SCIENCE

संक्षारण या जंग लगना ______ से रोका जा सकता है।

  • विद्युत लेपन प्रक्रिया
  • सभी विकल्पों
  • धातु की सतह को चित्रित करने
  • धातु की सतह पर तेल लगाने

Explanation:

  • संक्षारण (Corrosion) एक विद्युत-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें धातुएं वायु, नमी या रसायन के संपर्क में आकर नष्ट होने लगती हैं।
  • धातुओं को जंग से बचाने के लिए पेन्ट (चित्रित) करना, तेल या ग्रीस लगाना, जस्तीकरण (Galvanization), तथा विद्युत लेपन (Electroplating) जैसे सभी तरीकों का उपयोग किया जाता है।
  • लोहे पर जंग लगने का रासायनिक सूत्र Fe₂O₃·xH₂O (हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड) होता है।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य –
    • गैल्वनीकरण (Galvanization) – लोहे को जंग से बचाने के लिए उस पर जस्ते (Zinc) की परत चढ़ाई जाती है।
    • एनोडीकरण (Anodising) – एल्युमीनियम की सतह पर एक मोटी ऑक्साइड परत बनाने की प्रक्रिया है ताकि संक्षारण न हो।

एक वैज्ञानिक ने देखा कि समुद्र के पास लगी लोहे की रेलिंग में शुष्क प्रदेश में लगी उसी प्रकार की रेलिंग की तुलना में अधिक तेजी से जंग लगता है। इसका मुख्य कारण क्या हो सकता है?

  • समुद्री वायु में नमक और नमी होती है, जिससे जंग लगने की प्रक्रिया तेज़ हो जाती है।
  • समुद्री वायु अधिक शुष्क होती है, जिससे जंग लगने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
  • समुद्र के पास लगी लोहे की रेलिंग सूर्य के प्रकाश के संपर्क में अधिक आती है।
  • प्रदेश की वायु में ऑक्सीजन कम है, जिससे जंग नहीं लगती।

Explanation:

  • समुद्री वायु में नमी (H₂O) और लवण/नमक (NaCl) की प्रचुरता होती है।
  • नमक युक्त जल एक बेहतरीन इलेक्ट्रोलाइट (Electrolyte) के रूप में कार्य करता है, जो इलेक्ट्रॉन के प्रवाह को तेज करता है और संक्षारण दर को बढ़ा देता है।
  • शुष्क प्रदेशों में हवा में आर्द्रता (Humidity) कम होने के कारण ऑक्सीकरण की दर बहुत धीमी होती है।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य –
    • लोहे में जंग लगना एक रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) का उदाहरण है।
    • जंग लगने पर लोहे का वजन बढ़ जाता है

निम्नलिखित में से कौन-सा प्रदर्शन एक भौतिक परिवर्तन है?

  • क्रिस्टलीकरण
  • जंग लगना
  • दहन
  • कंपन

Explanation:

  • क्रिस्टलीकरण (Crystallization) एक भौतिक परिवर्तन है क्योंकि इसमें कोई नया पदार्थ नहीं बनता और इसे पुनः अपनी मूल अवस्था में प्राप्त किया जा सकता है।
  • भौतिक परिवर्तन केवल पदार्थ के भौतिक गुणों (जैसे आकार, अवस्था, रूप) को बदलते हैं, जबकि रासायनिक संरचना अपरिवर्तित रहती है।
  • जंग लगना और दहन (Combustion) रासायनिक परिवर्तन के उदाहरण हैं।
  • प्रमुख भौतिक और रासायनिक परिवर्तन –
    • भौतिक परिवर्तन: बर्फ का पिघलना, मोम का पिघलना, पानी में चीनी का घुलना, क्रिस्टलीकरण।
    • रासायनिक परिवर्तन: दूध का दही बनना, भोजन का पचना, लोहे पर जंग लगना, मोमबत्ती का जलना।

एल्युमीनियम ऐनोडीकरण (anodising) का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

  • इसे बेहतर चालक बनाना
  • इसे नरम और अधिक लचीला बनाना
  • इसका संक्षारण प्रतिरोध और दिखावट (appearance) को बढाना
  • अम्लों के साथ इसकी अभिक्रियाशीलता बढाना

Explanation:

  • ऐनोडीकरण (Anodising) एक इलेक्ट्रोकेमिकल प्रक्रिया है जो एल्युमीनियम की सतह पर संक्षारण-रोधी एल्युमीनियम ऑक्साइड (Al₂O₃) की एक मोटी और टिकाऊ परत बनाती है।
  • इस प्रक्रिया में साफ की गई एल्युमीनियम वस्तु को ऐनोड (Anode) बनाया जाता है और तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) का विद्युत अपघट्य के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य –
    • एनोडीकृत परत रंगीन रंगों (Dyes) को आसानी से अवशोषित कर सकती है, जिससे इसे एक आकर्षक उपस्थिति मिलती है।
    • एल्युमीनियम हवा के संपर्क में आने पर प्राकृतिक रूप से एक पतली सुरक्षात्मक ऑक्साइड परत बनाता है, लेकिन एनोडीकरण से यह परत काफी मोटी हो जाती है।

जस्ता लेपित लोहे की वस्तु में, जस्ते की परत पर खरोच (scratch) लगने पर भी जंग से क्यों सुरक्षित रहती है?

  • जस्ता, लोहे के साथ अभिक्रिया करके आयरन ऑक्साइड की एक रक्षी परत बनाता है।
  • जस्ता, लोहे की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील होता है और अधिमान्य ऑक्सीकरण से गुजरता है, जो लोहे को जंग लगने से बचाता है।
  • लोहे पर जंग की एक पतली परत बन जाती है जो जंग लगने से रोकती है।
  • खरोचों से तेल अंदर रिस सकता है, जो जंग लगने से रोकता है।

Explanation:

  • जस्ता (Zinc), लोहे (Iron) की तुलना में अधिक विद्युत-धनात्मक (Electropositive) तथा अभिक्रियाशील होता है।
  • सक्रियता श्रेणी में जस्ता लोहे के ऊपर होता है, इसलिए खरोच लगने पर भी जिंक पहले स्वयं ऑक्सीकृत होता है (Sacrificial Anode के रूप में कार्य करता है) और लोहे की रक्षा करता है।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य –
    • धातुओं की सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) का क्रम: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au।
    • इस प्रक्रिया को कैथोडिक सुरक्षा (Cathodic Protection) भी कहा जाता है।

कौन सी रासायनिक प्रक्रिया तांबे पर पट्टिका के निर्माण, लोहे में जंग लगने और चांदी के काले पड़ने का कारण बनती है?

  • स्कंदन
  • बहिर्वेशन
  • संक्षारण
  • संपूटन

Explanation:

  • संक्षारण (Corrosion) वह प्रक्रिया है जिसमें धातुएं वायुमंडलीय गैसों, नमी और रसायनों की क्रिया द्वारा धीरे-धीरे नष्ट होती हैं।
  • विभिन्न धातुओं में संक्षारण के प्रभाव:
    • तांबा (Copper): हवा में CO₂ और नमी के संपर्क से हरे रंग की परत (क्षारीय कॉपर कार्बोनेट CuCO₃·Cu(OH)₂) बनती है।
    • चांदी (Silver): हवा में मौजूद हाइड्रोजन सल्फाइड (H₂S) से अभिक्रिया करके काले रंग का सिल्वर सल्फाइड (Ag₂S) बनाती है।
    • लोहा (Iron): नमी और O₂ के संपर्क में आकर भूरे रंग का हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड बनाता है।

धातुओं के निष्कर्षण से पहले अयस्कों के संवर्धन का मुख्य कारण क्या है?

  • बालू और अवांछित चट्टानों जैसी मृदामय अशुद्धियों को दूर करना
  • परिष्करण के लिए खनिज सामग्री के गलनांक को बढ़ाना
  • रूपांतरण के लिए अयस्क की आंतरिक क्रिस्टल संरचना को बदलना
  • अंतिम धातु की संक्षारण और जंग के प्रति प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाना

Explanation:

  • पृथ्वी की पपड़ी से खनन किए गए अयस्कों में बड़ी मात्रा में अशुद्धियाँ जैसे मिट्टी, रेत और चट्टानी पदार्थ होते हैं, जिन्हें गैंग (Gangue/Matrix) कहा जाता है।
  • इन अशुद्धियों को दूर करके अयस्क में धातु की सांद्रता बढ़ाने की प्रक्रिया को अयस्क का संवर्धन या सांद्रण (Concentration of Ore) कहते हैं।
  • संवर्धन की मुख्य विधियाँ –
    • झाग प्लवन विधि (Froth Flotation): सल्फाइड अयस्कों के लिए उपयोग की जाती है।
    • चुंबकीय पृथक्करण (Magnetic Separation): चुंबकीय गुणों वाले अयस्कों के लिए।
    • गुरुत्वीय पृथक्करण (Hydraulic Washing): भारी अयस्कों को हल्की अशुद्धियों से अलग करने के लिए।

अम्लों या नमी की उपस्थिति में धातुओं का ऑक्सीकरण क्या कहलाता है?

  • उदासीनीकरण
  • संक्षारण
  • विकृतगंधिता
  • जंग लगना

Explanation:

  • जब कोई धातु अपने आसपास की नमी, अम्ल, गैसों आदि के संपर्क में आती है, तो उसकी ऊपरी सतह ऑक्सीकृत होकर संक्षारित होने लगती है, जिसे संक्षारण (Corrosion) कहते हैं।
  • विकृतगंधिता (Rancidity): वसा और तेल युक्त भोजन का हवा के संपर्क में आने पर ऑक्सीकृत होकर ख़राब गंध और स्वाद देना।
  • उदासीनीकरण (Neutralization): अम्ल और क्षार की परस्पर अभिक्रिया से लवण और जल बनने की प्रक्रिया (अम्ल + क्षार → लवण + जल)।
  • उदासीनीकरण सूत्र: HCl + NaOH → NaCl + H₂O

निम्नलिखित में से कौन सी धातु संक्षारण के कारण हरे रंग की परत बनाती है?

  • जिंक
  • कॉपर
  • आयरन
  • सिल्वर

Explanation:

  • जब तांबा (Copper) लंबे समय तक नम वायुमंडल के संपर्क में रहता है, तो यह वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड और पानी के साथ प्रतिक्रिया करके अपनी सतह पर हरे रंग की परत बनाता है।
  • यह हरा पदार्थ बेसिक कॉपर कार्बोनेट [CuCO₃·Cu(OH)₂] का मिश्रण होता है।
  • अभिक्रिया: 2Cu + H₂O + CO₂ + O₂ → CuCO₃·Cu(OH)₂
  • अन्य धातुओं के संक्षारण के रंग –
    • लोहा (Iron): भूरा रंग (Hydrated Ferric Oxide)
    • चांदी (Silver): काला रंग (Silver Sulfide – Ag₂S)

कोई मैकेनिक साइकिल या मोटर के चलने वाले भागों के बीच तेल क्यों लगाता है?

  • भागों को साफ करने के लिए
  • भागों को चमकदार बनाने के लिए
  • घर्षण को कम करने के लिए स्नेहक के रूप में
  • जंग हटाने के लिए

Explanation:

  • मशीनों के परस्पर गतिशील भागों के बीच घर्षण (Friction) के कारण ऊर्जा की हानि होती है और कल-पुर्जे घिसते हैं।
  • तेल या ग्रीस जैसे स्नेहक (Lubricants) लगाने पर यह परस्पर संपर्क वाली सतहों के बीच एक पतली परत बना देते हैं, जिससे घर्षण बल अत्यधिक घट जाता है।
  • स्नेहन के लाभ –
    • घर्षण और टूट-फूट में कमी।
    • उत्पन्न ऊष्मा को नियंत्रित करना।
    • मशीन के पुर्जों को संक्षारण (जंग) से सुरक्षा प्रदान करना।

निम्नलिखित में से कौन-सी तटीय क्षेत्रों में लोहे के संक्षारण को रोकने की एक सर्वोत्तम विधि है?

  • ठंडे जल में निम्न्जित करना
  • तेल आधारित पेंट से पेंट करना
  • गैल्वनीकरण
  • लोहे को आवधिक रूप से गर्म करना

Explanation:

  • समुद्री या तटीय क्षेत्रों में वायु में नमी (आर्द्रता) और लवणता बहुत अधिक होती है, जिससे साधारण पेंट की परतें जल्दी खराब हो जाती हैं।
  • गैल्वनीकरण (Galvanization/जस्तीकरण) लोहे पर जस्ते (Zinc) की परत चढ़ाने की एक सबसे प्रभावी विधि है।
  • यदि जस्ते की परत पर कोई खरोच आ जाए, तो भी जस्ता स्वयं का ऑक्सीकरण कराकर (Sacrificial Protection) लोहे को जंग से सुरक्षित रखता है।
  • अन्य संक्षारण रोधी तकनीकें –
    • क्रोमियम प्लेटिंग (Chrome Plating): धातुओं को चमकदार और संक्षारण-रोधी बनाने के लिए क्रोमियम का लेपन।
    • मिश्रधातु बनाना (Alloying): लोहे में कार्बन, क्रोमियम और निकल मिलाकर स्टेनलेस स्टील बनाया जाता है, जिसमें जंग नहीं लगती।

संक्षारण सामान्यतः किस रूप में देखा जाता है?

  • गर्म करने पर धातु का पिघलना
  • लोहे की वस्तुओं पर जंग लगना
  • केतली में जल का उबलना
  • बल्ब का चमकना

Explanation:

  • संक्षारण (Corrosion) का सबसे सामान्य और व्यवहारिक उदाहरण लोहे की वस्तुओं पर जंग (Rust) लगना है।
  • यह एक धीमी विद्युत-रासायनिक और रासायनिक प्रक्रिया है, जिसके कारण धातु की गुणवत्ता नष्ट होने लगती है।
  • गर्म करने पर धातु का पिघलना और पानी का उबलना भौतिक परिवर्तन हैं, जबकि जंग लगना एक रासायनिक परिवर्तन है।
  • संक्षारण के अन्य उदाहरण –
    • तांबे (Copper) के बर्तनों पर हरे रंग की परत बनना।
    • चांदी (Silver) के आभूषणों का काला पड़ना।

लोहे में जंग लगने के दौरान, लोहे पर ______ होता है।

  • नीले पाउडर द्वारा लेपित
  • काले द्वारा लेपित
  • हरे द्वारा लेपित
  • लाल भूरा पाउडर द्वारा लेपित

Explanation:

  • लोहे पर जंग लगने के दौरान उसकी सतह पर लाल-भूरे रंग (Reddish-Brown) का परतदार पाउडर जम जाता है।
  • यह लाल-भूरा पदार्थ हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड (Fe₂O₃·xH₂O) होता है।
  • जंग लगने से लोहे का वजन बढ़ जाता है तथा उसकी मजबूती धीरे-धीरे घटने लगती है।
  • आवश्यक परिस्थितियाँ – जंग लगने के लिए ऑक्सीजन (O₂) और नमी (H₂O) दोनों की उपस्थिति अनिवार्य है।

निम्नलिखित में से कौन-सी स्थिति, लोहे के संक्षारण को सबसे प्रभावी रूप से तीव्र करेगी?

  • शुद्ध जल में डूबा हुआ लोहा, घुली हुई ऑक्सीजन से मुक्त
  • घुले हुए लवण वाली आर्द्र वायु के संपर्क में लोहे का पृष्ठ
  • जस्ता की एक पतली परत से लेपित (गैल्वनीकृत) लोहा
  • शुष्क वायु में बिना किसी अशुद्धता के लोहे का पृष्ठ

Explanation:

  • लवणयुक्त (नमकीन) आर्द्र वायु लोहे के संक्षारण की दर को अत्यधिक तीव्र कर देती है।
  • जल में घुले हुए लवण (जैसे NaCl) आयनों की संख्या बढ़ाकर विद्युत-चालकता को बढ़ाते हैं, जिससे इलेक्ट्रोलाइटिक सेल की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
  • समुद्री एवं तटीय क्षेत्रों में जंग लगने की गति सामान्य क्षेत्रों की तुलना में कहीं अधिक होती है।
  • संक्षारण को धीमा करने वाले कारक: शुष्क हवा, ऑक्सीजन की अनुपस्थिति, तथा जस्ते की सुरक्षात्मक परत।

जंग (संक्षारण) से क्षति पहुँचती है, विशेष रूप से:

  • Ag
  • Fe
  • Al
  • Cu

Explanation:

  • संक्षारण से सबसे अधिक और गंभीर संरचनात्मक क्षति लोहे (Fe – Iron) को पहुँचती है, क्योंकि लोहा पुलों, जहाजों, इमारतों और वाहनों का मुख्य ढांचा होता है।
  • लोहे का संक्षारण (जंग) इसकी सतह से शुरू होकर धातु की गहराई तक पहुँचता है और पूरे ढांचे को कमजोर कर देता है।
  • अन्य धातुओं का व्यवहार –
    • Al (ऐलुमिनियम): संक्षारण होने पर स्वयं पर Al₂O₃ की पतली सुरक्षात्मक परत बना लेता है जो आगे संक्षारण रोकती है।
    • Ag (चांदी): सतह पर Ag₂S बनने से केवल काली पड़ती है, धातु नष्ट नहीं होती।

गैल्वनीकरण की प्रक्रिया में, किस धातु को लोहे पर लेपित किया जाता है?

  • लेड
  • निकल
  • क्रोमियम
  • जस्ता

Explanation:

  • गैल्वनीकरण (Galvanization / जस्तीकरण) में इस्पात या लोहे को जंग से बचाने के लिए उस पर जस्ते (Zinc – Zn) की पतली परत चढ़ाई जाती है।
  • यह प्रक्रिया लोहे को पिघले हुए जस्ते (लगभग 450°C) में डुबोकर की जाती है।
  • लाभ: जस्ता वायुमंडल की ऑक्सीजन और नमी को सीधे लोहे के संपर्क में आने से रोकता है।

उस प्रक्रिया का नाम बताइए जिसमें किसी धातु पर उसके आसपास मौजूद पदार्थों जैसे नमी, अम्ल इत्यादि द्वारा हमला किया जाता है।

  • ऑक्सीकरण
  • संक्षारण
  • रैंसिडिटी
  • अपचयन

Explanation:

  • पर्यावरण में उपस्थित अम्ल, नमी, ऑक्सीजन या अन्य रसायनों के प्रभाव से धातु की सतह का धीरे-धीरे क्षय होना संक्षारण (Corrosion) कहलाता है।
  • रैंसिडिटी (विकृतगंधिता): वसायुक्त भोजन का वायु द्वारा ऑक्सीकृत होकर स्वाद और गंध में खराब होना।
  • ऑक्सीकरण (Oxidation): वह रासायनिक प्रक्रिया जिसमें इलेक्ट्रॉन का ह्रास होता है या ऑक्सीजन का योग होता है।

निम्नलिखित में से किस विधि में जंग लगने से बचाने के लिए इस्पात और लोहे पर जिंक की परत का विलेपन शामिल है?

  • कैथोडी रक्षण
  • विद्युत-लेपन
  • निष्क्रियण
  • गैल्वनीकरण

Explanation:

  • लोहे और इस्पात (Steel) को जंग से बचाने की सबसे व्यापक और किफायती विधि गैल्वनीकरण (Galvanization) है।
  • विद्युत-लेपन (Electroplating): विद्युत धारा का उपयोग करके किसी धातु पर दूसरी धातु (जैसे क्रोमियम, निकल या सोना) की परत चढ़ाना।
  • कैथोडी रक्षण (Cathodic Protection): अधिक क्रियाशील धातु (जैसे Mg या Zn) को एनोड बनाकर संरक्षित धातु (लोहे) की रक्षा करना।

______ का संक्षारण एक गंभीर समस्या है।

  • Al
  • Pt
  • Cu
  • Fe

Explanation:

  • लोहे (Fe) का संक्षारण एक बहुत बड़ी विश्वव्यापी आर्थिक और तकनीकी समस्या है, क्योंकि हर साल संक्षारित लोहे को बदलने में अरबों रुपये खर्च होते हैं।
  • Pt (प्लैटिनम): एक उत्कृष्ट/अक्रिय धातु (Noble Metal) है जो हवा और नमी से प्रभावित नहीं होती और इसमें संक्षारण नहीं होता।
  • लोहे पर बनने वाली जंग (Rust) पपड़ी बनकर गिर जाती है, जिससे नीचे की नई धातु पुनः संक्षारित होने के लिए खुल जाती है।

लोहे के जंग का रंग होता है।

  • लाल-हरा
  • लाल-नील
  • लाल-भूरा
  • लाल-पीला

Explanation:

  • लोहे पर जंग लगने पर बनने वाला यौगिक लाल-भूरे (Reddish-Brown) रंग का होता है।
  • रासायनिक सूत्र: Fe₂O₃·xH₂O (Hydrated Ferric Oxide)
  • गणितीय अभिव्यक्ति (यौगिक सूत्र): Fe₂O₃·xH₂O
  • महत्वपूर्ण तथ्य –
    • लोहे का ऑक्सीकरण अंक Fe₂O₃ में +3 होता है।
    • जंग लगने पर लोहे का द्रव्यमान (भार) सदैव बढ़ता है, क्योंकि उसमें ऑक्सीजन और जल के अणु जुड़ जाते हैं।

लोहे की कीलों को जंग लगने से बचाने के लिए उन पर जिंक का लेपन किया जाता है। जिंक की परत खुरच जाने के बाद भी कीलों पर जंग क्यों नहीं लगती है?

  • जिंक एक उत्सर्गी एनोड की तरह कार्य करता है और लोहे के स्थान पर स्वयं खुरच जाता है।
  • जिंक नमी के साथ अभिक्रिया करके एक सुरक्षात्मक पतली परत बनाता है।
  • जिंक की उपस्थिति में लोहा जंगरोधी बन जाता है।
  • जिंक एक कठोर ऑक्साइड परत बनाता है।

Explanation:

  • जिंक (Zn) की सक्रियता लोहे (Fe) से अधिक होती है। विद्युत-रासायनिक श्रेणी में जिंक लोहे के ऊपर स्थित है।
  • जिंक एक उत्सर्गी एनोड (Sacrificial Anode) के रूप में कार्य करता है। खुरच जाने के बाद भी संपर्क में आने पर जिंक पहले ऑक्सीकृत होता है और लोहे को सुरक्षित रखता है।
  • इसे बलिदानी संरक्षण (Sacrificial Protection) या कैथोडिक रक्षण भी कहा जाता है।

लोहे की सामग्री का विद्युत लेपन करने के लिए निम्नलिखित में से कौन सी धातुओं का उपयोग किया जाता है?

  • कैल्शियम
  • जस्ता
  • चांदी
  • एल्यूमिनियम

Explanation:

  • दिए गए विकल्पों में से चांदी (Silver), क्रोमियम, निकल और सोने जैसी धातुओं का उपयोग लोहे या अन्य धातुओं की वस्तुओं पर विद्युत लेपन (Electroplating) द्वारा आकर्षक परत चढ़ाने के लिए किया जाता है।
  • विद्युत लेपन में, जिस वस्तु पर लेप करना होता है उसे कैथोड (Cathode) तथा लेपन की जाने वाली धातु को एनोड (Anode) बनाया जाता है।
  • मुख्य उद्देश्य: वस्तु को संक्षारण से बचाना तथा उसकी दिखावट और चमक में सुधार करना।
RRB SCIENCE Chemistry Bank – Corrosion & Rusting