SCIENCE

एक त्रिकोणीय काँच के प्रिज्म में ______ होते हैं।

  • एक त्रिकोणीय आधार और तीन आयताकार पार्श्व पृष्ठ
  • तीन त्रिकोणीय आधार और एक आयताकार पार्श्व पृष्ठ
  • दो त्रिकोणीय आधार और तीन आयताकार पार्श्व पृष्ठ
  • तीन त्रिकोणीय आधार और तीन आयताकार पार्श्व पृष्ठ

Explanation:

  • एक त्रिकोणीय काँच के प्रिज्म (Triangular Glass Prism) में “दो त्रिकोणीय आधार” (Two Triangular Bases) और “तीन आयताकार पार्श्व पृष्ठ” (Three Rectangular Lateral Faces) होते हैं।
  • यह एक त्रिकोणीय प्रिज्म (Triangular Prism) है, जिसमें 5 फलक (Faces), 9 किनारे (Edges) और 6 शीर्ष (Vertices) होते हैं।
  • प्रिज्म का उपयोग प्रकाश के परिक्षेपण (Dispersion of Light) के लिए किया जाता है।
  • अतिरिक्त तथ्य: प्रिज्म में अपवर्तनांक (Refractive Index) के कारण प्रकाश का विभाजन (VIBGYOR) होता है।

नियंत्रित किए जाने वाले प्रतिरोध और लगाए गए आयास के अनुपात को किस रूप में संदर्भित किया जाता है:

  • भार
  • यांत्रिक लाभ
  • भार का वेग
  • आयास की वेग

Explanation:

  • “नियंत्रित किए जाने वाले प्रतिरोध” (Resistance to be overcome – Load) और “लगाए गए आयास” (Effort Applied) के अनुपात को “यांत्रिक लाभ” (Mechanical Advantage – MA) कहा जाता है।
  • यांत्रिक लाभ (MA) = भार/आयास = \( \frac{Load}{Effort} \)
  • MA > 1 → बल बढ़ाने वाला (Force Multiplier), MA < 1 → चाल बढ़ाने वाला (Speed Multiplier)।
  • अतिरिक्त तथ्य: वेग अनुपात (Velocity Ratio – VR) = आयास की दूरी/भार की दूरी = \( \frac{D_E}{D_L} \)।

एक ______ वृत्त एक आलेख पर एक वृताकार केन्द्र रेखा है जिसमें एक लम्बवत केन्द्र के बारे में छिद्र के केन्द्र होते हैं।

  • अक्ष
  • बोल्ट
  • सकेन्द्री
  • परिधीय

Explanation:

  • एक “बोल्ट वृत्त” (Bolt Circle) एक आलेख पर एक वृताकार केन्द्र रेखा (Circular Centre Line) है, जिसमें एक लम्बवत केन्द्र (Perpendicular Centre) के बारे में छिद्र के केन्द्र (Hole Centres) होते हैं।
  • इसे पिच वृत्त (Pitch Circle) भी कहा जाता है, जो बोल्ट छिद्रों (Bolt Holes) के केन्द्रों से गुजरने वाला वृत्त है।
  • इसका उपयोग फ्लैंज (Flanges) और व्हील (Wheels) के डिज़ाइन में किया जाता है।
  • अतिरिक्त तथ्य: बोल्ट वृत्त व्यास (Bolt Circle Diameter – BCD) – छिद्रों के केन्द्रों के बीच का व्यास।

निम्नलिखित में से कौन पास्कल के नियम पर आधारित है?

  • अपकेन्द्रित्र
  • द्रवचालित लिफ्ट
  • मोटर
  • उत्तोलक

Explanation:

  • “द्रवचालित लिफ्ट” (Hydraulic Lift) पास्कल के नियम (Pascal’s Law) पर आधारित है।
  • पास्कल का नियम: “बंद द्रव में किसी बिंदु पर लगाया गया दाब सभी दिशाओं में समान रूप से संचारित होता है।”
  • द्रवचालित लिफ्ट में छोटे पिस्टन (Piston) पर लगाया गया बल बड़े पिस्टन पर बढ़ा (Multiply) कर दिया जाता है: \( \frac{F_1}{A_1} = \frac{F_2}{A_2} \)
  • अतिरिक्त तथ्य: द्रवचालित ब्रेक (Hydraulic Brake) भी पास्कल के नियम पर आधारित है।

एक कमानीदार तुला में, जब कोई बल लगाया जाता है तो कौन सा हिस्सा खिंचता है?

  • नायलॉन बैंड
  • रबर बैंड
  • प्रत्यास्थ धागा
  • कुंडलित स्प्रिंग

Explanation:

  • एक कमानीदार तुला (Spring Balance) में, जब कोई बल लगाया जाता है तो “कुंडलित स्प्रिंग” (Coiled Spring) खिंचता है (या संपीडित होता है)।
  • यह हुक के नियम (Hooke’s Law) पर कार्य करता है: \(F = -kx\) (बल \(\propto\) विस्तार)
  • स्प्रिंग का विस्तार लगाए गए बल (Applied Force) के समानुपाती होता है, जिससे बल मापा जा सकता है।
  • अतिरिक्त तथ्य: स्प्रिंग बैलेंस का उपयोग भार (Weight) मापने के लिए किया जाता है।

अच्छी गृह व्यवस्था निम्न में से किसके लिए मूलभूत है?

  • कार्य करने की अनुमति
  • अच्छी सुरक्षा
  • खराब सुरक्षा
  • मशीन गार्ड

Explanation:

  • “अच्छी गृह व्यवस्था” (Good Housekeeping) “अच्छी सुरक्षा” (Good Safety) के लिए मूलभूत (Fundamental) है।
  • गृह व्यवस्था में स्वच्छता, व्यवस्था, अपशिष्ट प्रबंधन (Cleanliness, Organization, Waste Management) शामिल हैं।
  • अच्छी गृह व्यवस्था दुर्घटनाओं (Accidents) को कम करती है और उत्पादकता (Productivity) बढ़ाती है।
  • अतिरिक्त तथ्य: 5S (Sort, Set in order, Shine, Standardize, Sustain) – गृह व्यवस्था का जापानी सिद्धांत।

निम्नलिखित में से कौन निवारक रखरखाव का उदाहरण है?

  • लागत बचाने के लिए छोटी-मोटी खामियों को नजरअंदाज करना
  • उपकरण का उपयोग तब तक करना जब तक विफलता न हो जाए
  • किसी मशीन की मरम्मत से पहले उसके खराब होने का इंतजार करना
  • नियमित स्नेहन और निरीक्षण करना

Explanation:

  • “नियमित स्नेहन और निरीक्षण” (Regular lubrication and inspection) निवारक रखरखाव (Preventive Maintenance) का उदाहरण है।
  • निवारक रखरखाव – मशीन के खराब होने से पहले (Before Breakdown) नियमित रखरखाव करना।
  • अन्य विकल्प प्रतिक्रियात्मक (Reactive) या उपेक्षा (Neglect) के उदाहरण हैं।
  • अतिरिक्त तथ्य: निवारक रखरखाव मशीन की आयु (Machine Life) बढ़ाता है और अप्रत्याशित विफलता (Unexpected Failure) को कम करता है।

लोड पर नियंत्रण स्थापित करने लिए लगाए गए बल को ______ कहा जाता है।

  • आयास (प्रयास)
  • भार
  • यांत्रिक लाभ
  • वेग अनुपात

Explanation:

  • “लोड” (Load) पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए लगाए गए बल को “आयास” (Effort) कहा जाता है।
  • भार (Load) – वह प्रतिरोध जिसे दूर किया जाना है।
  • आयास (Effort) – भार को दूर करने के लिए लगाया गया बल।
  • अतिरिक्त तथ्य: आयास और भार के बीच संबंध: \( MA = \frac{Load}{Effort} \)

किसी वस्तु पर लगने वाले बल को मापने के लिए निम्नलिखित में से किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?

  • लीवर
  • ड्रिल मशीन
  • स्प्रिंग बैलेंस
  • पुल्ली

Explanation:

  • किसी वस्तु पर लगने वाले बल (Force) को मापने के लिए “स्प्रिंग बैलेंस” (Spring Balance) का उपयोग किया जाता है।
  • यह हुक के नियम (Hooke’s Law) पर कार्य करता है: \(F = kx\) (बल = स्प्रिंग स्थिरांक × विस्तार)।
  • लीवर (Lever) – बल बढ़ाने/दिशा बदलने के लिए, पुल्ली (Pulley) – दिशा बदलने/भार उठाने के लिए, ड्रिल मशीन (Drill Machine) – छेद करने के लिए।
  • अतिरिक्त तथ्य: बल का SI मात्रक न्यूटन (N) है।

निम्नलिखित में से किस स्थिति में चुंबकीय क्षेत्र का उत्पादन, दंड चुंबक के चुंबकीय क्षेत्र के समान पाया जाता है?

  • धारावाही अंतर लंबाई का तार
  • धारावाही परिमित लंबाई की परिनालिका
  • धारावाही आयताकार पाश
  • धारावाही वृत्ताकार पाश

Explanation:

  • धारावाही परिमित लंबाई की परिनालिका (Current-carrying solenoid of finite length) का चुंबकीय क्षेत्र, दंड चुंबक (Bar Magnet) के चुंबकीय क्षेत्र के समान (Similar) पाया जाता है।
  • परिनालिका (Solenoid) के अंदर एकसमान (Uniform) चुंबकीय क्षेत्र होता है, और बाहर यह दंड चुंबक की तरह व्यवहार करता है (N-S ध्रुव)।
  • परिनालिका के चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता: \(B = \mu_0 n I\) (n = फेरों की संख्या/मीटर, I = धारा)।
  • अतिरिक्त तथ्य: परिनालिका को विद्युत चुंबक (Electromagnet) के रूप में भी उपयोग किया जाता है।

सीलिंग फैन और साइकिल के केन्द्र और धुरी के बीच घर्षण को कम करने के लिए किस मशीन पुर्जे का उपयोग किया जाता है?

  • खिंग
  • बॉल बेयरिंग
  • बोल्ट
  • नट

Explanation:

  • सीलिंग फैन (Ceiling Fan) और साइकिल (Cycle) के केन्द्र (Centre) और धुरी (Axle) के बीच घर्षण (Friction) को कम करने के लिए “बॉल बेयरिंग” (Ball Bearing) का उपयोग किया जाता है।
  • बॉल बेयरिंग लोटनिक घर्षण (Rolling Friction) का उपयोग करता है, जो सर्पी घर्षण (Sliding Friction) से बहुत कम होता है।
  • यह घर्षण को कम करता है, जिससे ऊर्जा की हानि (Energy Loss) कम होती है और जीवन (Life) बढ़ता है।
  • अतिरिक्त तथ्य: स्नेहक (Lubricants) और बॉल बेयरिंग दोनों घर्षण कम करने के सामान्य तरीके हैं।

यदि हम श्रेणी 3 के उत्तोलक में आयास भुजा की लंबाई की तुलना भार भुजा की लंबाई के साथ करते हैं, तब निम्न में से कौन सा सत्य है?

  • आयास भुजा की लंबाई भार भुजा की लंबाई से अधिक, बराबर या उससे कम हो सकती है।
  • आयास भुजा की लंबाई सदैव भार भुजा की लंबाई के बराबर होती है।
  • आयास भुजा की लंबाई सदैव भार भुजा की लंबाई से कम होती है।
  • आयास भुजा की लंबाई सदैव भार भुजा की लंबाई से अधिक होती है।

Explanation:

  • श्रेणी 3 के उत्तोलक (Class 3 Lever) में, “आयास भुजा की लंबाई सदैव भार भुजा की लंबाई से कम होती है” (Effort arm is always shorter than load arm)।
  • उत्तोलक के तीन श्रेणियाँ:
    • श्रेणी 1 (Class 1) – आलम्ब (Fulcrum) बीच में (जैसे: कैंची, सी-सॉ) → \(E_L > L_L\) या \(E_L < L_L\)
    • श्रेणी 2 (Class 2) – भार (Load) बीच में (जैसे: व्हीलबैरो) → \(E_L > L_L\)
    • श्रेणी 3 (Class 3) – आयास (Effort) बीच में (जैसे: चिमटा, मछली पकड़ने की छड़) → \(E_L < L_L\)
  • अतिरिक्त तथ्य: श्रेणी 3 उत्तोलक यांत्रिक लाभ (MA) < 1 (चाल बढ़ाने वाला) होता है।

परावर्तन के नियम ______ पर लागू होते हैं।

  • केवल समतल सतहों पर और गोलीय सतहों पर नहीं
  • समतल और गोलीय दोनों सतहों पर
  • न तो समतल सतहों पर और न ही गोलीय सतहों पर
  • केवल गोलीय सतह पर और समतल सतहों पर नहीं

Explanation:

  • परावर्तन के नियम (Laws of Reflection) “समतल और गोलीय दोनों सतहों पर” (Both plane and spherical surfaces) लागू होते हैं।
  • परावर्तन के दो नियम:
    1. आपतन कोण (∠i) = परावर्तन कोण (∠r)
    2. आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब (Normal) एक ही तल (Same Plane) में होते हैं।
  • ये नियम समतल दर्पण (Plane Mirror) और गोलीय दर्पण (Spherical Mirror – अवतल/उत्तल) दोनों के लिए सत्य हैं।
  • अतिरिक्त तथ्य: अवतल दर्पण (Concave Mirror) – अभिसारी, उत्तल दर्पण (Convex Mirror) – अपसारी।

किसी चालक के लिए कारकों के किस संयोजन के परिणामस्वरूप सबसे कम प्रतिरोध होगा?

  • कम लंबाई और बड़ा अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल
  • अधिक लंबाई और छोटा अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल
  • कम लंबाई और छोटा अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल
  • अधिक लंबाई और बड़ा अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल

Explanation:

  • किसी चालक (Conductor) का प्रतिरोध (Resistance – R) निम्न सूत्र द्वारा दिया जाता है: \(R = \rho \frac{L}{A}\)
  • जहाँ \(\rho\) = प्रतिरोधकता (Resistivity – सामग्री पर निर्भर), L = लंबाई (Length), A = अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल (Cross-sectional Area)।
  • प्रतिरोध लंबाई (L) के अनुक्रमानुपाती (Directly Proportional) और अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल (A) के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely Proportional) होता है: \(R \propto L\) और \(R \propto 1/A\)
  • सबसे कम प्रतिरोध के लिए: कम लंबाई (Small L) और बड़ा क्षेत्रफल (Large A) → \(R\) न्यूनतम।
  • अतिरिक्त तथ्य: तांबा (Copper) और चाँदी (Silver) – कम प्रतिरोधकता वाले सुचालक।
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