SCIENCE
दो या अधिक पदार्थों के एक सजातीय मिश्रण को किस नाम से जाना जाता है?
- विलयन
- विखंडन
- कोलाइड
- निलंबन
Explanation:
- विलयन (Solution): एक सजातीय मिश्रण जिसमें विलेय कण समान रूप से विलायक में घुले होते हैं। इसके कण लगभग 1 nm से कम आकार के होते हैं और प्रकाश को प्रकीर्णित नहीं करते।
- विखंडन (Fission): यह परमाणु विभाजन की प्रक्रिया है, मिश्रण से संबंधित नहीं।
- कोलाइड (Colloid): एक विषमांगी मिश्रण जिसमें कण (1-1000 nm) प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं (टिडल प्रभाव) लेकिन बैठते नहीं हैं।
- निलंबन (Suspension): एक विषमांगी मिश्रण जिसमें बड़े कण (>1000 nm) समय के साथ बैठ जाते हैं।
Quick Facts:
- विलयन के कण नग्न आंखों से दिखाई नहीं देते हैं।
- विलयन का उदाहरण: चीनी का पानी में घोल, समुद्री जल।
- विलयन को निस्यंदन (filtration) द्वारा अलग नहीं किया जा सकता क्योंकि कण बहुत छोटे होते हैं और फिल्टर पेपर से गुज़र जाते हैं।
डिटर्जेंट निम्नलिखित में से किसमें कार्य कर सकते हैं?
- कठोर और मृदु जल दोनों
- केवल आसुत जल
- केवल शीतल जल
- केवल गर्म जल
Explanation:
- कठोर और मृदु जल दोनों: डिटर्जेंट सल्फोनेट या सल्फेट समूह वाले सिंथेटिक यौगिक होते हैं। कठोर जल में उपस्थित Ca²⁺ और Mg²⁺ आयनों के साथ मिलकर वे अघुलनशील अवक्षेप (scum) नहीं बनाते, जबकि साबुन ऐसा करता है। इसलिए डिटर्जेंट कठोर और मृदु दोनों प्रकार के जल में प्रभावी होते हैं।
- केवल आसुत जल: गलत, क्योंकि डिटर्जेंट कठोर जल में भी काम करते हैं।
- केवल शीतल जल: गलत, डिटर्जेंट ठंडे पानी में भी साबुन से बेहतर काम करते हैं लेकिन यह एकमात्र शर्त नहीं है।
- केवल गर्म जल: गलत, डिटर्जेंट गर्म और ठंडे दोनों पानी में काम करते हैं।
Quick Facts:
- डिटर्जेंट के जलविरोधी सिरे में हाइड्रोकार्बन श्रृंखला (लंबी) होती है जो तेल/ग्रीस को आकर्षित करती है।
- डिटर्जेंट के जलरागी सिरे में सल्फोनेट (SO₃⁻) या सल्फेट (SO₄²⁻) समूह होता है जो पानी को आकर्षित करता है।
- साबुन के विपरीत, डिटर्जेंट कठोर जल में भी झाग (lather) बनाते हैं।
एक प्रयोगशाला में, एक विद्यार्थी पदार्थ को पानी में मिलाता है और देखता है कि यह मिश्रण न तो पूर्णतः विलयन है और न ही निलंबन। इस मिश्रण का कौन-सा गुण यह पुष्टि करता है कि यह एक कोलाइडल विलयन है?
- यह मिश्रण पूरी तरह से पारदर्शी है और प्रकाश को प्रकीर्णित नहीं करता है।
- कुछ समय बाद कण नीचे बैठ जाते हैं।
- ये कण नंगी आंखों से दिखाई देते हैं।
- ये कण प्रकाश की किरण-पुंज को प्रकीर्णित कर देते हैं लेकिन स्थिर अवस्था में नहीं ठहरते।
Explanation:
- ये कण प्रकाश की किरण-पुंज को प्रकीर्णित कर देते हैं लेकिन स्थिर अवस्था में नहीं ठहरते: यह कोलाइड की प्रमुख विशेषता है। कोलाइडी कण (1–1000 nm) प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं (टिडल प्रभाव) और ब्राउनियन गति (Brownian motion) के कारण स्थिर अवस्था में नहीं बैठते।
- पूरी तरह से पारदर्शी और प्रकाश को प्रकीर्णित नहीं करता: यह वास्तविक विलयन (true solution) का गुण है (जैसे — चीनी का घोल)।
- कुछ समय बाद कण नीचे बैठ जाते हैं: यह निलंबन (suspension) का गुण है (जैसे — पानी में रेत)।
- कण नंगी आंखों से दिखाई देते हैं: यह निलंबन के कणों की विशेषता है; कोलाइडी कण नग्न आंखों से दिखाई नहीं देते, केवल अल्ट्रामाइक्रोस्कोप से दिखते हैं।
Quick Facts:
- कोलाइड में कणों का आकार 1 nm से 1000 nm के बीच होता है।
- टिडल प्रभाव (Tyndall effect) — प्रकाश की किरण को प्रकीर्णित करने की घटना।
- ब्राउनियन गति — कोलाइडी कणों की निरंतर, यादृच्छिक (random) गति।
- कोलाइड के उदाहरण: दूध, धुंआ, फोम, जैल, पेंट।
निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प निलंबन के गुण को प्रदर्शित नहीं करता है?
- निलंबन के कण, इससे गुजरने वाली प्रकाश किरण को प्रकीर्णित करते हैं।
- निलंबन एक विषमांगी मिश्रण है।
- निलंबन के कणों को अनावृत आँखों से नहीं देखा जा सकता है।
- निलंबन प्रकृति में अस्थिर है।
Explanation:
- निलंबन के कणों को अनावृत आँखों से नहीं देखा जा सकता है: यह कथन गलत है क्योंकि निलंबन के कणों का आकार > 1000 nm (1 माइक्रोमीटर) होता है, इसलिए वे नग्न आंखों से स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
- प्रकाश किरण को प्रकीर्णित करते हैं: सही, बड़े कण प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं और मार्ग दिखाई देता है।
- विषमांगी मिश्रण: सही, कण समान रूप से वितरित नहीं होते और मिश्रण असमान दिखता है।
- प्रकृति में अस्थिर: सही, गुरुत्वाकर्षण के कारण कण समय के साथ नीचे बैठ जाते हैं (sedimentation)।
Quick Facts:
- निलंबन के कणों का आकार > 100 nm (वास्तव में > 1000 nm या 1 माइक्रोमीटर)।
- उदाहरण: पानी में रेत, पानी में चाक पाउडर, गंदा पानी (muddy water)।
- निलंबन को निस्यंदन (filtration) द्वारा अलग किया जा सकता है।
यदि किसी चालक की लंबाई को तीन गुना कर दिया जाए, तथा अन्य कारक समान रहें, तो चालक का प्रतिरोध होगा:
- एक-छठा
- तीन गुना
- एक तिहाई
- वही
Equation: \( R \propto L \) → \( R_2 = 3R_1 \)
Explanation:
- तीन गुना: चालक का प्रतिरोध \( R \) उसकी लंबाई \( L \) के अनुक्रमानुपाती होता है (जब अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल \( A \) और प्रतिरोधकता \( \rho \) स्थिर हो): \( R = \rho \frac{L}{A} \). यदि \( L \) तीन गुना कर दिया जाए, तो \( R \) भी तीन गुना हो जाता है।
- एक-छठा: गलत, यह तब होता जब लंबाई 1/6 होती या क्षेत्रफल 6 गुना होता।
- एक तिहाई: गलत, यह तब होता जब लंबाई 1/3 होती।
- वही: गलत, प्रतिरोध लंबाई पर निर्भर करता है।
Quick Facts:
- प्रतिरोध का सूत्र: \( R = \rho \frac{L}{A} \), जहाँ \( \rho \) = प्रतिरोधकता (विशिष्ट प्रतिरोध), L = लंबाई, A = अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल।
- यदि किसी तार को खींचकर लंबा किया जाता है, तो उसका क्षेत्रफल घट जाता है, जिससे प्रतिरोध और अधिक बढ़ जाता है (क्योंकि आयतन स्थिर रहता है)।
- प्रतिरोध की SI इकाई ओम (\( \Omega \)) है।
एक विषम मिश्रण जिसमें विलेय कण विघटित नहीं होते हैं, बल्कि माध्यम में निलंबित रहते हैं, उन्हें ____ कहा जाता है।
- पायसीकरण
- संवहन
- निलंबन
- प्रसरण
Explanation:
- निलंबन (Suspension): यह एक विषमांगी मिश्रण है जिसमें विलेय कण (ठोस) विलायक (द्रव) में निलंबित रहते हैं, घुलते नहीं हैं। कण बड़े (>1000 nm) होते हैं और समय के साथ नीचे बैठ जाते हैं।
- पायसीकरण (Emulsification): दो अमिश्रणीय द्रवों (जैसे तेल और पानी) को मिलाकर पायस (emulsion) बनाने की प्रक्रिया, इसमें कण विघटित नहीं होते बल्कि परिक्षिप्त (dispersed) रहते हैं (कोलाइड का ही एक प्रकार)।
- संवहन (Convection): द्रव या गैस में ऊष्मा स्थानांतरण की विधि, मिश्रण नहीं।
- प्रसरण (Diffusion): कणों का उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर स्वतः फैलना, यह विलयन या गैसों में होता है।
Quick Facts:
- निलंबन के कण छानने (filtration) द्वारा अलग किए जा सकते हैं।
- निलंबन अस्थिर होते हैं — कण जम जाते हैं (sedimentation)।
- उदाहरण: पानी + रेत, पानी + चाक पाउडर, गंदा पानी।
साबुन अणु का जलरागी सिरा कैसा होता है?
- आयनिक और जल के साथ परस्पर क्रिया करता है
- उदासीन और अधुवीय
- अनायनिक और तेल में विलेय
- अनायनिक और जल में विलेय
Explanation:
- आयनिक और जल के साथ परस्पर क्रिया करता है: साबुन अणु का जलरागी (hydrophilic) सिरा आयनिक होता है (जैसे — COO⁻ Na⁺) और जल (ध्रुवीय) के साथ आयन-द्विध्रुवीय (ion-dipole) अंतःक्रिया करता है, जिससे यह पानी में घुलनशील हो जाता है।
- उदासीन और अधुवीय: गलत, यह जलविरोधी (hydrophobic) सिरे की विशेषता है।
- अनायनिक और तेल में विलेय: गलत, यह जलविरोधी सिरे की विशेषता है।
- अनायनिक और जल में विलेय: गलत, साबुन का जलरागी सिरा आयनिक होता है, अनायनिक नहीं।
Quick Facts:
- साबुन एक सोडियम या पोटेशियम लवण है जो उच्च फैटी एसिड (जैसे — स्टीयरिक, पामिटिक, ओलिक अम्ल) से बनता है।
- साबुन का जलविरोधी सिरा (hydrophobic tail) — लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला (अधुवीय, तेल में विलेय)।
- साबुन का जलरागी सिरा (hydrophilic head) — COO⁻ Na⁺ (आयनिक, ध्रुवीय, पानी में विलेय)।
निम्नलिखित में से किसका pH मान सबसे कम है?
- नींबू का रस
- रक्त
- मिल्क ऑफ मैग्नीशिया
- जठर रस
Explanation:
- जठर रस (Gastric juice): pH लगभग 1.5–2.0 होता है। यह अत्यधिक अम्लीय होता है क्योंकि इसमें हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) होता है, जो भोजन के पाचन में सहायता करता है और बैक्टीरिया को मारता है।
- नींबू का रस (Lemon juice): pH लगभग 2.0–2.5 होता है। यह अम्लीय है लेकिन जठर रस से कम अम्लीय।
- रक्त (Blood): pH लगभग 7.35–7.45 (थोड़ा क्षारीय) होता है।
- मिल्क ऑफ मैग्नीशिया (Milk of magnesia): pH लगभग 10.5 होता है (क्षारीय), यह एक एंटासिड है।
Quick Facts:
- pH स्केल 0 से 14 तक होता है। pH < 7 अम्लीय, pH = 7 उदासीन, pH > 7 क्षारीय।
- pH जितना कम होगा, अम्लता उतनी अधिक होगी (H⁺ आयन सांद्रता अधिक)।
- मानव पेट में HCl का pH लगभग 1.5 होता है, जो प्रोटीन पाचन एंजाइम पेप्सिन को सक्रिय करता है।
निम्नलिखित अभिक्रिया में कौन-सा रंग परिवर्तन देखा जाता है? Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu
- हरा से नीला
- नीला से हरा
- नीला से लाल
- लाल से हरा
Explanation:
- नीला से हरा: अभिक्रिया से पहले कॉपर सल्फेट (CuSO₄) का घोल नीले रंग का होता है (Cu²⁺ आयनों के कारण)। जब लोहे (Fe) की कील या चूर्ण को इसमें डाला जाता है, तो लोहा (Fe) कॉपर (Cu) को विस्थापित कर देता है क्योंकि Fe, Cu से अधिक क्रियाशील है। अब घोल में FeSO₄ बनता है, जिसका रंग हल्का हरा (Fe²⁺ आयन) होता है। कॉपर धातु (Cu) भूरे-लाल रंग की परत के रूप में जमा हो जाती है।
- हरा से नीला: गलत, यह विपरीत अभिक्रिया होती (जैसे — Cu + FeSO₄ → CuSO₄ + Fe) लेकिन यह संभव नहीं क्योंकि Cu Fe को विस्थापित नहीं कर सकता।
- नीला से लाल: गलत, घोल का रंग नीला से हरा होता है, लाल नहीं।
- लाल से हरा: गलत, प्रारंभिक रंग लाल नहीं था।
Quick Facts:
- यह एक विस्थापन अभिक्रिया (displacement reaction) है: Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu
- लोहा (Fe) कॉपर (Cu) से अधिक क्रियाशील है (धातु क्रियाशीलता श्रेणी — reactivity series)।
- Cu²⁺ आयन नीले रंग के होते हैं, Fe²⁺ आयन हल्के हरे रंग के होते हैं।
निम्नलिखित में से किसमें MgCl₂ विलेय है?
- पेट्रोल
- एसीटोन
- केरोसीन
- पानी
Explanation:
- पानी: MgCl₂ (मैग्नीशियम क्लोराइड) एक आयनिक यौगिक है। “समान समान को घोलता है” (like dissolves like) के सिद्धांत के अनुसार, आयनिक यौगिक ध्रुवीय विलायकों (जैसे — पानी) में घुलते हैं। पानी के ध्रुवीय अणु Mg²⁺ और Cl⁻ आयनों को जलयोजित (hydrate) करके उन्हें अलग कर लेते हैं और यौगिक घुल जाता है।
- पेट्रोल (Petrol): अध्रुवीय विलायक, आयनिक यौगिक नहीं घोलता।
- एसीटोन (Acetone): ध्रुवीय लेकिन अपेक्षाकृत कम, MgCl₂ बहुत कम या नहीं घुलता (आयनिक यौगिक जल में सर्वाधिक घुलते हैं)।
- केरोसीन (Kerosene): अध्रुवीय, आयनिक यौगिक नहीं घोलता।
Quick Facts:
- MgCl₂ एक आयनिक यौगिक है जो पानी में अत्यधिक घुलनशील है।
- यह समुद्री जल में पाया जाता है और इसका उपयोग विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाओं में होता है।
- ध्रुवीय विलायक (जल) आयनों को आकर्षित करके जलयोजन ऊर्जा (hydration energy) प्रदान करते हैं, जो जालक ऊर्जा (lattice energy) से अधिक होती है, जिससे यौगिक घुल जाता है।
मिश्र धातु एक ______ है।
- यौगिक
- समांगी मिश्रण
- विषमांगी मिश्रण
- तत्व
Explanation:
- समांगी मिश्रण (Homogeneous mixture): मिश्र धातु (alloy) दो या अधिक धातुओं (या धातु एवं अधातु) का समांगी ठोस मिश्रण होता है। इसमें घटक परमाणु स्तर पर समान रूप से वितरित होते हैं, इसलिए यह एक समांगी मिश्रण है।
- यौगिक (Compound): गलत, क्योंकि मिश्र धातु में घटकों का निश्चित अनुपात नहीं होता और ये रासायनिक रूप से बंधित नहीं होते।
- विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous mixture): गलत, क्योंकि मिश्र धातु में घटक सूक्ष्म स्तर पर समान रूप से वितरित होते हैं।
- तत्व (Element): गलत, मिश्र धातु में एक से अधिक तत्व होते हैं।
Quick Facts:
- मिश्र धातु के उदाहरण: पीतल (Brass — Cu + Zn), कांसा (Bronze — Cu + Sn), स्टेनलेस स्टील (Fe + Cr + Ni)।
- मिश्र धातुएँ शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक मजबूत, कठोर और संक्षारण प्रतिरोधी होती हैं।
- सोने (24 कैरेट) में मिश्र धातु (Cu, Ag) मिलाकर उसे सख्त बनाया जाता है (22 कैरेट, 18 कैरेट) क्योंकि शुद्ध सोना बहुत मुलायम होता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा रोजमर्रा का उदाहरण एक समांगी मिश्रण को दर्शाता है?
- जल में अच्छी तरह से मिश्रित तेल
- लौह रेतन के साथ समान रूप से मिश्रित रेत
- जल में मिला हुआ चॉक चूर्ण
- जल में पूर्णतः घुलित लवण
Explanation:
- जल में पूर्णतः घुलित लवण (Salt dissolved completely in water): यह एक समांगी मिश्रण है क्योंकि नमक (NaCl) पानी में पूर्णतः घुलकर एक सजातीय विलयन बनाता है, जिसमें हर जगह संघटन समान होता है और कण नग्न आंखों से दिखाई नहीं देते।
- जल में अच्छी तरह से मिश्रित तेल: विषमांगी (तेल और पानी अमिश्रणीय हैं, समय के साथ अलग हो जाते हैं) → कोलाइड/पायस (emulsion) भी हो सकता है।
- लौह रेतन के साथ समान रूप से मिश्रित रेत: विषमांगी (रेत और लोहे के चूर्ण के कण अलग-अलग दिखाई देते हैं और चुंबकीय रूप से अलग किए जा सकते हैं)।
- जल में मिला हुआ चॉक चूर्ण: विषमांगी (निलंबन — चाक के कण पानी में निलंबित रहते हैं और बैठ जाते हैं)।
Quick Facts:
- समांगी मिश्रण में कणों का आकार < 1 nm होता है।
- इसमें घटकों को भौतिक विधियों से अलग नहीं किया जा सकता (जैसे — निस्यंदन से अलग नहीं होता)।
- उदाहरण: चीनी का घोल, वायु (गैसीय मिश्रण), मिश्र धातु।
निम्नलिखित में से कौन-सा, मिश्रण को यौगिक से सर्वोत्तम रूप से विभेदित करता है?
- मिश्रणों को भौतिक विधियों से पृथक किया जा सकता है, जबकि यौगिकों को पृथक करने के लिए रासायनिक विधियों की आवश्यकता होती है।
- यौगिक अपने घटकों के व्यक्तिगत गुणधर्मों को बनाए रखते हैं।
- मिश्रणों का क्वथनांक सदैव निश्चित होता है।
- यौगिक प्रकृति में विषमांगी होते हैं, जबकि मिश्रण सदैव समांगी होते हैं।
Explanation:
- मिश्रणों को भौतिक विधियों से पृथक किया जा सकता है, जबकि यौगिकों को पृथक करने के लिए रासायनिक विधियों की आवश्यकता होती है: यह मुख्य अंतर है। मिश्रण में घटक अपने गुणधर्म बनाए रखते हैं और भौतिक विधियों (जैसे — निस्यंदन, आसवन, चुंबकीय पृथक्करण) द्वारा अलग किए जा सकते हैं। जबकि यौगिक में तत्व रासायनिक रूप से बंधित होते हैं और उन्हें अलग करने के लिए रासायनिक अभिक्रियाओं (जैसे — विद्युत अपघटन) की आवश्यकता होती है।
- यौगिक अपने घटकों के व्यक्तिगत गुणधर्मों को बनाए रखते हैं: गलत, यह मिश्रण की विशेषता है। यौगिक में नए गुणधर्म उत्पन्न होते हैं।
- मिश्रणों का क्वथनांक सदैव निश्चित होता है: गलत, मिश्रणों का क्वथनांक परिवर्ती होता है (जबकि शुद्ध पदार्थों का निश्चित होता है)।
- यौगिक प्रकृति में विषमांगी होते हैं, जबकि मिश्रण सदैव समांगी होते हैं: गलत, यौगिक समांगी होते हैं और मिश्रण समांगी या विषमांगी दोनों हो सकते हैं।
Quick Facts:
- मिश्रण के उदाहरण: वायु, समुद्री जल, पीतल।
- यौगिक के उदाहरण: जल (H₂O), सोडियम क्लोराइड (NaCl), कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)।
- यौगिक में घटक निश्चित अनुपात में होते हैं (नियत अनुपात का नियम — law of definite proportions)।
निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प किसी विलयन की सांद्रता को सर्वोत्तम रूप से परिभाषित करता है?
- दिए गए विलयन की मात्रा में उपस्थित विलायक की मात्रा
- दिए गए विलयन की मात्रा में उपस्थित विलेय की मात्रा
- दिए गए विलेय की मात्रा में उपस्थित विलायक की मात्रा
- दिए गए विलेय की मात्रा में उपस्थित विलयन की मात्रा
Explanation:
- दिए गए विलयन की मात्रा में उपस्थित विलेय की मात्रा: विलयन की सांद्रता (concentration) विलेय (solute) की मात्रा (द्रव्यमान, आयतन, या मोल) को विलयन (solution) की कुल मात्रा (द्रव्यमान, आयतन) से विभाजित करके व्यक्त की जाती है। यह सबसे सटीक परिभाषा है।
- दिए गए विलयन की मात्रा में उपस्थित विलायक की मात्रा: गलत, यह विलायक की मात्रा है, सांद्रता नहीं।
- दिए गए विलेय की मात्रा में उपस्थित विलायक की मात्रा: गलत, यह विलायक/विलेय अनुपात है, सांद्रता नहीं।
- दिए गए विलेय की मात्रा में उपस्थित विलयन की मात्रा: गलत, यह विपरीत अनुपात है।
Quick Facts:
- सांद्रता को व्यक्त करने के तरीके:
- द्रव्यमान प्रतिशत (Mass%): \( \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान}}{\text{विलयन का द्रव्यमान}} \times 100 \)
- आयतन प्रतिशत (Volume%): \( \frac{\text{विलेय का आयतन}}{\text{विलयन का आयतन}} \times 100 \)
- द्रव्यमान/आयतन प्रतिशत (Mass/Volume%): \( \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान}}{\text{विलयन का आयतन}} \times 100 \) (ग्राम/मिलीलीटर में)।
- मोलरता (Molarity, M): विलेय के मोल/विलयन का लीटर में आयतन।
निम्नलिखित में से किसके दो स्वभाव होते हैं: एक जलरागी (हाइड्रोफिलिक) और दूसरा जलविरोधी (हाइड्रोफोबिक)?
- चीनी
- ग्लूकोज
- सोडियम क्लोराइड
- साबुन
Explanation:
- साबुन (Soap): साबुन के अणु में दो सिरे होते हैं: एक लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला (जलविरोधी — hydrophobic) जो तेल/ग्रीस को आकर्षित करती है, और एक आयनिक समूह (जलरागी — hydrophilic) जो पानी को आकर्षित करता है। इस द्वि-स्वभाव (amphiphilic) गुण के कारण यह जल और तेल दोनों से अंतःक्रिया कर सकता है, जिससे सफाई क्रिया होती है।
- चीनी (Sugar): अत्यधिक जलरागी (hydrophilic) है, जलविरोधी नहीं।
- ग्लूकोज (Glucose): जलरागी, जलविरोधी नहीं (क्योंकि कई हाइड्रॉक्सिल समूह होते हैं जो पानी से हाइड्रोजन बंध बनाते हैं)।
- सोडियम क्लोराइड (NaCl): आयनिक, पूर्णतः जलरागी, जलविरोधी नहीं।
Quick Facts:
- द्वि-स्वभाव (amphiphilic) अणु → जिसमें जलरागी (hydrophilic) और जलविरोधी (hydrophobic) दोनों भाग होते हैं।
- अन्य उदाहरण: डिटर्जेंट, फॉस्फोलिपिड (कोशिका झिल्ली में पाए जाते हैं)।
- साबुन के अणु मिसेल (micelles) बनाते हैं जिससे तेल की बूंदें पानी में फैल जाती हैं (emulsification)।
धातु कार्बोनेट की अम्ल के साथ अभिक्रिया से कौन-कौन से उत्पाद बनते हैं?
- जल, कार्बन डाइऑक्साइड
- लवण, जल, कार्बन मोनोऑक्साइड
- लवण, कार्बन मोनोऑक्साइड
- लवण, जल, कार्बन डाइऑक्साइड
Equation: \( \text{MCO}_3 + 2\text{HCl} \rightarrow \text{MCl}_2 + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2 \)
Explanation:
- लवण, जल, कार्बन डाइऑक्साइड: जब कोई धातु कार्बोनेट (जैसे — Na₂CO₃, CaCO₃, MgCO₃) अम्ल (जैसे — HCl, H₂SO₄) के साथ अभिक्रिया करता है, तो संगत लवण, जल और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस बनती है। यह एक अभिलाक्षणिक अभिक्रिया है।
- जल, कार्बन डाइऑक्साइड: गलत, लवण भी बनता है।
- लवण, जल, कार्बन मोनोऑक्साइड: गलत, CO नहीं बनता (CO आमतौर पर अपूर्ण दहन में बनता है)।
- लवण, कार्बन मोनोऑक्साइड: गलत, जल और CO₂ बनते हैं।
Quick Facts:
- सामान्य अभिक्रिया: \( \text{MCO}_3 + 2\text{H}^+ \rightarrow \text{M}^{2+} + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2 \uparrow \)
- CO₂ गैस को चूने के पानी (Ca(OH)₂) में प्रवाहित करने पर वह दूधिया (milky) हो जाता है — यह CO₂ की पहचान है।
- उदाहरण: CaCO₃ + 2HCl → CaCl₂ + H₂O + CO₂↑
150 ग्राम जल में 50 ग्राम चीनी घोल कर बनाए विलयन में द्रव्यमान की सांद्रता ______ होगी।
- 48.2%
- 3%
- 25%
- 50%
Equation: \( \frac{50}{200} \times 100 = 25\% \)
Explanation:
- 25%: द्रव्यमान प्रतिशत (Mass%) = \( \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान}}{\text{विलयन का कुल द्रव्यमान}} \times 100 \). विलयन का कुल द्रव्यमान = विलेय (50g) + विलायक (150g) = 200g. अतः \( \frac{50}{200} \times 100 = 25\% \).
- 48.2%: गलत, यह गणना में त्रुटि है (शायद \( 50/103.7 \times 100 \))।
- 3%: गलत, यह बहुत कम है (50/1666 × 100 ≈ 3%)।
- 50%: गलत, यह तब होता जब विलेय और विलायक बराबर मात्रा में होते (जैसे — 50g चीनी + 50g जल)।
Quick Facts:
- द्रव्यमान प्रतिशत (w/w) — सांद्रता व्यक्त करने की सामान्य विधि।
- शर्करा का घोल (sugar solution) एक समांगी मिश्रण है।
- द्रव्यमान/आयतन प्रतिशत (w/v) — यदि विलयन का आयतन दिया हो।
निम्नलिखित में से कौन सा समांगी मिश्रण का उदाहरण नहीं है?
- पानी में लोहे की कीलों का मिश्रण
- पानी में कॉपर सल्फेट का मिश्रण
- पानी में नमक का मिश्रण
- पानी में चीनी का मिश्रण
Explanation:
- पानी में लोहे की कीलों का मिश्रण: यह एक विषमांगी मिश्रण है क्योंकि लोहे की कीलें (ठोस) पानी (द्रव) में नहीं घुलती हैं और स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। इन्हें सरलता से अलग किया जा सकता है (निस्यंदन या चुंबक द्वारा)।
- पानी में कॉपर सल्फेट का मिश्रण: समांगी (नीला विलयन बनता है, CuSO₄ पानी में घुल जाता है)।
- पानी में नमक का मिश्रण: समांगी (NaCl पानी में घुलकर पारदर्शी विलयन बनाता है)।
- पानी में चीनी का मिश्रण: समांगी (चीनी पानी में घुलकर पारदर्शी विलयन बनाती है)।
Quick Facts:
- समांगी मिश्रण → सभी घटक समान चरण (phase) में होते हैं और सूक्ष्म स्तर पर समान वितरण होता है।
- विषमांगी मिश्रण → घटक अलग-अलग चरणों में होते हैं और असमान वितरण होता है।
- पानी में लोहे की कीलें — एक निलंबन (suspension) का उदाहरण है (विषमांगी)।
निम्नलिखित में से कौन-सी एक ऊष्माक्षेपी संयोजन अभिक्रिया का उदाहरण है?
- जल में बिना बुझा हुआ चूना घोलना
- प्रकाश संश्लेषण
- जल में अमोनियम क्लोराइड घोलना
- श्वसन
Equation: \( \text{CaO} + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{Ca(OH)}_2 + \text{ऊष्मा} \)
Explanation:
- जल में बिना बुझा हुआ चूना घोलना (Slaking of lime): CaO (क्विकलाइम) + H₂O → Ca(OH)₂ (बुझा चूना — slaked lime) + ऊष्मा. यह एक संयोजन अभिक्रिया (combination reaction) है क्योंकि दो पदार्थ मिलकर एक नया पदार्थ बनाते हैं, और यह ऊष्माक्षेपी (exothermic) है क्योंकि ऊष्मा उत्सर्जित होती है।
- प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis): CO₂ + H₂O → C₆H₁₂O₆ + O₂, यह ऊष्माशोषी (endothermic) है क्योंकि यह प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करता है।
- जल में अमोनियम क्लोराइड घोलना: NH₄Cl + H₂O → NH₄⁺ + Cl⁻ + ऊष्मा अवशोषण (endothermic) — विलयन ठंडा हो जाता है।
- श्वसन (Respiration): C₆H₁₂O₆ + O₂ → CO₂ + H₂O + ऊर्जा, यह ऊष्माक्षेपी है लेकिन यह एक विघटन या ऑक्सीकरण अभिक्रिया है, संयोजन अभिक्रिया नहीं।
Quick Facts:
- ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic) → ऊष्मा उत्सर्जित होती है (ΔH ऋणात्मक)।
- ऊष्माशोषी अभिक्रिया (Endothermic) → ऊष्मा अवशोषित होती है (ΔH धनात्मक)।
- संयोजन अभिक्रिया (Combination): A + B → AB
- बुझे चूने (Ca(OH)₂) का उपयोग सफेदी (whitewash) में होता है।
एक शिक्षक छात्रों को प्रयोगशाला में निलंबन तैयार करने के लिए कहता है। किस निर्देश का पालन किया जाना चाहिए?
- अल्कोहल को पानी के साथ मिलाएं
- पानी को उबालने के लिए गर्म करें
- चीनी को पानी में घोलें
- रेत को पानी के साथ मिलाएं और हिलाएं
Explanation:
- रेत को पानी के साथ मिलाएं और हिलाएं: रेत (ठोस) पानी (द्रव) में अघुलनशील है। मिलाने पर यह एक निलंबन (suspension) बनाता है जिसमें रेत के कण पानी में तैरते (निलंबित) रहते हैं। थोड़ी देर बाद वे नीचे बैठ जाते हैं, जो निलंबन का गुण है।
- अल्कोहल को पानी के साथ मिलाएं: यह एक विलयन (solution) बनाता है (समांगी), क्योंकि अल्कोहल पानी में पूर्णतः घुलनशील है (वास्तविक विलयन)।
- पानी को उबालने के लिए गर्म करें: यह एक भौतिक परिवर्तन है, मिश्रण नहीं।
- चीनी को पानी में घोलें: यह एक विलयन (समांगी) बनाता है, निलंबन नहीं।
Quick Facts:
- निलंबन (Suspension) → विषमांगी, कण > 1000 nm, बैठ जाते हैं (sedimentation)।
- निलंबन को छानकर (filtration) अलग किया जा सकता है।
- रेत + जल → निलंबन (उदाहरण: गंदा पानी — muddy water)।
यदि द्रव माध्यम में केवल जल है, तो मिश्रण को ______ कहा जाता है।
- परजीवी मिश्रण
- गर्भनिरोधक मिश्रण
- अत्यधिक मिश्रित
- जलीय मिश्रण
Explanation:
- जलीय मिश्रण (Aqueous mixture/solution): जब मिश्रण या विलयन में विलायक (solvent) जल (water, H₂O) होता है, तो उसे जलीय (aqueous) कहा जाता है। उदाहरण: NaCl का जलीय विलयन (aqueous solution), चीनी का जलीय विलयन।
- परजीवी मिश्रण (Parasitic mixture): कोई रासायनिक शब्द नहीं है।
- गर्भनिरोधक मिश्रण (Contraceptive mixture): कोई रासायनिक शब्द नहीं है।
- अत्यधिक मिश्रित (Highly mixed): कोई विशिष्ट रासायनिक शब्द नहीं है।
Quick Facts:
- जलीय विलयन में विलेय पानी में घुला होता है।
- विलायक यदि जल न हो (जैसे — अल्कोहल, ईथर, एसीटोन) तो उसे अजलीय (non-aqueous) कहते हैं।
- जलीय विलयन में \[ \text{[H}_3\text{O}^+ \] \] और \[ \text{[OH}^- \] \] आयनों की सांद्रता pH को निर्धारित करती है।
यदि किसी चालक की लंबाई दोगुनी कर दी जाए, तो चालक का प्रतिरोध क्या होगा? (अन्य पैरामीटर समान रखे गए हैं)
- आधा
- समान
- दोगुना
- एक चौथाई
Equation: \( R \propto L \) → \( R_2 = 2R_1 \)
Explanation:
- दोगुना: \( R = \rho \frac{L}{A} \). यदि L दोगुना हो जाता है, तो R भी दोगुना हो जाता है (A और ρ स्थिर रहने पर) क्योंकि प्रतिरोध लंबाई के अनुक्रमानुपाती होता है।
- आधा: गलत, यह तब होता जब क्षेत्रफल दोगुना हो या लंबाई आधी हो।
- समान: गलत, प्रतिरोध लंबाई पर निर्भर करता है।
- एक चौथाई: गलत, यह तब होता जब क्षेत्रफल 4 गुना हो या लंबाई 1/4 हो।
Quick Facts:
- प्रतिरोध का सूत्र: \( R = \rho \frac{L}{A} \)
- प्रतिरोध, लंबाई (L) के अनुक्रमानुपाती और क्षेत्रफल (A) के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
- यदि किसी तार को दोगुना लंबा करने के लिए खींचा जाए, तो क्षेत्रफल आधा हो जाता है, जिससे प्रतिरोध \( 4 \) गुना हो जाता है (क्योंकि आयतन स्थिर रहता है: \( A_1 L_1 = A_2 L_2 \))।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन, यौगिक को विलयन से सर्वोत्तम रूप से अलग करता है?
- यौगिक को भौतिक विधियों द्वारा उसके घटकों में पृथक किया जा सकता है, जबकि विलयन में ऐसा नहीं किया जा सकता है।
- यौगिक और विलयन दोनों सदैव समांगी और रासायनिक रूप से आबंधित होते हैं।
- यौगिक का परिवर्ती संघटन होता है, जबकि विलयन का निश्चित संघटन होता है।
- यौगिक का एक निश्चित संघटन और गुणधर्म होते हैं, जो उसके संघटक तत्वों से भिन्न होते हैं, जबकि विलयन में ऐसा नहीं होता है।
Explanation:
- यौगिक का एक निश्चित संघटन और गुणधर्म होते हैं, जो उसके संघटक तत्वों से भिन्न होते हैं, जबकि विलयन में ऐसा नहीं होता है: यौगिक (जैसे — H₂O) में H और O का अनुपात निश्चित (2:1) होता है और इसके गुणधर्म (जल) H₂ और O₂ से पूर्णतः भिन्न होते हैं। विलयन (जैसे — NaCl का जलीय विलयन) में NaCl और H₂O के अनुपात परिवर्ती हो सकते हैं और इसके गुणधर्म NaCl और H₂O के मिश्रण के समान होते हैं (आंशिक रूप से)।
- यौगिक को भौतिक विधियों द्वारा पृथक किया जा सकता है: गलत, यह मिश्रण (विलयन) की विशेषता है।
- यौगिक और विलयन दोनों सदैव समांगी और रासायनिक रूप से आबंधित होते हैं: गलत, विलयन में रासायनिक बंध नहीं होते।
- यौगिक का परिवर्ती संघटन होता है: गलत, यौगिक का संघटन निश्चित होता है (नियत अनुपात का नियम)।
Quick Facts:
- यौगिक → रासायनिक यौगिक, निश्चित अनुपात, नए गुणधर्म, रासायनिक विधियों से पृथक।
- विलयन → भौतिक मिश्रण, परिवर्ती अनुपात, व्यक्तिगत गुणधर्म बने रहते हैं, भौतिक विधियों से पृथक।
______ को विद्युत ऋणात्मक तत्व के रूप में जाना जाता है क्योंकि वे इलेक्ट्रॉनों के लाभ से ऋणावेशित आयन बनाते हैं।
- अधातु
- मिश्रण
- मिश्र धातु
- यौगिक
Explanation:
- अधातु (Non-metals): अधातुएँ विद्युत ऋणात्मक (electronegative) होती हैं क्योंकि इनके परमाणुओं में संयोजी कोश में 4–7 इलेक्ट्रॉन होते हैं और वे अष्टक (octet) प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं, जिससे वे ऋणावेशित आयन (anions) बनाते हैं। उदाहरण: Cl + e⁻ → Cl⁻, O + 2e⁻ → O²⁻।
- मिश्रण (Mixture): यह कोई तत्व नहीं है, विद्युत ऋणात्मकता का गुण नहीं होता।
- मिश्र धातु (Alloy): यह मिश्रण है, तत्व नहीं, विद्युत ऋणात्मकता नहीं।
- यौगिक (Compound): यह तत्वों से बना होता है, लेकिन विद्युत ऋणात्मक तत्व नहीं कहलाता (यह गुण तत्वों का है)।
Quick Facts:
- धातु → विद्युत धनात्मक (electropositive) — इलेक्ट्रॉन त्याग कर धनायन (cation) बनाते हैं।
- अधातु → विद्युत ऋणात्मक (electronegative) — इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋणायन (anion) बनाते हैं।
- विद्युत ऋणात्मकता का क्रम (पॉलिंग स्केल): F > O > Cl > N > Br > I > S > C > H।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन, मिश्रण को यौगिक से सर्वोत्तम रूप से विभेदित करता है?
- यौगिक अपने संघटक तत्वों के गुणधर्मों को दर्शाता है।
- मिश्रण में तत्व सदैव एक निश्चित अनुपात में होते हैं।
- यौगिक को उसके संघटकों में भौतिक विधियों द्वारा पृथक किया जा सकता है।
- मिश्रण अपने संघटकों के अलग-अलग गुणधर्मों को प्रतिधारित रखता है।
Explanation:
- मिश्रण अपने संघटकों के अलग-अलग गुणधर्मों को प्रतिधारित रखता है: मिश्रण (जैसे — NaCl + रेत) में प्रत्येक घटक अपने मूल गुणधर्म (NaCl का नमकीन स्वाद, रेत का कठोरता) को बनाए रखता है। जबकि यौगिक (जैसे — NaCl) में Na और Cl के गुणधर्म (Na की अभिक्रियाशीलता, Cl₂ की विषाक्तता) समाप्त हो जाते हैं और नए गुणधर्म (NaCl का खाने योग्य लवण) उत्पन्न होते हैं।
- यौगिक अपने संघटक तत्वों के गुणधर्मों को दर्शाता है: गलत, यह मिश्रण की विशेषता है।
- मिश्रण में तत्व सदैव एक निश्चित अनुपात में होते हैं: गलत, यह यौगिक की विशेषता है।
- यौगिक को भौतिक विधियों द्वारा पृथक किया जा सकता है: गलत, यह मिश्रण की विशेषता है।
Quick Facts:
- मिश्रण — भौतिक परिवर्तन द्वारा बनता है, ऊष्मा का उत्सर्जन/अवशोषण नहीं होता।
- यौगिक — रासायनिक परिवर्तन द्वारा बनता है, ऊष्मा उत्सर्जित/अवशोषित हो सकती है।
पृथक्करण फ़नल का उपयोग ______ के मिश्रण के पृथक्करण के लिए किया जाता है।
- मिश्रणीय तरल पदार्थों
- नमक और कपूर
- काली स्याही में मिश्रित डाई
- अमिश्रणीय तरल पदार्थों
Explanation:
- अमिश्रणीय तरल पदार्थों (Immiscible liquids): पृथक्करण फ़नल (separating funnel) का उपयोग दो अमिश्रणीय तरलों (जो आपस में मिलते नहीं हैं) को अलग करने के लिए किया जाता है, जैसे — तेल और पानी। घनत्व के अंतर के कारण निचली परत को नल के माध्यम से निकाला जाता है।
- मिश्रणीय तरल पदार्थों (Miscible liquids): इन्हें आसवन (distillation) या प्रभाजी आसवन (fractional distillation) द्वारा अलग किया जाता है (जैसे — अल्कोहल और पानी)।
- नमक और कपूर: इन्हें उर्ध्वपातन (sublimation) द्वारा अलग किया जाता है (कपूर उर्ध्वपातित होता है)।
- काली स्याही में मिश्रित डाई: इसे क्रोमैटोग्राफी (chromatography) द्वारा अलग किया जाता है।
Quick Facts:
- अमिश्रणीय तरल → घनत्व में अंतर होता है (जैसे — तेल 0.9 g/mL, पानी 1.0 g/mL)।
- पृथक्करण फ़नल में भारी तरल (higher density) नीचे आता है।
- उदाहरण: मिट्टी के तेल (kerosene) और पानी को अलग करना।
निम्नलिखित में से कौन सी पृथक्करण तकनीक का उपयोग रेत से लोहे के पिनों के पृथक्करण के लिए किया जा सकता है?
- वाष्पीकरण
- चुंबकीय पृथक्करण
- प्रभाजी आसवन
- निस्यंदन
Explanation:
- चुंबकीय पृथक्करण (Magnetic separation): लोहे के पिन (Fe) चुंबकीय (ferromagnetic) होते हैं, जबकि रेत (SiO₂) अचुंबकीय (non-magnetic) होती है। एक चुंबक का उपयोग करके लोहे के पिनों को रेत से अलग किया जा सकता है।
- वाष्पीकरण (Evaporation): इसका उपयोग विलयन से विलेय को अलग करने के लिए किया जाता है (जैसे — नमक को पानी से अलग करना)।
- प्रभाजी आसवन (Fractional distillation): मिश्रणीय तरलों को उनके क्वथनांक में अंतर के आधार पर अलग करने के लिए (जैसे — पेट्रोलियम के विभिन्न अंश)।
- निस्यंदन (Filtration): अघुलनशील ठोस को द्रव से अलग करने के लिए (जैसे — पानी से रेत अलग करना)। लेकिन यहाँ लोहे के पिन और रेत दोनों ठोस हैं, इसलिए निस्यंदन काम नहीं करेगा।
Quick Facts:
- चुंबकीय पृथक्करण का उपयोग उद्योगों में अयस्कों (ores) को गैंग (gangue) से अलग करने के लिए किया जाता है।
- लोहा, कोबाल्ट, निकल चुंबकीय हैं।
- रेत (silica) अचुंबकीय है।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन कोलाइड के लिए गलत है?
- कोलाइड एक समांगी मिश्रण है।
- कोलाइड एक विषमांगी मिश्रण है।
- कोलाइड के कण इससे गुजरने वाली प्रकाश की किरण को प्रकीर्णित करते हैं।
- कोलाइड के कण स्थिर रहने पर नीचे नहीं बैठते।
Explanation:
- कोलाइड एक समांगी मिश्रण है: यह कथन गलत है क्योंकि कोलाइड वास्तव में एक विषमांगी मिश्रण है (भले ही यह आंखों को समांगी दिखता हो)। कोलाइडी कण (1–1000 nm) परिक्षिप्त (dispersed) होते हैं और माध्यम में समान रूप से वितरित होते हैं लेकिन आणविक स्तर पर वे समांगी नहीं होते (टिडल प्रभाव और ब्राउनियन गति इसकी विषमांगीता को दर्शाते हैं)।
- कोलाइड एक विषमांगी मिश्रण है: सही, यह कोलाइड की परिभाषा है।
- कोलाइड के कण प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं: सही, यह टिडल प्रभाव (Tyndall effect) है।
- कोलाइड के कण स्थिर रहने पर नीचे नहीं बैठते: सही, ब्राउनियन गति के कारण वे निलंबित रहते हैं (निलंबन के विपरीत)।
Quick Facts:
- कोलाइड → कणों का आकार 1–1000 nm, प्रकाश प्रकीर्णन (Tyndall effect), ब्राउनियन गति।
- कोलाइड के प्रकार: सॉल (sol), जैल (gel), पायस (emulsion), फोम (foam), एरोसोल (aerosol)।
- उदाहरण: दूध, धुंआ, कोहरा, पेंट, रक्त।
साबुन और उसकी सफाई क्रिया के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
- साबुन के अणु का जलरागी भाग जल को प्रतिकर्षित करता है, जिससे तैलीय पदार्थों को हटाने में सहायता मिलती है।
- साबुन के अणुओं में जलरागी और जलविरागी दोनों सिरे होते हैं, जिससे वे जल और तेल दोनों में विलेय होते हैं।
- साबुन अणु का जलरागी भाग हाइड्रोकार्बन में विलेय होता है, जबकि जलविरागी भाग जल की ओर आकर्षित होता है।
- साबुन के अणु मिसेल बनाते हैं, जो तेल और ग्रीस को फंसा लेते हैं, जिससे वे जल में परिक्षिप्त हो जाते हैं और बह जाते हैं।
Explanation:
- साबुन के अणुओं में जलरागी और जलविरागी दोनों सिरे होते हैं, जिससे वे जल और तेल दोनों में विलेय होते हैं: यह कथन गलत है क्योंकि साबुन के अणु जल और तेल दोनों में विलेय नहीं होते (यदि ऐसा होता तो वे अलग नहीं हो पाते)। वास्तव में, साबुन के जलरागी सिरे (hydrophilic) पानी में घुलनशील होते हैं और जलविरोधी सिरे (hydrophobic) तेल में घुलनशील होते हैं। यह द्वि-स्वभाव (amphiphilic) उन्हें तेल और पानी के बीच इंटरफ़ेस (interface) पर व्यवस्थित होने देता है, जिससे मिसेल (micelles) बनते हैं।
- साबुन अणु का जलरागी भाग जल को प्रतिकर्षित करता है: गलत (यह स्वयं गलत है, लेकिन प्रश्न में “गलत” कथन एक है; ध्यान दें — जलरागी भाग जल को आकर्षित करता है, प्रतिकर्षित नहीं। यह कथन भी गलत है, लेकिन विकल्प (b) अधिक स्पष्ट रूप से गलत है क्योंकि यह कहता है कि साबुन “जल और तेल दोनों में विलेय है” — जोकि पूर्णतः सत्य नहीं है। वास्तविकता यह है कि साबुन जल में घुलनशील है और तेल में घुलनशील नहीं, बल्कि यह तेल के साथ अंतःक्रिया करता है।)
- साबुन अणु का जलरागी भाग हाइड्रोकार्बन में विलेय होता है, जबकि जलविरागी भाग जल की ओर आकर्षित होता है: यह भी गलत है (उल्टा है — जलरागी भाग जल में विलेय, जलविरोधी भाग हाइड्रोकार्बन/तेल में विलेय)।
- साबुन के अणु मिसेल बनाते हैं: सही, यह साबुन की सफाई क्रिया का आधार है।
Quick Facts:
- साबुन की सफाई क्रिया → मिसेल (micelle) निर्माण, जलविरोधी सिरा तेल को घेरता है और जलरागी सिरा पानी की ओर होता है, जिससे तेल की बूंदें पानी में निलंबित हो जाती हैं (emulsification) और धुल जाती हैं।
- साबुन अणु: R–COO⁻ Na⁺ (R = लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला, जलविरोधी; COO⁻Na⁺ जलरागी)।
निम्नलिखित में से कौन-सा एक, समांगी मिश्रण (homogeneous mixture) है?
- रेत और लोहा
- वायु
- जल और बर्फ
- तेल और जल
Explanation:
- वायु (Air): वायु गैसों (N₂, O₂, CO₂, Ar, जलवाष्प आदि) का एक समांगी मिश्रण है क्योंकि सभी गैसें समान चरण (गैसीय) में हैं और अणु स्तर पर समान रूप से वितरित हैं।
- रेत और लोहा: विषमांगी (ठोस-ठोस, अलग-अलग कण दिखाई देते हैं, चुंबक द्वारा अलग किए जा सकते हैं)।
- जल और बर्फ: विषमांगी (एक ही पदार्थ के दो चरण — द्रव और ठोस, एक विषमांगी मिश्रण है, भले ही रासायनिक रूप से समान हो, लेकिन भौतिक रूप से यह विषमांगी है)।
- तेल और जल: विषमांगी (अमिश्रणीय द्रव, अलग-अलग परतें बनाते हैं)।
Quick Facts:
- वायु → गैसीय समांगी मिश्रण का उत्कृष्ट उदाहरण।
- समांगी मिश्रण को विलयन (solution) भी कहा जाता है।
- वायु में N₂ (~78%), O₂ (~21%), CO₂ (0.03%), अन्य गैसें।
निम्नलिखित में से कौन-सा, टिडल प्रभाव नहीं दिखाएगा?
- पायस (Emulsion)
- दुग्ध (Milk)
- कॉपर सल्फेट विलयन (Copper sulphate solution)
- मंड (Starch)
Explanation:
- कॉपर सल्फेट विलयन (CuSO₄ solution): यह एक वास्तविक विलयन (true solution) है। इसमें कणों का आकार < 1 nm होता है, जो प्रकाश को प्रकीर्णित नहीं करते, इसलिए यह टिडल प्रभाव (Tyndall effect) नहीं दिखाता है।
- पायस (Emulsion): एक कोलाइडी मिश्रण है (जैसे — तेल और पानी का मिश्रण), टिडल प्रभाव दिखाता है।
- दुग्ध (Milk): एक कोलाइड (वसा गोलिकाएँ जल में परिक्षिप्त), टिडल प्रभाव दिखाता है।
- मंड (Starch): स्टार्च का जलीय विलयन एक कोलाइड है, टिडल प्रभाव दिखाता है।
Quick Facts:
- टिडल प्रभाव → प्रकाश की किरण का परिक्षिप्त कणों द्वारा प्रकीर्णन (scattering)।
- यह कोलाइड और निलंबन में दिखता है, लेकिन वास्तविक विलयन (true solution) में नहीं।
- उदाहरण: कोहरे में हेडलाइट की किरण दिखना — टिडल प्रभाव।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन, किसी यौगिक को विलयन से सर्वोत्तम रूप से विभेदित करता है?
- यौगिक दो या दो से अधिक तत्वों के मिश्रण होते हैं, जबकि विलयन केवल यौगिकों के मिश्रण होते हैं।
- यौगिक को भौतिक विधियों द्वारा पृथक किया जा सकता है, जबकि विलयन को पृथक नहीं किया जा सकता।
- यौगिक सदैव द्रव होते हैं, लेकिन विलयन किसी भी अवस्था में हो सकते हैं।
- विलयन के विपरीत, यौगिक का एक निश्चित संघटन और निश्चित गुणधर्म होते हैं।
Explanation:
- विलयन के विपरीत, यौगिक का एक निश्चित संघटन और निश्चित गुणधर्म होते हैं: यौगिक (जैसे — H₂O) का H और O का अनुपात सदैव 2:1 होता है और इसके गुणधर्म (क्वथनांक 100°C, घनत्व 1 g/mL) निश्चित होते हैं। विलयन (जैसे — NaCl का जलीय विलयन) में NaCl की मात्रा परिवर्ती हो सकती है, और गुणधर्म (घनत्व, क्वथनांक) बदलते रहते हैं।
- यौगिक मिश्रण होते हैं: गलत, यौगिक रासायनिक रूप से बंधित होते हैं।
- यौगिक को भौतिक विधियों से पृथक किया जा सकता है: गलत, यह विलयन (मिश्रण) की विशेषता है।
- यौगिक सदैव द्रव होते हैं: गलत, यौगिक ठोस (NaCl), द्रव (H₂O), गैस (CO₂) सभी अवस्थाओं में हो सकते हैं।
Quick Facts:
- यौगिक → रासायनिक संयोजन, निश्चित अनुपात, नए गुणधर्म, रासायनिक विधियों से पृथक।
- विलयन → भौतिक मिश्रण, परिवर्ती अनुपात, घटकों के गुणधर्म बने रहते हैं, भौतिक विधियों से पृथक।
एक बीकर में थोड़ी मात्रा में कॉपर ऑक्साइड लिया जाता है और उसमें तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल को धीरे-धीरे हिलाते हुए मिलाया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप ………………..होता है।
- कॉपर क्लोराइड के लाल-भूरे रंग के घोल का निर्माण
- कॉपर क्लोराइड के नील-हरे रंग के घोल का निर्माण
- क्यूप्रिक क्लोराइड के लाल-भूरे रंग के घोल का निर्माण
- कॉपर क्लोराइड के हरे रंग के घोल का निर्माण
Equation: \( \text{CuO} + 2\text{HCl} \rightarrow \text{CuCl}_2 + \text{H}_2\text{O} \)
Explanation:
- कॉपर क्लोराइड के नील-हरे रंग के घोल का निर्माण: कॉपर ऑक्साइड (CuO, काला ठोस) जब तनु HCl के साथ अभिक्रिया करता है, तो कॉपर क्लोराइड (CuCl₂) बनता है, जो जल में नीला-हरा (blue-green) विलयन बनाता है (Cu²⁺ आयनों के कारण)। यह एक उदासीनीकरण अभिक्रिया है (धातु ऑक्साइड + अम्ल → लवण + जल)।
- लाल-भूरा रंग: गलत, Cu₂O (कॉपर(I) ऑक्साइड) लाल होता है, लेकिन यहाँ CuO (कॉपर(II) ऑक्साइड) है।
- हरा रंग: गलत, CuCl₂ का विलयन नीला-हरा होता है (हरा नहीं)।
Quick Facts:
- CuO (काला) + 2HCl (रंगहीन) → CuCl₂ (नीला-हरा) + H₂O
- धातु ऑक्साइड क्षारीय होते हैं, इसलिए अम्ल के साथ अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं।
- CuCl₂ का जलीय विलयन नीला-हरा होता है (जलयोजित Cu²⁺ आयन)।
जब मिश्रण को शांत छोड़ दिया जाता है, तो निलंबन में कणों का क्या होता है?
- कण विलायक में घुल जाते हैं।
- जब कणों को शांत छोड़ दिया जाता है, तो वे नीचे बैठ जाते हैं।
- मिश्रण स्पष्ट और पारदर्शी हो जाता है।
- मिश्रण स्कंदित हो जाता है तथा इसे मिलाने की आवश्यकता नहीं होती है।
Explanation:
- जब कणों को शांत छोड़ दिया जाता है, तो वे नीचे बैठ जाते हैं: निलंबन (suspension) में कण बड़े (>1000 nm) होते हैं। गुरुत्वाकर्षण बल के कारण वे धीरे-धीरे नीचे बैठ जाते हैं (sedimentation)। यह निलंबन की प्रमुख विशेषता है।
- कण विलायक में घुल जाते हैं: गलत, निलंबन में कण घुलते नहीं हैं (अघुलनशील)।
- मिश्रण स्पष्ट और पारदर्शी हो जाता है: गलत, निलंबन अपारदर्शी (opaque) होता है, बैठने पर भी यह स्पष्ट नहीं होता (ऊपरी द्रव स्पष्ट हो सकता है, लेकिन मिश्रण नहीं)।
- मिश्रण स्कंदित हो जाता है: स्कंदन (coagulation) कोलाइड में होता है (विद्युत अपघट्य मिलाने पर), निलंबन में नहीं।
Quick Facts:
- अवसादन (Sedimentation) → गुरुत्वाकर्षण के कारण कणों का नीचे बैठना।
- निलंबन को अपकेंद्रण (centrifugation) द्वारा भी अलग किया जा सकता है।
- उदाहरण: गंदा पानी (muddy water) को शांत छोड़ने पर मिट्टी के कण नीचे बैठ जाते हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा निलंबन का उदाहरण है?
- पानी में दूध की कुछ बूँदें
- पानी में चीनी का विलयन
- पानी में तेल
- पानी में चाक का पाउडर
Explanation:
- पानी में चाक का पाउडर (Chalk powder in water): चाक (CaCO₃) पानी में अघुलनशील है और इसके बड़े कण (> 1000 nm) पानी में निलंबित रहते हैं; यह एक निलंबन (suspension) है। थोड़ी देर बाद चाक के कण नीचे बैठ जाते हैं।
- पानी में दूध की कुछ बूँदें: यह एक पायस (emulsion) है, जो कोलाइड का एक प्रकार है (दूध के वसा गोलिकाएँ, आकार 1–1000 nm)।
- पानी में चीनी का विलयन: वास्तविक विलयन (true solution), समांगी।
- पानी में तेल: अमिश्रणीय द्रवों का मिश्रण (विषमांगी) — यह एक पायस (emulsion) है, निलंबन नहीं (क्योंकि दोनों द्रव हैं)।
Quick Facts:
- निलंबन → ठोस-द्रव विषमांगी मिश्रण (कण > 1000 nm)।
- पायस (Emulsion) → द्रव-द्रव विषमांगी मिश्रण (कोलाइड)।
- चाक का पाउडर (CaCO₃) — निलंबन का सामान्य उदाहरण।
SI इकाइयों में व्यक्त करने पर एक कैरेट का मान क्या होता है?
- 500 मिलीग्राम
- 1 ग्राम
- 100 मिलीग्राम
- 200 मिलीग्राम
Explanation:
- 200 मिलीग्राम (mg): 1 कैरेट (carat) = 200 मिलीग्राम = 0.2 ग्राम। यह रत्नों (gemstones) और मोतियों (pearls) के द्रव्यमान मापने की मानक इकाई है।
- 500 मिलीग्राम: गलत (यह 0.5 ग्राम है, जो 2.5 कैरेट के बराबर होगा)।
- 1 ग्राम: गलत (1 ग्राम = 5 कैरेट)।
- 100 मिलीग्राम: गलत (0.5 कैरेट)।
Quick Facts:
- 1 कैरेट = 200 mg = 0.2 g = 2 × 10⁻⁴ kg (SI में)
- कैरेट का उपयोग हीरे, माणिक्य, नीलम आदि रत्नों के भार मापने के लिए किया जाता है।
- सोने की शुद्धता को भी कैरेट में मापा जाता है (24 कैरेट = शुद्ध सोना, 22 कैरेट = 22 भाग सोना + 2 भाग मिश्र धातु)।
निम्नलिखित विकल्पों में से कौन-सा, निलंबन का एक गुण है?
- विलेय कणों को निस्यंदन प्रक्रिया द्वारा पृथक नहीं किया जा सकता है
- कण जमते नहीं हैं
- कणों को नग्न आंखों से नहीं देखा जा सकता है
- निलंबन एक विषमांगी मिश्रण है
Explanation:
- निलंबन एक विषमांगी मिश्रण है: यह निलंबन का मूल गुण है क्योंकि इसमें कण समान रूप से वितरित नहीं होते और अलग-अलग चरण (ठोस और द्रव) होते हैं।
- कणों को निस्यंदन द्वारा पृथक नहीं किया जा सकता: गलत, निलंबन के कण बड़े होते हैं, इसलिए उन्हें फिल्टर पेपर द्वारा अलग किया जा सकता है (निस्यंदन संभव है)।
- कण जमते नहीं हैं: गलत, निलंबन के कण समय के साथ बैठ जाते हैं (जमाव — sedimentation)।
- कणों को नग्न आंखों से नहीं देखा जा सकता: गलत, निलंबन के कण > 1000 nm होते हैं और नग्न आंखों से दिखाई देते हैं।
Quick Facts:
- निलंबन → विषमांगी, कण दिखाई देते हैं, बैठ जाते हैं, निस्यंदन द्वारा अलग किए जा सकते हैं।
- विलयन → समांगी, कण दिखाई नहीं देते, निस्यंदन द्वारा अलग नहीं होते।
- कोलाइड → विषमांगी, कण दिखाई नहीं देते (माइक्रोस्कोप से दिखते हैं), निस्यंदन द्वारा अलग नहीं होते।
निम्नलिखित में से कौन-सा लवण, जल में घुलने पर pH मान 7 से अधिक वाला विलयन बनाएगा?
- अमोनियम क्लोराइड
- कॉपर सल्फेट
- सोडियम क्लोराइड
- सोडियम एसीटेट
Explanation:
- सोडियम एसीटेट (CH₃COONa): यह एक क्षारकीय लवण (basic salt) है क्योंकि यह प्रबल क्षार (NaOH) और दुर्बल अम्ल (CH₃COOH) से बना है। जल में घुलने पर यह जल अपघटन (hydrolysis) से गुजरता है: CH₃COO⁻ + H₂O ⇌ CH₃COOH + OH⁻. OH⁻ आयन उत्पन्न होते हैं, जिससे विलयन क्षारीय (pH > 7) हो जाता है।
- अमोनियम क्लोराइड (NH₄Cl): प्रबल अम्ल (HCl) और दुर्बल क्षार (NH₄OH) से बना, जल अपघटन से H⁺ आयन बनते हैं → अम्लीय (pH < 7)।
- कॉपर सल्फेट (CuSO₄): प्रबल अम्ल (H₂SO₄) और दुर्बल क्षार (Cu(OH)₂) से बना → अम्लीय (pH < 7)।
- सोडियम क्लोराइड (NaCl): प्रबल अम्ल (HCl) और प्रबल क्षार (NaOH) से बना → उदासीन (pH ≈ 7)।
Quick Facts:
- प्रबल अम्ल + प्रबल क्षार → उदासीन लवण (pH ≈ 7) — NaCl, KNO₃
- प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षार → अम्लीय लवण (pH < 7) — NH₄Cl, CuSO₄
- दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षार → क्षारीय लवण (pH > 7) — CH₃COONa, Na₂CO₃
निम्नलिखित में से कौन-सा व्यंजक विलयन के द्रव्यमान द्वारा द्रव्यमान प्रतिशत के लिए सही सूत्र देता है?
- (विलेय का आयतन)/(विलयन का द्रव्यमान) × 100
- (विलायक का द्रव्यमान)/(विलयन का द्रव्यमान) × 100
- (विलेय का द्रव्यमान)/(विलयन का द्रव्यमान) × 100
- (विलेय का द्रव्यमान)/(विलयन का आयतन) × 100
Explanation:
- (विलेय का द्रव्यमान)/(विलयन का द्रव्यमान) × 100: यह द्रव्यमान प्रतिशत (w/w%) का सही सूत्र है। इसे “द्रव्यमान द्वारा द्रव्यमान प्रतिशत” (mass by mass percentage) कहते हैं।
- (विलेय का आयतन)/(विलयन का द्रव्यमान) × 100: गलत, आयतन और द्रव्यमान की इकाइयाँ भिन्न हैं; यह मान्य नहीं है।
- (विलायक का द्रव्यमान)/(विलयन का द्रव्यमान) × 100: गलत, यह विलायक का प्रतिशत होगा, विलेय का नहीं।
- (विलेय का द्रव्यमान)/(विलयन का आयतन) × 100: यह द्रव्यमान/आयतन प्रतिशत (w/v%) का सूत्र है, द्रव्यमान/द्रव्यमान नहीं।
Quick Facts:
- द्रव्यमान प्रतिशत (w/w%) — \( \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान (g)}}{\text{विलयन का कुल द्रव्यमान (g)}} \times 100 \)
- द्रव्यमान/आयतन प्रतिशत (w/v%) — \( \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान (g)}}{\text{विलयन का आयतन (mL)}} \times 100 \)
- आयतन प्रतिशत (v/v%) — \( \frac{\text{विलेय का आयतन (mL)}}{\text{विलयन का आयतन (mL)}} \times 100 \)
लैक्टिक अम्ल मुख्य रूप से निम्नलिखित में से किस रसोई सामग्री में पाया जाता है?
- दही
- नमक
- नींबू
- चीनी
Explanation:
- दही (Curd/Yogurt): लैक्टिक अम्ल (C₃H₆O₃) दूध में उपस्थित लैक्टोज़ (शर्करा) के जीवाण्वीय किण्वन (bacterial fermentation) द्वारा बनता है। लैक्टोबैसिलस (Lactobacillus) बैक्टीरिया इस प्रक्रिया को उत्प्रेरित करते हैं, जिससे दूध दही में परिवर्तित हो जाता है और इसमें खट्टापन आ जाता है।
- नमक (Salt): NaCl है, कोई अम्ल नहीं।
- नींबू (Lemon): इसमें साइट्रिक अम्ल (citric acid) होता है, लैक्टिक अम्ल नहीं।
- चीनी (Sugar): सुक्रोज़ (sucrose) है, अम्ल नहीं।
Quick Facts:
- लैक्टिक अम्ल का रासायनिक सूत्र: C₃H₆O₃
- यह मांसपेशियों में तीव्र व्यायाम के दौरान भी बनता है (अवायवीय श्वसन — anaerobic respiration), जिससे ऐंठन (cramp) होती है।
- दही में लैक्टिक अम्ल के कारण pH घट जाता है (लगभग 4.5), जिससे दूध के प्रोटीन (कैसीन) जम जाते हैं और दही बनता है।
निम्नलिखित में से कौन सा शब्द, जल के अणुओं की एक वरणतः पारगम्य झिल्ली (selectively permeable membrane) के आर-पार गति का वर्णन करता है?
- सानांतरण (Translocation)
- परासरण (Osmosis)
- बहि: कोशिकता (Exocytosis)
- विसरण (Diffusion)
Explanation:
- परासरण (Osmosis): यह जल के अणुओं की एक वरणतः पारगम्य झिल्ली (selectively permeable membrane) के माध्यम से निम्न विलेय सांद्रता (या उच्च जल सांद्रता) से उच्च विलेय सांद्रता (या निम्न जल सांद्रता) की ओर स्वतः गति है। यह एक निष्क्रिय प्रक्रिया (passive) है जो सांद्रता प्रवणता (concentration gradient) के अनुसार होती है।
- सानांतरण (Translocation): पौधों में खाद्य पदार्थों (फ्लोएम) का स्थानांतरण, जल नहीं।
- बहि: कोशिकता (Exocytosis): कोशिका द्वारा पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया (सक्रिय परिवहन — active transport), जल गति नहीं।
- विसरण (Diffusion): किसी भी पदार्थ (गैस, द्रव, विलेय) का उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर गति, बिना झिल्ली के भी हो सकता है। यह झिल्ली विशिष्ट नहीं है।
Quick Facts:
- परासरण के प्रकार:
- अंत: परासरण (Endosmosis) — जल कोशिका के अंदर जाता है (कोशिका फूल जाती है — turgid)।
- बहि: परासरण (Exosmosis) — जल कोशिका से बाहर जाता है (कोशिका सिकुड़ जाती है — plasmolysis)।
- परासरण जीवों में जल संतुलन (osmoregulation) के लिए महत्वपूर्ण है।
- उदाहरण: मूल कोशिकाओं द्वारा जल अवशोषण, रक्त कोशिकाओं का जल में फूलना या सिकुड़ना।
यद्यपि एक कोलाइड होमोजेनस प्रतीत होता है, लेकिन वास्तव में यह एक __________ है।
- निलंबन
- वास्तविक विलयन
- समांगी मिश्रण
- विषमांगी मिश्रण
Explanation:
- विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous mixture): कोलाइड नग्न आंखों को समांगी (homogeneous) दिखता है, लेकिन सूक्ष्म स्तर पर (अल्ट्रामाइक्रोस्कोप से) इसके कण अलग-अलग दिखाई देते हैं, इसलिए यह विषमांगी है।
- निलंबन (Suspension): कोलाइड निलंबन नहीं है (कण बैठते नहीं)।
- वास्तविक विलयन (True solution): कोलाइड वास्तविक विलयन नहीं है (कण > 1 nm, प्रकाश प्रकीर्णन, ब्राउनियन गति)।
- समांगी मिश्रण (Homogeneous mixture): कोलाइड समांगी नहीं है (विषमांगी है)।
Quick Facts:
- कोलाइड → “विषमांगी मिश्रण जो समांगी दिखता है” (heterogeneous appearance, homogeneous to naked eye)।
- ब्राउनियन गति और टिडल प्रभाव कोलाइड की विषमांगीता को सिद्ध करते हैं।
- उदाहरण: दूध, रक्त, धुंआ — सभी विषमांगी हैं।
अमोनिया में नाइट्रोजन और हाइड्रोजन का द्रव्यमान के आधार पर अनुपात क्या है?
- 14 : 3
- 1 : 8
- 3 : 14
- 14 : 8
Equation: \( \text{NH}_3 \) → N : H = 14 : 3
Explanation:
- 14 : 3: अमोनिया (NH₃) में एक नाइट्रोजन परमाणु (N) का परमाणु द्रव्यमान = 14 u, और तीन हाइड्रोजन परमाणुओं (H) का कुल द्रव्यमान = 3 × 1 = 3 u. अतः द्रव्यमान अनुपात N : H = 14 : 3.
- 1 : 8: यह जल (H₂O) में H : O = 2 : 16 = 1 : 8 है, अमोनिया नहीं।
- 3 : 14: यह उल्टा अनुपात है (H : N = 3 : 14), लेकिन प्रश्न N : H पूछ रहा है।
- 14 : 8: गलत, यह N : O के अनुपात के करीब है (NO₂ में 14 : 32)।
Quick Facts:
- अमोनिया का आण्विक सूत्र NH₃ है।
- N का परमाणु द्रव्यमान = 14, H का = 1.
- अमोनिया में द्रव्यमान द्वारा N% = \( \frac{14}{17} \times 100 \approx 82.35\% \), H% = \( \frac{3}{17} \times 100 \approx 17.65\% \).
हम विलयन की सांद्रता को विभिन्न तरीकों से व्यक्त करते हैं। निम्नलिखित में से कौन-सी विधि, गलत है?
- द्रव्यमान/विलयन के आयतन प्रतिशत (Mass by volume percentage of a solution)
- द्रव्यमान/विलयन के द्रव्यमान प्रतिशत (Mass by mass percentage of a solution)
- आयतन/विलयन के आयतन प्रतिशत (Volume by volume percentage of a solution)
- आयतन/विलयन के द्रव्यमान प्रतिशत (Volume by mass percentage of a solution)
Explanation:
- आयतन/विलयन के द्रव्यमान प्रतिशत (v/w%): यह गलत है क्योंकि आयतन (mL) को द्रव्यमान (g) से विभाजित करना मानक नहीं है। सांद्रता व्यक्त करने के मानक तरीके हैं: w/w%, w/v%, v/v%. v/w% का कोई प्रचलन नहीं है (हालाँकि कभी-कभी उपयोग हो सकता है, लेकिन यह मानक नहीं है और प्रश्न के अनुसार “गलत” है क्योंकि यह सामान्यतः स्वीकृत नहीं है)।
- द्रव्यमान/आयतन प्रतिशत (w/v%): सही — \( \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान (g)}}{\text{विलयन का आयतन (mL)}} \times 100 \)
- द्रव्यमान/द्रव्यमान प्रतिशत (w/w%): सही — \( \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान (g)}}{\text{विलयन का द्रव्यमान (g)}} \times 100 \)
- आयतन/आयतन प्रतिशत (v/v%): सही — \( \frac{\text{विलेय का आयतन (mL)}}{\text{विलयन का आयतन (mL)}} \times 100 \)
Quick Facts:
- w/w% — द्रव्यमान प्रतिशत (solid in solid या solid in liquid)
- w/v% — द्रव्यमान/आयतन प्रतिशत (solid in liquid, चिकित्सा में सामान्य)
- v/v% — आयतन प्रतिशत (liquid in liquid, जैसे — अल्कोहल का जलीय विलयन)
- v/w% — गलत/अमान्य (इकाइयाँ संगत नहीं)।
निम्नलिखित में से कौन-सा सूत्र विलयन के आयतन-आयतन प्रतिशत की गणना के लिए प्रयोग किया जाता है?
- (विलेय का द्रव्यमान)/(विलयन का आयतन) × 100
- (विलेय का द्रव्यमान)/(विलयन का द्रव्यमान) × 100
- (विलेय का आयतन)/(विलयन का आयतन) × 100
- (विलयन का आयतन)/(विलेय का द्रव्यमान) × 100
Explanation:
- (विलेय का आयतन)/(विलयन का आयतन) × 100: यह आयतन-आयतन प्रतिशत (v/v%) का सही सूत्र है। इसका उपयोग तब किया जाता है जब विलेय और विलायक दोनों द्रव हों (जैसे — अल्कोहल और पानी का मिश्रण)।
- (विलेय का द्रव्यमान)/(विलयन का आयतन) × 100: यह w/v% है, v/v% नहीं।
- (विलेय का द्रव्यमान)/(विलयन का द्रव्यमान) × 100: यह w/w% है।
- (विलयन का आयतन)/(विलेय का द्रव्यमान) × 100: यह उल्टा अनुपात है, v/v% नहीं।
Quick Facts:
- v/v% = \( \frac{\text{आयतन (विलेय)}}{\text{आयतन (विलयन)}} \times 100 \)
- उदाहरण: 40% अल्कोहल विलयन का अर्थ है 100 mL विलयन में 40 mL अल्कोहल।
- इसका उपयोग पेय पदार्थों (वाइन, बीयर) में अल्कोहल प्रतिशत बताने के लिए किया जाता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा, आयनिक यौगिकों का गुणधर्म नहीं है?
- इनका गलनांक और क्वथनांक सामान्यतः उच्च होता है।
- ये सामान्यतः कमरे के तापमान पर ठोस होते हैं।
- ये जलीय/गलित अवस्था में विद्युत का चालन कर सकते हैं।
- ये केरोसिन और पेट्रोल जैसे विलायकों में विलेय होते हैं।
Explanation:
- ये केरोसिन और पेट्रोल जैसे विलायकों में विलेय होते हैं: यह आयनिक यौगिकों का गुण नहीं है। आयनिक यौगिक (जैसे — NaCl) ध्रुवीय विलायकों (जैसे — पानी) में घुलनशील होते हैं, लेकिन अध्रुवीय विलायकों (जैसे — केरोसिन, पेट्रोल, ईथर) में अघुलनशील होते हैं। “समान समान को घोलता है” (like dissolves like) के सिद्धांत के अनुसार, आयनिक (ध्रुवीय) अध्रुवीय में नहीं घुलते।
- उच्च गलनांक और क्वथनांक: यह आयनिक यौगिकों का गुण है (मजबूत आयनिक बंध, उच्च जालक ऊर्जा — lattice energy)।
- कमरे के तापमान पर ठोस: अधिकांश आयनिक यौगिक ठोस होते हैं (जैसे — NaCl, MgO)।
- जलीय/गलित अवस्था में विद्युत चालन: आयनों की गति के कारण आयनिक यौगिक विद्युत का चालन करते हैं (विद्युत अपघट्य — electrolytes)।
Quick Facts:
- आयनिक यौगिक → ध्रुवीय विलायक (जल) में घुलनशील, अध्रुवीय (केरोसिन, पेट्रोल, CCl₄) में अघुलनशील।
- सहसंयोजक यौगिक → अध्रुवीय विलायकों में घुलनशील (जैसे — चीनी, मोम, तेल)।
- आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते (आयन स्थिर होते हैं), लेकिन पिघलने या घोलने पर चालन करते हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा वायु के मिश्रण का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
- निलंबन
- विषमांगी मिश्रण
- समांगी मिश्रण
- कोलाइड
Explanation:
- समांगी मिश्रण (Homogeneous mixture): वायु विभिन्न गैसों (N₂, O₂, CO₂, Ar, जलवाष्प आदि) का एक समांगी मिश्रण है क्योंकि सभी गैसें एक ही चरण (गैसीय) में हैं और अणु स्तर पर समान रूप से वितरित हैं।
- निलंबन (Suspension): गलत, निलंबन में ठोस कण द्रव में निलंबित होते हैं (विषमांगी)।
- विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous): गलत, वायु समांगी है (यद्यपि प्रदूषकों के कारण यह विषमांगी हो सकती है, लेकिन सामान्यतः यह समांगी है)।
- कोलाइड (Colloid): गलत, वायु कोलाइड नहीं है (कोलाइड में कण 1–1000 nm होते हैं; वायु में गैस अणु < 1 nm होते हैं)।
Quick Facts:
- वायु → गैसीय समांगी मिश्रण, विलयन (solution) का भी उदाहरण माना जाता है (गैस-गैस विलयन)।
- वायु में N₂ ~78%, O₂ ~21%, Ar ~0.9%, CO₂ ~0.03%, अन्य गैसें (जलवाष्प, नीऑन, हीलियम)।
- वायु को प्रभाजी आसवन (fractional distillation of liquid air) द्वारा घटकों में अलग किया जा सकता है।
निम्नलिखित में से कौन विषमांगी मिश्रण का सबसे अच्छा उदाहरण है?
- पानी में नमक
- आयरन क्लोराइड और आयरन भराव का मिश्रण
- कॉपर सल्फेट विलयन
- पानी में चीनी
Explanation:
- आयरन क्लोराइड और आयरन भराव का मिश्रण (Iron chloride and iron filings mixture): यह एक विषमांगी मिश्रण है क्योंकि इसमें ठोस कण (लोहे की छीलन — Fe) और ठोस (FeCl₃) अलग-अलग दिखाई देते हैं और इन्हें चुंबकीय पृथक्करण द्वारा अलग किया जा सकता है (Fe चुंबकीय है)।
- पानी में नमक: समांगी (NaCl घुलकर विलयन बनाता है)।
- कॉपर सल्फेट विलयन: समांगी (CuSO₄ घुलकर नीला विलयन बनाता है)।
- पानी में चीनी: समांगी (चीनी घुलकर विलयन बनाती है)।
Quick Facts:
- विषमांगी मिश्रण → घटक अलग-अलग दिखाई देते हैं, भौतिक विधियों से अलग किए जा सकते हैं।
- लोहा (Fe) चुंबकीय है, FeCl₃ अचुंबकीय है → चुंबकीय पृथक्करण द्वारा अलग किया जा सकता है।
- विषमांगी मिश्रण के अन्य उदाहरण: रेत + पानी, तेल + पानी, ग्रेनाइट।
साबुन की सफाई क्रिया किसके निर्माण के कारण होती है?
- अवक्षेप
- जलयोजन कोश
- ग्लिसरॉल
- मिसेल
Explanation:
- मिसेल (Micelle): साबुन के अणु जल में घुलने पर मिसेल नामक संरचना बनाते हैं, जिसमें अणुओं के जलविरोधी (hydrophobic) सिरे (हाइड्रोकार्बन श्रृंखला) अंदर की ओर (तेल/ग्रीस को घेरते हुए) और जलरागी (hydrophilic) सिरे (COO⁻ Na⁺) बाहर की ओर (पानी की ओर) होते हैं। यह मिसेल तेल की बूंदों को पानी में फैलाने (emulsification) में सहायता करता है, जिससे वे धुल जाती हैं।
- अवक्षेप (Precipitate): गलत, अवक्षेप तब बनता है जब दो विलयन मिलकर अघुलनशील यौगिक बनाते हैं (जैसे — साबुन का कठोर जल में अवक्षेप बनाना, लेकिन यह सफाई क्रिया नहीं है)।
- जलयोजन कोश (Hydration shell): यह आयनों के चारों ओर जल के अणुओं की व्यवस्था है, सफाई क्रिया का कारण नहीं।
- ग्लिसरॉल (Glycerol): साबुन निर्माण (साबुनीकरण — saponification) में उप-उत्पाद के रूप में बनता है, सफाई क्रिया का कारण नहीं।
Quick Facts:
- मिसेल → साबुन अणुओं का गोलाकार समूह, आकार 10–100 nm (कोलाइडी)।
- साबुन की सफाई क्रिया का सिद्धांत — “मिसेल निर्माण” (micelle formation)।
- कठोर जल में साबुन अघुलनशील अवक्षेप (scum) बनाता है, जिससे सफाई कम होती है (डिटर्जेंट इस समस्या को दूर करता है)।
कोलॉइडी विलयन क्या है?
- केवल गैसों वाला पारदर्शी मिश्रण
- बड़े कणों वाला एकसमान मिश्रण
- सूक्ष्म कणों वाला विषमांगी मिश्रण
- वह मिश्रण जिसमें कण पूरी तरह विलीन होकर बैठ जाते हैं
Explanation:
- सूक्ष्म कणों वाला विषमांगी मिश्रण: कोलाइडी विलयन (colloidal solution) एक विषमांगी मिश्रण है जिसमें कणों का आकार 1 से 1000 nm (नैनोमीटर) के बीच होता है। ये कण नग्न आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन अल्ट्रामाइक्रोस्कोप से देखे जा सकते हैं।
- केवल गैसों वाला पारदर्शी मिश्रण: गलत, कोलाइड ठोस-द्रव, द्रव-द्रव, गैस-द्रव आदि सभी प्रकार के हो सकते हैं।
- बड़े कणों वाला एकसमान मिश्रण: गलत, “एकसमान” (uniform) कोलाइड के लिए सही नहीं है (विषमांगी), और “बड़े कण” निलंबन में होते हैं।
- कण पूरी तरह विलीन होकर बैठ जाते हैं: गलत, कोलाइडी कण बैठते नहीं (ब्राउनियन गति के कारण) और पूरी तरह विलीन भी नहीं होते।
Quick Facts:
- कोलाइडी विलयन → परिक्षिप्त प्रावस्था (dispersed phase) + परिक्षेपण माध्यम (dispersion medium)।
- प्रकार: सॉल (sol), जैल (gel), पायस (emulsion), फोम (foam), एरोसोल (aerosol)।
- उदाहरण: दूध (द्रव में द्रव — पायस), धुंआ (गैस में ठोस — एरोसोल), जेली (ठोस में द्रव — जैल)।
पानी के साथ एक अम्ल का मिश्रण क्या कहलाता है, जिसके परिणामस्वरूप आयनों की प्रति इकाई आयतन सांद्रता में कमी आ जाती है?
- सांद्रता
- अम्लीकरण
- उदासीनीकरण
- तनुकरण
Explanation:
- तनुकरण (Dilution): अम्ल (या क्षार) में पानी मिलाने पर उसमें H⁺ (या OH⁻) आयनों की प्रति इकाई आयतन सांद्रता (molarity) कम हो जाती है, जिसे तनुकरण (dilution) कहते हैं। तनुकरण से अम्ल/क्षार की प्रबलता (strength) कम होती है और pH उदासीन (7) की ओर बढ़ता है।
- सांद्रता (Concentration): यह विपरीत प्रक्रिया है — विलयन में विलेय की मात्रा बढ़ाना (जैसे — विलायक निकालना)।
- अम्लीकरण (Acidification): किसी विलयन में अम्ल मिलाकर pH कम करना (अम्लीय बनाना), तनुकरण नहीं।
- उदासीनीकरण (Neutralization): अम्ल और क्षार की अभिक्रिया जिससे लवण और जल बनते हैं (pH = 7), यह H⁺ और OH⁻ आयनों को समाप्त करता है, लेकिन यह “पानी के साथ अम्ल का मिश्रण” नहीं है।
Quick Facts:
- तनुकरण सूत्र: \( M_1 V_1 = M_2 V_2 \) (मोलरता × आयतन = स्थिर)।
- सांद्र अम्ल (concentrated acid) को तनु करते समय सदैव अम्ल को पानी में मिलाएँ (पानी में अम्ल — never water to acid) — क्योंकि अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है (exothermic)।
- तनुकरण से H⁺ आयनों की सांद्रता घटती है → pH बढ़ता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा, विलयन के निर्माण के दौरान भौतिक परिवर्तन का उदाहरण है?
- जल में लवण का विलयन
- नींबू का रस डालने पर दूध का फटना
- लवण विलयन में लोहे का जंग लगना
- आमाशय में भोजन का पाचन
Explanation:
- जल में लवण का विलयन (Dissolving salt in water): यह एक भौतिक परिवर्तन (physical change) है क्योंकि NaCl पानी में घुलकर आयनों में टूट जाता है, लेकिन इसकी रासायनिक संरचना (Na⁺ और Cl⁻) नहीं बदलती है। यह केवल विलेय का विलायक में फैलना है, कोई नया पदार्थ नहीं बनता। इसे पुनः वाष्पीकरण द्वारा NaCl प्राप्त किया जा सकता है।
- नींबू का रस डालने पर दूध का फटना: रासायनिक परिवर्तन (अम्लता के कारण दूध के प्रोटीन कैसीन का जमाव — coagulation, नया पदार्थ बनता है)।
- लवण विलयन में लोहे का जंग लगना: रासायनिक परिवर्तन (Fe → Fe₂O₃.xH₂O — जंग, नया यौगिक बनता है)।
- आमाशय में भोजन का पाचन: रासायनिक परिवर्तन (जटिल अणु सरल अणुओं में टूटते हैं — नए पदार्थ बनते हैं)।
Quick Facts:
- भौतिक परिवर्तन → अवस्था/आकार/आयतन बदलता है, लेकिन रासायनिक संरचना नहीं; प्रतिवर्ती (reversible) हो सकता है; कोई नया पदार्थ नहीं बनता।
- रासायनिक परिवर्तन → नए पदार्थ बनते हैं, अपरिवर्तनीय (irreversible), ऊष्मा/प्रकाश उत्सर्जन/अवशोषण हो सकता है।
- लवण का जल में विलयन → भौतिक परिवर्तन का सबसे अच्छा उदाहरण।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन विलयनों के बारे में सही है?
- सरल निस्यंदन द्वारा विलयनों को अलग किया जा सकता है।
- विलेय विलायक की तुलना में कम मात्रा में उपस्थित होता है।
- किसी विलयन की सांद्रता केवल द्रव्यमान प्रतिशत के रूप में व्यक्त की जा सकती है।
- विलयन एक विषमांगी मिश्रण है।
Explanation:
- विलेय विलायक की तुलना में कम मात्रा में उपस्थित होता है: यह विलयनों (solutions) के बारे में सही कथन है। परिभाषा के अनुसार, विलेय (solute) वह घटक है जो कम मात्रा में होता है और विलायक (solvent) वह है जो अधिक मात्रा में होता है और विलेय को घोलता है (हालाँकि कुछ अपवाद भी हो सकते हैं, लेकिन सामान्यतः यही सही है)।
- सरल निस्यंदन द्वारा विलयनों को अलग किया जा सकता है: गलत, विलयन के कण < 1 nm होते हैं, इसलिए वे फिल्टर पेपर से गुज़र जाते हैं। इन्हें आसवन (distillation) या वाष्पीकरण (evaporation) द्वारा अलग किया जाता है।
- केवल द्रव्यमान प्रतिशत: गलत, सांद्रता को w/w%, w/v%, v/v%, मोलरता (M), मोललता (m), नॉर्मलता (N) आदि कई तरीकों से व्यक्त किया जा सकता है।
- विलयन एक विषमांगी मिश्रण है: गलत, विलयन एक समांगी मिश्रण (homogeneous mixture) है।
Quick Facts:
- विलयन में विलेय की मात्रा < विलायक की मात्रा (सामान्यतः)।
- विलयन → समांगी, कणों का आकार < 1 nm, पारदर्शी, टिडल प्रभाव नहीं।
- निस्यंदन → अघुलनशील ठोस को द्रव से अलग करने के लिए (निलंबन के लिए)।
निम्नलिखित में से कौन-सा कारक पदार्थ की अवस्था में परिवर्तन का कारण बनता है?
- इसे किसी अन्य पदार्थ के साथ मिलाना
- पदार्थ को घोलना
- पदार्थ को काटना
- तापमान या दबाव में परिवर्तन
Explanation:
- तापमान या दबाव में परिवर्तन (Change in temperature or pressure): किसी पदार्थ की अवस्था (ठोस, द्रव, गैस) उसके तापमान और दबाव पर निर्भर करती है। तापमान बढ़ाने पर कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ती है, जिससे ठोस पिघलता है (गलनांक) या द्रव वाष्पित होता है (क्वथनांक)। दबाव बदलने पर भी अवस्था परिवर्तन हो सकता है (जैसे — CO₂ का ठोस से गैस में उर्ध्वपातन — sublimation)।
- किसी अन्य पदार्थ के साथ मिलाना: इससे मिश्रण बनता है, अवस्था परिवर्तन नहीं (जब तक कि रासायनिक अभिक्रिया न हो)।
- पदार्थ को घोलना: विलयन बनता है, अवस्था परिवर्तन नहीं (यह भौतिक परिवर्तन है, लेकिन अवस्था नहीं बदलती — जैसे NaCl का ठोस से द्रव में परिवर्तन नहीं होता; वह ठोस ही रहता है, बस घुल जाता है)।
- पदार्थ को काटना: आकार बदलता है, अवस्था नहीं।
Quick Facts:
- अवस्था परिवर्तन (Change of state):
- ठोस → द्रव (गलन — melting/fusion)
- द्रव → गैस (वाष्पीकरण — vaporization)
- गैस → द्रव (संघनन — condensation)
- द्रव → ठोस (जमाव — freezing/solidification)
- ठोस → गैस (उर्ध्वपातन — sublimation)
- गैस → ठोस (हिमीकरण — deposition)
- अवस्था परिवर्तन एक भौतिक परिवर्तन है (रासायनिक संरचना नहीं बदलती)।
- दबाव बढ़ाने पर गैस द्रव में बदल सकती है (जैसे — LPG, CNG)।
मिश्रण और यौगिक में क्या अंतर है?
- मिश्रण के घटकों को पृथक् नहीं किया जा सकता है
- मिश्रण में तत्व एक निश्चित अनुपात में होते हैं
- मिश्रण केवल संयुक्त गुणधर्म प्रदर्शित करता है
- मिश्रण के घटक अपने गुणधर्मों को बनाए रखते हैं
Explanation:
- मिश्रण के घटक अपने गुणधर्मों को बनाए रखते हैं: यह मिश्रण की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। मिश्रण में प्रत्येक घटक अपने मूल भौतिक और रासायनिक गुणधर्मों (जैसे — गंध, रंग, स्वाद, घुलनशीलता) को बनाए रखता है।
- मिश्रण के घटकों को पृथक् नहीं किया जा सकता: गलत, मिश्रण को भौतिक विधियों (जैसे — निस्यंदन, चुंबकीय पृथक्करण, वाष्पीकरण) द्वारा अलग किया जा सकता है।
- मिश्रण में तत्व एक निश्चित अनुपात में होते हैं: गलत, यह यौगिक (compound) की विशेषता है (नियत अनुपात का नियम — law of definite proportions)। मिश्रण में घटक किसी भी अनुपात में हो सकते हैं।
- मिश्रण केवल संयुक्त गुणधर्म प्रदर्शित करता है: गलत, मिश्रण में घटक अपने अलग-अलग गुणधर्म प्रदर्शित करते हैं, कोई नया संयुक्त गुणधर्म नहीं बनता (यौगिक में बनता है)।
Quick Facts:
- मिश्रण → भौतिक परिवर्तन द्वारा बनता है, कोई ऊष्मा परिवर्तन नहीं (या बहुत कम), घटक भौतिक विधियों से अलग होते हैं।
- यौगिक → रासायनिक परिवर्तन द्वारा बनता है, ऊष्मा उत्सर्जित/अवशोषित होती है, घटक रासायनिक विधियों से अलग होते हैं।
- मिश्रण का संघटन परिवर्तनशील होता है, यौगिक का निश्चित।
अयस्कों से अपद्रव्यों को हटाने के लिए कौन-सी प्रक्रिया जानी जाती है?
- भर्जन
- प्रगलन
- परिष्करण
- सांद्रण
Explanation:
- सांद्रण (Concentration/Ore dressing): अयस्क (ore) से अशुद्धियों (गैंग — gangue) को हटाने की प्रक्रिया को सांद्रण (या अयस्क संवर्धन — ore enrichment) कहते हैं। इसके बाद अयस्क को धातु निष्कर्षण के लिए उपयुक्त बनाया जाता है।
- भर्जन (Roasting): सल्फाइड अयस्कों को ऑक्साइड में बदलने के लिए वायु की उपस्थिति में गर्म करना (उदाहरण: ZnS → ZnO + SO₂)।
- प्रगलन (Smelting): अयस्क को कोक (carbon) के साथ गर्म करके धातु निकालना (जैसे — Fe₂O₃ + 3C → 2Fe + 3CO)।
- परिष्करण (Refining): अपरिष्कृत धातु (crude metal) को शुद्ध करने की प्रक्रिया (जैसे — विद्युत अपघटनी परिष्करण — electrolytic refining)।
Quick Facts:
- अयस्क सांद्रण की विधियाँ: चुंबकीय पृथक्करण, फेन प्लवन (froth floatation), जल धावन (hydraulic washing), निक्षालन (leaching)।
- गैंग (Gangue) → अयस्क में उपस्थित अवांछित पदार्थ (जैसे — SiO₂, मिट्टी)।
निम्नलिखित में से कौन ‘टिडल प्रभाव’ को दर्शाता है?
- लवण-विलयन
- शर्करा विलयन
- दूध
- कॉपर सल्फेट विलयन
Explanation:
- दूध (Milk): दूध एक कोलाइड (colloid) है। इसमें वसा गोलिकाएँ (fat globules) 1–1000 nm आकार की होती हैं, जो प्रकाश को प्रकीर्णित करती हैं, जिससे टिडल प्रभाव (Tyndall effect) दिखता है।
- लवण-विलयन (Salt solution): वास्तविक विलयन (true solution), कण < 1 nm, टिडल प्रभाव नहीं।
- शर्करा विलयन (Sugar solution): वास्तविक विलयन, टिडल प्रभाव नहीं।
- कॉपर सल्फेट विलयन: वास्तविक विलयन, टिडल प्रभाव नहीं।
Quick Facts:
- टिडल प्रभाव → प्रकाश की किरण का परिक्षिप्त कणों द्वारा प्रकीर्णन (scattering)।
- कोलाइड के उदाहरण: दूध, कोहरा, धुंआ, पेंट, रक्त, स्टार्च विलयन।
- वास्तविक विलयन → पारदर्शी, टिडल प्रभाव नहीं (जैसे — NaCl, CuSO₄, चीनी का घोल)।
सोडियम क्लोराइड का जलीय घोल क्या कहलाता है?
- कास्टिक सोडा
- चूना
- चूना पत्थर
- ब्राइन
Explanation:
- ब्राइन (Brine): सोडियम क्लोराइड (NaCl) का जलीय (aqueous) संतृप्त या असंतृप्त विलयन ब्राइन कहलाता है। इसका उपयोग क्लोरीन, सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) और सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃) के निर्माण में होता है (क्लोर-क्षार प्रक्रिया — chlor-alkali process)।
- कास्टिक सोडा (Caustic soda): NaOH का सामान्य नाम है, NaCl नहीं।
- चूना (Lime): CaO (बिना बुझा चूना — quicklime) या Ca(OH)₂ (बुझा चूना — slaked lime)।
- चूना पत्थर (Limestone): CaCO₃।
Quick Facts:
- ब्राइन का विद्युत अपघटन (electrolysis) → NaOH + Cl₂ + H₂
- ब्राइन का उपयोग खाद्य प्रसंस्करण (अचार, पनीर) में भी होता है।
- समुद्री जल में भी NaCl का विलयन (ब्राइन) होता है।
निम्नलिखित में से किसका उपयोग विलयन की सांद्रता को व्यक्त करने के लिए नहीं किया जाता है?
- विलयन का आयतन-द्रव्यमान प्रतिशत
- किसी विलयन का द्रव्यमान-द्रव्यमान प्रतिशत
- विलयन का आयतन-आयतन प्रतिशत
- विलयन का द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत
Explanation:
- द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत (Mass-volume%, w/v%): यह वास्तव में सांद्रता व्यक्त करने की एक मानक विधि है — \( \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान (g)}}{\text{विलयन का आयतन (mL)}} \times 100 \). लेकिन इस प्रश्न के अनुसार, “आयतन-द्रव्यमान प्रतिशत” (v/w%) गलत है, और “द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत” (w/v%) मानक है। हालाँकि विकल्प (d) में “द्रव्यमान-आयतन” दिया है, जो सही है, लेकिन प्रश्न “नहीं किया जाता” पूछ रहा है; इसलिए स्पष्टीकरण: वास्तव में आयतन-द्रव्यमान (v/w%) गलत है, लेकिन यहाँ विकल्प (a) “आयतन-द्रव्यमान” है, जो गलत है। लेकिन उत्तर (d) क्यों? — संभवतः मुद्रण त्रुटि है, क्योंकि (a) “आयतन-द्रव्यमान” (v/w%) गलत है, (d) “द्रव्यमान-आयतन” (w/v%) सही है। इसलिए सही उत्तर (a) होना चाहिए था, लेकिन दिए गए उत्तर के अनुसार (d) है, इसलिए यहाँ (d) को गलत माना गया है (शायद “द्रव्यमान-आयतन” को गलत समझा गया)। वास्तविकता: विकल्प (a) v/w% गलत है, (d) w/v% सही है। इसलिए प्रश्न में त्रुटि है, लेकिन उत्तर (d) है क्योंकि इसे “गलत” माना गया है (शायद वे चाहते हैं कि “आयतन-द्रव्यमान” ही सही है और “द्रव्यमान-आयतन” गलत है — लेकिन वास्तव में उल्टा है)।
Quick Facts:
- सांद्रता व्यक्त करने की मानक विधियाँ: w/w%, w/v%, v/v%, मोलरता (M), मोललता (m), नॉर्मलता (N), मोल अंश (mole fraction)।
- v/w% (आयतन/द्रव्यमान) — मानक नहीं है (इकाइयाँ असंगत) और इसका प्रयोग नहीं किया जाता।
- w/v% — चिकित्सा एवं जीव विज्ञान में सामान्य (जैसे — 0.9% NaCl (w/v) = 0.9g NaCl/100mL विलयन)।
निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प, ‘विलयन की सांद्रता’ को सबसे यथार्थ रूप से परिभाषित करता है?
- द्रव्यमान और वेग के बीच आनुपातिक संबंध
- वायु में परिक्षिप्त गैसीय कणों की कुल संख्या
- वर्ण और फ्लेवर जैसी संवेदी विशेषताएं
- विलायक के सापेक्ष विलियत पदार्थ की मात्रा
Explanation:
- विलायक के सापेक्ष विलियत पदार्थ की मात्रा: सांद्रता (concentration) विलेय (solute) की मात्रा (द्रव्यमान, मोल, आयतन) को विलायक (solvent) या विलयन (solution) की मात्रा के सापेक्ष व्यक्त करती है। यह सबसे यथार्थ परिभाषा है।
- द्रव्यमान और वेग: यह संवेग (momentum) या बल से संबंधित है, सांद्रता से नहीं।
- वायु में गैसीय कण: यह वायु की संरचना है, सांद्रता की परिभाषा नहीं।
- संवेदी विशेषताएँ: यह गुणधर्म हैं, सांद्रता नहीं।
Quick Facts:
- सांद्रता → विलेय की मात्रा / विलायक या विलयन की मात्रा।
- सांद्रता बढ़ाने पर विलयन के गुणधर्म बदलते हैं (जैसे — घनत्व, क्वथनांक, pH)।
- सांद्र विलयन → अधिक विलेय, तनु विलयन → कम विलेय।
एन्जियोली और ऊतकों में गैसों का आदान-प्रदान किस प्रक्रिया द्वारा होता है?
- परासरण (Osmosis)
- निस्तारण (Decantation)
- विसरण (Diffusion)
- निस्पंदन (Filtration)
Explanation:
- विसरण (Diffusion): एल्वियोली (फेफड़ों की वायु कोशिकाएँ) और रक्त केशिकाओं (capillaries) के बीच O₂ और CO₂ का आदान-प्रदान विसरण (diffusion) द्वारा होता है। गैसें उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर गति करती हैं — O₂ एल्वियोली (उच्च) से रक्त (निम्न) में, CO₂ रक्त (उच्च) से एल्वियोली (निम्न) में।
- परासरण (Osmosis): जल के अणुओं की अर्धपारगम्य झिल्ली के आर-पार गति, गैसों का आदान-प्रदान नहीं।
- निस्तारण (Decantation): अवसादन के बाद ऊपरी द्रव को निकालना, जैविक प्रक्रिया नहीं।
- निस्पंदन (Filtration): ठोस को द्रव से अलग करना, गैसों का आदान-प्रदान नहीं।
Quick Facts:
- विसरण → कणों की उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर स्वतः गति, बिना ऊर्जा (निष्क्रिय परिवहन — passive transport)।
- फेफड़ों में गैस विनिमय → 500 मिलियन एल्वियोली, कुल सतह क्षेत्र ~ 70 m²।
- O₂ का विसरण कोशिकीय श्वसन (cellular respiration) के लिए आवश्यक है।
कौन-सा कथन एक विषमांगी मिश्रण का सही वर्णन करता है?
- इसके कण समान रूप से कण स्तर पर वितरित होते हैं।
- इसकी संरचना हमेशा निश्चित और नियत रहती है।
- इसकी संरचना संपूर्ण मिश्रण में एकसमान नहीं होती है।
- इसके अवयवों को भौतिक विधियों द्वारा अलग-अलग नहीं किया जा सकता है।
Explanation:
- संरचना संपूर्ण मिश्रण में एकसमान नहीं होती: विषमांगी मिश्रण (heterogeneous mixture) में घटक समान रूप से वितरित नहीं होते, इसलिए मिश्रण के विभिन्न भागों में संघटन भिन्न होता है। उदाहरण: रेत और पानी, तेल और पानी।
- कण समान रूप से वितरित: यह समांगी मिश्रण (homogeneous) की विशेषता है।
- संरचना निश्चित: यह यौगिक (compound) की विशेषता है, मिश्रण की नहीं।
- भौतिक विधियों से अलग नहीं किया जा सकता: गलत, विषमांगी मिश्रण को भौतिक विधियों (जैसे — निस्यंदन, चुंबकीय पृथक्करण) से आसानी से अलग किया जा सकता है।
Quick Facts:
- विषमांगी मिश्रण → विभिन्न चरण (phases) होते हैं, घटक नग्न आंखों से दिखाई देते हैं।
- उदाहरण: ग्रेनाइट, मिट्टी, रक्त (सूक्ष्म स्तर पर विषमांगी), पिज़्ज़ा।
- समांगी मिश्रण → एक चरण, घटक नग्न आंखों से नहीं दिखते (जैसे — NaCl का घोल, वायु)।
डॉक्टर भग्न हड्डियों को जोड़ने के लिए किसका उपयोग करते हैं?
- ZnSO₄·7H₂O
- CuSO₄·5H₂O
- ZnSO₄·10H₂O
- CaSO₄·1/2H₂O
Explanation:
- CaSO₄·½H₂O (प्लास्टर ऑफ पेरिस — Plaster of Paris, POP): डॉक्टर भग्न हड्डियों (fractured bones) को जोड़ने के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग करते हैं। यह पानी के साथ मिलाने पर क्रिस्टलीकृत होकर कठोर हो जाता है: CaSO₄·½H₂O + 1½H₂O → CaSO₄·2H₂O (जिप्सम — gypsum)।
- ZnSO₄·7H₂O: जिंक सल्फेट (सफेद/हरा), प्लास्टर में उपयोग नहीं।
- CuSO₄·5H₂O: कॉपर सल्फेट (नीला), कवकनाशी (fungicide) और विद्युत अपघटन में उपयोग।
- ZnSO₄·10H₂O: कोई सामान्य यौगिक नहीं (ZnSO₄·7H₂O सामान्य है)।
Quick Facts:
- प्लास्टर ऑफ पेरिस → जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) को 373 K पर गर्म करने पर: CaSO₄·2H₂O → CaSO₄·½H₂O + 1½H₂O.
- POP पानी के साथ जल्दी से जम जाता है (5–10 मिनट में), इसलिए इसे हड्डी के फ्रैक्चर पर लगाया जाता है।
- मूर्तिकला, दीवारों पर प्लास्टर, और सजावटी सामान बनाने में भी POP का उपयोग होता है।
साबुन की माजन क्रिया में मिसेल (micelles) की मुख्य भूमिका क्या है?
- जल की कठोरता कम करना
- कपड़ों से तेल और गंदगी को ट्रैप करना और हटाना
- जल के पृष्ठ तनाव में वृद्धि करना
- जल से फेन उत्पन्न करना
Explanation:
- तेल और गंदगी को ट्रैप करना और हटाना: मिसेल (micelles) साबुन अणुओं का गोलाकार समूह होता है, जिसमें जलविरोधी (hydrophobic) सिरे अंदर (तेल/ग्रीस को घेरते हुए) और जलरागी (hydrophilic) सिरे बाहर (पानी की ओर) होते हैं। यह तेल की बूंदों को पानी में फैलाने (emulsification) और उन्हें धुलने में सहायता करता है।
- जल की कठोरता कम करना: साबुन कठोर जल में अघुलनशील अवक्षेप (scum) बनाता है, कठोरता नहीं कम करता। यह डिटर्जेंट करते हैं।
- पृष्ठ तनाव बढ़ाना: साबुन पृष्ठ तनाव (surface tension) कम करता है, बढ़ाता नहीं (इससे पानी फैलता है)।
- फेन उत्पन्न करना: फेन (foam) एक सह-उत्पाद है, मुख्य भूमिका नहीं; यह हवा के बुलबुले हैं जो साबुन की परत में फंस जाते हैं।
Quick Facts:
- मिसेल → 10–100 nm आकार, कोलाइडी विलयन का भाग।
- साबुन अणु: R–COO⁻ Na⁺ (R = हाइड्रोकार्बन श्रृंखला, जलविरोधी; COO⁻Na⁺ जलरागी)।
- सफाई क्रिया → मिसेल निर्माण → तेल/गंदगी का पानी में फैल जाना → बह जाना।
मोलरता क्या है?
- एक लीटर विलायक में उपस्थित विलेय के मोल की संख्या
- एक किलोग्राम विलयन में उपस्थित विलेय के मोल की संख्या
- एक किलोग्राम विलायक में उपस्थित विलेय के मोल की संख्या
- एक लीटर विलयन में उपस्थित विलेय के मोल की संख्या
Explanation:
- एक लीटर विलयन में उपस्थित विलेय के मोल की संख्या: मोलरता (Molarity, M) = \( \frac{\text{विलेय के मोल}}{\text{विलयन का लीटर में आयतन}} \). यह तापमान पर निर्भर करती है क्योंकि आयतन तापमान के साथ बदलता है।
- एक लीटर विलायक में विलेय के मोल: यह गलत है (यह ‘मोललता’ के साथ भ्रमित कर सकता है, लेकिन मोललता किलोग्राम विलायक में होती है)।
- एक किलोग्राम विलयन में विलेय के मोल: गलत (यह कोई मानक इकाई नहीं है; यह ‘मोललता’ के करीब है लेकिन विलायक के स्थान पर विलयन है)।
- एक किलोग्राम विलायक में विलेय के मोल: यह मोललता (Molality, m) की परिभाषा है, मोलरता नहीं।
Quick Facts:
- मोलरता (M) = \( \frac{\text{विलेय के मोल}}{\text{विलयन का आयतन (L)}} \) — तापमान पर निर्भर।
- मोललता (m) = \( \frac{\text{विलेय के मोल}}{\text{विलायक का द्रव्यमान (kg)}} \) — तापमान पर निर्भर नहीं।
- मोलरता के लिए इकाई: mol/L या M (मोलर)।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उस विलयन की सही पहचान करता है जहाँ विलेय और विलायक दोनों तत्व हैं, तथा विलयन समांगी है?
- पानी में घुला कार्बन
- हवा में नाइट्रोजन के साथ मिश्रित ऑक्सीजन
- सल्फर के साथ मिश्रित लोहे का बुरादा
- पानी में घुली चीनी
Explanation:
- हवा में नाइट्रोजन (N₂) के साथ मिश्रित ऑक्सीजन (O₂): वायु (air) एक समांगी (homogeneous) गैसीय मिश्रण है, जिसमें विलेय (O₂) और विलायक (N₂) दोनों तत्व (गैसीय अवस्था में) हैं।
- पानी में घुला कार्बन: कार्बन (C) पानी (H₂O) में नहीं घुलता (यौगिक है, तत्व नहीं)।
- सल्फर के साथ मिश्रित लोहे का बुरादा: दोनों तत्व (Fe और S) हैं, लेकिन यह एक विषमांगी मिश्रण है (भौतिक रूप से अलग-अलग दिखाई देते हैं, चुंबक द्वारा अलग किए जा सकते हैं)।
- पानी में घुली चीनी: चीनी (C₁₂H₂₂O₁₁) एक यौगिक है, तत्व नहीं।
Quick Facts:
- वायु → N₂ (~78%) विलायक, O₂ (~21%) विलेय, और अन्य गैसें (Ar, CO₂, जलवाष्प)।
- गैस-गैस विलयन → समांगी, तत्व-तत्व विलयन का सर्वोत्तम उदाहरण।
- Fe और S का मिश्रण → विषमांगी, चुंबकीय पृथक्करण द्वारा अलग किया जा सकता है (Fe चुंबकीय है)।
निम्नलिखित में से कौन सा कथन निलंबन (सस्पेन्शन) के बारे में सही है?
- निलंबन एक विषमांगी मिश्रण है।
- गैस में परिश्लेषित ठोस को निलंबन कहते हैं।
- निलंबन के कण नग्न आँखों से अदृश्य होते हैं।
- निलंबन एक समांगी मिश्रण है।
Explanation:
- निलंबन एक विषमांगी मिश्रण है: यह निलंबन (suspension) की सही परिभाषा है — इसमें कण (> 1000 nm) समान रूप से वितरित नहीं होते और अलग-अलग चरण (ठोस + द्रव) होते हैं।
- गैस में परिक्षिप्त ठोस: यह ‘एरोसोल’ (aerosol) है (जैसे — धुंआ, धूल), निलंबन नहीं (निलंबन में ठोस + द्रव होता है, या कोई अन्य संयोजन, लेकिन सामान्यतः ठोस-द्रव)।
- कण नग्न आँखों से अदृश्य: गलत, निलंबन के कण > 1000 nm होते हैं और स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
- समांगी मिश्रण: गलत, निलंबन विषमांगी है।
Quick Facts:
- निलंबन → अस्थिर, कण बैठ जाते हैं (sedimentation), निस्यंदन द्वारा अलग किए जा सकते हैं।
- उदाहरण: पानी + रेत, पानी + चाक पाउडर, गंदा पानी।
- गैस में ठोस का परिक्षेपण → एरोसोल (aerosol) — एक प्रकार का कोलाइड।
निम्नलिखित में से कौन-सा कोलॉइड का गुण नहीं है?
- कोलॉइड एक विषमांगी मिश्रण है।
- बहुत छोटे आकार के कारण, व्यक्तिगत कणों को नग्न आँखों से नहीं देखा जा सकता है।
- कोलॉइड इसके माध्यम से गुजरने वाली प्रकाश की किरण को प्रकीर्णित नहीं कर सकता है।
- जब उन्हें बिना किसी रुकावट के छोड़ दिया जाता है, तो वे नीचे नहीं बैठते हैं।
Explanation:
- कोलॉइड प्रकाश को प्रकीर्णित नहीं कर सकता: यह कोलाइड का गुण नहीं है, बल्कि यह गलत है क्योंकि कोलाइड (1–1000 nm कण) प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं (टिडल प्रभाव — Tyndall effect)।
- कोलाइड विषमांगी मिश्रण है: सही (हालाँकि यह समांगी दिखता है, लेकिन सूक्ष्म स्तर पर विषमांगी है)।
- कण नग्न आँखों से अदृश्य: सही, केवल अल्ट्रामाइक्रोस्कोप से दिखते हैं।
- कण नीचे नहीं बैठते: सही, ब्राउनियन गति (Brownian motion) के कारण निलंबित रहते हैं।
Quick Facts:
- कोलाइड के गुण: विषमांगी, कण 1–1000 nm, टिडल प्रभाव, ब्राउनियन गति, निस्यंदन द्वारा अलग नहीं होते।
- उदाहरण: दूध, कोहरा, धुंआ, पेंट, जैल।
- टिडल प्रभाव की अनुपस्थिति → वास्तविक विलयन (true solution) की विशेषता।
निलंबन विलयनों से भिन्न होते हैं, क्योंकि ___________।
- इन्हें नग्न आंखों से देखा जा सकता है
- इनका विलेय पूर्ण रूप से विलीन हो जाता है
- ये पारदर्शी होते हैं
- इनके कण स्थायी रहने पर जमते नहीं हैं
Explanation:
- इन्हें नग्न आंखों से देखा जा सकता है: निलंबन (suspension) के कण > 1000 nm होते हैं, इसलिए वे नग्न आंखों से स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं, जबकि विलयन (solution) के कण < 1 nm होते हैं, जो अदृश्य होते हैं।
- विलेय पूर्ण रूप से विलीन हो जाता है: यह विलयन की विशेषता है, निलंबन की नहीं (निलंबन में कण घुलते नहीं)।
- पारदर्शी होते हैं: विलयन पारदर्शी होते हैं; निलंबन अपारदर्शी (opaque) होते हैं।
- कण स्थायी रहने पर जमते नहीं: यह विलयन की विशेषता है; निलंबन के कण बैठ जाते हैं।
Quick Facts:
- निलंबन → विषमांगी, कण दिखाई देते हैं, बैठ जाते हैं, अपारदर्शी।
- विलयन → समांगी, कण अदृश्य, स्थायी, पारदर्शी।
- कोलाइड → बीच का (1–1000 nm), कण अदृश्य, स्थायी, लेकिन प्रकाश प्रकीर्णन (टिडल प्रभाव) होता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा विषमांगी मिश्रण का उदाहरण नहीं है?
- रेत और नमक
- तेल में जल
- सिरका
- रेत और चीनी
Explanation:
- सिरका (Vinegar): सिरका (एसिटिक अम्ल — CH₃COOH का जलीय विलयन) एक समांगी मिश्रण (homogeneous mixture) है क्योंकि एसिटिक अम्ल पानी में पूर्णतः घुलकर एक सजातीय विलयन बनाता है।
- रेत और नमक: विषमांगी (ठोस-ठोस, अलग-अलग कण दिखाई देते हैं)।
- तेल में जल: विषमांगी (अमिश्रणीय द्रव — immiscible liquids, दो परतें)।
- रेत और चीनी: विषमांगी (ठोस-ठोस, अलग-अलग कण)।
Quick Facts:
- सिरका → 5–8% एसिटिक अम्ल + जल, समांगी विलयन।
- विषमांगी मिश्रण के उदाहरण: रेत + नमक, तेल + जल, मिट्टी + पानी, ग्रेनाइट।
- समांगी मिश्रण के उदाहरण: सिरका, वायु, चीनी का घोल, NaCl का घोल।
निम्नलिखित में से कौन सा पदार्थ समांगी मिश्रण बनाएगा?
- बेंजीन और पानी
- कार्बन डाइऑक्साइड और पानी
- रेत और टेबल नमक
- मिट्टी और पानी
Explanation:
- कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और पानी (H₂O): CO₂ पानी में घुलकर कार्बोनिक अम्ल (H₂CO₃) बनाता है, जो एक समांगी विलयन है (जैसे — कार्बोनेटेड जल — soda water)।
- बेंजीन और पानी: अमिश्रणीय (immiscible) — विषमांगी (बेंजीन जल में नहीं घुलता, पानी के ऊपर तैरता है)।
- रेत और टेबल नमक: विषमांगी (ठोस-ठोस, अलग-अलग कण)।
- मिट्टी और पानी: विषमांगी (निलंबन — suspension, मिट्टी के कण बैठ जाते हैं)।
Quick Facts:
- CO₂ + H₂O → H₂CO₃ (कार्बोनिक अम्ल) — एक समांगी विलयन।
- कार्बोनेटेड पेय पदार्थ (soda, soft drinks) CO₂ के जलीय विलयन हैं।
- बेंजीन (C₆H₆) — अध्रुवीय, पानी (ध्रुवीय) में अघुलनशील।
निम्नलिखित में से कौन-सा प्रायोगिक प्रेक्षण, द्रव्य में कणों के अस्तित्व का सर्वाधिक प्रबल प्रमाण प्रदान करता है?
- जल उबलने पर भाप उत्पन्न करता है
- लवण, ठंडे जल की तुलना में गर्म जल में तीव्रता से विलीन होता है
- बर्फ को गर्म करने पर वह पिघलकर जल बन जाती है
- स्याही की एक बूंद बिना विलोडन किए जल में समान रूप से प्रसारित हो जाती है
Explanation:
- स्याही की बूंद का जल में समान रूप से प्रसार (diffusion): यह इस बात का सबसे प्रबल प्रमाण है कि द्रव्य (matter) छोटे-छोटे कणों (अणुओं) से बना है, जो निरंतर गतिशील (kinetic) होते हैं। स्याही के कण (अणु) पानी के अणुओं के बीच रिक्त स्थान में फैल जाते हैं — यह विसरण (diffusion) है।
- जल उबलने पर भाप: यह अवस्था परिवर्तन (vaporization) दिखाता है, लेकिन कणों के अस्तित्व का उतना प्रबल प्रमाण नहीं जितना विसरण।
- लवण का गर्म जल में तीव्र घुलना: यह तापमान के प्रभाव (गतिज ऊर्जा) को दिखाता है, लेकिन प्रसार (diffusion) अधिक स्पष्ट है।
- बर्फ का पिघलना: अवस्था परिवर्तन (fusion) — कणों के बीच आकर्षण बल में परिवर्तन, लेकिन प्रसार प्रत्यक्ष प्रमाण है।
Quick Facts:
- विसरण (Diffusion) → कणों का उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर स्वतः फैलना, रिक्त स्थान (interparticle spaces) के कारण संभव है।
- स्याही का प्रसार → द्रव्य के कणों (अणुओं) के बीच रिक्त स्थान की उपस्थिति को प्रदर्शित करता है।
- यह प्रयोग पदार्थ की कणिका प्रकृति (particulate nature of matter) को सिद्ध करता है।
जब एक धातु ऑक्साइड एक अम्ल के साथ अभिक्रिया करता है, तो निम्नलिखित में से क्या उत्पादित होता है?
- लवण और कार्बन डाइऑक्साइड
- लवण और हाइड्रोजन गैस
- लवण और जल
- लवण और ऑक्सीजन गैस
Equation: \( \text{MO} + 2\text{HCl} \rightarrow \text{MCl}_2 + \text{H}_2\text{O} \)
Explanation:
- लवण और जल: धातु ऑक्साइड (MO) क्षारीय (basic) होते हैं। अम्ल (जैसे — HCl) के साथ अभिक्रिया करने पर वे उदासीनीकरण (neutralization) द्वारा संगत लवण (MCl₂) और जल (H₂O) बनाते हैं। यह एक सामान्य अभिक्रिया है: MO + 2H⁺ → M²⁺ + H₂O.
- लवण और CO₂: यह धातु कार्बोनेट (MCO₃) + अम्ल की अभिक्रिया में बनता है।
- लवण और H₂: यह धातु (M) + अम्ल की अभिक्रिया में बनता है (जैसे — Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂).
- लवण और O₂: यह अम्ल के साथ ऑक्साइड की अभिक्रिया से नहीं बनता (यह विघटन अभिक्रिया में बन सकता है)।
Quick Facts:
- धातु ऑक्साइड + अम्ल → लवण + जल (उदासीनीकरण अभिक्रिया — neutralization reaction)।
- उदाहरण: CuO (काला) + 2HCl → CuCl₂ (नीला-हरा) + H₂O.
- अधातु ऑक्साइड + क्षार → लवण + जल (जैसे — CO₂ + 2NaOH → Na₂CO₃ + H₂O).
सोडियम धातु किसमें संग्रहीत किया जाता है?
- मिट्टी तेल
- ईथर
- पानी
- एसीटोन
Explanation:
- मिट्टी तेल (Kerosene): सोडियम (Na) एक अत्यधिक अभिक्रियाशील धातु है जो जल (H₂O) के साथ तीव्रता से अभिक्रिया करके NaOH और H₂ गैस बनाती है: 2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂↑ + ऊष्मा. इसे वायु की नमी और ऑक्सीजन से बचाने के लिए मिट्टी तेल (kerosene) में डुबोकर रखा जाता है, क्योंकि Na मिट्टी तेल के साथ अभिक्रिया नहीं करता।
- ईथर (Ether): वाष्पशील और ज्वलनशील, सोडियम के भंडारण के लिए उपयुक्त नहीं।
- पानी (Water): Na पानी के साथ अभिक्रिया करता है (हिंसक अभिक्रिया, आग लग सकती है)।
- एसीटोन (Acetone): Na एसीटोन के साथ अभिक्रिया कर सकता है (क्षारीय संघनन — alkaline condensation)।
Quick Facts:
- Na, K, Li, Rb, Cs जैसी क्षार धातुएँ (alkali metals) मिट्टी तेल में संग्रहीत की जाती हैं।
- Na + H₂O → NaOH + H₂↑ (ऊष्माक्षेपी — exothermic, H₂ जलती है — आग लग सकती है)।
- मिट्टी तेल एक अध्रुवीय (non-polar) हाइड्रोकार्बन है, Na के साथ अभिक्रिया नहीं करता।
स्थिर अनुपात का नियम, ______ पर लागू होता है।
- शुद्ध रासायनिक यौगिक
- पदार्थों के मिश्रण
- मिश्रण और यौगिक दोनों
- तत्व
Explanation:
- शुद्ध रासायनिक यौगिक (Pure chemical compounds): स्थिर अनुपात का नियम (Law of definite proportions) केवल शुद्ध रासायनिक यौगिकों (compounds) पर लागू होता है। इस नियम के अनुसार, किसी यौगिक में घटक तत्व सदैव द्रव्यमान के एक निश्चित (fixed) अनुपात में होते हैं, चाहे वह किसी भी स्रोत से प्राप्त किया गया हो (जैसे — H₂O में H : O = 2 : 16 = 1 : 8).
- मिश्रण (Mixtures): गलत, मिश्रण में घटक किसी भी अनुपात में हो सकते हैं (परिवर्तनशील संघटन — variable composition).
- तत्व (Elements): गलत, तत्व शुद्ध पदार्थ हैं, उनमें अनुपात का प्रश्न नहीं उठता।
Quick Facts:
- स्थिर अनुपात का नियम → जोसेफ प्राउस्ट (Joseph Proust) द्वारा प्रतिपादित (1799)।
- उदाहरण: CO₂ में C : O = 12 : 32 = 3 : 8 (हमेशा)।
- अपवाद: गैर-स्टोइकियोमीट्रिक यौगिक (non-stoichiometric compounds) — जैसे — Fe₀.₉₅O, WO₃₋ₓ.
जब अम्ल धातु कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करता है, तो ______ बनता/बनते हैं/हैं।
- जल
- कार्बन डाइऑक्साइड
- लवण
- विकल्पों में से सभी
Equation: \( \text{MCO}_3 + 2\text{HCl} \rightarrow \text{MCl}_2 + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2 \)
Explanation:
- विकल्पों में से सभी (All of the above): धातु कार्बोनेट (MCO₃) + अम्ल → लवण (MCl₂) + जल (H₂O) + कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂). यह एक अभिलाक्षणिक अभिक्रिया है।
- जल: उत्पादों में से एक है।
- CO₂: उत्पादों में से एक है (गैस के रूप में निकलती है, चूने के पानी को दूधिया करती है)।
- लवण: संगत लवण बनता है (जैसे — CaCO₃ + 2HCl → CaCl₂ + H₂O + CO₂).
Quick Facts:
- धातु कार्बोनेट + अम्ल → लवण + जल + CO₂↑
- CO₂ की पहचान: चूने का पानी (Ca(OH)₂) दूधिया हो जाता है: Ca(OH)₂ + CO₂ → CaCO₃↓ + H₂O.
- उदाहरण: Na₂CO₃ + 2HCl → 2NaCl + H₂O + CO₂↑
पानी की कठोरता मापने की इकाई इनमें से कौन सी नहीं है?
- कैल्शियम कार्बोनेट के मिलीग्राम प्रति लीटर
- भाग प्रति दस लाख
- ग्राम प्रति गैलन
- ग्रेन प्रति गैलन
Explanation:
- ग्राम प्रति गैलन (g/gal): यह जल की कठोरता मापने की मानक इकाई नहीं है। जल की कठोरता को CaCO₃ के समतुल्य मात्रा में व्यक्त किया जाता है।
- mg/L (CaCO₃ के रूप में): यह एक मानक इकाई है (ppm के बराबर, क्योंकि 1 mg/L ≈ 1 ppm)।
- ppm (भाग प्रति दस लाख — parts per million): सामान्य इकाई (1 ppm = 1 mg/L).
- ग्रेन प्रति गैलन (grains per gallon, gpg): यह भी एक मानक इकाई है (1 gpg = 17.1 mg/L CaCO₃).
Quick Facts:
- जल की कठोरता → Ca²⁺ और Mg²⁺ आयनों की उपस्थिति के कारण।
- कठोरता की इकाइयाँ: mg/L (as CaCO₃), ppm, °F (फ्रांसीसी डिग्री), °dH (जर्मन डिग्री), gpg (grains per gallon).
- मृदु जल → < 60 mg/L, मध्यम → 60–120, कठोर → 120–180, अत्यधिक कठोर → > 180 mg/L (as CaCO₃).
एक विद्यार्थी, एक बीकर में रेत, नमक और जल को मिश्रित करके अच्छी तरह से हिलाता है। कुछ समय बाद, उसे क्या दिखाई देगा?
- रेत और नमक दोनों अविलीन रहते हैं, जिससे दो अलग-अलग परतें बन जाती हैं।
- सभी घटक पूरी तरह से विलीन हो जाते हैं, जिससे एक स्वच्छ विलयन बनता है।
- रेत नीचे बैठ जाती है, जबकि नमक, जल में विलीन हो जाता है।
- रेत, जल में स्थायी रूप से निलंबित रहती है, जिससे मिश्रण मेघमय हो जाता है।
Explanation:
- रेत नीचे बैठ जाती है, जबकि नमक, जल में विलीन हो जाता है: नमक (NaCl) पानी में घुलनशील (soluble) है, इसलिए यह घुलकर विलयन बनाता है। रेत (sand, SiO₂) पानी में अघुलनशील (insoluble) है, इसलिए यह नीचे बैठ जाती है (अवसादन — sedimentation) — एक निलंबन (suspension) बनाती है।
- रेत और नमक दोनों अविलीन: गलत, NaCl घुल जाता है।
- सभी घटक विलीन: गलत, रेत नहीं घुलती।
- रेत स्थायी रूप से निलंबित: गलत, रेत बैठ जाती है (निलंबन अस्थिर है)।
Quick Facts:
- NaCl → जल में घुलनशील (समांगी विलयन)।
- रेत (SiO₂) → जल में अघुलनशील (निलंबन, विषमांगी)।
- इस मिश्रण को भौतिक विधियों से अलग किया जा सकता है: निस्यंदन (रेत अलग) + वाष्पीकरण (NaCl प्राप्त)।
निम्नलिखित में से कौन-सा आयनिक यौगिकों का एक विशिष्ट गुण है?
- जल में अविलेय
- निम्न गलनांक
- गलित अवस्था में अल्प विद्युत चालकता
- आयनों के बीच प्रबल स्थिरवैद्युत बल
Explanation:
- आयनों के बीच प्रबल स्थिरवैद्युत बल (Strong electrostatic forces): आयनिक यौगिकों (जैसे — NaCl, MgO) में धनायन (cation) और ऋणायन (anion) के बीच प्रबल स्थिरवैद्युत आकर्षण बल (ionic bond) होता है। यही कारण है कि इनके गलनांक और क्वथनांक उच्च होते हैं, वे ठोस होते हैं, और जल में घुलनशील होते हैं।
- जल में अविलेय: गलत, आयनिक यौगिक जल में घुलनशील होते हैं (ध्रुवीय विलायक — like dissolves like).
- निम्न गलनांक: गलत, आयनिक यौगिकों के गलनांक उच्च होते हैं (NaCl — 801°C, MgO — 2852°C).
- गलित अवस्था में अल्प विद्युत चालकता: गलत, आयनिक यौगिक गलित या जलीय अवस्था में विद्युत का अच्छा चालन करते हैं (मुक्त आयनों के कारण)।
Quick Facts:
- आयनिक यौगिक: धातु + अधातु (जैसे — NaCl, CaCl₂, MgO).
- गुण: उच्च गलनांक/क्वथनांक, जल में घुलनशील, विद्युत अपघट्य (electrolytes), ठोस अवस्था में चालन नहीं करते।
- आयनिक बंध → प्रबल स्थिरवैद्युत बल (Coulombic attraction).
यदि किसी विलयन का pH मान 3 है, तो विलयन में हाइड्रोजन आयनों की सांद्रता कितनी है?
- 1 × 10⁻³ M
- 3 × 10⁻² M
- 3 × 10⁻³ M
- 1 × 10³ M
Equation: \( [\text{H}^+] = 10^{-\text{pH}} = 10^{-3} \, \text{M} \)
Explanation:
- 1 × 10⁻³ M: pH = \( -\log_{10}[\text{H}^+] \). यदि pH = 3, तो \( [\text{H}^+] = 10^{-3} \) M (मोलर). यह एक अम्लीय विलयन है (pH < 7).
- 3 × 10⁻² M: गलत, यह pH ≈ 1.5 के बराबर होगा (log 3 × 10⁻² ≈ 1.52).
- 3 × 10⁻³ M: गलत, pH = -log(3×10⁻³) ≈ 2.52.
- 1 × 10³ M: गलत, यह अत्यधिक उच्च सांद्रता है, pH = -3 (असंभव, pH स्केल 0–14).
Quick Facts:
- pH स्केल → 0–14 (अम्लीय <7, उदासीन =7, क्षारीय >7).
- [H⁺] की सांद्रता बढ़ने पर pH घटता है (व्युत्क्रमानुपाती संबंध).
- pH = 3 → दही, नींबू के रस जैसा अम्लीय विलयन.
एक विलयन में 320 ग्राम पानी में 32 ग्राम साधारण लवण होता है। विलयन के द्रव्यमान प्रतिशत द्वारा द्रव्यमान के संदर्भ में सांद्रता की गणना कीजिए।
- 9.09%
- 9.09 g
- 11.1%
- 6.66%
Equation: \( \frac{32}{352} \times 100 = 9.09\% \)
Explanation:
- 9.09%: द्रव्यमान प्रतिशत (w/w%) = \( \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान}}{\text{विलयन का कुल द्रव्यमान}} \times 100 \). विलयन का कुल द्रव्यमान = विलेय (32g) + विलायक (320g) = 352g. अतः \( \frac{32}{352} \times 100 = 9.09\% \).
- 9.09 g: गलत, यह मात्रा है, प्रतिशत नहीं।
- 11.1%: गलत, यह \( \frac{32}{288} \times 100 \) के बराबर होगा (320 + 32 के स्थान पर गलत हर).
- 6.66%: गलत, यह \( \frac{20}{300} \times 100 \) के लिए है.
Quick Facts:
- द्रव्यमान प्रतिशत (w/w%) → ठोस-द्रव या ठोस-ठोस विलयन के लिए सामान्य।
- सांद्रता → विलेय की मात्रा / विलयन की कुल मात्रा × 100.
- यहाँ NaCl की सांद्रता ≈ 9.09% (w/w) है।
रेत और चीनी का मिश्रण किसका एक उदाहरण है?
- विषमांगी मिश्रण
- समांगी मिश्रण
- निलंबन
- कोलाइड
Explanation:
- विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous mixture): रेत (SiO₂) और चीनी (C₁₂H₂₂O₁₁) दोनों ठोस पदार्थ हैं, लेकिन वे एक दूसरे में नहीं घुलते। मिश्रण में रेत और चीनी के कण अलग-अलग दिखाई देते हैं, इसलिए यह एक विषमांगी मिश्रण है। इन्हें भौतिक विधियों (जैसे — जल में घोलकर निस्यंदन) द्वारा अलग किया जा सकता है (चीनी पानी में घुल जाती है, रेत नहीं).
- समांगी मिश्रण: गलत, कण अलग-अलग दिखते हैं।
- निलंबन (Suspension): निलंबन में ठोस कण द्रव में निलंबित होते हैं (जैसे — रेत + पानी), यहाँ दोनों ठोस हैं, इसलिए निलंबन नहीं।
- कोलाइड (Colloid): गलत, कोलाइड में कण 1–1000 nm होते हैं, यहाँ कण बड़े हैं।
Quick Facts:
- रेत + चीनी → विषमांगी (ठोस-ठोस मिश्रण).
- इसे जल में घोलकर + निस्यंदन + वाष्पीकरण द्वारा अलग किया जा सकता है (चीनी घुलती है, रेत नहीं).
- विषमांगी मिश्रण के अन्य उदाहरण: रेत + नमक, लोहा + सल्फर.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन, मिश्रण और यौगिक के बीच उचित अंतर बताता है?
- मिश्रण को रासायनिक विधियों द्वारा पृथक किया जा सकता है, जबकि यौगिकों को भौतिक विधियों द्वारा पृथक किया जा सकता है।
- मिश्रण के गुणधर्म भिन्न होते हैं, जबकि यौगिक के गुणधर्म उसके घटक तत्वों से पूर्ण रूप से समान होते हैं।
- मिश्रण का संघटन परिवर्तनशील होता है, जबकि यौगिकों का संघटन निश्चित (स्थिर) होता है।
- मिश्रण का संघटन स्थिर होता है, जबकि यौगिकों का संघटन परिवर्तनशील होता है।
Explanation:
- मिश्रण का संघटन परिवर्तनशील, यौगिक का निश्चित: यह मुख्य अंतर है। मिश्रण (जैसे — रेत + नमक) में घटकों का अनुपात किसी भी प्रकार से बदला जा सकता है, जबकि यौगिक (जैसे — H₂O) में तत्वों का अनुपात सदैव निश्चित होता है (स्थिर अनुपात का नियम).
- मिश्रण को रासायनिक विधियों से पृथक: गलत, मिश्रण को भौतिक विधियों से पृथक किया जाता है, यौगिक को रासायनिक विधियों से।
- मिश्रण के गुणधर्म भिन्न: गलत, मिश्रण में घटक अपने गुणधर्म बनाए रखते हैं; यौगिक के नए गुणधर्म होते हैं।
- मिश्रण का संघटन स्थिर: गलत, यह यौगिक की विशेषता है।
Quick Facts:
- मिश्रण → परिवर्ती संघटन, भौतिक पृथक्करण, व्यक्तिगत गुणधर्म।
- यौगिक → निश्चित संघटन, रासायनिक पृथक्करण, नए गुणधर्म।
- नियत अनुपात का नियम → यौगिकों पर लागू होता है।
लिटमस पेपर के अलावा निम्नलिखित में से किस ‘सूचक’ का उपयोग विलयनों की प्रकृति का परीक्षण करने के लिए किया जाता है?
- साधारण नमक और सिरका
- हल्दी और लाल पत्तागोभी का रस
- रेत और ऐल्कोहॉल
- चीनी और जल
Explanation:
- हल्दी (Turmeric) और लाल पत्तागोभी का रस (Red cabbage juice): ये प्राकृतिक सूचक (natural indicators) हैं। हल्दी क्षारीय (basic) विलयन में लाल (या भूरा-लाल) हो जाती है, जबकि अम्लीय (acidic) में पीली रहती है। लाल पत्तागोभी का रस अम्ल में लाल, क्षार में हरा/नीला, और उदासीन में बैंगनी हो जाता है।
- साधारण नमक और सिरका: नमक (NaCl) उदासीन है, सिरका (एसिटिक अम्ल) अम्लीय है — ये सूचक नहीं हैं, बल्कि परीक्षण सामग्री हैं।
- रेत और अल्कोहल: सूचक नहीं।
- चीनी और जल: सूचक नहीं।
Quick Facts:
- प्राकृतिक सूचक: हल्दी, लाल पत्तागोभी, गुलाब की पंखुड़ियाँ, जामुन, चाय, बैंगनी फूल।
- लिटमस → लाइकेन (lichen) से प्राप्त, अम्ल में लाल, क्षार में नीला।
- सार्वभौमिक सूचक (universal indicator) → pH मान के अनुसार रंग बदलता है।
250 mL विलयन में 5 g विलेय घुला हुआ है। विलयन की सांद्रता (द्रव्यमान आयतन %) क्या है?
- 2%
- 0.2%
- 50%
- 0.02%
Equation: \( \frac{5}{250} \times 100 = 2\% \)
Explanation:
- 2%: द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत (w/v%) = \( \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान (g)}}{\text{विलयन का आयतन (mL)}} \times 100 \). यहाँ \( \frac{5}{250} \times 100 = 2\% \). (विलेय 5g, विलयन 250 mL).
- 0.2%: गलत, यह \( \frac{5}{2500} \times 100 \) के बराबर होता (हर 10 गुना बड़ा).
- 50%: गलत, यह \( \frac{125}{250} \times 100 \) के बराबर होता.
- 0.02%: गलत, यह \( \frac{0.05}{250} \times 100 \) के बराबर होता.
Quick Facts:
- w/v% → सामान्यतः जीव विज्ञान/चिकित्सा में उपयोग (जैसे — 0.9% NaCl (w/v) = 0.9 g NaCl/100 mL).
- यहाँ 5g विलेय 250 mL में → 2% (w/v) विलयन.
BaCl₂ जब Na₂SO₄ के साथ अभिक्रिया करता है, तो बनने वाला सफेद अवक्षेप क्या होता है?
- बेरियम नाइट्रेट जो क्षारीय होता है
- सोडियम क्लोराइड जो क्रिस्टलीकृत होता है
- सोडियम कार्बोनेट जो अघुलनशील होता है
- बेरियम सल्फेट जो अघुलनशील होता है
Equation: \( \text{BaCl}_2 + \text{Na}_2\text{SO}_4 \rightarrow \text{BaSO}_4 \downarrow + 2\text{NaCl} \)
Explanation:
- बेरियम सल्फेट (BaSO₄): BaCl₂ और Na₂SO₄ की अभिक्रिया में एक सफेद अघुलनशील अवक्षेप (precipitate) BaSO₄ बनता है। यह एक अवक्षेपण अभिक्रिया (precipitation reaction) है — दो विलयनों के मिलने पर अघुलनशील यौगिक बनता है। BaSO₄ पानी में अघुलनशील होता है, इसलिए यह नीचे बैठ जाता है।
- बेरियम नाइट्रेट (Ba(NO₃)₂): BaCl₂ + NaNO₃ से बनेगा, यहाँ Na₂SO₄ है, NaNO₃ नहीं।
- सोडियम क्लोराइड (NaCl): यह विलयन (aqueous) में घुला रहता है, अवक्षेप नहीं।
- सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃): यह BaSO₄ नहीं है।
Quick Facts:
- BaSO₄ → सफेद अवक्षेप, अघुलनशील (insoluble).
- अभिक्रिया: BaCl₂ (aq) + Na₂SO₄ (aq) → BaSO₄↓ + 2NaCl (aq).
- BaSO₄ का उपयोग बेरियम भोजन (barium meal) में एक्स-रे के लिए किया जाता है (अघुलनशील और विकिरण-अपारदर्शी — radiopaque).
कार्बन डाइऑक्साइड में, कार्बन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात क्या है?
- 3:8
- 6:8
- 12:16
- 3:4
Equation: \( \text{CO}_2 \rightarrow \text{C} : \text{O} = 12 : 32 = 3 : 8 \)
Explanation:
- 3:8: CO₂ में कार्बन (C) का परमाणु द्रव्यमान = 12 u, ऑक्सीजन (O) का = 16 u (दो O परमाणु → 32 u). अनुपात = 12 : 32 = 3 : 8 (सरलतम रूप).
- 6:8: गलत, यह 3:4 के बराबर होगा (12:16).
- 12:16: गलत, यह CO (कार्बन मोनोऑक्साइड) में C:O का अनुपात है (CO में 12:16 = 3:4).
- 3:4: गलत, यह CO का अनुपात है, CO₂ का नहीं।
Quick Facts:
- CO₂ में C : O = 3 : 8 (द्रव्यमान अनुपात).
- CO₂ में C = 27.27%, O = 72.73% (द्रव्यमान प्रतिशत).
- स्थिर अनुपात का नियम → CO₂ में C:O हमेशा 3:8 होता है।
25°C पर शुद्ध जल में H⁺ आयनों की सांद्रता कितनी होती है?
- 1 × 10⁻⁵ M
- 1 × 10⁻⁴ M
- 1 × 10⁻⁷ M
- 1 × 10⁻⁶ M
Equation: \( [\text{H}^+] = 1 \times 10^{-7} \, \text{M} \)
Explanation:
- 1 × 10⁻⁷ M: 25°C पर शुद्ध जल (pure water) में H⁺ और OH⁻ आयनों की सांद्रता बराबर होती है: [H⁺] = [OH⁻] = 1 × 10⁻⁷ M (जल का आयनिक गुणनफल — ionic product of water: K_w = [H⁺][OH⁻] = 1 × 10⁻¹⁴).
- 10⁻⁵ M: अम्लीय विलयन (pH ≈ 5).
- 10⁻⁴ M: अम्लीय (pH ≈ 4).
- 10⁻⁶ M: अम्लीय (pH ≈ 6).
Quick Facts:
- शुद्ध जल → pH = 7 (उदासीन).
- [H⁺] = [OH⁻] = 10⁻⁷ M (25°C पर).
- तापमान बढ़ने पर K_w बढ़ता है, pH घटता है (लेकिन जल उदासीन रहता है क्योंकि [H⁺] = [OH⁻]).
किसी विलयन को स्थायी तब कहा जाता है जब ____।
- विलेय के कण विलायक कणों के साथ एक अलग परत बनाते हैं
- अविक्षुब्ध रहने पर विलेय के कण विलयन की सतह पर तैरते हैं
- अविक्षुब्ध रहने पर भी विलेय के कण नीचे नहीं बैठते हैं
- अविक्षुब्ध रहने पर विलेय के कण नीचे बैठ जाते हैं
Explanation:
- अविक्षुब्ध रहने पर भी विलेय के कण नीचे नहीं बैठते: विलयन (solution) स्थायी (stable) होता है क्योंकि इसमें कण < 1 nm होते हैं, जो गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में भी बैठते नहीं हैं (वे पूर्णतः घुले हुए होते हैं)।
- अलग परत बनाना: यह अमिश्रणीय (immiscible) विलयन/मिश्रण की विशेषता है, स्थायी नहीं।
- सतह पर तैरना: यह अस्थिर मिश्रण (जैसे — तेल + पानी) की विशेषता है।
- नीचे बैठना: यह निलंबन (suspension) की विशेषता है — अस्थिर।
Quick Facts:
- विलयन → स्थायी (stable), कण बैठते नहीं, पारदर्शी, समांगी।
- कोलाइड → अपेक्षाकृत स्थायी (कण नहीं बैठते, लेकिन प्रकाश प्रकीर्णन होता है)।
- निलंबन → अस्थिर (unstable), कण बैठ जाते हैं।
280 ग्राम पानी में 20 ग्राम साधारण नमक का विलयन है। द्रव्यमान द्वारा द्रव्यमान प्रतिशत के संदर्भ में सांद्रता क्या है?
- 0.66%
- 6.66%
- 11.1%
- 20%
Equation: \( \frac{20}{300} \times 100 = 6.66\% \)
Explanation:
- 6.66%: द्रव्यमान प्रतिशत (w/w%) = \( \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान}}{\text{विलयन का कुल द्रव्यमान}} \times 100 \). विलयन = 20g (NaCl) + 280g (H₂O) = 300g. \( \frac{20}{300} \times 100 = 6.66\% \).
- 0.66%: गलत, यह \( \frac{2}{300} \times 100 \) के बराबर होता।
- 11.1%: गलत, यह \( \frac{20}{180} \times 100 \) के बराबर होता (गलत हर).
- 20%: गलत, यह \( \frac{20}{100} \times 100 \) के बराबर होता (विलायक के स्थान पर विलेय).
Quick Facts:
- w/w% → विलेय का द्रव्यमान / विलयन का द्रव्यमान × 100.
- यहाँ NaCl की सांद्रता ≈ 6.66% (w/w).
- विलयन का द्रव्यमान = विलेय + विलायक (हमेशा).
जब परिक्षिप्त प्रावस्था गैस होती है और परिक्षेपण माध्यम ठोस होता है तो कोलाइड का प्रकार कैसा होता है?
- एयरोसोल
- फोम
- ठोस फोम
- पायसन
Explanation:
- ठोस फोम (Solid foam): जब परिक्षिप्त प्रावस्था (dispersed phase) = गैस और परिक्षेपण माध्यम (dispersion medium) = ठोस, तो इसे ठोस फोम कहते हैं। उदाहरण: स्टायरोफोम (expanded polystyrene), प्यूमिस (pumice stone), झाँवा।
- एयरोसोल (Aerosol): परिक्षिप्त प्रावस्था = ठोस या द्रव, परिक्षेपण माध्यम = गैस (जैसे — धुंआ, कोहरा).
- फोम (Foam): परिक्षिप्त प्रावस्था = गैस, परिक्षेपण माध्यम = द्रव (जैसे — शेविंग फोम, साबुन का झाग).
- पायस (Emulsion): परिक्षिप्त प्रावस्था = द्रव, परिक्षेपण माध्यम = द्रव (जैसे — दूध, मेयोनेज़).
Quick Facts:
- कोलाइड के प्रकार (वर्गीकरण):
- ठोस-गैस → ठोस फोम (solid foam)
- द्रव-गैस → फोम (foam)
- गैस-द्रव → एरोसोल (aerosol)
- द्रव-द्रव → पायस (emulsion)
- ठोस-द्रव → सॉल (sol)
- द्रव-ठोस → जैल (gel)
निम्नलिखित में से कौन सा कथन कोलाइडल विलयन के बारे में गलत है?
- कोलाइडल विलयन एक विषमांगी मिश्रण है।
- घटकों को निस्यंदन की प्रक्रिया द्वारा अलग नहीं किया जा सकता है।
- कोहरा कोलाइडल विलयन का एक उदाहरण है।
- दूध एक कोलाइडल विलयन नहीं है।
Explanation:
- दूध एक कोलाइडल विलयन नहीं है: यह कथन गलत है क्योंकि दूध (milk) एक कोलाइडी विलयन (पायस — emulsion) का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें वसा गोलिकाएँ (fat globules) जल में परिक्षिप्त होती हैं (कोलाइडी आकार 1–1000 nm).
- कोलाइडल विलयन विषमांगी: सही (सूक्ष्म स्तर पर).
- निस्यंदन द्वारा अलग नहीं किया जा सकता: सही, कण फिल्टर पेपर से गुज़र जाते हैं।
- कोहरा (Fog): कोलाइड (एरोसोल) का उदाहरण है, सही।
Quick Facts:
- दूध → पायस (emulsion) — कोलाइडी विलयन।
- कोलाइड के उदाहरण: दूध, रक्त, कोहरा, धुंआ, पेंट, स्टार्च विलयन।
- कोलाइडी कण → निस्यंदन से नहीं, लेकिन अपकेंद्रण (centrifugation) से अलग किए जा सकते हैं।
विलयन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- विलयन एक समांगी मिश्रण होता है जिसमें विलेय के कण नग्न आंखों से दिखाई नहीं देते।
- विलयन दो या दो से अधिक पदार्थों का एक विषमांगी मिश्रण होता है।
- विलयन में विलेय स्थिर रहने पर नीचे बैठ जाता है।
- विलयन में विलेय की मात्रा विलायक से सदैव अधिक होती है।
Explanation:
- विलयन समांगी मिश्रण, कण अदृश्य: यह विलयन (solution) की सही परिभाषा है। विलयन में विलेय के कण (< 1 nm) पूर्णतः विलीन होते हैं और नग्न आंखों से अदृश्य होते हैं।
- विषमांगी मिश्रण: गलत, विलयन समांगी है।
- विलेय बैठ जाता है: गलत, विलयन स्थायी होता है, कण बैठते नहीं (यह निलंबन की विशेषता है).
- विलेय की मात्रा > विलायक: गलत, सामान्यतः विलायक (solvent) अधिक होता है; विलेय (solute) कम। (हालाँकि अपवाद — oversaturated solutions में अधिक हो सकता है, लेकिन सामान्यतः नहीं।)
Quick Facts:
- विलयन → समांगी, स्थायी, कण < 1 nm, पारदर्शी, टिडल प्रभाव नहीं।
- उदाहरण: NaCl का जलीय विलयन, चीनी का घोल, वायु (गैसीय विलयन).
- विलयन को आसवन, वाष्पीकरण, क्रोमैटोग्राफी द्वारा अलग किया जा सकता है (निस्यंदन से नहीं).
निम्नलिखित में से कौन-सा क्रियाकलाप, द्रव्य के कणों के बीच रिक्त स्थान की उपस्थिति को प्रदर्शित करता है?
- ठोस को गर्म करना
- द्रव को जमाना
- चीनी को जल में घोलना
- गैस को संपीडित करना
Explanation:
- चीनी को जल में घोलना: जब चीनी (ठोस) को पानी (द्रव) में डाला जाता है, तो चीनी के कण (अणु) पानी के अणुओं के बीच उपस्थित रिक्त स्थान (interparticle spaces) में समा जाते हैं, जिससे जल का स्तर (level) नहीं बढ़ता। यह रिक्त स्थानों की उपस्थिति को दर्शाता है।
- ठोस को गर्म करना: यह कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ाता है, रिक्त स्थान नहीं दिखाता।
- द्रव को जमाना: यह कणों के बीच की दूरी को कम करता है (आकर्षण बल बढ़ता है).
- गैस को संपीडित करना: यह रिक्त स्थानों को कम करता है, लेकिन चीनी का घोल अधिक स्पष्ट प्रदर्शन है (रिक्त स्थानों की उपस्थिति).
Quick Facts:
- पदार्थ के कणों के बीच रिक्त स्थान → गैस > द्रव > ठोस.
- चीनी + जल → विलयन बनता है, जल स्तर में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं (रिक्त स्थानों की पुष्टि).
- यह प्रयोग पदार्थ की कणिका प्रकृति (particulate nature) को प्रदर्शित करता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा कोलॉइडी विलयन है?
- दूध
- चीनी का घोल
- नमक का पानी
- पानी में रेत
Explanation:
- दूध (Milk): दूध एक कोलाइडी विलयन (पायस — emulsion) है, जिसमें वसा गोलिकाएँ (1–1000 nm) जल में परिक्षिप्त होती हैं।
- चीनी का घोल: वास्तविक विलयन (true solution) — समांगी, कण < 1 nm.
- नमक का पानी: वास्तविक विलयन (true solution) — NaCl पूर्णतः घुल जाता है।
- पानी में रेत: निलंबन (suspension) — विषमांगी, कण > 1000 nm, बैठ जाते हैं।
Quick Facts:
- कोलाइडी विलयन → 1–1000 nm कण, टिडल प्रभाव, ब्राउनियन गति, स्थायी (नहीं बैठते).
- दूध → कोलाइड (पायस), दही → कोलाइड (जैल).
- रक्त → कोलाइड (सॉल).
पीतल किसका मिश्रण है?
- 30% जस्ता और 70% तांबा
- 20% जस्ता और 80% तांबा
- 80% जस्ता और 20% तांबा
- 70% जस्ता और 30% तांबा
Explanation:
- 30% जस्ता (Zn) और 70% तांबा (Cu): पीतल (Brass) तांबा (Cu) और जस्ता (Zn) की मिश्र धातु (alloy) है। सामान्यतः पीतल में Cu ~ 60–70% और Zn ~ 30–40% होता है, लेकिन मानक सूत्र 70% Cu + 30% Zn का उपयोग अधिक होता है।
- 20% Zn + 80% Cu: यह भी पीतल हो सकता है (विभिन्न प्रकार), लेकिन मानक 30:70 है।
- 80% Zn + 20% Cu: यह Zn-अधिक मिश्र धातु है, पीतल नहीं (यह कांसा — bronze — के करीब हो सकता है, लेकिन कांसा Cu + Sn है).
- 70% Zn + 30% Cu: उल्टा अनुपात है (Zn अधिक).
Quick Facts:
- पीतल → Cu (70%) + Zn (30%) — समांगी मिश्र धातु (homogeneous alloy).
- कांसा (Bronze) → Cu (88%) + Sn (12%).
- स्टेनलेस स्टील → Fe (74%) + Cr (18%) + Ni (8%).
- मिश्र धातुएँ शुद्ध धातुओं से अधिक मजबूत और संक्षारण प्रतिरोधी होती हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा प्रेक्षण इस बात का समर्थन करता है कि पदार्थ छोटे कणों से बना होता है?
- तेल को धीरे से हिलाने पर वह पृष्ठ पर तैरता है।
- चाक पाउडर मिलाने के बाद भी दिखाई देता है।
- शर्करा जल में विलीन हो जाती है और उसके स्तर में कोई परिवर्तन नहीं होता।
- रेत को जल में मिलाने पर रेत तल में बैठ जाती है।
Explanation:
- शर्करा (चीनी) जल में विलीन हो जाती है और उसके स्तर में कोई परिवर्तन नहीं होता: यह प्रेक्षण पुष्टि करता है कि चीनी के कण (अणु) पानी के अणुओं के बीच रिक्त स्थान (interparticle spaces) में समा जाते हैं, जिससे जल स्तर नहीं बढ़ता। यह पदार्थ की कणिका प्रकृति को प्रदर्शित करता है।
- तेल का तैरना: यह घनत्व (density) के अंतर को दर्शाता है, कणों के अस्तित्व को नहीं।
- चाक पाउडर दिखाई देना: यह निलंबन (suspension) की विशेषता है, कण बड़े हैं।
- रेत का बैठना: अवसादन (sedimentation), कण बड़े हैं।
Quick Facts:
- चीनी का घोल → विलयन (solution) — कण अदृश्य, रिक्त स्थानों में समाते हैं।
- यह प्रयोग “कणों के बीच रिक्त स्थान” की अवधारणा को दर्शाता है।
- विसरण (diffusion) भी कणों के अस्तित्व को प्रदर्शित करता है (जैसे — स्याही का फैलना).
निम्नलिखित में से कौन-सी विधि अयस्क संवर्धन (ore enrichment) के लिए उपयोग नहीं की जाती है?
- फेन प्लवन (Froth floatation)
- निक्षण (Dredging)
- जल धावन (Hydraulic washing)
- निक्षालन (Leaching)
Explanation:
- निक्षण (Dredging): यह अयस्क संवर्धन की विधि नहीं है। निक्षण एक यांत्रिक विधि है जिसमें नदी, झील या समुद्र के तल से अवसादों (sediments) को खोदकर निकाला जाता है (जैसे — हीरे या सोने की खनन में). यह अयस्क को सांद्रित (concentrate) नहीं करता, बल्कि खनन विधि है।
- फेन प्लवन (Froth floatation): अयस्क संवर्धन में उपयोग (सल्फाइड अयस्कों के लिए — जैसे — Cu₂S, ZnS).
- जल धावन (Hydraulic washing): घनत्व आधारित पृथक्करण (जैसे — टिन अयस्क — cassiterite).
- निक्षालन (Leaching): रासायनिक विधि (जैसे — बॉक्साइट से एल्युमिना निकालना).
Quick Facts:
- अयस्क संवर्धन (Ore dressing/Concentration) → अशुद्धियाँ (गैंग — gangue) हटाना।
- विधियाँ: चुंबकीय पृथक्करण, फेन प्लवन, जल धावन (स्ट्रीम/ग्रेविटी), निक्षालन।
- निक्षण → खनन विधि (mining), सांद्रण नहीं।
जलीय (aq) शब्द तब लिखा जाता है जब अभिकारक या उत्पाद एक के रूप में मौजूद होता है।
- संकेन्द्रित विलयन
- जल में विलयन
- आइसोटोनिक विलयन
- मिट्टी के तेल में विलयन
Explanation:
- जल में विलयन (Aqueous solution): रासायनिक समीकरणों में “(aq)” लिखा जाता है जब कोई पदार्थ जल (water, H₂O) में विलीन (dissolved) होता है। यह इंगित करता है कि पदार्थ जलीय अवस्था (aqueous state) में है (जल में घुला हुआ).
- संकेन्द्रित विलयन (Concentrated solution): “aq” विलयन की सांद्रता नहीं बताता, यह केवल विलायक को इंगित करता है।
- आइसोटोनिक विलयन (Isotonic solution): यह शब्द परासरण (osmosis) से संबंधित है, “aq” नहीं।
- मिट्टी के तेल में विलयन: इसे “(org)” या विलायक का नाम लिखकर दर्शाया जाता है, “aq” नहीं (aq केवल जल के लिए).
Quick Facts:
- “aq” → aqueous (जलीय) — विलायक जल है।
- “s” → solid (ठोस), “l” → liquid (द्रव), “g” → gas (गैस), “aq” → aqueous.
- उदाहरण: NaCl (aq) + AgNO₃ (aq) → AgCl (s)↓ + NaNO₃ (aq).
चार संभावनाओं में से, निलंबन में कौन सा गुण होता है?
- विषमांगी मिश्रण
- ठोस मिश्रण
- प्रत्यास्थ मिश्रण
- समांगी मिश्रण
Explanation:
- विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous mixture): निलंबन (suspension) एक विषमांगी मिश्रण है क्योंकि इसमें ठोस कण (> 1000 nm) द्रव में समान रूप से वितरित नहीं होते, और अलग-अलग चरण होते हैं।
- ठोस मिश्रण: गलत, निलंबन ठोस-द्रव होता है (ठोस-ठोस नहीं).
- प्रत्यास्थ मिश्रण (Elastic mixture): यह शब्द मानक नहीं है।
- समांगी मिश्रण: गलत, निलंबन समांगी नहीं है (यह विलयन की विशेषता है).
Quick Facts:
- निलंबन → विषमांगी, कण बड़े (>1000 nm), बैठ जाते हैं, निस्यंदन द्वारा अलग किए जाते हैं।
- उदाहरण: पानी + रेत, पानी + चाक पाउडर।
- कोलाइड → विषमांगी (लेकिन समांगी दिखता है).
निम्नलिखित में से किसकी क्षारकता सबसे अधिक है?
- रक्त
- लार
- सोडियम हाइड्रॉक्साइड
- नल का पानी
Explanation:
- सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH): NaOH एक प्रबल क्षार (strong base) है। इसका pH ≈ 13–14 होता है, जो सबसे अधिक क्षारकता (alkalinity) को दर्शाता है।
- रक्त (Blood): pH ≈ 7.35–7.45 (थोड़ा क्षारीय).
- लार (Saliva): pH ≈ 6.5–7.5 (लगभग उदासीन).
- नल का पानी (Tap water): pH ≈ 6.5–8.5 (थोड़ा क्षारीय या उदासीन).
Quick Facts:
- NaOH → pH ≈ 14 (अत्यंत क्षारीय).
- pH > 7 → क्षारीय (basic), pH < 7 → अम्लीय (acidic).
- प्रबल क्षार → पूर्णतः आयनित होते हैं (NaOH → Na⁺ + OH⁻).
जब किसी पदार्थ की उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर स्वत:स्फूर्त गति होती है तो उस प्रक्रिया को क्या कहा जाता है?
- गैसीय विभिन्न
- विसरण
- परासरण
- संचरण
Explanation:
- विसरण (Diffusion): किसी भी पदार्थ (गैस, द्रव, या ठोस) के कणों की उच्च सांद्रता (higher concentration) से निम्न सांद्रता (lower concentration) की ओर स्वतः (spontaneous) गति को विसरण कहते हैं। यह सांद्रता प्रवणता (concentration gradient) के कारण होता है और इसमें कोई झिल्ली (membrane) आवश्यक नहीं है।
- गैसीय विभिन्न: यह कोई मानक शब्द नहीं है।
- परासरण (Osmosis): जल (विलायक) के अणुओं की विशेष अर्धपारगम्य झिल्ली (semipermeable membrane) के आर-पार गति, विलेय की नहीं।
- संचरण (Translocation): पौधों में खाद्य पदार्थों का स्थानांतरण (फ्लोएम).
Quick Facts:
- विसरण → निष्क्रिय परिवहन (passive transport), बिना ऊर्जा (ATP) के।
- उदाहरण: इत्र की गंध का फैलना, O₂/CO₂ का फेफड़ों में आदान-प्रदान।
- विसरण की दर → तापमान, आण्विक द्रव्यमान, सांद्रता प्रवणता पर निर्भर करती है।
यदि वायु के प्रतिदर्श को उसके आधे आयतन तक संपीडित किया जाता है, तो निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- वायु का संघटन समान रहता है, क्योंकि यह एक मिश्रण है।
- संपीडित करने पर वायु एक यौगिक बन जाती है।
- वायु का संघटन परिवर्तित हो जाता है।
- गैसों का अनुपात परिवर्तित हो जाता है।
Explanation:
- वायु का संघटन समान रहता है: वायु एक मिश्रण (mixture) है, न कि यौगिक। संपीडन (compression) केवल आयतन (volume) को कम करता है; गैसों के अणुओं के बीच की दूरी घटती है, लेकिन प्रत्येक घटक गैस (N₂, O₂, Ar, CO₂) की मात्रा (द्रव्यमान) और अनुपात (ratio) नहीं बदलता है।
- यौगिक बन जाती है: गलत, संपीडन एक भौतिक परिवर्तन है, रासायनिक नहीं; वायु मिश्रण ही रहती है।
- संघटन परिवर्तित: गलत, संघटन (composition) नहीं बदलता।
- गैसों का अनुपात परिवर्तित: गलत, अनुपात (N₂:O₂:Ar:CO₂) समान रहता है।
Quick Facts:
- वायु → गैसों का समांगी मिश्रण (N₂~78%, O₂~21%, Ar~0.9%, CO₂~0.03%).
- संपीडन → गैसों के बीच रिक्त स्थान (interparticle spaces) कम हो जाते हैं, लेकिन रासायनिक संरचना नहीं बदलती।
- भौतिक परिवर्तन → कोई नया पदार्थ नहीं बनता।
कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड के विलयन का सामान्य नाम क्या है?
- लाइम वॉटर
- डाइट सोडा
- नमक का विलयन
- विनेगर
Explanation:
- लाइम वॉटर (Lime water): Ca(OH)₂ (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड) का जलीय विलयन लाइम वॉटर (या चूने का पानी) कहलाता है। यह क्षारीय होता है और CO₂ गैस की पहचान के लिए उपयोग किया जाता है (CO₂ प्रवाहित करने पर दूधिया — milky — हो जाता है).
- डाइट सोडा (Diet soda): यह एक पेय पदार्थ है, Ca(OH)₂ नहीं।
- नमक का विलयन (Salt solution): NaCl का विलयन (सोडियम क्लोराइड).
- विनेगर (Vinegar): एसिटिक अम्ल (CH₃COOH) का जलीय विलयन (अम्लीय).
Quick Facts:
- लाइम वॉटर → Ca(OH)₂ (aq) — क्षारीय विलयन।
- CO₂ की पहचान: Ca(OH)₂ + CO₂ → CaCO₃↓ (दूधिया) + H₂O.
- बुझा चूना (Slaked lime) → Ca(OH)₂ (ठोस); लाइम वॉटर → इसका जलीय विलयन।
निम्नलिखित में से कौन-सा समांगी मिश्रण का उदाहरण नहीं है?
- शुद्ध वायु
- चीनी का विलयन
- सिरका
- गूदे सहित संतरे का रस
Explanation:
- गूदे सहित संतरे का रस (Orange juice with pulp): यह एक विषमांगी मिश्रण (heterogeneous mixture) है क्योंकि इसमें संतरे का गूदा (pulp) और रस (juice) अलग-अलग चरणों में दिखाई देते हैं। गूदे के कण रस में निलंबित (suspended) होते हैं।
- शुद्ध वायु (Pure air): समांगी मिश्रण (गैसों का मिश्रण).
- चीनी का विलयन: समांगी (चीनी पानी में पूर्णतः घुल जाती है).
- सिरका (Vinegar): समांगी (एसिटिक अम्ल + जल का समांगी विलयन).
Quick Facts:
- समांगी मिश्रण → एक चरण (phase), घटक अदृश्य, समान वितरण।
- विषमांगी मिश्रण → एक से अधिक चरण, घटक दिखाई देते हैं (जैसे — गूदा, रेत, तेल-जल).
- गूदे सहित संतरे का रस → निलंबन (suspension) की श्रेणी में आता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा क्रियाकलाप, द्रव्य के कणों के बीच आकर्षण बल होने को सर्वोत्तम रूप से निरूपित करता है?
- स्पंज (sponge) को संपीडित करना
- बर्फ को गर्म करके जल बनाना
- चाक स्टिक को तोड़ना
- जल में चीनी घोलना
Explanation:
- स्पंज (sponge) को संपीडित करना: स्पंज के कणों (ठोस सामग्री) के बीच आकर्षण बल (interparticle forces) के कारण स्पंज अपने मूल आकार को वापस प्राप्त करने की कोशिश करता है जब उस पर दबाव छोड़ा जाता है। यह कणों के बीच आकर्षण बल (और रिक्त स्थान) को प्रदर्शित करता है।
- बर्फ गर्म करके जल बनाना: अवस्था परिवर्तन (fusion) — तापमान बढ़ने पर कणों के बीच आकर्षण बल कम होता है (कण अलग होते हैं), लेकिन यह आकर्षण बल की उपस्थिति को सीधे नहीं दिखाता।
- चाक स्टिक तोड़ना: यह कणों के बीच आकर्षण बल को पार करने का प्रयास है, लेकिन यह केवल बाहरी बल को दर्शाता है, स्वाभाविक आकर्षण को नहीं।
- जल में चीनी घोलना: यह विलयन (solution) है, जो कणों के बीच रिक्त स्थान (interparticle spaces) को दर्शाता है, आकर्षण बल को नहीं।
Quick Facts:
- पदार्थ के कणों के बीच आकर्षण बल → ठोस > द्रव > गैस (अधिकतम — ठोस).
- स्पंज का संपीडन → रिक्त स्थान (हवा) को हटाना, लेकिन कणों के बीच आकर्षण बल उन्हें पुनः व्यवस्थित करता है।
- रबर बैंड, स्प्रिंग, स्पंज — आकर्षण बल/प्रत्यास्थता (elasticity) के उदाहरण।
दो विभिन्न प्रकार के पदार्थों के कणों के आपस में मिलने को ______ कहा जाता है।
- पायसीकरण
- विसरण
- प्रसरण
- विपरीत परासरण
Explanation:
- विसरण (Diffusion): दो विभिन्न पदार्थों के कणों का आपस में स्वतः मिलना विसरण कहलाता है। यह कणों की यादृच्छिक गति (random motion) के कारण होता है, जिसमें कण उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर गति करते हैं। उदाहरण: इत्र की गंध का कमरे में फैलना, पोटैशियम परमैंगनेट का पानी में धीरे-धीरे फैलना।
- पायसीकरण (Emulsification): दो अमिश्रणीय द्रवों (जैसे तेल और पानी) को मिलाकर पायस (emulsion) बनाने की प्रक्रिया, जो स्थायी नहीं होती।
- प्रसरण (Diffusion का पर्यायवाची): कुछ संदर्भों में इसका उपयोग भी किया जाता है, लेकिन “विसरण” अधिक सामान्य शब्द है। यहाँ “प्रसरण” भी गलत नहीं है, लेकिन मानक परिभाषा “विसरण” है।
- विपरीत परासरण (Reverse osmosis): परासरण की विपरीत प्रक्रिया, जिसमें दबाव डालकर विलायक को सांद्र विलयन से तनु विलयन की ओर ले जाया जाता है (जल शोधन में उपयोग)।
Quick Facts:
- विसरण ठोस, द्रव और गैस तीनों अवस्थाओं में होता है (गैसों में सबसे तेज)।
- विसरण की दर तापमान बढ़ने पर बढ़ती है (कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ती है)।
- विसरण कणों के बीच अंतराल (interparticle space) के कारण संभव होता है।
किस प्रकार का विलयन प्लाज्मा झिल्ली के माध्यम से जल को कोशिका से बाहर स्थानांतरित कर देता है, जिससे कोशिका संकुचित हो जाती है?
- समपरासारी विलयन (Isotonic solution)
- अतिपरासारी विलयन (Hypertonic solution)
- तनु विलयन (Dilute solution)
- अल्पपरासारी विलयन (Hypotonic solution)
Explanation:
- अतिपरासारी विलयन (Hypertonic solution): ऐसा विलयन जिसमें बाह्य विलयन की विलेय सांद्रता कोशिका के अंदर की तुलना में अधिक होती है। परासरण (osmosis) के कारण जल कोशिका से बाहर (बाह्य उच्च सांद्रता की ओर) निकलता है, जिससे कोशिका संकुचित (shrink/plasmolysis) हो जाती है।
- समपरासारी विलयन (Isotonic): बाह्य और आंतरिक सांद्रता समान होती है, जल की कोई शुद्ध गति नहीं होती, कोशिका अपना आकार बनाए रखती है।
- तनु विलयन (Dilute): सामान्यतः कम सांद्रता वाला विलयन, लेकिन कोशिका पर प्रभाव सांद्रता अंतर पर निर्भर करता है।
- अल्पपरासारी विलयन (Hypotonic): बाह्य विलयन की सांद्रता कोशिका के अंदर से कम होती है, जल कोशिका के अंदर प्रवेश करता है, कोशिका फूल जाती है (swell) और फट सकती है (lysis)।
Quick Facts:
- मानव रक्त कोशिकाएँ (RBCs) अतिपरासारी विलयन में सिकुड़ जाती हैं (crenation)।
- अल्पपरासारी विलयन में RBCs फूलकर फट जाती हैं (hemolysis)।
- अंतःशिरा (IV) द्रव्य सामान्यतः समपरासारी (0.9% NaCl — सामान्य सेलाइन) होते हैं ताकि कोशिकाओं को नुकसान न हो।
कौन-सा परिवर्तन, अपमार्जक विलयन में मिसेल (micelle) निर्माण को प्रवर्धित करेगा?
- क्रांतिक मिसेल सांद्रता (CMC) से ऊपर अपमार्जक सांद्रण बढ़ाना
- तापमान को क्राफ्ट पॉइंट से नीचे कम करना
- विलयन को तनु करने के लिए अतिरिक्त जल मिलाना
- क्रांतिक मिसेल सांद्रता (CMC) से नीचे अपमार्जक सांद्रण कम करना
Explanation:
- क्रांतिक मिसेल सांद्रता (CMC) से ऊपर अपमार्जक सांद्रण बढ़ाना: क्रांतिक मिसेल सांद्रता (Critical Micelle Concentration) वह न्यूनतम सांद्रता है जिसके ऊपर अपमार्जक (detergent/surfactant) के अणु स्वतः एकत्रित होकर मिसेल (micelle) बनाने लगते हैं। CMC से ऊपर सांद्रता बढ़ाने पर अधिक मिसेल बनते हैं।
- तापमान क्राफ्ट पॉइंट से नीचे: क्राफ्ट पॉइंट (Krafft point) वह तापमान है जिसके नीचे अपमार्जक मिसेल नहीं बनाते (यह अवक्षेपित हो जाते हैं)।
- तनुकरण (dilution): CMC से नीचे सांद्रता कम करने पर मिसेल विघटित (disassociate) हो जाते हैं।
- CMC से नीचे सांद्रण कम करना: इससे मिसेल निर्माण कम होगा या रुक जाएगा।
Quick Facts:
- मिसेल → अपमार्जक/साबुन अणुओं का गोलाकार समूह (hydrophobic tail अंदर, hydrophilic head बाहर)।
- CMC → वह सांद्रता जिस पर मिसेल निर्माण प्रारंभ होता है (डिटर्जेंट के लिए विशिष्ट मान)।
- क्राफ्ट पॉइंट → वह तापमान जिसके नीचे डिटर्जेंट की विलेयता तेजी से घटती है और मिसेल नहीं बनते।
- मिसेल निर्माण के लिए उपयुक्त तापमान (क्राफ्ट पॉइंट से ऊपर) और CMC से ऊपर सांद्रता आवश्यक है।
सोल्वे प्रक्रिया में धावन सोडा (Na₂CO₃·10H₂O) किस यौगिक से प्राप्त होता है?
- सोडियम क्लोराइड
- सोडियम बाइकार्बोनेट
- सोडियम हाइड्रॉक्साइड
- सोडियम सल्फेट
Explanation:
- सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO₃): सोल्वे प्रक्रिया (Solvay process) में सोडियम क्लोराइड (NaCl) और अमोनिया (NH₃) की अभिक्रिया से सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO₃) बनता है, जिसे गर्म करने पर सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃ — धावन सोडा) प्राप्त होता है।
- NaCl + NH₃ + CO₂ + H₂O → NaHCO₃ + NH₄Cl
- 2NaHCO₃ → Na₂CO₃ + H₂O + CO₂ (गर्म करने पर)
- Na₂CO₃ + 10H₂O → Na₂CO₃·10H₂O (धावन सोडा — washing soda)
- सोडियम क्लोराइड (NaCl): कच्चा माल है, सोडा नहीं प्राप्त होता।
- सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH): कॉस्टिक सोडा, सोल्वे प्रक्रिया में नहीं बनता (यह क्लोर-क्षार प्रक्रिया — chlor-alkali process में बनता है)।
- सोडियम सल्फेट (Na₂SO₄): सोल्वे प्रक्रिया में नहीं बनता।
Quick Facts:
- धावन सोडा (Washing soda) — Na₂CO₃·10H₂O, जल के साथ 10 क्रिस्टलन जल (water of crystallization) रखता है।
- सोल्वे प्रक्रिया → व्यावसायिक रूप से सोडियम कार्बोनेट बनाने की विधि (1880 के दशक में विकसित)।
- उपयोग: कांच निर्माण, डिटर्जेंट, जल शोधन, कागज उद्योग।
किसी विलयन में विलेय को घोलते समय, जब किसी दिए गए तापमान पर विलयन में और अधिक विलेय नहीं घोला जा सकता है, तो इसे ______ कहा जाता है।
- एक कोलाइडी विलयन
- एक संतृप्त विलयन
- एक निलंबन
- एक असंतृप्त विलयन
Explanation:
- संतृप्त विलयन (Saturated solution): वह विलयन जिसमें किसी निश्चित तापमान पर विलेय की अधिकतम मात्रा विलायक में घुल चुकी हो और अब और विलेय नहीं घुल सकता। अतिरिक्त विलेय विलयन में अघुलित (undissolved) रहता है (निलंबित या अवक्षेपित)।
- कोलाइडी विलयन (Colloidal solution): एक विषमांगी मिश्रण, सांद्रता से संबंधित नहीं।
- निलंबन (Suspension): विषमांगी मिश्रण, संतृप्तता से संबंधित नहीं।
- असंतृप्त विलयन (Unsaturated solution): वह विलयन जिसमें निश्चित तापमान पर और अधिक विलेय घोला जा सकता है (संतृप्त विलयन का विपरीत)।
Quick Facts:
- संतृप्त विलयन में विलेय की मात्रा = विलेयता (solubility) उस तापमान पर।
- संतृप्त विलयन को गर्म करने पर और अधिक विलेय घुल सकता है (विलेयता तापमान के साथ बढ़ती है — अधिकांश ठोसों के लिए)।
- संतृप्त विलयन को ठंडा करने पर अतिरिक्त विलेय क्रिस्टल के रूप में बाहर आता है (क्रिस्टलीकरण — crystallization)।
कौन-सा गुण निलंबन को कोलॉइड से सबसे स्पष्ट रूप से विभेदित करता है?
- प्रदीप्ति में प्रकाश प्रकीर्णन का अभाव
- सहसंयोजक विलेय-विलायक आबंधों का निर्माण
- गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में कणों का जमाव
- मिश्रण की समांगता
Explanation:
- गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में कणों का जमाव (Sedimentation under gravity): निलंबन (suspension) में कण बड़े (>1000 nm) होते हैं, इसलिए गुरुत्वाकर्षण के कारण वे समय के साथ नीचे बैठ जाते हैं (sedimentation)। जबकि कोलाइड (colloid) में कण (1–1000 nm) छोटे होते हैं और ब्राउनियन गति के कारण स्थिर रहते हैं — वे नीचे नहीं बैठते।
- प्रकाश प्रकीर्णन का अभाव: गलत, निलंबन भी प्रकाश प्रकीर्णित करता है (टिडल प्रभाव — Tyndall effect)।
- सहसंयोजक बंध: गलत, न तो निलंबन और न ही कोलाइड में रासायनिक बंध बनते हैं (ये भौतिक मिश्रण हैं)।
- समांगता: दोनों विषमांगी हैं (कोलाइड विषमांगी होता है, हालांकि नग्न आंखों से समांगी दिखता है; निलंबन स्पष्ट रूप से विषमांगी)।
Quick Facts:
- निलंबन → अस्थिर (unstable), कण बैठते हैं (sedimentation), छानकर (filtration) अलग किए जा सकते हैं।
- कोलाइड → स्थिर (stable), कण नहीं बैठते, छानकर अलग नहीं किए जा सकते।
- ब्राउनियन गति (Brownian motion) → कोलाइडी कणों की यादृच्छिक गति, जो उन्हें नीचे बैठने से रोकती है।
मिश्रधातु, वायु, नींबू-पानी और सोडा पानी निम्नलिखित में से किस श्रेणी के विलयन के उदाहरण हैं?
- विषमांगी मिश्रण
- कोलॉइड
- समांगी मिश्रण
- निलंबन
Explanation:
- समांगी मिश्रण (Homogeneous mixture): मिश्रधातु (alloy — ठोस-ठोस समांगी), वायु (गैस-गैस समांगी), नींबू-पानी (द्रव-द्रव समांगी — चीनी और नींबू का रस पानी में घुलकर), सोडा पानी (गैस-द्रव विलयन — CO₂ पानी में घुला)। ये सभी समांगी मिश्रण (होमोजेनियस) हैं।
- विषमांगी मिश्रण: गलत, ये सभी समांगी हैं (नींबू-पानी में कण समान रूप से वितरित हैं)।
- कोलॉइड: गलत, इनमें टिडल प्रभाव नहीं दिखता (वास्तविक विलयन हैं)।
- निलंबन: गलत, इनमें कण नहीं बैठते।
Quick Facts:
- समांगी मिश्रण → विलयन (solution) कहलाता है (सभी घटक एक ही चरण — phase में होते हैं)।
- मिश्रधातु → ठोस विलयन (solid solution) का उदाहरण (जैसे — पीतल — brass, कांसा — bronze)।
- सोडा पानी → गैस-द्रव विलयन (CO₂ + H₂O)।
एक खाद्य शृंखला घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → बाज से शुरू होती है। बाज में अजैवनिम्नीकरणीय कीटनाशियों की कितनी सांद्रता अपेक्षित है?
- कीटनाशियों की उच्चतम सांद्रता
- मेंढक जितनी कीटनाशी की सांद्रता
- कीटनाशी का कोई अवशेष नहीं
- कीटनाशी अवशेष की निम्नतम मात्रा
Explanation:
- कीटनाशियों की उच्चतम सांद्रता: यह जैव आवर्धन (Biomagnification/Bioaccumulation) का उदाहरण है। अजैवनिम्नीकरणीय (non-biodegradable) कीटनाशक (जैसे DDT) खाद्य शृंखला में प्रत्येक पोषी स्तर (trophic level) पर जमा होते जाते हैं क्योंकि वे शरीर से बाहर नहीं निकलते और प्रत्येक उपभोक्ता अपने शिकार से अधिक मात्रा में प्राप्त करता है। शीर्ष उपभोक्ता (बाज — hawk) में सबसे अधिक सांद्रता होती है।
- मेंढक जितनी: गलत, क्योंकि जैसे-जैसे स्तर बढ़ता है, सांद्रता बढ़ती है।
- कोई अवशेष नहीं: गलत, अजैवनिम्नीकरणीय होने के कारण वे जमा होते हैं।
- निम्नतम मात्रा: गलत, शीर्ष स्तर पर उच्चतम होती है।
Quick Facts:
- जैव आवर्धन (Biomagnification) → विषाक्त पदार्थों (जैसे DDT, मरकरी) का खाद्य शृंखला में बढ़ता हुआ संचयन।
- DDT → Dichloro Diphenyl Trichloroethane, एक कीटनाशक जो अजैवनिम्नीकरणीय है और पर्यावरण में लंबे समय तक रहता है।
- उच्चतम सांद्रता शीर्ष मांसाहारी (top carnivore) में पाई जाती है (जैसे — मानव, बाज, शार्क)।
डाइक्लोरो डीफेनिल ट्राइक्लोरोइथेन (DDT) ______ है।
- पानी की तुलना में वसा में अधिक विलेय
- पानी की तुलना में वसा में कम विलेय
- पानी में अविलेय
- वसा में अविलेय
Explanation:
- पानी की तुलना में वसा में अधिक विलेय: DDT एक वसा-विलेय (fat-soluble/lipophilic) यौगिक है। यह अध्रुवीय (non-polar) होता है, इसलिए यह अध्रुवीय माध्यम (वसा — fat) में अधिक घुलता है, ध्रुवीय माध्यम (पानी) में कम। यही गुण इसे वसा ऊतकों (adipose tissues) में संचित होने की अनुमति देता है।
- पानी में अविलेय: पूर्णतः अविलेय नहीं (हालाँकि बहुत कम घुलनशील), लेकिन सही कथन “वसा में अधिक विलेय” है।
- वसा में अविलेय: गलत, DDT वसा में अत्यधिक विलेय है (lipophilic)।
Quick Facts:
- DDT का log P (विभाजन गुणांक — partition coefficient) उच्च है (~6.9), जो दर्शाता है कि यह वसा में अधिक घुलता है।
- वसा-विलेय होने के कारण DDT वसा ऊतकों में संचित होता है (bioaccumulation) और खाद्य शृंखला में बढ़ता है (biomagnification)।
- पानी में घुलनशील विषाक्त पदार्थ (जैसे — भारी धातुएँ) भी जैव आवर्धन में योगदान कर सकते हैं, लेकिन DDT विशेष रूप से वसा में संचित होता है।
लंबी शृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्ल के सोडियम या पोटेशियम लवण को निम्नलिखित में से किसके रूप में जाना जाता है?
- मिसेल
- डिटर्जेंट और साबुन दोनों
- डिटर्जेंट
- साबुन
Explanation:
- साबुन (Soap): साबुन वसा (triglycerides) के क्षारीय जल-अपघटन (साबुनीकरण — saponification) से बनता है। यह लंबी शृंखला (C₁₂–C₁₈) वाले कार्बोक्सिलिक अम्ल (फैटी अम्ल) का सोडियम (Na) या पोटेशियम (K) लवण होता है। उदाहरण: सोडियम स्टीयरेट (C₁₇H₃₅COONa), सोडियम ओलीएट।
- मिसेल (Micelle): साबुन अणुओं का समूह (aggregate), साबुन स्वयं नहीं।
- डिटर्जेंट (Detergent): डिटर्जेंट सल्फोनेट या सल्फेट समूह वाले सिंथेटिक यौगिक होते हैं (जैसे — सोडियम लॉरिल सल्फेट), कार्बोक्सिलेट लवण नहीं।
Quick Facts:
- साबुनीकरण अभिक्रिया: वसा (triglyceride) + NaOH/KOH → ग्लिसरॉल + साबुन
- साबुन के सोडियम लवण → ठोस साबुन (बार), पोटेशियम लवण → द्रव साबुन (शेविंग क्रीम)।
- साबुन का जलविरोधी सिरा (hydrophobic tail) — लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला (तेल में विलेय)।
- साबुन का जलरागी सिरा (hydrophilic head) — COO⁻Na⁺ (पानी में विलेय)।
20 ml NaOH को 10 ml HNO₃ द्वारा उदासीन किया जाता है। 15 ml HNO₃ को उदासीन करने के लिए कितने ml NaOH की आवश्यकता होगी?
- 20 ml
- 25 ml
- 40 ml
- 30 ml
Equation: \( \frac{20}{10} \times 15 = 30 \) ml
Explanation:
- 30 ml: NaOH और HNO₃ के बीच उदासीनीकरण में 1:1 मोलर अनुपात होता है (NaOH + HNO₃ → NaNO₃ + H₂O)। प्रश्न के अनुसार, 20 ml NaOH, 10 ml HNO₃ को उदासीन करता है, इसलिए अनुपात 20:10 = 2:1 है। अतः 15 ml HNO₃ के लिए आवश्यक NaOH = (20/10) × 15 = 30 ml।
- 20 ml: गलत, यह 10 ml HNO₃ के लिए सही है।
- 25 ml: गलत, गणना में त्रुटि।
- 40 ml: गलत, यह तब होता जब अनुपात 10:20 होता (उल्टा)।
Quick Facts:
- उदासीनीकरण (Neutralization) — अम्ल + क्षार → लवण + जल
- इस प्रश्न में अनुपात समानुपात (direct proportion) पर आधारित है (सांद्रता समान मानकर)।
- यदि सांद्रता भिन्न होती, तो \( M_1 V_1 = M_2 V_2 \) सूत्र का उपयोग होता।
निम्नलिखित में से कौन सा विषमांगी मिश्रण का उदाहरण है?
- पानी में घुली चीनी
- पानी में घुला कॉपर सल्फेट पाउडर
- पानी में घुला नमक
- पानी में तेल
Explanation:
- पानी में तेल (Oil in water): तेल और पानी अमिश्रणीय (immiscible) हैं, इसलिए यह एक विषमांगी मिश्रण है। यह पायस (emulsion) का उदाहरण है, जो कोलाइड है, लेकिन स्थूल स्तर पर यह विषमांगी है (अलग-अलग परतें/बूंदें)।
- पानी में चीनी: समांगी (चीनी घुलकर विलयन बनाती है)।
- पानी में कॉपर सल्फेट: समांगी (CuSO₄ घुलकर नीला विलयन बनाता है)।
- पानी में नमक: समांगी (NaCl घुलकर विलयन बनाता है)।
Quick Facts:
- तेल + पानी → अमिश्रणीय → विषमांगी मिश्रण (दो परतें: तेल ऊपर, पानी नीचे) — घनत्व के अंतर के कारण।
- पायसीकरण (emulsification) द्वारा तेल और पानी को स्थायी रूप से मिलाया जा सकता है (जैसे — दूध, मेयोनेज़)।
- विषमांगी मिश्रण के अन्य उदाहरण: रेत + पानी, चाक पाउडर + पानी।
निम्नलिखित में से कौन-सा विलयन का लक्षण नहीं है?
- विलयन एक समांगी मिश्रण है।
- कणों के बहुत छोटे आकार के कारण, कण विलयन से गुजरने वाली प्रकाश किरण को प्रकीर्णित नहीं करते हैं।
- विलेय कणों को निस्पंदन की प्रक्रिया द्वारा मिश्रण से अलग किया जा सकता है।
- विलयन के कण व्यास में 1 nm (10⁻⁹ मीटर) से छोटे होते हैं।
Explanation:
- विलेय कणों को निस्पंदन (filtration) द्वारा अलग किया जा सकता है: यह विलयन का लक्षण नहीं है। विलयन में कण < 1 nm होते हैं, जो फिल्टर पेपर से गुज़र जाते हैं, इसलिए उन्हें निस्यंदन द्वारा अलग नहीं किया जा सकता।
- समांगी मिश्रण: सही, विलयन समांगी होता है।
- प्रकाश प्रकीर्णित नहीं करते: सही, कण बहुत छोटे होते हैं (टिडल प्रभाव नहीं दिखाते)।
- कण < 1 nm: सही, विलयन के कणों का आकार 1 nm से कम होता है।
Quick Facts:
- विलयन → कणों का आकार < 1 nm, समांगी, पारदर्शी, टिडल प्रभाव नहीं, निस्यंदन द्वारा अलग नहीं होते।
- निस्यंदन (filtration) → अघुलनशील ठोस को द्रव से अलग करने के लिए (निलंबन के लिए उपयुक्त)।
- विलयन को आसवन (distillation) या वाष्पीकरण (evaporation) द्वारा अलग किया जाता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा कोलॉइडी विलयन का गुण नहीं है?
- कोलॉइडी विलयन के घटक केवल परिक्षिप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम होते हैं।
- कोलॉइड के कणों का आकार बहुत बड़ा होता है।
- कोलाइड इतना बड़ा होता है कि उसमें से गुजरने वाली प्रकाश किरण को विस्तारित कर सकता है तथा उसका मार्ग दृश्यमान बना सकता है।
- एक कोलॉइड एक विषमांगी मिश्रण है।
Explanation:
- कोलॉइड के कणों का आकार बहुत बड़ा होता है: यह गलत है क्योंकि कोलॉइडी कणों का आकार 1–1000 nm (नैनोमीटर) होता है, जो न तो बहुत बड़ा (निलंबन की तरह > 1000 nm) और न ही बहुत छोटा (विलयन की तरह < 1 nm) होता है।
- परिक्षिप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम: सही, कोलाइड में दो घटक होते हैं — परिक्षिप्त प्रावस्था (dispersed phase — कण) और परिक्षेपण माध्यम (dispersion medium — जिसमें कण परिक्षिप्त होते हैं)।
- प्रकाश प्रकीर्णन (Tyndall effect): सही, कोलाइडी कण प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं।
- विषमांगी मिश्रण: सही, कोलाइड विषमांगी होता है (हालाँकि नग्न आंखों से समांगी दिखता है)।
Quick Facts:
- कोलाइडी कण → 1–1000 nm (10⁻⁹ m से 10⁻⁶ m)।
- टिडल प्रभाव → प्रकाश प्रकीर्णन (लाल रंग की तरंगदैर्ध्य अधिक प्रकीर्णित होती है)।
- कोलाइड के प्रकार: सॉल (sol), जैल (gel), पायस (emulsion), फोम (foam), एरोसोल (aerosol)।
यौगिक एक ऐसा पदार्थ है जिसमें तत्व ___________।
- अस्थायी रूप से मिश्रित होते हैं
- रासायनिक रूप से निश्चित समानुपात में संयोजित होते हैं
- आसानी से पृथक किए जा सकते हैं
- किसी भी अनुपात में भौतिक रूप से मिश्रित होते हैं
Explanation:
- रासायनिक रूप से निश्चित समानुपात में संयोजित होते हैं: यौगिक की परिभाषा है — दो या अधिक तत्व एक निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से संयोजित होकर यौगिक बनाते हैं। उदाहरण: जल (H₂O) में H : O = 2 : 1 (अणु अनुपात) या 1 : 8 (द्रव्यमान अनुपात)।
- अस्थायी रूप से मिश्रित: गलत, यह मिश्रण की विशेषता है।
- आसानी से पृथक: गलत, यौगिक को भौतिक विधियों से पृथक नहीं किया जा सकता (रासायनिक विधियों की आवश्यकता होती है)।
- किसी भी अनुपात में मिश्रित: गलत, यह मिश्रण की विशेषता है (यौगिक में निश्चित अनुपात होता है — नियत अनुपात का नियम — law of definite proportions)।
Quick Facts:
- यौगिक के उदाहरण: H₂O, NaCl, CO₂, HCl.
- यौगिक में नए गुणधर्म उत्पन्न होते हैं (जल के गुण, H₂ और O₂ से भिन्न)।
- यौगिक का विघटन (decomposition) रासायनिक अभिक्रिया द्वारा होता है (जैसे — H₂O का विद्युत अपघटन — electrolysis)।
निम्नलिखित में से कौन-सा कोलॉइड और वास्तविक विलयनों के बीच एक विशिष्ट अंतर है?
- वास्तविक विलयन ब्राउनी गति प्रदर्शित करते हैं, लेकिन कोलॉइड नहीं करते
- वास्तविक विलयन टिडल प्रभाव दिखाते हैं, लेकिन कोलॉइड नहीं दिखाते
- वास्तविक विलयनों में एकल-प्रावस्था प्रणाली होती है, जबकि कोलॉइड में दो-प्रावस्था प्रणाली होती है
- वास्तविक विलयनों में दृश्यमान विलेय कण होते हैं, जबकि कोलॉइड में अदृश्य परिक्षिप्त कण होते हैं
Explanation:
- वास्तविक विलयन → एकल-प्रावस्था (single phase), कोलाइड → दो-प्रावस्था (two phases): वास्तविक विलयन (true solution) समांगी होता है, जिसमें केवल एक चरण (phase) होता है (जैसे — NaCl का जलीय विलयन)। कोलाइड में दो चरण होते हैं — परिक्षिप्त प्रावस्था (dispersed phase) और परिक्षेपण माध्यम (dispersion medium) — यह विषमांगी होता है (हालाँकि यह समांगी दिखता है)।
- ब्राउनी गति: गलत, कोलाइड ब्राउनी गति दिखाते हैं, वास्तविक विलयन नहीं।
- टिडल प्रभाव: गलत, कोलाइड टिडल प्रभाव दिखाते हैं, वास्तविक विलयन नहीं।
- दृश्यमान कण: गलत, वास्तविक विलयन में कण अदृश्य होते हैं (< 1 nm), कोलाइड में भी कण नग्न आंखों से अदृश्य होते हैं (1–1000 nm, अल्ट्रामाइक्रोस्कोप से दिखते हैं)।
Quick Facts:
- वास्तविक विलयन → एकल प्रावस्था (homogeneous), टिडल प्रभाव नहीं, ब्राउनी गति नहीं, कण < 1 nm.
- कोलाइड → दो प्रावस्थाएँ (heterogeneous), टिडल प्रभाव, ब्राउनी गति, कण 1–1000 nm.
एक विशिष्ट विशेषता जो साबुन से संबंधित नहीं है, वह ………………..है।
- हाइड्रोफोबिक पुच्छ
- कठोर जल के साथ पूरी तरह से काम करता है
- माइसेल्स (micelles) का निर्माण
- हाइड्रोफिलिक हेड
Explanation:
- कठोर जल के साथ पूरी तरह से काम करता है: यह साबुन से संबंधित नहीं है क्योंकि साबुन कठोर जल (hard water) में कार्य नहीं करता (या बहुत कम करता है)। कठोर जल में Ca²⁺ और Mg²⁺ आयन होते हैं, जो साबुन के साथ अघुलनशील अवक्षेप (scum — कैल्शियम/मैग्नीशियम स्टीयरेट) बनाते हैं, जिससे झाग (lather) नहीं बनता और सफाई प्रभाव कम हो जाता है।
- हाइड्रोफोबिक पुच्छ: साबुन का गुण (जलविरोधी सिरा — hydrophobic tail)।
- मिसेल निर्माण: साबुन का गुण (सफाई क्रिया का आधार)।
- हाइड्रोफिलिक हेड: साबुन का गुण (जलरागी सिरा — hydrophilic head)।
Quick Facts:
- साबुन कठोर जल में स्कम (scum) बनाता है: 2C₁₇H₃₅COONa + Ca²⁺ → (C₁₇H₃₅COO)₂Ca↓ (अघुलनशील) + 2Na⁺
- डिटर्जेंट कठोर और मृदु दोनों जल में कार्य करते हैं (क्योंकि वे अघुलनशील अवक्षेप नहीं बनाते)।
- साबुन का उपयोग मृदु जल (soft water) में किया जाता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा विषमांगी विलयन का उदाहरण है?
- नींबू पानी
- आयोडीन का टिंचर
- फिनॉल और पानी का मिश्रण
- तेल और पानी का मिश्रण
Explanation:
- तेल और पानी का मिश्रण: यह विषमांगी मिश्रण है (पायस — emulsion, जो कोलाइड है), क्योंकि तेल और पानी अमिश्रणीय हैं और अलग-अलग परतें/बूंदें बनाते हैं।
- नींबू पानी: समांगी (चीनी/नींबू का रस पानी में घुलकर विलयन बनाता है)।
- आयोडीन का टिंचर (Tincture of iodine): आयोडीन + अल्कोहल (समांगी विलयन — अल्कोहल में आयोडीन घुल जाता है)।
- फिनॉल और पानी: फिनॉल पानी में सीमित रूप से घुलनशील है, लेकिन सामान्यतः यह विषमांगी हो सकता है; हालाँकि तेल-पानी अधिक स्पष्ट उदाहरण है।
Quick Facts:
- विषमांगी मिश्रण → अलग-अलग घटक दिखाई देते हैं (तेल की बूंदें पानी में)।
- तेल + पानी → अमिश्रणीय, घनत्व (तेल < पानी) के कारण तेल ऊपर तैरता है।
- पायसीकरण (emulsification) द्वारा इसे स्थायी रूप से मिलाया जा सकता है (जैसे — दूध, मेयोनेज़)।
हमारे शरीर में कितना प्रतिशत लवण पाया जाता है?
- 1%
- 2%
- 0.4%
- 0.6%
Explanation:
- 0.4%: मानव शरीर में सोडियम क्लोराइड (NaCl) की मात्रा लगभग 0.4% (या 0.9% रक्त प्लाज्मा में) होती है। शरीर का कुल द्रव्यमान लगभग 70 kg मानें तो NaCl लगभग 280 g होता है। रक्त में NaCl सांद्रता ≈ 0.9% (9 g/L) होती है (सामान्य सेलाइन — normal saline)।
- 1%: गलत, यह अधिक है।
- 2%: गलत, यह बहुत अधिक है।
- 0.6%: गलत, यह भी अधिक है (0.4% अधिक सटीक है, हालाँकि कुछ स्रोत 0.8–0.9% रक्त में बताते हैं, लेकिन समग्र शरीर में 0.4% है)।
Quick Facts:
- शरीर में NaCl आयनिक संतुलन (electrolyte balance), तंत्रिका संचरण (nerve impulse), और मांसपेशी संकुचन (muscle contraction) के लिए आवश्यक है।
- रक्त में NaCl की सांद्रता ≈ 0.9% होती है, जो समपरासारी (isotonic) होती है।
- अत्यधिक NaCl (नमक) उच्च रक्तचाप (hypertension) का कारण बन सकता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन, एक यौगिक को मिश्रण से सही रूप से पृथक करता है?
- यौगिक परिवर्ती संयोजन (variable composition) दर्शाते हैं, मिश्रण नहीं।
- मिश्रण रासायनिक अभिक्रियाओं के माध्यम से बनते हैं।
- मिश्रण को भौतिक माध्यमों से अलग किया जा सकता है, लेकिन यौगिकों को अलग नहीं किया जा सकता है।
- यौगिक अपने संघटकों के गुणधर्मों को बनाए रखते हैं।
Explanation:
- मिश्रण को भौतिक विधियों से अलग किया जा सकता है, लेकिन यौगिकों को नहीं: यह मिश्रण और यौगिक के बीच मुख्य अंतर है। मिश्रण (जैसे — रेत + NaCl) को भौतिक विधियों (जैसे — निस्यंदन, आसवन, चुंबकीय पृथक्करण) से अलग किया जा सकता है। यौगिक (जैसे — NaCl) में तत्व रासायनिक रूप से बंधित होते हैं, इसलिए उन्हें अलग करने के लिए रासायनिक विधियों (जैसे — विद्युत अपघटन) की आवश्यकता होती है।
- यौगिक परिवर्ती संयोजन: गलत, यह मिश्रण की विशेषता है (यौगिक का निश्चित संयोजन होता है — नियत अनुपात का नियम)।
- मिश्रण रासायनिक अभिक्रियाओं से बनते हैं: गलत, मिश्रण भौतिक प्रक्रियाओं (मिलाना — mixing) से बनते हैं, रासायनिक अभिक्रियाओं से नहीं।
- यौगिक अपने संघटकों के गुणधर्म बनाए रखते हैं: गलत, यह मिश्रण की विशेषता है (यौगिक में नए गुणधर्म उत्पन्न होते हैं)।
Quick Facts:
- मिश्रण → भौतिक पृथक्करण (निस्यंदन, आसवन, क्रोमैटोग्राफी, चुंबकीय पृथक्करण)।
- यौगिक → रासायनिक पृथक्करण (विद्युत अपघटन, तापीय अपघटन, रासायनिक अभिक्रियाएँ)।
निम्नलिखित में से कौन-सा रासायनिक परिवर्तन का उदाहरण है?
- पानी में शर्करा का घुलना
- दूध का फटना
- पानी का जमना
- कागज का फटना
Explanation:
- दूध का फटना (Curdling of milk): दूध में अम्ल (जैसे — नींबू का रस या सिरका) मिलाने पर दूध का प्रोटीन (कैसीन — casein) जम जाता है (coagulation) और दही/छाछ बनता है। यह एक रासायनिक परिवर्तन है क्योंकि प्रोटीन की संरचना बदलती है (अपरिवर्तनीय — irreversible) और नया पदार्थ (दही) बनता है।
- शर्करा का घुलना: भौतिक परिवर्तन (कोई नया पदार्थ नहीं बनता, प्रतिवर्ती — reversible)।
- पानी का जमना: भौतिक परिवर्तन (अवस्था परिवर्तन — change of state, प्रतिवर्ती)।
- कागज का फटना: भौतिक परिवर्तन (केवल आकार बदलता है, कोई नया पदार्थ नहीं बनता)।
Quick Facts:
- रासायनिक परिवर्तन → नया पदार्थ बनता है, ऊष्मा/प्रकाश उत्सर्जन/अवशोषण, अपरिवर्तनीय, रासायनिक संरचना बदलती है।
- दूध फटना → लैक्टिक अम्ल या साइट्रिक अम्ल के कारण कैसीन (casein) का जमाव (pH कम होने पर)।
- भौतिक परिवर्तन → केवल भौतिक गुण (आकार, अवस्था) बदलते हैं, रासायनिक संरचना समान रहती है, प्रतिवर्ती।
निम्नलिखित में से कौन समांगी मिश्रण का उदाहरण नहीं है?
- जल में कॉपर सल्फेट पाउडर
- जल में घुली चीनी
- जल में घुला नमक
- जल में तेल
Explanation:
- जल में तेल: यह विषमांगी मिश्रण है (अमिश्रणीय द्रव — immiscible liquids), क्योंकि तेल और पानी अलग-अलग परतें बनाते हैं।
- जल में CuSO₄: समांगी (CuSO₄ घुलकर नीला विलयन बनाता है)।
- जल में चीनी: समांगी (चीनी घुलकर विलयन बनाती है)।
- जल में नमक: समांगी (NaCl घुलकर विलयन बनाता है)।
Quick Facts:
- समांगी मिश्रण → सभी घटक समान चरण (phase) में, सूक्ष्म स्तर पर समान वितरण।
- तेल + पानी → विषमांगी (दो परतें), तेल ऊपर (घनत्व कम), पानी नीचे।
- पायसीकरण (emulsification) से तेल और पानी को स्थायी रूप से मिलाया जा सकता है (लेकिन यह अभी भी कोलाइड/विषमांगी ही रहेगा)।
जब कोई अम्ल किसी धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करता है, तो क्या निर्मित होता है?
- लवण, जल, कार्बन डाइऑक्साइड
- लवण, जल, कार्बन डाइऑक्साइड
- लवण, हाइड्रोजन
- लवण, जल
Equation: \( \text{MHCO}_3 + \text{HCl} \rightarrow \text{MCl} + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2 \)
Explanation:
- लवण, जल, कार्बन डाइऑक्साइड: धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट (bicarbonate — जैसे NaHCO₃, KHCO₃) जब अम्ल (जैसे HCl, H₂SO₄) के साथ अभिक्रिया करता है, तो संगत लवण, जल और CO₂ गैस बनती है।
- केवल लवण, हाइड्रोजन: गलत, यह धातु + अम्ल की अभिक्रिया है (जैसे — Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂↑)।
- केवल लवण, जल: गलत, CO₂ भी बनता है (जो बुदबुदाहट — effervescence — के रूप में दिखता है)।
Quick Facts:
- अम्ल + धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट → लवण + जल + CO₂
- CO₂ की पहचान: चूने के पानी (Ca(OH)₂) को दूधिया (milky) करना।
- उदाहरण: NaHCO₃ + HCl → NaCl + H₂O + CO₂↑ (बेकिंग सोडा + अम्ल — कार्बन डाइऑक्साइड बनता है जो केक/ब्रेड को फूलाता है)।
सिरका निम्नलिखित में से किसका 5-8% विलयन है?
- जल में कैल्शियम कार्बोनेट
- जल में एसिटिक अम्ल
- जल में फॉर्मिक अम्ल
- जल में सोडियम हाइड्रॉक्साइड
Explanation:
- जल में एसिटिक अम्ल (Acetic acid — CH₃COOH): सिरका (vinegar) एसिटिक अम्ल का 5–8% जलीय विलयन है। यह अम्लीय होता है और इसका उपयोग खाना पकाने, परिरक्षण (preservation) और सफाई में होता है।
- कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃): गलत, यह चूना पत्थर (limestone) है, सिरका नहीं।
- फॉर्मिक अम्ल (Formic acid — HCOOH): गलत, यह चींटियों के डंक में पाया जाता है, सिरका नहीं।
- सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH): गलत, यह क्षार है, सिरका अम्ल है।
Quick Facts:
- सिरका का pH ≈ 2.5–3.5 (अम्लीय)।
- एसिटिक अम्ल (CH₃COOH) एक दुर्बल अम्ल (weak acid) है।
- सिरका का उपयोग अचार (pickles), सलाद ड्रेसिंग और सफाई एजेंट के रूप में होता है।
निम्नलिखित में से कौन आयनिक यौगिक का उदाहरण है?
- हल्दी
- टेबल सॉल्ट (नमक)
- चीनी
- ग्लूकोज
Explanation:
- टेबल सॉल्ट (NaCl): सोडियम क्लोराइड एक आयनिक यौगिक है, जो Na⁺ और Cl⁻ आयनों के मध्य आयनिक बंध (ionic bond) द्वारा बना होता है।
- हल्दी (Turmeric): कार्बनिक यौगिक (करक्यूमिन — curcumin), सहसंयोजक (covalent) यौगिक।
- चीनी (Sucrose — C₁₂H₂₂O₁₁): सहसंयोजक यौगिक (कार्बनिक)।
- ग्लूकोज (C₆H₁₂O₆): सहसंयोजक यौगिक (कार्बनिक)।
Quick Facts:
- आयनिक यौगिक → धातु + अधातु (जैसे NaCl, MgO, CaCO₃, KBr)।
- सहसंयोजक यौगिक → अधातु + अधातु (जैसे H₂O, CO₂, C₆H₁₂O₆, C₁₂H₂₂O₁₁)।
- आयनिक यौगिक उच्च गलनांक/क्वथनांक, जलीय/गलित अवस्था में विद्युत चालन करते हैं।
विलयन के प्रति इकाई द्रव्यमान या प्रति इकाई आयतन में विलेय की मात्रा को _____ के रूप में जाना जाता है।
- वाष्पन
- सांद्रता
- विलेयता
- पृथक्करण
Explanation:
- सांद्रता (Concentration): विलयन में विलेय (solute) की मात्रा (द्रव्यमान, आयतन, या मोल) को विलयन की कुल मात्रा (द्रव्यमान या आयतन) से विभाजित करने पर सांद्रता प्राप्त होती है।
- वाष्पन (Evaporation): द्रव का गैस में परिवर्तन, सांद्रता नहीं।
- विलेयता (Solubility): किसी निश्चित तापमान पर विलायक की एक निश्चित मात्रा में अधिकतम विलेय की मात्रा (संतृप्त विलयन के लिए)।
- पृथक्करण (Separation): मिश्रण के घटकों को अलग करने की प्रक्रिया।
Quick Facts:
- सांद्रता व्यक्त करने के तरीके: w/w%, w/v%, v/v%, मोलरता (M), मोललता (m), नॉर्मलता (N), पीपीएम (ppm — parts per million)।
- सांद्रता = \( \frac{\text{विलेय की मात्रा}}{\text{विलयन की मात्रा}} \).
- सांद्रता तापमान पर निर्भर करती है (विशेषकर आयतन आधारित — molarity, w/v%)।
_____ में सामान्यतः लंबी, असंतृप्त कार्बन शृंखलाएं होती हैं।
- ग्लूकोज
- वनस्पति तेल
- साधारण नमक
- जल
Explanation:
- वनस्पति तेल (Vegetable oils): वनस्पति तेलों में लंबी कार्बन शृंखलाएँ (C₁₂–C₁₈) होती हैं, जो असंतृप्त (unsaturated) होती हैं (एक या अधिक द्विबंध — C=C)। यही कारण है कि वनस्पति तेल कमरे के तापमान पर द्रव (liquid) होते हैं (जबकि वसा — fats — संतृप्त होती हैं और ठोस होती हैं)।
- ग्लूकोज: छोटी शृंखला (C₆H₁₂O₆), संतृप्त (सभी एकल बंध — single bonds)।
- साधारण नमक (NaCl): कार्बन नहीं, आयनिक यौगिक।
- जल (H₂O): कार्बन नहीं।
Quick Facts:
- असंतृप्त (Unsaturated) → द्विबंध/त्रिबंध (C=C, C≡C), कमरे के तापमान पर द्रव (जैसे — मूंगफली का तेल, सोयाबीन तेल)।
- संतृप्त (Saturated) → एकल बंध (C–C), कमरे के तापमान पर ठोस (जैसे — मक्खन, चरबी — ghee)।
- वनस्पति तेलों का हाइड्रोजनीकरण (hydrogenation) करके वनस्पति घी (vanaspati ghee) बनाया जाता है (निकेल उत्प्रेरक पर H₂ गैस प्रवाहित करके असंतृप्त बंधों को संतृप्त किया जाता है)।
‘निलंबन’ का निम्नलिखित में से कौन-सा गुणधर्म गलत है?
- निलंबन के कणों को निस्यंदन प्रक्रिया द्वारा मिश्रण से पृथक किया जा सकता है।
- निलंबन एक विषमांगी मिश्रण है।
- निलंबन के कण प्रकाश की किरण को प्रकीर्णित नहीं करते हैं।
- निलंबन के कण नग्न आंखों से दिखाई देते हैं।
Explanation:
- निलंबन के कण प्रकाश की किरण को प्रकीर्णित नहीं करते हैं: यह गलत है क्योंकि निलंबन के कण (> 1000 nm) प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं (टिडल प्रभाव — Tyndall effect) और प्रकाश का मार्ग दृश्यमान होता है (जैसे — धूल के कणों में प्रकाश की किरण)।
- निस्यंदन द्वारा पृथक: सही, कण बड़े होते हैं, फिल्टर पेपर पर रुक जाते हैं।
- विषमांगी: सही, निलंबन विषमांगी होता है।
- नग्न आंखों से दिखाई देते हैं: सही, कण > 1000 nm होते हैं, स्पष्ट दिखाई देते हैं।
Quick Facts:
- निलंबन → टिडल प्रभाव दिखाता है (प्रकाश प्रकीर्णन), क्योंकि कण बड़े होते हैं।
- निलंबन और कोलाइड दोनों टिडल प्रभाव दिखाते हैं, जबकि वास्तविक विलयन नहीं दिखाता।
- उदाहरण: पानी में रेत (निलंबन) — प्रकाश किरण दिखाई देती है (प्रकीर्णन)।
कौन-सा कथन स्थिर अनुपात के नियम का सबसे अच्छा समर्थन करता है?
- मिश्रित कार्बनिक सामग्री वाले दो क्षेत्रों की मिट्टी
- समान संरचना वाले दो स्रोतों से प्राप्त जल
- दो स्थानों से अलग-अलग कण-आकार की रेत
- दो तालाबों से प्राप्त मिट्टी जिसमें विभिन्न खनिज होते हैं
Explanation:
- समान संरचना वाले दो स्रोतों से प्राप्त जल: स्थिर अनुपात का नियम (Law of Definite Proportions) कहता है कि एक यौगिक (जैसे — H₂O) में तत्वों का द्रव्यमान अनुपात सदैव निश्चित होता है, चाहे वह किसी भी स्रोत से प्राप्त किया गया हो। उदाहरण: किसी भी स्थान से प्राप्त शुद्ध जल (H₂O) में H : O का अनुपात सदैव 1 : 8 (द्रव्यमान) या 2 : 1 (परमाणु) होता है।
- मिट्टी: गलत, मिट्टी विभिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न संरचना वाली होती है (मिश्रण)।
- रेत: गलत, रेत भिन्न-भिन्न आकार/खनिज वाली हो सकती है (मिश्रण)।
Quick Facts:
- स्थिर अनुपात का नियम → जोसेफ प्राउस्ट (Joseph Proust) द्वारा प्रतिपादित (1799)।
- यह नियम यौगिकों (compounds) पर लागू होता है, मिश्रणों (mixtures) पर नहीं।
- उदाहरण: H₂O (जल) — H : O = 2 : 16 = 1 : 8; CO₂ — C : O = 12 : 32 = 3 : 8.
निम्नलिखित में से कौन-सा जल अणु में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन परमाणुओं (H:O) के द्रव्यमान के अनुपात को दर्शाता है?
- 1:4
- 3:8
- 1:8
- 1:2
Equation: H₂O → H : O = 2 : 16 = 1 : 8
Explanation:
- 1:8: जल (H₂O) में हाइड्रोजन (H) का परमाणु द्रव्यमान 1 u और 2 H परमाणु → 2 u; ऑक्सीजन (O) का परमाणु द्रव्यमान 16 u. अतः H : O का द्रव्यमान अनुपात = 2 : 16 = 1 : 8.
- 1:4: गलत, यह NH₃ (N : H = 14 : 3) या अन्य यौगिक हो सकता है।
- 3:8: गलत, यह CO₂ (C : O = 12 : 32 = 3 : 8) है।
- 1:2: गलत, यह परमाणु अनुपात है (H : O = 2 : 1), द्रव्यमान अनुपात नहीं।
Quick Facts:
- जल (H₂O) में H : O (द्रव्यमान) = 1 : 8.
- जल में H : O (परमाणु अनुपात) = 2 : 1.
- जल का आण्विक द्रव्यमान = 18 u (2 × 1 + 16).
निम्नलिखित में से कौन-सा कोलाइड का गुण नहीं है?
- कोलाइड को निस्यंदन द्वारा अलग नहीं किया जा सकता है।
- कोलाइड एक समांगी मिश्रण है।
- कोलाइड एक विषमांगी मिश्रण है।
- कोलाइड के कण बिना छेड़े छोड़ देने पर नीचे नहीं बैठते हैं।
Explanation:
- कोलाइड एक समांगी मिश्रण है: यह गलत है क्योंकि कोलाइड वास्तव में विषमांगी (heterogeneous) होता है (हालाँकि यह नग्न आंखों से समांगी दिखता है, लेकिन सूक्ष्म स्तर पर विषमांगी है — टिडल प्रभाव और ब्राउनी गति इसके प्रमाण हैं)।
- निस्यंदन द्वारा अलग नहीं: सही, कोलाइडी कण (1–1000 nm) फिल्टर पेपर से गुज़र जाते हैं (हालाँकि अल्ट्राफिल्ट्रेशन — ultrafiltration — द्वारा अलग किए जा सकते हैं)।
- विषमांगी: सही, कोलाइड विषमांगी है।
- नीचे नहीं बैठते: सही, ब्राउनी गति के कारण कोलाइडी कण स्थिर रहते हैं।
Quick Facts:
- कोलाइड → विषमांगी (heterogeneous), टिडल प्रभाव, ब्राउनी गति, निस्यंदन द्वारा अलग नहीं होते।
- वास्तविक विलयन → समांगी (homogeneous), टिडल प्रभाव नहीं, ब्राउनी गति नहीं, निस्यंदन द्वारा अलग नहीं होते।
निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प, कोलॉइडी विलयन की एक विशेषता को संदर्भित करता है?
- यह एक आदर्श विलयन है
- यह एक विषमांगी मिश्रण है
- यह एक समांगी मिश्रण है
- यह एक स्थिरक्वाथी (azeotrope) है
Explanation:
- विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous mixture): कोलॉइडी विलयन एक विषमांगी मिश्रण है, क्योंकि इसमें दो अलग-अलग प्रावस्थाएँ होती हैं — परिक्षिप्त प्रावस्था (dispersed phase) और परिक्षेपण माध्यम (dispersion medium)। यह सूक्ष्म स्तर पर विषमांगी है, हालाँकि आंखों को समांगी दिखता है।
- आदर्श विलयन (Ideal solution): यह राउल्ट के नियम (Raoult’s law) का पालन करने वाला विलयन है, कोलाइड नहीं।
- समांगी मिश्रण: गलत, कोलाइड समांगी नहीं है (विषमांगी है)।
- स्थिरक्वाथी (Azeotrope): वह मिश्रण जो निश्चित अनुपात में उबलता है (आसवन द्वारा अलग नहीं होता), कोलाइड नहीं।
Quick Facts:
- कोलाइडी विलयन → विषमांगी, कण 1–1000 nm, टिडल प्रभाव, ब्राउनी गति।
- कोलाइड के उदाहरण: दूध, धुंआ, कोहरा, पेंट, रक्त।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन विषमांगी मिश्रण के लिए सही है?
- मिश्रण की संरचना एक समान है।
- एक स्पष्ट विलयन को विषमांगी मिश्रण कहा जाता है।
- मिश्रणों में भौतिक रूप से अलग-अलग भाग नहीं होते हैं।
- मिश्रण की संरचना असमान है।
Explanation:
- मिश्रण की संरचना असमान है (composition is not uniform): विषमांगी मिश्रण में घटक समान रूप से वितरित नहीं होते हैं, इसलिए संरचना (composition) एक स्थान से दूसरे स्थान पर भिन्न होती है। उदाहरण: रेत + पानी (कुछ भागों में अधिक रेत, कुछ में कम)।
- संरचना एक समान: गलत, यह समांगी मिश्रण (homogeneous) की विशेषता है।
- स्पष्ट विलयन: गलत, स्पष्ट विलयन (clear solution) समांगी होता है।
- अलग-अलग भाग नहीं होते: गलत, विषमांगी मिश्रण में अलग-अलग भाग (phases) होते हैं।
Quick Facts:
- विषमांगी मिश्रण → असमान संरचना, अलग-अलग चरण (phases), उदाहरण: तेल + पानी, रेत + पानी, ग्रेनाइट, धुंआ।
- समांगी मिश्रण → एक समान संरचना, एकल चरण (single phase), उदाहरण: वायु, चीनी का घोल, मिश्र धातु।
जिंक कणिकाओं में तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलाने पर हाइड्रोजन गैस उत्पन्न होती है। यह निम्नलिखित में से किसका उदाहरण है?
- रासायनिक परिवर्तन
- मिश्रण निर्माण
- भौतिक परिवर्तन
- विलयन
Equation: \( \text{Zn} + 2\text{HCl} \rightarrow \text{ZnCl}_2 + \text{H}_2\uparrow \)
Explanation:
- रासायनिक परिवर्तन (Chemical change): जब Zn (जिंक) तनु HCl (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल) के साथ अभिक्रिया करता है, तो ZnCl₂ (जिंक क्लोराइड) और H₂ (हाइड्रोजन) गैस बनती है। यह एक रासायनिक परिवर्तन है क्योंकि नए पदार्थ (ZnCl₂, H₂) बनते हैं, ऊष्मा उत्सर्जित होती है (exothermic), और अभिक्रिया अपरिवर्तनीय है।
- मिश्रण निर्माण: गलत, केवल मिश्रण नहीं है, रासायनिक अभिक्रिया हो रही है।
- भौतिक परिवर्तन: गलत, रासायनिक संरचना बदल रही है।
- विलयन: गलत, ZnCl₂ विलयन बनता है, लेकिन अभिक्रिया स्वयं रासायनिक है।
Quick Facts:
- धातु + अम्ल → लवण + हाइड्रोजन गैस (विस्थापन अभिक्रिया — displacement reaction)।
- Zn, HCl से अधिक क्रियाशील है (धातु क्रियाशीलता श्रेणी — reactivity series में Zn > H)।
- H₂ गैस की पहचान: जलती हुई तीली (burning splint) से चटाके की आवाज (pop sound) आना।
25°C पर एक रिक्त बर्तन में इथेन और हाइड्रोजन के समान द्रव्यमान को मिलाया जाता है। हाइड्रोजन द्वारा लगाए गए कुल दाब का अंश क्या है?
- 1 : 2
- 1 : 1
- 15 : 16
- 1 : 16
Explanation:
- 15 : 16: माना इथेन (C₂H₆) और हाइड्रोजन (H₂) का द्रव्यमान समान (m) है। मोल (n) = द्रव्यमान (m) / मोलर द्रव्यमान (M).
- M(C₂H₆) = 2×12 + 6×1 = 30 g/mol
- M(H₂) = 2 g/mol
- n(C₂H₆) = m/30, n(H₂) = m/2
- कुल मोल = m/30 + m/2 = m(1/30 + 1/2) = m(1/30 + 15/30) = 16m/30 = 8m/15
- हाइड्रोजन का मोल अंश (mole fraction) = n(H₂) / कुल मोल = (m/2) / (8m/15) = (1/2) × (15/8) = 15/16.
- डाल्टन के आंशिक दाब के नियम (Dalton’s law of partial pressures) के अनुसार, आंशिक दाब = कुल दाब × मोल अंश. अतः H₂ का दाब अंश = 15/16.
Quick Facts:
- डाल्टन का नियम: \( P_{\text{total}} = P_1 + P_2 + \dots \), \( P_i = P_{\text{total}} \times \text{मोल अंश} \) (mole fraction).
- आंशिक दाब (Partial pressure) — किसी गैस द्वारा अकेले उत्पन्न दाब यदि वह उसी आयतन में हो।
- मोल अंश = \( \frac{\text{किसी गैस के मोल}}{\text{कुल मोल}} \).
निम्नलिखित में से कौन सा कथन विलयन के बारे में सत्य नहीं है?
- विलयन एक समांगी मिश्रण है।
- विलयन के कण नग्न आँखों से देखे जा सकते हैं।
- विलयन के कण बिना किसी रुकावट के नीचे नहीं बैठते हैं।
- विलयन के कणों को निस्यंदन द्वारा अलग नहीं किया जा सकता है।
Explanation:
- विलयन के कण नग्न आँखों से देखे जा सकते हैं: यह कथन सत्य नहीं है क्योंकि विलयन के कणों का आकार < 1 nm (10⁻⁹ m) होता है, जो नग्न आंखों से अदृश्य होते हैं। (केवल अल्ट्रामाइक्रोस्कोप या इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से ही दिख सकते हैं)।
- समांगी मिश्रण: सही, विलयन समांगी होता है।
- नीचे नहीं बैठते: सही, कण बहुत छोटे होते हैं और गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव नहीं होता (स्थिर — stable)।
- निस्यंदन द्वारा अलग नहीं: सही, कण फिल्टर पेपर से गुज़र जाते हैं।
Quick Facts:
- विलयन → कण < 1 nm, समांगी, पारदर्शी, टिडल प्रभाव नहीं, निस्यंदन द्वारा अलग नहीं होते, नग्न आंखों से अदृश्य।
- कोलाइड → कण 1–1000 nm, अल्ट्रामाइक्रोस्कोप से दिखते हैं, नग्न आंखों से अदृश्य।
- निलंबन → कण > 1000 nm, नग्न आंखों से दिखाई देते हैं।
दो बीकरों में अलग-अलग सांद्रता वाले चीनी के विलयन हैं। एक अर्धपारगम्य झिल्ली उन्हें पृथक करती है। कुछ समय बाद, एक बीकर में विलयन का स्तर बढ़ जाता है जबकि दूसरे में यह घट जाता है। यह प्रयोग विलयनों के किस गुणधर्म को सर्वोत्तम रूप से दर्शाता है, और क्यों?
- अवसादन – क्योंकि गुरुत्वाकर्षण के कारण चीनी के क्रिस्टल तल पर बैठ जाते हैं।
- विसरण – क्योंकि चीनी के अणु झिल्ली के आर-पार तब तक स्वतंत्र रूप से गति करते हैं जब तक संतुलन स्थापित नहीं हो जाता।
- वाष्पन – क्योंकि जल के अणु विलयन की सतह से पलायन करते हैं जिससे स्तर में अंतर होता है।
- परासरण – क्योंकि विलायक के अणु अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से तनु विलयन से सांद्र विलयन की ओर गति करते हैं।
Explanation:
- परासरण (Osmosis): यहाँ विलायक (जल) के अणु अर्धपारगम्य झिल्ली (selectively permeable membrane) के माध्यम से तनु (कम सांद्रता) विलयन से सांद्र (अधिक सांद्रता) विलयन की ओर गति करते हैं। जल के स्तर में बदलाव इसी परासरण के कारण होता है (तनु विलयन का स्तर घटता है, सांद्र विलयन का स्तर बढ़ता है — जल की शुद्ध गति तनु से सांद्र की ओर होती है)।
- अवसादन (Sedimentation): गलत, चीनी घुली हुई है (विलयन), क्रिस्टल नहीं।
- विसरण (Diffusion): गलत, चीनी के अणु (विलेय) अर्धपारगम्य झिल्ली से नहीं गुज़र सकते (झिल्ली विलायक को जाने देती है, विलेय को नहीं — selective permeability)।
- वाष्पन (Evaporation): गलत, यह खुले बर्तन में होता, यहाँ झिल्ली से जल गति परासरण है।
Quick Facts:
- परासरण → विलायक (solvent) की गति अर्धपारगम्य झिल्ली के पार, निम्न विलेय सांद्रता से उच्च विलेय सांद्रता की ओर।
- परासरणी दाब (Osmotic pressure) → परासरण को रोकने के लिए आवश्यक दबाव।
- यह जैविक प्रणालियों (जैसे — कोशिकाओं में जल संतुलन) में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कोलॉइडी विलयन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- कोलॉइड के कणों का आकार बहुत छोटा नहीं होता है।
- कोलॉइडी विलयन एक समांगी मिश्रण है।
- कोलॉइड उनसे गुजरने वाली प्रकाश किरण को प्रकीर्णित नहीं करते हैं और उसका मार्ग दिखाई नहीं देते हैं।
- कोलॉइडी विलयन के घटक परिक्षिप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम होते हैं।
Explanation:
- परिक्षिप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम: यह कोलॉइडी विलयन की सही परिभाषा है। कोलाइड में दो घटक होते हैं: (i) परिक्षिप्त प्रावस्था (dispersed phase — कण जो परिक्षिप्त होते हैं) और (ii) परिक्षेपण माध्यम (dispersion medium — वह माध्यम जिसमें कण परिक्षिप्त होते हैं)।
- आकार बहुत छोटा नहीं: कोलाइडी कण 1–1000 nm होते हैं, जो छोटे हैं (लेकिन बहुत छोटे नहीं — < 1 nm वास्तविक विलयन होता है)। यह कथन अस्पष्ट है, लेकिन सही विकल्प परिक्षिप्त प्रावस्था/माध्यम वाला है।
- समांगी मिश्रण: गलत, कोलाइड विषमांगी है।
- प्रकाश प्रकीर्णित नहीं: गलत, कोलाइड टिडल प्रभाव दिखाता है।
Quick Facts:
- कोलाइडी विलयन → परिक्षिप्त प्रावस्था + परिक्षेपण माध्यम
- उदाहरण: दूध (वसा गोलिकाएँ परिक्षिप्त, जल परिक्षेपण माध्यम); धुंआ (ठोस कण गैस में परिक्षिप्त)।
- कोलाइडी विलयन विषमांगी होता है और टिडल प्रभाव दिखाता है।
निम्नलिखित में से कौन सा मिश्रण अलग-अलग कीप/फनल द्वारा अलग किया जा सकता है?
- एल्कोहल और पानी
- नमक और पानी
- तेल और पानी
- अल्कोहल में आयोडीन
Explanation:
- तेल और पानी (Oil and water): ये दो अमिश्रणीय (immiscible) द्रव हैं, जिन्हें पृथक्करण फ़नल (separating funnel) द्वारा अलग किया जा सकता है। तेल (घनत्व कम) ऊपरी परत में और पानी (घनत्व अधिक) निचली परत में रहता है। नल (stopcock) के माध्यम से निचली परत (पानी) को बाहर निकाला जा सकता है।
- अल्कोहल और पानी: मिश्रणीय (miscible), इन्हें आसवन (distillation) या प्रभाजी आसवन (fractional distillation) से अलग किया जाता है (क्वथनांक में अंतर: अल्कोहल 78°C, पानी 100°C)।
- नमक और पानी: विलयन, वाष्पीकरण (evaporation) या आसवन द्वारा अलग किया जाता है।
- अल्कोहल में आयोडीन: विलयन (आयोडीन अल्कोहल में घुल जाता है), आसवन द्वारा अलग किया जा सकता है।
Quick Facts:
- पृथक्करण फ़नल (Separating funnel) — अमिश्रणीय द्रवों के पृथक्करण के लिए (घनत्व अंतर पर आधारित)।
- अमिश्रणीय द्रव → आपस में नहीं मिलते, दो परतें बनाते हैं (जैसे — तेल-पानी, मिट्टी का तेल-पानी, ईथर-पानी)।
एक विद्यार्थी तालाब से एकत्रित मिट्टी और पानी के विषमांगी मिश्रण को अलग करना चाहता है। मिश्रणों के बारे में आपकी समझ के आधार पर, कौन-सी विधि सबसे प्रभावी होगी और क्यों?
- क्रोमेटोग्राफी, क्योंकि यह माध्यम में गति के आधार पर पृथक्करण करती है।
- मिट्टी में मौजूद ठोस कण पानी में घुलते नहीं हैं, इसलिए छानने की प्रक्रिया आवश्यक है।
- वाष्पीकरण, क्योंकि यह विलायक को हटा देता है
- आसवन विधि, क्योंकि यह क्वथनांक के आधार पर पृथक्करण करती है।
Explanation:
- छानना (Filtration): मिट्टी और पानी का मिश्रण एक निलंबन (suspension) है, जिसमें मिट्टी के ठोस कण पानी में अघुलनशील होते हैं। निस्यंदन (filtration) द्वारा मिट्टी के कणों को फिल्टर पेपर पर रोका जा सकता है और साफ पानी (फिल्ट्रेट — filtrate) प्राप्त किया जा सकता है।
- क्रोमैटोग्राफी (Chromatography): घुले हुए रंगों या मिश्रणों के पृथक्करण के लिए, ठोस-द्रव निलंबन के लिए नहीं।
- वाष्पीकरण (Evaporation): विलेय (जैसे नमक) को विलायक (जल) से अलग करने के लिए, लेकिन यहाँ मिट्टी को अलग करना है (निस्यंदन बेहतर है)।
- आसवन (Distillation): मिश्रणीय द्रवों के क्वथनांक में अंतर के आधार पर पृथक्करण, निलंबन के लिए नहीं।
Quick Facts:
- निस्यंदन (Filtration) → अघुलनशील ठोस को द्रव से अलग करना (जैसे — मिट्टी + पानी, चाक पाउडर + पानी)।
- फिल्टर पेपर के छिद्र → 2–5 माइक्रोमीटर (निलंबन के कण > 1 माइक्रोमीटर रुक जाते हैं)।
निम्नलिखित में से कौन-सा कोलाइड और वास्तविक विलयनों के बीच एक विशिष्ट अंतर है?
- वास्तविक विलयनों में दृश्यमान विलेय कण होते हैं, जबकि कोलाइड में अदृश्य परिक्षिप्त कण होते हैं
- वास्तविक विलयनों में एकल-प्रावस्था प्रणाली होती है, जबकि कोलाइड में दो-प्रावस्था प्रणाली होती है
- वास्तविक विलयन ब्राउनी गति प्रदर्शित करते हैं, लेकिन कोलाइड नहीं करते हैं
- वास्तविक विलयन टिडल प्रभाव दिखाते हैं, लेकिन कोलाइड नहीं दिखाते हैं
Explanation:
- एकल-प्रावस्था (single phase) vs दो-प्रावस्था (two phases): वास्तविक विलयन (true solution) समांगी होता है, जिसमें केवल एक चरण होता है (जैसे — NaCl का जलीय विलयन — एकल चरण द्रव)। कोलाइड (colloid) विषमांगी होता है, जिसमें दो चरण होते हैं — परिक्षिप्त प्रावस्था (dispersed phase) और परिक्षेपण माध्यम (dispersion medium) (जैसे — दूध — वसा गोलिकाएँ + जल)।
- दृश्यमान कण: गलत, दोनों में कण नग्न आंखों से अदृश्य होते हैं (कोलाइड में अल्ट्रामाइक्रोस्कोप से दिखते हैं)।
- ब्राउनी गति: गलत, कोलाइड दिखाता है, वास्तविक विलयन नहीं।
- टिडल प्रभाव: गलत, कोलाइड दिखाता है, वास्तविक विलयन नहीं।
Quick Facts:
- वास्तविक विलयन → एकल प्रावस्था (homogeneous), कण < 1 nm, टिडल प्रभाव नहीं, ब्राउनी गति नहीं।
- कोलाइड → दो प्रावस्थाएँ (heterogeneous), कण 1–1000 nm, टिडल प्रभाव, ब्राउनी गति।
खोई का उपयोग किसका उत्पादन करने के लिए किया जाता है?
- खाद
- उर्वरक
- कागज
- साबुन
Explanation:
- कागज (Paper): खोई (bagasse) गन्ने (sugarcane) के रस निकालने के बाद बचा हुआ रेशेदार अवशेष (fibrous residue) है। इसका उपयोग मुख्यतः कागज (paper) और पेपर बोर्ड (paperboard) के उत्पादन में किया जाता है। यह सेल्यूलोज़ (cellulose) का अच्छा स्रोत है।
- खाद (Compost): खोई का उपयोग खाद/जैविक उर्वरक (organic fertilizer) के रूप में भी किया जा सकता है, लेकिन मुख्य उपयोग कागज उद्योग में है।
- साबुन (Soap): खोई से साबुन नहीं बनता (साबुन वसा/तेल से बनता है)।
Quick Facts:
- खोई (Bagasse) → गन्ने के डंठल से रस निकालने के बाद बचा हुआ 30–40% ठोस अवशेष।
- खोई का उपयोग ईंधन (biofuel) के रूप में, पेपर, बायोप्लास्टिक और जैव ईंधन (ethanol) उत्पादन में भी होता है।
- भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक है, जहाँ खोई का व्यापक उपयोग कागज और ऊर्जा उत्पादन में होता है।
पीतल ……………का उदाहरण है।
- एक विषमांगी मिश्रण
- एक यौगिक
- एक समांगी मिश्रण
- एक तत्व
Explanation:
- समांगी मिश्रण (Homogeneous mixture): पीतल (Brass) ताँबा (Cu — 60–70%) और जस्ता (Zn — 30–40%) का एक ठोस विलयन (solid solution) है, जो परमाणु स्तर पर समान रूप से मिश्रित होता है। इसलिए यह एक समांगी मिश्रण है (हालाँकि ठोस अवस्था में, इसे मिश्र धातु — alloy — कहा जाता है)।
- विषमांगी मिश्रण: गलत, पीतल समांगी है (एक समान दिखता है और संरचना हर जगह समान होती है)।
- यौगिक: गलत, पीतल में Cu और Zn का निश्चित अनुपात नहीं होता (परिवर्ती — variable) और ये रासायनिक रूप से बंधित नहीं होते।
- तत्व: गलत, पीतल दो तत्वों का मिश्रण है।
Quick Facts:
- पीतल (Brass) → Cu (ताँबा) + Zn (जस्ता) का मिश्र धातु।
- कांसा (Bronze) → Cu + Sn (टिन) का मिश्र धातु।
- स्टेनलेस स्टील → Fe + Cr + Ni का मिश्र धातु।
- मिश्र धातुएँ ठोस विलयन (solid solution) कहलाती हैं और समांगी मिश्रण होती हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म पदार्थों की ठोस अवस्था का उदाहरण है?
- चीनी और स्पंज
- पानी और ऑक्सीजन
- जूस और दूध
- तेल और चीनी
Explanation:
- चीनी और स्पंज: चीनी (ठोस क्रिस्टलीय पदार्थ) और स्पंज (ठोस — porous solid) दोनों ठोस अवस्था के उदाहरण हैं।
- पानी और ऑक्सीजन: पानी (द्रव) + ऑक्सीजन (गैस) — दोनों ठोस नहीं।
- जूस और दूध: दोनों द्रव (liquid) हैं।
- तेल और चीनी: तेल (द्रव) + चीनी (ठोस) — दोनों ठोस नहीं।
Quick Facts:
- ठोस (Solid) → निश्चित आकार और आयतन, कण निकटवर्ती (closely packed), अत्यंत कम गतिज ऊर्जा (केवल कंपन — vibration)।
- द्रव (Liquid) → निश्चित आयतन, अनिश्चित आकार, कण मध्यम गतिज ऊर्जा।
- गैस (Gas) → अनिश्चित आकार और आयतन, कण उच्चतम गतिज ऊर्जा।
अधात्विक ऑक्साइड और क्षार के बीच अभिक्रिया का सामान्य उत्पाद क्या है/हैं?
- गैस और जल
- लवण और जल
- केवल जल
- लवण और हाइड्रोजन
Equation: \( \text{CO}_2 + 2\text{NaOH} \rightarrow \text{Na}_2\text{CO}_3 + \text{H}_2\text{O} \)
Explanation:
- लवण और जल (Salt and water): अधात्विक ऑक्साइड (non-metallic oxide — जैसे CO₂, SO₂, SO₃, P₂O₅) अम्लीय (acidic) होते हैं। जब ये क्षार (base — जैसे NaOH, KOH) के साथ अभिक्रिया करते हैं, तो लवण (salt) और जल (water) बनते हैं। यह अभिक्रिया उदासीनीकरण (neutralization) के समान है।
- गैस और जल: गलत, यह धातुओं की अम्ल से अभिक्रिया में होता है (H₂ गैस)।
- केवल जल: गलत, लवण भी बनता है।
- लवण और हाइड्रोजन: गलत, यह धातु + अम्ल की अभिक्रिया है (जैसे Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂↑)।
Quick Facts:
- अधात्विक ऑक्साइड → अम्लीय (acidic) — जल में घुलकर अम्ल बनाते हैं (CO₂ + H₂O → H₂CO₃).
- धात्विक ऑक्साइड → क्षारीय (basic) — जल में घुलकर क्षार बनाते हैं (CaO + H₂O → Ca(OH)₂).
- उदाहरण: CO₂ + 2NaOH → Na₂CO₃ + H₂O (सोडियम कार्बोनेट + जल)।
क्रिस्टलीय ठोस के सही उदाहरण का चयन कीजिए।
- केवल रेत
- केवल नमक
- चीनी और नमक दोनों
- नमक, चीनी और रेत सभी
Explanation:
- चीनी और नमक दोनों: चीनी (सुक्रोज़ — C₁₂H₂₂O₁₁) और नमक (NaCl) दोनों क्रिस्टलीय ठोस (crystalline solids) हैं, क्योंकि इनमें कण (अणु/आयन) एक नियमित, आवर्ती (regular, repeating) त्रि-आयामी व्यवस्था (जालक — lattice) में होते हैं।
- रेत (Silica — SiO₂): रेत क्रिस्टलीय हो सकती है (क्वार्ट्ज — quartz) लेकिन सामान्यतः यह एक निराकार (amorphous) या बहु-क्रिस्टलीय (polycrystalline) ठोस मानी जाती है। हालाँकि कुछ संदर्भों में इसे क्रिस्टलीय माना जा सकता है, लेकिन चीनी और नमक अधिक स्पष्ट उदाहरण हैं। इस प्रश्न में “चीनी और नमक दोनों” सबसे सही उत्तर है।
Quick Facts:
- क्रिस्टलीय ठोस → नियमित जालक (regular lattice), निश्चित आकार, तीव्र गलनांक (sharp melting point) (जैसे — NaCl, चीनी, हीरा, धातुएँ)।
- निराकार ठोस (Amorphous solid) → अनियमित व्यवस्था, कोई निश्चित आकार नहीं, कोई तीव्र गलनांक नहीं (जैसे — काँच, प्लास्टिक, रबर)।
निम्नलिखित में से कौन-सा मिश्रण, निलंबन है?
- लवण जल
- पंकिल जल
- सिरका
- दूध
Explanation:
- पंकिल जल (Muddy water): पंकिल जल में मिट्टी (ठोस) के कण पानी (द्रव) में निलंबित होते हैं। यह एक निलंबन (suspension) है क्योंकि कण बड़े (> 1000 nm) होते हैं, विषमांगी होते हैं, और समय के साथ नीचे बैठ जाते हैं (sedimentation)।
- लवण जल (Salt water): विलयन (समांगी) — NaCl पानी में घुल जाता है।
- सिरका (Vinegar): विलयन (समांगी) — एसिटिक अम्ल का जलीय विलयन।
- दूध (Milk): कोलाइड (पायस — emulsion) — वसा गोलिकाएँ पानी में परिक्षिप्त (1–1000 nm)।
Quick Facts:
- निलंबन → विषमांगी, कण > 1000 nm, बैठ जाते हैं (sedimentation), निस्यंदन द्वारा अलग किए जा सकते हैं।
- उदाहरण: पंकिल जल, पानी में चाक पाउडर, पानी में रेत।
कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करके _____ उत्पन्न करता है।
- लवण एवं जल दोनों
- लवण
- यूरिया
- जल
Equation: \( \text{Ca(OH)}_2 + \text{CO}_2 \rightarrow \text{CaCO}_3 + \text{H}_2\text{O} \)
Explanation:
- लवण एवं जल दोनों (Salt and water): कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड (Ca(OH)₂ — बुझा चूना — slaked lime) एक क्षार (base) है और CO₂ एक अधात्विक ऑक्साइड (अम्लीय) है। अभिक्रिया में CaCO₃ (कैल्शियम कार्बोनेट — चूना पत्थर — limestone) लवण और H₂O (जल) बनते हैं।
- केवल लवण: गलत, जल भी बनता है।
- यूरिया: गलत, यूरिया (CH₄N₂O) CO₂ और NH₃ से बनता है, इस अभिक्रिया में नहीं।
- केवल जल: गलत, लवण भी बनता है।
Quick Facts:
- चूने के पानी (lime water — Ca(OH)₂) में CO₂ प्रवाहित करने पर वह दूधिया (milky) हो जाता है: Ca(OH)₂ + CO₂ → CaCO₃↓ + H₂O (CaCO₃ अघुलनशील सफेद अवक्षेप — white precipitate).
- अधिक CO₂ प्रवाहित करने पर दूधिया घोल स्पष्ट हो जाता है: CaCO₃ + CO₂ + H₂O → Ca(HCO₃)₂ (कैल्शियम बाइकार्बोनेट — घुलनशील).
- इसका उपयोग CO₂ की पहचान के लिए किया जाता है।
कोलॉइड के गुणधर्मों के संबंध में सही कथन का चयन करें।
- परिक्षेपण माध्यम यह घटक है जिसमें उसकी प्रावस्था निलंबित रहती है।
- कोलॉइड एक समांगी मिश्रण है।
- इन्हें निस्यंदन प्रक्रिया द्वारा मिश्रण से पृथक किया जा सकता है।
- कोलॉइड विलयन के घटक परिक्षिप्त प्रावस्था नहीं होते हैं।
Explanation:
- परिक्षेपण माध्यम (Dispersion medium): कोलाइड में परिक्षिप्त प्रावस्था (dispersed phase — कण) परिक्षेपण माध्यम (dispersion medium — जिसमें कण परिक्षिप्त/निलंबित हैं) में निलंबित रहती है। यह सही परिभाषा है।
- समांगी मिश्रण: गलत, कोलाइड विषमांगी है।
- निस्यंदन द्वारा पृथक: गलत, कोलाइडी कण फिल्टर पेपर से गुज़र जाते हैं (अल्ट्राफिल्ट्रेशन से अलग हो सकते हैं, लेकिन सामान्य निस्यंदन से नहीं)।
- परिक्षिप्त प्रावस्था नहीं होते: गलत, कोलाइड में परिक्षिप्त प्रावस्था अवश्य होती है।
Quick Facts:
- कोलाइड → परिक्षिप्त प्रावस्था (Dispersed phase) + परिक्षेपण माध्यम (Dispersion medium).
- उदाहरण: दूध (द्रव में द्रव — पायस — परिक्षिप्त प्रावस्था = वसा गोलिकाएँ, परिक्षेपण माध्यम = जल)।
- धुंआ (गैस में ठोस — एरोसोल — परिक्षिप्त प्रावस्था = ठोस कण, परिक्षेपण माध्यम = गैस)।
अम्ल और क्षार के बीच अभिक्रिया का/के उत्पाद क्या है/हैं?
- लवण और हाइड्रोजन गैस दोनों
- केवल जल
- केवल लवण
- लवण और जल दोनों
Equation: \( \text{HCl} + \text{NaOH} \rightarrow \text{NaCl} + \text{H}_2\text{O} \)
Explanation:
- लवण और जल दोनों (Salt and water): अम्ल (acid — HCl) और क्षार (base — NaOH) के बीच अभिक्रिया उदासीनीकरण (neutralization) कहलाती है। इसका उत्पाद लवण (salt — NaCl) और जल (H₂O) होता है। यह एक ऊष्माक्षेपी (exothermic) अभिक्रिया है।
- लवण और हाइड्रोजन: गलत, यह धातु + अम्ल की अभिक्रिया है (जैसे — Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂↑).
- केवल जल: गलत, लवण भी बनता है।
- केवल लवण: गलत, जल भी बनता है।
Quick Facts:
- उदासीनीकरण (Neutralization) → अम्ल + क्षार → लवण + जल.
- उदाहरण: HCl + NaOH → NaCl + H₂O; H₂SO₄ + 2KOH → K₂SO₄ + 2H₂O.
- pH स्केल पर उदासीनीकरण के बाद विलयन उदासीन (pH ≈ 7) हो जाता है (यदि प्रबल अम्ल/क्षार हो)।
निम्नलिखित में से कौन टिडल प्रभाव दर्शाता है?
- शर्करा विलयन
- मिट्टी
- सिरका
- वायु
Explanation:
- मिट्टी (Mud/Soil + water): मिट्टी का पानी में निलंबन (suspension) है, जिसमें कण बड़े (>1000 nm) होते हैं और प्रकाश को प्रकीर्णित (scatter) करते हैं, जिससे टिडल प्रभाव (Tyndall effect) दिखता है (प्रकाश की किरण का मार्ग दिखाई देता है)।
- शर्करा विलयन (Sugar solution): वास्तविक विलयन (true solution), कण < 1 nm, टिडल प्रभाव नहीं दिखाता।
- सिरका (Vinegar): वास्तविक विलयन, टिडल प्रभाव नहीं।
- वायु (Air): गैसीय विलयन (समांगी), टिडल प्रभाव नहीं दिखाती (जब तक धूल के कण न हों — धूलयुक्त वायु में दिख सकता है, लेकिन शुद्ध वायु नहीं)।
Quick Facts:
- टिडल प्रभाव (Tyndall effect) → प्रकाश का परिक्षिप्त कणों द्वारा प्रकीर्णन (scattering)।
- यह कोलाइड और निलंबन में दिखता है, वास्तविक विलयन में नहीं।
- उदाहरण: कोहरे में हेडलाइट की किरण, धूल भरे कमरे में प्रकाश की किरण, दूध (कोलाइड) में प्रकाश प्रकीर्णन।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन यह सर्वोत्तम रूप से प्रदर्शित करता है कि पदार्थ के कणों के बीच अंतराल होता है?
- बर्फ, जल में पिघल जाती है
- चॉक का एक टुकड़ा आसानी से टूट जाता है
- रबर बैंड खिंच जाता है
- चीनी, जल में घुल जाती है
Explanation:
- चीनी का जल में घुलना (Sugar dissolving in water): जब चीनी को पानी में डाला जाता है, तो चीनी के कण पानी के अणुओं के बीच उपस्थित अंतराल (intermolecular spaces) में समा जाते हैं, जिससे चीनी घुल जाती है और विलयन बनता है। यह दर्शाता है कि पदार्थ के कणों के बीच अंतराल होते हैं।
- बर्फ का पिघलना: अवस्था परिवर्तन (change of state), अंतराल नहीं दिखाता।
- चॉक का टूटना: केवल आकार/आकृति बदलती है, अंतराल नहीं दिखाता।
- रबर बैंड का खिंचना: लोच (elasticity) दिखाता है, अंतराल नहीं।
Quick Facts:
- कणों के बीच अंतराल (Interparticle spaces) → गैसों में अधिकतम, द्रवों में मध्यम, ठोसों में न्यूनतम।
- विसरण (diffusion) और विलयन (solution) कणों के बीच अंतराल के कारण ही संभव होते हैं।
- उदाहरण: पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO₄) का पानी में फैलना (विसरण) — अंतराल के कारण।
एक विलयन में पानी की 320 ग्राम मात्रा में सामान्य नमक की मात्रा 46 ग्राम है। द्रव्यमान प्रतिशत द्वारा द्रव्यमान के संदर्भ में विलयन की सांद्रता की गणना कीजिए।
- 12.55%
- 11.36%
- 12.36%
- 12.57%
Equation: \( \frac{46}{366} \times 100 = 12.57\% \)
Explanation:
- 12.57%: द्रव्यमान प्रतिशत (Mass%) = \( \frac{\text{विलेय (solute) का द्रव्यमान}}{\text{विलयन (solution) का कुल द्रव्यमान}} \times 100 \).
- विलेय (NaCl) = 46 g
- विलायक (पानी — H₂O) = 320 g
- विलयन का कुल द्रव्यमान = 46 + 320 = 366 g
- \( \text{Mass\%} = \frac{46}{366} \times 100 = 12.5683 \approx 12.57\% \)
- 12.55%, 11.36%, 12.36%: ये गणना में त्रुटि वाले मान हैं (क्रमशः 46/366, 46/405, 46/372).
Quick Facts:
- द्रव्यमान प्रतिशत (w/w%) — \( \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान}}{\text{विलयन का कुल द्रव्यमान}} \times 100 \).
- यह सांद्रता व्यक्त करने की सबसे सामान्य विधि है (विशेषकर ठोस-द्रव विलयनों के लिए)।
- उदाहरण: 10% NaCl विलयन का अर्थ 10g NaCl + 90g जल = 100g विलयन।
स्थिर अनुपात के नियम के अनुसार, 18 g जल के अपघटन के बाद प्राप्त ऑक्सीजन और हाइड्रोजन (O : H) का सही अनुपात क्या होगा?
- 4:14
- 16:2
- 2:16
- 14:4
Equation: H₂O → O : H = 16 : 2 = 8 : 1
Explanation:
- 16:2: जल (H₂O) में ऑक्सीजन (O) और हाइड्रोजन (H) का द्रव्यमान अनुपात O : H = 16 : 2 (हालाँकि इसे 8 : 1 के रूप में सरल किया जा सकता है, लेकिन प्रश्न में विकल्प 16:2 है, जो 18 g जल के लिए सही है — 16g O₂ और 2g H₂).
- जल (H₂O) में O का परमाणु द्रव्यमान = 16 u, H का = 1 u (2 H = 2 u).
- अनुपात O : H = 16 : 2 (सरल रूप 8 : 1).
- 18 g जल में → 16 g ऑक्सीजन + 2 g हाइड्रोजन.
- 4:14: गलत, यह CO₂ (C : O = 12 : 32 = 3 : 8) या अन्य का हो सकता है।
- 2:16: गलत, यह उल्टा अनुपात है (H : O = 2 : 16).
- 14:4: गलत, यह N₂O (N : O = 28 : 16) के करीब है।
Quick Facts:
- स्थिर अनुपात का नियम (Law of Definite Proportions) — जोसेफ प्राउस्ट (1799).
- जल में H₂O का द्रव्यमान अनुपात H : O = 2 : 16 = 1 : 8.
- इस नियम के अनुसार, शुद्ध जल के किसी भी स्रोत (वर्षा, नदी, समुद्र — शुद्ध) में H : O = 1 : 8 ही होगा।
निम्नलिखित में से कौन सा कथन निलंबन (सस्पेन्शन) के बारे में सत्य है?
- जब निलंबन को बिना किसी रुकावट के छोड़ दिया जाता है, तो विलेय कण नीचे नहीं बैठते हैं।
- यह एक समांगी मिश्रण है।
- निलंबन के कणों को नग्न आँखों से देखा जा सकता है।
- विलेय कणों को मिश्रण से अलग नहीं किया जा सकता है।
Explanation:
- निलंबन के कणों को नग्न आँखों से देखा जा सकता है: यह निलंबन की एक विशेषता है क्योंकि कणों का आकार > 1000 nm (1 माइक्रोमीटर) होता है, इसलिए वे नग्न आंखों से स्पष्ट दिखाई देते हैं। उदाहरण: पानी में रेत के कण, पानी में चाक पाउडर।
- नीचे नहीं बैठते: गलत, निलंबन में कण गुरुत्वाकर्षण के कारण बैठ जाते हैं (sedimentation)।
- समांगी: गलत, निलंबन विषमांगी है।
- अलग नहीं किया जा सकता: गलत, निलंबन के कणों को निस्यंदन (filtration) द्वारा अलग किया जा सकता है।
Quick Facts:
- निलंबन → कण > 1000 nm, नग्न आंखों से दिखाई देते हैं, विषमांगी, निस्यंदन द्वारा अलग किए जा सकते हैं।
- कोलाइड → कण 1–1000 nm, नग्न आंखों से नहीं दिखते (अल्ट्रामाइक्रोस्कोप से दिखते हैं)।
- वास्तविक विलयन → कण < 1 nm, नग्न आंखों से नहीं दिखते।
जब हम शर्करा को जल में घोलते हैं तो क्या होता है?
- शर्करा और जल के कण मिश्रित नहीं होते हैं।
- एक कोलॉइडी विलयन बनता है।
- शर्करा के कण, जल के कणों के बीच के स्थान में समा जाते हैं।
- शर्करा के कण जल के ऊपर तैरते हैं।
Explanation:
- शर्करा के कण, जल के कणों के बीच के स्थान में समा जाते हैं: जब चीनी (ठोस) पानी (द्रव) में घुलती है, तो चीनी के अणु पानी के अणुओं के बीच उपस्थित अंतराल (intermolecular spaces) में चले जाते हैं। यह विलयन (solution) निर्माण का आधार है और यह दर्शाता है कि पदार्थ के कणों के बीच अंतराल होते हैं।
- मिश्रित नहीं होते: गलत, चीनी पानी में घुलकर समांगी मिश्रण बनाती है।
- कोलॉइडी विलयन: गलत, चीनी का जलीय विलयन वास्तविक विलयन (true solution) है (समांगी, कण < 1 nm, टिडल प्रभाव नहीं)।
- तैरते हैं: गलत, चीनी घुल जाती है, तैरती नहीं (जैसे तेल तैरता है)।
Quick Facts:
- विलयन (Solution) → विलेय के कण विलायक के अणुओं के बीच समा जाते हैं (intermolecular spaces).
- यह विसरण (diffusion) और कणों के बीच अंतराल (interparticle spaces) का प्रमाण है।
- चीनी का विलयन एक समांगी मिश्रण है, पारदर्शी, और टिडल प्रभाव नहीं दिखाता।
