SCIENCE
निम्नलिखित में से कौन-सा, सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम (Universal Law of Gravitation) द्वारा स्पष्ट नहीं किया गया है?
- ज्वार-भाटा (tide) का निर्माण
- पृथ्वी पर वस्तुओं का वजन
- किसी गतिमान वस्तु के लिए वायु द्वारा उत्पन्न प्रतिरोध
- पेड़ से सेब गिरना
Explanation:
- सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम (Newton’s Universal Law of Gravitation) ब्रह्मांड के सभी पिंडों के बीच आकर्षण बल की व्याख्या करता है।
- ज्वार-भाटा (चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के कारण), वस्तुओं का भार (पृथ्वी का आकर्षण), और सेब का गिरना (पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण) – ये सभी इस नियम द्वारा स्पष्ट हैं।
- वायु प्रतिरोध (air resistance) गुरुत्वाकर्षण बल नहीं है; यह एक यांत्रिक (घर्षण) बल है, जो वायु के अणुओं और वस्तु के बीच संपर्क के कारण उत्पन्न होता है।
Quick Facts:
- गुरुत्वाकर्षण बल: F = G × (M₁M₂)/r² (सभी द्रव्यमानों के बीच)
- वायु प्रतिरोध वेग पर निर्भर करता है, द्रव्यमान पर नहीं (गुरुत्वाकर्षण के विपरीत)।
एक सिक्का, एक पंख और एक ईट को निर्वात में एक साथ गिराया जाता है। निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस स्थिति में सत्य है?
- सिक्के से पहले पंख और ईट नीचे पहुँच जाएंगे।
- ईट और पंख से पहले सिक्का नीचे पहुँच जाएगा।
- पंख, सिक्का और ईट सभी एकसाथ नीचे पहुँचेंगे।
- पंख और सिक्के से पहले ईट नीचे पहुँच जाएगी।
Explanation:
- निर्वात (vacuum) में, वायु प्रतिरोध (air resistance) अनुपस्थित होता है, इसलिए सभी वस्तुएँ गुरुत्वाकर्षण के कारण समान त्वरण (g = 9.8 m/s²) से गिरती हैं, चाहे उनका द्रव्यमान कुछ भी हो (गैलीलियो का नियम)।
- अतः सिक्का, पंख और ईट तीनों एक साथ (simultaneously) जमीन पर पहुँचेंगे।
Quick Facts:
- यह प्रयोग ‘गैलीलियो का लीनिंग टॉवर ऑफ पीसा प्रयोग’ के रूप में प्रसिद्ध है (हालाँकि इसकी ऐतिहासिकता विवादित है)।
- वायु प्रतिरोध के कारण, सामान्य वातावरण में हल्की वस्तुएँ देर से गिरती हैं (जैसे पंख)।
यदि सार्वत्रिक गुरुत्वीय नियतांक (G), पृथ्वी का द्रव्यमान (M) और पृथ्वी की त्रिज्या (R) का मान ज्ञात हो, तो पृथ्वी के पृष्ठ के निकट गुरुत्वीय त्वरण (g) की गणना के लिए किस समीकरण का उपयोग किया जाता है?
- g = GR/M²
- g = GM/R
- R²/(GM)
- g = GM/R²
Explanation:
- पृथ्वी के पृष्ठ पर, किसी वस्तु पर गुरुत्वाकर्षण बल F = GMm/R² (जहाँ m = वस्तु का द्रव्यमान)।
- न्यूटन के द्वितीय नियम से, F = mg ⇒ mg = GMm/R² ⇒ g = GM/R²
- यह सूत्र g को G, M (पृथ्वी), और R (पृथ्वी की त्रिज्या) से संबंधित करता है।
Quick Facts:
- g का मान ≈ 9.8 m/s² (पृथ्वी की सतह पर)
- g = GM/R² (पृथ्वी के लिए, R = 6.4 × 10⁶ m, M = 6 × 10²⁴ kg, G = 6.67 × 10⁻¹¹ Nm²/kg²)
गुरुत्वीय त्वरण ___ पर सबसे अधिक होता है।
- ध्रुव
- पृथ्वी से अनंत दूरी पर
- भूमध्यरेखा
- पृथ्वी का केंद्र
Explanation:
- पृथ्वी पूर्णतः गोलाकार नहीं है; यह ध्रुवों पर थोड़ी चपटी (oblate spheroid) है, इसलिए ध्रुवों पर त्रिज्या (R) भूमध्यरेखा की तुलना में लगभग 21 km कम होती है।
- चूँकि g = GM/R², R कम होने पर g अधिक होता है।
- इसके अलावा, पृथ्वी के घूर्णन के कारण भूमध्यरेखा पर अपकेन्द्री बल (centrifugal force) g को और कम कर देता है (अतः ध्रुवों पर g अधिकतम है)।
Quick Facts:
- ध्रुव पर g ≈ 9.832 m/s², भूमध्यरेखा पर g ≈ 9.780 m/s²
- पृथ्वी के केंद्र पर g = 0 (क्योंकि अंदर का द्रव्यमान सभी दिशाओं से बल को रद्द कर देता है)।
चन्द्रमा पर किसी पिंड का भार पृथ्वी की अपेक्षा कम होता है, क्योंकि ___।
- चंद्रमा पर वायुमंडल नहीं है
- चंद्रमा पर पिंड का द्रव्यमान घटता है
- चंद्रमा का द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान के बराबर है
- चंद्रमा पर गुरूत्वीय त्वरण कम होता है
Explanation:
- भार (Weight) = m × g, जहाँ g = गुरुत्वीय त्वरण।
- चंद्रमा का द्रव्यमान पृथ्वी से कम (~1/81) और त्रिज्या कम (~1/3.7) है, जिससे g_moon = g_earth/6 (लगभग 1.63 m/s²) होता है।
- द्रव्यमान (m) स्थिर रहता है (वस्तु का पदार्थ), पर g कम होने के कारण भार कम होता है।
- वायुमंडल का भार से कोई संबंध नहीं है।
Quick Facts:
- चंद्रमा पर g ≈ 1.63 m/s² (पृथ्वी का 1/6)
- एक व्यक्ति का चंद्रमा पर भार = पृथ्वी के भार का 1/6
लालटेन की बत्ती में मिट्टी के तेल (केरोसीन) के ऊपर उठने का कारण क्या है?
- गुरुत्वाकर्षण
- विसरण
- केशिकत्व
- परासरण
Explanation:
- लालटेन की बत्ती (wick) मिट्टी के तेल (केरोसीन) को केशिकत्व (Capillarity) या केशिका क्रिया (capillary action) के कारण ऊपर चढ़ाती है, जो तरल और ठोस (बत्ती) के बीच ससंजक (cohesive) और आसंजक (adhesive) बलों के कारण होती है।
- गुरुत्वाकर्षण तो तरल को नीचे खींचता है, पर केशिका बल उसे ऊपर चढ़ाता है (जब तक कि पृष्ठ तनाव संतुलन न बना ले)।
Quick Facts:
- केशिकत्व: तरल का संकीर्ण नली (या छिद्रयुक्त पदार्थ) में ऊपर चढ़ना, पृष्ठ तनाव (surface tension) के कारण।
- उदाहरण: पेड़ों में जल का जाइलम के माध्यम से ऊपर उठना (वाष्पोत्सर्जन खिंचाव के साथ)।
पृथ्वी की सतह पर मापे जाने पर एक वस्तु का वजन 60 न्यूटन होता है। चंद्रमा की सतह पर इसका वजन क्या होगा?
- 10 न्यूटन
- 10 किग्रा
- 360 न्यूटन
- 360 किग्रा
Explanation:
- चंद्रमा पर g = पृथ्वी के g का 1/6 (लगभग)।
- भार (Weight) = m × g, इसलिए W_moon = (1/6) × W_earth = 60/6 = 10 N
- द्रव्यमान (kg) में नहीं, बल (N) में पूछा गया है, इसलिए 10 N सही है (10 kg नहीं, क्योंकि kg द्रव्यमान है)।
Quick Facts:
- द्रव्यमान स्थिर रहता है: m = W_earth/g = 60/9.8 ≈ 6.12 kg
- चंद्रमा पर भार = 6.12 × 1.63 ≈ 10 N
सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण सिद्धान्त द्वारा विकल्पों में वर्णित किस घटना की व्याख्या नहीं की गई है?
- पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की गति
- ज्वार, चंद्रमा और सूर्य के कारण होते हैं
- वह बल जो हमें पृथ्वी से बांधता है
- ग्रहों के चारों ओर सूर्य की गति
Explanation:
- सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम के अनुसार, सूर्य (बड़ा द्रव्यमान) ग्रहों को आकर्षित करता है, और ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं।
- विकल्प D: “ग्रहों के चारों ओर सूर्य की गति” गलत है, क्योंकि ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं, न कि सूर्य ग्रहों के चारों ओर।
- अतः यह घटना गुरुत्वाकर्षण नियम द्वारा नहीं, बल्कि सूर्य के गुरुत्वाकर्षण द्वारा स्पष्ट होती है (पर ग्रहों के चारों ओर सूर्य की गति गलत है)।
Quick Facts:
- गुरुत्वाकर्षण बल केंद्र की ओर (अभिकेन्द्रीय) होता है, जो ग्रहों को सूर्य के चारों ओर वृत्ताकार/दीर्घवृत्तीय कक्षा में रखता है।
बल (F) ‘d’ के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती है, यदि ‘d’ में 4 के गुणनखंड को बढ़ा दिया जाता है, तो F ___ गुना छोटा हो जाता है।
- 1/16
- 1/6
- 1/8
- 1/4
Equation: F ∝ 1/d² → d को 4 गुना → F, 1/16 गुना
Explanation:
- यह ‘व्युत्क्रम वर्ग नियम’ (inverse square law) है: F ∝ 1/d²
- यदि d → 4d, तो F’ ∝ 1/(4d)² = 1/(16d²) = (1/16) × (1/d²)
- अतः F, 1/16 गुना (छोटा) हो जाता है।
Quick Facts:
- यह नियम गुरुत्वाकर्षण, कूलॉम बल (स्थिरवैद्युत), और प्रकाश की तीव्रता पर लागू होता है।
- यदि दूरी दोगुनी हो, तो बल 1/4; यदि तिगुनी, तो 1/9; आदि।
गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक का चिह्न ___ है।
- G
- g
- CG
- Cg
Explanation:
- सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक (Universal Gravitational Constant) को बड़े अक्षर ‘G’ से दर्शाया जाता है।
- छोटा ‘g’ = गुरुत्वीय त्वरण (acceleration due to gravity) है, जो पृथ्वी की सतह पर 9.8 m/s² है।
- CG/Cg → मानक प्रतीक नहीं हैं।
Quick Facts:
- G = 6.674 × 10⁻¹¹ N·m²/kg² (पूरे ब्रह्मांड में स्थिर)
- g = GM/R² (स्थान-विशिष्ट, पृथ्वी पर 9.8)
किसी भी स्वतंत्र रूप से लटकी वस्तु के गुरुत्वाकर्षण का केंद्र कहां होता है?
- सीधे निलंबन के बिंदु के नीचे
- वस्तु के केंद्र से ठीक नीचे
- जमीन पर
- वस्तु के केंद्र में
Explanation:
- एक स्वतंत्र रूप से लटकी (freely suspended) वस्तु के लिए, गुरुत्वाकर्षण का केंद्र (center of gravity, CG) सीधे निलंबन बिंदु (point of suspension) के लंबवत नीचे (vertical below) होता है, ताकि गुरुत्वाकर्षण बल और निलंबन बल एक ही ऊर्ध्वाधर रेखा में हों (संतुलन के लिए)।
- यदि ऐसा न होता, तो वस्तु पर बलयुग्म (couple) कार्य करता और वह घूमती/झुकती रहती।
Quick Facts:
- निलंबन बिंदु के नीचे CG की यह स्थिति ‘स्थायी संतुलन’ (stable equilibrium) की स्थिति है।
- उदाहरण: लटकता हुआ पेंडुलम (bob) – CG, पेंडुलम के निलंबन बिंदु के नीचे होता है।
एक शरीर का भार अधिकतम है:
- भूमध्य रेखा
- ध्रुव
- उपोष्णकटिबंध
- कटिबंध
Explanation:
- ध्रुवों (poles) पर g अधिकतम होता है (क्योंकि R न्यूनतम और अपकेन्द्री बल (centrifugal) शून्य), इसलिए भार (W = mg) अधिकतम होता है।
- भूमध्यरेखा (equator) पर g न्यूनतम (R अधिकतम, अपकेन्द्री बल अधिकतम), इसलिए भार न्यूनतम।
Quick Facts:
- ध्रुव पर भार ≈ भूमध्यरेखा की तुलना में 0.5% अधिक (लगभग 1/200 अंतर)।
- यह अंतर पृथ्वी के आकार (oblateness) और घूर्णन के कारण होता है।
दो वस्तुओं के बीच आकर्षण बल को ___ कहा जाता है।
- अभिकेंद्री बल
- विद्युत-चुंबकीय बल
- गुरुत्वाकर्षण बल
- अपकेंद्री बल
Explanation:
- किन्हीं दो वस्तुओं (द्रव्यमानों) के बीच आकर्षण बल को ‘गुरुत्वाकर्षण बल’ (gravitational force) कहते हैं, जो सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम द्वारा दिया जाता है।
- अभिकेन्द्री बल (centripetal) – केंद्र की ओर, विद्युत-चुंबकीय – आवेशों/चुंबकों के बीच, अपकेन्द्री – आभासी बल (बाहर की ओर) – इनमें से कोई भी दो पिंडों के बीच सार्वभौमिक आकर्षण नहीं है।
Quick Facts:
- गुरुत्वाकर्षण बल हमेशा आकर्षण (attractive) होता है, प्रतिकर्षण (repulsive) कभी नहीं (विद्युत चुम्बकीय बल की तरह)।
- यह प्रकृति के चार मूलभूत बलों (fundamental forces) में सबसे दुर्बल है।
जब कोई वस्तु भूमि के निकट स्वतंत्र रूप से गिरती है, तो उसकी गति की दिशा ___।
- समान रहती है
- लगातार परिवर्तित होती रहती है
- गुरुत्वाकर्षण के विपरीत हो जाती है
- क्षैतिज हो जाती है
Explanation:
- स्वतंत्र रूप से गिरती हुई (free fall) वस्तु पर केवल गुरुत्वाकर्षण बल नीचे की ओर (ऊर्ध्वाधर) कार्य करता है, इसलिए उसकी गति की दिशा समान (ऊर्ध्वाधर नीचे) रहती है (क्षैतिज दिशा में कोई बल नहीं है, इसलिए कोई परिवर्तन नहीं)।
- चाल (speed) बढ़ती है, पर दिशा (direction) नहीं बदलती (जब तक कि वायु प्रतिरोध या अन्य बल न हों)।
Quick Facts:
- यह एकसमान त्वरित (uniformly accelerated) सरल रेखीय गति है, जहाँ a = g = 9.8 m/s² (नीचे की ओर)।
- यदि वस्तु को प्रारंभिक क्षैतिज वेग से फेंका जाए, तो यह प्रक्षेप्य (projectile) गति करेगी (दिशा बदलेगी) – यहाँ ‘स्वतंत्र रूप से गिरना’ (बिना प्रारंभिक क्षैतिज वेग) का अर्थ है सीधा नीचे गिरना।
G का मान ___ ने ज्ञात किया था।
- जे.जे. थॉमसन
- डाल्टन
- हेनरी कैवेडिश
- न्यूटन
Explanation:
- सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक (G) का मान हेनरी कैवेडिश (Henry Cavendish) ने 1798 में ‘टॉर्शन बैलेंस’ (torsion balance) प्रयोग का उपयोग करके मापा था।
- न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण का नियम दिया, पर G का मान नहीं मापा (उन्होंने केवल अनुपातों का उपयोग किया)।
- कैवेडिश के प्रयोग को अक्सर ‘पृथ्वी का वजन करना’ (weighing the Earth) कहा जाता है।
Quick Facts:
- G = 6.674 × 10⁻¹¹ N·m²/kg² (कैवेडिश का मान आधुनिक मान के बहुत करीब था)
- कैवेडिश का प्रयोग: सीसा (lead) के गोलों के बीच आकर्षण बल मापकर G की गणना की गई।
किसी वस्तु पर कार्य करने वाले गुरुत्वाकर्षण बल को ___ के रूप में भी जाना जाता है।
- आवेग
- द्रव्यमान
- त्वरण
- वजन
Explanation:
- किसी वस्तु पर पृथ्वी (या किसी अन्य ग्रह) द्वारा लगाया गया गुरुत्वाकर्षण बल ही उस वस्तु का भार (Weight) है।
- भार = m × g, जहाँ g = उस स्थान का गुरुत्वीय त्वरण।
- आवेग (Impulse) = बल × समय (F·Δt), द्रव्यमान = m, त्वरण = a (गुरुत्वीय त्वरण भी एक प्रकार का त्वरण है, पर ‘गुरुत्वाकर्षण बल’ स्वयं भार है)।
Quick Facts:
- भार की SI इकाई: न्यूटन (N) – (kg·m/s²)
- द्रव्यमान (kg) और भार (N) में अंतर: द्रव्यमान पदार्थ की मात्रा है, भार बल है।
पृथ्वी का द्रव्यमान ___ है।
- 6 × 10⁻²³ किलोग्राम
- 6 × 10⁻²³ किलोग्राम
- 6 × 10⁻²⁴ किलोग्राम
- 6 × 10²⁴ किलोग्राम
Explanation:
- पृथ्वी का द्रव्यमान (M) ≈ 5.972 × 10²⁴ kg, जिसे सामान्यतः 6 × 10²⁴ kg के रूप में लिया जाता है।
- 10²⁴ = 1,000,000,000,000,000,000,000,000 (सेक्स्टिलियन) किलोग्राम
- अन्य विकल्प ऋणात्मक घातांक (10⁻²³/10⁻²⁴) के हैं, जो अत्यंत छोटे मान हैं (परमाणुओं के द्रव्यमान की तरह), इसलिए गलत हैं।
Quick Facts:
- पृथ्वी का द्रव्यमान = 5.97 × 10²⁴ kg
- पृथ्वी की त्रिज्या (R) ≈ 6.4 × 10⁶ m
पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
- यह वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर करता है।
- यह पृथ्वी के केन्द्र से दूरी पर निर्भर नहीं करता है।
- यह एक अपकेन्द्रीय बल होता है।
- यह पृथ्वी के केन्द्र से दूर कार्य करता है।
Explanation:
- गुरुत्वाकर्षण बल F = GMm/r² (M = पृथ्वी, m = वस्तु का द्रव्यमान) – यह वस्तु के द्रव्यमान (m) पर निर्भर करता है।
- यह पृथ्वी के केंद्र से दूरी (r) पर भी निर्भर करता है (F ∝ 1/r²), इसलिए दूसरा कथन गलत है।
- गुरुत्वाकर्षण बल अभिकेन्द्रीय (केंद्र की ओर) होता है, अपकेन्द्रीय नहीं।
- यह पृथ्वी के केंद्र की ओर कार्य करता है (केंद्र से दूर नहीं)।
Quick Facts:
- पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल = वस्तु का भार (mg), जो m पर निर्भर करता है, g पर नहीं (g स्थान-विशिष्ट है)।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन, गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम का सटीक वर्णन करता है?
- पिंडों के बीच की दूरी बढ़ने पर गुरुत्वाकर्षण बल बढ़ता है।
- गुरुत्वाकर्षण बल पिंडों के द्रव्यमानों के गुणनफल के साथ बढ़ता है और उनके बीच की दूरी के वर्ग के साथ घटता है।
- पिंडों के द्रव्यमान बढ़ने पर गुरुत्वाकर्षण बल घटता है।
- गुरुत्वाकर्षण बल केवल पिंडों के बीच की दूरी पर निर्भर करता है, उनके द्रव्यमानों पर नहीं।
Explanation:
- न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम: F = G × (M₁ × M₂) / r²
- बल (F) ∝ M₁ × M₂ (द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती)
- बल (F) ∝ 1/r² (दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती)
- अतः विकल्प B सटीक है।
Quick Facts:
- यदि दूरी दोगुनी कर दी जाए, तो बल 1/4 हो जाता है (यदि द्रव्यमान स्थिर हों)।
- यदि किसी एक द्रव्यमान को दोगुना कर दिया जाए, तो बल दोगुना हो जाता है (यदि दूरी स्थिर हो)।
यदि 10 kg की वस्तु पर शुद्ध बल शून्य है, तो उसका त्वरण ……………….. होगा।
- 9.8 m/s²
- 0 m/s²
- इसके वेग पर निर्भर करता है
- 10 m/s²
Explanation:
- न्यूटन का द्वितीय नियम: F_net = ma
- यदि F_net = 0, तो 0 = m × a ⇒ a = 0 m/s² (क्योंकि m ≠ 0)
- इसका अर्थ है कि वस्तु या तो विराम में होगी या एकसमान वेग से गतिमान होगी (पहला नियम)।
Quick Facts:
- त्वरण (a) = 0, पर वेग (v) स्थिर हो सकता है (नियत) या शून्य (विराम)।
- यह न्यूटन के पहले नियम (जड़त्व) पर आधारित है।
एक अमेरिकी अंतरिक्ष यान “पाथफाइंडर”, 1997 में ______ ग्रह पर उतरा।
- चंद्रमा
- शुक्र
- मंगल
- बृहस्पति
Explanation:
- NASA का ‘मार्स पाथफाइंडर’ (Mars Pathfinder) अंतरिक्ष यान 4 जुलाई 1997 को मंगल (Mars) ग्रह पर उतरा था।
- इसने ‘सोजर्नर’ (Sojourner) रोवर को मंगल की सतह पर उतारा, जो मंगल की सतह पर चलने वाला पहला रोबोटिक रोवर था।
Quick Facts:
- मंगल पृथ्वी के सबसे निकट के ग्रहों में से एक है, और इसे ‘लाल ग्रह’ (Red Planet) भी कहते हैं।
- पाथफाइंडर ने मंगल की सतह की तस्वीरें और मिट्टी के विश्लेषण के आंकड़े भेजे।
एक दूसरे से d दूरी पर स्थित, M और m द्रव्यमान वाले दो पिंडों के बीच लगने वाले आकर्षण बल (F) का सूत्र क्या है, जहाँ G आनुपातिकता का स्थिरांक है, जिसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहा जाता है?
- F = G(M × m)/d
- F = G(M × m)/d²
- F = G × d²/M × m
- F = G × d/M × m
Explanation:
- न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम: F = G × (M × m) / d²
- यहाँ G = 6.674 × 10⁻¹¹ N·m²/kg²
- अन्य विकल्प (d या d² के उलटे) गलत हैं।
Quick Facts:
- दूरी d को वस्तुओं के द्रव्यमान केंद्रों (center of mass) के बीच मापा जाता है।
- यह नियम बिंदु द्रव्यमानों (point masses) के लिए सटीक है, तथा गोलीय पिंडों के लिए भी (उनके केंद्रों के बीच की दूरी का उपयोग करके)।
दो वस्तुओं के बीच गुरुत्वाकर्षण बल:
- वस्तुओं के द्रव्यमान और उनके बीच की दूरी पर निर्भर करता है
- केवल वस्तुओं के बीच की दूरी पर निर्भर करता है
- न तो वस्तुओं के द्रव्यमान पर और न ही उनके बीच की दूरी पर निर्भर करता है
- केवल वस्तुओं के द्रव्यमान पर निर्भर करता है
Explanation:
- गुरुत्वाकर्षण बल F = G × (M₁ × M₂) / r²
- यह स्पष्ट रूप से दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान (M₁, M₂) और उनके बीच की दूरी (r) पर निर्भर करता है।
- यदि दूरी शून्य नहीं है, तो बल सदैव परिमित होता है (परंतु अत्यंत दुर्बल)।
Quick Facts:
- यह व्युत्क्रम वर्ग नियम (inverse square law) है – जो दूरी पर निर्भरता को दर्शाता है।
- यह द्रव्यमानों के गुणनफल (product) पर निर्भर करता है, योग (sum) पर नहीं।
निम्नलिखित कथनों को पढ़ें:
- A. यदि पृथ्वी के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक का मान Ge हो तो चन्द्रमा के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक का मान Gm है, तब Ge = Gm
- B. दो वस्तुओं के बीच बल एक चौथाई होगा, यदि दोनों वस्तुओं का द्रव्यमान दोगुना हो जाए।
- C. यदि पृथ्वी पर सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक का मान Ge हो और चन्द्रमा पर सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक का मान Gm हो तो Ge > Gm
- D. सभी जगहों पर गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण का मान दोगुना हो जाता है। इनमें से कौन सा कथन सही है?
- B, C और D
- केवल A
- A, B और C
- A, C और D
Explanation:
- कथन A: सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक (G) एक सार्वत्रिक (universal) स्थिरांक है – इसका मान पूरे ब्रह्मांड में समान होता है। अतः Ge = Gm (सत्य)।
- कथन B: F ∝ M₁ × M₂, यदि दोनों द्रव्यमान दोगुने हो जाएँ, तो F 4 गुना हो जाता है (1/4 नहीं) – असत्य।
- कथन C: G का मान स्थान पर निर्भर नहीं करता – Ge = Gm (Ge > Gm गलत है) – असत्य।
- कथन D: g का मान स्थान के अनुसार बदलता है (ध्रुव/भूमध्यरेखा, ऊँचाई), पर ‘सभी जगहों पर दोगुना’ – असत्य।
Quick Facts:
- G = 6.674 × 10⁻¹¹ N·m²/kg² (स्थिर, सर्वत्र समान)
- g = GM/R² (स्थान-विशिष्ट, G स्थिर, M और R स्थान के अनुसार बदलते हैं)
निम्नलिखित में से कौन सा बल प्रकृति में विद्युत चुंबकीय नहीं है?
- घर्षण बल
- डोरी का तनाव
- स्प्रिंग का विद्युत बल
- पिंड का भार
Explanation:
- घर्षण, डोरी का तनाव (tension), और स्प्रिंग का बल – ये सभी मूलतः अंतर-आण्विक विद्युत चुम्बकीय बलों (electromagnetic forces) के कारण होते हैं (परमाणुओं के बीच आकर्षण/प्रतिकर्षण)।
- पिंड का भार (Weight) – यह गुरुत्वाकर्षण बल है, विद्युत चुम्बकीय नहीं।
Quick Facts:
- प्रकृति के चार मूलभूत बल: गुरुत्वाकर्षण, विद्युत चुम्बकीय, प्रबल नाभिकीय, दुर्बल नाभिकीय
- भार = गुरुत्वाकर्षण बल (mg), न कि विद्युत चुम्बकीय।
एक तारे की आभासी स्थिति थोड़ी-थोड़ी बदलती रहती है क्योंकि:
- तारे पृथ्वी की सतह के बहुत करीब हैं
- वायुमंडल की विभिन्न परतों का घनत्व समान है
- वायुमंडल की विभिन्न परतों का घनत्व अलग-अलग है
- तारे का अपना प्रकाश नहीं होता है
Explanation:
- तारों का टिमटिमाना (twinkling) और आभासी स्थिति में परिवर्तन वायुमंडलीय अपवर्तन (atmospheric refraction) के कारण होता है, क्योंकि वायुमंडल की विभिन्न परतों के घनत्व (और इस प्रकार अपवर्तनांक) अलग-अलग होते हैं।
- इससे तारे से आने वाला प्रकाश झुकता/मुड़ता है, और हमें तारा थोड़ा हिलता हुआ दिखता है।
Quick Facts:
- तारे टिमटिमाते हैं (point sources), पर ग्रह नहीं (विस्तृत स्रोत) – क्योंकि ग्रहों का कोणीय व्यास अधिक होता है, जिससे औसत प्रभाव स्थिर होता है।
- यही कारण है कि सूर्योदय से पहले सूर्य की आभासी स्थिति वास्तविक से ऊपर दिखती है (अपवर्तन के कारण)।
6 kg द्रव्यमान की एक वस्तु ऊँचाई पर रखी गई है और इसमें 480 J की स्थितिज ऊर्जा है। जमीन के संबंध में वस्तु की ऊँचाई ज्ञात कीजिए। (g = 10 m/s²)
- 6 m
- 4 m
- 7 m
- 8 m
Equation: PE = mgh → 480 = 6 × 10 × h → h = 8 m
Explanation:
- स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) = m × g × h
- 480 = 6 × 10 × h ⇒ 480 = 60h ⇒ h = 480/60 = 8 m
Quick Facts:
- स्थितिज ऊर्जा की SI इकाई: जूल (J)
- यहाँ g = 10 m/s² (पृथ्वी की सतह पर लगभग)
एक कण को √0.8 vE की गति के साथ लंबवत रूप से ऊपर की ओर छोड़ा जाता है, जहाँ vE पलायन वेग है। यदि पृथ्वी की त्रिज्या R है, तो कण द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई होगी।
- 2R
- 3R
- 4R
- R
Explanation:
- पलायन वेग (escape velocity) vₑ = √(2GM/R)
- ऊर्जा संरक्षण (Energy conservation) से: (1/2)mv² – GMm/R = –GMm/(R+h) (पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र में)
- यहाँ v = √(0.8) vₑ = √(0.8) × √(2GM/R) = √(1.6 GM/R)
- हल करने पर, h = 4R (मानक परिणाम – इस प्रकार की समस्या के लिए)।
Quick Facts:
- पलायन वेग vₑ = √(2gR) ≈ 11.2 km/s (पृथ्वी के लिए)
- यदि v = vₑ, तो h = ∞ (अनंत – पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बच जाता है)।
वनस्पतीत धन भूगुरुत्वाकर्षण हालचालीसाठी खालीलपैकी कोणते कारणीभूत असते?
- गुरुत्वाकर्षण
- प्रकाश
- रासायनिक
- पाणी
Explanation:
- पौधों में जड़ों का नीचे की ओर (धनात्मक भूगुरुत्वाकर्षण) और तनों का ऊपर की ओर (ऋणात्मक भूगुरुत्वाकर्षण) बढ़ना गुरुत्वाकर्षण (geotropism/gravitropism) के कारण होता है।
- यह एक विकासात्मक अनुक्रिया है, जो ऑक्सिन (auxin) हार्मोन के असमान वितरण के कारण होती है।
Quick Facts:
- धनात्मक भूगुरुत्वाकर्षण: जड़ें (नीचे), ऋणात्मक: तना (ऊपर)
- प्रकाशानुवर्तन (phototropism) – प्रकाश के प्रति, जलानुवर्तन (hydrotropism) – जल के प्रति, रसायनानुवर्तन (chemotropism) – रसायनों के प्रति।
एक वस्तु का द्रव्यमान 10 किलोग्राम है। पृथ्वी पर इसका भार क्या होगा? (g = 10 m/s²)
- 100 पास्कल
- 100 न्यूटन
- 100 किलोग्राम
- 100 वाट
Equation: Weight = mg = 10 × 10 = 100 N
Explanation:
- भार (Weight) = द्रव्यमान (m) × गुरुत्वीय त्वरण (g) = 10 × 10 = 100 N
- पास्कल (Pa) → दाब की इकाई, किलोग्राम (kg) → द्रव्यमान, वाट (W) → शक्ति (power) – ये भार के लिए गलत हैं।
Quick Facts:
- 1 N = 1 kg·m/s²
- यदि g = 9.8 m/s² होता, तो भार = 10 × 9.8 = 98 N (लगभग 100 N)।
एक दंड चुंबक के अंदर, चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा किस और से होती है?
- हमेशा दक्षिणी ध्रुव के लंबवत
- उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर
- दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर
- हमेशा उत्तरी ध्रुव के लंबवत
Explanation:
- चुंबक के बाहर, चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ उत्तरी ध्रुव (N) से दक्षिणी ध्रुव (S) की ओर जाती हैं।
- चुंबक के अंदर, क्षेत्र रेखाएँ दक्षिणी ध्रुव (S) से उत्तरी ध्रुव (N) की ओर जाती हैं (ताकि वे बंद लूप (closed loops) बना सकें)।
Quick Facts:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ सदैव बंद (continuous) होती हैं (विद्युत क्षेत्र रेखाओं के विपरीत, जो आवेशों पर शुरू/समाप्त होती हैं)।
- बाहर: N → S, अंदर: S → N
किसी वस्तु के द्रव्यमान के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
- यह स्थान-स्थान पर बदलता रहता है।
- यह गुरुत्वाकर्षण पर निर्भर करता है।
- यह ध्रुव पर बढ़ता है।
- यह समान रहता है वस्तु चाहे कहीं भी हो।
Explanation:
- द्रव्यमान (Mass) पदार्थ की मात्रा है, जो स्थान पर निर्भर नहीं करता।
- यह गुरुत्वाकर्षण (g) पर निर्भर नहीं करता, केवल भार (Weight) करता है।
- द्रव्यमान पृथ्वी, चंद्रमा, अंतरिक्ष – सर्वत्र समान रहता है।
Quick Facts:
- द्रव्यमान = अदिश (scalar), भार = सदिश (vector, क्योंकि g की दिशा होती है)।
- द्रव्यमान kg में, भार N में मापा जाता है।
गलत कथन/कथनों का चयन करें।
- A. ‘g’ का मान आसपास के कुछ अन्य पिंडों पर निर्भर करता है।
- B. M₁ तथा M₂ दो द्रव्यमान हैं जिन्हें पृथ्वी और चन्द्रमा पर एक दूरी R पर रखा जाता है, इनके मध्य गुरूत्वाकर्षण बल का अनुपात 1 : 6 होगा।
- C. G की SI इकाई N m²/kg² है।
- केवल B
- केवल A
- केवल C
- A और C
Explanation:
- कथन A: g का मान M (पृथ्वी/ग्रह) और R (त्रिज्या) पर निर्भर करता है, आसपास के पिंडों पर नहीं (निकटता में अत्यंत दुर्बल प्रभाव को छोड़कर) – सामान्यतः g, M और R पर निर्भर करता है, आसपास के पिंडों पर नहीं। (A असत्य है?)
- कथन B: गुरुत्वाकर्षण बल F = GM₁M₂/R², यह स्थान (पृथ्वी/चंद्रमा) पर निर्भर नहीं करता (G, M₁, M₂, R समान रखने पर) – अतः अनुपात 1:1 होगा, 1:6 नहीं। (B असत्य है)
- कथन C: G की SI इकाई N·m²/kg² – सही है।
- अतः गलत कथन केवल B है (A भी संदिग्ध है, पर विकल्पों के अनुसार केवल B)।
Quick Facts:
- G की SI इकाई: N·m²/kg²
- गुरुत्वाकर्षण बल द्रव्यमानों और दूरी पर निर्भर करता है, स्थान पर नहीं – इसलिए B गलत है।
किसी पिण्ड का भार न्यूनतम कहाँ पर होता है?
- भूमध्य रेखा पर
- ध्रुवों पर
- उपोष्णकटिबंधों पर
- कटिबंधों पर
Explanation:
- पृथ्वी पर भार = mg, और g भूमध्यरेखा (equator) पर न्यूनतम होता है (R अधिकतम, अपकेन्द्री बल अधिकतम)।
- इसलिए भूमध्य रेखा पर भार न्यूनतम होता है।
Quick Facts:
- ध्रुव पर g ≈ 9.832, भूमध्यरेखा पर g ≈ 9.780 (अंतर ≈ 0.5%)
- यदि कोई व्यक्ति ध्रुव से भूमध्यरेखा पर जाता है, तो उसका भार लगभग 0.5% कम हो जाता है।
चंद्रमा पर किसी वस्तु का भार पृथ्वी पर उसके भार का कितना गुना है?
- 1/6 गुना
- 1/5 गुना
- 5 गुना
- 6 गुना
Explanation:
- चंद्रमा का द्रव्यमान ≈ 1/81 × पृथ्वी, त्रिज्या ≈ 1/3.7 × पृथ्वी
- g_moon = G × M_moon / R_moon² = (1/81) / (1/3.7)² × g_earth ≈ (1/6) × g_earth
- अतः चंद्रमा पर भार = पृथ्वी के भार का 1/6 (लगभग)।
Quick Facts:
- गणना: g_moon = g_earth / 6 (लगभग)
- यही कारण है कि चंद्रमा पर खगोलविदों का भार कम होता है, जिससे वे आसानी से कूद सकते हैं।
वह बल जिसके कारण ब्रह्मांड में प्रत्येक पिंड, प्रत्येक दूसरे पिंड को आकर्षित करता है:
- विद्युत चुम्बकीय बल
- गुरुत्वाकर्षण बल
- प्रतिकर्षण बल
- नाभिकीय बल
Explanation:
- ब्रह्मांड में प्रत्येक द्रव्यमान, हर दूसरे द्रव्यमान को आकर्षित करता है – यह गुरुत्वाकर्षण बल (gravitational force) है, जो सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम द्वारा वर्णित है।
- यह बल सदैव आकर्षण (attractive) होता है, प्रतिकर्षण (repulsive) नहीं।
Quick Facts:
- विद्युत चुम्बकीय बल: आवेशों के बीच (आकर्षण/प्रतिकर्षण)
- नाभिकीय बल: नाभिक के अंदर (प्रोटॉन/न्यूट्रॉन के बीच)
गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण का मान इस पर निर्भर नहीं करता है:
- गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक ‘G’
- पृथ्वी की त्रिज्या ‘R’
- गिरती वस्तु के द्रव्यमान ‘m’
- पृथ्वी का द्रव्यमान ‘M’
Explanation:
- g = GM/R² (पृथ्वी की सतह पर)
- यह G (सार्वत्रिक स्थिरांक), M (पृथ्वी का द्रव्यमान), और R (पृथ्वी की त्रिज्या) पर निर्भर करता है, पर गिरती वस्तु के द्रव्यमान (m) पर नहीं।
- यही कारण है कि सभी वस्तुएँ समान त्वरण (g) से गिरती हैं (वायु प्रतिरोध की अनुपस्थिति में)।
Quick Facts:
- गैलीलियो का प्रसिद्ध प्रयोग: दो अलग-अलग द्रव्यमान की वस्तुएँ एक साथ गिरती हैं (यदि वायु प्रतिरोध न हो)।
- g का मान स्थान पर निर्भर करता है (ध्रुव, भूमध्यरेखा, ऊँचाई), पर वस्तु के द्रव्यमान पर नहीं।
पौधे की ऊपर और नीचे की ओर वृद्धि निम्नलिखित में से किस अनुवर्तन के कारण होती है?
- भूगुरुत्वानुवर्तन
- प्रकाशानुवर्तन
- रसायनानुवर्तन
- जलानुवर्तन
Explanation:
- पौधों की ऊपर (तना) और नीचे (जड़) की ओर वृद्धि गुरुत्वाकर्षण के प्रति प्रतिक्रिया है, जिसे भूगुरुत्वानुवर्तन (Geotropism) या गुरुत्वानुवर्तन (Gravitropism) कहते हैं।
- जड़ें धनात्मक भूगुरुत्वानुवर्तन (नीचे) दिखाती हैं, तना ऋणात्मक (ऊपर)।
Quick Facts:
- प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) – प्रकाश के प्रति (सूर्य की ओर झुकना)
- जलानुवर्तन (Hydrotropism) – जल के प्रति (जड़ें जल की ओर)
- रसायनानुवर्तन (Chemotropism) – रासायनिक पदार्थों के प्रति (परागण में)
चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर सीधी रेखा के बजाय वक्रित पथ पर घूमता है क्योंकि ………………..।
- चंद्रमा में कोई जड़त्व नहीं है
- पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल अभिकेन्द्रीय बल प्रदान करता है
- सूर्य का प्रकाश चंद्रमा को धकेलता है
- चंद्रमा का द्रव्यमान बहुत बड़ा है
Explanation:
- चंद्रमा अपनी जड़त्वीय गति (inertia) के कारण सीधी रेखा में जाना चाहता है, पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल उसे पृथ्वी की ओर खींचता है (अभिकेन्द्रीय बल, centripetal force), जिससे उसका पथ वक्रित (गोलाकार/दीर्घवृत्तीय) हो जाता है।
- यह न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम और गति के पहले नियम का संयोजन है।
Quick Facts:
- चंद्रमा पर अभिकेन्द्रीय बल = पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल
- यही कारण है कि उपग्रह (satellites) भी पृथ्वी के चारों ओर घूमते हैं।
यदि पृथ्वी की सतह पर गिरती हुई वस्तु पर न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम को लागू करने पर, गुरूत्वीय त्वरण g = GM/R² द्वारा दिया जाता है, तो M किसके द्रव्यमान को निरूपित करता है।
- पृथ्वी
- गिरती हुई वस्तु
- चन्द्रमा
- सूर्य
Explanation:
- सूत्र g = GM/R² में, M = पृथ्वी का द्रव्यमान है, जो गुरुत्वाकर्षण बल उत्पन्न करती है।
- m (गिरती हुई वस्तु का द्रव्यमान) सूत्र में रद्द हो जाता है (क्योंकि F = mg और F = GMm/R², इसलिए g = GM/R²)।
Quick Facts:
- पृथ्वी का द्रव्यमान M = 6 × 10²⁴ kg
- यही सूत्र किसी भी ग्रह/आकाशीय पिंड के g की गणना के लिए उपयोग होता है (वहाँ M = उस पिंड का द्रव्यमान)।
पृथ्वी का द्रव्यमान ___ है।
- 6 × 10⁻²⁴ किग्रा
- 6 × 10⁻²³ किग्रा
- 6 × 10²³ किग्रा
- 6 × 10²⁴ किग्रा
Explanation:
- पृथ्वी का द्रव्यमान ≈ 5.972 × 10²⁴ kg, जिसे सामान्यतः 6 × 10²⁴ kg के रूप में लिया जाता है।
- 10²⁴ = 1,000,000,000,000,000,000,000,000 (सेक्स्टिलियन) किलोग्राम
Quick Facts:
- पृथ्वी का द्रव्यमान (M) = 5.97 × 10²⁴ kg
- G = 6.67 × 10⁻¹¹ N·m²/kg², R = 6.4 × 10⁶ m → g = GM/R² ≈ 9.8 m/s²
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- किसी दिए गए वस्तु का भार चाँद पर, पृथ्वी की तुलना में 6 गुना अधिक होता है
- किसी दिए गए वस्तु का भार पृथ्वी या चाँद पर मापने पर समान होता है
- किसी दिए गए वस्तु का भार पृथ्वी पर, चाँद की तुलना में 6 गुना अधिक होता है
- किसी दिए गए वस्तु का भार पृथ्वी पर, चाँद की तुलना में 2 गुना अधिक होता है
Explanation:
- चंद्रमा पर g = g_earth/6, इसलिए W_moon = m × (g/6) = W_earth/6
- अतः W_earth = 6 × W_moon, यानी पृथ्वी पर भार, चंद्रमा पर भार का 6 गुना है।
Quick Facts:
- यही कारण है कि एक व्यक्ति चंद्रमा पर अपने पृथ्वी के भार का केवल 1/6 भार महसूस करता है।
- द्रव्यमान दोनों स्थानों पर समान रहता है, केवल भार बदलता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन, द्रव्यमान और भार के बीच अंतर का सही वर्णन करता है?
- द्रव्यमान एक ग्रह से दूसरे ग्रह पर बदलता है, लेकिन भार एक समान रहता है।
- द्रव्यमान और भार दोनों ही स्थान के साथ बदलते हैं।
- द्रव्यमान हर जगह एक समान रहता है, लेकिन भार स्थान के साथ बदलता है।
- भार और द्रव्यमान दोनों ही हर जगह नियत रहते हैं।
Explanation:
- द्रव्यमान (Mass) पदार्थ की मात्रा है, जो स्थान पर निर्भर नहीं करता – सर्वत्र समान रहता है।
- भार (Weight) = m × g, जहाँ g (गुरुत्वीय त्वरण) स्थान पर निर्भर करता है (ग्रह, ऊँचाई, आदि) – इसलिए भार स्थान के साथ बदलता है।
Quick Facts:
- SI मात्रक: द्रव्यमान → kg, भार → N (न्यूटन)
- द्रव्यमान अदिश (scalar), भार सदिश (vector) (दिशा: गुरुत्वाकर्षण के केंद्र की ओर)।
निम्नलिखित में से कौन-सा, गुरुत्वाकर्षण के नियम द्वारा स्पष्ट नहीं किया गया है?
- पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमण करने वाले कृत्रिम उपग्रह
- दो आवेशित पिंडों के बीच स्थिरवैद्युत आकर्षण
- महासागरों में ज्वार-भाटा
- वर्षा की बूंदों का धरती पर गिरना
Explanation:
- गुरुत्वाकर्षण का नियम (Newton’s Law of Gravitation) केवल द्रव्यमानों (masses) के बीच बल की व्याख्या करता है।
- दो आवेशित पिंडों के बीच स्थिरवैद्युत आकर्षण/प्रतिकर्षण – यह ‘कूलॉम का नियम’ (Coulomb’s law) द्वारा स्पष्ट किया जाता है, गुरुत्वाकर्षण द्वारा नहीं।
- अन्य सभी विकल्प गुरुत्वाकर्षण से संबंधित हैं।
Quick Facts:
- गुरुत्वाकर्षण बल: F = Gm₁m₂/r² (द्रव्यमानों के बीच)
- स्थिरवैद्युत बल: F = kq₁q₂/r² (आवेशों के बीच) – दोनों समान रूप (व्युत्क्रम वर्ग नियम) के हैं, पर मूल रूप से भिन्न बल हैं।
सोनार एक उपकरण है जो वस्तुओं की दूरी, दिशा और गति को मापने के लिए अल्ट्रासोनिक तरंगों का उपयोग ___ करता है।
- जमीन पर
- पानी के अंदर
- हवा में
- अंतरिक्ष में
Explanation:
- SONAR (Sound Navigation and Ranging) एक उपकरण है जो पानी के अंदर (underwater) वस्तुओं (पनडुब्बी, मछलियाँ, समुद्र की तली) की दूरी, दिशा और गति मापने के लिए अल्ट्रासोनिक तरंगों (ultrasonic waves) का उपयोग करता है।
- यह ध्वनि तरंगों के परावर्तन (echo) के सिद्धांत पर कार्य करता है।
Quick Facts:
- SONAR का उपयोग नौसेना, समुद्र विज्ञान, मछली पकड़ने में होता है।
- इसी तरह, RADAR (Radio Detection and Ranging) रेडियो तरंगों का उपयोग हवा/अंतरिक्ष में करता है।
दो वस्तुओं के बीच के आकर्षण बल को ___ कहा जाता है।
- विद्युत् चुम्बकीय बल
- अपकेन्द्रीय बल
- गुरुत्वाकर्षण बल
- अभिकेन्द्रीय बल
Explanation:
- किन्हीं दो वस्तुओं (द्रव्यमानों) के बीच आकर्षण बल को ‘गुरुत्वाकर्षण बल’ (gravitational force) कहते हैं, जो सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम द्वारा दिया जाता है।
- यह सदैव आकर्षण (attractive) होता है।
Quick Facts:
- अभिकेन्द्रीय बल (centripetal) – केंद्र की ओर, अपकेन्द्रीय (centrifugal) – बाहर की ओर (आभासी), विद्युत चुम्बकीय – आवेशों के बीच।
पृथ्वी की सतह से m kg के एक उपग्रह को 2R की ऊँचाई पर एक गोलाकार कक्ष में प्रक्षेपित करने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा क्या होगी? पृथ्वी की त्रिज्या R है।
- 2mgR
- 3mgR
- ½mgR
- 5/6 mgR
Explanation:
- पृथ्वी की सतह पर उपग्रह की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (PE) = -GMm/R
- 2R (अर्थात r = R + 2R = 3R) ऊँचाई पर कक्षीय ऊर्जा (Total Energy) = -GMm/(2 × 3R) = -GMm/(6R)
- अभीष्ट ऊर्जा = कक्षीय ऊर्जा – सतह PE = [-GMm/(6R)] – [-GMm/R] = GMm/R – GMm/(6R) = 5GMm/(6R)
- चूँकि GM/R² = g ⇒ GM = gR², अतः ऊर्जा = 5mgR/6 (या 5/6 mgR)
Quick Facts:
- कक्षीय कुल ऊर्जा = -GMm/(2r) (r = कक्षा की त्रिज्या)
- पलायन ऊर्जा (escape energy) = GMm/R = mgR
जब एक रॉकेट को ऊपर की ओर प्रक्षेपित किया जाता है, तो उस पर लगने वाले बल ______ होते हैं।
- सभी दिशाओं में समान
- संतुलित
- केवल गुरुत्वाकर्षण
- असंतुलित
Explanation:
- रॉकेट को ऊपर की ओर प्रक्षेपित (launch) करने पर, उस पर लगने वाला शुद्ध बल (net force) शून्य नहीं होता (क्योंकि वह त्वरित होता है)।
- प्रणोदन बल (thrust) गुरुत्वाकर्षण बल से अधिक होता है, इसलिए बल असंतुलित (unbalanced) होते हैं, जिससे रॉकेट ऊपर उठता है।
Quick Facts:
- यदि बल संतुलित होते, तो रॉकेट स्थिर या एकसमान वेग से चलता (पहला नियम)।
- असंतुलित बल = ma (न्यूटन का द्वितीय नियम) – यहाँ त्वरण ऊपर की ओर।
किसी व्यक्ति का वास्तविक वजन उसके ___ द्वारा निर्धारित किया जाता है।
- द्रव्यमान और चौड़ाई
- द्रव्यमान
- द्रव्यमान और ऊंचाई
- द्रव्यमान और गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण
Explanation:
- भार (Weight) = द्रव्यमान (m) × गुरुत्वीय त्वरण (g) – अतः W = mg
- यह केवल m और g पर निर्भर करता है (चौड़ाई/ऊँचाई का भार पर कोई सीधा प्रभाव नहीं)।
Quick Facts:
- द्रव्यमान m = नियत (व्यक्ति का), g = स्थान-विशिष्ट (पृथ्वी पर 9.8)
- भार वास्तविक होता है, पर आभासी भार (apparent weight) गति (लिफ्ट) आदि से बदल सकता है।
किसी पिंड की स्थितिज ऊर्जा निम्नलिखित में से किस पर निर्भर करती है?
- चाल
- केवल द्रव्यमान
- केवल ऊँचाई
- द्रव्यमान और ऊँचाई दोनों
Explanation:
- गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (PE) = mgh, जहाँ m = द्रव्यमान, g = गुरुत्वीय त्वरण (स्थिर), h = ऊँचाई (जमीन के सापेक्ष)।
- अतः यह द्रव्यमान (m) और ऊँचाई (h) दोनों पर निर्भर करती है (g नियत है)।
- चाल (speed) गतिज ऊर्जा (KE) से संबंधित है, स्थितिज ऊर्जा से नहीं।
Quick Facts:
- स्थितिज ऊर्जा = mgh (पृथ्वी की सतह के निकट)
- यदि ऊँचाई बढ़ती है, तो PE बढ़ती है (ग्रहणशील वस्तु के लिए) और गतिज ऊर्जा घटती है (ऊर्जा संरक्षण)।
जब आप किसी वृक्ष को हिलाते हैं, तो फल ___ के कारण गिरते हैं।
- गति के जड़त्व
- केवल गुरुत्व
- वायु दाब
- गुरुत्व और विराम के जड़त्व
Explanation:
- जब वृक्ष को हिलाया जाता है (झटका दिया जाता है), तो वृक्ष की शाखाएँ गतिमान हो जाती हैं, पर फल अपने जड़त्व (inertia of rest) के कारण स्थिर रहना चाहते हैं।
- परिणामस्वरूप, वे शाखा से अलग हो जाते हैं और गुरुत्वाकर्षण (gravity) के कारण नीचे गिर जाते हैं।
- अतः दोनों कारक (जड़त्व + गुरुत्व) संयुक्त रूप से कार्य करते हैं।
Quick Facts:
- विराम जड़त्व (inertia of rest): वस्तु की विराम अवस्था में बने रहने की प्रवृत्ति।
- यह न्यूटन के पहले नियम (जड़त्व) का व्यावहारिक उदाहरण है।
ऐसा क्यों प्रतीत होता है कि सूर्य वास्तविकता से पहले उदय होता है और देर से अस्त होता है?
- क्योंकि सूर्य क्षितिज के पास तेजी से गति करता है
- सूर्य के प्रकाश पर चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के कारण
- वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण
- सूर्योदय और सूर्यास्त के दौरान पृथ्वी का घूर्णन धीमा हो जाने के कारण
Explanation:
- सूर्योदय (sunrise) से लगभग 2 मिनट पहले और सूर्यास्त (sunset) के लगभग 2 मिनट बाद सूर्य दिखाई देता है, क्योंकि वायुमंडल के कारण प्रकाश का अपवर्तन (atmospheric refraction) होता है, जिससे सूर्य की आभासी स्थिति (apparent position) वास्तविक स्थिति से ऊपर हो जाती है।
- यह अपवर्तन प्रकाश को पृथ्वी की ओर झुका देता है, जिससे सूर्य पहले दिखता और देर से अस्त होता है।
Quick Facts:
- वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण, दिन की लंबाई (day length) लगभग 4 मिनट अधिक हो जाती है (2 मिनट पहले उदय + 2 मिनट देर से अस्त)।
- यही कारण है कि चंद्रमा, तारे भी क्षितिज के पास ऊपर दिखते हैं।
चंद्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण का मान पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण के मान का कितने गुना होता है?
- 1/6
- 5
- 1/5
- 6
Explanation:
- चंद्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण (g_moon) ≈ 1.63 m/s² है, जबकि पृथ्वी पर g_earth ≈ 9.8 m/s² है।
- अतः g_moon = g_earth / 6 (लगभग)।
- यह चंद्रमा के कम द्रव्यमान (M_moon ≈ M_earth/81) और छोटी त्रिज्या (R_moon ≈ R_earth/3.7) के कारण है।
Quick Facts:
- g_moon ≈ 1.63 m/s² (पृथ्वी का 1/6)
- यही कारण है कि चंद्रमा पर वस्तुओं का भार पृथ्वी के भार का 1/6 होता है।
सही अर्थों में किसी वस्तु का मुक्त पतन केवल _____ होता है।
- समुद्र में
- वातावरण में
- हवा में
- निर्वात में
Explanation:
- मुक्त पतन (Free fall) का अर्थ है केवल गुरुत्वाकर्षण बल के अधीन गिरना, बिना किसी अन्य बल (जैसे वायु प्रतिरोध) के।
- निर्वात (vacuum) में कोई वायु प्रतिरोध नहीं होता, इसलिए सभी वस्तुएँ समान त्वरण (g) से गिरती हैं – यही सच्चा मुक्त पतन है।
- वायु/वातावरण में वायु प्रतिरोध के कारण, पूर्ण मुक्त पतन नहीं होता (विशेषकर हल्की वस्तुओं के लिए)।
Quick Facts:
- निर्वात में, एक पंख और एक सीसा का गोला एक साथ गिरते हैं (गैलीलियो का सिद्धांत)।
- वायु प्रतिरोध के कारण, सामान्य वातावरण में मुक्त पतन ‘आभासी’ (apparent) होता है।
द्रव्यमान M और त्रिज्या R वाले ग्रह की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण का व्यंजक क्या है?
- g = GR/M²
- g = GM/R²
- g = GM²/R
- g = R/GM²
Explanation:
- ग्रह की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण (g) = GM/R², जहाँ G = सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक, M = ग्रह का द्रव्यमान, R = ग्रह की त्रिज्या।
- यह सूत्र न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम और द्वितीय नियम (F = mg) को संयोजित करके प्राप्त होता है।
Quick Facts:
- पृथ्वी के लिए: M = 6 × 10²⁴ kg, R = 6.4 × 10⁶ m, G = 6.67 × 10⁻¹¹ Nm²/kg² ⇒ g ≈ 9.8 m/s²
- यह सूत्र किसी भी गोलीय पिंड (ग्रह, चंद्रमा, तारा) के लिए लागू होता है।
गुरुत्वीय त्वरण (g) की गणना करने का सूत्र क्या है, जहाँ G सार्वत्रिक गुरुत्वीय स्थिरांक है, M पृथ्वी का द्रव्यमान है, और R पृथ्वी की त्रिज्या है?
- g = GM²/R
- g = GM/R
- g = GR/M²
- g = GM/R²
Explanation:
- यह सूत्र g = GM/R² है (पुन: पुष्टि)।
- GM/R² = (G × M) / R² – यह सही विमीय रूप (M⁰L¹T⁻²) देता है।
Quick Facts:
- विमीय विश्लेषण: G = M⁻¹L³T⁻², M = M, R² = L² ⇒ GM/R² = (M⁻¹L³T⁻² × M)/L² = L T⁻² (त्वरण)
ट्रॉपिज्म से संबंधित गलत कथन का चयन कीजिए।
- रसायन आकर्षण – रसायन की ओर गति
- भू आकर्षण – पृथ्वी या गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव के जवाब में
- प्रकाश आकर्षण – जल की ओर गति
- जल आकर्षण – जल की ओर गति
Explanation:
- प्रकाश आकर्षण (Phototropism) = प्रकाश की ओर गति/वृद्धि, जल की ओर नहीं।
- जल की ओर गति = जलानुवर्तन (Hydrotropism)।
- रसायनानुवर्तन (Chemotropism) = रसायन की ओर, भू-अनुवर्तन (Geotropism) = गुरुत्वाकर्षण की ओर।
Quick Facts:
- ट्रॉपिज्म (Tropism) = पौधों की बाह्य उत्तेजना (प्रकाश, गुरुत्व, जल, स्पर्श) के प्रति वृद्धि अनुक्रिया।
- प्रकाशानुवर्तन: सूर्य की ओर झुकना (तना), भू-अनुवर्तन: जड़ों का नीचे बढ़ना।
एक उपग्रह और पृथ्वी के बीच आकर्षण का गुरुत्वाकर्षण बल _____ को जन्म देता है।
- तनाव
- तलीय बल
- अभिकेंद्र बल
- अपकेंद्री बल
Explanation:
- उपग्रह (satellite) वृत्ताकार/दीर्घवृत्तीय कक्षा में घूमता है, जिसके लिए उसे केंद्र (पृथ्वी) की ओर एक बल की आवश्यकता होती है – यह अभिकेंद्र बल (centripetal force) है।
- यह अभिकेंद्र बल पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा प्रदान किया जाता है (F_gravity = F_centripetal)।
- अपकेंद्री बल (centrifugal) एक आभासी बल है, जो घूर्णी तंत्र में महसूस होता है।
Quick Facts:
- अभिकेंद्र बल = mv²/r (केंद्र की ओर)
- गुरुत्वाकर्षण बल = GMm/r² (पृथ्वी की ओर) – दोनों बराबर होते हैं, इसलिए उपग्रह कक्षा में रहता है।
यदि दो कणों के बीच की दूरी बढ़ जाती है तो उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल का प्रभाव ___।
- बढ़ जाता है
- कम हो जाता है
- सूचन हो जाता है
- समान रहता है
Explanation:
- गुरुत्वाकर्षण बल F = G × (M₁M₂) / r², अतः F ∝ 1/r²
- जैसे-जैसे दूरी (r) बढ़ती है, बल कम होता है (व्युत्क्रम वर्ग नियम)।
Quick Facts:
- यदि दूरी दोगुनी हो, तो बल 1/4 (चौथाई) हो जाता है।
- यदि दूरी तिगुनी हो, तो बल 1/9 (नौवां) हो जाता है।
एक ट्रक एक चट्टान से गिर जाता है और 0.8 s में जमीन पर पहुँचता है। वह चट्टान जमीन से कितनी ऊँची है? (g = 10 m/s²)
- 0.32 m
- 320 m
- 3.2 m
- 32 m
Equation: h = ½gt² = ½ × 10 × (0.8)² = 3.2 m
Explanation:
- प्रारंभिक वेग u = 0 (विराम से गिरना), त्वरण a = g = 10 m/s², समय t = 0.8 s
- दूरी (ऊँचाई) s = ut + ½gt² = 0 + ½ × 10 × (0.8)² = 3.2 m
Quick Facts:
- यह गति के दूसरे समीकरण (s = ut + ½at²) का अनुप्रयोग है।
- गिरने का समय ऊँचाई के वर्गमूल के समानुपाती होता है (t ∝ √h)।
एक वस्तु का भार, पृथ्वी पर 6000 N है। चाँद की सतह पर उसका भार क्या होगा?
- 3600 N
- 3600 kg
- 100 N
- 1000 N
Equation: Weight on moon = Weight on earth / 6 = 6000/6 = 1000 N
Explanation:
- चंद्रमा पर g = g_earth/6, अतः भार (W = mg) भी 1/6 हो जाता है।
- W_moon = W_earth / 6 = 6000 / 6 = 1000 N
Quick Facts:
- द्रव्यमान स्थिर रहेगा (m = W/g = 6000/9.8 ≈ 612 kg)
- चंद्रमा पर भार 1000 N, पर द्रव्यमान 612 kg (kg में नहीं बदलेगा)।
450 N के वजन वाली किसी लड़की का द्रव्यमान कितना होगा?
- 450 किलो
- 4.5 किलो
- 459 किलो
- 45.9 किलो
Equation: m = W/g = 450/9.8 ≈ 45.9 kg
Explanation:
- भार W = mg, इसलिए m = W/g = 450 / 9.8 ≈ 45.9 kg
Quick Facts:
- g = 9.8 m/s² (पृथ्वी की सतह पर)
- यदि g = 10 लें, तो m = 45 kg (लगभग)
चंद्रमा पर किसी वस्तु का भार पृथ्वी पर उसके भार की तुलना में कैसा होता है?
- यह पृथ्वी पर इसके भार का छठा भाग होता है।
- यह पृथ्वी पर इसके भार का छह गुना होता है।
- यह पृथ्वी पर इसके भार का एक तिहाई होता है।
- यह पृथ्वी पर भी वैसा ही होता है।
Explanation:
- चंद्रमा पर g = g_earth/6, इसलिए W_moon = (m × g_earth)/6 = W_earth/6
- अतः यह पृथ्वी के भार का छठा भाग (1/6) होता है।
Quick Facts:
- यही कारण है कि चंद्रमा पर खगोलविद ‘हल्के’ महसूस करते हैं और आसानी से कूद सकते हैं।
- द्रव्यमान समान रहता है, केवल भार बदलता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा गुरुत्वाकर्षण का उदाहरण नहीं है?
- ग्रहों के परिमंडलों को उनसे अलग होने से रोकने में सहायक है।
- यह कृष्ण विवर (ब्लैक होल) के घूर्णन में सहायक है।
- तारों को आपस में जोड़े रखता है।
- चाँद का उसकी कक्षा में स्थित होना।
Explanation:
- गुरुत्वाकर्षण बल आकाशीय पिंडों (ग्रह, तारे, चंद्रमा) को उनकी कक्षाओं में बनाए रखता है (विकल्प A, C, D सही हैं)।
- ब्लैक होल का घूर्णन (rotation) गुरुत्वाकर्षण का परिणाम नहीं है; यह उसके कोणीय संवेग (angular momentum) के कारण होता है (गुरुत्वाकर्षण बल तो उसे संकुचित (collapse) करता है, घूर्णन का कारण नहीं है)।
Quick Facts:
- ब्लैक होल का घूर्णन ‘कोणीय संवेग संरक्षण’ के कारण होता है (जब तारा संकुचित होता है, तो उसका घूर्णन बढ़ जाता है)।
- गुरुत्वाकर्षण बल हमेशा आकर्षक होता है, जो पिंडों को एक साथ रखता है।
आकाश में फेंका गया एक पत्थर वापस पृथ्वी पर क्यों गिरता है?
- वस्तु द्वारा किया गया कार्य उसे पृथ्वी की ओर खींचता है।
- इसमें एक अभिकेंद्र बल मौजूद होता है जो इसे पृथ्वी की ओर खींचता है।
- नीचे की ओर एक दाब होता है जो इसे पृथ्वी की ओर खींचता है।
- इसमें एक बल मौजूद होता है जो इसे पृथ्वी की ओर खींचता है।
Explanation:
- पत्थर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल (gravitational force) के कारण नीचे गिरता है, जो पृथ्वी द्वारा पत्थर पर लगाया जाता है (F = GMm/r²)।
- यह एक आकर्षण बल है, जो पृथ्वी के केंद्र की ओर कार्य करता है।
- अन्य विकल्प (कार्य, अभिकेंद्र बल, दाब) सही कारण नहीं हैं (अभिकेंद्र बल वृत्तीय गति में होता है, यहाँ सीधी गति है)।
Quick Facts:
- न्यूटन ने सेब को गिरते देखकर गुरुत्वाकर्षण के नियम की खोज की थी (प्रसिद्ध कथा, हालाँकि वास्तविकता कुछ और है)।
- गुरुत्वाकर्षण बल = mg (पृथ्वी की सतह पर, m = पत्थर का द्रव्यमान)।
पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय कारण त्वरण ………..द्वारा दिया जाता है।
- g = GM
- g = R²/GM
- g = GM/R²
- g = GM/R
Explanation:
- पृथ्वी की सतह पर g = GM/R² (सही सूत्र)।
Quick Facts:
- GM/R² = (6.67×10⁻¹¹ × 6×10²⁴) / (6.4×10⁶)² ≈ 9.8 m/s²
गुरुत्वाकर्षण का सार्वभौमिक नियम ______ पर लागू होता है।
- सूर्य और ग्रहों
- पृथ्वी और सूर्य
- पृथ्वी और चंद्रमा
- वस्तुओं के किसी भी युग्म पर
Explanation:
- न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम (Universal Law of Gravitation) ब्रह्मांड के किन्हीं भी दो द्रव्यमानों (any two bodies) के बीच लागू होता है, चाहे वे किसी भी आकार या दूरी के हों (हालाँकि दूरी अत्यधिक होने पर बल अत्यंत दुर्बल हो जाता है)।
- यह ‘सार्वत्रिक’ (universal) है – सभी पिंडों पर लागू होता है।
Quick Facts:
- यह नियम सूर्य-ग्रह, पृथ्वी-चंद्रमा, पृथ्वी-सेब, दो इमारतों, दो अणुओं – सभी पर लागू होता है।
- F = Gm₁m₂/r² – यह सभी वस्तुओं के लिए सत्य है।
पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण (g) का सूत्र ______ है।
- g = R²/GM
- g = GM/R²
- g = G/MR²
- g = GM/R
Explanation:
- पृथ्वी की सतह पर g = GM/R² (सही सूत्र)।
Quick Facts:
- यह सूत्र g = GM/R² (पृथ्वी के लिए) सार्वत्रिक नियम और F=mg से व्युत्पन्न है।
8 kg भार वाली लोहे की गेंद और 3 kg भार वाली एल्युमीनियम की गेंद 20 m की ऊँचाई से गिराई जाती है। भूमि से 10 m की ऊँचाई पर उनमें निम्नलिखित में से कौन सी राशि समान होगी?
- गतिज ऊर्जा
- त्वरण
- स्थितिज ऊर्जा
- संवेग
Explanation:
- गुरुत्वाकर्षण के अंतर्गत, सभी वस्तुओं पर त्वरण समान होता है (a = g = 9.8 m/s²), चाहे उनका द्रव्यमान कुछ भी हो (वायु प्रतिरोध की अनुपस्थिति में)।
- गतिज ऊर्जा (KE = ½mv²) द्रव्यमान पर निर्भर करती है (भिन्न), स्थितिज ऊर्जा (PE = mgh) द्रव्यमान पर, संवेग (p = mv) द्रव्यमान पर – ये सभी भिन्न होंगी।
- केवल त्वरण (acceleration) समान होगा (g)।
Quick Facts:
- गैलीलियो का नियम: सभी वस्तुएँ समान त्वरण से गिरती हैं (यदि वायु प्रतिरोध न हो)।
- त्वरण g स्थिर है (9.8 m/s²) पृथ्वी की सतह के निकट, द्रव्यमान पर निर्भर नहीं।
जब कोई वस्तु, पृथ्वी की ओर गिरती है, तो उसमें त्वरण किस कारण से होता है?
- पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल
- वायु प्रतिरोध
- घर्षण
- चुंबकीय बल
Explanation:
- पृथ्वी की ओर गिरती वस्तु पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल (gravitational force) नीचे की ओर कार्य करता है, जो उसमें त्वरण (g) उत्पन्न करता है।
- वायु प्रतिरोध/घर्षण गति का विरोध करते हैं (मंदन), और चुंबकीय बल यहाँ कार्य नहीं करता।
Quick Facts:
- F = mg (गुरुत्वाकर्षण बल) = m × a ⇒ a = g
- यह त्वरण पृथ्वी के केंद्र की ओर निर्देशित होता है।
बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार, किस कक्षा में इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर परिक्रमण कर सकते हैं?
- कुछ निश्चित वृत्तीय पथ जिन्हें विविक्त कक्षा कहा जाता है
- परिवर्ती ऊर्जा की दीर्घवृत्तीय कक्षाओं
- कोई भी स्वैच्छिक वृत्तीय पथ
- सतत ऊर्जा ह्रास करने वाले सर्पिल पथ
Explanation:
- बोहर का मॉडल (1913) – इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित वृत्तीय कक्षाओं (स्थिर कक्षाएँ/stationary orbits) में परिक्रमण करते हैं, जिन्हें विविक्त (discrete) कक्षाएँ (K, L, M, N…) कहते हैं।
- इन कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का विकिरण (radiation) नहीं करते (जब तक कि वे कक्षा न बदलें)।
- सोमरफेल्ड ने दीर्घवृत्तीय कक्षाएँ दीं, क्वांटम यांत्रिकी सर्पिल पथ नहीं देती (रदरफोर्ड मॉडल की सीमा थी कि इलेक्ट्रॉन सर्पिल पथ पर नाभिक में गिरते)।
Quick Facts:
- बोहर की कक्षाएँ: n = 1, 2, 3… (n = प्रमुख क्वांटम संख्या)
- कक्षा में ऊर्जा: Eₙ = -13.6/n² eV (हाइड्रोजन के लिए)।
निम्नलिखित में से कौन सा कथन दो वस्तुओं के बीच के गुरुत्वाकर्षण बल पर लागू होता है?
- दो वस्तुओं के बीच गुरुत्वाकर्षण बल उदासीन होता है।
- दो वस्तुओं के बीच का गुरुत्वाकर्षण बल विकर्षक या आकर्षक हो सकता है
- दो वस्तुओं के बीच गुरुत्वाकर्षण बल हमेशा आकर्षक होता है
- दो वस्तुओं के बीच गुरुत्वाकर्षण बल हमेशा विकर्षक होता है
Explanation:
- गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational force) सदैव आकर्षक (attractive) होता है, कभी प्रतिकर्षक (repulsive) नहीं (विद्युत चुम्बकीय बल की तरह नहीं, जो दोनों प्रकार का हो सकता है)।
- यह ब्रह्मांड के सभी द्रव्यमानों को एक-दूसरे की ओर खींचता है।
Quick Facts:
- गुरुत्वाकर्षण बल की दिशा हमेशा केंद्र (दूसरे पिंड) की ओर होती है।
- प्रतिकर्षण केवल विद्युत चुम्बकीय बल (समान आवेशों के बीच) और नाभिकीय बलों में होता है।
जब किसी पिंड को भूमध्य रेखा से उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर ले जाया जाता है तो उसका भार:
- समान ही रहता है
- दक्षिणी ध्रुव पर बढ़ता है और उत्तरी ध्रुव पर घटता है
- कम हो जाता है
- बढ़ता है
Explanation:
- ध्रुवों पर g अधिकतम होता है (R कम, अपकेन्द्री बल शून्य), इसलिए भार (W = mg) बढ़ता है जब भूमध्यरेखा से ध्रुवों पर ले जाया जाता है।
- भूमध्यरेखा पर g न्यूनतम होता है, इसलिए भार न्यूनतम होता है।
Quick Facts:
- भार में अंतर ≈ 0.5% (ध्रुव > भूमध्यरेखा)।
- यह पृथ्वी की आकृति (oblateness) और घूर्णन के कारण है।
वास्तविक अर्थों में, मुक्त पतन केवल इसमें होता है:
- समुद्र
- निर्वात
- वायु
- वायुमंडल
Explanation:
- मुक्त पतन (Free fall) = केवल गुरुत्वाकर्षण के अधीन गति – यह निर्वात (vacuum) में ही संभव है, क्योंकि वायु/वातावरण में वायु प्रतिरोध (air resistance) कार्य करता है।
Quick Facts:
- निर्वात में, सभी वस्तुएँ समान त्वरण (g) से गिरती हैं (चाहे द्रव्यमान कुछ भी हो)।
- यह गैलीलियो का सिद्धांत है, जिसे अपोलो 15 मिशन में चंद्रमा पर (जहाँ वायुमंडल नहीं) प्रदर्शित किया गया था।
चूंकि चंद्रमा का द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान से कम है, तो पृथ्वी पर किसी वस्तु के भार की तुलना में चंद्रमा पर उस वस्तु के भार के संबंध में क्या कहा जा सकता है?
- चंद्रमा पर शून्य
- चंद्रमा पर अधिक
- चंद्रमा पर कम
- दोनों पर एक समान
Explanation:
- चंद्रमा का द्रव्यमान कम है, इसलिए g_moon < g_earth, और भार W = mg, इसलिए चंद्रमा पर भार < पृथ्वी पर भार (कम)।
- यह शून्य नहीं है, पर कम है (लगभग 1/6)।
Quick Facts:
- चंद्रमा पर गुरुत्वीय बल कम है, इसलिए भार कम है – पर द्रव्यमान नहीं बदलता।
पृथ्वी पर किसी वस्तु का भार 60 N है। चंद्रमा पर इसका भार क्या होगा?
- 10 N
- 10 kg
- 60 kg
- 60 N
Explanation:
- W_moon = W_earth / 6 = 60 / 6 = 10 N
- kg भार की इकाई नहीं है (kg द्रव्यमान है), इसलिए 10 kg गलत है (हालाँकि द्रव्यमान ≈ 6.12 kg होगा)।
Quick Facts:
- चंद्रमा पर भार 10 N, द्रव्यमान ≈ 6.12 kg (W/g = 60/9.8)
दिए गए दो कथनों A और B में से कौन सा/से सत्य हैं?
- A. दो वस्तुओं के द्रव्यमान के गुणन के अनुक्रमानुपाती है
- B. दो वस्तुओं के बीच की दूरी के वर्ग के अनुक्रमानुपाती है
- केवल B सत्य है जबकि A असत्य है
- A और B दोनों असत्य है
- केवल A सत्य है जबकि B असत्य है
- A और B दोनों सत्य हैं
Explanation:
- गुरुत्वाकर्षण बल F = G × (M₁ × M₂) / r²
- A: F ∝ M₁ × M₂ (द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती) – सत्य
- B: F ∝ 1/r² (दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती), अनुक्रमानुपाती नहीं – असत्य
- अतः केवल A सत्य है, B असत्य।
Quick Facts:
- गुरुत्वाकर्षण बल द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती (directly proportional) और दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती (inversely proportional) होता है।
उस वस्तु का द्रव्यमान क्या है जिसका पृथ्वी पर भार 196 N (g = 9.8 ms⁻²) है?
- 19.6 किलो
- 1.96 किलो
- 20 किलो
- 2 किलो
Equation: m = W/g = 196/9.8 = 20 kg
Explanation:
- m = W/g = 196 / 9.8 = 20 kg
Quick Facts:
- 196 N = 20 kg × 9.8 m/s²
पृथ्वी पर किसी वस्तु का द्रव्यमान 10 किलो है। पृथ्वी पर इसका वजन कितना है?
- 10 न्यूटन
- 9.8 न्यूटन
- 98 न्यूटन
- 980 न्यूटन
Equation: W = mg = 10 × 9.8 = 98 N
Explanation:
- W = m × g = 10 × 9.8 = 98 N
Quick Facts:
- यदि g = 10 लें, तो W = 100 N (लगभग)
- सही मान 98 N है (g = 9.8 m/s² के साथ)
निम्नलिखित में से किस प्राकृतिक घटना को गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम द्वारा स्पष्ट नहीं किया जा सकता है?
- पृथ्वी के परितः चंद्रमा की परिक्रमा
- वृक्ष से सेब का गिरना
- समुद्र में ज्वार-भाटा
- चुम्बकों के बीच आकर्षण
Explanation:
- चुंबकों के बीच आकर्षण/प्रतिकर्षण चुंबकीय बल (magnetic force) है, जो विद्युत चुम्बकीय बल का एक रूप है, गुरुत्वाकर्षण नहीं।
- गुरुत्वाकर्षण केवल द्रव्यमानों (masses) के बीच कार्य करता है, आवेशों/चुंबकीय ध्रुवों के बीच नहीं।
Quick Facts:
- गुरुत्वाकर्षण: F = Gm₁m₂/r² (द्रव्यमानों के बीच)
- चुंबकीय बल: दो चुंबकीय ध्रुवों (N/S) के बीच – यह विद्युत चुम्बकीय बल का हिस्सा है।
जमीन के ऊपर किसी बिंदु पर किसी वस्तु की गुरुत्वाकर्षण क्षमता को में किए गए कार्य के रूप में परिभाषित किया जाता है।
- इसे केंद्र में रख रहे हैं
- उस पर गुरुत्वाकर्षण बल लगाना
- गुरुत्वाकर्षण के विपरीत इसे जमीन से उस बिंदु तक उठाना
- यह गुरुत्वाकर्षण के विपरीत जमीन पर खड़े होने की अनुमति देता है
Explanation:
- गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (gravitational potential energy) = किसी वस्तु को गुरुत्वाकर्षण के विपरीत (against gravity) जमीन से किसी ऊँचाई तक उठाने में किया गया कार्य।
- कार्य = बल × विस्थापन = mgh (यहाँ बल = mg, विस्थापन = h)।
- इसे गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध किए गए कार्य के रूप में परिभाषित किया जाता है।
Quick Facts:
- PE = mgh (गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा)
- यह ऊर्जा वस्तु की स्थिति (ऊँचाई) के कारण होती है।
एक ऐसे ग्रह पर विचार कीजिये जिसका द्रव्यमान और त्रिज्या पृथ्वी के द्रव्यमान और त्रिज्या का एक-तिहाई है। यदि पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण का मान g है, तो ग्रह पर इसका मान होगा।
- 9g
- 3g
- 1/9 g
- 1/3 g
Equation: g ∝ M/R² → g’ = (1/3)/(1/3)² × g = (1/3)/(1/9) × g = 3g
Explanation:
- ग्रह के लिए M’ = M/3, R’ = R/3
- g’ = G M’/R’² = G (M/3) / (R/3)² = (GM/3) / (R²/9) = (GM/R²) × (9/3) = 3g
- अतः g’ = 3g
Quick Facts:
- यदि द्रव्यमान और त्रिज्या दोनों 1/3 हो जाएँ, तो g 3 गुना बढ़ जाता है।
- सामान्य सूत्र: g’ = g × (M’/M) / (R’/R)²
कोन-सी परिघटना गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम द्वारा सफलतापूर्वक समझाई गई है, जो चंद्रमा और सूर्य दोनों द्वारा पृथ्वी पर प्रयुक्त संयुक्त और विभेदक गुरुत्वाकर्षण आकर्षण पर निर्भर करती है?
- अभिकेन्द्रीय बल पत्थर को वृत्ताकार पथ पर बनाए रखता है
- समुद्री ज्वार-भाटे का घटित होना
- ध्रुवों से भूमध्य रेखा तक g के मान में कमी
- सूर्य के चारों ओर ग्रहों की गति
Explanation:
- समुद्री ज्वार-भाटा (tides) चंद्रमा और सूर्य के संयुक्त गुरुत्वाकर्षण बल के कारण होता है (विशेषकर चंद्रमा, क्योंकि वह निकट है)।
- चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी पर अलग-अलग बिंदुओं पर भिन्न होता है, जिससे ज्वारीय बल (tidal force) उत्पन्न होता है।
- अन्य विकल्प: अभिकेन्द्रीय बल → गोलाकार गति (सामान्य), g में कमी → पृथ्वी के आकार/घूर्णन, ग्रहों की गति → केप्लर के नियम (गुरुत्वाकर्षण से संबंधित, पर संयुक्त/विभेदक आकर्षण नहीं)।
Quick Facts:
- ज्वार-भाटा दिन में दो बार (उच्च ज्वार और निम्न ज्वार) होता है, जो चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करता है।
- सूर्य भी प्रभाव डालता है (पूर्णिमा/अमावस्या पर स्प्रिंग टाइड)।
पृथ्वी और चंद्रमा के बीच गुरुत्वाकर्षण बल के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- जब चंद्रमा पृथ्वी से दूर होता है, तब गुरुत्वाकर्षण बल प्रतिकर्षी होता है।
- जब चंद्रमा पृथ्वी से दूर होता है, तब गुरुत्वाकर्षण बल प्रतिकर्षी और न्यूनतम होता है।
- जब चंद्रमा पृथ्वी के पास होता है, तब गुरुत्वाकर्षण बल आकर्षी और अधिकतम होता है।
- जब चंद्रमा पृथ्वी से दूर होता है, तब गुरुत्वाकर्षण बल आकर्षी और अधिकतम होता है।
Explanation:
- गुरुत्वाकर्षण बल F = G × (M_earth × M_moon) / r², इसलिए F ∝ 1/r²
- जब चंद्रमा पृथ्वी के पास होता है (r कम), तो बल अधिकतम होता है (और सदैव आकर्षक – attractive)।
- दूर होने पर बल कम होता है, पर आकर्षक ही रहता है (प्रतिकर्षी नहीं)।
Quick Facts:
- चंद्रमा की कक्षा दीर्घवृत्तीय है, इसलिए पेरिजी (निकटतम) पर बल अधिकतम, अपोजी (दूरतम) पर न्यूनतम।
गुरुत्वाकर्षण के नियम ने क्या सिद्ध करने में सहायता की?
- पृथ्वी पर गिरते पिंडों और ग्रहों की गति दोनों को एक ही बल नियंत्रित करता है
- पृथ्वी चपटी है
- गुरुत्वाकर्षण केवल पार्थिव वस्तुओं पर ही कार्य करता है
- सूर्य, पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमण करता है
Explanation:
- न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम ने यह सिद्ध किया कि पृथ्वी पर गिरने वाली वस्तुओं (जैसे सेब) और ग्रहों/चंद्रमा की गति को एक ही बल – गुरुत्वाकर्षण – नियंत्रित करता है।
- इसने पार्थिव (terrestrial) और आकाशीय (celestial) यांत्रिकी को एकीकृत किया।
Quick Facts:
- न्यूटन ने चंद्रमा की कक्षा की गणना की और पाया कि पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल ही चंद्रमा को वृत्ताकार पथ पर बनाए रखता है।
तारों में प्लाज्मा चरण के निर्माण के कारण होता है।
- बहुत कम तापमान
- बहुत अधिक तापमान
- उच्च गुरुत्वाकर्षण
- सूर्य दूरी
Explanation:
- प्लाज्मा (plasma) पदार्थ की चौथी अवस्था है, जो अत्यधिक उच्च तापमान पर बनती है, जहाँ इलेक्ट्रॉन परमाणुओं से अलग हो जाते हैं (आयनीकरण – ionization) और आयनों तथा मुक्त इलेक्ट्रॉनों का मिश्रण बनता है।
- तारों (सूर्य सहित) का तापमान बहुत अधिक होता है (कोर में लाखों डिग्री), इसलिए वे प्लाज्मा अवस्था में होते हैं।
Quick Facts:
- प्लाज्मा = आयनित गैस, जो विद्युत का चालन करती है।
- सूर्य का कोर ≈ 15 मिलियन K (प्लाज्मा) – नाभिकीय संलयन होता है।
अमावस्या के बाद, अगले चौदह दिनों में जब चंद्रमा मोटा और मोटा होता जाता है और पूर्ण, निकट-पूर्ण गोल चंद्रमा के रूप में दिखाई देता है, चंद्रमा का कौन सा चरण कहलाता है?
- चंद्रमा का वर्धमान चरण
- चंद्रमा का क्षीयमाण चरण
- चंद्रमा का घटता चरण
- चंद्रमा का लुप्त चरण
Explanation:
- अमावस्या (new moon) के बाद, चंद्रमा का प्रकाशित भाग बढ़ता है – इसे वर्धमान चरण (waxing phase) कहते हैं (अमावस्या → पूर्णिमा तक)।
- पूर्णिमा के बाद, प्रकाशित भाग घटता है – इसे क्षीयमाण (waning) कहते हैं।
- वर्धमान = बढ़ना, क्षीयमाण = घटना।
Quick Facts:
- चंद्रमा के चरण: अमावस्या → वर्धमान (शुक्ल पक्ष) → पूर्णिमा → क्षीयमाण (कृष्ण पक्ष) → अमावस्या (चक्र ≈ 29.5 दिन)।
किसी ग्रह की सतह और उसके 20 m ऊपर एक बिंदु के बीच गुरुत्वाकर्षण का विभव अंतर 16 J/kg है। क्षैतिज से 60° ढलान पर 2 kg द्रव्यमान को 8 m तक ले जाने में कितना कार्य होता है?
- 11.1 J
- 13.9 J
- 16 J
- 20 J
Equation: h = 8 × sin60° = 6.93 m, Work = mgh = 2 × (16/20) × 6.93 = 11.1 J
Explanation:
- विभव अंतर (potential difference) = 16 J/kg, जो 20 m ऊँचाई के लिए है, इसलिए g = 16/20 = 0.8 m/s² (ग्रह का g)।
- ऊर्ध्वाधर ऊँचाई (vertical height) = 8 × sin60° = 8 × 0.866 = 6.928 m
- कार्य (W) = m × g × h = 2 × 0.8 × 6.928 = 11.08 J ≈ 11.1 J
Quick Facts:
- गुरुत्वीय विभव अंतर = कार्य प्रति इकाई द्रव्यमान = gh
- यहाँ g = 0.8 m/s² (पृथ्वी से कम, क्योंकि विभव अंतर 20 m के लिए 16 J/kg है ⇒ g = 16/20 = 0.8)।
यदि पृथ्वी की त्रिज्या 1% कम हो जाए तो पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण (द्रव्यमान नियत रहने पर) क्या होगा?
- 1% बढ़ जाएगा।
- 1% घट जाएगा।
- 2% बढ़ जाएगा।
- 2% घट जाएगा।
Equation: g ∝ 1/R² → R में 1% कमी → g में 2% वृद्धि
Explanation:
- g = GM/R², M स्थिर ⇒ g ∝ 1/R²
- यदि R, 1% कम होता है (R’ = 0.99R), तो g’ = g / (0.99)² ≈ g × (1 + 0.02) = 1.02 g ⇒ 2% वृद्धि (लगभग)
- प्रतिशत परिवर्तन ≈ -2 × (ΔR/R) × 100% = 2% (क्योंकि R में कमी होने पर g बढ़ता है)।
Quick Facts:
- R में 1% कमी → g में 2% वृद्धि (क्योंकि g ∝ 1/R²)
- यदि R 1% बढ़े, तो g 2% घटेगा।
किसी वस्तु का द्रव्यमान उसके ______ का एक संख्यात्मक माप है।
- गुरुत्वाकर्षण
- वेग
- जड़त्व
- त्वरण
Explanation:
- द्रव्यमान (Mass) किसी वस्तु के जड़त्व (inertia) का माप है – अर्थात, वह गुण जो वस्तु की गति/विराम की स्थिति में परिवर्तन का विरोध करता है।
- अधिक द्रव्यमान = अधिक जड़त्व (गति में परिवर्तन का अधिक प्रतिरोध)।
Quick Facts:
- जड़त्व = न्यूटन का पहला नियम – बाह्य बल की अनुपस्थिति में वस्तु अपनी स्थिति बनाए रखती है।
- द्रव्यमान SI मात्रक kg है।
ब्रह्मांड में दो निकायों के बीच गुरुत्वाकर्षण का बल किस पर निर्भर नहीं करता है?
- उनके बीच की दूरी
- उनके द्रव्यमानों का योग
- गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक
- उनके द्रव्यमानों का गुणनफल
Explanation:
- F = G × (M₁ × M₂) / r² – इसमें द्रव्यमानों का गुणनफल (product) आता है, योग (sum) नहीं।
- यह दूरी (r), गुणनफल (M₁M₂), और G पर निर्भर करता है, पर M₁ + M₂ पर नहीं।
Quick Facts:
- यदि दोनों द्रव्यमान दोगुने हो जाएँ, तो गुणनफल 4 गुना, बल 4 गुना – योग से संबंधित नहीं।
निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प केप्लर के ग्रहों की गति के नियमों में से एक को दर्शाता नहीं है?
- सूर्य के चारों ओर सभी ग्रहों की कक्षाएँ समतलीय हैं।
- सूर्य के चारों ओर प्रत्येक ग्रह की कक्षा एक दीर्घवृत्त है जिसका एक नाभि पर सूर्य स्थित है।
- किसी ग्रह के कक्षीय आवर्तकाल का वर्ग उसकी कक्षा के अर्ध-प्रमुख अक्ष के घन के समानुपाती होता है।
- एक ग्रह और सूर्य को मिलाने वाला रेखाखंड समान समय अंतराल में समान क्षेत्रफल तय करता है।
Explanation:
- केप्लर के नियम (Kepler’s laws):
- 1. दीर्घवृत्तीय कक्षाएँ (सूर्य एक नाभि पर) – सत्य
- 2. क्षेत्रफल का नियम (समय में समान क्षेत्रफल) – सत्य
- 3. आवर्तकाल का नियम (T² ∝ a³) – सत्य
- सभी ग्रहों की कक्षाएँ समतलीय (coplanar) – यह केप्लर का नियम नहीं है; यह सौर मंडल की एक विशेषता है (लगभग समतलीय), पर नियम नहीं।
Quick Facts:
- केप्लर के नियम ग्रहों की गति के अनुभवजन्य (empirical) नियम हैं, जो न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम से व्युत्पन्न होते हैं।
पृथ्वी की सतह पर किसी वस्तु का भार 20 N है। चंद्रमा की सतह पर मापे जाने पर उसका भार क्या होगा?
- 2.01 N
- 3.33 N
- 3.33 N
- 4 N
Equation: Weight on moon = 20/6 ≈ 3.33 N
Explanation:
- W_moon = W_earth / 6 = 20 / 6 = 3.33 N
Quick Facts:
- 3.33 N ≈ 3.33 N (दशमलव के दो स्थान)।
एक वस्तु का द्रव्यमान दोगुना होने पर दो वस्तुओं के बीच गुरुत्वाकर्षण बल का क्या होगा?
- गुरुत्वाकर्षण का बल चार गुना हो जायेगा
- गुरुत्वाकर्षण बल दोगुना हो जायेगा
- गुरुत्वाकर्षण बल तीन गुना हो जायेगा
- गुरुत्वाकर्षण बल आधा हो जायेगा
Explanation:
- F = G × (M₁ × M₂) / r², इसलिए F ∝ M₁ × M₂
- यदि एक वस्तु का द्रव्यमान दोगुना (M₁ → 2M₁) हो जाता है (दूसरा स्थिर), तो F → 2F (दोगुना)।
- यदि दोनों द्रव्यमान दोगुने हो जाएँ, तो F → 4F।
Quick Facts:
- यहाँ ‘एक वस्तु का द्रव्यमान दोगुना’ – अतः बल दोगुना होगा।
निम्नलिखित में से कौन-सा चंद्रमा पर ध्वनि न सुन पाने का सही कारण है?
- चंद्रमा बहुत ठंडा है।
- चंद्रमा पृथ्वी से बहुत दूर है।
- चंद्रमा पर कोई वायुमंडल नहीं है।
- चंद्रमा पर गड्ढे हैं।
Explanation:
- ध्वनि (Sound) एक यांत्रिक तरंग है, जिसे संचरण के लिए एक माध्यम (medium) की आवश्यकता होती है (ठोस, द्रव, या गैस)।
- चंद्रमा पर वायुमंडल (atmosphere) नहीं है (लगभग निर्वात), इसलिए ध्वनि चंद्रमा पर नहीं सुनाई देती (ध्वनि को फैलने के लिए कोई माध्यम नहीं)।
Quick Facts:
- चंद्रमा पर, अंतरिक्ष यात्रियों को अपनी आवाज़ सुनने के लिए रेडियो/संचार उपकरणों का उपयोग करना पड़ता है (क्योंकि ध्वनि निर्वात में नहीं चलती)।
- ध्वनि की चाल माध्यम पर निर्भर करती है – निर्वात में 0 m/s।
इनमें से कौन गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण के मान को प्रभावित नहीं करता है?
- गहराई
- ऊँचाई
- पृथ्वी का आकार
- वस्तु का द्रव्यमान
Explanation:
- g = GM/R² (सतह पर) – यह पृथ्वी के द्रव्यमान (M), त्रिज्या (R) पर निर्भर करता है, और R ऊँचाई/गहराई/आकृति से प्रभावित होता है।
- g का मान वस्तु के द्रव्यमान (m) पर निर्भर नहीं करता है (सभी वस्तुओं के लिए समान है)।
- यह गैलीलियो का नियम है।
Quick Facts:
- g = GM/R², M = पृथ्वी का द्रव्यमान, R = पृथ्वी की त्रिज्या (या दूरी)
- ऊँचाई पर g घटता है (g’ = g (R/(R+h))²), गहराई पर g घटता है (g’ = g (1 – d/R)), आकृति से भी प्रभावित।
किसी पदार्थ में, द्रव्यमान होता है।
- उसमें उपस्थित पदार्थ की मात्रा
- उसके द्वारा घेरे गए स्थान की मात्रा
- उस पर कार्य करने वाला गुरुत्वाकर्षण बल
- उसके द्वारा विस्थापित पानी की मात्रा
Explanation:
- द्रव्यमान (Mass) = किसी पदार्थ में उपस्थित पदार्थ (matter) की मात्रा का माप है।
- आयतन (Volume) = घेरे गए स्थान की मात्रा।
- भार (Weight) = गुरुत्वाकर्षण बल, विस्थापित पानी = आर्किमिडीज सिद्धांत (उत्प्लावकता) – ये सभी द्रव्यमान नहीं हैं।
Quick Facts:
- द्रव्यमान अदिश (scalar) है, SI मात्रक kg है, और यह स्थान पर निर्भर नहीं करता।
‘g’ का मान ______ के साथ घटता है।
- द्रव्यमान
- आयाम
- वजन
- ऊंचाई
Explanation:
- g = GM/R² (जहाँ R = पृथ्वी के केंद्र से दूरी)
- पृथ्वी की सतह से ऊपर जाने पर, R बढ़ता है, इसलिए g घटता है।
- द्रव्यमान (m) का g पर कोई प्रभाव नहीं होता है।
Quick Facts:
- ऊँचाई h पर g = GM/(R+h)² = g₀ (R/(R+h))² (जहाँ g₀ = सतह पर g)
- यदि ऊँचाई बढ़ती है, g घटता है (व्युत्क्रम वर्ग नियम)
किसी वस्तु का द्रव्यमान 10 किलोग्राम है। पृथ्वी पर उस वस्तु का वजन कितना होगा? [g = 9.8 ms⁻²]
- -196 N
- 19.6 N
- 1960 N
- 98 N
Equation: W = mg = 10 × 9.8 = 98 N
Explanation:
- भार (Weight) = द्रव्यमान (m) × गुरुत्वीय त्वरण (g)
- W = 10 × 9.8 = 98 N (न्यूटन)
- भार की SI इकाई न्यूटन (N) है, न कि kg (जो द्रव्यमान है)।
Quick Facts:
- यदि g = 10 m/s² लें, तो W = 100 N (लगभग)
- 1 N = 1 kg·m/s²
गुरुत्वीय त्वरण ‘g’ ______ पर निर्भर नहीं करता है।
- पृथ्वी के द्रव्यमान M
- गिरने वाली वस्तु के द्रव्यमान m
- गुरुत्वीय स्थिरांक G
- पृथ्वी की त्रिज्या R
Explanation:
- g = GM/R² (सूत्र में वस्तु का द्रव्यमान m नहीं आता)
- इसलिए g, गिरने वाली वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है – यही कारण है कि सभी वस्तुएँ समान त्वरण से गिरती हैं (वायु प्रतिरोध की अनुपस्थिति में)।
Quick Facts:
- गैलीलियो का प्रसिद्ध प्रयोग: हल्की और भारी वस्तुएँ एक साथ गिरती हैं (यदि वायु प्रतिरोध न हो)।
- g का मान केवल ग्रह/आकाशीय पिंड (M, R) पर निर्भर करता है, वस्तु पर नहीं।
गुरुत्वीय बल ______ वस्तु के बीच उपस्थित होता है, परन्तु इसे तब तक महसूस नहीं होता है, जब तक कि वस्तुओं का द्रव्यमान बहुत अधिक, जैसे कि ग्रहों में नहीं होता है।
- चार
- प्रत्येक
- केवल दो
- केवल एक
Explanation:
- गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational force) प्रत्येक द्रव्यमान के बीच उपस्थित होता है (सार्वत्रिक नियम)।
- यह सदैव आकर्षण (attractive) होता है, पर यह बल अत्यंत दुर्बल होता है, इसलिए छोटे द्रव्यमानों के बीच इसे महसूस नहीं किया जाता (जब तक कि द्रव्यमान बहुत अधिक न हो, जैसे ग्रह)।
Quick Facts:
- दो व्यक्तियों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल ≈ 10⁻⁹ N (अत्यंत छोटा)
- पृथ्वी और व्यक्ति के बीच बल ≈ 700 N (स्पष्ट रूप से महसूस होता है)।
निम्न में से कौन सा कथन सत्य है?
- A. माउंट एवरेस्ट पर ‘g’ का मान > g है।
- B. माउंट एवरेस्ट पर ‘g’ का मान < g है।
- C. एक गेंद को लंबवत फेंकने पर 15 सेकंड के बाद जमीन पर वापस आती है। इसका वेग 75 m/s है।
- D. एक गेंद को लंबवत फेंकने पर 15 सेकंड के बाद जमीन पर वापस आती है। इसका वेग 150 m/s है।
- केवल कथन B और D सत्य हैं
- केवल कथन D सत्य है
- केवल कथन B और C सत्य हैं
- केवल कथन B सत्य है
Equation: u = gT/2 = 10 × 15/2 = 75 m/s (C गलत, D सही)
Explanation:
- कथन B: ऊँचाई (माउंट एवरेस्ट) पर g सतह की तुलना में कम होता है, अतः g < g₀ (सही)।
- कथन C & D: यदि गेंद 15 s में वापस आती है, तो उड़ान का कुल समय T = 15 s, अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचने का समय T/2 = 7.5 s
- प्रारंभिक वेग u = g × (T/2) = 10 × 7.5 = 75 m/s (यदि g = 10 m/s²), पर यह ‘वेग’ (u) है, न कि ‘अंतिम वेग’ (जो 0 होता है)।
- प्रश्न में ‘इसका वेग’ संभवतः ‘प्रारंभिक वेग’ है – C कहता है 75 m/s (सही है यदि g = 10), पर D कहता है 150 m/s (गलत है यदि g = 10) – विरोधाभास।
- यदि g = 10, u = 75 m/s, अतः C सही है, D गलत।
- लेकिन विकल्प के अनुसार ‘केवल B और D’ सही दिया है, जो संभवतः g = 20 m/s² (चंद्रमा/अन्य) के संदर्भ में है – यहाँ मानक g = 10 लेने पर B और C सही होंगे।
- प्रश्न में दिए गए विकल्प के अनुसार, D (150 m/s) सही माना गया है (अतः g = 20 m/s²) – यह संभवतः किसी अन्य ग्रह के लिए है।
Quick Facts:
- उड़ान का कुल समय T = 2u/g (ऊर्ध्वाधर प्रक्षेप्य के लिए)
- अधिकतम ऊँचाई H = u²/(2g)
वह बिंदु जहाँ किसी वस्तु का संपूर्ण भार कार्य करता है, उसे ______ के रूप में जाना जाता है।
- घर्षण का केंद्र
- क्षेत्र का केंद्र
- गुरुत्व का केंद्र
- दाब का केंद्र
Explanation:
- गुरुत्व का केंद्र (Center of Gravity, CG) वह बिंदु है जहाँ किसी वस्तु का कुल भार (net gravitational force) कार्य करता प्रतीत होता है।
- यह वह बिंदु है जहाँ वस्तु के सभी छोटे-छोटे भागों पर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बलों का परिणामी बल कार्य करता है।
Quick Facts:
- एक समान घनत्व वाली वस्तु के लिए, CG = द्रव्यमान केंद्र (Center of Mass, COM)
- यदि वस्तु को CG पर सहारा दिया जाए, तो वह संतुलन (balance) में रहेगी।
सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक G के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
- यह गुरुत्वीय त्वरण के बराबर होता है।
- यह दो द्रव्यमानों के बीच के माध्यम पर निर्भर करता है।
- यह एक सार्वभौमिक स्थिरांक है, जो हर जगह समान है।
- यह पृथ्वी पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर भिन्न होता है।
Explanation:
- G (सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक) एक सार्वभौमिक (universal) स्थिरांक है – इसका मान ब्रह्मांड में हर जगह, हर समय समान होता है।
- यह माध्यम पर निर्भर नहीं करता, न ही स्थान पर (g के विपरीत)।
- G ≠ g (g = 9.8 m/s², G = 6.67 × 10⁻¹¹ N·m²/kg²)।
Quick Facts:
- G = 6.674 × 10⁻¹¹ N·m²/kg²
- G एक मौलिक भौतिक स्थिरांक (fundamental constant) है।
G का मान ______ होता है।
- 6.673 × 10⁻¹¹ Nm⁻²kg²
- 6.673 × 10⁻¹¹ Nm²kg²
- 6.673 × 10⁻¹¹ Nm²kg⁻²
- 6.673 × 10⁻¹¹ Nm⁻²kg⁻²
Explanation:
- G (सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक) का SI मात्रक: N·m²/kg² (न्यूटन × मीटर² / किलोग्राम²)
- इसे N m² kg⁻² के रूप में लिखा जाता है (विकल्प C)
- अन्य विकल्पों में मात्रक गलत हैं (Nm⁻²kg², Nm²kg², Nm⁻²kg⁻²) – ये G के SI मात्रक नहीं हैं।
Quick Facts:
- G = 6.674 × 10⁻¹¹ N·m²/kg² (CODATA 2018)
- G की विमा: [M⁻¹ L³ T⁻²]
निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प किसी परिनालिका के बाहर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा का सही वर्णन करता है?
- दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव
- सिरे से केंद्र तक
- उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव
- केंद्र से सिरे तक
Explanation:
- परिनालिका (solenoid) के बाहर, चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ उत्तरी ध्रुव (N) से दक्षिणी ध्रुव (S) की ओर जाती हैं (ठीक वैसे ही जैसे एक दंड चुंबक में)।
- परिनालिका के अंदर, क्षेत्र रेखाएँ S से N की ओर होती हैं (बंद लूप बनाने के लिए)।
Quick Facts:
- परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान (uniform) होता है और अक्ष के समानांतर होता है।
- बाहर, क्षेत्र दुर्बल होता है और N → S दिशा में होता है (दंड चुंबक की तरह)।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- गुरुत्वाकर्षण बल छोटे पिंडों में सर्वाधिक प्रबल होता है
- गुरुत्वाकर्षण बल सदैव आकर्षी होता है
- G का मान हर जगह स्थिर होता है
- ब्रह्मांड में प्रत्येक वस्तु प्रत्येक अन्य वस्तु को आकर्षित करती है
Explanation:
- गुरुत्वाकर्षण बल F = GMm/r² – यह द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती होता है।
- छोटे द्रव्यमानों वाले पिंडों के बीच बल अत्यंत दुर्बल होता है (बड़े ग्रहों/तारों में ही प्रबल)।
- अतः “छोटे पिंडों में सर्वाधिक प्रबल” – गलत है (बड़े पिंडों में प्रबल)।
- अन्य कथन सत्य हैं: गुरुत्वाकर्षण सदैव आकर्षी, G सार्वत्रिक, सभी वस्तुएँ आकर्षित करती हैं।
Quick Facts:
- गुरुत्वाकर्षण बल द्रव्यमान के साथ बढ़ता है, दूरी के वर्ग के साथ घटता है।
- यह प्रकृति का सबसे दुर्बल बल है, पर लंबी दूरी तक कार्य करता है।
सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक की SI इकाई है:
- Nm⁻²kg²
- Nm⁻²kg⁻²
- Nmkg²
- Nm²kg⁻²
Explanation:
- G (सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक) की SI इकाई = N·m²/kg²
- इसे N m² kg⁻² लिखा जाता है (विकल्प D)
- अन्य विकल्प गलत हैं (Nm⁻²kg², Nm⁻²kg⁻², Nmkg² – ये G के मात्रक नहीं हैं)।
Quick Facts:
- G का मान: 6.674 × 10⁻¹¹ N·m²/kg²
- विमा: [M⁻¹ L³ T⁻²]
निम्नलिखित में से कौन से कथन सत्य हैं?
- एक पिंड का द्रव्यमान और भार एक स्थान से दूसरे स्थान पर समान रहता है।
- एक पिंड का द्रव्यमान समान रहता है जबकि भार एक स्थान से दूसरे स्थान पर बदलता रहता है।
- एक पिंड का द्रव्यमान और भार एक स्थान से दूसरे स्थान पर बदल जाता है।
- एक पिंड का द्रव्यमान एक स्थान से दूसरे स्थान पर बदल जाता है जबकि भार समान रहता है।
Explanation:
- द्रव्यमान (Mass) = पदार्थ की मात्रा – स्थान पर निर्भर नहीं करता, सर्वत्र समान रहता है।
- भार (Weight) = m × g – g स्थान के अनुसार बदलता है (ग्रह, ऊँचाई, आदि) – इसलिए भार बदलता है।
Quick Facts:
- चंद्रमा पर द्रव्यमान = पृथ्वी पर द्रव्यमान (समान), पर भार = 1/6 (कम) होता है।
- यही द्रव्यमान और भार के बीच मूल अंतर है।
किसी वस्तु का भार पृथ्वी की अपेक्षा चन्द्रमा पर कम होता है, क्योंकि:
- वायु प्रतिरोध के कारण वस्तु हल्की हो जाती है
- चंद्रमा पर वस्तु का द्रव्यमान कम हो जाता है
- चंद्रमा अधिक बल के साथ वस्तुओं को आकर्षित करता है
- चंद्रमा का गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी की तुलना में कम होता है
Explanation:
- भार = m × g – चंद्रमा पर g_moon = g_earth/6 (लगभग)
- इसलिए चंद्रमा पर भार कम होता है (द्रव्यमान वस्तु का नहीं बदलता)।
- वायु प्रतिरोध और द्रव्यमान में परिवर्तन – दोनों ही गलत कारण हैं।
Quick Facts:
- चंद्रमा पर g ≈ 1.63 m/s² (पृथ्वी पर 9.8 m/s²)
- इसलिए चंद्रमा पर वस्तु का भार पृथ्वी के भार का लगभग 1/6 होता है।
निम्न में से किस स्थान पर गुरुत्वीय त्वरण शून्य होता है?
- समुद्र सतह पर
- ध्रुवों पर
- भूमध्य रेखा पर
- पृथ्वी के केंद्र पर
Explanation:
- पृथ्वी के केंद्र पर, सभी दिशाओं से गुरुत्वाकर्षण बल एक-दूसरे को रद्द (cancel) कर देते हैं (क्योंकि द्रव्यमान सममित रूप से चारों ओर होता है)।
- इसलिए शुद्ध गुरुत्वीय त्वरण (net g) = 0
- समुद्र सतह (g ≈ 9.8), ध्रुव (g अधिकतम), भूमध्यरेखा (g न्यूनतम) – शून्य नहीं।
Quick Facts:
- पृथ्वी के केंद्र पर, g = 0 (सैद्धांतिक रूप से)
- यदि पृथ्वी एक समान घनत्व की हो, तो अंदर g ∝ r (केंद्र से दूरी) – केंद्र पर 0।
गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण ‘g’ का मान:
- भूमध्य रेखा पर ऋणात्मक और ध्रुवों पर धनात्मक
- भूमध्य रेखा पर ध्रुवों की तुलना में अधिक
- ध्रुवों और भूमध्य रेखा पर समान
- ध्रुवों पर भूमध्य रेखा की तुलना में अधिक
Explanation:
- ध्रुवों पर R (त्रिज्या) भूमध्यरेखा से कम है (पृथ्वी चपटी है), इसलिए g = GM/R² अधिक होता है।
- इसके अलावा, भूमध्यरेखा पर अपकेन्द्री (centrifugal) बल g को कम कर देता है।
- अतः g_poles > g_equator
Quick Facts:
- g_poles ≈ 9.832 m/s², g_equator ≈ 9.780 m/s²
- अंतर ≈ 0.052 m/s² (लगभग 0.5%)
जब दो वस्तुएँ A और B जिनके द्रव्यमान क्रमशः M और m हैं, d दूरी पर अलग हैं, उनके बीच आकर्षण बल F है और G सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक है, तो निम्नलिखित में से कौन-सा समीकरण सही है?
- F = G × M/d²
- F = G × (M × m)/d²
- F = G × 1/d²
- F = G × (M × m)/d
Explanation:
- न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम: F = G × (M × m) / d²
- यहाँ G = सार्वत्रिक स्थिरांक, M और m = द्रव्यमान, d = दूरी
- अन्य विकल्प (M/d², 1/d², (M×m)/d) गलत हैं – क्योंकि बल द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती और दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
Quick Facts:
- यह ‘व्युत्क्रम वर्ग नियम’ (inverse square law) है।
- यदि d दोगुना हो, तो F = 1/4 (चौथाई) हो जाता है।
पृथ्वी के केंद्र की ओर वस्तुओं को आकर्षित करने वाला बल क्या है?
- पृथ्वी का प्रतिकर्षण बल
- पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल
- नाभिकीय बल
- विद्युत चुम्बकीय बल
Explanation:
- पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational force) वह बल है जो वस्तुओं को पृथ्वी के केंद्र की ओर आकर्षित करता है।
- यही बल ‘भार’ (Weight) का कारण है।
- प्रतिकर्षण (repulsion) विद्युत चुम्बकीय बल में होता है, गुरुत्वाकर्षण में नहीं।
Quick Facts:
- गुरुत्वाकर्षण बल सदैव आकर्षण (attractive) होता है – यह कभी प्रतिकर्षण नहीं होता।
- यह बल पृथ्वी के केंद्र की ओर निर्देशित होता है (नीचे की दिशा)।
‘g’ (गुरुत्व के कारण त्वरण) = ?
- GR²/M
- GM/R²
- G/MR²
- R²M/G
Explanation:
- g = GM/R² (जहाँ M = पृथ्वी का द्रव्यमान, R = पृथ्वी की त्रिज्या, G = सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक)
- यह सूत्र पृथ्वी की सतह पर g की गणना के लिए है।
- अन्य विकल्प (GR²/M, G/MR², R²M/G) सही नहीं हैं।
Quick Facts:
- M = 6 × 10²⁴ kg, R = 6.4 × 10⁶ m, G = 6.67 × 10⁻¹¹ → g ≈ 9.8 m/s²
- यह सूत्र g को G, M, R से संबंधित करता है।
पृथ्वी का द्रव्यमान ___ है।
- 6 × 10²³
- 6 × 10²⁴
- 6 × 10²⁵
- 6 × 10²²
Explanation:
- पृथ्वी का द्रव्यमान (M) ≈ 5.972 × 10²⁴ kg, जिसे सामान्यतः 6 × 10²⁴ kg के रूप में लिया जाता है।
- 10²⁴ = 1,000,000,000,000,000,000,000,000 (सेक्स्टिलियन)
Quick Facts:
- पृथ्वी का द्रव्यमान = 5.97 × 10²⁴ kg (लगभग 6 × 10²⁴)
- सूर्य का द्रव्यमान ≈ 2 × 10³⁰ kg (पृथ्वी से बहुत अधिक)।
दो पिंडों के बीच आकर्षण बल 1/9 F हो जाता है, तो इन दो पिंडों के बीच दूरी कितनी होगी?
- तीन गुनी
- दोगुनी
- शून्य
- बराबर
Equation: F ∝ 1/r² → F/9 → r 3 गुना
Explanation:
- F ∝ 1/r² (व्युत्क्रम वर्ग नियम)
- यदि F’ = F/9, तो (1/r’)² = (1/9) × (1/r²) ⇒ r’ = 3r
- अतः दूरी तीन गुनी होनी चाहिए।
Quick Facts:
- यदि दूरी दोगुनी हो, तो बल 1/4; तिगुनी हो, तो 1/9; चौगुनी हो, तो 1/16, आदि।
पृथ्वी की सतह पर, जहाँ हवा का घर्षण लगभग शून्य के बराबर है, तो वस्तुएं ______ के साथ गिरती हैं।
- समान त्वरण
- समान गति
- अलग त्वरण
- समान वेग
Explanation:
- वायु प्रतिरोध की अनुपस्थिति में, सभी वस्तुएँ गुरुत्वाकर्षण के अंतर्गत समान त्वरण (g = 9.8 m/s²) से गिरती हैं, चाहे उनका द्रव्यमान कुछ भी हो (गैलीलियो का नियम)।
- चाल/वेग तो समय के साथ बदलता है (v = gt), पर त्वरण समान होता है।
Quick Facts:
- यह गैलीलियो के प्रसिद्ध प्रयोग पर आधारित है (हालाँकि उन्होंने पीसा की मीनार से गेंदें गिराईं)।
- वायु प्रतिरोध होने पर, हल्की वस्तुएँ (जैसे पंख) देर से गिरती हैं।
सूर्य और चंद्रमा द्वारा पृथ्वी को एक ही दिशा में गुरुत्वाकर्षण द्वारा खींचने का कारण बनता है:
- उच्च ज्वार-भाटा
- निम्न ज्वार-भाटा
- मंद ज्वार-भाटा
- वसंत ज्वार-भाटा
Explanation:
- जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में होते हैं (अमावस्या या पूर्णिमा), तो सूर्य और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल एक ही दिशा में जुड़ जाते हैं, जिससे वसंत ज्वार-भाटा (Spring tide) उत्पन्न होता है (ज्वार अत्यधिक ऊँचा होता है)।
- जब वे समकोण पर होते हैं, तो निम्न ज्वार (Neap tide) आता है।
Quick Facts:
- वसंत ज्वार: उच्च ज्वार (high tide) और निम्न ज्वार (low tide) दोनों अत्यधिक होते हैं।
- निम्न ज्वार (Neap tide): ज्वारीय सीमा (tidal range) न्यूनतम होती है।
निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही है?
- भार और द्रव्यमान की SI इकाइयाँ समान होती हैं
- भार गुरुत्वाकर्षण से स्वतंत्र होता है
- स्थान के साथ द्रव्यमान में परिवर्तन होता है
- द्रव्यमान किसी वस्तु में पदार्थ की मात्रा होती है
Explanation:
- द्रव्यमान (Mass) = पदार्थ की मात्रा (quantity of matter) – SI इकाई: kg
- भार (Weight) = बल (mg) – SI इकाई: N
- भार गुरुत्वाकर्षण (g) पर निर्भर करता है, इसलिए स्वतंत्र नहीं है।
- द्रव्यमान स्थान के साथ नहीं बदलता (यह पदार्थ का अंतर्निहित गुण है)।
Quick Facts:
- द्रव्यमान = अदिश, भार = सदिश
- द्रव्यमान हमेशा स्थिर रहता है (चाहे पृथ्वी, चंद्रमा, या अंतरिक्ष में हो)।
भार और द्रव्यमान के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
- चंद्रमा पर केवल द्रव्यमान में परिवर्तन होता है।
- चंद्रमा पर केवल भार में परिवर्तन होता है।
- चंद्रमा पर न तो द्रव्यमान और न ही भार में परिवर्तन होता है।
- चंद्रमा पर द्रव्यमान और भार दोनों में परिवर्तन होता है।
Explanation:
- द्रव्यमान (m) = वस्तु का अंतर्निहित गुण – स्थान पर निर्भर नहीं करता, इसलिए चंद्रमा पर भी वही रहता है।
- भार (W = mg) – g चंद्रमा पर भिन्न होता है (g_moon = g_earth/6), इसलिए भार बदलता है (घटता है)।
Quick Facts:
- चंद्रमा पर द्रव्यमान = पृथ्वी पर द्रव्यमान
- चंद्रमा पर भार = पृथ्वी पर भार का 1/6
