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‘ठाकुर का कुआँ’ कहानी के कहानीकार कौन हैं?
- फणीश्वर नाथ ‘रेणु’
- यशपाल
- मुंशी प्रेमचंद
- जयशंकर प्रसाद
Explanation:
- ‘ठाकुर का कुआँ’ के लेखक मुंशी प्रेमचंद हैं।
- प्रेमचंद की कहानियों में सामाजिक यथार्थ और शोषित वर्ग के जीवन का प्रभावशाली चित्रण मिलता है।
‘ठाकुर का कुआँ’ कहानी पहली बार किस कहानी-संग्रह में प्रकाशित हुई थी?
- मानसरवर
- गोदान
- मानसी
- कफन
Explanation:
- ‘ठाकुर का कुआँ’ पहली बार ‘मानसी’ कहानी-संग्रह में प्रकाशित हुई थी।
- बाद में इसे ‘मानसरवर’ भाग-1 में भी संकलित किया गया।
‘मानसी’ में ‘ठाकुर का कुआँ’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1920 ई.
- 1928 ई.
- 1932 ई.
- 1936 ई.
Explanation:
- ‘ठाकुर का कुआँ’ का प्रथम प्रकाशन 1932 ई. में ‘मानसी’ में हुआ था।
- यह प्रेमचंद की सामाजिक यथार्थवादी कहानियों में महत्वपूर्ण है।
‘ठाकुर का कुआँ’ कहानी का प्रमुख विषय क्या है?
- प्रेम और त्याग
- प्राकृतिक सौंदर्य
- जातिवाद, छुआछूत और दलित-पीड़न
- ऐतिहासिक युद्ध
Explanation:
- कहानी में जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता की अमानवीयता को उजागर किया गया है।
- स्वच्छ पानी जैसी बुनियादी आवश्यकता से वंचित किए जाने के माध्यम से सामाजिक विषमता को दिखाया गया है।
‘ठाकुर का कुआँ’ की केंद्रीय पात्र कौन है?
- जोखू
- ठाकुर
- साहूकार
- गंगी
Explanation:
- गंगी कहानी की नायिका और केंद्रीय पात्र है।
- वह अपने बीमार पति जोखू के लिए पानी लाने का साहस करती है।
गंगी का जोखू से क्या संबंध है?
- बहन
- माँ
- पत्नी
- बेटी
Explanation:
- गंगी जोखू की पत्नी है।
- अपने बीमार पति की प्यास बुझाने के लिए वह सामाजिक जोखिम उठाती है।
कहानी में जोखू किस स्थिति से गुजर रहा है?
- वह यात्रा पर है
- वह गांव छोड़ रहा है
- वह बीमार है और प्यास से तड़प रहा है
- वह खेत में काम कर रहा है
Explanation:
- जोखू लंबे समय से बीमार है।
- उसे प्यास लगी है, लेकिन जातिगत व्यवस्था के कारण वह ऊँची जाति के कुएँ से पानी लेने में असमर्थ है।
गंगी ठाकुर के कुएँ पर क्यों जाती है?
- कपड़े धोने के लिए
- ठाकुर से मिलने के लिए
- अपने बीमार पति के लिए पानी लाने के लिए
- कुएँ की सफाई करने के लिए
Explanation:
- जोखू बीमार है और पीने के पानी के लिए परेशान है।
- गंगी अपने पति की प्यास बुझाने के लिए ठाकुर के कुएँ से पानी लेने का जोखिम उठाती है।
ठाकुर का कुआँ कहानी में किस सामाजिक वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है?
- श्रमिक वर्ग
- दलित वर्ग
- सामंती और उच्च जातीय प्रभुत्व वाले वर्ग
- मजदूर वर्ग
Explanation:
- ठाकुर गांव के सामंती और प्रभुत्वशाली वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है।
- उसके कुएँ पर सामाजिक और जातिगत अधिकार का नियंत्रण कहानी की विषमता को दर्शाता है।
गंगी का चरित्र किस गुण को सबसे अधिक दर्शाता है?
- कायरता
- निष्क्रियता
- निडरता और स्वाभिमान
- स्वार्थ
Explanation:
- गंगी सामाजिक भय के बावजूद ठाकुर के कुएँ से पानी लेने का साहस करती है।
- वह संवेदनशील होने के साथ-साथ अपने अधिकार और पति के जीवन के प्रति जागरूक है।
‘ठाकुर का कुआँ’ में पानी किस बुनियादी अधिकार का प्रतीक बन जाता है?
- राजनीतिक अधिकार
- शिक्षा का अधिकार
- जीवन और मानव गरिमा के मूल अधिकार
- संपत्ति का अधिकार
Explanation:
- कहानी में स्वच्छ पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता भी जाति के आधार पर नियंत्रित दिखाई जाती है।
- इससे सामाजिक समानता और मानव गरिमा का प्रश्न सामने आता है।
‘ठाकुर का कुआँ’ कहानी किस साहित्यिक शैली की प्रमुख विशेषता प्रस्तुत करती है?
- रोमांटिक शैली
- काल्पनिक शैली
- यथार्थवादी शैली
- पौराणिक शैली
Explanation:
- कहानी में भारतीय ग्रामीण समाज की वास्तविक सामाजिक परिस्थितियों का चित्रण है।
- जाति, छुआछूत और गरीबी जैसी समस्याओं को बिना कृत्रिम आदर्शीकरण के प्रस्तुत किया गया है।
‘ठाकुर का कुआँ’ में गंगी का संघर्ष किसके विरुद्ध है?
- केवल गरीबी के विरुद्ध
- केवल बीमारी के विरुद्ध
- जातिगत भेदभाव और सामाजिक विषमता के विरुद्ध
- प्राकृतिक आपदा के विरुद्ध
Explanation:
- गंगी की समस्या केवल पानी की समस्या नहीं है।
- उसके पीछे जातिगत भेदभाव, छुआछूत और सामाजिक असमानता की पूरी व्यवस्था मौजूद है।
1 जोखू उच्च जाति के कुएँ से पानी लेने का साहस क्यों नहीं करता?
- उसे पानी की आवश्यकता नहीं थी
- वह कुआँ बहुत दूर था
- जातिगत डर और सामाजिक प्रतिबंध के कारण
- वह कुएँ को पसंद नहीं करता था
Explanation:
- जोखू शोषित दलित वर्ग से संबंधित है।
- जातिगत व्यवस्था के कारण वह ठाकुर या साहूकार के कुएँ से पानी लेने से डरता है।
‘ठाकुर का कुआँ’ में कुआँ किसका प्रतीक बनकर उभरता है?
- केवल प्राकृतिक संसाधन का
- समृद्धि और विकास का
- सामाजिक अधिकारों और जातिगत नियंत्रण का
- धार्मिक आस्था का
Explanation:
- कुआँ कहानी में केवल पानी का स्रोत नहीं है।
- यह समाज में संसाधनों पर प्रभुत्व और जातिगत अधिकारों के असमान वितरण का प्रतीक बन जाता है।
‘ठाकुर का कुआँ’ कहानी का मूल संदेश क्या है?
- सामंती व्यवस्था की प्रशंसा
- जातिगत भेदभाव को उचित ठहराना
- समानता, मानव गरिमा और सामाजिक न्याय की आवश्यकता
- ग्रामीण जीवन से पलायन
Explanation:
- कहानी सामाजिक विषमता और अस्पृश्यता की अमानवीयता को सामने लाती है।
- स्वच्छ पानी जैसे मूलभूत अधिकार से वंचित करना मानव गरिमा के विरुद्ध है।
- कहानी समानता और सामाजिक न्याय की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
‘ठाकुर का कुआँ’ को मार्मिक कहानी बनाने वाला प्रमुख तत्व क्या है?
- राजदरबार का वर्णन
- प्रकृति का सौंदर्य
- एक बीमार पति के लिए पानी जुटाने वाली स्त्री के संघर्ष के माध्यम से सामाजिक विषमता का चित्रण
- हास्य और मनोरंजन
Explanation:
- गंगी का अपने बीमार पति जोखू के लिए पानी जुटाने का संघर्ष कहानी का भावनात्मक केंद्र है।
- इस छोटे-से प्रसंग के माध्यम से प्रेमचंद ने जातिवाद, छुआछूत, सामंती मानसिकता और दलित-पीड़न जैसी व्यापक सामाजिक समस्याओं को उजागर किया है।
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‘नीलम देश की राजकन्या’ कहानी के कहानीकार कौन हैं?
- प्रेमचंद
- अज्ञेय
- जैनेन्द्र कुमार
- यशपाल
Explanation:
- ‘नीलम देश की राजकन्या’ के कहानीकार जैनेन्द्र कुमार हैं।
- जैनेन्द्र कुमार हिंदी के प्रमुख मनोवैज्ञानिक कहानीकारों में गिने जाते हैं।
‘नीलम देश की राजकन्या’ किस वर्ष से संबंधित है?
- 1929 ई.
- 1933 ई.
- 1936 ई.
- 1942 ई.
Explanation:
- ‘नीलम देश की राजकन्या’ 1933 ई. में प्रकाशित कहानी-संग्रह की शीर्षक कहानी है।
‘नीलम देश की राजकन्या’ किस प्रकार की कहानी है?
- ऐतिहासिक कहानी
- सामाजिक यथार्थवादी कहानी
- फैंटेसी एवं प्रतीकात्मक कहानी
- जासूसी कहानी
Explanation:
- कहानी फैंटेसी और प्रतीकात्मक शैली में रची गई है।
- काल्पनिक राजकन्या के माध्यम से स्त्री-मन की सुप्त आकांक्षाओं और मानसिक अकेलेपन को अभिव्यक्ति दी गई है।
‘नीलम देश की राजकन्या’ की मूल संवेदना क्या है?
- देशभक्ति
- ग्रामीण गरीबी
- नारी-मन की अतृप्ति और मानसिक अकेलापन
- ऐतिहासिक संघर्ष
Explanation:
- कहानी में नारी-मन की अतृप्त इच्छाओं, अकेलेपन और तृप्ति-अतृप्ति के अंतर्द्वंद्व को केंद्र में रखा गया है।
राजकन्या किस प्रकार के वातावरण में रहती है?
- गरीबी और अभाव में
- साधारण ग्रामीण जीवन में
- अथाह वैभव और सौंदर्य से घिरे नीलम महल में
- वन में
Explanation:
- राजकन्या नीलम से बने महल में रहती है।
- उसके पास हीरे-मोती, दास-दासियाँ और अनेक भौतिक सुख-सुविधाएँ हैं।
- फिर भी वह भीतर से अकेली और अतृप्त है।
राजकन्या के जीवन की सबसे बड़ी समस्या क्या है?
- धन का अभाव
- राज्य का अभाव
- मानसिक अकेलापन और भावनात्मक अतृप्ति
- शत्रुओं का आक्रमण
Explanation:
- राजकन्या के पास भौतिक सुखों की कोई कमी नहीं है।
- उसकी वास्तविक समस्या आत्मीय प्रेम और भावनात्मक तृप्ति का अभाव है।
राजकन्या को प्रसन्न करने के लिए कौन उसकी सेवा और मनोरंजन में लगी रहती हैं?
- दासियाँ मात्र
- राज्य की सैनिक महिलाएँ
- किन्नरी-बालाएँ/सखियाँ
- राजसभा के मंत्री
Explanation:
- किन्नरी-बालाएँ राजकन्या की सेवा और मनोरंजन में लगी रहती हैं।
- वे संगीत, नृत्य और अन्य साधनों से उसका अकेलापन दूर करने का प्रयास करती हैं, लेकिन सफल नहीं होतीं।
राजकन्या किसकी प्रतीक्षा में व्याकुल रहती है?
- किसी राजा की
- किसी योद्धा की
- पुंज नामक काल्पनिक राजकुमार/प्रेमी की
- अपने पिता की
Explanation:
- पुंज राजकन्या के स्वप्नलोक का काल्पनिक प्रेमी है।
- राजकन्या उसकी प्रतीक्षा में व्याकुल रहती है और उससे अपने जीवन की भावनात्मक तृप्ति की आशा करती है।
राजकन्या के लिए ‘राजरस’ का क्या अर्थ है?
- राज्य की सत्ता
- भौतिक धन
- आत्मीय प्रेम और भावनात्मक तृप्ति
- राजकीय सम्मान
Explanation:
- राजकन्या बाहरी वैभव से संतुष्ट नहीं है।
- वह सच्चे आत्मीय प्रेम यानी ‘राजरस’ की तलाश में रहती है।
कहानी में राजकन्या समुद्र की किस वस्तु को अपनी इच्छाओं से जोड़ती है?
- रेत
- शंख
- लहरों
- नाव
Explanation:
- राजकन्या समुद्र की उठती-गिरती लहरों को देखती है।
- लहरें उसके मन में उठने वाली अंतहीन इच्छाओं और मानसिक उथल-पुथल का प्रतीक बनती हैं।
‘नीलम देश/नीलम महल’ किसका प्रतीक माना गया है?
- राष्ट्रीय स्वतंत्रता का
- प्राकृतिक सौंदर्य का
- भौतिक सुख-सुविधाओं और मानसिक कैद का
- आध्यात्मिक ज्ञान का
Explanation:
- नीलम महल बाहरी वैभव और सुख-सुविधाओं का प्रतीक है।
- साथ ही यह राजकन्या की मानसिक कैद और अकेलेपन को भी दर्शाता है।
‘नीलम देश की राजकन्या’ में समुद्र की लहरें किसका प्रतीक हैं?
- शांति का
- राजकीय शक्ति का
- अंतहीन इच्छाओं और मानसिक उथल-पुथल का
- सामाजिक व्यवस्था का
Explanation:
- समुद्र की लगातार उठती-गिरती लहरें राजकन्या के मन की बेचैनी को प्रतिबिंबित करती हैं।
- वे उसकी अतृप्त कामनाओं और मानसिक उथल-पुथल का प्रतीक हैं।
‘नीलम देश की राजकन्या’ पर किस मनोवैज्ञानिक विचारधारा का प्रभाव बताया गया है?
- मार्क्सवादी विचारधारा
- गांधीवादी विचारधारा
- फ्रायडवादी विचारधारा
- अस्तित्ववादी विचारधारा
Explanation:
- कहानी में फ्रायडवादी मनोविश्लेषण और काम-वासना यानी Libido का प्रभाव दिखाई देता है।
- स्त्री-मन की दबी इच्छाओं और मानसिक अंतर्द्वंद्व का विश्लेषण कहानी की महत्वपूर्ण विशेषता है।
‘नीलम देश की राजकन्या’ का प्रमुख शिल्प क्या है?
- यथार्थवादी और ऐतिहासिक
- पत्रात्मक और आत्मकथात्मक
- फैंटेसी और प्रतीकात्मक
- जासूसी और रोमांचक
Explanation:
- कहानी में काल्पनिक संसार का निर्माण किया गया है।
- विभिन्न पात्रों और वस्तुओं के माध्यम से मनोवैज्ञानिक अवस्थाओं को प्रतीकात्मक रूप में व्यक्त किया गया है।
राजकन्या के पास अत्यधिक भौतिक वैभव होने के बावजूद वह कैसी रहती है?
- अत्यंत प्रसन्न
- संतुष्ट और निश्चिंत
- उदास, अकेली और अतृप्त
- क्रोधित और हिंसक
Explanation:
- राजकन्या के पास हीरे-जवाहरात और सभी भौतिक सुख हैं।
- इसके बावजूद उसके भीतर गहरा खालीपन और भावनात्मक अतृप्ति बनी रहती है।
जैनेन्द्र कुमार की कहानियों की प्रमुख विशेषता क्या मानी जाती है?
- केवल ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन
- केवल हास्य-व्यंग्य
- मनोवैज्ञानिक विश्लेषण और अंतर्मन की पड़ताल
- केवल प्रकृति-वर्णन
Explanation:
- जैनेन्द्र कुमार की रचनाओं में पात्रों के बाहरी घटनाक्रम की अपेक्षा उनके अंतर्मन और मनोवैज्ञानिक स्थितियों को विशेष महत्व मिलता है।
- ‘नीलम देश की राजकन्या’ भी इसी मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति का उदाहरण है।
निम्नलिखित में से कौन-सी जैनेन्द्र कुमार की प्रमुख कहानी है?
- पहलवान की ढोलक
- मैला आँचल
- पाजेब
- भारत-दुर्दशा
Explanation:
- ‘पाजेब’ जैनेन्द्र कुमार की प्रमुख कहानियों में शामिल है।
- उनकी अन्य चर्चित कहानियों में ‘फांसी’, ‘खेल’, ‘अपना-अपना भाग्य’, ‘दो चिड़ियाँ’, ‘एक रात’ और ‘तात्पर्य’ शामिल हैं।
‘नीलम देश की राजकन्या’ का केंद्रीय मनोवैज्ञानिक अंतर्द्वंद्व किसके बीच है?
- धन और गरीबी के बीच
- राजा और प्रजा के बीच
- तृप्ति और अतृप्ति के बीच
- युद्ध और शांति के बीच
Explanation:
- राजकन्या के पास बाहरी सुख-सुविधाओं की प्रचुरता है, फिर भी उसकी भावनात्मक इच्छाएँ पूरी नहीं होतीं।
- इसी कारण उसके मन में तृप्ति और अतृप्ति का लगातार द्वंद्व चलता रहता है।
‘नीलम देश की राजकन्या’ का मुख्य निष्कर्ष क्या है?
- धन ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है
- राजकीय शक्ति से सभी समस्याएँ हल हो जाती हैं
- भौतिक वैभव मनुष्य की आत्मिक और भावनात्मक भूख को शांत नहीं कर सकता
- अकेलापन केवल गरीबी के कारण होता है
Explanation:
- राजकन्या के पास अपार धन और वैभव होने के बावजूद उसके भीतर भावनात्मक खालीपन बना रहता है।
- कहानी इस तथ्य को रेखांकित करती है कि केवल भौतिक सुख मनुष्य को मानसिक और आत्मिक तृप्ति नहीं दे सकते।
- सच्चा आत्मीय प्रेम और भावनात्मक संतोष जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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‘परिंदे’ कहानी के कहानीकार कौन हैं?
- मोहन राकेश
- राजेंद्र यादव
- निर्मल वर्मा
- कमलेश्वर
Explanation:
- ‘परिंदे’ के कहानीकार निर्मल वर्मा हैं।
- निर्मल वर्मा नई कहानी आंदोलन के प्रमुख कहानीकारों में गिने जाते हैं।
‘परिंदे’ कहानी का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1950 ई.
- 1956 ई.
- 1960 ई.
- 1965 ई.
Explanation:
- ‘परिंदे’ कहानी का प्रकाशन 1956 ई. में हुआ था।
- बाद में इसी नाम के कहानी-संग्रह में इसे 1960 ई. में संकलित किया गया।
‘परिंदे’ कहानी किस कहानी-संग्रह में संकलित है?
- वे दिन
- लाल टीन की छत
- परिंदे
- कव्वे और काला पानी
Explanation:
- ‘परिंदे’ कहानी इसी नाम के कहानी-संग्रह ‘परिंदे’ में संकलित है।
- कहानी-संग्रह का प्रकाशन 1960 ई. में हुआ था।
‘परिंदे’ कहानी को नई कहानी आंदोलन के संदर्भ में विशेष महत्व क्यों प्राप्त है?
- यह एक ऐतिहासिक कहानी है
- यह हास्य कहानी है
- डॉ. नामवर सिंह ने इसे नई कहानी आंदोलन की पहली कहानी माना
- यह पहली ग्रामीण कहानी है
Explanation:
- प्रसिद्ध आलोचक डॉ. नामवर सिंह ने ‘परिंदे’ को नई कहानी आंदोलन की पहली कहानी माना है।
- कहानी में बाहरी घटनाओं की अपेक्षा व्यक्ति की आंतरिक संवेदना और मानसिक स्थिति को प्रमुखता दी गई है।
‘परिंदे’ कहानी की मूल संवेदना क्या है?
- वीरता और देशभक्ति
- हास्य और मनोरंजन
- अकेलापन, मानसिक घुटन और अतीत की स्मृतियाँ
- ग्रामीण आर्थिक संघर्ष
Explanation:
- कहानी में अकेलापन, मानसिक घुटन और पुरानी स्मृतियों से मुक्ति की छटपटाहट प्रमुख है।
- अतीत का मोह और आधुनिक जीवन का बोध भी कहानी की केंद्रीय संवेदना से जुड़े हैं।
‘परिंदे’ की केंद्रीय पात्र कौन है?
- जूली
- मिस्टर ह्यूबर्ट
- लतिका
- डॉ. मुखर्जी
Explanation:
- लतिका कहानी की केंद्रीय पात्र है।
- वह अपने दिवंगत प्रेमी की स्मृतियों में बँधी हुई और अकेलेपन से पीड़ित स्त्री के रूप में चित्रित की गई है।
लतिका का पेशा क्या है?
- डॉक्टर
- संगीत शिक्षिका
- हॉस्टल की वार्डन
- नर्स
Explanation:
- लतिका कॉन्वेंट स्कूल के पहाड़ी हॉस्टल की वार्डन है।
- उसका बाहरी जीवन व्यवस्थित दिखाई देता है, लेकिन भीतर वह अपने अतीत और अकेलेपन से जूझती है।
‘परिंदे’ में लतिका किसकी स्मृतियों में खोई रहती है?
- डॉ. मुखर्जी
- मिस्टर ह्यूबर्ट
- कैप्टन गिरीश नेगी
- फादर एल्मंड
Explanation:
- लतिका अपने दिवंगत प्रेमी कैप्टन गिरीश नेगी की स्मृतियों में बँधी हुई है।
- गिरीश नेगी कहानी में मुख्यतः स्मृतियों और पत्रों के माध्यम से उपस्थित होता है।
कैप्टन गिरीश नेगी का लतिका से क्या संबंध था?
- भाई
- सहकर्मी
- प्रेमी
- शिक्षक
Explanation:
- गिरीश नेगी लतिका का प्रेमी था।
- उसकी मृत्यु के बाद भी उसकी स्मृतियाँ लतिका के जीवन पर गहरा प्रभाव बनाए रखती हैं।
कैप्टन गिरीश नेगी कहानी में किस रूप में उपस्थित है?
- प्रत्यक्ष पात्र के रूप में
- कथावाचक के रूप में
- स्मृतियों और पत्रों में उपस्थित अदृश्य पात्र के रूप में
- स्कूल के शिक्षक के रूप में
Explanation:
- गिरीश नेगी कहानी की वर्तमान घटनाओं में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित नहीं है।
- वह लतिका की स्मृतियों और पत्रों के माध्यम से कहानी में उपस्थित रहता है।
डॉ. मुखर्जी मूल रूप से कहाँ से आए थे?
- भारत
- नेपाल
- बर्मा
- श्रीलंका
Explanation:
- डॉ. मुखर्जी बर्मा से आए हुए डॉक्टर हैं।
- उन्होंने युद्ध की त्रासदी का अनुभव किया था।
डॉ. मुखर्जी का लतिका के प्रति दृष्टिकोण कैसा है?
- वे उसे अतीत में ही रहने की सलाह देते हैं
- वे उससे शत्रुता रखते हैं
- वे उसे अतीत से निकलकर वर्तमान में जीने की सलाह देते हैं
- वे उससे कोई बातचीत नहीं करते
Explanation:
- डॉ. मुखर्जी व्यावहारिक और जीवन के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण रखने वाले पात्र हैं।
- वे लतिका को पुरानी स्मृतियों से बाहर निकलकर वर्तमान जीवन को स्वीकार करने की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
मिस्टर ह्यूबर्ट का पेशा क्या है?
- डॉक्टर
- वार्डन
- संगीत शिक्षक
- फादर
Explanation:
- मिस्टर ह्यूबर्ट कॉन्वेंट स्कूल के संगीत शिक्षक हैं।
- वे लतिका से एकतरफा प्रेम करते हैं।
मिस्टर ह्यूबर्ट का लतिका के प्रति कैसा भाव है?
- घृणा
- मित्रता मात्र
- एकतरफा प्रेम
- शत्रुता
Explanation:
- मिस्टर ह्यूबर्ट लतिका से प्रेम करते हैं।
- उनका प्रेम एकतरफा है और उनका चरित्र भावुक तथा मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति के रूप में उभरता है।
‘परिंदे’ कहानी का वातावरण मुख्यतः कहाँ का है?
- समुद्र तट
- रेगिस्तान
- पहाड़ी कॉन्वेंट स्कूल और हॉस्टल
- बड़ा औद्योगिक शहर
Explanation:
- कहानी का वातावरण कुमाऊँ/नैनीताल के पहाड़ी क्षेत्र के कॉन्वेंट स्कूल और हॉस्टल से जुड़ा है।
- यह एकांत और पहाड़ी वातावरण कहानी के अकेलेपन तथा मानसिक घुटन की संवेदना को प्रभावी बनाता है।
जूली कौन है?
- डॉ. मुखर्जी की बेटी
- स्कूल की शिक्षिका
- हॉस्टल की छात्रा
- लतिका की बहन
Explanation:
- जूली हॉस्टल की छात्रा है।
- वह लतिका की सख्ती का शिकार होती है।
फादर एल्मंड का संबंध किससे है?
- अस्पताल से
- कचहरी से
- कॉन्वेंट स्कूल से
- सेना से
Explanation:
- फादर एल्मंड कॉन्वेंट स्कूल के फादर हैं।
- वे कहानी के स्कूल-परिवेश से जुड़े हुए पात्र हैं।
करीमुद्दीन कौन है?
- स्कूल का डॉक्टर
- संगीत शिक्षक
- हॉस्टल का नौकर
- सेना का अधिकारी
Explanation:
- करीमुद्दीन हॉस्टल में काम करने वाला नौकर है।
- वह कहानी के हॉस्टल परिवेश से जुड़े सहायक पात्रों में शामिल है।
‘परिंदे’ कहानी में लतिका का सबसे बड़ा मानसिक संघर्ष क्या है?
- धन की कमी
- नौकरी पाने की चिंता
- अतीत की स्मृतियों से मुक्त होकर वर्तमान को स्वीकार करना
- शहर छोड़ने की इच्छा
Explanation:
- लतिका अपने दिवंगत प्रेमी गिरीश नेगी की स्मृतियों से गहराई से जुड़ी हुई है।
- उसका अकेलापन और अतीत से जुड़ाव उसे वर्तमान जीवन को सहज रूप से स्वीकार करने में बाधा डालता है।
- यही मानसिक संघर्ष कहानी की केंद्रीय संवेदना को निर्मित करता है।
‘परिंदे’ कहानी का शीर्षक किस व्यापक भाव को व्यक्त करता है?
- केवल पक्षियों का जीवन
- युद्ध की विजय
- स्वतंत्रता, बंधन और जीवन की अनिश्चित उड़ान का प्रतीकात्मक भाव
- ग्रामीण कृषि जीवन
Explanation:
- ‘परिंदे’ शीर्षक कहानी की केंद्रीय संवेदना से जुड़ा प्रतीकात्मक अर्थ रखता है।
- पक्षियों की उड़ान स्वतंत्रता और मुक्ति की आकांक्षा से जुड़ती है।
- कहानी के पात्र भी अपने मानसिक बंधनों, स्मृतियों और अकेलेपन से निकलने की आकांक्षा रखते हैं।
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‘दिल्ली में एक मौत’ कहानी के रचनाकार कौन हैं?
- मोहन राकेश
- राजेंद्र यादव
- कमलेश्वर
- निर्मल वर्मा
Explanation:
- ‘दिल्ली में एक मौत’ के कहानीकार कमलेश्वर हैं।
- कमलेश्वर नई कहानी आंदोलन के प्रमुख कहानीकारों में गिने जाते हैं।
‘दिल्ली में एक मौत’ कहानी की मुख्य पृष्ठभूमि कैसी है?
- ग्रामीण जीवन
- ऐतिहासिक राजदरबार
- महानगरीय शहरी जीवन
- पौराणिक समाज
Explanation:
- कहानी आधुनिक महानगरीय जीवन की पृष्ठभूमि में है।
- इसके माध्यम से शहर के लोगों की व्यस्तता, औपचारिकता और संवेदनहीनता को सामने लाया गया है।
‘दिल्ली में एक मौत’ का केंद्रीय विषय क्या है?
- ग्रामीण गरीबी
- प्राकृतिक सौंदर्य
- महानगरीय जीवन की संवेदनहीनता और आत्मकेंद्रितता
- स्वतंत्रता आंदोलन
Explanation:
- कहानी में महानगरीय समाज की आत्मकेंद्रितता और संवेदनहीनता प्रमुख रूप से दिखाई देती है।
- मृत्यु जैसी गंभीर घटना भी लोगों की सामान्य दिनचर्या और औपचारिकताओं से आगे नहीं बढ़ पाती।
‘दिल्ली में एक मौत’ में किस प्रकार के शहरी जीवन का चित्रण किया गया है?
- सरल और सामुदायिक जीवन
- आदर्शवादी जीवन
- यांत्रिक, बनावटी और अमानवीय जीवन
- धार्मिक जीवन
Explanation:
- कहानी आधुनिक शहर के यांत्रिक और औपचारिक जीवन की वास्तविकता को प्रस्तुत करती है।
- मानवीय संवेदनाओं के स्थान पर व्यस्तता और सामाजिक दिखावे का प्रभाव दिखाई देता है।
कहानी का कथावाचक मुख्य रूप से किस भूमिका में है?
- मुख्य खलनायक
- व्यवसायी
- घटनाओं के दृष्टा और पर्यवेक्षक
- डॉक्टर
Explanation:
- कथावाचक कहानी की घटनाओं को देखता और उनका अनुभव करता है।
- वह आसपास के लोगों की संवेदनहीनता को पहचानता है और स्वयं को भी उसी सामाजिक ढर्रे का हिस्सा पाता है।
कहानी का कथावाचक कहाँ रहता है?
- पुरानी दिल्ली के एक मकान में
- गांव के एक घर में
- करोलबाग की एक बहुमंजिला इमारत के दीवानखाने में
- सेठ दीवानचंद की हवेली में
Explanation:
- कथावाचक करोलबाग की एक बहुमंजिला इमारत के दीवानखाने में रहता है।
- यही शहरी परिवेश कहानी में लोगों की सामाजिक दूरी और औपचारिकता को उभारता है।
‘दिल्ली में एक मौत’ में घटनाक्रम की शुरुआत किसकी मृत्यु से होती है?
- अतुल माथुर
- सरदार जी
- सेठ दीवानचंद
- कथावाचक
Explanation:
- सेठ दीवानचंद की मृत्यु कहानी के घटनाक्रम का प्रमुख आधार बनती है।
- उनकी मृत्यु के बाद आसपास के लोगों का व्यवहार कहानी की संवेदनहीनता को उजागर करता है।
सेठ दीवानचंद किस रूप में प्रसिद्ध थे?
- शिक्षक
- डॉक्टर
- धनी व्यवसायी
- सरकारी अधिकारी
Explanation:
- सेठ दीवानचंद करोलबाग के प्रसिद्ध और धनी व्यवसायी थे।
- जीवन में उनके पास धन और प्रतिष्ठा थी, लेकिन मृत्यु के बाद उनकी स्थिति औपचारिकता तक सीमित दिखाई देती है।
सेठ दीवानचंद की मृत्यु कहानी में किस बात को उजागर करती है?
- धन की शक्ति
- ग्रामीण एकता
- मृत्यु के प्रति शहरी समाज की संवेदनहीनता
- धार्मिक आस्था
Explanation:
- सेठ दीवानचंद की मृत्यु के बाद लोगों की प्रतिक्रियाओं से महानगरीय संवेदनहीनता सामने आती है।
- मृत्यु जैसी गंभीर घटना भी लोगों के लिए सामाजिक औपचारिकता बन जाती है।
अतुल माथुर का कथावाचक से क्या संबंध है?
- भाई
- सहकर्मी
- मित्र/पड़ोसी
- रिश्तेदार
Explanation:
- अतुल माथुर कथावाचक का मित्र और पड़ोसी है।
- वह अपने व्यवसाय और सामाजिक औपचारिकताओं में व्यस्त रहने वाले शहरी वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है।
अतुल माथुर का व्यवहार किस शहरी मानसिकता को दर्शाता है?
- त्याग और सेवा
- आध्यात्मिकता
- व्यस्तता और औपचारिकता
- क्रांतिकारी चेतना
Explanation:
- अतुल माथुर व्यवसाय और अपनी दिनचर्या में व्यस्त रहता है।
- उसके व्यवहार के माध्यम से महानगरीय जीवन की आत्मकेंद्रित प्रवृत्ति को दिखाया गया है।
सरदार जी शवयात्रा में मुख्यतः क्यों शामिल होते हैं?
- सेठ दीवानचंद के घनिष्ठ मित्र होने के कारण
- धार्मिक कर्तव्य के कारण
- ताकि लोग यह न कहें कि पड़ोसी होने के बावजूद वे नहीं आए
- व्यापारिक संबंधों के कारण
Explanation:
- सरदार जी का शवयात्रा में शामिल होना सामाजिक औपचारिकता से प्रेरित है।
- यह प्रसंग दिखाता है कि सामाजिक प्रतिष्ठा और लोगों की राय कई बार वास्तविक संवेदना पर भारी पड़ती है।
श्रीमती भटनागर और अन्य मध्यमवर्गीय पात्र किस मानसिकता का प्रतिनिधित्व करते हैं?
- राष्ट्रीय चेतना
- आध्यात्मिक चिंतन
- दैनिक दिनचर्या में उलझी संवेदनहीन मानसिकता
- ग्रामीण सामुदायिक भावना
Explanation:
- इन पात्रों के लिए किसी की मृत्यु भी रोजमर्रा की जिंदगी में एक मामूली रुकावट जैसी दिखाई देती है।
- अखबार पढ़ना, चाय पीना और काम पर जाना जैसी दिनचर्या मृत्यु की गंभीरता पर भारी पड़ती है।
‘दिल्ली में एक मौत’ में मृत्यु के प्रति लोगों का व्यवहार कैसा दिखाई देता है?
- अत्यधिक भावुक
- पूरी तरह धार्मिक
- औपचारिक और संवेदनहीन
- सामुदायिक और आत्मीय
Explanation:
- कहानी में मृत्यु के अवसर पर लोगों की संवेदना औपचारिक दिखाई देती है।
- वे अपनी सामान्य दिनचर्या और निजी कार्यों को अधिक महत्व देते हैं।
‘दिल्ली में एक मौत’ में कथावाचक को किस भावना का अनुभव होता है?
- गर्व
- उत्साह
- आत्म-ग्लानि और अंतर्द्वंद्व
- क्रोध मात्र
Explanation:
- कथावाचक दूसरों की संवेदनहीनता को देखता है।
- उसे यह महसूस होता है कि वह स्वयं भी उसी सामाजिक ढर्रे का हिस्सा बन गया है।
- इसी कारण उसके भीतर आत्म-ग्लानि और अंतर्द्वंद्व पैदा होता है।
‘दिल्ली में एक मौत’ कहानी में किस सामाजिक वर्ग का चित्रण प्रमुख है?
- किसान वर्ग
- राजघराना
- शहरी मध्यमवर्गीय समाज
- आदिवासी समाज
Explanation:
- कहानी में महानगरीय मध्यमवर्गीय जीवन की मानसिकता प्रमुख रूप से सामने आती है।
- दैनिक व्यस्तता, सामाजिक दिखावा और संवेदनहीनता इसके महत्वपूर्ण पहलू हैं।
‘दिल्ली में एक मौत’ की शैली की प्रमुख विशेषता क्या है?
- पौराणिकता
- रोमांटिक कल्पना
- यथार्थवादी और व्यंग्यात्मक चित्रण
- वीरगाथात्मक वर्णन
Explanation:
- कहानी आधुनिक शहरी जीवन की वास्तविक परिस्थितियों को सामने लाती है।
- कमलेश्वर ने व्यंग्य के माध्यम से सामाजिक औपचारिकता और मानवीय संवेदनहीनता को प्रभावी ढंग से उजागर किया है।
‘दिल्ली में एक मौत’ किस प्रकार की सामाजिक विडंबना को सामने लाती है?
- गरीबों की आर्थिक समस्या
- शिक्षा का अभाव
- मृत्यु जैसी गंभीर घटना का भी सामाजिक औपचारिकता में बदल जाना
- ग्रामीण बेरोजगारी
Explanation:
- कहानी की प्रमुख विडंबना यही है कि मृत्यु जैसी संवेदनशील घटना भी शहरी समाज में औपचारिकता बन जाती है।
- लोग सामाजिक प्रतिष्ठा और अपनी दिनचर्या को वास्तविक मानवीय संवेदना से ऊपर रखते दिखाई देते हैं।
‘दिल्ली में एक मौत’ में करोलबाग का परिवेश किस बात को उभारता है?
- ग्रामीण संस्कृति
- राजसी वैभव
- महानगरीय जीवन की सामाजिक दूरी और व्यस्तता
- प्राकृतिक सौंदर्य
Explanation:
- करोलबाग का शहरी परिवेश कहानी के पात्रों की जीवनशैली को समझने में महत्वपूर्ण है।
- बहुमंजिला इमारत और उसके निवासी आधुनिक शहर की भीड़ में रहते हुए भी एक-दूसरे से भावनात्मक रूप से दूर दिखाई देते हैं।
‘दिल्ली में एक मौत’ का मूल संदेश क्या है?
- धन ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है
- शहरी जीवन आदर्श है
- आधुनिक महानगरीय जीवन में मानवीय संवेदनाओं के क्षरण पर प्रश्न उठाना
- मृत्यु का उत्सव मनाना
Explanation:
- कहानी आधुनिक शहरी जीवन की आत्मकेंद्रितता, बनावटीपन और संवेदनहीनता पर प्रश्न उठाती है।
- सेठ दीवानचंद की मृत्यु के बहाने कमलेश्वर ने यह दिखाया है कि सामाजिक निकटता के बावजूद लोग भावनात्मक रूप से कितने दूर हो सकते हैं।
- कथावाचक का आत्म-ग्लानि और अंतर्द्वंद्व कहानी को केवल सामाजिक व्यंग्य न रखकर आत्मचिंतन का रूप भी देता है।
Hindi
‘वापसी’ कहानी की कहानीकार कौन हैं?
- मन्नू भंडारी
- कृष्णा सोबती
- उषा प्रियंवदा
- महादेवी वर्मा
Explanation:
- ‘वापसी’ की कहानीकार उषा प्रियंवदा हैं।
- कहानी आधुनिक मध्यमवर्गीय परिवार और बदलते पारिवारिक संबंधों की संवेदनशील तस्वीर प्रस्तुत करती है।
‘वापसी’ कहानी का प्रकाशन वर्ष क्या है?
- 1954 ई.
- 1960 ई.
- 1965 ई.
- 1970 ई.
Explanation:
- ‘वापसी’ कहानी का प्रकाशन 1960 ई. में हुआ।
- बाद में इसे ‘एक कोई दूसरा’ और ‘कितने चौराहे’ आदि संग्रहों में संकलित किया गया।
‘वापसी’ कहानी का केंद्रीय विषय क्या है?
- ग्रामीण जीवन
- स्वतंत्रता आंदोलन
- सेवानिवृत्ति के बाद बुजुर्ग की पारिवारिक उपेक्षा
- औद्योगिक विकास
Explanation:
- कहानी सेवानिवृत्ति के बाद परिवार में बुजुर्ग व्यक्ति की बदलती स्थिति को सामने लाती है।
- गजाधर बाबू अपने ही परिवार में भावनात्मक रूप से उपेक्षित और अप्रासंगिक महसूस करते हैं।
‘वापसी’ कहानी के केंद्रीय पात्र कौन हैं?
- गणेशी
- अमर
- गजाधर बाबू
- नरेंद्र
Explanation:
- गजाधर बाबू कहानी के केंद्रीय पात्र हैं।
- वे रेलवे में 35 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त होकर अपने परिवार के पास लौटते हैं।
गजाधर बाबू ने कितने वर्षों तक रेलवे में सेवा की थी?
- 25 वर्ष
- 30 वर्ष
- 35 वर्ष
- 40 वर्ष
Explanation:
- गजाधर बाबू ने रेलवे में 35 वर्षों तक सेवा की थी।
- सेवानिवृत्ति के बाद वे परिवार के साथ रहने की उम्मीद लेकर घर लौटते हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद गजाधर बाबू घर क्यों लौटते हैं?
- व्यापार शुरू करने के लिए
- नया घर बनाने के लिए
- परिवार के साथ सुखी जीवन बिताने की आशा से
- फिर से नौकरी करने के लिए
Explanation:
- गजाधर बाबू ने लंबे समय तक परिवार से दूर रहकर नौकरी की थी।
- वे सोचते हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद परिवार के साथ समय बिताएंगे और सुखी जीवन जिएंगे।
गजाधर बाबू के चरित्र की प्रमुख विशेषता क्या है?
- कठोरता
- स्वार्थपरता
- स्नेह, सहृदयता और परिवार-प्रेम
- अहंकार
Explanation:
- गजाधर बाबू स्नेही, सहृदय और भावुक व्यक्ति हैं।
- उनकी सबसे बड़ी इच्छा परिवार के साथ अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव प्राप्त करना है।
गजाधर बाबू की पत्नी मुख्य रूप से किसमें व्यस्त रहती है?
- सामाजिक कार्यों में
- व्यापार में
- घर के कामकाज, रसोई और बच्चों के गृहस्थ जीवन में
- नौकरी में
Explanation:
- गजाधर बाबू की पत्नी घरेलू कामकाज और बच्चों के गृहस्थ जीवन में उलझी रहती है।
- वह गजाधर बाबू की भावनात्मक आवश्यकताओं को समझ नहीं पाती।
‘वापसी’ में गजाधर बाबू और उनके परिवार के बीच किस प्रकार की समस्या दिखाई देती है?
- आर्थिक समृद्धि
- सांस्कृतिक एकता
- पीढ़ियों के बीच वैचारिक अंतराल
- राजनीतिक संघर्ष
Explanation:
- कहानी में Generation Gap अर्थात पीढ़ियों के बीच वैचारिक अंतराल प्रमुख समस्या है।
- पुरानी पीढ़ी की अपेक्षाएं और नई पीढ़ी की स्वतंत्र जीवन-शैली आपस में मेल नहीं खातीं।
अमर गजाधर बाबू का कौन है?
- छोटा भाई
- छोटा बेटा
- बड़ा बेटा
- भतीजा
Explanation:
- अमर गजाधर बाबू का बड़ा बेटा है।
- वह अपनी अलग दुनिया और पत्नी के प्रभाव में रहने वाला आधुनिक सोच का युवक है।
नरेंद्र का गजाधर बाबू से क्या संबंध है?
- बड़ा बेटा
- छोटा बेटा
- भाई
- दामाद
Explanation:
- नरेंद्र गजाधर बाबू का छोटा बेटा है।
- वह पिता की उपस्थिति को अपनी स्वतंत्रता में बाधा के रूप में देखता है।
‘वापसी’ में बसंती कौन है?
- गजाधर बाबू की पत्नी
- बड़ी विवाहित बेटी
- गजाधर बाबू की छोटी बेटी
- अमर की पत्नी
Explanation:
- बसंती गजाधर बाबू की छोटी बेटी है।
- वह आधुनिक जीवन-शैली और अपनी स्वतंत्रता को महत्व देती है तथा पिता की रोक-टोक पसंद नहीं करती।
कांति का गजाधर बाबू से क्या संबंध है?
- पत्नी
- बहू
- बड़ी विवाहित बेटी
- छोटी बेटी
Explanation:
- कांति गजाधर बाबू की बड़ी बेटी है।
- वह विवाहित है और अपने ससुराल में रहती है।
गणेशी कौन है?
- गजाधर बाबू का बेटा
- गजाधर बाबू का पड़ोसी
- रेलवे स्टेशन का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और साथी
- गांव का दुकानदार
Explanation:
- गणेशी रेलवे स्टेशन पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है।
- वह गजाधर बाबू का सम्मान करता है और उनकी भावनात्मक जरूरतों को समझता है।
गणेशी और गजाधर बाबू के संबंध की प्रमुख विशेषता क्या है?
- व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा
- राजनीतिक संबंध
- सम्मान और भावनात्मक समझ
- पारिवारिक विवाद
Explanation:
- गणेशी गजाधर बाबू का सम्मान करता है।
- वह उनके अकेलेपन और भावनात्मक आवश्यकताओं को समझने वाला व्यक्ति है।
‘वापसी’ कहानी में गजाधर बाबू की पीड़ा का मुख्य कारण क्या है?
- नौकरी का दबाव
- आर्थिक संकट
- अपने ही परिवार में उपेक्षित और अप्रासंगिक हो जाना
- बीमारी
Explanation:
- गजाधर बाबू ने परिवार के लिए जीवन का बड़ा हिस्सा नौकरी में बिताया।
- सेवानिवृत्ति के बाद वे परिवार से अपनापन चाहते हैं, लेकिन परिवार में उनकी भूमिका पहले जैसी नहीं रह गई है।
- यही भावनात्मक उपेक्षा उनकी सबसे बड़ी पीड़ा बनती है।
‘वापसी’ कहानी में आधुनिक मध्यमवर्गीय परिवार की कौन-सी प्रवृत्ति दिखाई देती है?
- सामूहिकता
- त्याग
- आत्मकेंद्रितता और एकाकीपन
- सामाजिक सेवा
Explanation:
- कहानी आधुनिक मध्यमवर्गीय परिवार की आत्मकेंद्रित प्रवृत्ति को उजागर करती है।
- परिवार के सदस्य अपनी-अपनी आवश्यकताओं और स्वतंत्रता में अधिक केंद्रित हैं।
‘वापसी’ शीर्षक का मुख्य अर्थ किससे जुड़ा है?
- नई नौकरी में लौटना
- विदेश से लौटना
- सेवानिवृत्ति के बाद गजाधर बाबू का परिवार में लौटना
- यात्रा से लौटना
Explanation:
- ‘वापसी’ का सीधा संबंध गजाधर बाबू के सेवानिवृत्ति के बाद घर लौटने से है।
- लेकिन कहानी में यह वापसी केवल भौतिक नहीं, बल्कि अपनापन और पारिवारिक संबंध पाने की उनकी भावनात्मक आकांक्षा से भी जुड़ी है।
‘वापसी’ कहानी में गजाधर बाबू के माध्यम से किस वर्ग की समस्या सामने आती है?
- युवा वर्ग
- किसान वर्ग
- सेवानिवृत्त और वृद्ध वर्ग
- व्यापारी वर्ग
Explanation:
- गजाधर बाबू सेवानिवृत्ति के बाद परिवार में अपनी बदलती स्थिति का अनुभव करते हैं।
- उनके माध्यम से वृद्ध और सेवानिवृत्त व्यक्ति की पारिवारिक उपेक्षा तथा अकेलेपन की समस्या सामने आती है।
‘वापसी’ कहानी की मूल संवेदना क्या है?
- देशभक्ति
- प्रकृति-प्रेम
- पारिवारिक उपेक्षा, अकेलापन और बुजुर्ग की अप्रासंगिकता
- युद्ध और वीरता
Explanation:
- कहानी का केंद्र सेवानिवृत्ति के बाद गजाधर बाबू की भावनात्मक स्थिति है।
- वे अपने ही घर में अजनबी जैसा अनुभव करते हैं।
- कहानी आधुनिक परिवारों में पीढ़ियों के अंतराल, आत्मकेंद्रितता और बुजुर्गों के अकेलेपन को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है।
Hindi
‘अभिशप्त’ कहानी के कहानीकार कौन हैं?
- प्रेमचंद
- फणीश्वर नाथ ‘रेणु’
- यशपाल
- जैनेन्द्र कुमार
Explanation:
- ‘अभिशप्त’ के कहानीकार यशपाल हैं।
- यशपाल हिंदी के प्रमुख प्रगतिवादी और मार्क्सवादी चेतना से जुड़े कथाकार हैं।
‘अभिशप्त’ कहानी का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1939 ई.
- 1943 ई.
- 1946 ई.
- 1950 ई.
Explanation:
- ‘अभिशप्त’ का प्रकाशन 1943 ई. से संबंधित है।
- यह कहानी यशपाल की प्रगतिवादी विचारधारा को अभिव्यक्त करती है।
‘अभिशप्त’ कहानी की मूल संवेदना क्या है?
- प्रकृति-सौंदर्य
- रोमांटिक प्रेम
- सामाजिक-आर्थिक विषमता
- ऐतिहासिक गौरव
Explanation:
- कहानी में गरीब और शोषित वर्ग की आर्थिक तथा सामाजिक स्थिति को केंद्र में रखा गया है।
- यशपाल सामाजिक विषमता और शोषण के कारण उत्पन्न पीड़ा को उजागर करते हैं।
‘अभिशप्त’ कहानी का केंद्रीय पात्र कौन है?
- साहूकार
- जमींदार
- रघुआ
- धर्मगुरु
Explanation:
- रघुआ कहानी का केंद्रीय और शोषित पात्र है।
- वह अत्यंत निर्धन और असहाय वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है।
रघुआ किस सामाजिक वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है?
- धनी पूंजीपति वर्ग
- उच्च प्रशासनिक वर्ग
- गरीब और शोषित वर्ग
- सामंती वर्ग
Explanation:
- रघुआ समाज के सबसे निचले और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का प्रतिनिधि है।
- उसका जीवन आर्थिक विषमता और सामाजिक शोषण की वास्तविकता को सामने लाता है।
रघुआ के चरित्र की प्रमुख विशेषता क्या है?
- आलस्य
- कुटिलता
- ईमानदारी और मेहनत
- धन-संग्रह की प्रवृत्ति
Explanation:
- रघुआ ईमानदार और मेहनती व्यक्ति है।
- इसके बावजूद सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां उसे गरीबी से बाहर नहीं निकलने देतीं।
यशपाल की ‘अभिशप्त’ कहानी किस विचारधारा से प्रभावित है?
- छायावादी विचारधारा
- रहस्यवादी विचारधारा
- मार्क्सवादी/प्रगतिवादी विचारधारा
- आध्यात्मिक विचारधारा
Explanation:
- यशपाल प्रगतिवादी कहानी आंदोलन के प्रमुख प्रतिनिधि कथाकार हैं।
- उनकी रचनाओं में वर्ग-संघर्ष, आर्थिक विषमता और सामाजिक न्याय जैसे विषय प्रमुखता से आते हैं।
‘अभिशप्त’ कहानी में गरीबी को किस रूप में देखने का विरोध किया गया है?
- सामाजिक समस्या के रूप में
- आर्थिक समस्या के रूप में
- भाग्य का परिणाम मानने के रूप में
- व्यवस्था की समस्या के रूप में
Explanation:
- कहानी का केंद्रीय विचार भाग्यवाद पर प्रश्न उठाता है।
- गरीबी को किसी दैवीय श्राप के बजाय सामाजिक-आर्थिक विषमता से जोड़कर देखा गया है।
‘अभिशप्त’ कहानी में किस सामाजिक समस्या पर व्यंग्य किया गया है?
- वैज्ञानिक प्रगति
- शिक्षा का प्रसार
- सामाजिक विषमता
- राष्ट्रीय आंदोलन
Explanation:
- कहानी गरीब की दुर्दशा को भाग्य का परिणाम बताने वाली मानसिकता पर व्यंग्य करती है।
- साथ ही वर्ग-विभाजित समाज और आर्थिक शोषण की आलोचना करती है।
यशपाल के प्रमुख कहानी-संग्रहों में से कौन-सा है?
- गुनाहों का देवता
- आषाढ़ का एक दिन
- पिंजड़े की उड़ान
- आधे-अधूरे
Explanation:
- ‘पिंजड़े की उड़ान’ यशपाल का प्रमुख कहानी-संग्रह है।
- यशपाल के अन्य कहानी-संग्रहों में ‘ज्ञानदान’, ‘तर्क का तूफान’, ‘भस्मावृत चिंगारी’ आदि शामिल हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा यशपाल का कहानी-संग्रह है?
- राग दरबारी
- मैला आँचल
- तर्क का तूफान
- गबन
Explanation:
- ‘तर्क का तूफान’ यशपाल का कहानी-संग्रह है।
- यशपाल की कहानियों में सामाजिक यथार्थ और प्रगतिवादी चेतना का प्रभाव मिलता है।
‘अभिशप्त’ कहानी का दुखांत निष्कर्ष किस बात को उजागर करता है?
- गरीब व्यक्ति की आर्थिक सफलता
- साहूकारों के सुधार
- शोषण-चक्र से बाहर निकलने में गरीब की कठिनाई
- सामाजिक समानता की स्थापना
Explanation:
- रघुआ लगातार संघर्ष करने के बावजूद गरीबी और शोषण के चक्र से मुक्त नहीं हो पाता।
- उसकी दुखद स्थिति सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था की कठोरता को उजागर करती है।
‘अभिशप्त’ कहानी का केंद्रीय संदेश क्या है?
- गरीबी केवल भाग्य का परिणाम है
- धन ही जीवन का उद्देश्य है
- गरीबी और शोषण सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था से जुड़े प्रश्न हैं, केवल भाग्य का परिणाम नहीं
- गरीब व्यक्ति को परिस्थितियों को स्वीकार कर लेना चाहिए
Explanation:
- यशपाल कहानी के माध्यम से भाग्यवाद की धारणा पर प्रश्न उठाते हैं।
- कहानी सामाजिक-आर्थिक विषमता, वर्ग-संघर्ष और शोषण की ओर ध्यान आकर्षित करती है।
- इसका मूल संदेश सामाजिक न्याय और शोषणकारी व्यवस्था के विरुद्ध चेतना से जुड़ा है।
Hindi
‘मिसपाल’ कहानी के कहानीकार कौन हैं?
- कमलेश्वर
- राजेंद्र यादव
- मोहन राकेश
- निर्मल वर्मा
Explanation:
- ‘मिसपाल’ के कहानीकार मोहन राकेश हैं।
- मोहन राकेश हिंदी की नई कहानी आंदोलन के प्रमुख कहानीकारों में गिने जाते हैं।
‘मिसपाल’ कहानी की मुख्य संवेदना किससे संबंधित है?
- ग्रामीण जीवन
- ऐतिहासिक संघर्ष
- नारी संघर्ष
- धार्मिक जीवन
Explanation:
- कहानी आधुनिक आत्मनिर्भर स्त्री के जीवन, अकेलेपन और मानसिक व्यथा को सामने लाती है।
- समाज के संकीर्ण दृष्टिकोण और पुरुष-प्रधान सोच के कारण उत्पन्न समस्याएं कहानी में महत्वपूर्ण हैं।
‘मिसपाल’ कहानी का केंद्रीय पात्र कौन है?
- रंजीत
- जोरावर
- बक्शी
- मिसपाल
Explanation:
- मिसपाल कहानी की केंद्रीय पात्र है।
- उसके जीवन, संघर्ष, अकेलेपन और स्वतंत्र अस्तित्व की तलाश के माध्यम से कहानी विकसित होती है।
मिसपाल किस प्रकार की महिला है?
- आश्रित और रूढ़िवादी
- गृहिणी और परंपरावादी
- आत्मनिर्भर और स्वतंत्र विचारों वाली
- राजनीतिक कार्यकर्ता और स्वतंत्र विचारों वाली
Explanation:
- मिसपाल एक आत्मनिर्भर और स्वतंत्र विचारों वाली अविवाहित महिला है।
- वह अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने की इच्छा रखती है।
मिसपाल प्रारंभ में किस शहर में नौकरी करती है?
- मुंबई
- शिमला
- दिल्ली
- लखनऊ
Explanation:
- मिसपाल दिल्ली के एक दफ्तर में काम करती है।
- दफ्तर का वातावरण और सहकर्मियों का व्यवहार उसके मानसिक संघर्ष का महत्वपूर्ण कारण बनता है।
बाद में मिसपाल कहाँ जाकर रहने लगती है?
- जयपुर
- मनाली
- कुल्लू
- देहरादून
Explanation:
- मिसपाल बाद में कुल्लू, हिमाचल प्रदेश में रहने लगती है।
- वह महानगरीय जीवन और दफ्तर के वातावरण से दूर एक अलग जीवन की तलाश करती है।
‘मिसपाल’ में रंजीत का क्या संबंध है?
- मिसपाल का भाई
- मिसपाल का पति
- मिसपाल का पूर्व सहकर्मी
- मिसपाल का पड़ोसी
Explanation:
- रंजीत मिसपाल का पूर्व सहकर्मी है।
- वह कुल्लू जाकर मिसपाल से मिलता है और उसके जीवन तथा मानसिक स्थिति को निकट से देखता है।
रंजीत ‘मिसपाल’ कहानी में किस भूमिका में दिखाई देता है?
- खलनायक
- राजनीतिक नेता
- कथावाचक और पर्यवेक्षक
- दफ्तर का अधिकारी
Explanation:
- रंजीत कहानी का कथावाचक है।
- वह मिसपाल के जीवन को एक मित्र और दर्शक के रूप में देखता है तथा पाठक को उसके बारे में जानकारी देता है।
दिल्ली के दफ्तर में सहकर्मी मिसपाल का मजाक मुख्यतः किस आधार पर उड़ाते थे?
- उसकी पढ़ाई के कारण
- उसकी भाषा के कारण
- उसके पहनावे, शरीर और स्वभाव के कारण
- उसकी नौकरी के कारण
Explanation:
- दफ्तर के सहकर्मी मिसपाल के पहनावे, शरीर और स्वभाव को लेकर उसका मजाक उड़ाते थे।
- यह व्यवहार समाज की संकीर्ण मानसिकता और स्त्री के प्रति रूढ़ दृष्टिकोण को दर्शाता है।
मिसपाल किन कलाओं में रुचि रखती है?
- नृत्य और अभिनय
- कविता और नाटक
- संगीत और चित्रकला
- फोटोग्राफी और मूर्तिकला
Explanation:
- मिसपाल कला-प्रेमी स्त्री है।
- उसे संगीत और चित्रकला में विशेष रुचि है।
‘मिसपाल’ कहानी में महानगरीय जीवन का कौन-सा पक्ष उभरता है?
- आर्थिक समृद्धि
- मनोरंजन
- घुटन, अकेलापन और सामाजिक संकीर्णता
- केवल पारिवारिक सुख
Explanation:
- कहानी महानगरीय कामकाजी जीवन के तनाव और घुटन को सामने लाती है।
- मिसपाल का अकेलापन और सहकर्मियों का व्यवहार इस वातावरण की संवेदनहीनता को उजागर करता है।
मिसपाल के प्रति दफ्तर के सहकर्मियों का व्यवहार किस समस्या को उजागर करता है?
- शैक्षिक असमानता
- ग्रामीण गरीबी
- दफ्तर की राजनीति और लैंगिक संकीर्णता
- भाषाई विवाद
Explanation:
- जोरावर, बक्शी आदि सहकर्मियों का व्यवहार मिसपाल के प्रति असंवेदनशील है।
- उनकी टिप्पणियां और मजाक कार्यस्थल पर मौजूद संकीर्ण सामाजिक मानसिकता को सामने लाते हैं।
मिसपाल के चरित्र की प्रमुख विशेषता क्या है?
- चापलूसी
- कायरता
- स्वाभिमान
- राजनीतिक महत्वाकांक्षा
Explanation:
- मिसपाल स्वाभिमानी और स्वतंत्र विचारों वाली महिला है।
- वह दूसरों की रूढ़ धारणाओं के अनुसार स्वयं को ढालने के बजाय अपने अस्तित्व को बनाए रखने का प्रयास करती है।
‘मिसपाल’ कहानी में अकेलापन किस पात्र के माध्यम से सबसे अधिक उभरता है?
- रंजीत
- जोरावर
- मिसपाल
- बक्शी
Explanation:
- मिसपाल आत्मनिर्भर होने के बावजूद भावनात्मक और सामाजिक अकेलेपन से पीड़ित है।
- उसका अकेलापन आधुनिक शहरी जीवन और सामाजिक अस्वीकार की समस्या से जुड़ा है।
रंजीत मिसपाल से मिलने कहाँ जाता है?
- दिल्ली
- शिमला
- कुल्लू
- चंडीगढ़
Explanation:
- मिसपाल के कुल्लू चले जाने के बाद रंजीत उससे मिलने वहां जाता है।
- इस मुलाकात के माध्यम से उसके वर्तमान जीवन और मानसिक स्थिति को समझने का अवसर मिलता है।
‘मिसपाल’ कहानी किस सामाजिक मानसिकता पर प्रश्न उठाती है?
- वैज्ञानिक सोच
- राष्ट्रीय चेतना
- रूढ़िवादी दृष्टिकोण
- लोकतांत्रिक व्यवस्था
Explanation:
- कहानी स्त्री को पारंपरिक सामाजिक मापदंडों में बांधने वाली मानसिकता पर प्रश्न उठाती है।
- मिसपाल का जीवन इस बात को सामने लाता है कि आत्मनिर्भर स्त्री को भी सामाजिक पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ सकता है।
Hindi
‘आधे-अधूरे’ नाटक के रचनाकार कौन हैं?
- धर्मवीर भारती
- जयशंकर प्रसाद
- मोहन राकेश
- लक्ष्मीनारायण लाल
Explanation:
- ‘आधे-अधूरे’ के रचनाकार मोहन राकेश हैं।
- यह आधुनिक हिंदी रंगमंच का प्रसिद्ध नाटक है।
‘आधे-अधूरे’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1965 ई.
- 1967 ई.
- 1969 ई.
- 1972 ई.
Explanation:
- ‘आधे-अधूरे’ का प्रकाशन 1969 ई. में हुआ।
- नाटक में समकालीन मध्यमवर्गीय परिवार के जीवन-संघर्ष को केंद्र में रखा गया है।
‘आधे-अधूरे’ किस विधा की रचना है?
- उपन्यास
- कहानी
- नाटक
- निबंध
Explanation:
- ‘आधे-अधूरे’ एक नाटक है।
- इसमें मध्यमवर्गीय पारिवारिक जीवन की समस्याओं और संबंधों के तनाव का चित्रण किया गया है।
‘आधे-अधूरे’ का मूल विषय क्या है?
- ऐतिहासिक युद्ध
- ग्रामीण जीवन
- मध्यमवर्गीय परिवार का बिखराव और ‘पूर्णता’ की तलाश
- पौराणिक कथा
Explanation:
- नाटक में समकालीन मध्यमवर्गीय परिवार के टूटते संबंधों और मानसिक घुटन को दिखाया गया है।
- ‘पूर्णता’ की तलाश नाटक का एक महत्वपूर्ण केंद्रीय प्रश्न है।
‘आधे-अधूरे’ में किस वर्ग के जीवन का चित्रण प्रमुखता से किया गया है?
- ग्रामीण किसान वर्ग
- उच्च राजघराना
- मध्यमवर्गीय परिवार
- औद्योगिक मजदूर वर्ग
Explanation:
- नाटक की कथा एक समकालीन मध्यमवर्गीय परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है।
- आर्थिक-सामाजिक तनाव और पारिवारिक असंतोष इसके प्रमुख पक्ष हैं।
‘आधे-अधूरे’ की केंद्रीय स्त्री पात्र कौन है?
- बिन्नी
- किन्नी
- सावित्री
- मनोज
Explanation:
- सावित्री नाटक की केंद्रीय स्त्री पात्र है।
- वह कामकाजी महिला है और अपने जीवन में ‘पूर्ण पुरुष’ की तलाश करती रहती है।
सावित्री का पति कौन है?
- जगमोहन
- जूनेजा
- महेंद्रनाथ
- सिंहानिया
Explanation:
- महेंद्रनाथ सावित्री का पति है।
- उसे असफल और अकर्मण्य पुरुष के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसने अपनी पहचान और आत्मविश्वास खो दिया है।
महेंद्रनाथ के चरित्र की प्रमुख विशेषता क्या है?
- अत्यंत सफल और प्रभावशाली होना
- वीर और साहसी होना
- असफल और अकर्मण्य होना
- राजनीतिक रूप से सक्रिय होना
Explanation:
- महेंद्रनाथ आर्थिक और व्यक्तिगत स्तर पर असफल व्यक्ति के रूप में सामने आता है।
- उसके चरित्र में आत्मविश्वास की कमी और अपनी पहचान खो देने की स्थिति दिखाई देती है।
सावित्री किस प्रकार की महिला है?
- गृहस्थ जीवन से पूर्णतः संतुष्ट महिला
- राजनीतिक कार्यकर्ता
- कामकाजी महिला
- ग्रामीण किसान महिला
Explanation:
- सावित्री एक कामकाजी महिला है।
- वह अपने पारिवारिक जीवन से संतुष्ट नहीं है और अपने जीवन में पूर्णता की तलाश करती है।
‘आधे-अधूरे’ में काले कपड़ों वाला पुरुष किस रूप में प्रस्तुत होता है?
- सिर्फ सावित्री का बॉस
- केवल महेंद्रनाथ का मित्र
- सूत्रधार के रूप में
- सावित्री का भाई
Explanation:
- काले कपड़ों वाला पुरुष नाटक के आरंभ में आता है और अंत में भी वही चरित्र प्रस्तुत होता है।
- वह नाटक की संरचना में सूत्रधार जैसी भूमिका निभाता है।
‘आधे-अधूरे’ में सिंहानिया कौन है?
- महेंद्रनाथ का मित्र
- बिन्नी का पति
- सावित्री का बॉस
- अशोक का शिक्षक
Explanation:
- सिंहानिया सावित्री का बॉस है।
- वह नाटक के उन पुरुष पात्रों में से एक है जिनकी भूमिका एक ही अभिनेता निभाता है।
‘आधे-अधूरे’ में जगमोहन का सावित्री से क्या संबंध है?
- भाई
- पुत्र
- पुराना प्रेमी/मित्र
- बॉस
Explanation:
- जगमोहन सावित्री का पुराना प्रेमी/मित्र है।
- उसका पात्र सावित्री के जीवन में ‘पूर्णता’ की तलाश को समझने में महत्वपूर्ण है।
जूनेजा का महेंद्रनाथ से क्या संबंध है?
- भाई
- पिता
- दोस्त और साझेदार
- बॉस
Explanation:
- जूनेजा महेंद्रनाथ का दोस्त और साझेदार है।
- वह भी उन पुरुष पात्रों में शामिल है जिनकी भूमिका एक ही अभिनेता द्वारा निभाई जाती है।
‘आधे-अधूरे’ में महेंद्रनाथ, सिंहानिया, जगमोहन और जूनेजा की भूमिका किस विशेषता से जुड़ी है?
- चारों पात्र महिलाएँ हैं
- चारों पात्र एक ही परिवार के सदस्य हैं
- चारों की भूमिका एक ही अभिनेता निभाता है
- चारों पात्र मंच पर एक साथ उपस्थित रहते हैं
Explanation:
- महेंद्रनाथ, सिंहानिया, जगमोहन और जूनेजा की भूमिकाएँ एक ही अभिनेता निभाता है।
- यह नाटकीय तकनीक सावित्री के जीवन में पुरुषों की समानता और उसकी अधूरी ‘पूर्णता’ की तलाश को प्रतीकात्मक रूप से सामने लाती है।
बिन्नी ‘आधे-अधूरे’ में सावित्री की कौन है?
- बहन
- छोटी बेटी
- बड़ी बेटी
- मित्र
Explanation:
- बिन्नी सावित्री की बड़ी बेटी है।
- वह मनोज से प्रेम विवाह करती है, लेकिन अपने माता-पिता के घर के तनावपूर्ण वातावरण का प्रभाव उसके वैवाहिक जीवन में भी दिखाई देता है।
बिन्नी का विवाह किससे होता है?
- अशोक
- जूनेजा
- मनोज
- जगमोहन
Explanation:
- बिन्नी मनोज से प्रेम विवाह करती है।
- बाद में उसके वैवाहिक जीवन में भी घुटन और असंतोष दिखाई देता है।
किन्नी का सावित्री से क्या संबंध है?
- बड़ी बेटी
- छोटी बेटी
- बहन
- भतीजी
Explanation:
- किन्नी सावित्री की छोटी बेटी है।
- घर के अशांत वातावरण के कारण उसके स्वभाव में विद्रोह और जिद दिखाई देती है।
अशोक ‘आधे-अधूरे’ में कौन है?
- सावित्री का बॉस
- महेंद्रनाथ का दोस्त
- बड़ा बेटा
- बिन्नी का पति
Explanation:
- अशोक सावित्री और महेंद्रनाथ का बड़ा बेटा है।
- वह बेरोजगार युवक है और ताश के पत्ते काटकर तथा पत्रिकाओं से तस्वीरें काटकर समय बिताता है।
‘आधे-अधूरे’ में मनोज का पात्र किस प्रकार का है?
- मुख्य पुरुष पात्र
- सूत्रधार
- बिन्नी का पति और अदृश्य पात्र
- सावित्री का बॉस
Explanation:
- मनोज बिन्नी का पति है।
- वह नाटक में अदृश्य पात्र के रूप में उपस्थित है।
‘आधे-अधूरे’ में एक ही अभिनेता द्वारा चार पुरुष पात्रों की भूमिका निभाने का प्रमुख प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
- चार अलग-अलग परिवारों का चित्रण
- चार राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व
- सावित्री की दृष्टि में पुरुषों के अधूरेपन और समानता को दर्शाना
- नाटक को हास्यपूर्ण बनाना
Explanation:
- महेंद्रनाथ, सिंहानिया, जगमोहन और जूनेजा की भूमिका एक ही अभिनेता निभाता है।
- यह नाटकीय तकनीक सावित्री की ‘पूर्ण पुरुष’ की तलाश और बार-बार मिलने वाले अधूरे पुरुषों की स्थिति को प्रतीकात्मक रूप से व्यक्त करती है।
- इसी कारण नाटक का शीर्षक ‘आधे-अधूरे’ भी अपने व्यापक अर्थ को प्राप्त करता है।
Hindi
‘भारत-दुर्दशा’ के रचनाकार कौन हैं?
- जयशंकर प्रसाद
- बालकृष्ण भट्ट
- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
- प्रतापनारायण मिश्र
Explanation:
- ‘भारत-दुर्दशा’ के रचनाकार भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हैं।
- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक माना जाता है।
‘भारत-दुर्दशा’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1875 ई.
- 1880 ई.
- 1885 ई.
- 1890 ई.
Explanation:
- ‘भारत-दुर्दशा’ का प्रकाशन 1880 ई. में हुआ।
- यह आधुनिक हिंदी नाटक के विकास में महत्वपूर्ण कृति है।
‘भारत-दुर्दशा’ किस विधा की रचना है?
- उपन्यास
- कहानी
- नाटक
- निबंध
Explanation:
- ‘भारत-दुर्दशा’ एक नाटक है।
- इसे हिंदी के आरंभिक मौलिक राजनीतिक नाटकों में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है।
‘भारत-दुर्दशा’ में कुल कितने अंक हैं?
- चार
- पाँच
- छह
- सात
Explanation:
- ‘भारत-दुर्दशा’ छह अंकों का नाटक है।
- नाटक के विभिन्न अंकों में भारत की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
‘भारत-दुर्दशा’ की प्रमुख विषय-वस्तु क्या है?
- प्रेम और प्रकृति
- राजदरबार का जीवन
- भारत की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक दुर्दशा
- केवल धार्मिक आख्यान
Explanation:
- नाटक में तत्कालीन भारत की दयनीय स्थिति का चित्रण किया गया है।
- अंग्रेजी शासन के आर्थिक और मानसिक शोषण के साथ-साथ देश की आंतरिक कमजोरियों को भी सामने रखा गया है।
‘भारत-दुर्दशा’ में भारत की दुर्दशा के आंतरिक कारणों में क्या शामिल है?
- वैज्ञानिक प्रगति
- औद्योगिक विकास
- आलस्य, अंधविश्वास और आपसी फूट
- शिक्षा का प्रसार
Explanation:
- नाटककार ने देश की दुर्दशा के लिए बाहरी शासन के साथ आंतरिक कमजोरियों को भी जिम्मेदार बताया है।
- आलस्य, अंधविश्वास और आपसी फूट जैसी प्रवृत्तियां राष्ट्रीय पतन का कारण बनती हैं।
‘भारत-दुर्देव’ किसका प्रतीक है?
- भारत की समृद्धि का
- भारतीय संस्कृति का
- विदेशी शासन और भारत की आंतरिक बुराइयों के गठजोड़ का
- राष्ट्रीय एकता का
Explanation:
- भारत-दुर्देव नाटक का प्रमुख विरोधी/खलनायक प्रतीकात्मक पात्र है।
- वह अंग्रेजी शासन तथा भारत की आंतरिक कमजोरियों के संयुक्त प्रभाव का प्रतीक है।
‘भारत-भाग्य’ किसका प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करता है?
- भारत की आर्थिक व्यवस्था
- भारत की नियति और भविष्य
- अंग्रेजी शासन
- धार्मिक कट्टरता
Explanation:
- भारत-भाग्य भारत की नियति और भविष्य का प्रतीक है।
- वह भारत को जागृत करने का प्रयास करता है, लेकिन असफलता से निराश होकर अंत में आत्महत्या कर लेता है।
‘भारत-दुर्दशा’ में सत्यानाश किसका सेनापति है?
- भारत का
- भारत-भाग्य का
- भारत-दुर्देव का
- भारत-सभा का
Explanation:
- सत्यानाश, भारत-दुर्देव का सेनापति है।
- वह धर्मांधता, जाति-भेद, बाल-विवाह, छुआछूत और अविद्या जैसी सामाजिक बुराइयों के माध्यम से देश के पतन का प्रतीक बनता है।
‘भारत-दुर्दशा’ में ‘आलस्य’ किसका प्रतीकात्मक प्रतिनिधि है?
- ज्ञान का
- राष्ट्रीय जागरण का
- निष्क्रियता का
- औद्योगिक विकास का
Explanation:
- ‘आलस्य’ भारतवासियों को निष्क्रिय और कर्महीन बनाने वाली प्रवृत्ति का प्रतीक है।
- नाटक में ऐसी नकारात्मक प्रवृत्तियों को सजीव पात्रों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
‘भारत-दुर्दशा’ में ‘मदिरा’ किसका प्रतीक है?
- राष्ट्रीय चेतना का
- शिक्षा का
- समाज को चेतनाहीन करने वाली प्रवृत्ति का
- आर्थिक विकास का
Explanation:
- मदिरा यानी शराब को समाज को चेतनाहीन करने वाली नकारात्मक प्रवृत्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- यह नाटक के प्रतीकात्मक चरित्र-निर्माण की विशेषता को दिखाता है।
‘भारत-दुर्दशा’ में ‘अंधकार’ किसका प्रतीक है?
- प्रकाश और ज्ञान
- स्वतंत्रता
- अज्ञानता
- राष्ट्रीय एकता
Explanation:
- ‘अंधकार’ अज्ञानता का प्रतीक है।
- नाटक में अज्ञान और सामाजिक कुरीतियों को देश की दुर्दशा के कारणों के रूप में दिखाया गया है।
‘भारत-दुर्दशा’ की विशेषता के रूप में कौन-सा तत्व प्रमुख है?
- पौराणिक युद्ध का वर्णन
- प्रकृति-चित्रण
- प्रतीकात्मक पात्रों के माध्यम से सामाजिक बुराइयों का चित्रण
- केवल प्रेम-कथा
Explanation:
- यह एक प्रतीकात्मक या Allegorical नाटक है।
- इसमें आलस्य, मदिरा, अंधकार आदि अमूर्त प्रवृत्तियों को पात्रों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
‘भारत-दुर्दशा’ के पाँचवें अंक में किस सभा का उल्लेख मिलता है?
- राजसभा
- ग्रामसभा
- भारत-सभा
- धर्मसभा
Explanation:
- पाँचवें अंक में ‘भारत-सभा’ के बुद्धिजीवी पात्र दिखाई देते हैं।
- वे देश की स्थिति पर विचार करते हैं और भारत को बचाने के उपाय सोचते हैं।
‘भारत-सभा’ में कौन-से पात्र बुद्धिजीवी और जागरूक नागरिकों का प्रतिनिधित्व करते हैं?
- भारत, भारत-भाग्य और सत्यानाश
- आलस्य, मदिरा और अंधकार
- बंगाली, महाराष्ट्री, अख़बारवाला और कवि
- वैद्यजी, रंगनाथ और खन्ना मास्टर
Explanation:
- भारत-सभा में बंगाली, महाराष्ट्री, अख़बारवाला और कवि जैसे जागरूक पात्र उपस्थित होते हैं।
- वे देश की स्थिति पर विचार करते हैं और उसके सुधार के उपायों पर चर्चा करते हैं।
‘भारत-दुर्दशा’ में ‘सत्यानाश’ किन सामाजिक बुराइयों से जुड़ा है?
- विज्ञान और शिक्षा
- राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता
- जाति-भेद, बाल-विवाह, छुआछूत और अविद्या
- कृषि और उद्योग
Explanation:
- सत्यानाश सामाजिक कुरीतियों और अज्ञानता का प्रतीकात्मक प्रतिनिधि है।
- जाति-भेद, बाल-विवाह, छुआछूत और अविद्या जैसी बुराइयों को देश के पतन से जोड़ा गया है।
‘भारत-दुर्दशा’ में अंग्रेजी शासन का किस प्रकार का प्रभाव दिखाया गया है?
- केवल सांस्कृतिक विकास
- केवल शिक्षा का विस्तार
- आर्थिक और मानसिक शोषण
- केवल कृषि विकास
Explanation:
- नाटक में अंग्रेजी शासन के आर्थिक और मानसिक शोषण पर व्यंग्य किया गया है।
- इसके साथ भारत की अपनी आंतरिक कमजोरियों को भी देश की दुर्दशा का कारण बताया गया है।
‘भारत-दुर्दशा’ का प्रमुख उद्देश्य क्या माना जा सकता है?
- मनोरंजन मात्र
- राजाओं की प्रशंसा
- देशवासियों में राष्ट्रीय चेतना और जागरूकता उत्पन्न करना
- विदेशी संस्कृति का प्रचार
Explanation:
- नाटक में भारत की दयनीय स्थिति को सामने लाकर देशवासियों को जागृत करने का प्रयास किया गया है।
- राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक सुधार और देश की स्थिति पर विचार इसके महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं।
‘भारत-दुर्दशा’ को आधुनिक हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण बनाने वाली प्रमुख विशेषता क्या है?
- केवल प्रेम-कथा
- केवल पौराणिक कथा
- केवल राष्ट्रीय चेतना
- केवल प्रकृति-वर्णन
Explanation:
- ‘भारत-दुर्दशा’ में तत्कालीन भारत की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्थिति का व्यंग्यात्मक चित्रण है।
- भारत, भारत-दुर्देव, भारत-भाग्य, सत्यानाश, आलस्य और अंधकार जैसे प्रतीकात्मक पात्र नाटक को विशिष्ट बनाते हैं।
- यह रचना राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक जागरण की भावना को भी सामने लाती है।
Hindi
‘राग दरबारी’ के रचनाकार कौन हैं?
- फणीश्वर नाथ ‘रेणु’
- प्रेमचंद
- श्रीलाल शुक्ल
- हरिशंकर परसाई
Explanation:
- ‘राग दरबारी’ के लेखक श्रीलाल शुक्ल हैं।
- यह हिंदी साहित्य का प्रसिद्ध व्यंग्यात्मक उपन्यास है।
‘राग दरबारी’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1954 ई.
- 1962 ई.
- 1968 ई.
- 1975 ई.
Explanation:
- ‘राग दरबारी’ का प्रकाशन 1968 ई. में हुआ।
- यह स्वतंत्रता के बाद के ग्रामीण भारतीय समाज की व्यवस्था पर केंद्रित है।
‘राग दरबारी’ किस विधा की रचना है?
- ऐतिहासिक उपन्यास
- आंचलिक उपन्यास
- व्यंग्यात्मक उपन्यास
- जासूसी उपन्यास
Explanation:
- ‘राग दरबारी’ एक व्यंग्यात्मक उपन्यास है।
- इसमें सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था की विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य किया गया है।
‘राग दरबारी’ के लिए श्रीलाल शुक्ल को साहित्य अकादमी पुरस्कार किस वर्ष मिला?
- 1968 ई.
- 1969 ई.
- 1970 ई.
- 1972 ई.
Explanation:
- ‘राग दरबारी’ के लिए श्रीलाल शुक्ल को 1969 ई. में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
‘राग दरबारी’ की मुख्य पृष्ठभूमि कौन-सा गांव है?
- मेरीगंज
- बेलारी
- शिवपालगंज
- सेमारी
Explanation:
- उपन्यास की मुख्य कथा-भूमि शिवपालगंज है।
- यह लखनऊ के पास स्थित एक काल्पनिक गांव के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
‘राग दरबारी’ में शिवपालगंज किस प्रकार का स्थान है?
- लखनऊ के पास स्थित वास्तविक नगर
- ऐतिहासिक राजधानी
- लखनऊ के पास स्थित काल्पनिक गांव
- औद्योगिक नगर
Explanation:
- शिवपालगंज उपन्यास की काल्पनिक ग्रामीण पृष्ठभूमि है।
- इसके माध्यम से स्वतंत्रता के बाद के ग्रामीण भारत की सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था को चित्रित किया गया है।
‘राग दरबारी’ का केंद्रीय पात्र कौन है?
- रंगनाथ
- बद्री पहलवान
- वैद्यजी
- खन्ना मास्टर
Explanation:
- वैद्यजी उपन्यास के केंद्रीय और सबसे प्रभावशाली पात्र हैं।
- वे कोऑपरेटिव यूनियन, छंगामल इंटर कॉलेज और गांव की पंचायत पर प्रभाव रखते हैं।
रंगनाथ का वैद्यजी से क्या संबंध है?
- पुत्र
- भाई
- भांजा
- पड़ोसी
Explanation:
- रंगनाथ वैद्यजी का भांजा है।
- वह इतिहास में एम.ए. पास युवा है और स्वास्थ्य सुधारने के लिए शिवपालगंज आता है।
रंगनाथ ने किस विषय में एम.ए. किया था?
- अर्थशास्त्र
- राजनीति विज्ञान
- इतिहास
- समाजशास्त्र
Explanation:
- रंगनाथ इतिहास में एम.ए. पास युवा है।
- शिवपालगंज में रहकर वह ग्रामीण व्यवस्था की वास्तविकता को निकट से देखता है।
रंगनाथ शिवपालगंज क्यों आता है?
- राजनीतिक चुनाव लड़ने
- कॉलेज में पढ़ाने
- स्वास्थ्य सुधारने
- व्यापार करने
Explanation:
- रंगनाथ अपने स्वास्थ्य को सुधारने के उद्देश्य से शिवपालगंज आता है।
- वह गांव की राजनीति और व्यवस्था की विसंगतियों को देखकर निराश होता है।
वैद्यजी के बड़े बेटे का नाम क्या है?
- रंगनाथ
- रूप्पम
- बद्री पहलवान
- खन्ना मास्टर
Explanation:
- बद्री पहलवान वैद्यजी के बड़े बेटे हैं।
- वे पहलवानी करते हैं और वैद्यजी के प्रभाव तथा शक्ति-तंत्र को संभालने में सहयोग करते हैं।
वैद्यजी के छोटे बेटे का नाम क्या है?
- बद्री
- रंगनाथ
- रूप्पम
- शनिचर
Explanation:
- रूप्पम वैद्यजी के छोटे बेटे हैं।
- वे कॉलेज के छात्र नेता हैं और स्थानीय राजनीति तथा धांधली में लिप्त रहते हैं।
‘राग दरबारी’ में छंगामल इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल का चरित्र किससे जुड़ा है?
- न्याय व्यवस्था
- कृषि व्यवस्था
- कॉलेज की गुटबाजी और वैद्यजी की चाटुकारिता
- स्वतंत्रता आंदोलन
Explanation:
- प्रिंसिपल साहब छंगामल इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य हैं।
- वे वैद्यजी की चाटुकारिता करते हैं और कॉलेज की गुटबाजी में शामिल रहते हैं।
खन्ना मास्टर किस संस्था में इतिहास के अध्यापक हैं?
- शिवपालगंज इंटर कॉलेज
- कोऑपरेटिव इंटर कॉलेज
- छंगामल इंटर कॉलेज
- जिला विद्यालय
Explanation:
- खन्ना मास्टर छंगामल इंटर कॉलेज के इतिहास के अध्यापक हैं।
- वे कॉलेज में व्याप्त भ्रष्टाचार और गुटबाजी का विरोध करते हैं।
‘राग दरबारी’ में लंगड़ किस व्यवस्था की विसंगतियों का प्रतीक है?
- शिक्षा व्यवस्था
- पंचायती व्यवस्था
- अदालती/न्याय व्यवस्था
- स्वास्थ्य व्यवस्था
Explanation:
- लंगड़ एक साधारण और लाचार नागरिक है।
- वह अदालत में एक छोटे-से कागज यानी नकल के लिए लंबे समय तक भटकता रहता है।
- उसके माध्यम से न्याय व्यवस्था में मौजूद भ्रष्टाचार और लालफीताशाही पर व्यंग्य किया गया है।
शनिचर का दूसरा नाम क्या बताया गया है?
- मंगलदास
- मंगलदास
- रामस्वरूप
- गयादीन
Explanation:
- शनिचर वैद्यजी का घरेलू नौकर है।
- वैद्यजी अपनी राजनीतिक रणनीति के माध्यम से उसे गांव की पंचायत का सरपंच बनवा देते हैं।
वैद्यजी शनिचर को किस पद पर बैठवाते हैं?
- कॉलेज का प्रिंसिपल
- कोऑपरेटिव यूनियन का अध्यक्ष
- गांव का सरपंच
- तहसीलदार
Explanation:
- शनिचर वैद्यजी का घरेलू नौकर है।
- वैद्यजी उसे अपनी कूटनीति के माध्यम से पंचायत का सरपंच बनवा देते हैं।
- यह प्रसंग ग्रामीण राजनीति में सत्ता और प्रभाव के दुरुपयोग पर व्यंग्य करता है।
‘राग दरबारी’ में मालवीय जी किससे संबंधित पात्र हैं?
- पंचायत
- कोऑपरेटिव यूनियन
- छंगामल इंटर कॉलेज
- न्यायालय
Explanation:
- मालवीय जी छंगामल इंटर कॉलेज के शिक्षक हैं।
- वे खन्ना मास्टर के गुट में रहते हैं।
‘राग दरबारी’ में स्वतंत्रता के बाद के ग्रामीण भारत की किस समस्या पर विशेष व्यंग्य मिलता है?
- केवल प्राकृतिक आपदा
- केवल औद्योगिक विकास
- राजनीतिक अवसरवाद, शिक्षा का भ्रष्टाचार और प्रशासनिक ढील
- केवल विदेशी शासन
Explanation:
- उपन्यास स्वतंत्रता के बाद ग्रामीण व्यवस्था में आई गिरावट को व्यंग्यात्मक ढंग से प्रस्तुत करता है।
- राजनीतिक अवसरवाद, शिक्षा संस्थानों की गुटबाजी, प्रशासनिक ढील और पंचायती व्यवस्था की विसंगतियां प्रमुख विषय हैं।
‘राग दरबारी’ की सबसे प्रमुख साहित्यिक विशेषता क्या है?
- रोमांटिक कल्पना
- ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन
- सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य
- केवल प्रकृति-वर्णन
Explanation:
- ‘राग दरबारी’ का प्रमुख स्वर व्यंग्य है।
- श्रीलाल शुक्ल ने ग्रामीण राजनीति, शिक्षा, पंचायत, प्रशासन और न्याय व्यवस्था की विसंगतियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
- इसी कारण यह हिंदी के प्रमुख व्यंग्य उपन्यासों में गिना जाता है।
Hindi
‘मैला आँचल’ उपन्यास के रचनाकार कौन हैं?
- प्रेमचंद
- यशपाल
- फणीश्वर नाथ ‘रेणु’
- अज्ञेय
Explanation:
- ‘मैला आँचल’ के लेखक फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ हैं।
- रेणु हिंदी के प्रमुख आंचलिक कथाकार माने जाते हैं।
‘मैला आँचल’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1947 ई.
- 1950 ई.
- 1954 ई.
- 1960 ई.
Explanation:
- ‘मैला आँचल’ का प्रकाशन 1954 ई. में हुआ।
- यह हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध आंचलिक उपन्यासों में प्रमुख स्थान रखता है।
‘मैला आँचल’ किस विधा की रचना है?
- कहानी
- नाटक
- आत्मकथा
- उपन्यास
Explanation:
- ‘मैला आँचल’ एक उपन्यास है।
- इसे हिंदी का प्रथम आंचलिक उपन्यास माना जाता है।
‘मैला आँचल’ को हिंदी साहित्य में किस प्रकार का उपन्यास माना जाता है?
- ऐतिहासिक उपन्यास
- मनोवैज्ञानिक उपन्यास
- आंचलिक उपन्यास
- जासूसी उपन्यास
Explanation:
- ‘मैला आँचल’ आंचलिक उपन्यास की महत्वपूर्ण रचना है।
- इसमें किसी विशेष क्षेत्र के लोकजीवन, संस्कृति, भाषा, सामाजिक संबंधों और समस्याओं का जीवंत चित्रण मिलता है।
‘मैला आँचल’ की मुख्य पृष्ठभूमि किस स्थान की है?
- बनारस
- पटना का मेरीगंज गांव
- पूर्णिया जिले का मेरीगंज गांव
- मुजफ्फरपुर का मेरीगंज गांव
Explanation:
- उपन्यास की कथा-भूमि बिहार के पूर्णिया जिले का मेरीगंज गांव है।
- मेरीगंज के माध्यम से ग्रामीण समाज की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्थिति का चित्रण किया गया है।
‘मैला आँचल’ में मेरीगंज किस राज्य में स्थित है?
- उत्तर प्रदेश
- पश्चिम बंगाल
- झारखंड
- बिहार
Explanation:
- मेरीगंज बिहार के पूर्णिया क्षेत्र की कथा-भूमि है।
- उपन्यास में बिहार के ग्रामीण लोकजीवन और आंचलिक संस्कृति का विस्तृत चित्रण है।
‘मैला आँचल’ में मेरीगंज गांव का नाम किसके नाम पर रखा गया था?
- किसी जमींदार की पत्नी ‘मेरी’ के नाम पर
- किसी राजा की पत्नी ‘मेरी’ के नाम पर
- एक अंग्रेज मार्टिन की पत्नी ‘मेरी’ के नाम पर
- डॉ. प्रशांत की पत्नी के नाम पर
Explanation:
- उपन्यास में मेरीगंज नाम को एक अंग्रेज मार्टिन की पत्नी ‘मेरी’ के नाम से जोड़ा गया है।
- गांव का नाम भी इसकी स्थानीय और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का हिस्सा है।
‘मैला आँचल’ का मुख्य नायक किसे माना जाता है?
- डॉ. प्रशांत
- बालदेव
- बावनदास
- मेरीगंज गांव
Explanation:
- उपन्यास का कोई एक अकेला नायक नहीं है।
- मेरीगंज गांव ही सामूहिक रूप से उपन्यास का मुख्य नायक माना जाता है।
- गांव के विभिन्न वर्गों, जातियों और पात्रों के माध्यम से पूरे ग्रामीण समाज का चित्र उभरता है।
‘मैला आँचल’ में डॉ. प्रशांत किस उद्देश्य से मेरीगंज आते हैं?
- राजनीति करने
- जमींदारी करने
- शोध करने
- व्यापार करने
Explanation:
- डॉ. प्रशांत एक युवा और आदर्शवादी डॉक्टर हैं।
- वे पटना से मेरीगंज में मलेरिया और काला-आज़ार पर शोध करने आते हैं।
- वे गांव के लोगों की भलाई के लिए समर्पित रहते हैं।
‘मैला आँचल’ में कमली किसकी बेटी है?
- बावनदास की
- बालदेव की
- विश्वनाथ प्रसाद की
- कालीचरन की
Explanation:
- कमली मेरीगंज के तहसीलदार विश्वनाथ प्रसाद की बेटी है।
- कमली का संबंध डॉ. प्रशांत से जुड़ता है और वह उनकी पत्नी बनती है।
‘मैला आँचल’ में कमली का प्रेम किस पात्र से है?
- बालदेव
- कालीचरन
- बावनदास
- डॉ. प्रशांत
Explanation:
- कमली डॉ. प्रशांत से प्रेम करती है।
- बाद में दोनों का विवाह होता है।
‘मैला आँचल’ का बावनदास किस विचारधारा से जुड़ा हुआ पात्र है?
- साम्यवादी
- समाजवादी
- गांधीवादी
- उपनिवेशवादी
Explanation:
- बावनदास एक सच्चा और निष्ठावान गांधीवादी कार्यकर्ता है।
- उपन्यास के अंत में तस्करों द्वारा उसकी हत्या कर दी जाती है।
- उसकी मृत्यु गांधीवादी आदर्शों के पतन का प्रतीक मानी जाती है।
‘मैला आँचल’ में सोशलिस्ट पार्टी के युवा नेता के रूप में कौन-सा पात्र सामने आता है?
- बालदेव
- विश्वनाथ प्रसाद
- कालीचरन
- बावनदास
Explanation:
- कालीचरन सोशलिस्ट पार्टी से जुड़ा युवा नेता है।
- वह शोषित लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाला जुझारू पात्र है।
‘मैला आँचल’ में बालदेव किस राजनीतिक दल से जुड़ा है?
- सोशलिस्ट पार्टी
- कम्युनिस्ट पार्टी
- कांग्रेस
- मुस्लिम लीग
Explanation:
- बालदेव कांग्रेस पार्टी का कार्यकर्ता है।
- उपन्यास में स्वतंत्रता के आसपास के ग्रामीण राजनीतिक वातावरण और विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं का चित्रण मिलता है।
‘मैला आँचल’ में लछमी का संबंध किससे है?
- कायस्थ टोले से
- राजपूत टोले से
- मठ से
- शहर के राजनीतिक वर्ग से
Explanation:
- लछमी या लक्ष्मी मठ की दासी/कोठारिन है।
- वह रामदास की सेविका तथा बालदेव की आश्रयदाता के रूप में भी जुड़ी है।
‘मैला आँचल’ में मेरीगंज गांव का कायस्थ टोला किसके प्रभाव में है?
- खेलवन यादव
- ठाकुर रामकृपाल सिंह
- विश्वनाथ प्रसाद
- कालीचरन
Explanation:
- कायस्थ टोले पर तहसीलदार विश्वनाथ प्रसाद का वर्चस्व बताया गया है।
- मेरीगंज के विभिन्न टोले वहां की जातीय और सामाजिक संरचना को सामने लाते हैं।
मेरीगंज के राजपूत टोले पर किसका प्रभाव बताया गया है?
- विश्वनाथ प्रसाद
- खेलवन यादव
- ठाकुर रामकृपाल सिंह
- कालीचरन
Explanation:
- राजपूत टोले पर ठाकुर रामकृपाल सिंह का प्रभाव है।
- इस प्रकार उपन्यास में अलग-अलग जातीय टोलों के सामाजिक प्रभावों का चित्रण मिलता है।
मेरीगंज के यादव या ग्वाला टोले का प्रमुख प्रभाव किसका है?
- ठाकुर रामकृपाल सिंह
- विश्वनाथ प्रसाद
- खेलवन यादव
- बावनदास
Explanation:
- यादव या ग्वाला टोले पर खेलवन यादव का प्रभाव बताया गया है।
- मेरीगंज के विभिन्न टोले ग्रामीण समाज की जातीय संरचना को दर्शाते हैं।
‘मैला आँचल’ में संथाल टोला किस सामाजिक स्थिति को दर्शाता है?
- संपन्न जमींदार वर्ग
- शहरी मध्यम वर्ग
- सबसे पिछड़े और शोषित वर्ग का जीवन
- उच्च प्रशासनिक वर्ग
Explanation:
- संथाल टोला गांव के पिछड़े और शोषित वर्ग के जीवन को सामने लाता है।
- भूमि के लिए उनका संघर्ष उपन्यास में ग्रामीण शोषण और सामाजिक असमानता को उजागर करता है।
‘मैला आँचल’ की प्रमुख विषय-वस्तु में निम्नलिखित में से कौन-सा शामिल है?
- केवल राजदरबार का जीवन
- केवल धार्मिक आख्यान
- गरीबी, अशिक्षा, अंधविश्वास, राजनीति और आंचलिक लोकजीवन
- केवल शहरी औद्योगिक जीवन
Explanation:
- ‘मैला आँचल’ में स्वतंत्रता के आसपास के ग्रामीण समाज का व्यापक चित्रण है।
- गरीबी, अशिक्षा, अंधविश्वास, राजनीतिक चेतना और विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं का प्रवेश प्रमुख विषय हैं।
- कांग्रेस, सोशलिस्ट और कम्युनिस्ट विचारधाराओं के प्रभाव के साथ स्थानीय लोकजीवन और संस्कृति भी उभरती है।
Hindi
मुंशी प्रेमचंद का वास्तविक नाम क्या था?
- रामचंद्र शुक्ल
- धनपत राय श्रीवास्तव
- गोवर्धन दास
- श्यामलाल वर्मा
Explanation:
- मुंशी प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था।
- हिंदी और उर्दू साहित्य में वे ‘प्रेमचंद’ नाम से प्रसिद्ध हुए।
मुंशी प्रेमचंद का जन्म कब हुआ था?
- 31 जुलाई 1880
- 31 जुलाई 1880
- 8 अक्टूबर 1885
- 30 नवंबर 1875
Explanation:
- मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को हुआ था।
- उनका जन्म वाराणसी के निकट लमही गाँव में हुआ था।
मुंशी प्रेमचंद का जन्मस्थान कौन-सा है?
- लमही, इलाहाबाद
- लमही, लखनऊ
- लमही, वाराणसी
- लमही, कानपुर
Explanation:
- प्रेमचंद का जन्म लमही गाँव में हुआ था, जो वाराणसी के निकट स्थित है।
- लमही को प्रेमचंद की साहित्यिक विरासत से विशेष रूप से जोड़ा जाता है।
मुंशी प्रेमचंद का निधन कब हुआ था?
- 31 जुलाई 1936
- 8 अक्टूबर 1936
- 15 अगस्त 1935
- 10 जनवरी 1937
Explanation:
- मुंशी प्रेमचंद का निधन 8 अक्टूबर 1936 को हुआ था।
- उनका जीवन हिंदी-उर्दू साहित्य में यथार्थवादी लेखन के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
मुंशी प्रेमचंद मुख्यतः किस साहित्यिक विधा के लिए प्रसिद्ध हैं?
- केवल कविता
- केवल नाटक
- उपन्यास और कहानी
- केवल यात्रा-वृत्तांत
Explanation:
- प्रेमचंद हिंदी साहित्य के प्रमुख उपन्यासकार और कहानीकार थे।
- उन्होंने किसान, मजदूर, स्त्री, गरीब और शोषित वर्ग के जीवन को साहित्य में प्रमुख स्थान दिया।
प्रेमचंद को किस उपनाम से जाना जाता है?
- भारतेंदु
- राष्ट्रकवि
- उपन्यास सम्राट
- आधुनिक मीरा
Explanation:
- प्रेमचंद को हिंदी साहित्य में ‘उपन्यास सम्राट’ कहा जाता है।
- उनके उपन्यासों में भारतीय समाज और सामान्य जनजीवन का व्यापक यथार्थ चित्रण मिलता है।
प्रेमचंद की प्रारंभिक साहित्यिक रचनाएँ मुख्यतः किस भाषा में थीं?
- संस्कृत
- बांग्ला
- उर्दू
- मराठी
Explanation:
- प्रेमचंद ने अपने साहित्यिक जीवन की शुरुआत उर्दू लेखन से की थी।
- बाद में वे हिंदी के प्रमुख साहित्यकार बने और दोनों भाषाओं में लेखन किया।
प्रेमचंद ने प्रारंभ में किस नाम से लेखन किया था?
- प्रेमचंद
- नवाब राय
- धनपत
- सज्जाद
Explanation:
- प्रेमचंद ने प्रारंभ में ‘नवाब राय’ नाम से लेखन किया।
- बाद में वे ‘प्रेमचंद’ नाम से प्रसिद्ध हुए।
प्रेमचंद की पहली प्रकाशित कहानी-संग्रह ‘सोज़-ए-वतन’ किस भाषा में था?
- हिंदी
- संस्कृत
- उर्दू
- बंगाली
Explanation:
- ‘सोज़-ए-वतन’ प्रेमचंद की आरंभिक उर्दू रचनाओं से संबंधित प्रसिद्ध कृति है।
- इसमें देशभक्ति की भावना से जुड़ी कहानियाँ थीं।
‘गोदान’ किस वर्ष प्रकाशित हुआ था?
- 1926
- 1930
- 1936
- 1942
Explanation:
- प्रेमचंद का प्रसिद्ध उपन्यास ‘गोदान’ 1936 में प्रकाशित हुआ।
- इसे भारतीय कृषक जीवन का महत्त्वपूर्ण यथार्थवादी चित्रण माना जाता है।
प्रेमचंद के प्रसिद्ध उपन्यास ‘गोदान’ का मुख्य पात्र कौन है?
- गोबर
- दातादीन
- होरी
- मेहता
Explanation:
- होरी ‘गोदान’ का केंद्रीय पात्र है।
- उसके माध्यम से भारतीय किसान के आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक संघर्ष को प्रस्तुत किया गया है।
‘निर्मला’ उपन्यास का प्रमुख विषय क्या है?
- किसान आंदोलन
- दहेज और अनमेल विवाह की समस्या
- औद्योगिक विकास
- स्वतंत्रता आंदोलन
Explanation:
- ‘निर्मला’ में दहेज प्रथा और अनमेल विवाह से उत्पन्न सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं को प्रमुखता दी गई है।
- यह प्रेमचंद के सामाजिक यथार्थवादी लेखन का महत्त्वपूर्ण उदाहरण है।
‘गबन’ उपन्यास के रचनाकार कौन हैं?
- जयशंकर प्रसाद
- यशपाल
- मुंशी प्रेमचंद
- फणीश्वर नाथ रेणु
Explanation:
- ‘गबन’ प्रेमचंद का प्रसिद्ध उपन्यास है।
- इसमें मध्यवर्गीय जीवन, आभूषणों के प्रति आकर्षण, आर्थिक दबाव और सामाजिक प्रतिष्ठा जैसे विषय उभरते हैं।
प्रेमचंद की कहानी ‘ईदगाह’ का मुख्य पात्र कौन है?
- होरी
- गोबर
- हामिद
- माधव
Explanation:
- ‘ईदगाह’ का मुख्य पात्र हामिद है।
- कहानी में हामिद का अपनी दादी अमीना के प्रति प्रेम और त्याग अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
‘पूस की रात’ कहानी में मुख्य किसान पात्र कौन है?
- होरी
- हल्कू
- गोबर
- घीसू
Explanation:
- ‘पूस की रात’ का मुख्य पात्र हल्कू है।
- कहानी में किसान की गरीबी, ठंड और आर्थिक विवशता का यथार्थ चित्रण मिलता है।
‘कफन’ कहानी के प्रमुख पात्र कौन हैं?
- हामिद और अमीना
- घीसू और माधव
- होरी और धनिया
- जुम्मन और अलगू
Explanation:
- ‘कफन’ के प्रमुख पात्र घीसू और माधव हैं।
- कहानी अत्यधिक गरीबी, सामाजिक विडंबना और मानवीय संवेदनाओं के जटिल रूप को सामने लाती है।
‘पंच परमेश्वर’ कहानी में किन दो पात्रों की मित्रता प्रमुख है?
- होरी और गोबर
- जुम्मन शेख और अलगू चौधरी
- घीसू और माधव
- हामिद और मोहसिन
Explanation:
- ‘पंच परमेश्वर’ में जुम्मन शेख और अलगू चौधरी की मित्रता कथा का प्रमुख आधार है।
- कहानी न्याय और मित्रता के बीच संबंध तथा न्याय की निष्पक्षता को उजागर करती है।
प्रेमचंद के साहित्य की प्रमुख विशेषता क्या मानी जाती है?
- केवल कल्पना और रोमांस
- केवल प्रकृति-चित्रण
- सामाजिक यथार्थ का चित्रण
- केवल पौराणिक कथाएँ
Explanation:
- प्रेमचंद के साहित्य में सामाजिक यथार्थ को विशेष महत्त्व प्राप्त है।
- उन्होंने किसान, मजदूर, स्त्री, गरीब और शोषित वर्ग की समस्याओं को साहित्य का विषय बनाया।
प्रेमचंद के साहित्य में निम्नलिखित में से किस वर्ग को विशेष स्थान मिला?
- केवल राजघराने
- केवल उच्च अधिकारी
- किसान, मजदूर और शोषित वर्ग
- केवल व्यापारी वर्ग
Explanation:
- प्रेमचंद ने सामान्य जनता के जीवन को साहित्य के केंद्र में रखा।
- उनकी रचनाओं में किसान, मजदूर, गरीब, स्त्रियाँ और वंचित वर्ग की समस्याएँ प्रमुखता से दिखाई देती हैं।
प्रेमचंद के साहित्य को किस साहित्यिक प्रवृत्ति से विशेष रूप से जोड़ा जाता है?
- छायावाद
- रहस्यवाद
- यथार्थवाद
- प्रयोगवाद
Explanation:
- प्रेमचंद का साहित्य यथार्थवादी परंपरा का प्रमुख उदाहरण है।
- उन्होंने तत्कालीन भारतीय समाज की वास्तविक समस्याओं, विषमताओं और संघर्षों को साहित्य में अभिव्यक्त किया।
‘गोदान’ उपन्यास के रचनाकार कौन हैं?
- जयशंकर प्रसाद
- फणीश्वर नाथ रेणु
- मुंशी प्रेमचंद
- यशपाल
Explanation:
- ‘गोदान’ के रचनाकार मुंशी प्रेमचंद हैं।
- यह हिंदी साहित्य की अत्यंत प्रसिद्ध यथार्थवादी कृति है।
मुंशी प्रेमचंद का वास्तविक नाम क्या था?
- गोवर्धन दास
- धनपत राय श्रीवास्तव
- रामचंद्र राय श्रीवास्तव
- श्यामलाल वर्मा
Explanation:
- मुंशी प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था।
- हिंदी साहित्य में वे ‘प्रेमचंद’ नाम से प्रसिद्ध हुए।
‘गोदान’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1926 ई.
- 1930 ई.
- 1936 ई.
- 1940 ई.
Explanation:
- ‘गोदान’ का प्रकाशन 1936 ई. में हुआ था।
- इसे प्रेमचंद की अंतिम पूर्ण कृतियों में प्रमुख स्थान प्राप्त है।
‘गोदान’ किस विधा की रचना है?
- कहानी
- नाटक
- निबंध
- उपन्यास
Explanation:
- ‘गोदान’ उपन्यास विधा की रचना है।
- यह यथार्थवादी परंपरा में भारतीय कृषक जीवन का व्यापक चित्र प्रस्तुत करता है।
‘गोदान’ को किस रूप में जाना जाता है?
- श्रमिक जीवन का महाकाव्य
- नारी जीवन का महाकाव्य
- कृषक जीवन का महाकाव्य
- औद्योगिक जीवन का महाकाव्य
Explanation:
- ‘गोदान’ को प्रायः कृषक जीवन का महाकाव्य कहा जाता है।
- इसमें किसान के आर्थिक, सामाजिक और मानसिक संघर्षों का व्यापक चित्रण है।
‘गोदान’ का केंद्रीय पात्र कौन है?
- गोबर
- दातादीन
- होरी
- मेहता
Explanation:
- होरी ‘गोदान’ का केंद्रीय पात्र है।
- वह एक साधारण, धर्मभीरु किसान है, जिसकी गाय पाने की इच्छा उसके जीवन-संघर्ष का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है।
होरी की पत्नी का नाम क्या है?
- झुनिया
- सोना
- धनिया
- रूपा
Explanation:
- धनिया होरी की पत्नी है।
- वह साहसी, स्वाभिमानी और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने वाली स्त्री के रूप में प्रस्तुत हुई है।
होरी की सबसे बड़ी लालसा क्या थी?
- जमीन खरीदना और गोदान करना
- शहर जाना और गोदान करना
- गाय प्राप्त करना और गोदान करना
- खेती करना और गोदान करना
Explanation:
- होरी की सबसे बड़ी इच्छा गाय प्राप्त करने की थी।
- गोदान की धार्मिक-सामाजिक धारणा उसके जीवन की आकांक्षा और संघर्ष से जुड़ी हुई है।
होरी और धनिया के पुत्र का नाम क्या है?
- हीरा
- शोभा
- गोबर
- भोला
Explanation:
- होरी और धनिया के पुत्र का नाम गोबर है।
- उसका वास्तविक नाम गोवर्धन बताया जाता है और वह नई पीढ़ी के विद्रोही तेवरों का प्रतिनिधित्व करता है।
होरी और धनिया के पुत्र गोबर किसका प्रतीक माना जाता है?
- पुरानी परंपराओं का
- सामंती व्यवस्था का
- नई पीढ़ी और विद्रोही चेतना का
- महाजनी व्यवस्था का
Explanation:
- गोबर पुरानी रूढ़ियों और शोषणकारी व्यवस्था के प्रति नई पीढ़ी के विद्रोही दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है।
- वह परिस्थितियों को स्वीकार करने के बजाय उनका विरोध करने की कोशिश करता है।
झुनिया किसकी बेटी थी?
- दातादीन की
- राय साहब की
- भोला की
- नोखेराम की
Explanation:
- झुनिया भोला की बेटी थी।
- उसका संबंध गोबर से होता है और वह होरी-धनिया के परिवार से जुड़ जाती है।
होरी की बेटियों के नाम क्या हैं?
- झुनिया और सिलिया
- रूपा और सोना
- मालती और गोविंदी
- धनिया और सोना
Explanation:
- होरी की बेटियों के नाम रूपा और सोना हैं।
- उनके विवाह और पारिवारिक परिस्थितियाँ भी उपन्यास में किसान परिवार की आर्थिक कठिनाइयों को सामने लाती हैं।
होरी के भाइयों के नाम क्या हैं?
- गोबर और भोला
- हीरा और शोभा
- दातादीन और मातादीन
- नोखेराम और पटेश्वरी
Explanation:
- होरी के भाइयों के नाम हीरा और शोभा हैं।
- पारिवारिक संबंधों और संपत्ति से जुड़ी ईर्ष्या तथा तनाव उपन्यास की कथा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
होरी की गाय को किसने जहर दिया था?
- गोबर
- भोला
- हीरा
- दातादीन
Explanation:
- होरी के भाई हीरा ने ईर्ष्या के कारण होरी की गाय को जहर दे दिया था।
- यह घटना होरी के जीवन में एक नई समस्या और आर्थिक संकट पैदा करती है।
‘गोदान’ में दातादीन का चरित्र किस वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है?
- किसान वर्ग
- मजदूर वर्ग
- शोषक ब्राह्मण/महाजनी वर्ग
- औद्योगिक मजदूर वर्ग
Explanation:
- दातादीन गांव के प्रभावशाली और शोषक ब्राह्मण पात्र के रूप में प्रस्तुत है।
- उसके माध्यम से धार्मिक-सामाजिक सत्ता के दुरुपयोग और ग्रामीण शोषण को दिखाया गया है।
दातादीन का पुत्र मातादीन का संबंध किससे था?
- झुनिया
- रूपा
- सिलिया
- सोना
Explanation:
- मातादीन का संबंध सिलिया से था।
- सिलिया दलित चमार समुदाय से संबंधित पात्र है और यह प्रसंग जातिगत भेदभाव तथा सामाजिक पाखंड को उजागर करता है।
‘गोदान’ में पटेश्वरी कौन था?
- जमींदार
- महाजन
- पटवारी
- डॉक्टर
Explanation:
- पटेश्वरी गांव का पटवारी था।
- ग्रामीण प्रशासन और किसानों पर प्रभाव रखने वाले स्थानीय शोषक तंत्र को समझने में उसका चरित्र महत्त्वपूर्ण है।
‘गोदान’ में नोखेराम की भूमिका क्या थी?
- किसान
- गांव का पटवारी
- जमींदार का कारिंदा
- गांव का महाजन
Explanation:
- नोखेराम जमींदार का कारिंदा था।
- उसका चरित्र ग्रामीण किसानों पर जमींदारी व्यवस्था के दबाव और शोषण को दर्शाता है।
‘गोदान’ में झिंगुरी सिंह किस वर्ग से संबंधित था?
- किसान
- मजदूर
- महाजन
- शिक्षक
Explanation:
- झिंगुरी सिंह गांव का महाजन था।
- उसके माध्यम से ऋण और महाजनी व्यवस्था से किसानों के शोषण की समस्या सामने आती है।
‘गोदान’ की ग्रामीण पृष्ठभूमि मुख्यतः किस क्षेत्र से संबंधित है?
- बंगाल
- पंजाब
- उत्तर प्रदेश का अवध क्षेत्र
- राजस्थान
Explanation:
- उपन्यास की ग्रामीण पृष्ठभूमि उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र से जुड़ी है।
- बेलारी और सेमरी जैसे स्थानों के माध्यम से ग्रामीण तथा जमींदारी जीवन का चित्रण किया गया है।
‘गोदान’ में बेलारी किस प्रकार की पृष्ठभूमि का प्रतिनिधित्व करता है?
- औद्योगिक जीवन
- महानगरीय जीवन
- ग्रामीण जीवन
- विदेशी जीवन
Explanation:
- बेलारी ग्रामीण जीवन की पृष्ठभूमि से जुड़ा है।
- यहाँ किसान, खेती, गरीबी, ऋण और ग्रामीण शोषण की समस्याएँ प्रमुख हैं।
‘गोदान’ में राय साहब अमरपाल सिंह कौन थे?
- डॉक्टर
- बैंक मैनेजर
- जमींदार
- महाजन
Explanation:
- राय साहब अमरपाल सिंह सेमरी के जमींदार थे।
- उनके माध्यम से जमींदारी व्यवस्था और किसानों के शोषण के बीच का संबंध सामने आता है।
‘गोदान’ में प्रोफेसर मेहता किस विषय के प्रोफेसर थे?
- इतिहास
- अर्थशास्त्र
- दर्शनशास्त्र
- विज्ञान
Explanation:
- प्रोफेसर मेहता दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर थे।
- वे आदर्शवादी और प्रगतिशील विचारों वाले पात्र हैं तथा उपन्यास के वैचारिक पक्ष को मजबूत करते हैं।
डॉ. मालती के चरित्र की प्रमुख विशेषता क्या है?
- रूढ़िवादी दृष्टिकोण
- स्वतंत्र विचारों वाली महिला
- महाजनी मानसिकता
- सामंती सोच
Explanation:
- डॉ. मालती आधुनिक, शिक्षित और स्वतंत्र विचारों वाली महिला हैं।
- वे इंग्लैंड से शिक्षा प्राप्त कर डॉक्टर बनी हैं और आगे चलकर समाज सेवा की ओर उन्मुख होती हैं।
‘गोदान’ में मिस्टर खन्ना किस क्षेत्र से जुड़े थे?
- कृषि
- शिक्षा
- बैंकिंग और चीनी मिल उद्योग
- चिकित्सा
Explanation:
- मिस्टर खन्ना बैंक मैनेजर और चीनी मिल के मालिक थे।
- उनका चरित्र औद्योगिक और पूंजीवादी मानसिकता के प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत होता है।
CURRENT-AFFAIRS
Committee on Forestry (COFO 28) का आयोजन 28 सितंबर–2 अक्टूबर 2026 को कहाँ किया गया?
- पेरिस, फ्रांस
- लंदन, ब्रिटेन
- रोम, इटली
- जेनेवा, स्विट्जरलैंड
Explanation:
- Committee on Forestry (COFO 28) — भारत ने रोम, इटली में 28 सितंबर–2 अक्टूबर 2026 को आयोजित वन संबंधी समिति (COFO 28) में वन एवं लैंडस्केप पुनर्स्थापना प्रयास प्रस्तुत किए।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने PRAHAAR Counter-Terrorism Strategy के तहत किस पोर्टल को लॉन्च किया गया?
- Security Portal
- National Crime Portal
- Extradition Portal
- Defence Portal
Explanation:
- PRAHAAR Counter-Terrorism Strategy — अमित शाह ने Extradition Portal लॉन्च किया; 2019 से 36 देशों से 288 भगोड़ों को भारत वापस लाया गया।
World Heart Day 2026 कब मनाया गया?
- 28 सितंबर
- 29 सितंबर
- 30 सितंबर
- 1 अक्टूबर
Explanation:
- World Heart Day प्रत्येक वर्ष 29 सितंबर को मनाया जाता है।
- World Heart Day 2026 की थीम “Don’t Miss a Beat” थी।
- यह दिवस हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
World Heart Day 2026 की थीम क्या थी?
- Healthy Heart, Healthy Life
- Heart for All
- Don’t Miss a Beat
- Save Your Heart
Explanation:
- World Heart Day प्रत्येक वर्ष 29 सितंबर को मनाया जाता है।
- World Heart Day 2026 की थीम “Don’t Miss a Beat” थी।
- यह दिवस हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
India Energy Week 2027 का आयोजन किस शहर में होगा?
- नई दिल्ली
- मुंबई
- चेन्नई
- कोलकाता
Explanation:
- India Energy Week 2027 का आयोजन कोलकाता में होगा।
- यह पूर्वी भारत में पहली बार आयोजित होगा।
- India Energy Week 2027 का आयोजन 28 से 31 जनवरी 2027 तक किया जाएगा।
- यह ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित एक प्रमुख आयोजन है।
SpaceX Starship के 28 सितंबर 2026 के परीक्षण में कितने Starlink V3 उपग्रह लॉन्च किए गए?
- 16
- 20
- 26
- 36
Explanation:
- SpaceX Starship reusable spacecraft — 28 सितंबर 2026, 14वें परीक्षण में पहली बार कक्षा (Orbit) में पहुँचा और Starlink V3 के 26 उपग्रह लॉन्च किए; । लॉन्च साइट: Starbase, Texas।
बोधना शिवानंदन किस क्षेत्र से संबंधित हैं?
- बैडमिंटन
- शूटिंग
- शतरंज
- तैराकी
Explanation:
- बोधना शिवानंदन — 11 वर्षीय भारतीय मूल की ब्रिटिश शतरंज खिलाड़ी 2026 Chess Olympiad में तीसरा व अंतिम WGM Norm हासिल कर सबसे कम उम्र की Woman Grandmaster बनीं; आयोजन समरकंद, उज्बेकिस्तान।
बोधना शिवानंदन ने 2026 Chess Olympiad में कौन-सी उपलब्धि हासिल की?
- पहली भारतीय महिला ग्रैंडमास्टर बनीं
- सबसे कम उम्र की महिला ग्रैंडमास्टर बनीं
- सबसे कम उम्र की विश्व चैंपियन बनीं
- सबसे कम उम्र की पुरुष ग्रैंडमास्टर बनीं
Explanation:
- बोधना शिवानंदन — 11 वर्षीय भारतीय मूल की ब्रिटिश शतरंज खिलाड़ी 2026 Chess Olympiad में तीसरा व अंतिम WGM Norm हासिल कर सबसे कम उम्र की Woman Grandmaster बनीं; आयोजन समरकंद, उज्बेकिस्तान।
2026 Chess Olympiad का आयोजन कहाँ किया गया?
- ताशकंद, उज्बेकिस्तान
- बिश्केक, किर्गिस्तान
- समरकंद, उज्बेकिस्तान
- अस्ताना, कजाकिस्तान
Explanation:
- बोधना शिवानंदन — 11 वर्षीय भारतीय मूल की ब्रिटिश शतरंज खिलाड़ी 2026 Chess Olympiad में तीसरा व अंतिम WGM Norm हासिल कर सबसे कम उम्र की Woman Grandmaster बनीं; आयोजन समरकंद, उज्बेकिस्तान।
DEWS यानी Dengue Early Warning System डेंगू के लिए विकसित को किस संस्था के वैज्ञानिकों ने विकसित किया?
- Indian Council of Medical Research
- AIIMS
- Institute of Advanced Virology (IAV), Kerala
- DRDO
Explanation:
- DEWS — केरल के Institute of Advanced Virology (IAV) के वैज्ञानिकों ने Dengue Early Warning System (DEWS) विकसित किया।
Asian Games 2026 में महिला व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग में स्वर्ण पदक किसने जीता?
- आशिमा अहलावत
- मनीषा कीर
- नीरू धांडा
- विथ्या रामराज
Explanation:
- नीरू धांडा ने Asian Games 2026 में महिला व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग में स्वर्ण पदक जीता।
- ट्रैप शूटिंग निशानेबाजी की एक स्पर्धा है।
Asian Games 2026 में भारत की महिला 4×400 मीटर रिले टीम ने कौन-सा पदक जीता?
- रजत
- कांस्य
- स्वर्ण
- कोई पदक नहीं
Explanation:
- भारत की महिला 4×400 मीटर रिले टीम ने स्वर्ण पदक जीता।
- 4×400 मीटर रिले में चार धावक 400-400 मीटर की दूरी पूरी करते हैं।
भारतीय महिला ट्रैप टीम ने Asian Games 2026 में कौन-सा पदक जीता?
- स्वर्ण
- रजत
- कांस्य
- कोई पदक नहीं
Explanation:
- भारतीय महिला ट्रैप टीम ने रजत पदक जीता।
- टीम में नीरू धांडा, आशिमा अहलावत और मनीषा कीर शामिल थीं।
Asian Games 2026 में रजत पदक विजेता भारतीय महिला ट्रैप टीम में कौन शामिल थीं?
- नीरू धांडा, पीवी सिंधु और मनीषा कीर
- आशिमा अहलावत, मनु भाकर और नीरू धांडा
- नीरू धांडा, आशिमा अहलावत और मनीषा कीर
- मनीषा कीर, पूजा सिंह और आशिमा अहलावत
Explanation:
- भारतीय महिला ट्रैप टीम में नीरू धांडा, आशिमा अहलावत और मनीषा कीर शामिल थीं।
- इस टीम ने रजत पदक जीता।
नरेंद्र बरवाल ने Asian Games 2026 में किस भार वर्ग की बॉक्सिंग में कांस्य पदक जीता?
- 51 किग्रा
- 75 किग्रा
- 90 किग्रा
- +90 किग्रा
Explanation:
- नरेंद्र बरवाल ने पुरुष +90 किग्रा बॉक्सिंग में कांस्य पदक जीता।
- यह बॉक्सिंग की हेवीवेट श्रेणी से संबंधित स्पर्धा है।
Asian Games 2026 में पुरुष 5000 मीटर दौड़ में भारत के लिए कांस्य पदक किसने जीता?
- सावन बरवाल
- गुलवीर सिंह
- नरेंद्र बरवाल
- तजिंदरपाल सिंह तूर
Explanation:
- गुलवीर सिंह ने पुरुष 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता।
- 5000 मीटर एथलेटिक्स की लंबी दूरी की ट्रैक स्पर्धा है।
पूजा सिंह ने Asian Games 2026 में किस एथलेटिक्स स्पर्धा में कांस्य पदक जीता?
- लॉन्ग जंप
- पोल वॉल्ट
- हाई जंप
- ट्रिपल जंप
Explanation:
- पूजा सिंह ने महिला हाई जंप में कांस्य पदक जीता।
- हाई जंप में खिलाड़ी बिना सहारे के एक क्षैतिज बार के ऊपर से छलांग लगाता है।
- Asian Games 2026
- नीरू धांडा — महिला व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग में स्वर्ण पदक।
- भारत महिला 4×400 मीटर रिले टीम — स्वर्ण पदक।
- भारतीय महिला ट्रैप टीम — नीरू धांडा, आशिमा अहलावत और मनीषा कीर ने रजत पदक जीता।
- नरेंद्र बरवाल — पुरुष +90 किग्रा बॉक्सिंग में कांस्य पदक।
- गुलवीर सिंह — पुरुष 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक।
- पूजा सिंह — महिला हाई जंप में कांस्य पदक।
- भारत 4×100 मीटर मिश्रित रिले टीम — कांस्य पदक।
- भारत पुरुष 4×400 मीटर रिले टीम — कांस्य पदक।
- विथ्या रामराज — महिला 400 मीटर हर्डल्स में 54.75 सेकंड के समय के साथ कांस्य पदक; 42 वर्ष पुराना PT उषा का 55.42 सेकंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा।
भारत ने Asian Games 2026 में 4×100 मीटर मिश्रित रिले में कौन-सा पदक जीता?
- स्वर्ण
- रजत
- कांस्य
- कोई पदक नहीं
Explanation:
- भारत की 4×100 मीटर मिश्रित रिले टीम ने कांस्य पदक जीता।
- मिश्रित रिले में पुरुष और महिला धावक दोनों शामिल होते हैं।
- Asian Games 2026
- नीरू धांडा — महिला व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग में स्वर्ण पदक।
- भारत महिला 4×400 मीटर रिले टीम — स्वर्ण पदक।
- भारतीय महिला ट्रैप टीम — नीरू धांडा, आशिमा अहलावत और मनीषा कीर ने रजत पदक जीता।
- नरेंद्र बरवाल — पुरुष +90 किग्रा बॉक्सिंग में कांस्य पदक।
- गुलवीर सिंह — पुरुष 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक।
- पूजा सिंह — महिला हाई जंप में कांस्य पदक।
- भारत 4×100 मीटर मिश्रित रिले टीम — कांस्य पदक।
- भारत पुरुष 4×400 मीटर रिले टीम — कांस्य पदक।
- विथ्या रामराज — महिला 400 मीटर हर्डल्स में 54.75 सेकंड के समय के साथ कांस्य पदक; 42 वर्ष पुराना PT उषा का 55.42 सेकंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा।
भारत की पुरुष 4×400 मीटर रिले टीम ने Asian Games 2026 में कौन-सा पदक जीता?
- स्वर्ण
- रजत
- कांस्य
- कोई पदक नहीं
Explanation:
- भारत की पुरुष 4×400 मीटर रिले टीम ने कांस्य पदक जीता।
- इस स्पर्धा में टीम के चार सदस्य 400-400 मीटर दौड़ते हैं।
- Asian Games 2026
- नीरू धांडा — महिला व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग में स्वर्ण पदक।
- भारत महिला 4×400 मीटर रिले टीम — स्वर्ण पदक।
- भारतीय महिला ट्रैप टीम — नीरू धांडा, आशिमा अहलावत और मनीषा कीर ने रजत पदक जीता।
- नरेंद्र बरवाल — पुरुष +90 किग्रा बॉक्सिंग में कांस्य पदक।
- गुलवीर सिंह — पुरुष 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक।
- पूजा सिंह — महिला हाई जंप में कांस्य पदक।
- भारत 4×100 मीटर मिश्रित रिले टीम — कांस्य पदक।
- भारत पुरुष 4×400 मीटर रिले टीम — कांस्य पदक।
- विथ्या रामराज — महिला 400 मीटर हर्डल्स में 54.75 सेकंड के समय के साथ कांस्य पदक; 42 वर्ष पुराना PT उषा का 55.42 सेकंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा।
विथ्या रामराज ने Asian Games 2026 में महिला 400 मीटर हर्डल्स में कौन-सा पदक जीता?
- स्वर्ण
- रजत
- कांस्य
- कोई पदक नहीं
Explanation:
- विथ्या रामराज ने महिला 400 मीटर हर्डल्स में कांस्य पदक जीता।
- उन्होंने यह दौड़ 54.75 सेकंड में पूरी की।
- Asian Games 2026
- नीरू धांडा — महिला व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग में स्वर्ण पदक।
- भारत महिला 4×400 मीटर रिले टीम — स्वर्ण पदक।
- भारतीय महिला ट्रैप टीम — नीरू धांडा, आशिमा अहलावत और मनीषा कीर ने रजत पदक जीता।
- नरेंद्र बरवाल — पुरुष +90 किग्रा बॉक्सिंग में कांस्य पदक।
- गुलवीर सिंह — पुरुष 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक।
- पूजा सिंह — महिला हाई जंप में कांस्य पदक।
- भारत 4×100 मीटर मिश्रित रिले टीम — कांस्य पदक।
- भारत पुरुष 4×400 मीटर रिले टीम — कांस्य पदक।
- विथ्या रामराज — महिला 400 मीटर हर्डल्स में 54.75 सेकंड के समय के साथ कांस्य पदक; 42 वर्ष पुराना PT उषा का 55.42 सेकंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा।
