापित बीज (Certified Seeds) के थैलों पर नीले रंग का टैग होता है ।
  • आधारभूत बीज (Foundation Seed) पर सफेद रंग और प्रजनक बीज (Breeder Seed) पर सुनहरा पीला (Golden Yellow) टैग लगाया जाता है ।

‘पीएम-प्रणाम’ (PM-PRANAM) योजना, जिसे केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया है, का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  • रासायनिक उर्वरकों (Chemical Fertilizers) के उपयोग को कम करना और वैकल्पिक/जैविक उर्वरकों को बढ़ावा देना
  • कृषकों को मुफ़्त सौर पंप वितरित करना
  • फसल बीमा दावों का त्वरित निपटान करना
  • कृषि उपज के निर्यात हेतु विशेष कॉरिडोर बनाना

Explanation:

  • PM-PRANAM (Programme for Restoration, Awareness, Nourishment and Amelioration of Mother Earth) का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों की खपत घटाकर मृदा के स्वास्थ्य की रक्षा करना है ।

भारत की पहली मवेशी जीनोमिक चिप (Cattle Genomic Chip), जिसे ‘इंडीगौ’ (IndiGau) नाम दिया गया है, किस संस्थान द्वारा विकसित की गई है?

  • राष्ट्रीय पशु जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (NIAB), हैदराबाद
  • राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI), करनाल
  • भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), इज़्ज़तनगर
  • सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन बफेलो (CIRB), हिसार

Explanation:

  • ‘इंडीगौ’ (IndiGau) भारत की पहली और विश्व की सबसे बड़ी मवेशी जीनोमिक चिप है, जिसे NIAB हैदराबाद द्वारा देशी मवेशियों (जैसे गिर, कांकरेज, साहीवाल) की नस्ल सुधार हेतु विकसित किया गया है ।

कृषि में ‘फर्टिगेशन’ (Fertigation) तकनीक के उपयोग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए तथा सत्य कूट का चयन कीजिए:
1. ड्रिप सिंचाई प्रणाली के माध्यम से सिंचाई जल के साथ घुलनशील उर्वरक देना ‘फर्टिगेशन’ कहलाता है ।
2. इससे उर्वरक उपयोग दक्षता (Fertilizer Use Efficiency) में वृद्धि होती है ।
3. इसके द्वारा पौधों की जड़ों तक सीधे पोषक तत्वों की सटीक आपूर्ति संभव होती है ।

  • 1, 2 और 3 सभी
  • केवल 1 और 2
  • केवल 2 और 3
  • केवल 1 और 3

Explanation:

  • फर्टिगेशन (Fertigation) जल और उर्वरक दोनों की बचत करता है तथा लीचिंग (Leaching) के कारण होने वाले उर्वरक के नुकसान को रोकता है । तीनों कथन पूरी तरह सत्य हैं ।

भारत में ‘नीली क्रांति’ (Blue Revolution) का संबंध निम्नलिखित में से किस क्षेत्र से है?

  • मत्स्य पालन और जलीय कृषि (Fisheries & Aquaculture)
  • तिलहन उत्पादन (Oilseed Production)
  • खाद्यान्न उत्पादन (Food Grain Production)
  • दुग्ध उत्पादन (Milk Production)

Explanation:

  • नीली क्रांति का संबंध मत्स्य उत्पादन से है । भारत में नीली क्रांति का जनक डॉ. हीरालाल चौधरी और डॉ. अरुण कृष्णन को माना जाता है ।

मवेशियों में होने वाली अत्यंत घातक बीमारी ‘लम्पी स्किन डिजीज’ (Lumpy Skin Disease – LSD) का मुख्य कारण क्या है?

  • कैप्रीपॉक्सवायरस (Capripoxvirus – Poxviridae परिवार)
  • मायकोप्लाज्मा बोविस (जीवाणु)
  • ट्रिपैनोसोमा इवांसी (प्रोटोजोआ)
  • एस्परजिलस फ्यूमिगेट्स (कवक)

Explanation:

  • लम्पी स्किन रोग एक विषाणु जनित (Viral) बीमारी है जो मुख्य रूप से मक्खियों, मच्छरों और चीचड़ों के काटने से मवेशियों में फैलती है, जिससे त्वचा पर गांठें बन जाती हैं ।

फसलों के वर्गीकरण के संदर्भ में ‘कैच क्रॉप्स’ (Catch Crops) किसे कहा जाता है?

  • ऐसी आकस्मिक फसलें जो मुख्य फसल के विफल होने पर कम समय में आय प्राप्त करने हेतु उगाई जाती हैं
  • ऐसी फसलें जो हवा से नाइट्रोजन को पकड़कर मृदा में स्थिर करती हैं
  • ऐसी फसलें जो केवल कीटों को आकर्षित करने हेतु खेत के चारों ओर बोई जाती हैं
  • ऐसी फसलें जिन्हें केवल हरी खाद के लिए उगाया जाता है

Explanation:

  • कैच क्रॉप्स (जैसे मूंग, उड़द, तोरिया) बहुत कम अवधि में पककर तैयार हो जाती हैं । जब मुख्य फसल किसी कारण नष्ट हो जाती है, तब समय का लाभ उठाने हेतु इन्हें बोया जाता है ।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का मुख्यालय कहाँ स्थित है, जो देश में कृषि शिक्षा और अनुसंधान का सर्वोच्च निकाय है?

  • नई दिल्ली (New Delhi)
  • करनाल (हरियाणा)
  • पुणे (महाराष्ट्र)
  • देहरादून (उत्तराखंड)

Explanation:

  • ICAR (Indian Council of Agricultural Research) की स्थापना 16 जुलाई 1929 को हुई थी और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है ।

मुर्गियों में होने वाला ‘रानीखेत रोग’ (Ranikhet Disease / Newcastle Disease) निम्नलिखित में से किसके संक्रमण के कारण होता है?

  • विषाणु (Virus – Paramyxovirus)
  • जीवाणु (Bacteria)
  • कवक (Fungus)
  • परजीवी (Parasite)

Explanation:

  • रानीखेत रोग कुक्कुट (Poultry) में होने वाला एक तीव्र संक्रामक विषाणु जनित रोग है, जिससे मुर्गियों के श्वसन एवं तंत्रिका तंत्र प्रभावित होते हैं ।

अंतर्राष्ट्रीय मक्का एवं गेहूँ सुधार केंद्र (CIMMYT) कहाँ स्थित है, जहाँ से हरित क्रांति हेतु बौनी किस्मों का विकास किया गया था?

  • मेक्सिको (Mexico)
  • फिलीपींस (Philippines)
  • इटली (Italy)
  • संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)

Explanation:

  • CIMMYT मेक्सिको में स्थित है । यहीं पर डॉ. नॉर्मन बोरलॉग ने गेहूँ की बौनी किस्मों (Dwarf Wheat Varieties) का विकास किया था, जिसने वैश्विक हरित क्रांति की नींव रखी ।
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